Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 135% बढ़ा, रेवेन्यू में 61% का उछाल

Q2 Results: ट्रांसफॉर्मर्स बनाने वाली कंपनी Transformers and Rectifiers (India) ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 135% बढ़कर ₹79.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹33.9 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, इस बार मुनाफे में ₹131.5 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन भी शामिल है।

रेवेन्यू और EBITDA में मजबूत बढ़त

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 60.7% बढ़कर ₹739.4 करोड़ हो गया। पिछले साल सितंबर तिमाही में यह ₹460 करोड़ था। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹128.8 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹58.9 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरा है। पिछले साल के 12.8% के मुकाबले इस बार यह 17.4% रहा। कंपनी के नतीजे CNBC-TV18 के पोल अनुमान से बेहतर रहे।

ऑर्डर बुक में 32% की बढ़ोतरी

Transformers and Rectifiers को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ₹3,283 करोड़ के नए ऑर्डर मिले। यह सालाना आधार पर 161% ज्यादा है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक 32% बढ़कर ₹7,237 करोड़ हो गई। वहीं, बातचीत के दौर में चल रहे ऑर्डर की वैल्यू ₹21,000 करोड़ है।

कंपनी को न्यूक्लियर पावर सेक्टर से पहला ऑर्डर भी मिला है। इसके तहत Nuclear Power Corporation of India के कैगा यूनिट 5 और 6 प्रोजेक्ट के लिए जनरेटर ट्रांसफॉर्मर सप्लाई किए जाएंगे।

दिवाली के आसपास बढ़ेगा प्रोडक्शन

कंपनी के MD और CEO सत्येन ममतोरा ने कहा कि चांगोदर और मोरैया प्लांट में बेहतर इस्तेमाल से रेवेन्यू बढ़ा है। ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। दिवाली के आसपास कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी ने FY27 के लिए 25% रेवेन्यू ग्रोथ, 16% EBITDA मार्जिन और 9-10% PAT मार्जिन का अनुमान बरकरार रखा है।

शेयर का हाल

नतीजों से पहले मंगलवार को Transformers and Rectifiers का शेयर BSE पर 3.36% चढ़कर ₹304.70 पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर पिछले 12 महीनों में 38% से ज्यादा गिर चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Aarti Industries Share: आरती इंडस्ट्रीज के शेयरों में तगड़ा उछाल, विदेशी केमिकल कंपनी से ₹1500 करोड़ का ऑर्डर मिला

Aarti Industries Share: केमिकल कंपनी Aarti Industries के शेयरों में मंगलवार, 13 अक्टूबर को 5% से ज्यादा की तेजी आई। कंपनी को एक ग्लोबल स्पेशियलिटी केमिकल कंपनी से बड़ा काम मिला है। दोनों के बीच लंबे समय के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई का समझौता हुआ है। इससे 10 साल से ज्यादा समय में करीब ₹1,500 करोड़ का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

इस समझौते के तहत Aarti Industries भारत में एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। कंपनी ही इसे बनाएगी और चलाएगी। यहां खास तरह का केमिकल तैयार किया जाएगा। इसका इस्तेमाल हाई-परफॉर्मेंस प्रोडक्ट बनाने में होता है। केमिकल बनाने के लिए ग्राहक की अपनी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी को इस समझौते से एक नया ग्लोबल ग्राहक मिला है। इसका मकसद भारत में ग्राहक की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है। जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

₹250 करोड़ से कम का निवेश करेगी कंपनी

Aarti Industries के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए ₹250 करोड़ से कम का कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी कैपेक्स लगेगा। इसके लिए एक खास फाइनेंशियल मॉडल बनाया जाएगा।

इसमें ग्राहक की तकनीक और Aarti Industries की इंजीनियरिंग क्षमता का इस्तेमाल होगा। कंपनी अपने अनुभव से प्रोडक्शन को बड़े स्तर पर ले जाएगी। साथ ही, प्लांट को चलाने की जिम्मेदारी भी संभालेगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Aarti Industries के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुयोग कोटेचा ने कहा कि इस समझौते से कंपनी के ग्लोबल ग्राहक पोर्टफोलियो में एक नया नाम जुड़ा है। यह कंपनी की क्षमता पर ग्राहक के भरोसे को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि ग्राहक की तकनीक और Aarti Industries के अनुभव को मिलाकर काम किया जाएगा। इससे प्रोडक्शन बढ़ाने, प्लांट तैयार करने और उसे भरोसेमंद तरीके से चलाने में मदद मिलेगी।

