AI Stocks: एआई शेयरों में कमाई की रफ्तार घटने का अनुमान, Jefferies ने निवेशकों को दी बड़ी सलाह

AI Stocks: दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस हफ्ते भारी बिकवाली देखने को मिली। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के कारोबार पर सवाल उठने और बढ़ते कर्ज की चिंता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसका असर खास तौर पर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। अब ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने निवेशकों को AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने की सलाह दी है।

Jefferies की ताजा Greed and Fear रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो साल में AI कंपनियों की कमाई बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो सकती है। रिपोर्ट का शीर्षक Diversifying Beyond AI है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में AI के परे जाकर विविधता लाना।

AI कंपनियों की कमाई में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान?

जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, MSCI AC World Index में शामिल AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी का अनुमान 2026 में करीब 100% है। हालांकि, 2027 में यह घटकर 30% और 2028 में 22% रह सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन कंपनियों की कमाई उनके महंगे शेयरों की कीमत को सही ठहरा पाएगी।

Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजी देश पेरामुनेतिलके (Desh Peramunetilleke) ने कहा कि अब निवेशकों के लिए AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में निवेश फैलाने का समय है।

AI शेयरों का वैल्यूएशन दूसरी कंपनियों से ज्यादा

Jefferies के मुताबिक, वैश्विक AI शेयरों का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 23 गुना है। वहीं, AI से बाहर की कंपनियों का यह रेशियो करीब 13 गुना है। यानी निवेशक AI कंपनियों के शेयरों के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि उनकी कमाई बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है।

उभरते बाजारों में भी AI शेयरों की तेजी कमजोर हुई है। जून 2026 तक के एक साल में इन शेयरों में 81% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन साल की दूसरी छमाही में इनसे मिलने वाले रिटर्न की रफ्तार घटी। इस दौरान AI से बाहर के कई क्षेत्रों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।

सेमीकंडक्टर शेयरों पर नजर

Jefferies के पोर्टफोलियो में TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इनका जॉइंट वेटेज पोर्टफोलियो में 16% है, जबकि MSCI AC Asia ex-Japan Index में यह 32.1% है।

Jefferies का मानना है कि AI पर खर्च जारी रहा तो Samsung Electronics और SK Hynix के शेयर जून के उच्च स्तर को दोबारा छू सकते हैं। फिर भी रिपोर्ट ने चेताया है कि सेमीकंडक्टर शेयरों में आसान कमाई का दौर काफी हद तक पीछे छूट सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए AI के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाशना जरूरी हो गया है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Semiconductor Mission: फैब के बाद अब असली चुनौती, भारत कैसे बनाएगा पूरी चिप सप्लाई चेन?

Semiconductor Mission: भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब अगले और ज्यादा चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच गया है। देश में फैब और OSAT यूनिट लगाने के लिए निवेश जुटाने के बाद अब इनके आसपास पूरा इकोसिस्टम तैयार करना बड़ी चुनौती है। सेमीकंडक्टर ग्रेड मटेरियल, उपकरण, लॉजिस्टिक्स, टैलेंट, R&D और भरोसेमंद बिजली… इन सभी की मजबूत सप्लाई चेन जरूरी होगी।

Moneycontrol ने Tata Electronics, NXP Semiconductors, Nippon Express, और Infineon के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स के साथ SEMI से बातचीत की। सभी के संकेत एक ही दिशा में हैं… फैब लगाना सिर्फ शुरुआत है।

Tata Electronics बना रही सप्लायर नेटवर्क

Tata Electronics गुजरात के धोलेरा में भारत की पहली कमर्शियल-ग्रेड सिलिकॉन फैब और असम में OSAT यूनिट लगा रही है। कंपनी ने इक्विपमेंट, मटेरियल, केमिकल और गैस के लिए 16 MoU किए हैं। धोलेरा प्रोजेक्ट से 450 से ज्यादा पार्टनर्स जुड़े हैं और 363 वेंडर पार्क बनाने की योजना है।

Tata Electronics के CEO रणधीर ठाकुर ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी अगले पांच वर्षों में 30 अरब डॉलर की कंपनी बनने की राह पर है। कंपनी Nexperia और जापानी कंपनियों के साथ भी सप्लाई चेन और मटेरियल से जुड़े अवसरों पर काम कर रही है।

