गोदरेज ग्रुप का स्टॉक 55% उछल सकता है, कोटक ने ₹1010 का टारगेट दिया

गोदरेज ग्रुप की कंपनी Godrej Agrovet के शेयर मंगलवार, 1 सितंबर को 12% तक चढ़ गए। हालांकि, बाद में तेजी कुछ कम हुई। शेयर आखिर में 5.96% की बढ़त के साथ ₹652 पर बंद हुआ। कंपनी के शेयर में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली।

Kotak ने टारगेट बढ़ाया

Kotak Institutional Equities ने Godrej Agrovet पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,010 कर दिया है।

मंगलवार के क्लोजिंग प्राइस ₹652 के मुकाबले यह टारगेट करीब 55% ज्यादा है। इससे पहले Kotak ने 8 जुलाई 2026 को शेयर का टारगेट ₹850 रखा था। यानी ब्रोकरेज ने नया टारगेट करीब 19% बढ़ा दिया है।

₹4,500 करोड़ EBITDA का अनुमान

Kotak का मानना है कि कंपनी का EBITDA FY31 तक ₹4,500 करोड़ तक पहुंच सकता है। EBITDA मार्जिन 23% से ज्यादा रह सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी की ग्रोथ कम से कम 2040 तक मजबूत बनी रह सकती है।

ब्रोकरेज को खासतौर पर कंपनी के पाम ऑयल कारोबार से बड़ी उम्मीद है।

पाम ऑयल बिजनेस पर बड़ा दांव

Godrej Agrovet के पाम ऑयल बिजनेस ने FY26 में ₹430 करोड़ का EBITDA कमाया था। कंपनी को उम्मीद है कि FY31 तक यह आंकड़ा ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच जाएगा।

इसकी बड़ी वजह FFB यानी Fresh Fruit Bunch वॉल्यूम में दोहरे अंकों की ग्रोथ हो सकती है। Kotak का मानना है कि पाम ऑयल कारोबार में लंबी अवधि की मजबूत ग्रोथ की संभावना है। साथ ही मार्जिन भी स्थिर रह सकता है और कैपिटल पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अकेले पाम ऑयल बिजनेस की वैल्यू कंपनी के मौजूदा मार्केट कैप से भी ज्यादा हो सकती है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹12,872 करोड़ है। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ को देखते हुए Kotak ने इस कारोबार के लिए EBITDA मल्टीपल 15 गुना से बढ़ाकर 18 गुना कर दिया है।

वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स से भी उम्मीद

Kotak ने कहा कि कंपनी के कारोबार में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इससे आने वाले वर्षों में कमाई और प्रॉफिटेबिलिटी को सपोर्ट मिल सकता है।

पाम ऑयल कारोबार आगे चलकर कंपनी के लिए बड़ा वैल्यू ड्राइवर बन सकता है। स्टॉक को कवर करने वाले 5 अन्य एनालिस्ट भी शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग देते हैं।

जून तिमाही में मुनाफा घटा

FY27 की पहली तिमाही में कंपनी के नतीजे मिले-जुले रहे। जून तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 13.8% घटकर ₹128.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹149 करोड़ था।

हालांकि, रेवेन्यू 9.2% बढ़कर ₹2,855.2 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹2,614.3 करोड़ था।

EBITDA 10.9% घटकर ₹240.1 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹269.6 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी घटकर 8.41% रह गया। पिछले साल यह 10.32% था।

शेयर का हाल

Godrej Agrovet का शेयर मंगलवार को इंट्राडे में 12% तक चढ़ा। बाद में इसमें मुनाफावसूली दिखी और तेजी कम हो गई। शेयर आखिर में 5.96% की बढ़त के साथ ₹652 पर बंद हुआ।

पिछले एक महीने में शेयर करीब 22% चढ़ चुका है। यह 52 हफ्ते के हाई ₹760 से करीब 14% नीचे है। वहीं, 52 हफ्ते के लो ₹506.10 से करीब 29% ऊपर कारोबार कर रहा है।

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Lumax Auto Q1 Results: ऑटो कंपोनेंट कंपनी का मुनाफा 109% बढ़ा, रेवेन्यू में भी तगड़ा उछाल

Lumax Auto Q1 Results: ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Lumax Auto Technologies ने FY27 की शुरुआत मजबूत नतीजों के साथ की है। जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा दोगुने से ज्यादा यानी 109% बढ़कर 86.6 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 41.4 करोड़ रुपये था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 33% बढ़कर 1,363.6 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 1,026.4 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 52.3% बढ़कर 190.1 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 12.2% से बढ़कर 14% पहुंच गया।

