Market Insight : बाजार में तेजी-मंदी को जानने के लिए निफ्टी सही पैरामीटर नहीं, छोटे-मझोले शेयरों में बनेगा अच्छा पैसा-मनीष सोंथालिया

Market Insight : पहली तिमाही के अर्निंग सीजन के बाद हमको लग रहा था कि बाजार को लेकर एक अच्छा क्लियर विज़न मिलेगा और हमारे लिए यह जानना आसान होगा कि किसको पिक करना है और किसको अवॉइड करना है। लेकिन एक बार फिर से बाजार पर क्रूड की चिंताएं,यूएस मार्केट से जुड़ी दिक्कतें,जिओपॉलिटिकल टेंशंस और बॉन्ड यील्ड ये सब कुछ हावी हो गए हैं। ऐसे में बाजार की चाल पर बात करते हुए एमके इन्वेस्टमेंट (Emkay Investment) के CIO मनीष सोंथालिया ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे काफी अच्छे रहे हैं। निफ्टी की बात करें तो इस पर दबाव है लेकिन निफ्टी से बाहर निकल कर ब्रॉडर मार्केट पर नजर डालें तो वहां स्थिति इतनी खराब नहीं है। यह हम कह सकते हैं कि वहां पर मंदी का माहौल नहीं है।

अगर आप निफ्टी मिड कैप की देखें तो वहां पर पहली तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ 25-26% रही है। स्माल कैप में देखें तो यहां भी 30-32% की अर्निंग्स ग्रोथ रही है। अगर NFTY 500 को भी देखें तो यहाँ पर 15% की अर्निंग्स ग्रोथ रही है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि बाजार में तेजी-मंदी का अंदाजा लगाने के लिए निफ्टी 50 सही पैरामीटर नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक निफ्टी में हैवी वेटेज रखने वाले बैंकिंग सेक्टर नहीं चलेंगे तब तक आपको निफ्टी में बहुत हल्की बढ़त ही देखने को मिलेगी। रही बात क्रूड की तो इसके लिए 90 डॉलर का लेवल लक्ष्मण रेखा है। अगर क्रूड इस लेवल से ऊपर गया तो भारत के लिए परेशानी पैदा होगी। वहीं, अगर यह 90 डॉलर के नीचे रहा तो इंडिया के लिए न्यूट्रल रहेगा। इसको पॉजिटिव भी कह सकते हैं, क्योंकि हम तो 120 डॉलर का स्तर भी देख चुके हैं। दूसरी बड़ी बात यह है कि हमारा एफसीएआरबी अब 70 बिलियन हो गया। इसका कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट पर पॉजिटिव असर होगा। हमारे यील्ड भी गिर गए हैं। लेकिन आरबीआई सिस्टम में कितनी लिक्विडिटी रहने देता है या सीआरआर बढ़ा देता है या ओपन मार्केट ऑपरेशंस करता है, यह सब देखने वाली बात होगी।

आज की डेट में भारत के नजरिए से देखें ज्यादा कुछ नेगेटिव है नहीं। इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत के वेटेज में भी थोड़ा बहुत इजाफा हो रहा है। ऐसे में मोटा-मोटी भारत में मंदी का माहौल तो नहीं दिख रहा है। हां निफ्टी 50 आपको जरूर रेड टिक दिखा रहा है। लेकिन आउटसाइड निफ्टी अच्छा खासा एक्शन है।

मिड और स्मॉल कैप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि चार-पांच सेक्टरों में बहुत मजबूत कन्विक्शन है। यहां आप अपने वैल्यू्यूएशन कंफर्ट के हिसाब से फैसले ले सकते हैं। एडवांस टेक्नोलॉजी शेयरों में दम दिख रहा है। इनमें डेटा सेंटर,एआई एडवांस टेक्नोलॉजी,डिफेंस,एरोस्पेस,सेमीकंडक्टर और एनर्जी ट्रांजक्शन की पूरी वैल्यू चेन और हेल्थ केयर से जुड़े शेयर शामिल है। इनमें अगले तीन से पांच साल तक अच्छी-खासी तेजी रहेगी। प्लेटफार्म कंपनीज में भी अच्छी खासी तेजी देखने को मिल सकती है। इनके नतीजे भी काफी बेहतरीन रहे हैं।