इक्विपमेंट और मटेरियल में ग्लोबल कंपनियों की एंट्री

SEMI के CEO अजित मनोका के मुताबिक, अगले तीन से पांच साल भारत के सप्लायर बेस के लिए अहम होंगे। देश को सेमीकंडक्टर ग्रेड केमिकल, मटेरियल और उपकरण बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी।

ASML ने भारत में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वहीं Applied Materials अगले 10 साल में 5 अरब डॉलर निवेश करने और R&D क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी का India Validation Center देश का एकमात्र 300-mm क्लीनरूम है।

Fujifilm धोलेरा में करीब 800 करोड़ रुपये निवेश कर रही है। कंपनी भारतीय केमिकल कंपनियों के साथ मिलकर चिप निर्माण के जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्स को डेवलप करने पर काम कर रही है।

R&D और OSAT पर भी फोकस

Renesas भारत में 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ अब मैन्युफैक्चरिंग से भी जुड़ रही है। कंपनी CG Power के CG Semi के साथ साणंद फैसिलिटी पर काम कर रही है। यहां उत्पादन 2027 की चौथी तिमाही या 2028 की शुरुआत में शुरू होने का लक्ष्य है।

NXP भी बड़ी संख्या में घरेलू OSAT कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी के ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब एक-तिहाई भारत में है।

लॉजिस्टिक्स और बिजली भी अहम

Nippon Express को उम्मीद है कि भारत क्षेत्रीय और आगे चलकर ग्लोबल चिप लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। कंपनी चिप निर्माताओं के करीब लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी डेवलप करने की योजना बना रही है।

वहीं, Infineon के CEO Jochen Hanebeck ने भरोसेमंद पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को अहम बताया है। सरकार का करीब ₹1.27 लाख करोड़ वाला Semicon 2.0 कार्यक्रम अब फैब और पैकेजिंग से आगे बढ़कर उपकरण, मटेरियल, डिजाइन, R&D और पूरे इकोसिस्टम पर फोकस कर रहा है।

भारत ने शुरुआती बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट हासिल कर लिए हैं। अब असली परीक्षा यह है कि इनके आसपास सप्लायर, उपकरण निर्माता, मटेरियल कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रिसर्च सेंटर कितनी तेजी से तैयार होते हैं।

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चिप स्टॉक्स क्रैश होंगे? अल्टमैन और मस्क की बात से निवेशकों की चिंता बढ़ी

AI की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की बात ने टेक कंपनियों के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। इसका असर खासकर चिप कंपनियों और AI से जुड़े शेयरों पर दिख सकता है। हालांकि, बाजार के जानकारों को नहीं लगता कि यह दबाव बहुत लंबा चलेगा।

चिप, बिजली और कंप्यूटिंग पावर की मांग अभी भी काफी मजबूत है। कई जगह मांग सप्लाई से ज्यादा है। ऐसे में शेयरों में कमजोरी आती भी है तो वह थोड़े समय की हो सकती है।

AI कंपनियां क्यों मांग रही सावधानी?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Anthropic के CEO Dario Amodei ने शनिवार को AI डेवलपमेंट की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की अपील की। उन्होंने ज्यादा सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई। कंपनी स्वतंत्र थर्ड पार्टी से अपने AI मॉडल की जांच भी कराएगी। OpenAI के CEO सैम अल्टमैन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। xAI के एलन मस्क ने भी कहा कि Dario सही कह रहे हैं।

इस खबर के बाद निवेशकों की नजर अब AI कंपनियों के खर्च और कमाई पर है। सवाल है कि अगर नए AI मॉडल धीरे बनेंगे तो चिप कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा या नहीं।

टेक शेयर पहले से दबाव में

AI पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। निवेशकों को अब चिंता है कि क्या इतनी बड़ी रकम से उतनी कमाई होगी। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, जून के रिकॉर्ड स्तर से Nasdaq 100 करीब 4% नीचे आ चुका है। अमेरिकी चिप शेयरों का इंडेक्स करीब 14% गिरा है। एशियाई टेक शेयर भी करीब 8% नीचे हैं। यानी AI से जुड़े शेयरों पर दबाव पहले से बना हुआ है।

AI की रफ्तार धीमी हुई तो फायदा भी

कुछ निवेशक इसे बुरी खबर नहीं मान रहे। उनका कहना है कि AI मॉडल धीरे विकसित होंगे तो कंपनियों को पहले से बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर से कमाई करने का ज्यादा समय मिलेगा। Global X Management के Billy Leung के मुताबिक, AI की रफ्तार कम होने का मतलब यह नहीं है कि चिप और पावर पर खर्च रुक जाएगा। बल्कि कंपनियां पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

