टाटा की कंपनी की फ्लोटिंग सोलर सेगमेंट में एंट्री, नॉर्वे की कंपनी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में करेगी टेस्टिंग

Tata Power Floating Solar: टाटा पावर ने नॉर्वे की रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी ओशन सन के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां भारत में फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी का टेस्ट करेंगी।

इसके लिए महाराष्ट्र के मुलशी जलाशय में करीब 300 kWp का पायलट प्रोजेक्ट लगाया जाएगा। यह जलाशय टाटा पावर का है।

फ्लोटिंग सोलर क्या होता है

फ्लोटिंग सोलर यानी पानी की सतह पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल होते हैं। इसमें जमीन पर पैनल लगाने के बजाय किसी जलाशय, झील या तालाब की सतह पर पैनल लगाए जाते हैं।

इससे जमीन की जरूरत कम होती है। और खाली पड़ी पानी की सतह का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

पायलट प्रोजेक्ट में क्या जांच की जाएगी?

इस पायलट में टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस देखी जाएगी। साथ ही इसकी भरोसेमंद क्षमता और लागत भी जांची जाएगी। कंपनियां यह भी देखेंगी कि भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। इसके लिए इसकी तुलना मौजूदा फ्लोटिंग सोलर सिस्टम से की जाएगी।

तुलना में बिजली उत्पादन, क्षमता का इस्तेमाल और इंस्टॉलेशन का समय देखा जाएगा। ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जरूरत, लागत और पूरे प्रोजेक्ट की कारोबारी व्यवहार्यता भी जांची जाएगी।

बाकी फ्लोटिंग सोलर से अलग कैसे?

आमतौर पर फ्लोटिंग सोलर सिस्टम में पैनल को पानी पर तैराने के लिए पॉन्टून का इस्तेमाल होता है। कई पॉन्टून को आपस में जोड़कर एक स्ट्रक्चर बनाया जाता है। ओशन सन की टेक्नोलॉजी इससे अलग है। इसमें सोलर पैनल एक पतली हाइड्रो-इलास्टिक मेम्ब्रेन पर लगाए जाते हैं। यह मेम्ब्रेन सीधे पानी की सतह पर तैरती है।

पायलट से मिलने वाले डेटा से इस टेक्नोलॉजी की असली क्षमता समझने में मदद मिलेगी। इसके बाद भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावना देखी जाएगी।

भारत में 102 GW से ज्यादा क्षमता

टाटा पावर के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के अनुमान के अनुसार भारत में फ्लोटिंग सोलर की क्षमता 102 GWp से ज्यादा है।

टाटा पावर के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने कहा कि इनोवेशन कंपनी के लिए काफी अहम है। कंपनी क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को तेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ओशन सन के साथ साझेदारी से ग्लोबल टेक्नोलॉजी को भारत में लाकर उसकी वास्तविक परिस्थितियों में जांचने का मौका मिलेगा।

इंडिया-EFTA समिट में हुआ समझौता

टाटा पावर और ओशन सन के बीच समझौता दूसरे इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट के दौरान हुआ। इसमें भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

टाटा पावर का शेयर 7 अक्टूबर को 344.80 रुपये पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 1.95% की गिरावट रही।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Q1 Results: घाटे से मुनाफे में लौटी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, रेवेन्यू भी डबल; शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Clean Max Enviro Energy Solutions ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 107% बढ़कर ₹832 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹402.3 करोड़ था। कंपनी इस तिमाही में घाटे से निकलकर ₹55 करोड़ के मुनाफे में आ गई। पिछले साल इसी अवधि में उसे ₹16.6 करोड़ का घाटा हुआ था।

Clean Max का एडजस्टेड EBITDA 74% बढ़कर ₹494 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹283.9 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन 70.6% से घटकर 50% रह गया।

रिकॉर्ड क्षमता जोड़ी

जून तिमाही में Clean Max ने 0.53 गीगावाट (GW) की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता शुरू की। यह कंपनी के इतिहास में एक तिमाही में जोड़ी गई सबसे बड़ी क्षमता है। इसके साथ ही जून के अंत तक कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्टेड रिन्यूएबल पावर सेल्स क्षमता 6 GW पहुंच गई, जो मार्च के अंत में 5.7 GW थी।