नए प्रोडक्ट और ग्राहक जोड़ने पर फोकस

Lumax Auto Technologies नए और एडवांस प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है। कंपनी मौजूदा ग्राहकों से ज्यादा कारोबार हासिल करना चाहती है। इसके साथ ही नए व्हीकल प्लेटफॉर्म पर जगह बनाने और अलग-अलग बाजारों में नए ग्राहक जोड़ने की योजना है।

Lumax Jopp की हिस्सेदारी बेची

कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी Lumax Jopp Allied Technologies में अपनी पूरी 50% हिस्सेदारी जर्मनी की Jopp Holding GmbH को बेच दी है। बोर्ड ने इस सौदे को 8 मई 2026 को मंजूरी दी थी। जून तिमाही में यह सौदा पूरा हो गया।

इसके बाद Lumax Jopp Allied Technologies कंपनी की सब्सिडियरी नहीं रही। जून तिमाही के नतीजों में इस कंपनी का प्रदर्शन 29 जून 2026 तक शामिल किया गया है।

Lumax Auto ने क्या कहा?

Lumax Auto के मैनेजिंग डायरेक्टर अनमोल जैन ने कहा कि चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद कंपनी ने FY27 की अच्छी शुरुआत की है। रेवेन्यू बढ़ी और मुनाफा उससे भी तेज बढ़ा। उन्होंने कहा कि ग्रोथ कई प्रोडक्ट कैटेगरी में देखने को मिली है। मौजूदा प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ी है। साथ ही वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की मांग भी बढ़ी है।

ऑटो इंडस्ट्री ने भी FY27 की शुरुआत मजबूत की है। कंपनी के मुताबिक, व्हीकल प्रोडक्शन सालाना आधार पर 22% बढ़ा। सभी बड़े व्हीकल सेगमेंट में मांग अच्छी रही। प्रीमियम गाड़ियों की बढ़ती मांग और नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से ऑटो कंपोनेंट कंपनियों को फायदा मिल रहा है।

Lumax Auto का शेयर सोमवार को 2.12% की बढ़त के साथ 1,758.90 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में इसने 68.59% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: अग्रवाल टफन्ड ग्लास का रेवेन्यू 23% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पहुंची

Agarwal Toughened Glass Q1 Results: टफन्ड, लैमिनेटेड, इंसुलेटेड और सेफ्टी ग्लास बनाने वाली कंपनी Agarwal Toughened Glass India Ltd ने जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 22.86% बढ़कर ₹34.40 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹28 करोड़ था।

ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पर पहुंची

30 जून 2026 तक कंपनी की एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ रही। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने ₹95 करोड़ का रेवेन्यू और ₹22 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।

किन वजहों से बढ़ा कारोबार?

कंपनी ने बताया कि आर्किटेक्चरल, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू-एडेड ग्लास प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग से कारोबार को सहारा मिला। ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश भी किया जा रहा है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

अग्रवाल टफन्ड ग्लास के प्रमोटर और होल-टाइम डायरेक्टर महेश अग्रवाल ने कहा कि FY27 की शुरुआत सकारात्मक रही है। मजबूत ऑर्डर बुक और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस से कारोबार को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि हाल ही में कंपनी ने पूंजी भी जुटाई है। इससे बैलेंस शीट और मजबूत हुई है। अब कंपनी अगले चरण की ग्रोथ के लिए तैयार है।

आगे की क्या रणनीति है?

कंपनी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत करने पर काम कर रही है। फोकस इंसुलेटेड ग्लास, लैमिनेटेड ग्लास और जंबो ग्लास जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर रहेगा। कंपनी प्रीमियम कमर्शियल बिल्डिंग, एयरपोर्ट, मेट्रो रेल और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

मुनाफा बढ़ाने पर रहेगा फोकस

अग्रवाल टफन्ड ग्लास का लक्ष्य बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के जरिए मार्जिन बढ़ाना है। साथ ही कच्चे माल और बिजली की लागत को नियंत्रित करने के लिए सोर्सिंग और एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार किया जाएगा। कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी करना चाहती है, ताकि नए बाजारों में तेजी से और कम लागत पर डिलीवरी की जा सके।

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Gokul Agro Q1 Results: गोकुल एग्रो का मुनाफा 74% उछला, EBITDA में 52% की शानदार बढ़त

Gokul Agro Q1 Results: खाद्य तेल और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी गोकुल एग्रो रिसोर्सेज ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की बिक्री और मुनाफा दोनों बढ़े हैं। बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स, एक्सपोर्ट और नॉन-एडिबल बिजनेस ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।

रेवेन्यू ₹5,295 करोड़ के पार

अप्रैल-जून तिमाही में गोकुल एग्रो का शुद्ध मुनाफा 74% बढ़कर ₹123 करोड़ पहुंच गया। वहीं, कंपनी की कुल आय 7% बढ़कर ₹5,295 करोड़ पहुंच गई।