चिप कंपनियों को क्यों राहत मिल सकती है?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कम नहीं हो रहा है। कंप्यूटिंग पावर की जरूरत भी बनी हुई है। इसके अलावा AI की सुरक्षा के लिए साइबर सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग पर खर्च बढ़ सकता है। Saxo Markets की Charu Chanana के मुताबिक, मेमोरी, नेटवर्किंग, कूलिंग और पावर इक्विपमेंट कंपनियों को पहले से चल रहे प्रोजेक्ट से सहारा मिल सकता है।

इसलिए AI डेवलपमेंट की रफ्तार पर बहस जरूर बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग खत्म होने वाली है। उल्टा, ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार AI के लिए नया खर्च भी शुरू हो सकता है।

NSE IPO में पैसा लगाएं या नहीं? जानिए ब्रोकरेज की राय, जोखिम और लेटेस्ट GMP

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विटल इलेक्टॉनिक्स को खरीदेगी RRP Electronics, ऑर्डर में जुड़ेंगे ₹90 करोड़

RRP Electronics Ltd ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Vital Electronics Pvt Ltd के रणनीतिक अधिग्रहण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) और टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी का कहना है कि यह कदम भारत में एक इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

सेमीकंडक्टर से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक बढ़ेगा कारोबार

RRP Electronics का दावा है कि इस अधिग्रहण के बाद उसकी OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) और ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) क्षमताएं और मजबूत होंगी। कंपनी अब सिर्फ सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के निर्माण में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी।

Vital Electronics क्या करती है?

Vital Electronics एक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी है। कंपनी Printed Circuit Board Assembly (PCBA), Surface Mount Technology (SMT), इलेक्ट्रोमैकेनिकल असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, स्ट्रैटेजिक सोर्सिंग और बॉक्स-बिल्ड सॉल्यूशंस जैसी एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं देती है।

ग्राहकों को मिलेगा वन-स्टॉप सॉल्यूशन

कंपनी के मुताबिक, अधिग्रहण के बाद RRP सेमीकंडक्टर पैकेजिंग से लेकर पूरी तरह तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट तक की सेवाएं दे सकेगी। उसका कहना है कि Vital Electronics उसके बनाए चिप्स को PCB पर लगाएगी और डिफेंस, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई सेक्टर के लिए तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाएगी।

ऑर्डर बुक और ग्रोथ पर रहेगा फोकस

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के बाद उसकी ऑर्डर बुक में करीब 90 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दिखाई दे रहा है। साथ ही अगले तीन वर्षों में कारोबार की ग्रोथ को लेकर भी कंपनी ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

चार चरणों में होगा अधिग्रहण

RRP Electronics ने बताया कि वह चार चरणों में Vital Electronics की 100% हिस्सेदारी खरीदेगी। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक 50% हिस्सेदारी और मार्च 2028 तक पूरा अधिग्रहण करने का है। हालांकि, यह तय माइलस्टोन पूरे होने और जरूरी नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा। अधिग्रहण पूरा होने के बाद कंपनी, जरूरी मंजूरियां मिलने पर, Vital Electronics का विलय RRP Group की किसी लिस्टेड कंपनी में भी कर सकती है।

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दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Korea effect on US-Japan: यूके, अमेरिका और जापान के फंड मैनेजर्स अब ट्रेडिंग शुरू होने से पहले दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट पर एक नजर डाल रहे हैं। एक समय था कि दक्षिण कोरिया का बाजार लंदन, न्यूयॉर्क और टोक्यो के फंड मैनेजर्स के लिए बहुत अहम नहीं था लेकिन अब $4 लाख करोड़ का इक्विटी मार्केट एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रहा है। दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में उतार-चढ़़ाव अब दुनिया भर की चिप कंपनियों के शेयरों पर असर डाल रही है। खास बात ये है कि एसके हीनिक्स (SK Hynix) की अमेरिका में हाल ही लिस्टिंग हुई जिससे कोरिया का असर अमेरिका तक पहुंच गया और अब कोरिया की सेंटीमेंट-आधारित ट्रेडिंग अब चौबीसों घंटे ग्लोबल एआई स्टॉक्स की चाल तय कर रही है।