Aarti Industries के शेयरों में तेजी

इस समझौते की खबर के बाद मंगलवार को Aarti Industries का शेयर कारोबार के दौरान 5.2% तक चढ़ गया। शेयर ने ₹498.40 का इंट्राडे हाई बनाया। आखिर में स्टॉक 3.04% की बढ़त के साथ ₹488.30 पर बंद हुआ था।

साल 2026 में अब तक कंपनी का शेयर करीब 30% चढ़ चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 17.71 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 17 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 16 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,200 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर और निफ्टी 99.00 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर बंद हुआ। आज लगभग 1913 शेयरों में बढ़त हुई, 2241 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में SBI लाइफ इंश्योरेंस,HDFC लाइफ,ITC,एक्सिस बैंक और SBI शामिल रहे। वहीं TCS,विप्रो,इंफोसिस,टेक महिंद्रा और बजाज फिनसर्व में गिरावट देखी गई।

IT और फार्मा को छोड़कर,बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। FMCG और PSU बैंक इंडेक्स में 1% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स बिना किसी बदलाव के बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली गिरावट आई।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि भारतीय बाजार आज बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले सेशन में आई भारी गिरावट के बाद इसमें रिकवरी हुई। सेंसेक्स लगभग 74,336 पर बंद हुआ और इसमें करीब 333 अंकों की बढ़त हुई,जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ 99 अंक ऊपर बंद हुआ। US में कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ने से सप्लाई से जुड़ी कुछ चिंताएं कम हुईं,जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

FMCG शेयरों में सबसे ज़्यादा तेजी रही और चार दिन से जारी इनकी गिरावट का सिलसिला थम गया। आने वाले त्योहारों के मौसम को देखते हुए निवेशकों के रुझान के कारण HUL,ITC,डाबर इंडिया,इमामी,गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और P&G हाइजीन के शेयरों में 2-4% की बढ़त हुई।

सरकार ने 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR लागू किया है, जिसमें 75,000 रुपये और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय किया गया है। ये नए शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होंगे। इससे 2020 में शुरू किया गया ज़ीरो MDR सिस्टम खत्म हो जाएगा। जिन छोटे व्यापारियों का मासिक UPI QR कलेक्शन 1 लाख रुपये तक है,उन्हें इससे छूट मिलेगी। P2P ट्रांज़ैक्शन पहले की तरह मुफ़्त रहेंगे। इस बदलाव से बैंकों,पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को अतिरिक्त रेवेन्यू मिल सकता है।

PhonePe के CEO समीर निगम ने कहा है कि नए MDR फ्रेमवर्क से कंपनी के IPO प्लान को मदद मिल सकती है और चालू वित्त वर्ष में इसकी लिस्टिंग हो सकती है। उम्मीद है कि यह IPO पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा।

SEMICON India 2026 का आयोजन 17-19 सितंबर के बीच नई दिल्ली में किया जाएगा। इसमें 600 से ज्यादा एग्ज़िबिटर्स के शामिल होने की उम्मीद है,जिससे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स शेयरों पर सबकी नजर रहेगी। सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है, जिनमें से तीन में पहले से ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

NSE का IPO कल खुलने वाला है। बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहने की संभावना है। सेक्टर-स्पेसिफिक डेवलपमेंट,कच्चे तेल की कीमतो और विदेशी निवेश इसके मुख्य कारण होंगे। NSE का यह बड़ा IPO प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी का भी एक बड़ा टेस्ट होगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद (जिसका असर बाजार पहले ही पचा चुका है) से निवेशकों का भरोसा बढ़ा,जिससे भारतीय इक्विटी बाजार में भी तेजी आई। बैंक ऑफ जापान के पॉलिसी फैसले से पहले जापानी बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से भी पॉजिटिव माहौल को और मजबूती मिली,जिससे पूरे एशिया में जोखिम लेने की इच्छा को सपोर्ट मिला।

घरेलू स्तर बाजार में बैंकिंग,FMCG और ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी के कारण लार्ज-कैप शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त रही,जबकि IT सेक्टर में हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में मुनाफा वसूली दिखी।