EBITDA 52% बढ़कर ₹217 करोड़ रहा। कंपनी का PAT मार्जिन 2.34% रहा और EPS ₹4.16 दर्ज किया गया। यानी हर मोर्चे पर कंपनी की कमाई मजबूत हुई।

कारोबार लगातार बढ़ रहा

गोकुल एग्रो के पास 575 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स का नेटवर्क है। इसकी कुल प्रोसेसिंग क्षमता 20 लाख MTPA है। कंपनी के उत्पाद भारत के 28 राज्यों और 33 देशों में बिकते हैं। पिछले पांच साल में कंपनी का रेवेन्यू 23% CAGR, EBITDA 35% CAGR और शुद्ध मुनाफा 54% CAGR की दर से बढ़ा है।

नए कारोबार पर फोकस

गोकुल एग्रो के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर ने कहा कि इस तिमाही में बायोडीजल प्लांट शुरू किया गया। साथ ही स्पेशलिटी फैट्स पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ। ई-कॉमर्स, इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों और एक्सपोर्ट के जरिए बाजार में पकड़ भी मजबूत हुई। इन कदमों से आने वाले समय में ग्रोथ को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या है प्लान?

गोकुल एग्रो अब कंज्यूमर ब्रांड्स, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स और एक्सपोर्ट बिजनेस पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके साथ ही क्षमता बढ़ाने और मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर भी फोकस रहेगा। कंपनी का मानना है कि खाद्य तेल की बढ़ती मांग और सरकार की नीतियों से आगे भी कारोबार को अच्छा सपोर्ट मिलेगा।

गोकुल एग्रो का शेयर गुरुवार को 0.75% की बढ़त के साथ 224.88 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 38.87% का रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में यह 45.79% चढ़ा है।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

500 रुपये से शुरू किया मशरूम बिजनेस, आज 3 लाख रुपये महीने का टर्नओवर, जानें युवक की सफलता की कहानी

बहुत से लोग अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पैसों की कमी की वजह से ऐसा नहीं कर पाते। आमतौर पर बिजनेस शुरू करने के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत होती है। लेकिन कुछ ऐसे कारोबार भी होते हैं जिन्हें बहुत कम निवेश से शुरू किया जा सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी की एक शख्स ने 500 रुपये से भी कम खर्च में कारोबार शुरू किया और आज अच्छी कमाई कर रहा है। ये कहानी कर्नाटक के रहने वाले महेश हनुमंत कोलूर की है। महेश ने बेहद कम निवेश के साथ मशरूम की खेती शुरू कर एक सफल कारोबार खड़ा कर दिया।

कृषि में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने 2021 में अपने घर के एक छोटे से कमरे से इस काम की शुरुआत की। शुरुआत में ये सिर्फ एक छोटा प्रयास था, लेकिन लगातार सीखने और मेहनत के दम पर उन्होंने इसे बड़े बिजनेस में बदल दिया। आज उनका मशरूम कारोबार हर महीने करीब 3 लाख रुपये का टर्नओवर करता है।

कैसे शुरू की खेती

महेश ने अपने घर के 10×10 फीट के एक छोटे कमरे से मशरूम की खेती शुरू की। उन्होंने 65 रुपये में एक किलो ऑयस्टर मशरूम स्पॉन खरीदा और उससे 30 मशरूम बैग तैयार किए। महेश ने बताया, “गेहूं का भूसा, स्पॉन और पॉलीबैग मिलाकर मेरा कुल खर्च 500 रुपये से भी कम था। शुरुआत में अनुभव की कमी के कारण 10 बैग खराब हो गए, लेकिन बाकी बैगों से करीब 500 से 600 ग्राम मशरूम प्रति बैग मिला। इस तरह मुझे कुल लगभग 10 किलो मशरूम की पैदावार हुई।” महेश की पहली फसल स्थानीय बाजार में 180 से 220 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकी, जिससे करीब दो महीने में उन्हें लगभग 2,000 रुपये की कमाई हुई।

300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा मशरूम

उन्होंने कहा, “इस पहली कमाई ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया और आगे काम करने की हिम्मत दी।” इसके बाद उन्होंने मुनाफे की रकम खर्च करने के बजाय कारोबार में दोबारा निवेश किया। अगले चरण में उन्होंने 200 मशरूम बैग तैयार किए और साफ-सफाई, नमी और तापमान को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने पर ध्यान दिया। महेश ने बताया, “करीब तीन महीने बाद मैंने लगभग 250 किलो मशरूम की पैदावार ली, जिसे स्थानीय बाजार में औसतन 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा। मशरूम की खेती मैंने ज्यादातर ट्रायल एंड एरर के जरिए सीखी।”