दक्षिण कोरिया की वॉचलिस्ट में एंट्री

निवेश के तौर-तरीके बदल रहे हैं। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट के एशिया मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ने अपनी 14 साल की नौकरी में पहली बार कंपनी की ग्लोबल टीम के सामने कोरिया पर एक प्रेजेंटेशन दिया। जापानी ट्रेडर् दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स को अपनी वॉच लिस्ट में शामिल कर रहे हैं। पाइनब्रिज इन्वेस्टमेंट्स के लंदन-स्थित पोर्टफोलियो मैनेजर हनी रेढा (Hani Redha) का कहना है कि अब सभी कोरियाई निवेशक हैं। हनी का कहना है कि उनके दिन की शुरुआत अब कोरियाई बाजार में एआई ट्रेडिंग को देखने से होती है। जब कोरियाई बाजार बंद हो जाता है तो उनका ध्यान अमेरिकी मार्केट में एसके हीनिक्स के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स और कोरिया से जुड़े ईटीएफ (ETFs) पर चला जाता है। हनी के मुताबिक यह लगभग 24 घंटे नजर रखने जैसा है।

वैश्विक बाजारों पर गहरा असर

कोरियाई मार्केट का अमेरिका में असर पिछले हफ्ते साफ तौर पर दिखा। एआई की मांग को लेकर संदेहों पर कोस्पी में करीब 9% की गिरावट आई तो इसकी आंच अमेरिकी मार्केट तक फैल गई। एसके हीनिक्स के अमेरिकी लिस्टेड स्टॉक्स में 9.3% की फिसलन आई जिससे दूसरी बड़ी चिप कंपनियों के शेयर भी धड़ाम हो गए। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कोरिया और अमेरिका के बीच गहरे संबंध अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगे हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरिया के मार्केट इंडेक्स कोस्पी और अमेरिकी मार्केट के इंडेक्स नास्डाक 100 के बीच 60-दिनों का कोरिलेशन बढ़कर 0.46 पर पहुंच गया जोकि दो साल में सबसे अधिक है और पांच साल के औसत 0.16 से करीब तीन गुना अधिक है।

कोरियाई स्टॉक्स का असर मार्केट की गिरावट में और दिखता है। ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार 7 जुलाई को कोरियाई बाजार में कमजोरी के दौरान कोस्पी के प्रति नैस्डैक 100 इंडेक्स की संवेदनशीलता साल 1990 के बाद से सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। इसी तरह MSCI वर्ल्ड इंडेक्स के लिए भी यह पैमाना इस महीने की शुरुआत में चार साल के हाई लेवल पर पहुंच गया।

न्यूयॉर्क में टाइग्रेस फाइनेंशियल पार्टनर्स के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर इवान फीनसेथ का कहना है कि कोरिया असल में नैस्डैक और एसओएक्स जैसे ही उतार-चढ़ाव वाले इकोसिस्टम का हिस्सा बन गया है। उनका कहना है कि एसके हीनिक्स, सैमसंग और कोस्पी अब अमेरिकी एआई और चिप से जुड़े रिस्क के लिए प्री-मार्केट इंडिकेटर का काम कर रहे हैं।

कोस्पी और जापान के निक्केई 225 के बीच भी कोरिलेशन यानी संबंध तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से ऑर्टस एडवाइजर्स के जापान इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड एंड्रयू जैक्सन ने इस साल की शुरुआत में बारीकी से नजर रखने के लिए कोस्पी का चार्ट शामिल किया। उन्होंने यह काम 20 साल से अधिक समय में पहली बार किया है। एचएसबीसी होल्डिंग्स में एशिया पैसिफिक के इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड हेराल्ड वैन डेर लिंडे का कहना है कि आजकल सभी मीटिंग में कोरिया पर चर्चा होती है। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट में एशिया पैसिफिक के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ताई हुई का भी कहना है कि इस साल से पहले अपनी ग्लोबल टीम के सामने उन्होंने कोरिया के बारे में कोई प्रेजेंटेशन नहीं दिया था।”

बना रहेगा कोरिया का वैश्विक मार्केट पर असर?

