LG Electronics Share Price: शेयर पर बुलिश हुआ BOB Capital, दिया 20% अपसाइड का टारगेट, क्या आप करेंगे निवेश

LG Electronics Share Price: घरेलू उपकरण, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी LG Electronics India के शेयरों पर ब्रोकरेज फर्म BOB Capital बुलिश नजर आ रहा है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 20 फीसदी अपसाइड टारगेट के साथ इसकी कवरेज शुरू की है। BOB Capital ने LG Electronics India पर’Buy’ रेटिंग के साथ इसके लिए ₹1,980 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस तय किया है, जिसका मतलब है कि इसमें लगभग 20% की बढ़त की संभावना है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में यह बढ़त कंपनी के वैल्यूएशन सितंबर 2028 की अनुमानित अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के 50 गुना पर किया है।

BOB Capital Markets के अनुसार, देश में LG Electronics India की लगभग तीन दशकों की मौजूदगी ने इसे इन्वर्टर एयर कंडीशनर, ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और टेलीविज़न जैसे प्रमुख कंज्यूमर अप्लायंस कैटेगरी में मज़बूत स्थिति बनाने में मदद की है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में LG की मार्केट लीडरशिप बनी रहेगी, जिसे मज़बूत ब्रांड रिकॉल, प्रीमियम बनाने की रणनीति (प्रीमियमाइज़ेशन), बढ़ते डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम व वैल्यू सेगमेंट में नए उत्पादों की लगातार पाइपलाइन से मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज ने कहा कि छोटे बाज़ारों में LG की गहरी पैठ और लगातार नए उत्पाद लॉन्च करने से कंपनी को इंडस्ट्री की कुल ग्रोथ से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

BOB Capital Markets को उम्मीद है कि बढ़ती लोकलाइज़ेशन (स्थानीय स्तर पर उत्पादन) और बैकवर्ड इंटीग्रेशन से LG Electronics India के मार्जिन को स्ट्रक्चरल सपोर्ट मिलेगा।

ब्रोकरेज ने कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग स्केल और आने वाली श्री सिटी फैसिलिटी पर जोर दिया, जिससे कंप्रेसर जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स का इन-हाउस प्रोडक्शन और बेहतर हो सकता है। इससे इनपुट लागत पर बेहतर कंट्रोल मिलने और तांबे व एल्युमीनियम की ऊंची कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को यह भी उम्मीद है कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) के नियम और सख्त होने पर ज़्यादा लोकलाइज़ेशन से LG को फ़ायदा होगा।

BOB Capital Markets का अनुमान है कि FY26–FY29E के दौरान LG Electronics India का रेवेन्यू, EBITDA और PAT क्रमशः 13%, 23% और 20% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि यह ग्रोथ भारत में कंज्यूमर अप्लायंस (मोबाइल फ़ोन को छोड़कर) की बढ़ती मांग और नए उत्पाद लॉन्च, मज़बूत डिस्ट्रीब्यूशन और स्थापित ब्रांड फ्रेंचाइजी के ज़रिए मार्केट शेयर हासिल करने की LG की क्षमता से प्रेरित होगी।

हालांकि एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे उत्पादों की घरेलू बिक्री मौसमी होती है, लेकिन BOB Capital Markets को उम्मीद है कि एक्सपोर्ट और B2B बिज़नेस ग्रोथ के अतिरिक्त इंजन के तौर पर काम करेंगे।

श्री सिटी, नोएडा और पुणे में LG की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ से पैरेंट कंपनी की “ग्लोबल साउथ” रणनीति को सपोर्ट मिलने और एक्सपोर्ट से योगदान बढ़ने की उम्मीद है। B2B सेक्टर में, कंपनी अपने इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले और HVAC बिज़नेस (जिसमें VRF और कैसेट AC सिस्टम शामिल हैं) का विस्तार कर रही है। इसके सालाना मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) बिज़नेस से भी कंपनी को ऐसे रेवेन्यू सोर्स मिलते हैं जिनमें मार्जिन अपेक्षाकृत ज़्यादा होता है।

IDFC First Bank shares Price: रेटिंग अपग्रेड के बाद 52-हफ्ते के हाई पर पहुंचा शेयर, आगे 23% की तेजी संभव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF New Rules: अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 या ₹50,000 है तो ईपीएफ के नए नियमों का असर किस तरह पड़ेगा?

EPF New Rules: सरकार ने ईपीएफओ के नियम में हाल में बड़ा बदलाव किया है। अब ईपीएफओ कवरेज के लिए बेसिक सैलरी (प्लस डीए) की लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है। अब तक यह सीमा 15,000 रुपये थी। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले और 51 लाख लोग ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे।

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि ईपीएफओ के तहत प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग आते हैं। यह रिटायरमेंट बेनेफिट्स स्कीम है। इस स्कीम के मुख्य रूप से तीन बेनेफिट्स हैं। पहला एंप्लॉयीज के रिटायर करने पर उसके ईपीएफ में जमा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। दूसरा, रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति को हर महीने पेंशन मिलती है। यह ईपीएफओ के एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम के तहत मिलती है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें हैं। तीसरा फायदा एंप्लाॉयीज डिपॉजिट-लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम के तहत मिलता है।

ईपीएफओ के तहत एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) से हर महीने 12 फीसदी पैसा कटता है। यह पैसा उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। एंप्लॉयर भी एंप्लॉयीज के लिए हर महीने 12 फीसदी (बेसिक सैलरी प्लस डीए) का कंट्रिब्यूशन करता है। लेकिन, इस 12 फीसदी में से 8.33 फीसदी एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जाता है और 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाता है। रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयीज को जो हर महीने पेंशन मिलती है, वह एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जमा पैसे से ही मिलती है।