निवेशक अब भविष्य में ब्याज दरों की चाल के बारे में और जानकारी पाने के लिए फेड चेयरमैन के बयान का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस गाइडेंस का असर ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति,कैपिटल फ़्लो और फ़ाइनेंशियल मार्केट की निकट भविष्य की दिशा पर पड़ेगा।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बैंकिंग शेयरों और कुछ बड़े शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में थोड़ी रिकवरी देखने को नजर आई।

इस रिकवरी में बैंक निफ्टी सबसे आगे रहा। इसने 56,000 का स्तर फिर से हासिल किया और बेंचमार्क इंडेक्स को सपोर्ट दिया। हालांकि, रिकवरी में बहुत अधिक तेजी नहीं थी क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें $107-$108 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी घोषणा से पहले अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी यील्ड 5% के आसपास रही।

ग्लोबल मार्केट में निवेशकों का रुख सावधानी के साथ पॉजिटिव रहा। बाजार फेड के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। इंडिया VIX घटकर 13.15 पर आ गया,जो बताता है कि निकट भविष्य की चिंता में थोड़ी कमी आई है,हालांकि उतार-चढ़ाव हाल के स्तरों से ऊपर बना हुआ है।

तकनीकी स्थिति में मामूली सुधार हुआ है लेकिन यह अभी भी कमजोर है। निफ्टी 23,200 के ऊपर बंद हुआ। लेकिन 23,300-23,500 के दायरे में उसे अभी भी रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,000 पर है और उसके बाद 22,800 पर अहम सपोर्ट है।

बैंक निफ्टी को 56,500-56,800 की ओर रिकवरी जारी रखने के लिए 56,000 के स्तर से ऊपर बने रहना होगा। अगर यह फिर से 56,000 के नीचे जाता है तो 55,500 का स्तर फिर से फोकस में आ सकता है।

फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला और उसके साथ दी जाने वाली पॉलिसी गाइडेंस ही बाजार की अगली चाल तय करेगी। फेड की संतुलित कमेंट्री से रिकवरी में मदद मिल सकती है,जबकि सख्त रुख (हॉकिश आउटलुक),बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी या ब्रेंट क्रूड का $110 की ओर बढ़ना बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ा सकता है और बाजार की रिकवरी को सीमित कर सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च, वेल्थ मैनेजमेंट,सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले से पहले बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में सावधानी का माहौल बने रहने की संभावना है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट ने कहा कि आज भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव वाला दिन रहा। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,रुपये में कमजोरी और FII की लगातार बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें,करेंसी में उतार-चढ़ाव और US फेड की पॉलिसी को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा तय करेंगी।

 

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Electronics Manufacturing: सरकार ने ₹7877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, Wipro समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में

Electronics Manufacturing: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से ₹82,243 करोड़ का प्रोडक्शन होने की उम्मीद है। इस मंजूरी के बाद Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं।

निवेश लक्ष्य से आगे निकली योजना

नए प्रोजेक्ट्स के बाद ECMS के तहत मंजूर कुल निवेश ₹69,548 करोड़ पहुंच गया है। यह स्कीम के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से ज्यादा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 38 प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं, 16 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण का काम चल रहा है।

इन कंपनियों को मिली मंजूरी

कंपनीमंजूर निवेश
Wipro Global Engineering₹1,401 करोड़
Micromax Precision Moulding₹565 करोड़
PCBL Chemical₹329 करोड़
Minda Instrument₹270 करोड़
Centum Electronics (दो प्रोजेक्ट)₹106 करोड़
VVDN Technologies₹100 करोड़
Mitsubishi Electric₹99 करोड़
Syrma SGS₹60 करोड़

10 राज्यों में लगेंगे नए प्रोजेक्ट

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि ये प्रोजेक्ट 10 राज्यों में लगाए जाएंगे। इनमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट शामिल हैं।

कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल को भी मंजूरी मिली है। कैपिटल गुड्स और एनोड मटेरियल भी इसमें शामिल हैं। कनेक्टर्स, स्पीकर्स और माइक्रोफोन को भी मंजूरी दी गई है। एंटेना, कैपेसिटर, फिल्टर और रेयर अर्थ मैग्नेट भी इस सूची का हिस्सा हैं। कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसे प्रोडक्ट्स को भी मंजूरी मिली है।

