Stocks to Buy: ये 5 शेयर दे सकते हैं 73% तक रिटर्न, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला बना हुआ। लेकिन, कुछ शेयरों में अच्छी कमाई के मौके दिख रहे हैं। कई बड़े ब्रोकरेज हाउस ने अलग-अलग शेयरों पर टारगेट प्राइस जारी किए हैं। इन शेयरों में 21% से लेकर 73% तक की संभावित तेजी दिख रही है।

ब्रोकरेज की पसंद और संभावित रिटर्न

शेयरमौजूदा भावटारगेट प्राइससंभावित रिटर्न
CG Power₹894.25₹1,09021.89%
Allied Blenders₹606₹78028.71%
Bharat Electronics₹407₹55035.14%
PhysicsWallah₹126.74₹20057.80%
PVR INOX₹1,230₹2,13573.58%

CG Power

ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने CG Power पर ‘Outperform’ रेटिंग दी है। इसका टारगेट प्राइस ₹1,090 रखा गया है। ₹894.25 के मौजूदा भाव के आधार पर इसमें करीब 21.89% की तेजी दिख सकती है। कंपनी सेमीकंडक्टर कारोबार में विस्तार को लेकर India Semiconductor Mission 2.0 के तहत मिलने वाले फायदे का आकलन कर रही है। फिलहाल उसका फोकस मौजूदा सेमीकंडक्टर ऑपरेशन को बढ़ाने पर है।

Allied Blenders

ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने Allied Blenders पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। इसका टारगेट प्राइस ₹780 है। इसमें करीब 28.71% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज के मुताबिक ICONiQ White की ग्रोथ, पुराने ब्रांड्स की वापसी और बैकवर्ड इंटीग्रेशन से कंपनी की कमाई को सपोर्ट मिल सकता है। FY28 से मार्जिन में सुधार ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Bharat Electronics

ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने Bharat Electronics (BEL) पर ‘Outperform’ रेटिंग दी है। इसका टारगेट प्राइस ₹550 रखा गया है। यह स्टॉक मौजूदा स्तर से करीब 35.14% उछल सकता है। Macquarie के India Industrials कवरेज में BEL सबसे ज्यादा संभावित संभावित तेजी वाले शेयरों में शामिल है।

PhysicsWallah

ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने PhysicsWallah पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है। इसका टारगेट प्राइस ₹200 है। ₹126.74 के मौजूदा भाव से देखें तो इसमें करीब 57.80% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी का ऑनलाइन कारोबार मुख्य ग्रोथ ड्राइवर बना रहेगा। FY26 से FY30 के बीच ऑनलाइन कारोबार के रेवेन्यू में करीब 28% CAGR की उम्मीद है।

PVR INOX

ब्रोकरेज फर्म CLSA ने PVR INOX पर ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है। इसका टारगेट प्राइस ₹2,135 है। यह स्टॉक 73.58% उछल सकता है। ब्रोकरेज को सिनेमा अटेंडेंस बढ़ने, प्रति ग्राहक खर्च में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से मार्जिन बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी की पहली तिमाही में एडमिशन 8%, टिकट से रेवेन्यू 15% और EBITDA 33% बढ़ा था।

Stocks to Watch: 7 सितंबर को इन 14 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

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Semiconductor Mission 2.0: सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकंडक्टर स्कीम, इन 10 स्टॉक्स को मिल सकता है तगड़ा फायदा

Semiconductor Mission 2.0: केंद्र सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM 2.0) के लिए ₹1.27 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। इस बार सरकार का फोकस सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने पर नहीं है। अब चिप डिजाइन, मशीनें, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च और पूरी सप्लाई चेन को भारत में विकसित किया जाएगा।

ऐसे में कई भारतीय कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं किन 10 कंपनियों पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

Tata Electronics

टाटा ग्रुप भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब लगाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी पहले से इस सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ISM 2.0 से इसके विस्तार को और रफ्तार मिल सकती है।

CG Power & Industrial Solutions

CG Power सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही है। कंपनी की चिप मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को सरकार की नई नीति से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology पहले ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक्टिव है। सरकार की ATMP और OSAT पर बढ़ती फोकस से कंपनी को फायदा हो सकता है।

Tata Elxsi

टाटा ग्रुप की Tata Elxsi चिप डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी में काम करती है। ISM 2.0 में डिजाइन कंपनियों को बढ़ावा मिलने से इसके लिए नए अवसर बन सकते हैं।