नए नियम के मुताबिक, अब ऐसे एंप्लॉयीज भी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के तहत आएंगे, जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक होगी। अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है तो इसका 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयीज की सैलरी से जाएगा। यह अमाउंट 3000 रुपये होगा। 3000 रुपये का ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। एंप्लॉयर को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा। इससे एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट पर फायदा होगा।

सवाल है कि अगर किसी एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी 40,000 है या 50,000 रुपये है तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई कंपनियों में पहले से एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी के आधार पर ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन होता है। ऐसी कंपनियों के एंप्लॉयीज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है और पहले से आपकी बेसिक सैलरी पर 12-12 फीसदी कंट्रिब्यूशन का नियम लागू है तो आपकी नेट सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में पहले की तरह आपकी 40,000 की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी यानी 6 हजार रुपये ईपीएफ अकाउंट में जमा होगे। 6,0000 रुपये का कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा, जिसका 8.33 फीसदी एंप्लॉयी के पेंश फंड में जाएगा और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाएगा। इसका मतलब है कि आपके रिटायरमेंट बेनेफिट भी पहले की तरह बने रहेंगे।

अगर आपका एंप्लॉयर कहता है कि वह सिर्फ 25,000 रुपये की नई वेज सीलिंग का पालन करेगा तो आपकी सैलरी से सिर्फ 3000 रुपये कटेंगे। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। ऐसी स्थिति में आपकी नेट सैलरी घट जाएगी, क्योंकि पहले के नियम के तहत एंप्लॉयर 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) पर आपका पैसा काटता था और खुद भी उतना कंट्रिब्यूशन करता था। यह बात 50,000 की बेसिक सैलरी पर भी लागू होगी। बेसिक सैलरी 50,000 होने के बावजूद एंप्लॉयर कंट्रिब्यूशन के लिए सिर्फ 25,000 बेसिक सैलरी की सीमा का इस्तेमाल करेगा।

Mahindra Thar OG launched at Rs 10.32 lakh

Mahindra Thar OG launched at Rs 10.32 lakh
Mahindra Thar OG launched

Mahindra has launched the Thar OG at prices starting at Rs 10.32 lakh (ex-showroom). The second update to the Thar 3-door in just over a year brings a new ‘OG” suffix, new-gen platform, revised suspension and steering, more powerful engine options, plus refreshed styling and safety features over the outgoing model.

  • 6 airbags and disc brakes are now standard across variants.
  • 3-door model now gets electric power steering and frequency dependent dampers.
  • Turbo-petrol and mHawk diesel engines now produce more power.

Mahindra Thar OG prices and variants

The starting price of the Mahindra Thar OG is Rs 10.32 lakh, which means it shares its base price with the entry-level AXT trim of the outgoing model. The 2026 Mahindra Thar continues to rival other body-on-frame SUVs such as the Force Gurkha and Maruti Suzuki Jimny.

Mahindra Thar OG exterior

The 3-door version now sports a new grille, lighting signatures and colour options

The front fascia of the Mahindra Thar OG features a redesigned grille with ‘Thar’ branding, flanked by new LED headlamps with signature C-shaped daytime running lights (DRLs). There are also LED fog lamps with a built-in cornering function. The overall look isn’t too different to what we see with the Thar Roxx.

Mahindra has also revised the front and rear bumpers of the new Thar OG, while equipping the SUV with a wider track than its predecessor. The 2026 update introduces new 19-inch alloy wheels, revised LED tail-lamps and ‘OG’ branding on the tailgate. The existing colour options aside, the Thar OG adds Artemis Silver and Jeans Blue shades to the list as well.

Mahindra Thar OG interior and features

The cabin of the Thar 3-door now gets additional comfort-oriented upgrades

While the general design hasn’t been altered in any major way, the Thar OG comes with a few notable upgrades over its predecessor. There’s a new Truffle Brown leatherette upholstery and an armrest for the second row with integrated cupholders. Mahindra claims that the Thar OG features lower NVH (noise, vibration and harshness) levels as compared to the previous model.

Mahindra Thar OG safety equipment

The Thar 3-door now gets 6 airbags and all-round disc brakes as standard now

In what is a first for the Mahindra Thar 3-door, 6 airbags are now offered as standard. Mahindra says that this is the first car in its segment to feature a ‘4 Head Pelvis Thorax Shoulder (HPTS)’ airbag system, which the brand claims is designed to protect the head, pelvis, thorax and shoulder region of the front and rear occupants in case of a side impact.

Mahindra has also upgraded the braking system, with the Thar 3-door now sporting disc brakes at all four corners across the line-up. This is paired with an ESP suite (includes roll-over mitigation, traction control, hill-hold control and vehicle dynamics control) on all trims, while front parking sensors will be available on those higher up in the line-up.

Mahindra Thar OG platform and suspension

The Thar 3-door features Mahindra’s ‘M_Glyde 4G’ platform and ‘DAVINCI’ dampers

The Mahindra Thar OG is based on the Indian automaker’s so-called “M_Glyde 4G” platform, which was first seen underpinning the larger Thar Roxx. Mahindra says that this platform offers higher structural stiffness than before. Another first for the Thar 3-Door is its rear Pentalink suspension with a Watts Link – the Roxx gets this too. According to the brand, this setup controls lateral movement of the rear axle better.

The 2026 Thar also gains the Frequency Dependent Damping (FDD) technology, also known as “DAVINCI dampers” in Mahindra’s parlance. The automaker claims that the updated suspension setup of the Thar 3-door will offer a plush ride when compared to the old model.

Mahindra Thar OG off-road capability and steering tech

Other noteworthy additions include a new locking differential and electric power steering 

The 2026 update sees the Mahindra Thar packing an Electronic Locking Differential (ELD). The system can lock the rear axle electronically to ensure engine power is sent to the wheel with the maximum grip. In theory, this helps improve traction when traversing slippery surfaces such as mud or sand. There are now dedicated terrain modes such as Mud, Sand and Snow. 