आईटी सेक्टर पर बात करते हुए मनीष सोंथालिया ने कहा की आगे एआई और डेटा सेंटर से जुड़ी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करेंगी। बड़ी आईटी कंपनियों के एआई ट्रांजिशन में लंबा समय लग सकता है। लेकिन छोटी आईटी कंपनिंया तेजी से एआई ट्रांजिशन कर सकती है। इस समय इनका वैल्यूएशन भी अच्छा है। उन्होंने आगे कहा कि पोर्टफोलियो में हमेशा 10 फीसदी एलोकेशन प्रेशियस मेटल्स का होना चाहिए। लंबे नजरिए से देखें तो गोल्ड में 9-10 फीसदी सालाना रिटर्न मिल सकता है।

 

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जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में किया खूब निवेश, जानिए कहां से हुई इनकी निकासी

जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने कुछ खास सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। इस दौरान कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ सबसे ज्यादा नेट इक्विटी निवेश किया गया है। वहीं,कैपिटल गुड्स और टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इनकी सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली है।

 FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव

जुलाई में FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव आया है। महीने के दूसरे आधे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ से जबरदस्त खरीदारी हुई है। वहीं, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में हुई खरीदारी के विपरीत दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली है।

कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में हुआ सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश 

जुलाई में कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश रहा है। इस सेक्टर में इस दौरान 10,201 रुपए करोड़ की खरीदारी हुई है। इस सेक्टर में 1 से 15 जुलाई के बीच 7,361 करोड़ रुपए और महीने के दूसरे हिस्से में 2,840 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया है।

हेल्थकेयर सेक्टर  पर भी आया FPI का दिल

हेल्थकेयर सेक्टर इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। इसमें FPIs का नेट निवेश 7,731 करोड़ रुपए रहा। इस सेक्टर में FPIs ने पहले हिस्से में 4,101 करोड़ रुपए और दूसरे हिस्से में 3,630 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स  भी आया पसंद

महीने के आगे बढ़ने के साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीदारी में तेजी आई। FPIs ने 1-15 जुलाई के दौरान इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये और महीने के दूसरे हिस्से में 4,958 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे इसमें महीने का कुल नेट निवेश 7,342 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में भी हुई खरीदारी

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में 5,993 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। जिसके बाद FPIs ने महीने के दूसरे आधे हिस्से में 1,056 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली की,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में 4,937 करोड़ रुपए का नेट निवेश देखने को मिला।

महीने के दूसरे पखवाड़े में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बढ़ी खरीदारी 

महीने के दूसरे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी खरीदारी में तेजी देखने को मिली। जुलाई के पहले पखवाड़े में सिर्फ 60 करोड़ रुपये के नेट इन्वेस्टमेंट के बाद, FPIs ने दूसरे हिस्से में 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में होने वाला कुल निवेश 3,358 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने कंस्ट्रक्शन मटीरियल में 2,445 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया,जिसमें से 1,574 करोड़ रुपए पहले पखवाड़े में और 871 करोड़ रुपए दूसरे पखवाड़े में आए।

जुलाई में सर्विस सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपए की नेट खरीदारी देखने को मिली। FPIs ने पहले पखवाड़े में इस सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपए का निवेश किया,जबकि दूसरे पखवाड़े में 30 करोड़ रुपए की मामूली बिकवाली की।

फाइनेंशियल सर्विसेज में हुई बिकवाली

असेट अंडर कस्टडी (AUC) के आधार पर FPI पोर्टफोलियो के सबसे बड़े सेक्टर,फाइनेंशियल सर्विसेज़ में जुलाई में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। FPIs ने महीने के पहले हिस्से में 1,975 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल सर्विसेज़ स्टॉक्स खरीदे,लेकिन दूसरे हिस्से में 2,669 करोड़ रुपये के स्टॉक्स बेचे।