Dixon Technologies

Dixon भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होने का फायदा इसे भी मिल सकता है।

Syrma SGS Technology

Syrma SGS इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB असेंबली में काम करती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार से कंपनी का कारोबार बढ़ सकता है।

MosChip Technologies

MosChip चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग सेवाएं देती है। सरकार का डिजाइन और IP डेवलपमेंट पर जोर कंपनी के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

HCL Technologies

HCLTech चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग R&D सेवाओं में वैश्विक कंपनियों के साथ काम करती है। भारत में डिजाइन इकोसिस्टम बढ़ने से नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं।

Tata Consultancy Services (TCS)

टटा ग्रुप यह आईटी कंपनी TCS सेमीकंडक्टर, AI और इंजीनियरिंग सेवाओं में दुनिया की कई चिप कंपनियों के साथ काम करती है। घरेलू निवेश बढ़ने से इस कारोबार में भी तेजी आ सकती है।

Cyient

Cyient सेमीकंडक्टर डिजाइन, एम्बेडेड इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन सेवाएं देती है। नई नीति से इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

यह समझना जरूरी है कि सरकार ने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया है। इस लिस्ट में कंपनियां उनके मौजूदा कारोबार और सेमीकंडक्टर सेक्टर में मौजूदगी के आधार पर चुनी गई हैं।

ISM 2.0 से इन्हें नए ऑर्डर, निवेश या साझेदारी के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों को तुरंत या समान रूप से फायदा होगा। निवेश का फैसला हमेशा कंपनी के नतीजों, वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाओं को देखकर ही करना चाहिए।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

India Semiconductor Mission (ISM 2.0): केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को India Semiconductor Mission (ISM 2.0) को मंजूरी दे दी। इस मिशन के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है। यह पहले चरण के ₹76,000 करोड़ से करीब 68% ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। अब पूरी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन भारत में तैयार करने पर जोर रहेगा, ताकि देश आयात पर कम निर्भर हो और दुनिया का बड़ा चिप हब बन सके।

आखिर ISM 2.0 में नया क्या है?

पहले चरण यानी ISM 1.0 का फोकस चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लाने पर था। अब ISM 2.0 का दायरा और बड़ा कर दिया गया है। सरकार अब चिप डिजाइन से लेकर मशीनें, केमिकल, गैस, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग और रिसर्च तक पूरा इकोसिस्टम देश में तैयार करना चाहती है।

6 बड़े पिलर पर तैयार हुआ मिशन

सरकार ने ISM 2.0 को छह बड़े हिस्सों में बांटा है।

  • सबसे पहले भारत को चिप डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत बनाया जाएगा। सरकार स्टार्टअप और डिजाइन कंपनियों को मदद देगी, ताकि वे दुनिया के लिए चिप डिजाइन कर सकें।
  • दूसरा फोकस सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर रहेगा। चिप बनाने वाली मशीनें, स्पेशलिटी केमिकल, गैस और जरूरी कच्चा माल देश में ही तैयार करने की कोशिश होगी।
  • तीसरे चरण में नई सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब और दूसरी निर्माण इकाइयों में निवेश बढ़ाया जाएगा।
  • चौथा लक्ष्य ATMP और OSAT यानी चिप की एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग क्षमता को मजबूत करना है।
  • पांचवें हिस्से में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ मौजूदा तकनीक तक सीमित न रहे, बल्कि अगली पीढ़ी की चिप टेक्नोलॉजी भी विकसित करे।
  • छठा फोकस स्किल डेवलपमेंट पर होगा। इस सेक्टर के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियर और एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे।

105 स्टार्टअप पहले से कर रहे हैं काम

सरकार के मुताबिक, देश में 105 स्टार्टअप पहले से सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं। नई योजना के तहत इन्हें तकनीकी और वित्तीय मदद दी जाएगी। सरकार चाहती है कि भारत चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो।

2028 तक शुरू हो सकती है पहली चिप फैक्ट्री

सरकार ने कहा है कि भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) यूनिट 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इससे देश में चिप निर्माण को नई रफ्तार मिलेगी।

पहले चरण में क्या हासिल हुआ?