Another major change with the Mahindra Thar is the shift from hydraulic power steering to an electric power steering (EPS) setup. This should make low-speed manoeuvring and parking easier, which were areas that the old model felt cumbersome.

Mahindra Thar OG engine and transmission details

All but the base diesel engine have been uprated for improved performance

The Mahindra Thar continues to be offered with three engine options as before. However, the 2.0-litre direct-injection turbo-petrol unit now develops 162hp and 330Nm – that’s a bump of 10hp and up to 30Nm over the old model. The 2.2-litre diesel mill has also seen its output go up, now making 152hp and 330Nm, signifying an increase of 18hp and 30Nm.

On the other hand, the entry-level 1.5-litre diesel engine has been retained as is, producing 117hp and 300Nm of torque. Transmission choices with the Mahindra Thar OG include a 6-speed manual and a 6-speed torque-converter automatic. Depending on the variant, the Thar 3-door can be had with either rear-wheel drive (RWD) or four-wheel drive (4WD).

Also read

Saudi’s CEER debuts with all-electric Exobot sedan and SUV

Tata Sierra Dark Edition launched at Rs 13.99 lakh

Coal India Share Price : ब्रोकरेज रिपोर्ट ने भरा जोश, 3% से ज्यादा भागा शेयर, जानिए क्या जारी रहेगी तेजी

Coal India Share Price : ब्रोकरेज रिपोर्ट के चलते आज बाजार कोल इंडिया में जोरदार एक्शन है। फिलहाल यह शेयर एनएसई पर 12.20 यानी 2.94% की तेजी के साथ 427 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। इंट्राडे में इसने 428.75 रुपए का हाई छुआ है। स्टॉक का 52 वीक हाई 491.25 रुपए है। स्टॉक में भारी वॉल्यूम के साथ तेजी आई है। फिलहाल इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 10,406,503 शेयर और मार्केट कैप 263,025 करोड़ रुपए पर दिख रहा है। 1 हफ्ते में यह शेयर 1.80 फीसदी और 1 महीने में 5.33 फीसदी बढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसमें 8.13 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।

मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक को किया अपग्रेड

CNBC-TV18 के मुताबिक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने इस स्टॉक को अपग्रेड किया है और इसका टारगेट प्राइस बढ़ाया है। ब्रोकरेज ने स्टॉक की रेटिंग बढ़ाकर ओवरवेट कर दी है और इसका लक्ष्य 480 रुपए सेट किया है। इस टारगेट का मतलब है कि स्टॉक के सोमवार के क्लोजिंग लेवल से इसमें 15.75% की बढ़त हो सकती है। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि थर्मल पावर की बढ़ती मांग, प्लांट में इन्वेंट्री का तेज़ी से कम होना और ग्लोबल स्तर पर थर्मल कोयले की बढ़ती कीमतें वॉल्यूम ग्रोथ और ई-ऑक्शन प्रीमियम में बढ़ोतरी को सपोर्ट करेंगी।

ब्रोकरेज के मुताबिक इन वजहों से कंपनी की अर्निंग में अच्छी बढ़ोतरी होनी चाहिए और इससे आने वाले कुछ महीनों में स्टॉक के प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिल सकती है। मॉर्गन स्टेनली ने वॉल्यूम और ई-ऑक्शन प्रीमियम के अपने अनुमानों में बदलाव किया है। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 का EPS (प्रति शेयर आय) अनुमान 20% बढ़ गया है।

वन ईयर फारवर्ड P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) अनुपात के हिसाब से 6.6 गुने पर,कोल इंडिया का स्टॉक अपने लॉन्ग टर्म औसत के आसपास ट्रेड कर रहा है। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि अच्छे नतीजों के कारण यह मल्टीपल बना रहेगा।

कंपनी के प्रदर्शन पर एक नजर

इस महीने की शुरुआत में कोल इंडिया ने अगस्त के लिए अपना शुरुआती बिज़नेस अपडेट जारी किया था। अगस्त में कोल इंडिया का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले 5.7% घटकर 47.5 MT रह गया। हालांकि,ऑफटेक 5.5% बढ़कर 60.6 MT हो गया। इस साल अब तक, अप्रैल-अगस्त की अवधि में कोल इंडिया का प्रोडक्शन 267.5 MT रहा जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.5% कम है। कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना प्रोडक्शन टारगेट 815 MT तय किया है।

अप्रैल-अगस्त की अवधि में कोयले की सप्लाई सालाना आधार पर 6.7% बढ़कर 322.9 MT हो गई। कोल इंडिया के ई-ऑक्शन प्रीमियम में पिछली समान अवधि की तुलना में 59% की बढ़ोतरी देखी गई। अप्रैल-अगस्त 2026 की अवधि के लिए ई-ऑक्शन प्रीमियम 46% बढ़ा है, जबकि अप्रैल-अगस्त 2025 में यह 35% था।

CNBC-TV18 के मुताबिक कोल इंडिया पर नजर रखने वाले 26 एनालिस्ट में से 16 ने इसे ‘बाय’ रेटिंग दी है,जबकि पांच-पांच एनालिस्ट ने स्टॉक पर ‘होल्ड’ और ‘सेल’रेटिंग दी है।

 

Dixon Tech Share Price : करीब 3% टूटा शेयर, स्टॉक पर नुवामा की रिपोर्ट ने बनाया दबाव

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000 हुई, आपके वेतन और पेंशन पर क्या असर होगा?