जुलाई के आखिर में इस सेक्टर का AUC 21.13 लाख करोड़ रुपए था। जबकि 15 जुलाई को यह 21.39 लाख करोड़ रुपए पर था। फिर भी FPI पोर्टफोलियो में यह सेक्टर सबसे बड़ा निवेश वाला सेक्टर बना रहा।

कई दूसरे सेक्टर में भी भारी बिकवाली हुई। जुलाई में कैपिटल गुड्स सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपए की नेट FPI निकासी हुई,जबकि टेलीकॉम सेक्टर में 5,725 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई। पावर सेक्टर में 2,863 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली हुई।

FPI AUC में फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा

फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा,ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स का FPI AUC में 5.40 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा रहा। इसके बाद हेल्थकेयर का नंबर आता है, जिसका हिस्सा 5.33 लाख करोड़ रुपये रहा। फिर कैपिटल गुड्स का हिस्सा 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा।

जुलाई के आखिर में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इक्विटी AUC 3.93 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का AUC 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा। रियल्टी सेक्टर का हिस्सा भी काफी बड़ा रहा,जो 1.54 लाख करोड़ रुपये पर रहा।

 

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Lloyds Metals Q1 Results: मेटल कंपनी का मुनाफा 165% बढ़ा, रेवेन्यू और EBITDA में भी जोरदार उछाल

Lloyds Metals Q1 Results: माइनिंग और मेटल कंपनी Lloyds Metals and Energy ने जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 1,726 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 651 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में करीब 165% की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी का रेवेन्यू भी 2,383.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,354.3 करोड़ रुपये हो गया। इसमें करीब 209% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, EBITDA 805.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,781.4 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन भी 33.80% से बढ़कर 37.82% हो गया।

सब्सिडियरी में ₹625 करोड़ का निवेश

कंपनी के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी Thriveni Earthmovers and Infra Private Ltd. में 625 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश राइट्स इश्यू या आगे जारी होने वाली पूंजी के जरिए किया जाएगा। कंपनी यह रकम एक या उससे ज्यादा चरणों में लगा सकती है।

रिन्यूएबल एनर्जी में भी बढ़ेगी हिस्सेदारी

Lloyds Metals ने अपने इस्तेमाल के लिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश को भी मंजूरी दी है। इसके तहत कंपनी ग्रुप कैप्टिव स्कीम के तहत कम से कम 26% हिस्सेदारी ले सकती है।

यह निवेश विंड और सोलर पावर दोनों प्रोजेक्ट्स में होगा। इसका मकसद कंपनी की बिजली जरूरत का एक हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करना है। इसके लिए कंपनी Amplus Energy और उसकी अलग-अलग इकाइयों के साथ समझौते करेगी।

सब्सिडियरी का कर्ज इक्विटी में बदलेगी

बोर्ड ने कंपनी की सब्सिडियरी Lloyds Global Resources FZCO को दिए गए मौजूदा कर्ज को इक्विटी शेयरों में बदलने की भी मंजूरी दी है।

इसके अलावा कंपनी इस सब्सिडियरी में अलग-अलग तरह की प्रेफरेंस शेयर और अन्य सिक्योरिटीज के जरिए आगे निवेश भी कर सकती है। यह निवेश एक या कई चरणों में किया जा सकता है।

नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति

कंपनी ने अविजित घोष को अतिरिक्त निदेशक और नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2026 से 9 अगस्त 2031 तक पांच साल का होगा। हालांकि, इसके लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी जरूरी होगी।

Lloyds Metals का शेयर सोमवार को 2% चढ़कर 2,059.10 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में कंपनी ने 64.77% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: घाटे से मुनाफे में लौटी स्टेनलेस स्टील कंपनी, शेयरों पर रहेगी नजर

