Semiconductor Mission: फैब के बाद अब असली चुनौती, भारत कैसे बनाएगा पूरी चिप सप्लाई चेन?

Semiconductor Mission: भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब अगले और ज्यादा चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच गया है। देश में फैब और OSAT यूनिट लगाने के लिए निवेश जुटाने के बाद अब इनके आसपास पूरा इकोसिस्टम तैयार करना बड़ी चुनौती है। सेमीकंडक्टर ग्रेड मटेरियल, उपकरण, लॉजिस्टिक्स, टैलेंट, R&D और भरोसेमंद बिजली… इन सभी की मजबूत सप्लाई चेन जरूरी होगी।

Moneycontrol ने Tata Electronics, NXP Semiconductors, Nippon Express, और Infineon के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स के साथ SEMI से बातचीत की। सभी के संकेत एक ही दिशा में हैं… फैब लगाना सिर्फ शुरुआत है।

Tata Electronics बना रही सप्लायर नेटवर्क

Tata Electronics गुजरात के धोलेरा में भारत की पहली कमर्शियल-ग्रेड सिलिकॉन फैब और असम में OSAT यूनिट लगा रही है। कंपनी ने इक्विपमेंट, मटेरियल, केमिकल और गैस के लिए 16 MoU किए हैं। धोलेरा प्रोजेक्ट से 450 से ज्यादा पार्टनर्स जुड़े हैं और 363 वेंडर पार्क बनाने की योजना है।

Tata Electronics के CEO रणधीर ठाकुर ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी अगले पांच वर्षों में 30 अरब डॉलर की कंपनी बनने की राह पर है। कंपनी Nexperia और जापानी कंपनियों के साथ भी सप्लाई चेन और मटेरियल से जुड़े अवसरों पर काम कर रही है।

इक्विपमेंट और मटेरियल में ग्लोबल कंपनियों की एंट्री

SEMI के CEO अजित मनोका के मुताबिक, अगले तीन से पांच साल भारत के सप्लायर बेस के लिए अहम होंगे। देश को सेमीकंडक्टर ग्रेड केमिकल, मटेरियल और उपकरण बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी।

ASML ने भारत में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वहीं Applied Materials अगले 10 साल में 5 अरब डॉलर निवेश करने और R&D क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी का India Validation Center देश का एकमात्र 300-mm क्लीनरूम है।

Fujifilm धोलेरा में करीब 800 करोड़ रुपये निवेश कर रही है। कंपनी भारतीय केमिकल कंपनियों के साथ मिलकर चिप निर्माण के जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्स को डेवलप करने पर काम कर रही है।

R&D और OSAT पर भी फोकस

Renesas भारत में 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ अब मैन्युफैक्चरिंग से भी जुड़ रही है। कंपनी CG Power के CG Semi के साथ साणंद फैसिलिटी पर काम कर रही है। यहां उत्पादन 2027 की चौथी तिमाही या 2028 की शुरुआत में शुरू होने का लक्ष्य है।

NXP भी बड़ी संख्या में घरेलू OSAT कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी के ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब एक-तिहाई भारत में है।

लॉजिस्टिक्स और बिजली भी अहम

Nippon Express को उम्मीद है कि भारत क्षेत्रीय और आगे चलकर ग्लोबल चिप लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। कंपनी चिप निर्माताओं के करीब लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी डेवलप करने की योजना बना रही है।

वहीं, Infineon के CEO Jochen Hanebeck ने भरोसेमंद पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को अहम बताया है। सरकार का करीब ₹1.27 लाख करोड़ वाला Semicon 2.0 कार्यक्रम अब फैब और पैकेजिंग से आगे बढ़कर उपकरण, मटेरियल, डिजाइन, R&D और पूरे इकोसिस्टम पर फोकस कर रहा है।

भारत ने शुरुआती बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट हासिल कर लिए हैं। अब असली परीक्षा यह है कि इनके आसपास सप्लायर, उपकरण निर्माता, मटेरियल कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रिसर्च सेंटर कितनी तेजी से तैयार होते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

India Semiconductor Mission (ISM 2.0): केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को India Semiconductor Mission (ISM 2.0) को मंजूरी दे दी। इस मिशन के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है। यह पहले चरण के ₹76,000 करोड़ से करीब 68% ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। अब पूरी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन भारत में तैयार करने पर जोर रहेगा, ताकि देश आयात पर कम निर्भर हो और दुनिया का बड़ा चिप हब बन सके।

आखिर ISM 2.0 में नया क्या है?