EPFO salary Hike: सरकार ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवरेज के लिए वेज सीलिंग यानी सैलरी सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इसका मकसद ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “प्रोविडेंट फंड कटौती के लिए नई वेतन सीमा अब ₹25,000 प्रति माह होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।”

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा, “संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू हो गई है।” EPFO वेतन सीमा 2004 और 2014 के बीच बदली नहीं गई थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया था। सितंबर 2014 से पहले वेतन सीमा ₹6,500 प्रति माह थी। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैलरी और आय में लगातार बढ़ोतरी और संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने को देखते हुए अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

इस फ़ैसले से सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ होगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “यह फैसला ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत बीमा कवरेज का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।”

सैलरी बढ़ने से नौकरीपेशा को क्या होगा फायदा?

यह बदलाव प्रोविडेंट फंड योगदान और पेंशन योग्य सैलरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा। अभी, ₹15,000 से ज्यादा मासिक वेतन वाली नौकरी शुरू करने वाला कोई नया कर्मचारी अपने आप EPF के दायरे में नहीं आता है। लेकिन अब वेतन सीमा (wage ceiling) बढ़ने से हर महीने ₹15,000 से ₹25,000 कमाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी दायरे में आ जाएगा।

सरकार ने कहा कि सितंबर 2014 में पिछली बार सैलरी सीमा बढ़ाए जाने के बाद से देश भर में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही संगठित क्षेत्र में रोजगार का विस्तार भी हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कैबिनेट का यह फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सोशल सिक्योरिटी देगा और संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी बढ़ावा देगा।”

वेज सीलिंग बढ़ने पर पेंशन पर क्या असर होगा?

इसका सबसे बड़ा और लंबे समय का असर एंप्लॉय पेंशन स्कीम (EPS) के तहत मिलने वाले पेंशन फायदों पर पड़ सकता है। स्टैंडर्ड EPS फ्रेमवर्क के तहत पेंशन-योग्य वेतन की सीमा 2014 से ₹15,000 तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे असल में एम्प्लॉयर का EPS योगदान पेंशन-योग्य वेतन के 8.33% के हिसाब से लगभग ₹1,250 प्रति माह तक सीमित हो गया था। अब जब यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो रही है, तो इसके हिसाब से 8.33% योगदान लगभग ₹2,083 प्रति माह होगा।

इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर नई लिमिट लागू होती है, उनके लिए EPS में ज्यादा से ज्यादा योगदान में हर महीने लगभग 833 रुपये की बढ़ोतरी होगी। स्टैंडर्ड EPS पेंशन फॉर्मूले के तहत पेंशन मुख्य रूप से पेंशन योग्य सैलरी और पेंशन योग्य सर्विस से जुड़ी होती है।

अधिकारी का अनुमान है कि 35 साल की पेंशन योग्य सर्विस वाले कर्मचारी की मासिक पेंशन, नई लिमिट के हिसाब से गिनी गई सर्विस के लिए लगभग 7,500 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो सकती है। यह पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट के आधार पर गिनी गई पेंशन की तुलना में लगभग 66% की बढ़ोतरी होगी।

EPFO क्या है?

EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक का मैनेजमेंट करता है। यह एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का संचालन करता है। लेटेस्ट EPFO ​​आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.98 करोड़ सदस्य करीब 7.68 लाख कंपनियों से जुड़े हैं। EPS के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलता है। EDLI स्कीम EPF सदस्यता से जुड़ा इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है।

ये भी पढ़ें- EPS Pension: नई वेज सीलिंग के बाद अब मिलेगी ₹12,500 पेंशन! समझिए पूरा गणित

Vega Helmets factory visit: Lightweight from a heavyweight

Vega Helmets factory visit: Lightweight from a heavyweight
Vega helmet manufacturing facility with workers assembling and finishing motorcycle helmets at multiple workstations, surrounded by rows of helmets and production equipment.

Axor helmets is the premium brand from Belagavi-based motorcycle helmet giant Vega. In existence since the early 1980s, Vega is one of India’s biggest motorcycle helmet manufacturers today, with an annual capacity of 9 million helmets a year across six manufacturing facilities. 

That translates to 25,000 units a day, and we got a sense of what an operation of this scale can look like by visiting one of the company’s production facilities in Belagavi, Karnataka. The facility we visited was one of Vega’s older units, which explained why many of the processes were more labour-intensive than I’d expected. What also came as a surprise was just how much of the manufacturing process is now in-house.

Tri-composite shell is moulded in-house and cut out using a CNC water jet.

Everything from the plastic components for the vents to the EPS inner liner and even the polycarbonate visors is made by Vega. The company manufactures its own shells too, and the speed with which an ABS plastic shell can be made is what greatly contributes to being able to produce so many helmets in a day. It takes just 90 seconds for a bunch of plastic pellets to be melted and injection-moulded into a shell. The moulding posts are then cut off, and the shell slowly gets transformed into a helmet as it passes through various stages in the factory. 

Once the ABS shell is processed, it is prepped for painting. The painting process in this plant was mostly manual, but there was an automated machine applying a clear coat. A separate UV chamber cures the clear-coated helmets (immediately for clear lacquer and about half an hour for matt lacquer). While some helmets stop with solid colours, many of them have complex water-transfer graphics that are applied to the helmet. 

All plastic components, including the polycarbonate visors, are made in the same facility.

There are literally thousands of painted shells stacked on racks across the factory floor, waiting for assembly. We spotted helmets with KTM, TVS racing, Royal Enfield and Ather branding, which was a reminder of how many of India’s top manufacturers source their helmets from Vega. 

With the painting process complete, components like vents, chin straps, EPS liner and comfort liner are all installed before the helmets are boxed and ready to ship. Watching it all come together was quite interesting, but the really fascinating part lay ahead when we were taken to the top floor of the factory.

This is where Vega makes its fibreglass and carbon-fibre shells. Fibreglass helmets are still made today for international clients, and the company also has a long history of making carbon-fibre helmets as well. This goes all the way back to 1999, when it made its first pudding-bowl style carbon-fibre helmet for the American market under the Daytona Helmets brand. 

Uttam Chandak, joint MD and R&D head, showcasing the composite materials.