Welspun Specialty Q1 Results: Welspun Group की कंपनी Welspun Specialty Solutions ने जून तिमाही में घाटे से मुनाफे में वापसी की है। यह स्पेशल स्टेनलेस स्टील और अलॉय स्टील बनाने वाली कंपनी है। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले थोड़ा घटा, लेकिन ऑपरेटिंग प्रदर्शन में बड़ा सुधार देखने को मिला।

घाटे से मुनाफे में वापसी

अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने ₹5.16 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹0.75 करोड़ का घाटा हुआ था।

कंपनी ने बताया कि पिछले साल की पहली तिमाही में ₹5.78 करोड़ का एकमुश्त फाइनेंस कॉस्ट भी शामिल था। यह खर्च प्रेफरेंस शेयरों के रिडेम्प्शन की वजह से आया था।

रेवेन्यू घटा, लेकिन कमाई सुधरी

जून तिमाही में Welspun Specialty का रेवेन्यू 3.8% घटकर ₹194 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹201 करोड़ था।

हालांकि, ऑपरेटिंग प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹10.54 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹4.38 करोड़ था।

मार्जिन में बड़ा सुधार

बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन की वजह से EBITDA मार्जिन 2.2% से बढ़कर 5.4% हो गया। यानी बिक्री थोड़ी कम रही, लेकिन कंपनी की कमाई की क्षमता में अच्छा सुधार देखने को मिला।

किन सेक्टरों को सप्लाई करती है कंपनी?

Welspun Specialty Solutions गुजरात के झगड़िया में स्टेनलेस स्टील प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट पावर, एनर्जी, पेट्रोकेमिकल, डिफेंस, ऑयल एंड गैस, स्पेस और न्यूक्लियर पावर जैसे अहम सेक्टरों में इस्तेमाल होते हैं।

शेयर का हाल

Welspun Specialty Solutions का शेयर मंगलवार को 3.02% बढ़कर ₹54.50 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 47.10% का रिटर्न दिया है।

कंपनी का बिजनेस क्या है

Welspun Specialty Solutions, Welspun Group की मेटल कंपनी है। यह स्पेशल स्टेनलेस स्टील और अलॉय स्टील प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी के प्रोडक्ट पावर, ऑयल एंड गैस, पेट्रोकेमिकल, डिफेंस, न्यूक्लियर एनर्जी, स्पेस और हेवी इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों में इस्तेमाल होते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स ने ओडिशा में शुरू किया एल्युमीनियम फॉयल प्लांट, ₹800 करोड़ का निवेश

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी लिमिटेड (SMEL) की सब्सिडियरी SMEL Steel Structural Pvt. Ltd. ने ओडिशा के संबलपुर स्थित अपनी एल्युमीनियम फॉयल यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर कुल करीब ₹800 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश में एल्युमीनियम फॉयल और फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) दोनों यूनिट शामिल हैं।

18,000 TPA क्षमता वाली फॉयल यूनिट शुरू

नई एल्युमीनियम फॉयल यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 18,000 टन (TPA) है। यहां 6 से 40 माइक्रोन मोटाई वाली प्रीमियम ग्रेड एल्युमीनियम फॉयल बनाई जाएगी। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

सितंबर तक शुरू होगी FRP यूनिट

श्याम मेटालिक्स की Aluminium Flat Rolled Products (FRP) यूनिट अंतिम चरण में है। इसके सितंबर 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की सालाना क्षमता 60,000 TPA होगी। यहां 0.3 से 4.0 मिमी मोटाई वाले एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

ऑपरेटिंग मार्जिन में 40-50% बढ़ोतरी की उम्मीद

कंपनी का कहना है कि दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद ऑपरेटिंग मार्जिन में 40% से 50% तक सुधार हो सकता है। बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ज्यादा रियलाइजेशन से रेवेन्यू में भी मजबूत बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के दम पर उसकी टॉपलाइन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

श्याम मेटालिक्स का कहना है कि यह निवेश वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा। इससे हाई-क्वालिटी एल्युमीनियम उत्पादों की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

श्याम मेटालिक्स ने क्या कहा?

