Coal India Share Price : ब्रोकरेज रिपोर्ट ने भरा जोश, 3% से ज्यादा भागा शेयर, जानिए क्या जारी रहेगी तेजी

Coal India Share Price : ब्रोकरेज रिपोर्ट के चलते आज बाजार कोल इंडिया में जोरदार एक्शन है। फिलहाल यह शेयर एनएसई पर 12.20 यानी 2.94% की तेजी के साथ 427 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। इंट्राडे में इसने 428.75 रुपए का हाई छुआ है। स्टॉक का 52 वीक हाई 491.25 रुपए है। स्टॉक में भारी वॉल्यूम के साथ तेजी आई है। फिलहाल इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 10,406,503 शेयर और मार्केट कैप 263,025 करोड़ रुपए पर दिख रहा है। 1 हफ्ते में यह शेयर 1.80 फीसदी और 1 महीने में 5.33 फीसदी बढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसमें 8.13 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।

मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक को किया अपग्रेड

CNBC-TV18 के मुताबिक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने इस स्टॉक को अपग्रेड किया है और इसका टारगेट प्राइस बढ़ाया है। ब्रोकरेज ने स्टॉक की रेटिंग बढ़ाकर ओवरवेट कर दी है और इसका लक्ष्य 480 रुपए सेट किया है। इस टारगेट का मतलब है कि स्टॉक के सोमवार के क्लोजिंग लेवल से इसमें 15.75% की बढ़त हो सकती है। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि थर्मल पावर की बढ़ती मांग, प्लांट में इन्वेंट्री का तेज़ी से कम होना और ग्लोबल स्तर पर थर्मल कोयले की बढ़ती कीमतें वॉल्यूम ग्रोथ और ई-ऑक्शन प्रीमियम में बढ़ोतरी को सपोर्ट करेंगी।

ब्रोकरेज के मुताबिक इन वजहों से कंपनी की अर्निंग में अच्छी बढ़ोतरी होनी चाहिए और इससे आने वाले कुछ महीनों में स्टॉक के प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिल सकती है। मॉर्गन स्टेनली ने वॉल्यूम और ई-ऑक्शन प्रीमियम के अपने अनुमानों में बदलाव किया है। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 का EPS (प्रति शेयर आय) अनुमान 20% बढ़ गया है।

वन ईयर फारवर्ड P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) अनुपात के हिसाब से 6.6 गुने पर,कोल इंडिया का स्टॉक अपने लॉन्ग टर्म औसत के आसपास ट्रेड कर रहा है। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि अच्छे नतीजों के कारण यह मल्टीपल बना रहेगा।

कंपनी के प्रदर्शन पर एक नजर

इस महीने की शुरुआत में कोल इंडिया ने अगस्त के लिए अपना शुरुआती बिज़नेस अपडेट जारी किया था। अगस्त में कोल इंडिया का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले 5.7% घटकर 47.5 MT रह गया। हालांकि,ऑफटेक 5.5% बढ़कर 60.6 MT हो गया। इस साल अब तक, अप्रैल-अगस्त की अवधि में कोल इंडिया का प्रोडक्शन 267.5 MT रहा जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.5% कम है। कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना प्रोडक्शन टारगेट 815 MT तय किया है।

अप्रैल-अगस्त की अवधि में कोयले की सप्लाई सालाना आधार पर 6.7% बढ़कर 322.9 MT हो गई। कोल इंडिया के ई-ऑक्शन प्रीमियम में पिछली समान अवधि की तुलना में 59% की बढ़ोतरी देखी गई। अप्रैल-अगस्त 2026 की अवधि के लिए ई-ऑक्शन प्रीमियम 46% बढ़ा है, जबकि अप्रैल-अगस्त 2025 में यह 35% था।

CNBC-TV18 के मुताबिक कोल इंडिया पर नजर रखने वाले 26 एनालिस्ट में से 16 ने इसे ‘बाय’ रेटिंग दी है,जबकि पांच-पांच एनालिस्ट ने स्टॉक पर ‘होल्ड’ और ‘सेल’रेटिंग दी है।

 

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Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

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