Vega uses balloon moulding technology to make its carbon-fibre shells, and it is based on the same process used for the fibreglass helmets. A tri-composite structure of carbon fibre, aramid and fibreglass enables the critical balance between lightness and impact absorption. The company used to hand cut out the visor aperture and vent holes in the CF shells post-moulding, but has now invested in a CNC water jet machine for the job. This enables much tighter tolerances and will help address customer complaints with excessive wind noise in current Axor carbon-fibre helmets. 

The latest MX Carbon helmet uses new materials, which have raised the price to Rs 20,000, compared to its predecessor. The company says another reason behind the high price is the longer manufacturing time, with the company being able to currently produce up to 8 CF helmets a day. 

With India’s premium two-wheeler market rapidly evolving, Vega is confident that there will be growing demand for such helmets, and has plans to bring out more models soon, including an ADV-style helmet. The company says it’s even working on making FIM-homologated and Snell-approved performance helmets, but that this could take a couple of years.

Having reasonably priced, fully locally manufactured carbon-fibre helmets isn’t something that many Indian motorcycle enthusiasts would have expected to be possible, but Vega Helmets is making that happen.

Experiencing the MX Carbon helmet

The Axor MX Carbon is certified to DOT, ISI and ECE 22 06 standards. It is available in three different shell sizes and weighs just 1,040g, plus or minus 50g, based on the shell size. We got to briefly try the helmet out at the Track 1 off-road facility in Belagavi on a number of vehicles, including an ATV, a buggy and a KTM 890 Adventure R. 

Of course, the lack of weight was highly appreciated, but the helmet also felt nicely balanced. The inner liner material was also softer and more comfortable than expected. I usually wear a size S helmet, and that applies here as well. The fit was mostly very good, without any unusual or uncomfortable pressure points, but I did notice that the tips of my ears made contact with the inner liner. 

The double D-ring closure system was easy to use, but the snap button to secure the strap could have had a more positive feedback when engaged. Overall quality is not bad for the price, but the finishing where the carbon-fibre panels join along the centre of the helmet was inconsistent across different units.

Stock to Buy: रॉकेट बन सकता है इस कंपनी का शेयर, जेफरीज ने दी खरीदने की सलाह

Stock to Buy: शेयर बाजार के कमजोर सेंटीमेंट के बीच अगर आप किसी मुनाफे वाले शेयर की तलाश में हैं तो आप हिताची एनर्जी इंडिया के शेयर के बारे में सोच सकते हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है। 17 सितंबर को शेयरों में तेजी दिखी। शेयर 3.31 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।

50 फीसदी से ज्यादा चढ़ सकता है शेयर 

जेफरीज ने हिताची एनर्जी इंडिया के शेयर के लिए 45,790 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से यह शेयर करीब 50 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने हिताची पर अपनी रिपोर्ट में कई बातें बताई हैं। उसने कहा है कि हिताची के मैनेजमेंट को भरोसा है कि भारत में पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन (T&D) पर निवेश बढ़ रहा है। इस सेगमेंट में अगले कई सालों तक बिजनेस के बड़े मौके बने रहेंगे।

सर्विसेज पर फोकस बढ़ाने का मिलेगा फायदा

ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी रेवेन्यू में अपनी सर्विसेज की हिस्सेदारी बढ़ा रही है। इससे आगे ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। उसने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BEES) और डेटा सेंटर्स के क्षेत्र में भी कंपनी के लिए बड़े कारोबारी मौके बताए हैं। जेफरीज का मानना है कि FY26-29 के दौरान कंपनी की अर्निंग्स प्रति शेयर (EPS) का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट 54 फीसदी रह सकता है।

शेयर ने सिर्फ तीन साल में पैसा सात गुना किया

हिताची एनर्जी इंडिया के शेयरों ने निवेशकों को मालामाल किया है। सिर्फ तीन साल में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा सात गुना से ज्यादा किया है। 22 सितंबर, 2023 को इस शेयर का प्राइस 4,183 रुपये था। अब कीमत 31,200 रुपये चल रही है। यह तीन साल में 625 फीसदी से ज्यादा रिटर्न है। इसका मतलब है कि अगर आपने तीन साल पहले हिताची के शेयर में एक लाख रुपये निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 7 लाख रुपये से ज्यादा हो गया होता।

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन कमजोर

बीते तीन सालों में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों का रिटर्न ज्यादा नहीं रहा है। निफ्टी ने इस दौरान 15.45 फीसदी का रिटर्न दिया है। सेंसेक्स ने इस दौरान 9.83 फीसदी का रिटर्न दिया है। इसका मतलब है कि बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच भी हिताची एनर्जी इंडिया के शेयरों का प्रदर्शन जोरदार रहा है।

यह भी पढ़ें: Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को 5 साल का एक्सटेंशन मिलने से टाटा ग्रुप के शेयरों को लगे पंख

17 सितंबर को भी बाजार पर दबाव 

भारतीय शेयर बाजारों में खासकर बीते दो सालों से काफी ज्यादा दबाव दिख रहा है। 17 सितंबर को भी बाजार के प्रमुख सूचकांकों में काफी उतार चढ़ाव दिखा। आखिर में सेंसेक्स लाल निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी हल्की मजूबती के साथ क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Venus Pipes Share: ₹372 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू को मिली मंजूरी, शेयर 8% भागा

Venus Pipes & Tubes Share Price: गुरुवार 17 सितंबर को BSE पर Venus Pipes & Tubes के शेयर की कीमत में 8% की तेजी आई और यह ₹2,078.10 के 52-हफ़्ते के नए हाई पर पहुंच गया। कंपनी के बोर्ड ने ₹1,670 प्रति शेयर के भाव पर 22.3 लाख इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंज़ूरी दी, जिससे ₹372 करोड़ जुटाए गए। इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा।