अब सवाल उठता है कि क्या दक्षिण कोरिया अब वैश्विक मार्केट के लिए अहम इंडिकेटर बना रहेगा। इसे लेकर यूबीएस सुमी ट्रस्ट वेल्थ मैनेजमेंट में जापान इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट चिसा कोबायाशी (Chisa Kobayashi) का कहना है कि जब तक एआई रैली जारी है, दक्षिण कोरियाई मार्केट अहम बना रहेगा। हालांकि उनका कहना है कि मार्केट में लेवरेज से जुड़े उतार-चढ़ाव और कम मेच्योर मार्केट की वजह से ट्रेडिंग मुश्किल हो जाती है क्योंकि यह फंडामेंटल्स से उल्टी दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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Semiconductor Mission 2.0: सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकंडक्टर स्कीम, इन 10 स्टॉक्स को मिल सकता है तगड़ा फायदा

Semiconductor Mission 2.0: केंद्र सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM 2.0) के लिए ₹1.27 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। इस बार सरकार का फोकस सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने पर नहीं है। अब चिप डिजाइन, मशीनें, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च और पूरी सप्लाई चेन को भारत में विकसित किया जाएगा।

ऐसे में कई भारतीय कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं किन 10 कंपनियों पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

Tata Electronics

टाटा ग्रुप भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब लगाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी पहले से इस सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ISM 2.0 से इसके विस्तार को और रफ्तार मिल सकती है।

CG Power & Industrial Solutions

CG Power सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही है। कंपनी की चिप मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को सरकार की नई नीति से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology पहले ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक्टिव है। सरकार की ATMP और OSAT पर बढ़ती फोकस से कंपनी को फायदा हो सकता है।

Tata Elxsi

टाटा ग्रुप की Tata Elxsi चिप डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी में काम करती है। ISM 2.0 में डिजाइन कंपनियों को बढ़ावा मिलने से इसके लिए नए अवसर बन सकते हैं।

Dixon Technologies

Dixon भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होने का फायदा इसे भी मिल सकता है।

Syrma SGS Technology

Syrma SGS इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB असेंबली में काम करती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार से कंपनी का कारोबार बढ़ सकता है।

MosChip Technologies

MosChip चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग सेवाएं देती है। सरकार का डिजाइन और IP डेवलपमेंट पर जोर कंपनी के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

HCL Technologies

HCLTech चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग R&D सेवाओं में वैश्विक कंपनियों के साथ काम करती है। भारत में डिजाइन इकोसिस्टम बढ़ने से नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं।

Tata Consultancy Services (TCS)

टटा ग्रुप यह आईटी कंपनी TCS सेमीकंडक्टर, AI और इंजीनियरिंग सेवाओं में दुनिया की कई चिप कंपनियों के साथ काम करती है। घरेलू निवेश बढ़ने से इस कारोबार में भी तेजी आ सकती है।

Cyient

Cyient सेमीकंडक्टर डिजाइन, एम्बेडेड इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन सेवाएं देती है। नई नीति से इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

यह समझना जरूरी है कि सरकार ने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया है। इस लिस्ट में कंपनियां उनके मौजूदा कारोबार और सेमीकंडक्टर सेक्टर में मौजूदगी के आधार पर चुनी गई हैं।

ISM 2.0 से इन्हें नए ऑर्डर, निवेश या साझेदारी के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों को तुरंत या समान रूप से फायदा होगा। निवेश का फैसला हमेशा कंपनी के नतीजों, वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाओं को देखकर ही करना चाहिए।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

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दक्षिण कोरिया का बाजार आखिर एक महीने से कम समय में क्यों 20% क्रैश कर गया?

दक्षिण कोरिया के बाजार का प्रमुख सूचकांक जून में ऑल-टाइम हाई पर था। यह इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया था। लेकिन, एक महीने के अंदर बाजार आसमान से जमीन पर आ गया। 8 जुलाई को कोस्पी 5 फीसदी से ज्यादा गिरा। 7 जुलाई को भी यह 8 फीसदी तक गिरा था। इस तरह 22 जून के अपने ऑल-टाइम हाई से 20 फीसदी क्रैश करने के बाद यह बेयर मार्केट में प्रवेश कर गया है।

इन दो शेयरों में गिरावट ने बढ़ाया दबाव

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट की वजह आर्टफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बड़ी बिकवाली है। 8 जुलाई को Samsung Electronics का शेयर 6.3 फीसदी फिसला। SK Hynix के शेयरों में भी 5.7 फीसदी गिरावट आई। बीते कुछ हफ्तों में इन दोनों कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। दोनों की कोस्पी में करीब 60 फीसदी वेटेज है।