पहले चरण यानी ISM 1.0 का फोकस चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लाने पर था। अब ISM 2.0 का दायरा और बड़ा कर दिया गया है। सरकार अब चिप डिजाइन से लेकर मशीनें, केमिकल, गैस, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग और रिसर्च तक पूरा इकोसिस्टम देश में तैयार करना चाहती है।

6 बड़े पिलर पर तैयार हुआ मिशन

सरकार ने ISM 2.0 को छह बड़े हिस्सों में बांटा है।

  • सबसे पहले भारत को चिप डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत बनाया जाएगा। सरकार स्टार्टअप और डिजाइन कंपनियों को मदद देगी, ताकि वे दुनिया के लिए चिप डिजाइन कर सकें।
  • दूसरा फोकस सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर रहेगा। चिप बनाने वाली मशीनें, स्पेशलिटी केमिकल, गैस और जरूरी कच्चा माल देश में ही तैयार करने की कोशिश होगी।
  • तीसरे चरण में नई सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब और दूसरी निर्माण इकाइयों में निवेश बढ़ाया जाएगा।
  • चौथा लक्ष्य ATMP और OSAT यानी चिप की एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग क्षमता को मजबूत करना है।
  • पांचवें हिस्से में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ मौजूदा तकनीक तक सीमित न रहे, बल्कि अगली पीढ़ी की चिप टेक्नोलॉजी भी विकसित करे।
  • छठा फोकस स्किल डेवलपमेंट पर होगा। इस सेक्टर के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियर और एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे।

105 स्टार्टअप पहले से कर रहे हैं काम

सरकार के मुताबिक, देश में 105 स्टार्टअप पहले से सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं। नई योजना के तहत इन्हें तकनीकी और वित्तीय मदद दी जाएगी। सरकार चाहती है कि भारत चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो।

2028 तक शुरू हो सकती है पहली चिप फैक्ट्री

सरकार ने कहा है कि भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) यूनिट 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इससे देश में चिप निर्माण को नई रफ्तार मिलेगी।

पहले चरण में क्या हासिल हुआ?

सरकार के मुताबिक, India Semiconductor Mission (ISM) 1.0 के तहत अब तक 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो LED डिस्प्ले फैब और 9 पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश को मंजूरी मिली है।

Micron, Kaynes और CG Semi में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। एक और यूनिट इस साल के अंत तक प्रोडक्शन शुरू कर सकती है।

68 हजार छात्रों को मिली ट्रेनिंग

सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कुशल ह्यूमन रिसोर्स भी तैयार कर रही है। अभी 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक Electronic Design Automation (EDA) टूल्स के जरिए पढ़ाई हो रही है। अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

बड़ी कंपनियों की भी दिलचस्पी

भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में विदेशी कंपनियों का भरोसा भी बढ़ रहा है। AMD और Applied Materials ने 40-40 करोड़ डॉलर, Microchip Technology ने 30 करोड़ डॉलर, Lam Research ने 110 करोड़ डॉलर और KLA ने 40 करोड़ डॉलर के निवेश का ऐलान किया है।

वहीं ASML, Merck और IBL Electron ने टाटा ग्रुप के साथ समझौते किए हैं। इनका मकसद भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

सरकार का बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारत सिर्फ चिप आयात करने वाला देश नहीं बनना चाहता। सरकार का लक्ष्य पूरी वैल्यू चेन भारत में तैयार करना है। आने वाले वर्षों में भारत की सेमीकंडक्टर मांग 50 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार चाहती है कि इस बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा देश में ही पूरा हो।मजबूत बनाना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।