हर हफ्ते हो रही हैं मंजूरियां

एस. कृष्णन ने कहा कि उद्योग से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी वजह से सरकार अब लगभग हर हफ्ते या 10 दिन में मंजूरी बैठकें कर रही है। जिन कैटेगरी में आवेदन खुले हैं, उनमें जुलाई 2027 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

कई प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू

कई मंजूर प्रोजेक्ट्स में काम शुरू हो चुका है। कुछ जल्द कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंच सकते हैं।

इनमें Tata Electronics का होसुर प्लांट शामिल है। Dixon Technologies का नोएडा प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। Kaynes का चेन्नई के पास PCB प्लांट तैयार हो रहा है। Motherson का कांचीपुरम प्लांट और Wipro का लैमिनेट प्लांट भी प्रगति पर हैं।

सरकार ने क्या कहा?

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि निवेश का लक्ष्य पार हो गया है। लेकिन घरेलू डिजाइन क्षमता और स्वदेशी सप्लाई चेन पर अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में Six Sigma जैसे उच्च गुणवत्ता मानक अपनाना भी जरूरी है। Six Sigma एक मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल का तरीका है। इसका मकसद प्रोडक्शन में गलती को लगभग शून्य तक लाना होता है।

केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ECMS का आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया था। इस स्कीम को मार्च 2025 में मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत में 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन हासिल करना है।

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Amber Enterprises: ओप्पो, वनप्लस और रियलमी के फोन बनाएगी कंपनी, अगले साल से प्रोडक्शन शुरू होगा

Amber Enterprises: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Amber Enterprises India अगले साल से चीन की स्मार्टफोन कंपनियों Oppo, OnePlus और Realme के लिए भारत में फोन बनाना शुरू करेगी। कंपनी ने कहा है कि ट्रायल प्रोडक्शन वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में शुरू होगा। वहीं, कमर्शियल प्रोडक्शन FY28 की पहली तिमाही यानी मार्च 2027 के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

पहले साल 80 लाख का टारगेट

एंबर एंटरप्राइजेज के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और CEO जसबीर सिंह ने बताया कि पहले साल करीब 80 लाख स्मार्टफोन बनाने का लक्ष्य है। दूसरे साल इसे बढ़ाकर 1.5 से 1.6 करोड़ यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। कंपनी ने अपने मोबाइल कारोबार के लिए नया COO भी नियुक्त किया है।

कंपनी ने Oppo Mobiles India के साथ मैन्युफैक्चरिंग सहयोग समझौता किया है। इसके तहत कंपनी Oppo, OnePlus और Realme तीनों ब्रांड के स्मार्टफोन बनाएगी।

चीन की कंपनियां अपना मॉडल बदल रहीं

ये कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन की स्मार्टफोन कंपनियां भारत में खुद फैक्ट्री चलाने की बजाय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाने लगी हैं। अभी Oppo के कुछ फोन Vivo की नोएडा फैक्ट्री में भी बनते हैं। वहीं, Vivo अपनी फैक्ट्री को Dixon Technologies के साथ जॉइंट वेंचर में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में है।

भारतीय बाजार में मजबूत पकड़

Counterpoint Research के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में Vivo की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 17.8% हिस्सेदारी रही। Samsung 17.6% के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जबकि Oppo की हिस्सेदारी 13.6% रही। अगर Vivo, iQOO, Oppo, Realme और OnePlus को मिलाकर देखें, तो इन ब्रांड्स की संयुक्त हिस्सेदारी 45.6% रही।

PCB कारोबार में दबाव

एंबर एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसके PCB कारोबार में फिलहाल मार्जिन पर दबाव है। इसकी वजह Copper-Clad Laminate (CCL) की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि, कंपनी धीरे-धीरे इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचा रही है।

Amber Enterprises की योजना 2029-30 तक अपना CCL प्लांट लगाने की भी है। इससे भविष्य में कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

एंबर एंटरप्राइजेज के शेयरों का हाल

एंबर एंटरप्राइजेज का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 0.68% बढ़कर 7,224 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 9.89% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 2.88% टूटा है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 158% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 24.48 हजार करोड़ रुपये है।