श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बृज भूषण अग्रवाल ने कहा कि संबलपुर में फॉयल प्रोडक्शन की शुरुआत कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के जरिए नए बाजारों में विस्तार करना है। इससे ओडिशा में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सितंबर तक FRP यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Metal Stocks : मेटल स्टॉक्स में गिरावट का डर, राकेश अरोड़ा बोले- अब तेजी आते ही करें मुनाफावसूली

Metal Stocks : अगर हाल के दिनों में मेटल शेयरों में तेजी देखकर आप खरीदारी का प्लान बना रहे हैं, तो थोड़ा रुक जाइए। GoIndiaStocks.com के फाउंडर राकेश अरोड़ा का मानना है कि मेटल स्टॉक्स के अच्छे दिन खत्म होने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि फिलहाल मेटल शेयरों में नई खरीदारी करने के बजाय मुनाफा वसूलने पर विचार करना चाहिए।

उनके मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे मेटल कंपनियों के लिए अच्छे रह सकते हैं। लेकिन बाजार पहले ही इसकी उम्मीद लगा चुका है। यानी अच्छी खबर का असर काफी हद तक शेयरों की कीमतों में दिख चुका है। आने वाले महीनों में कमोडिटी की कीमतें नरम पड़ सकती हैं। ऐसे में कंपनियों की कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

Q1 नतीजों से पहले आ सकती है थोड़ी तेजी

राकेश अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में मेटल शेयर 20% से 30% तक टूटे थे। इसलिए मजबूत जून तिमाही नतीजों से पहले इनमें थोड़ी तेजी या रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, उन्हें नहीं लगता कि ये शेयर इतनी जल्दी अपने पुराने हाई पर पहुंच जाएंगे।

एल्युमिनियम कंपनियों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

राकेश अरोड़ा की सबसे बड़ी चिंता एल्युमिनियम सेक्टर को लेकर है। उनका कहना है कि कई ब्रोकरेज और एनालिस्ट अब भी अपने अनुमान में एल्युमिनियम का भाव करीब 3,200 डॉलर प्रति टन मान रहे हैं। लेकिन उनकी राय इससे अलग है।

उन्हें लगता है कि मिडिल ईस्ट और इंडोनेशिया से नई सप्लाई आने वाली है। इससे बाजार में एल्युमिनियम की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में कीमत घटकर करीब 2,600 डॉलर प्रति टन तक आ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो एल्युमिनियम कंपनियों की कमाई के अनुमान घटाने पड़ेंगे। इसका सीधा असर शेयरों पर भी दिख सकता है।

स्टील सेक्टर पर भी बहुत भरोसा नहीं

राकेश अरोड़ा स्टील सेक्टर को लेकर भी ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। उनका कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में स्टील कंपनियों के नतीजे अच्छे आ सकते हैं। Vedanta जैसी कंपनियां भी मजबूत प्रदर्शन कर सकती हैं। लेकिन स्टील की कीमतें अब अपना पीक देख चुकी हैं।

एक तरफ चीन से स्टील का निर्यात बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारत की कंपनियां तेजी से उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं। इससे बाजार में सप्लाई ज्यादा हो सकती है। अगर सप्लाई बढ़ी, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा।

इसी वजह से उनका मानना है कि स्टील शेयरों में अभी और गिरावट आ सकती है। हालांकि, वैल्यूएशन के लिहाज से ये एल्युमिनियम कंपनियों के मुकाबले सस्ते जरूर हैं।

वेदांता के आयरन और स्टील को लेकर क्या कहा?

