Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस

Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।

करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं

दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।

अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी

वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।

हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव

बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।

सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।

ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर

ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।

इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।

सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।

बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट

बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।

हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर

आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।

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कॉपर को लेकर एक खास जोखिम

अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Copper News: कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बिग अलर्ट, कॉपर में मई के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

Copper News: शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ ही है, कमोडिटी मार्केट में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। निफ्टी (Nifty) वीकली लेवल पर लगातार आठ हफ्ते कमजोर हुआ है और इतनी लंबी गिरावट 25 साल बाद दिखी है। अब कमोडिटी मार्केट में बात करें तो कॉपर जो धड़ाधड़ ऊपर भाग रहा था, अब मई के बाद से सबसे बड़ी वीकली गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार को डॉलर में गिरावट के साथ लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसके फ्यूचर्स प्रति टन $14,300 प्रति टन से ऊपर चले गए, लेकिन फिर भी वीकली लेवल पर हफ्ते की समाप्ति पर इसमें लगभग 2% की गिरावट रहने के आसार हैं।

क्यों फीका पड़ा Copper?

एनर्जी की लागत में बढ़ोतरी और चीन के लड़खड़ाते इंडस्ट्रियल सेक्टर की वजह से मांग कम होने के डर से कॉपर को झटका लगा। एनर्जी की लागत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है, जिससे यह उबल पड़ा और कॉपर को भी इसकी आंच महसूस हुई। इसके अलावा चीन में इंडस्ट्रियल कमजोरी के आंकड़ो ने भी कॉपर पर दबाव बनाया।

अभी कितना टूटेगा भाव?

चीन में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज की कमजोर और कच्चे तेल में उबाल ने कॉपर को नरम किया है लेकिन सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊपरी लेवल पर बनी हुई है यानी कि इसमें अधिक गिरावट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। रिफाइंड मेटल पर अमेरिकी टैरिफ के डर से ट्रेडर्स ने लाखों टन मेटल अमेरिका भेजा है, जिससे दूसरी जगहों पर कमी का खतरा पैदा हो गया है। चिली की एक बड़ी खदान में भी हड़ताल चल रही है।

बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में जिक्र किया है कि जब तक पश्चिमी एशिया में युद्ध जारी रहेगा, बेस मेटल्स में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है लेकिन एल्युमीनियम, कॉपर और निकेल की सप्लाई में कमी से कीमतों को सपोर्ट मिलना चाहिए।

अभी अमेरिका में सितंबर महीने का रोजगार डेटा आना है, जिसमें मार्केट का अनुमान है कि हायरिंग में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। यह आंकड़ा आज शुक्रवार को आना है। इसमें सुस्ती का असर ये होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की संभावना फीकी होगी, जो कॉपर के लिए पॉजिटिव हो सकता है।

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Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Copper Price: कॉपर की कीमतों में गिरावट, 2 हफ्ते के निचले स्तर पर फिसला भाव

Copper Price: इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर के दाम गिरे। कॉपर वायदा $6.55/पाउंड से नीचे फिसला। कॉपर का भाव करीब 2 हफ्तों के निचले स्तर पर फिसला। ऊंची कीमतों से चीन में मांग कमजोर बना हुआ। चीन में कॉपर की खरीद में गिरावट आई।

यांगशान प्रीमियम में भी गिरावट आई और यांगशान प्रीमियम घटकर 96 डॉलर प्रति टन रहा। पिछले महीने प्रीमियम 115 डॉलर प्रति टन था। Codelco ने उत्पादन लक्ष्य घटाया है। US कॉपर टैरिफ की चिंता बरकरार है। टैरिफ से कॉपर US वेयरहाउस पहुंच रहा है।

क्या है यांगशान प्रीमियम?

यांगशान प्रीमियम LME भाव से ऊपर का प्रीमियम है। चीन में इंपोर्टेड कॉपर की अतिरिक्त लागत का संकेत दिया है।

चीन में यांगशान प्रीमियम का असर

प्रीमियम बढ़े तो कॉपर की मांग मजबूत मानी जाती है। प्रीमियम घटे तो कॉपर की मांग कमजोर मानी जाती है। इंपोर्टेड कॉपर के लिए खरीदार कम दाम देना चाहते हैं। खरीदार पहले जितना प्रीमियम देने को तैयार नहीं हैं। ऊंची कॉपर कीमतों ने चीन में मांग को कमजोर किया।

यांगशान प्रीमियम का गणित

यांगशान प्रीमियम का गणित पर नजर डालें तो LME पर $10,000/टन का अनुमानित भाव है। यांगशान प्रीमियम $96/टन और चीन में इंपोर्टेड कॉपर का अनुमानित भाव $10,096/टन है।

कैसे रहा कॉपर का चाल

इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते कॉपर की कीमतों में 2 फीसदी की गिरावट आई। वहीं 1 महीने में 3 फीसदी चढ़ा जबकि जनवरी 2026 में अब तक कॉपर में 15 फीसदी चढा। वहीं 1 साल में इसमें 46 फीसदी की तेजी देखने को मिली।

MCX पर कॉपर की चाल पर नजर डालें 1 हफ्ते कॉपर की कीमतों में 1 फीसदी की गिरावट आई। वहीं 1 महीने में 5 फीसदी चढ़ा जबकि 3 महीने में 1 फीसदी गिरा। वहीं 6 महीने में इसमें 13 फीसदी की तेजी आई। इस साल अब तक 8 फीसदी की तेजी आई।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।