Share Market New Rule: सिर्फ 3 दिनों के लिए शेयर दें किराए पर, बिना बेचे कमाई, खास स्टॉक्स के लिए आए रहा नया सिस्टम

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Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

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Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Ather Energy Q1 Results: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹51 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹178.2 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 88.8% बढ़कर ₹1,217 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA घाटा भी काफी कम होकर ₹33.4 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹134.3 करोड़ था। इसका मतलब है कि बिक्री बढ़ने के साथ कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर हुई है।

EV बाजार में दिख रहा बड़ा मौका

Ather Energy का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी के मुताबिक, दिल्ली EV पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM E-Drive जैसी योजनाएं इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं।

इसके अलावा पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता भी है। इससे ग्राहक EV अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं। कंपनी का कहना है कि हालिया पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी से पहले ही EV की मांग तेज होने लगी थी।

जल्द लॉन्च होगा नया स्कूटर

Ather अब अपने नए EL स्कूटर को लॉन्च करने की तैयारी में है। जून तिमाही में इसका होमोलोगेशन पूरा हो गया है और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं।

कंपनी के होसुर प्लांट में FY27 की दूसरी तिमाही से इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होगा। अगस्त में होने वाले Ather Community Day के दौरान इस स्कूटर को लॉन्च किया जाएगा।

कंपनी आने वाले समय में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60,000 गाड़ी प्रति माह करने की योजना पर काम कर रही है।

हाल ही में जुटाए ₹1,300 करोड़

Ather Energy ने इसी महीने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹1,300 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने 1.08 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,202 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए।

टेक्नोलॉजी फीचर्स पर भी फोकस

एथर एनर्जी लगातार अपने सॉफ्टवेयर फीचर्स भी मजबूत कर रही है। हाल ही में उसने ‘Pothole+ Alerts’ फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर 450 Apex, 450X और Rizta Z समेत Gen 2 और उसके बाद के स्कूटरों में उपलब्ध है।

यह फीचर Ather के कनेक्टेड स्कूटरों से मिले डेटा की मदद से रास्ते में गड्ढों, टूटी सड़कों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और स्पीड ब्रेकर की पहले से जानकारी देता है। इससे राइडिंग ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सके।

Ather Energy के शेयरों का हाल

एथर एनर्जी का शेयर सोमवार को 1.56% की बढ़त के साथ 1,280 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 89.38% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल में इसने 223.27% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 50.16 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स ने ओडिशा में शुरू किया एल्युमीनियम फॉयल प्लांट, ₹800 करोड़ का निवेश

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी लिमिटेड (SMEL) की सब्सिडियरी SMEL Steel Structural Pvt. Ltd. ने ओडिशा के संबलपुर स्थित अपनी एल्युमीनियम फॉयल यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर कुल करीब ₹800 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश में एल्युमीनियम फॉयल और फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) दोनों यूनिट शामिल हैं।

18,000 TPA क्षमता वाली फॉयल यूनिट शुरू

नई एल्युमीनियम फॉयल यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 18,000 टन (TPA) है। यहां 6 से 40 माइक्रोन मोटाई वाली प्रीमियम ग्रेड एल्युमीनियम फॉयल बनाई जाएगी। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

सितंबर तक शुरू होगी FRP यूनिट

श्याम मेटालिक्स की Aluminium Flat Rolled Products (FRP) यूनिट अंतिम चरण में है। इसके सितंबर 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की सालाना क्षमता 60,000 TPA होगी। यहां 0.3 से 4.0 मिमी मोटाई वाले एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

ऑपरेटिंग मार्जिन में 40-50% बढ़ोतरी की उम्मीद

कंपनी का कहना है कि दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद ऑपरेटिंग मार्जिन में 40% से 50% तक सुधार हो सकता है। बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ज्यादा रियलाइजेशन से रेवेन्यू में भी मजबूत बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के दम पर उसकी टॉपलाइन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

श्याम मेटालिक्स का कहना है कि यह निवेश वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा। इससे हाई-क्वालिटी एल्युमीनियम उत्पादों की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

श्याम मेटालिक्स ने क्या कहा?

श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बृज भूषण अग्रवाल ने कहा कि संबलपुर में फॉयल प्रोडक्शन की शुरुआत कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के जरिए नए बाजारों में विस्तार करना है। इससे ओडिशा में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सितंबर तक FRP यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।