हाल ही में Vedanta के डीमर्जर के बाद बने Vedanta Iron & Steel के कारोबार पर भी राकेश अरोड़ा ने अपनी राय रखी। उनका कहना है कि आयरन और स्टील कारोबार में होने वाले विस्तार का फायदा शेयर पहले ही कीमत में जोड़ चुका है। इसलिए यहां बहुत ज्यादा तेजी की गुंजाइश नहीं बची है।

वहीं, ग्रुप के ऑयल एंड गैस कारोबार में उन्हें कुछ वैल्यू नजर आती है। लेकिन, रेगुलेटरी चिंताओं की वजह से यह फिलहाल हाई-रिस्क निवेश है। यह वैल्यू ट्रैप भी साबित हो सकता है।

कॉपर सेक्टर पर भी दी चेतावनी

राकेश अरोड़ा मानते हैं कि लंबे समय में कॉपर की मांग अच्छी रह सकती है। लेकिन फिलहाल उन्हें कॉपर कंपनियों के शेयर महंगे लग रहे हैं।

उनका कहना है कि बाजार रिसाइकल्ड कॉपर की बढ़ती सप्लाई को गंभीरता से नहीं ले रहा। अगर रिसाइकल्ड कॉपर की उपलब्धता बढ़ती रही, तो कॉपर की कीमतों पर दबाव आ सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

राकेश अरोड़ा की सलाह है कि अगर मजबूत जून तिमाही नतीजों की वजह से मेटल शेयरों में तेजी आती है, तो उसे नई खरीदारी का संकेत मत मानिए। उनके मुताबिक, यह तेजी मुनाफावसूली का मौका हो सकती है।

हालांकि, उन्होंने एक बात और कही। अगर अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर होता है, तो वैश्विक कमोडिटी कीमतों को सहारा मिल सकता है। ऐसे में बेस मेटल्स का आउटलुक बेहतर हो सकता है। यही एक बड़ा फैक्टर है, जो उनके मौजूदा नजरिए को बदल सकता है।

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ICICI प्रूडेंशियल के चिंतन हरिया से जानें वेल्थ क्रिएशन के मंत्र, बाजार में अब कहां से निकलें और कहां बढ़ाएं निवेश

बाजार में आज तेजी का मोमेंटम बढ़ा है,निफ्टी 150 अंक से ज्यादा चढ़कर 7 मई के बाद पहली बार 24300 के पार निकला है। ICICI BANK, HDFC BANK, BHARTI और टाटा स्टील ने जोश भरा है। आज बैंक निफ्टी भी चला है। लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% से ज्यादा फिसलकर 12 के नीचे आ गया है। रियल्टी,मेटल और फार्मा में आज सबसे ज्यादा खरीदारी आई है। तीनों सेक्टर इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। साथ ही IT में लगातार दूसरे दिन तेजी है। आईटी इंडेक्स 1.5 फीसदी चढ़ा। वहीं दूसरी ओर सरकारी बैंकों में आज दबाव है। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला है। बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक 3 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं।

निवेशक चाहें तो कर सकते हैं लार्जकैप में एकमुश्त निवेश

ऐसे में बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए ICICI प्रूडेंशियल AMC के प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चिंतन हरिया ने कहा कि 2 साल से भारतीय बाजार और रुपये ने अंडरपरफॉर्म किया है। RBI के कदमों से रुपया काफी संभला है। कच्चे तेल के दाम युद्ध से पहले के भाव पर आ गए हैं। कमजोर मॉनसून से भी ज्यादा चिंता नहीं है। ऐसे में लार्जकैप में अच्छे मौके बन रहे हैं। निवेशक चाहें तो लार्जकैप में एकमुश्त निवेश कर सकते हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें, लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें

चिंतन हरिया ने आगे कहा कि लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप ने आउटपरफॉर्म किया है। मिडकैप और स्मॉलकैप के वैल्युएशन अभी भी सस्ते नहीं हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप की ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल है। मिडकैप और स्मॉलकैप में एक्टिव फंड चुनें। लार्जकैप में पैसिव फंड्स में निवेश करें।

हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव

उन्होंने आगे कहा कि जून तिमाही के नतीजों में कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालात स्थिर रहे तो दीवाली तक लार्जकैप में उछाल संभव है। FCNB डिपॉजिट का फायदा बैंकों को मिलेगा। बैंकिंग सेक्टर अच्छा लग रहा है। एनर्जी सेक्टर भी पसंद है। इस सेक्टर कोकच्चे तेल की कीमतें घटने का फायदा मिलेगा। वहीं, डिफेंस और मेटल शेयर काफी चल चुके हैं। अब इनमें मुनाफावसूली संभव है।

चिंतन हरिया का मानना है कि लंबी अवधि में ऑटो सेक्टर अच्छा कर सकता है। ऑटो सेक्टर को एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी का भी फायदा मिलेगा। निवेशकों के लिए लार्जकैप एक्टिव और पैसिव फंड्स में निवेश करने का मौका है। मल्टी एसेट बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश कर सकते हैं। किसी भी फ्लैक्सीकैप फंड्स में SIP कर सकते हैं। आज जो निवेश करेंगे उसका फायदा 3-5 साल में मिलेगा।

 

 

Market Insight : अगले 6-8 हफ्ते में निफ्टी में देखने को मिल सकता है 25500 का लेवल, IT में 10-15% रिकवरी की उम्मीद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Insight : अगले 6-8 हफ्ते में निफ्टी में देखने को मिल सकता है 25500 का लेवल, IT में 10-15% रिकवरी की उम्मीद

Market Insight : शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में IT और फार्मा शेयरों में जबरदस्त खरीदारी के कारण सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। NSE पर सबसे ज्यादा एक्टिव शेयरों में PB फिनटेक,ज़ेनसार टेक,CG पावर और हिताची एनर्जी शामिल हैं। IT,फार्मा और रियल्टी शेयरों ने तेजी को आगे बढ़ाया है। मेटल शेयरों में भी अच्छी बढ़त दिख रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है।

इस बीच वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है,जो बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने का संकेत है। फिलहाल सेंसेक्स 573.33 अंक या 0.74 प्रतिशत बढ़कर 78,075.45 पर और निफ्टी 188.85 अंक या 0.78 प्रतिशत बढ़कर 24,364.55 पर दिख रहा है।

ऐसे में बाजार के टेक्निकल सेटअप और कमाई वाले सेक्टर पर चर्चा करते हुए गोल्डीलॉक्स ग्लोबल रिसर्च(Goldilocks Global Research) के फाउंडर और चीफ स्ट्रेटेजिस्ट गौतम शाह ने कहा कि कुछ समय से बाजार कंसॉलिडेशन के फेज में है। 6-8 हफ्ते में निफ्टी 24600-25500 तक जा सकता है। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में बड़े मूव के संकेत मिल रहे हैं। RIL में आगे भी मजूबती दिख सकती है। बाजार में गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। बैंक और IT शेयर निफ्टी को ऊपर ले जा सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि IT में 10-15% रिकवरी आ सकती है। 12-18 महीने के लिए IT बॉस्केट खरीदने की रणनीति कारगर साबित हो सकती है। कुछ समय से मेटल में प्रॉफिट बुकिंग की रणनीति काम कर रही है। लेकिन लंबी अवधि के लिए मेटल ठीक लग रहा है। रियल एस्टेट,PSU,फार्मा और केमिकल शेयर भी बेहतर पोजीशन में नजर आ रहे हैं।

गौतम शाह की सलाह है कि मिड-स्मॉल और माइक्रोकैप में बने रहना चाहिए। मिड-स्मॉल और माइक्रोकैप रिकॉर्ड हाई बना सकते हैं। बैंक निफ्टी में यहां बड़ा रिटर्न नहीं बनेगा। बैंकिंग में टॉप 3 सरकारी बैंक पसंद हैं।

गौतम शाह ने बताया कि वे पिछले 12 महीने से FMCG पर अंडरवेट हैं। रियल्टी इंडेक्स में 20-25% की बड़ी तेजी संभव है। होटल और ट्रैवल स्टॉक भी अच्छा कर सकते हैं। लंबी अवधि के नजरिए से हॉस्पिटल शेयर भी बेहतर दिख रहे हैं।

 

 

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(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।