आयरन और स्टील प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी के शेयर की कीमत ने 15 सितंबर, 2026 को बने ₹2,045 के पिछले हाई को पार कर लिया। पिछले 9 ट्रेडिंग दिनों में Venus Pipes के शेयर की कीमत में 30% की बढ़ोतरी हुई है। यह 30 मार्च, 2026 को बने ₹888.45 के 52-हफ़्ते के निचले स्तर से 134% ऊपर आया है।

कंपनी ने बुधवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके बोर्ड ने अपनी बैठक में प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर ₹10 फेस वैल्यू वाले 22.27 लाख इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट को मंज़ूरी दी। शेयरों के इश्यू की कीमत ₹1,670 प्रति शेयर तय की गई, जिससे कुल फंड जुटाने की वैल्यू ₹372 करोड़ हो गई।

इस प्रेफरेंशियल इश्यू में 18 नॉन-प्रमोटर निवेशक शामिल होंगे, जिनमें आशीष कचोलिया, व्हाइटओक कैपिटल फंड, टाटा बिज़नेस साइकिल फंड, टाटा मल्टीकैप फंड, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, अशोका व्हाइटओक ICAV – अशोका व्हाइटओक इंडिया अपॉर्चुनिटीज़ फंड, इंडिया एकॉर्न फंड, व्हाइटओक कैपिटल इंडिया अपॉर्चुनिटीज फंड वगैरह शामिल हैं।

टाटा मल्टीकैप फंड को ₹15 करोड़ कीमत के 89,820 इक्विटी शेयर जारी किए गए हैं, जबकि आशीष कचोलिया को ₹30 करोड़ तक के 1.79 लाख इक्विटी शेयर जारी किए गए हैं। सबसे ज़्यादा शेयर किटारा PIIN 2401 को ₹50 करोड़ कीमत के 2.99 लाख इक्विटी शेयर जारी किए गए हैं ।

प्रेफरेंशियल इश्यू से पहले, 11 सितंबर, 2026 तक, कंपनी में प्रमोटर एंटिटीज़ की हिस्सेदारी 48.41% थी, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग 51.59% थी। इश्यू के बाद, कंपनी में प्रमोटर एंटिटीज़ की हिस्सेदारी 43.71% और पब्लिक शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी 56.29% होगी।

गुरुवार को वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स के शेयरों में 8% तक की बढ़त हुई और इन्होंने ₹2,095 का इंट्राडे हाई छुआ। स्टॉक अभी 6.4% ऊपर ₹2,062 पर ट्रेड कर रहा है और इसकी साल-दर-साल (YTD) बढ़त लगभग 80% तक पहुंच गई है। पिछले एक महीने में स्टॉक में लगभग 30% की बढ़त हुई है।

क्या है ICICI सिक्योरिटीज की राय

इश्यू प्राइस मौजूदा मार्केट प्राइस से 16% कम है, जो सेंटीमेंट के हिसाब से थोड़ा नेगेटिव है। हालांकि, बड़े और अनुभवी निवेशकों की भागीदारी कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और कमाई की संभावनाओं पर भरोसा जगाती है। ICICI सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि सबसे अहम बात यह है कि कर्ज चुकाने से ब्याज का खर्च काफी कम हो जाएगा और फंड जुटाने से EPS (प्रति शेयर आय) बढ़ेगी; अभी कंपनी पर ₹257 करोड़ का नेट कर्ज है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि वे वीनस पाइप्स को लेकर स्ट्रक्चरली पॉजिटिव हैं, क्योंकि इसकी वजह मजबूत डिमांड, कैपेसिटी बढ़ाना और ज़्यादा वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस करना है। ₹635 करोड़ के कुल ऑर्डर बुक के साथ, रेवेन्यू की स्थिति अच्छी बनी हुई है। प्रेफरेंशियल इश्यू के बाद, प्रमोटर की हिस्सेदारी 48.4% से घटकर 43.7% होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, ICICI सिक्योरिटीज फंड जुटाने को स्ट्रक्चरली पॉजिटिव मानती है, क्योंकि बैलेंस शीट मजबूत होने, फाइनेंस कॉस्ट कम होने और फॉरवर्ड इंटीग्रेशन से ग्रोथ के अगले चरण को सपोर्ट मिल सकता है

Turtlemint Fintech Solutions में 41% की तेजी संभव, मोतीलाल ओसवाल ने शुरु की कवरेज, क्या आप करेंगे निवेश

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF Pension: ₹12500 महीना तक हो सकती है पेंशन, समझिए सरकार के नए फैसले का पूरा असर

EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

अभी तक ₹15,000 तक के वेतन पर EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज लागू होती थी। यह सीमा 1 सितंबर 2014 से नहीं बदली थी। नई सीमा लागू होने पर ज्यादा कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

पेंशन में 66.7% तक बढ़ोतरी

इस फैसले का सीधा असर EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना पर भी पड़ने की उम्मीद है। वजह है कि पेंशन की कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली वेतन सीमा भी ₹25,000 हो सकती है।

EPS में पेंशन का फॉर्मूला इस तरह है:

पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70

अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 माना जाता है। ऐसे में 35 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कर्मचारी की फॉर्मूला आधारित पेंशन करीब ₹7,500 बनती है।

अगर यही सीमा ₹25,000 हो जाती है, तो 35 साल की सेवा पर पेंशन ₹12,500 हो सकती है। यानी फॉर्मूला के हिसाब से पेंशन में 66.7% की बढ़ोतरी हो सकती है।

पेंशन योग्य सेवा₹15,000 वेतन सीमा पर पेंशन₹25,000 वेतन सीमा पर पेंशनसंभावित बढ़ोतरी
10 साल₹2,143₹3,57166.70%
20 साल₹4,286₹7,14366.70%
25 साल₹5,357₹8,92966.70%
30 साल₹6,429₹10,71466.70%
35 साल₹7,500₹12,50066.70%