SK Hynix बीते एक साल में 636% उछला

आर्टफिशियल इंटेलिजेंस के शेयरों पर दांव लगाने वाले निवेशकों के लिए दक्षिण कोरिया का बाजार पंसदीदा डेस्टिनेशन बन गया था। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से कई कंपनियों खासकर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयर आसमान में पहुंच गए। Samsung Electronics का शेयर बीते एक साल में 351 फीसदी उछला है। इसका मतलब है कि इसने सिर्फ एक साल में निवेशकों का पैसा तीन गुना से ज्यादा किया है। SK Hynix का शेयर बीते एक साल में 636 फीसदी उछला है। इसने निवेशकों का पैसा एक साल में छह गुना से ज्यादा कर दिया है।

एलजी और ह्यूडंई के शेयरों में भी तेजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा भी कई शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई। LG Electronics का शेयर बीते एक साल में 166 फीसदी चढ़ा है। Hyundai Motor का शेयर इस दौरान 119 फीसदी उछला है। इन दिग्गज शेयरों में जबर्दस्त उछाल से कोरिया का बाजार बीते एक साल में दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया। अब शेयरों की हाई वैल्यूएशंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विदेशी निवेशक भी इन शेयरों में बड़ी बिकवाली कर रहे हैं।

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हाई वैल्यूएशंस को लेकर उठ रहे हैं सवाल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीते एक साल में तेज उछाल के बाद इन शेयरों की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। दूसरा, अमेरिका में भी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा है। इसका मतलब है कि आगे दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिख सकता है। इस वजह से विदेशी निवेशक दक्षिण कोरिया के बाजार में बड़ी बिकवाली कर रहे हैं। इससे बाजार लगातार गिर रहा है।

AI Stocks: AI शेयरों में मची बिकवाली, Netweb से Black Box तक 10% टूटे; जानिए क्या है वजह

AI Stocks: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयर मंगलवार को दबाव में रहे। Netweb Technologies, Aeroflex Industries, E2E Networks और Black Box जैसे शेयरों में 10% तक की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह दुनिया भर के टेक शेयरों में आई बिकवाली रही।

दुनिया भर में टेक शेयरों पर दबाव

एशियाई शेयर बाजार लगातार तीन दिन की तेजी के बाद गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों को अब चिंता है कि AI थीम वाली तेज रैली शायद जरूरत से ज्यादा आगे निकल गई है। MSCI Asia Pacific Index कारोबार के दौरान 2.2% तक गिर गया। बाद में निचले स्तर पर खरीदारी आने से गिरावट कुछ कम हुई और इंडेक्स करीब 1.5% नीचे बंद हुआ।

यूरोप के बाजारों में भी मिला-जुला कारोबार रहा। फ्रांस का CAC 40 करीब 1% चढ़ा। वहीं, STOXX Europe 600 Technology Index शुरुआती कारोबार में करीब 2% टूट गया।

चिप कंपनियों में भारी गिरावट

सेमीकंडक्टर सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। ASML Holding, Infineon Technologies, Aixtron और STMicroelectronics के शेयर करीब 5% तक टूट गए। वहीं BE Semiconductor Industries में 4% से ज्यादा की गिरावट आई।

हालांकि, सभी टेक कंपनियों पर दबाव नहीं रहा। SAP का शेयर करीब 2.5% और Amadeus IT Group करीब 2% चढ़ा।

सैमसंग और SK Hynix भी टूटे

दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics के शेयर 10% तक गिर गए। जबकि कंपनी ने मुनाफे में 19 गुना बढ़ोतरी की जानकारी दी है।

वहीं SK Hynix के शेयर करीब 6% टूट गए। इसकी वजह से Kospi Index में 5.2% की गिरावट आई। कारोबार के दौरान 8% गिरावट आने पर कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी।

AI रैली पर क्यों बढ़ी चिंता?