शुरुआत में आई परेशानियों से महेश ने हार नहीं मानी, बल्कि हर गलती से सीख लेकर अपनी खेती के तरीके बेहतर किए। हर नई फसल के साथ उनका अनुभव बढ़ता गया और इसी भरोसे के दम पर उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया। साल 2022 में उन्होंने ऑयस्टर मशरूम के साथ मिल्की मशरूम की खेती भी शुरू की। उन्होंने ऐसी किस्मों को चुना जो स्थानीय मौसम के अनुकूल थीं और जिन्हें कम लागत में आसानी से उगाया जा सकता था। महेश के मुताबिक, बटन मशरूम की तुलना में ऑयस्टर और मिल्की मशरूम की बाजार में अच्छी मांग रहती है, इसलिए इनसे बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी अधिक होती है।

बनाए मशरूम कुकीज

ताजे मशरूम जल्दी खराब होने से महेश को नुकसान का डर रहता था। इसका समाधान निकालते हुए उन्होंने मशरूम से लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया। सबसे पहले उन्होंने ऑर्गेनिक ऑयस्टर मशरूम, रागी और गुड़ से बनी मशरूम कुकीज तैयार कीं। महेश ने बताया, “शुरुआत में मैंने ये मशरूम कुकीज अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को चखने के लिए दी थीं। सभी को उनका स्वाद काफी पसंद आया। इसके बाद मैंने इन्हें लैब में टेस्ट कराया। रिपोर्ट में पता चला कि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है, जिससे ये हेल्थ का ध्यान रखने वाले लोगों और डायबिटीज़ के मरीजों के लिए भी अच्छा विकल्प बन सकती हैं।”

बढ़ाई मशरूम की खेती

मशरूम कुकीज को अच्छा रिस्पॉन्स मिलने के बाद महेश ने अपने उत्पाद दूसरे शहरों में भी बेचना शुरू किया। वह हर सप्ताहांत बेंगलुरु के ऑर्गेनिक किसान बाजारों में जाते थे, जहां ग्राहकों से मिले फीडबैक के आधार पर उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को और बेहतर बनाया। जैसे-जैसे महेश के कारोबार का विस्तार हुआ, उनके घर का छोटा सेटअप पर्याप्त नहीं रहा। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने 2023 में 30×20 फीट की एक नई मशरूम उत्पादन यूनिट शुरू की। इस यूनिट में एक समय में अलग-अलग चरणों में करीब 1,000 मशरूम बैग तैयार किए जा सकते हैं। आज उनकी यह यूनिट रोजाना लगभग 50 किलो ऑयस्टर और मिल्की मशरूम का उत्पादन कर रही है।

महेश ने कहा, “ताजे मशरूम ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रहते और उनकी बाजार कीमत भी सीमित होती है। इसलिए हम रोज़ाना करीब 45 किलो मशरूम से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करते हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ मशरूम बेचना नहीं, बल्कि लोगों तक हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स पहुंचाने वाला एक मजबूत ब्रांड बनाना है।”

मशरूम पाउडर बनाया

महेश ने बताया कि उनकी यूनिट में हर दिन करीब 45 किलो मशरूम से कुकीज, चकली, अचार, मशरूम पाउडर और सूखे मशरूम जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा, “सूखे मशरूम की बिरयानी और सूप बनाने में अच्छी मांग है, जबकि हेल्थ का ध्यान रखने वाले ग्राहकों के बीच मशरूम पाउडर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।” उन्होंने बताया कि ताजे मशरूम करीब 400 रुपये प्रति किलो बिकते हैं, जबकि प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स से अधिक कमाई होती है। 200 ग्राम मशरूम अचार की कीमत 150 रुपये और 200 ग्राम मशरूम पाउडर की कीमत 500 रुपये रखी गई है।

महेश के अनुसार, मशरूम की प्रोसेसिंग शुरू करने के बाद उनके कारोबार में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने कहा, “इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अगर ताजे मशरूम तुरंत नहीं बिकते, तो वे खराब नहीं होते। दूसरी बात, कई लोग सीधे मशरूम खाना पसंद नहीं करते, लेकिन मशरूम से बनी कुकीज, सूप और स्नैक्स आसानी से खा लेते हैं। वहीं प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स की कीमत भी ताजे मशरूम के मुकाबले कई गुना अधिक मिलती है।”

महेश ने अब अपने मशरूम कारोबार को सिर्फ थोक खरीदारों तक सीमित नहीं रखा है। वह अपने उत्पाद किसान बाजारों, स्थानीय किराना दुकानों, चाय की दुकानों और होटलों तक भी पहुंचा रहे हैं। फिलहाल वह हुबली की एक लैब से मशरूम स्पॉन मंगवाते हैं और आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही वह मशरूम की खेती शुरू करने के इच्छुक लोगों को प्रशिक्षण भी देते हैं और अपने अनुभव के आधार पर कारोबार से जुड़ी जरूरी और व्यावहारिक जानकारी साझा करते हैं।