Zaggle की CHRO लता अय्यर ने कहा, ‘अगर बढ़ी लिमिट को EPS की कैलकुलेशन में लागू किया जाता है, तो पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी पेंशन योग्य सेवा और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगी।’

EPF में ज्यादा पैसा कट सकता है

अब बात EPF की। यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से EPF की कटौती तुरंत बढ़ जाएगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ₹15,000 की सीमा पर EPF योगदान तय करती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कर्मचारी के वास्तविक बेसिक पे पर योगदान करती हैं। इसलिए नई व्यवस्था का असर कर्मचारी की मौजूदा पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा।

मान लीजिए अभी किसी कर्मचारी का EPF योगदान ₹15,000 की सीमा पर हो रहा है। 12% के हिसाब से हर महीने कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 कटते हैं। अगर नई ₹25,000 की सीमा पर 12% योगदान लागू होता है, तो यह रकम बढ़कर ₹3,000 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,200 ज्यादा EPF में जाएगा।

इसका सीधा असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,200 तक कम हो सकती है। हालांकि, यह पैसा कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में ही जाएगा।

हर कर्मचारी की सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा

जिन कर्मचारियों का EPF योगदान पहले से ही उनके वास्तविक बेसिक पे पर होता है, उन पर नई सीमा का तुरंत कोई खास असर नहीं पड़ सकता।

मसलन, अगर किसी कर्मचारी की कंपनी पहले से ही ₹25,000 या उससे ज्यादा के बेसिक पे पर 12% EPF काट रही है, तो केवल वेतन सीमा बढ़ने से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव हो।

Choice International की CHRO नेहा जैन ने कहा, ‘अगर बढ़ी हुई सीमा पर EPF योगदान अनिवार्य होता है, तो फिलहाल ₹15,000 की सीमा पर 12% योगदान करने वाला कर्मचारी हर महीने ₹1,800 की जगह ₹3,000 योगदान करेगा। इससे टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹1,200 तक की कमी हो सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर योगदान अभी की तरह मौजूदा सीमा पर ही कैप रहता है, तो टेक-होम सैलरी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए अंतिम नोटिफिकेशन और योगदान का नया ढांचा काफी अहम होगा।’

EPF Wage Ceiling Hike: केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई सैलरी लिमिट, 51 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

Tenneco Clean Air Share: 75% की तेजी के साथ ये शेयर लगाएगा लंबी छलांग, मोतीलाल ओसवाल ने दे दिया बड़ा टारगेट

Tenneco Clean Air India  Share Price: ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली कंपनी टेनेको क्लीन एयर इंडिया (Tenneco Clean Air India) के शेयर 15 सितंबर को 3 फीसदी की तेजी दिखाते नजर आए। शेयर में यह तेजी ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल द्वारा शेयर की कवरेज शुरु करने के बाद आई। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए ₹673 का टारगेट प्राइस दिया है।

ब्रोकरेज के ‘बेस केस’ टारगेट का मतलब है कि शुक्रवार को स्टॉक की क्लोजिंग कीमत ₹506.35 से इसमें 33% की बढ़त हो सकती है।

MOFSL को उम्मीद है कि टेनेको क्लीन एयर अपनी ग्रोथ के अगले चरण में प्रवेश करेगी। इसकी वजह क्लीन-एयर और सस्पेंशन प्रोडक्ट्स में कंपनी की लीडरशिप, कड़े एमिशन नियम, गाड़ियों का प्रीमियम होना, नए कस्टमर प्रोग्राम और बढ़ता एक्सपोर्ट है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 और FY29 के बीच कमाई में 19% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) होगी, जबकि इसी दौरान क्लीन-एयर और पावरट्रेन रेवेन्यू में लगभग 17% CAGR से बढ़ोतरी की उम्मीद है।

MOFSL के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक ₹12,400 करोड़ था, जो इसके FY28 रेवेन्यू टारगेट का 100% से ज़्यादा कवरेज देता है।

मजबूत मार्केट पोजीशन

टेनेको क्लीन एयर का कमर्शियल व्हीकल OEM को सप्लाई किए जाने वाले क्लीन-एयर प्रोडक्ट्स में लगभग 58% मार्केट शेयर है, ट्रैक्टर को छोड़कर ऑफ-हाईवे एप्लीकेशन में 68% और पैसेंजर व्हीकल्स में 20% शेयर है। पैसेंजर-व्हीकल शॉक एब्जॉर्बर और स्ट्रट्स में भी इसका लगभग 55% शेयर है।

MOFSL ने कहा कि ग्लोबल टेनेको नेटवर्क के साथ कंपनी के जुड़ने से उसे टेक्नोलॉजी, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, ग्लोबल OEM संबंध, रिसर्च और डेवलपमेंट क्षमताएं और मैन्युफैक्चरिंग की विशेषज्ञता मिलती है। ब्रोकरेज ने कहा कि कस्टमर के प्रोडक्ट-डेवलपमेंट साइकिल में शामिल होने से ‘स्विचिंग कॉस्ट’ (दूसरे सप्लायर पर जाने की लागत) भी बढ़ जाती है।

क्या है ग्रोथ के मुख्य कारण

ब्रोकरेज BS-VII, CAFE III और TREM-V को प्रति गाड़ी ज़्यादा कंटेंट (पुर्जों/तकनीक) के महत्वपूर्ण कारण के तौर पर देखती है।

कमर्शियल गाड़ियों के लिए, BS-VII और उससे जुड़े एमिशन नियमों से क्लीन-एयर कंटेंट बढ़ने की उम्मीद है, जबकि लाइट कमर्शियल गाड़ियों में कम पैठ (penetration) के कारण मार्केट-शेयर बढ़ाने की गुंजाइश है। ट्रैक्टर एक बड़ा मौका देते हैं, क्योंकि 30-50 HP वाले सेगमेंट का मार्केट में 90% से ज़्यादा हिस्सा है। MOFSL को उम्मीद है कि जैसे-जैसे आफ्टर-ट्रीटमेंट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, TREM-V से प्रति गाड़ी क्लीन-एयर कंटेंट ₹5,000 – ₹7,000 तक बढ़ सकता है।

