टाटा की TCS ने Porsche की MHP को ₹3573 करोड़ में खरीदा, 10 महीने में तीसरी बड़ी डील

टाटा ग्रुप की Tata Consultancy Services (TCS) ने 24 अगस्त को जर्मन कार कंपनी Porsche की सब्सिडियरी MHP Management- und IT-Beratung GmbH को खरीदने का ऐलान किया। यह सौदा 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3,573 करोड़ की एंटरप्राइज वैल्यू पर हुआ है। TCS MHP के 100% शेयर खरीदेगी। डील अगले 3-4 महीने में पूरी होने की उम्मीद है।

4,500 कर्मचारियों वाली कंपनी है MHP

MHP ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर की कंसल्टिंग कंपनी है। इसका काम बिजनेस कंसल्टिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, AI, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटाइजेशन से जुड़ा है।

CY2025 में MHP का टर्नओवर करीब €742 मिलियन रहा। कंपनी में करीब 4,500 कर्मचारी हैं। MHP की मौजूदगी जर्मनी के अलावा रोमानिया, ब्रिटेन, अमेरिका, भारत और मैक्सिको में भी है।

Porsche के साथ ₹13,959 करोड़ की पार्टनरशिप

MHP के अधिग्रहण के साथ Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल की रणनीतिक पार्टनरशिप भी की है। इसकी कुल वैल्यू €1.25 अरब यानी करीब ₹13,959 करोड़ है।

इस साझेदारी का फोकस AI ट्रांसफॉर्मेशन पर रहेगा। इसमें नई पीढ़ी की मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी पर खास ध्यान दिया जाएगा।

10 महीने में TCS की तीसरी बड़ी डील

MHP TCS की पिछले 10 महीनों में तीसरी बड़ी अधिग्रहण डील है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर में Salesforce कंसल्टिंग और AI सॉल्यूशन कंपनी Coastal Cloud को $700 मिलियन में खरीदा था। इससे पहले ListEngage MidCo का करीब $72.8 मिलियन में खरीदा था।

MHP की डील के साथ TCS ने 10 महीनों में अधिग्रहण पर $1 अरब से ज्यादा खर्च कर दिया है।

TCS के शेयरों का हाल

TCS के शेयर सोमवार को 0.91% की गिरावट के साथ 2,281 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 महीने में स्टॉक 1.18% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 27.37% टूट चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 8.26 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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Stocks to Watch: आज 10 जुलाई को TCS, Dixon Tech समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव

शुक्रवार, 10 जुलाई को टीसीएस, आनंद राठी वेल्थ, डिक्सन टेक्नोलोजिज समेत कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने एक दिन पहले तिमाही नतीजे और Q1 के लिए बिजनेस अपडेट जारी किया था। वहीं कुछ ने नई डील, कॉन्ट्रैक्ट्स और अन्य तरह के ​डेवलपमेंट्स की जानकारी दी थी। इन पर बाजार आज प्रतिक्रिया देगा। इसके अलावा SME सेगमेंट में एक लिस्टिंग है, वहीं कई कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है…

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

इंडियन बैंक, एलएंडटी फाइनेंस, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एलेकॉन इंजीनियरिंग कंपनी, इंटरनेशनल ट्रैवल हाउस और जस्ट डायल

11 जुलाई को ये कंपनियां जारी करेंगी नतीजे

एवेन्यू सुपरमार्ट्स, LTM, अवंतेल और तिरुपति फिनलीज 11 जुलाई को अपनी तिमाही कमाई के नतीजे जारी करेंगी।

आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज: क्यू 1 में मुनाफा 4.6% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये हुआ। रेवेन्यू 13.9% बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये हुआ। EBIT 11.6% बढ़कर 17,317 करोड़ रुपये हो गया। EBIT मार्जिन 24.45% से घटकर 23.95% हो गया। कंपनी के बोर्ड ने प्रति शेयर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

आनंद राठी वेल्थ: Q1 में मुनाफा 73.6% बढ़कर 163 करोड़ रुपये हुआ। रेवेन्यू 17.5% बढ़कर 322 करोड़ रुपये हुआ।