एनालिस्टों का कहना है कि निवेशक अब टेक शेयरों से पैसा निकालकर दूसरे सेक्टरों में लगा रहे हैं। उन्हें डर है कि AI सेक्टर में बढ़ता निवेश, तेज प्रतिस्पर्धा और नई क्षमता (Capacity Expansion) भविष्य में कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकते हैं।

बाजार अब यह देखना चाहता है कि AI पर हो रहा भारी खर्च वास्तव में कंपनियों के मुनाफे में बदलता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

माइकल बरी ने भी जताई चिंता

The Big Short नाम से मशहूर निवेशक माइकल बरी (Michael Burry) का भी मानना है कि मेमोरी चिप कंपनियों में आया उछाल ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता। उन्होंने बताया कि उन्होंने Micron Technology के शेयरों में शॉर्ट पोजिशन ली है। इसका मतलब कि बरी को भरोसा है कि मेमोरी चिप कंपनियों के स्टॉक गिरने वाले हैं।

उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया में चिप उत्पादन पर हो रहा भारी निवेश आने वाले समय में सप्लाई काफी बढ़ा देगा। इससे DRAM चिप्स की मौजूदा कमी अगले साल ही खत्म हो सकती है। फिलहाल Samsung, SK Hynix और Micron मिलकर दुनिया के करीब 90% DRAM बाजार पर कब्जा रखते हैं। लेकिन अगर सप्लाई तेजी से बढ़ी, तो कीमतों और कंपनियों की कमाई दोनों पर दबाव आ सकता है।

* ब्लूमबर्ग से इनपुट के साथ

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IT Stocks: AI के चलते भारतीय IT कंपनियों पर और बढ़ेगा दबाव! JPMorgan ने घटाया ग्रोथ अनुमान

IT Stocks: भारत का आईटी सेक्टर आने वाले कुछ सालों तक सुस्त रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से आईटी कंपनियों के कारोबार पर दबाव बना रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अभी अपने आईटी बजट को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सेक्टर में तेज रिकवरी की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है।

तीन साल से धीमी है ग्रोथ

JPMorgan के मुताबिक, पिछले तीन साल से आईटी सर्विस सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 2% से 3% के बीच रही है।

ब्रोकरेज का कहना है कि AI का असर अभी शुरुआती दौर में है। अगले दो साल तक भी ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से उसने मध्यम और लंबी अवधि के ग्रोथ अनुमान घटा दिए हैं।

अब JPMorgan को उम्मीद नहीं है कि बड़ी आईटी कंपनियां जल्द मिड-सिंगल डिजिट ग्रोथ हासिल कर पाएंगी। उसका अनुमान है कि इनकी रेवेन्यू ग्रोथ फिलहाल 3% से 4% के आसपास ही रह सकती है।

कंपनियां खर्च करने से बच रही हैं

JPMorgan की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की कंपनियां नई तकनीक और भू-राजनीतिक हालात को लेकर उलझन में हैं। इसी वजह से वे नए आईटी प्रोजेक्ट्स पर फैसले लेने में देरी कर रही हैं।

JPMorgan का कहना है कि कई बड़े सौदों की शुरुआत और नए कॉन्ट्रैक्ट साइन होने में भी देरी हो रही है। इसका असर FY27 की दूसरी तिमाही तक दिखाई दे सकता है।

AI का असर अभी शुरुआती चरण में

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी इंडस्ट्री अभी AI अपनाने के पहले चरण यानी ‘Deflation Phase’ में है। इस दौरान AI की वजह से पुराने और मेंटेनेंस वाले कामों में प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। लेकिन उसकी भरपाई नए AI प्रोजेक्ट्स से नहीं हो पा रही है। इसलिए कंपनियों की कुल ग्रोथ पर दबाव बना हुआ है।

JPMorgan का मानना है कि सेक्टर में मजबूत रिकवरी FY29 की बजाय अब FY30 के बाद ही देखने को मिल सकती है।

FY27 के अनुमान भी घटाए

ब्रोकरेज ने पहली तिमाही के रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान भी घटा दिए हैं। साथ ही उसे उम्मीद है कि कंपनियां FY27 के लिए अपने गाइडेंस में भी कटौती कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार वित्त वर्ष की पहली छमाही आमतौर पर जितनी मजबूत रहती है, वैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी।

वैल्यूएशन पर भी दबाव

JPMorgan ने सेक्टर के कई शेयरों के P/E मल्टीपल में 10% से 25% तक की कटौती की है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी कंपनियों का मौजूदा वैल्यूएशन वाजिब है, क्योंकि अब सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ 7% से 8% की बजाय 5% से भी नीचे आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी शेयरों की वैल्यूएशन तभी बेहतर हो सकती है, जब कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ में तेज सुधार दिखे। फिलहाल ऐसी संभावना साफ नजर नहीं आ रही है।

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