सरकार के मुताबिक, India Semiconductor Mission (ISM) 1.0 के तहत अब तक 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो LED डिस्प्ले फैब और 9 पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश को मंजूरी मिली है।

Micron, Kaynes और CG Semi में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। एक और यूनिट इस साल के अंत तक प्रोडक्शन शुरू कर सकती है।

68 हजार छात्रों को मिली ट्रेनिंग

सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कुशल ह्यूमन रिसोर्स भी तैयार कर रही है। अभी 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक Electronic Design Automation (EDA) टूल्स के जरिए पढ़ाई हो रही है। अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

बड़ी कंपनियों की भी दिलचस्पी

भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में विदेशी कंपनियों का भरोसा भी बढ़ रहा है। AMD और Applied Materials ने 40-40 करोड़ डॉलर, Microchip Technology ने 30 करोड़ डॉलर, Lam Research ने 110 करोड़ डॉलर और KLA ने 40 करोड़ डॉलर के निवेश का ऐलान किया है।

वहीं ASML, Merck और IBL Electron ने टाटा ग्रुप के साथ समझौते किए हैं। इनका मकसद भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

सरकार का बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारत सिर्फ चिप आयात करने वाला देश नहीं बनना चाहता। सरकार का लक्ष्य पूरी वैल्यू चेन भारत में तैयार करना है। आने वाले वर्षों में भारत की सेमीकंडक्टर मांग 50 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार चाहती है कि इस बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा देश में ही पूरा हो।मजबूत बनाना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Semiconductor Stocks: सरकार का ₹1.64 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर दांव! इन 6 कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर

Semiconductor Stocks: भारत अब सिर्फ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबल करने वाला देश नहीं रहना चाहता। सरकार अब देश में सेमीकंडक्टर यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। India Semiconductor Mission 2.0 और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है।

इसका असर सिर्फ चिप बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, PCB, EMS और चिप डिजाइन से जुड़ी कई कंपनियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 6 कंपनियों के बारे में।

Dixon Technologies

Dixon Technologies देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस (EMS) कंपनियों में शामिल है। कंपनी मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है।

अगर भारत में चिप और PCB का प्रोडक्शन बढ़ता है, तो Dixon की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। साथ ही, लागत घटाने में भी मदद मिलेगी।

Amber Enterprises

Amber Enterprises इस सरकारी पहल का सीधा फायदा उठाने वाली कंपनियों में मानी जा रही है। कंपनी उत्तर प्रदेश के जेवर में करीब 3,500 करोड़ रुपये का प्लांट लगा रही है। यहां HVAC कंपोनेंट्स और PCB Assemblies की मैन्युफैक्चरिंग होगी। देश में PCB का उत्पादन बढ़ने से कंपनी के कारोबार को नई रफ्तार मिल सकती है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB Assembly कारोबार में दमदार मौजूदगी है। कंपनी ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत होने से कंपनी को नए ऑर्डर मिलने और कारोबार बढ़ने की संभावना है।

CG Power

CG Power अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी सेमीकंडक्टर कारोबार में भी कदम रख चुकी है। ये गुजरात में रेनेसास और Stars Microelectronics के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर प्लांट बना रही है। सरकार के बढ़ते फोकस से इस प्रोजेक्ट को भी रफ्तार मिल सकती है।

Tata Group

Tata Group भी भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का बड़ा हिस्सा है। Tata Electronics असम में चिप पैकेजिंग (OSAT) प्लांट और गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। सरकार की नई योजनाओं और निवेश का फायदा टाटा ग्रुप को भी मिल सकता है। हालांकि, Tata Electronics अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।

MosChip Technologies

MosChip Technologies चिप डिजाइन और एम्बेडेड इंजीनियरिंग सेवाएं देने वाली कंपनी है। अगर भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेजी से बढ़ती है, तो डिजाइन और रिसर्च से जुड़ी कंपनियों की मांग भी बढ़ सकती है। इसका फायदा MosChip को मिल सकता है।

क्यों अहम है सरकार का यह कदम?

सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। कोशिश यह है कि भारत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करे। इसमें फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, PCB और डिजाइन जैसे सभी हिस्से शामिल हैं।

अगर यह योजना सफल रहती है, तो भारत की आयात पर निर्भरता घटेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी। साथ ही हजारों नई नौकरियां भी पैदा होंगी। यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब इस सेक्टर और इससे जुड़ी कंपनियों पर बनी हुई है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।