महिंद्रा एंड महिंद्रा: जून महीने में कुल प्रोडक्शन वॉल्यूम 30% बढ़कर 1,10,795 यूनिट हो गया। सेल्स वॉल्यूम 32.5% बढ़कर 1,03,502 यूनिट हो गया। एक्सपोर्ट वॉल्यूम 120.7% बढ़कर 5,954 यूनिट हो गया।

डिक्सन टेक्नोलोजिज: डिक्सन टेक ने भारत में एक जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने के लिए वीवो मोबाइल इंडिया (VMI) के साथ जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है। यह कंपनी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) के तौर पर काम करेगी। प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में डिक्सन की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि बाकी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी वीवो मोबाइल इंडिया के पास होगी।

विक्रम सोलर: कंपनी ने 130 MW की कुल क्षमता वाले मोनो-PERC 10BB DCR-कम्प्लायंट सोलर सेल खरीदने के लिए एवरवोल्ट सोलर टेक्नोलॉजी इंडिया के साथ सोलर सेल सप्लाई एग्रीमेंट किया है।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: पावर ग्रिड को भदला-III, रामगढ़ PS और कानपुर (PG) में ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) आधार पर क्षमता बढ़ाने और बे (bay) एक्सटेंशन के काम वाले प्रोजेक्ट के लिए इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम स्थापित करने के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है।

हैवेल्स इंडिया: कंपनी ने भारतीय बाजार के लिए एडवांस्ड बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने और पेश करने के लिए नॉर्वे की एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी कंपनी Pixii AS के साथ रणनीतिक सहयोग की घोषणा की है।

कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और GAIL: कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अहमदाबाद के खोडियार में CONCOR के इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) में अत्याधुनिक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) डिस्पेंसिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए GAIL (इंडिया) के साथ एक एग्रीमेंट किया है।

पेस डिजीटेक: कंपनी की सब्सिडियरी, Lineage Power ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की सप्लाई के लिए Onward Solar Power और Kalpa Power के साथ दो रणनीतिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रीमियर एनर्जीज: कंपनी ने तेलंगाना के सीतारामपुर में अपनी नई 5.6 GW सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है। इसने अपनी 6 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) फैसिलिटी और 18,000 मीट्रिक टन सालाना क्षमता वाली एल्युमीनियम फ्रेम मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए भी शिलान्यास समारोह आयोजित किया।

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी: कंपनी ने 2015 में बने ‘लॉन्ग रेंज 2’ टैंकर, ‘जग लक्ष्मण’ की डिलीवरी ली है, जिसकी डेडवेट टनेज (DWT) क्षमता लगभग 109,990 है। कंपनी ने FY27 की पहली तिमाही में इस पोत को खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस खरीद के लिए पूरी तरह से कंपनी के अपने फंड (इंटरनल एक्रूअल्स) का इस्तेमाल किया गया है।

इस सौदे के बाद, कंपनी के अपने बेड़े में 41 पोत शामिल हो गए हैं, जिनमें 26 टैंकर और 15 ड्राई बल्क कैरियर हैं, जिनकी कुल क्षमता 3.35 मिलियन DWT है। इसके बेड़े की मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल लगभग 100 प्रतिशत हो रहा है।

बल्क डील्स

सनटेक रियल्टी: फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट ने ‘फिडेलिटी सीरीज इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्चुनिटीज फंड’ के जरिए सनटेक रियल्टी में 32.33 करोड़ रुपये में 10.05 लाख शेयर खरीदे, जो 0.68 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। वहीं, श्रोडर इंटरनेशनल सिलेक्शन फंड इमर्जिंग एशिया ने 42.47 करोड़ रुपये में 13.2 लाख शेयर बेचे, जो 0.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। यह सौदा 321.64 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर हुआ।

नैक पैकेजिंग: बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड ने नैक पैकेजिंग में 196.59 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर 7 लाख शेयर खरीदे, जो 0.57 प्रतिशत हिस्सेदारी (कुल 13.76 करोड़ रुपये) के बराबर है।

इस कंपनी की होगी लिस्टिंग

Kody Technolab

आज ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

एक्सिस बैंक

डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज

नेस्ले इंडिया

एजिस लॉजिस्टिक्स

एजिस वोपाक टर्मिनल्स

अपोलो टायर्स

आर्टेमिस मेडिकेयर सर्विसेज

बिड़लासोफ्ट

कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज

कंट्रोल प्रिंट

डी-लिंक (इंडिया)