वहीं, ऑपरेशनल रिन्यूएबल पावर क्षमता बढ़कर 3,493 मेगावाट (MW) हो गई। पिछली तिमाही में यह 3,088 MW थी। इसमें 2,442 MW सोलर और 646 MW विंड क्षमता शामिल है।

आगे भी मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

Clean Max ने FY28 के लिए कम से कम ₹3,000 करोड़ EBITDA का लक्ष्य बरकरार रखा है। वहीं, FY27 में कम से कम 1.5 GW नई रिन्यूएबल क्षमता शुरू करने का टारगेट भी दोहराया है।

कंपनी ने बताया कि वह पहली तिमाही में ही इस लक्ष्य का करीब 40% हासिल कर चुकी है। फिलहाल 2.6 GW की कॉन्ट्रैक्टेड क्षमता पर काम चल रहा है।

Data और AI सेक्टर पर बड़ा दांव

Clean Max के मुताबिक, भारत के कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) नॉन-डेटा सेंटर रिन्यूएबल एनर्जी बाजार में उसकी करीब 14% हिस्सेदारी है। वहीं, उसकी कुल कॉन्ट्रैक्टेड क्षमता का 42% यानी 2.5 GW हिस्सा Data और AI ग्राहकों से जुड़ा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में यही उसकी ग्रोथ का बड़ा आधार बनेगा।

Clean Max के शेयरों का हाल

Clean Max Enviro Energy Solutions का शेयर शुक्रवार को को NSE पर 2.48% की बढ़त के साथ ₹1,341.40 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसका रिटर्न 54.63% रहा है। कंपनी का मार्केट कैप 15.73 हजार करोड़ रुपये है। यह कंपनी इसी साल मार्च में मार्केट में लिस्ट हुई थी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पानी पर तैरेंगे सोलर पैनल! जानिए क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना और किसे मिलेगा फायदा

Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana – PM-SSY: देश में रीन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने और जल निकायों का सही इस्तेमाल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) यानी पानी पर तैरने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स को डेवलप करना है। सरकार ने इस योजना के लिए कुल 5070 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है।

क्या है योजना का लक्ष्य और क्षमता?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5000 मेगावाट (MW) क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को विकसित करने का लक्ष्य बनाया गया है। इन परियोजनाओं के साथ कम से कम दो घंटे की न्यूनतम भंडारण क्षमता वाली एनर्जी स्टोरेज सिस्टम होगी। यानी कुल 10,000 MWh की स्टोरेज क्षमता जोड़ी जाएगी। इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी जबकि वित्तीय सहायता का भुगतान वित्तीय वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा। अभी भारत में फ्लोटिंग सोलर पीवी क्षमता केवल सिर्फ 700 मेगावाट है। इस योजना से इसमें 5000 मेगावाट की बड़ी वृद्धि होगी।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी द्वारा हाल ही में किए गए एक आकलन के मुताबिक देश में जलाशयों और दूसरे इनलैंड वॉटर बॉडीज में करीब 102,18 GWp फ्लोटिंग सोलर की क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

कितना मिलेगा वित्तीय अनुदान?

योजना को सफल बनाने और इससे जुड़े जोखिम कम करने के लिए सरकार वित्तीय मदद भी देगी। एलिजिबल फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक चालू होने के बाद 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा परियोजना विकास के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी फिजिबिलिटी स्टडीज, बाथिमेट्री और हाइड्रोग्राफी एनालिसिस, पर्यावरणीय स्टडी और दूसरी तैयारियों के लिए प्रति प्रोजेक्ट 50 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।

किसे और क्या-क्या मिलेगा फायदा?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के फायदे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगे। ये परियोजनाएं मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का पूरा फायदा उठाने का मौका देंगी। इससे लैंड रिसोर्स के लिए होने वाली मारामारी खत्म होगी। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के इंटिग्रेशन से पावर ग्रिड की विश्वसनीयता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस योजना से सालाना लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी। परियोजना वैल्यू चेन में करीब 16000 से 17000 फुल टाइम जॉब के मौके क्रिएट होंगे। आपको बता दें कि यह योजना फ्लोटेशन सिस्टम के साथ-साथ सोलर पीवी सेल्स, मॉड्यूल्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे पूरे वैल्यू चेन के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा देगी।

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