EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000 हुई, आपके वेतन और पेंशन पर क्या असर होगा?

EPFO salary Hike: सरकार ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवरेज के लिए वेज सीलिंग यानी सैलरी सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इसका मकसद ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “प्रोविडेंट फंड कटौती के लिए नई वेतन सीमा अब ₹25,000 प्रति माह होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।”

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा, “संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू हो गई है।” EPFO वेतन सीमा 2004 और 2014 के बीच बदली नहीं गई थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया था। सितंबर 2014 से पहले वेतन सीमा ₹6,500 प्रति माह थी। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैलरी और आय में लगातार बढ़ोतरी और संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने को देखते हुए अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

इस फ़ैसले से सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ होगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “यह फैसला ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत बीमा कवरेज का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।”

सैलरी बढ़ने से नौकरीपेशा को क्या होगा फायदा?

यह बदलाव प्रोविडेंट फंड योगदान और पेंशन योग्य सैलरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा। अभी, ₹15,000 से ज्यादा मासिक वेतन वाली नौकरी शुरू करने वाला कोई नया कर्मचारी अपने आप EPF के दायरे में नहीं आता है। लेकिन अब वेतन सीमा (wage ceiling) बढ़ने से हर महीने ₹15,000 से ₹25,000 कमाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी दायरे में आ जाएगा।

सरकार ने कहा कि सितंबर 2014 में पिछली बार सैलरी सीमा बढ़ाए जाने के बाद से देश भर में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही संगठित क्षेत्र में रोजगार का विस्तार भी हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कैबिनेट का यह फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सोशल सिक्योरिटी देगा और संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी बढ़ावा देगा।”

वेज सीलिंग बढ़ने पर पेंशन पर क्या असर होगा?

इसका सबसे बड़ा और लंबे समय का असर एंप्लॉय पेंशन स्कीम (EPS) के तहत मिलने वाले पेंशन फायदों पर पड़ सकता है। स्टैंडर्ड EPS फ्रेमवर्क के तहत पेंशन-योग्य वेतन की सीमा 2014 से ₹15,000 तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे असल में एम्प्लॉयर का EPS योगदान पेंशन-योग्य वेतन के 8.33% के हिसाब से लगभग ₹1,250 प्रति माह तक सीमित हो गया था। अब जब यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो रही है, तो इसके हिसाब से 8.33% योगदान लगभग ₹2,083 प्रति माह होगा।

इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर नई लिमिट लागू होती है, उनके लिए EPS में ज्यादा से ज्यादा योगदान में हर महीने लगभग 833 रुपये की बढ़ोतरी होगी। स्टैंडर्ड EPS पेंशन फॉर्मूले के तहत पेंशन मुख्य रूप से पेंशन योग्य सैलरी और पेंशन योग्य सर्विस से जुड़ी होती है।

अधिकारी का अनुमान है कि 35 साल की पेंशन योग्य सर्विस वाले कर्मचारी की मासिक पेंशन, नई लिमिट के हिसाब से गिनी गई सर्विस के लिए लगभग 7,500 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो सकती है। यह पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट के आधार पर गिनी गई पेंशन की तुलना में लगभग 66% की बढ़ोतरी होगी।

EPFO क्या है?

EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक का मैनेजमेंट करता है। यह एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का संचालन करता है। लेटेस्ट EPFO ​​आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.98 करोड़ सदस्य करीब 7.68 लाख कंपनियों से जुड़े हैं। EPS के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलता है। EDLI स्कीम EPF सदस्यता से जुड़ा इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है।

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