डायनामिक केबल्स

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज

ग्राइंडवेल नॉर्टन

जेके सीमेंट

जेएसडब्ल्यू सीमेंट

महिंद्रा लॉजिस्टिक्स

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी

नीलकमल

न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स

ओरिएंट इलेक्ट्रिक

पीटीएल एंटरप्राइजेज

रोसारी बायोटेक

स्मार्टलिंक होल्डिंग्स

शोभा

वीएसटी इंडस्ट्रीज

वेल्सपन लिविंग

ZF कमर्शियल व्हीकल कंट्रोल सिस्टम्स इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

गोल्डियम इंटरनेशनल

हिंदुस्तान इंसुलेटर्स एंड इंडस्ट्रीज

यह शेयर करेगा एक्स-स्प्लिट ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

मंगलम वर्ल्डवाइड

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IT Stocks: AI के चलते भारतीय IT कंपनियों पर और बढ़ेगा दबाव! JPMorgan ने घटाया ग्रोथ अनुमान

IT Stocks: भारत का आईटी सेक्टर आने वाले कुछ सालों तक सुस्त रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से आईटी कंपनियों के कारोबार पर दबाव बना रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अभी अपने आईटी बजट को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सेक्टर में तेज रिकवरी की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है।

तीन साल से धीमी है ग्रोथ

JPMorgan के मुताबिक, पिछले तीन साल से आईटी सर्विस सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 2% से 3% के बीच रही है।

ब्रोकरेज का कहना है कि AI का असर अभी शुरुआती दौर में है। अगले दो साल तक भी ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से उसने मध्यम और लंबी अवधि के ग्रोथ अनुमान घटा दिए हैं।

अब JPMorgan को उम्मीद नहीं है कि बड़ी आईटी कंपनियां जल्द मिड-सिंगल डिजिट ग्रोथ हासिल कर पाएंगी। उसका अनुमान है कि इनकी रेवेन्यू ग्रोथ फिलहाल 3% से 4% के आसपास ही रह सकती है।

कंपनियां खर्च करने से बच रही हैं

JPMorgan की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की कंपनियां नई तकनीक और भू-राजनीतिक हालात को लेकर उलझन में हैं। इसी वजह से वे नए आईटी प्रोजेक्ट्स पर फैसले लेने में देरी कर रही हैं।

JPMorgan का कहना है कि कई बड़े सौदों की शुरुआत और नए कॉन्ट्रैक्ट साइन होने में भी देरी हो रही है। इसका असर FY27 की दूसरी तिमाही तक दिखाई दे सकता है।

AI का असर अभी शुरुआती चरण में

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी इंडस्ट्री अभी AI अपनाने के पहले चरण यानी ‘Deflation Phase’ में है। इस दौरान AI की वजह से पुराने और मेंटेनेंस वाले कामों में प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। लेकिन उसकी भरपाई नए AI प्रोजेक्ट्स से नहीं हो पा रही है। इसलिए कंपनियों की कुल ग्रोथ पर दबाव बना हुआ है।

JPMorgan का मानना है कि सेक्टर में मजबूत रिकवरी FY29 की बजाय अब FY30 के बाद ही देखने को मिल सकती है।

FY27 के अनुमान भी घटाए

ब्रोकरेज ने पहली तिमाही के रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान भी घटा दिए हैं। साथ ही उसे उम्मीद है कि कंपनियां FY27 के लिए अपने गाइडेंस में भी कटौती कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार वित्त वर्ष की पहली छमाही आमतौर पर जितनी मजबूत रहती है, वैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी।

वैल्यूएशन पर भी दबाव

JPMorgan ने सेक्टर के कई शेयरों के P/E मल्टीपल में 10% से 25% तक की कटौती की है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी कंपनियों का मौजूदा वैल्यूएशन वाजिब है, क्योंकि अब सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ 7% से 8% की बजाय 5% से भी नीचे आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी शेयरों की वैल्यूएशन तभी बेहतर हो सकती है, जब कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ में तेज सुधार दिखे। फिलहाल ऐसी संभावना साफ नजर नहीं आ रही है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।