पैसेंजर गाड़ियों में, BS-VII और CAFE III से क्लीन-एयर कंटेंट लगभग 1.3 गुना बढ़ सकता है, जिसकी वजह गैसोलीन डायरेक्ट इंजेक्शन और गैसोलीन पार्टिकुलेट फिल्टर का ज़्यादा इस्तेमाल है। उम्मीद है कि 2028 से एक जापानी OEM के GPF प्रोग्राम से टेनेको के हॉट-एंड बिज़नेस में बढ़ोतरी होगी।

कंपनी ने एक बड़े भारतीय CV OEM के साथ एक नया क्लीन-एयर इंजन प्लेटफॉर्म, एक प्रमुख यूरोपीय कमर्शियल व्हीकल OEM के साथ एक प्रोग्राम और एक ग्लोबल OEM के दो मॉडल्स के लिए CNG प्लेटफॉर्म कोल्ड-एंड असेंबली प्रोग्राम भी हासिल किया है।

सस्पेंशन बिजनेस में 20% की बढ़ोतरी

MOFSL को उम्मीद है कि प्रीमियम बनाने, एक्सपोर्ट, बिज़नेस में ज़्यादा हिस्सेदारी और एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से FY26-FY29 के दौरान सस्पेंशन बिज़नेस में लगभग 20% CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) की बढ़ोतरी होगी।

भारत के पैसेंजर-व्हीकल सस्पेंशन मार्केट में टेनेको की हिस्सेदारी लगभग 55% है। इसका DaVinci DCx, जिसे फरवरी 2026 में महिंद्रा के साथ कमर्शियलाइज़ किया गया था, बहुत कम कीमत पर सेमी-एक्टिव सिस्टम जैसा लगभग 85-90% आराम देता है। MOFSL का मानना ​​है कि यह टेक्नोलॉजी ₹10-35 लाख वाले पैसेंजर-व्हीकल सेगमेंट के लिए काम आ सकती है, जिसका मार्केट में लगभग 70% हिस्सा है।

बढ़ेगा एक्सपोर्ट

टेनेको क्लीन एयर को ग्लोबल टेनेको नेटवर्क में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी तैयार किया जा रहा है, जिसके प्रोडक्ट्स नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक और अफ्रीका में सप्लाई किए जाते हैं।

कंपनी अभी लगभग 18-22 देशों में एक्सपोर्ट करती है, जबकि MOFSL को उम्मीद है कि FY29 तक एक्सपोर्ट वैल्यू-एडेड रेवेन्यू का 15% हो जाएगा, जो अभी 7% है। ब्रोकरेज के अनुसार, मौजूदा ऑर्डर बुक में एक्सपोर्ट का हिस्सा लगभग 14% है और आम तौर पर घरेलू बिज़नेस की तुलना में इसमें ज़्यादा मार्जिन मिलता है।

कंपनी के फाइनेंशियल अनुमानों पर ब्रोकरेज की राय

MOFSL को उम्मीद है कि टेनेको का रेवेन्यू FY26 में ₹5,404 करोड़ से बढ़कर FY29 तक ₹8,985 करोड़ हो जाएगा। इसी दौरान EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के ₹925.5 करोड़ से बढ़कर ₹1,560.8 करोड़ होने का अनुमान है, और EBITDA मार्जिन 17.1% से बढ़कर 17.4% हो जाएगा।

टैक्स के बाद एडजस्टेड प्रॉफ़िट के FY26 में ₹630.4 करोड़ से बढ़कर FY29 में ₹1,026 करोड़ होने का अनुमान है, जबकि EPS के ₹15.6 से बढ़कर ₹25.4 होने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी की मज़बूत बैलेंस शीट इस ग्रोथ में मदद करेगी। टेनेको क्लीन एयर की नेट कैश पोज़िशन है, वर्किंग कैपिटल नेगेटिव है और कोर RoCE 90% से ज़्यादा है। साथ ही, कैश-फ़्लो कन्वर्ज़न के भी हेल्दी रहने की उम्मीद है, जिसमें CFO/EBITDA 70% से ज़्यादा और FCF/PAT 80% से ज़्यादा रहेगा।

टेनेको क्लीन एयर का वैल्यूएशन

MOFSL के ₹506 के रेफरेंस प्राइस पर, स्टॉक FY28E की कमाई के 26.1 गुना और FY29E की कमाई के 19.9 गुना पर ट्रेड कर रहा था। ब्रोकरेज ने स्टॉक का वैल्यूएशन सितंबर 2028 की कमाई के 30 गुना के आधार पर किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹673 तय हुआ है।

लंबी अवधि में दे सकता है 75% का रिटर्न

मोतीलाल ओसवाल के ‘बुल केस’ (तेजी वाले अनुमान) में FY29 तक 22.7% रेवेन्यू CAGR, BS-VII को पूरी तरह लागू करने, EV को धीरे अपनाने और सस्पेंशन की तेज़ी से बढ़ती मांग को आधार माना गया है। इस स्थिति में टेनेको क्लीन एयर (Tenneco Clean Air) के लिए ₹886 का प्राइस टारगेट तय किया गया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा कीमत से इसमें लगभग 75% की बढ़त की संभावना है।

Stock Crash: एक खबर और 20% टूटा PNC Infratech का शेयर, पहुंचा 52-हफ्ते के लो पर, जानें पूरा मामला

Kalyan Jewellers Share Price: 50% अभी ओर चढ़ सकता है शेयर, ब्रोकरेज बुलिश, क्या करेंगे आप निवेश!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।