बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में कई बड़ी डील्स की तैयारी, जानिए आगे किन शेयरों में देखने को मिल सकता है एक्शन

बंधन बैंक में आज जोरदार तेजी है। दरअसल,ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि बंधन बैंक में बड़ी डील की तैयारी चल रही है। बैंकिंग-फाइनेंशियल सेक्टर में सिर्फ बंधन बैंक ही नहीं, बल्कि और भी डील होने की सुगबुगाहटें हैं। पिछले एक साल में बैंकिंग सेक्टर में पहले भी कई डील्स हो चुके हैं। आइए बैंकिंग और फाइनेंशियल में डील्स को लेकर क्या अपडेट हैं, इस पर डालते हैं एक नजर।

बैंकिंग-फाइनेंशियल सेक्टर में आगे भी दिखेगा एक्शन

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में कई बड़ी डील्स की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक 4 डील्स पाइपलाइन में हैं यानी इस सेक्टर के लिए 4 बड़े ट्रिगर्स हैं। बंधन बैंक में बड़ी डील्स की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक बंधन बैंक में प्रोमोटर हिस्सा ब्रिकी संभव है। GIC और IFC की करीब 30% हिस्सेदारी से एग्जिट संभव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,25–32% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है। संभावित डील की वैल्यू 60 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। IHC संभावित खरीदारों में शामिल है। इसके लिए बातचीत में कई महीने लग सकते हैं। इस रिपोर्ट पर बंधन बैंक की प्रतिक्रिया भी आई है जिसमें कहा गया है कि उसे इस खबर को लेकर कोई जानकारी नहीं। प्रोमोटर हिस्सा बिक्री को लेकर कोई जानकारी नहीं। अबू धाबी की IHC के साथ किसी बातचीत लेकर जानकारी नहीं है।

फेडरल बैंक-जना SFB

ऐसी खबरें हैं कि जना SFB में फेडरल बैंक कंट्रोलिंग स्टेक ले सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डील अंतिम चरण में है। जना होल्डिंग्स की 16.9% हिस्सेदारी बिक्री की संभावना है। कंट्रोलिंग स्टेक लेने पर ओपन ऑफर ट्रिगर हो सकता है

DCB बैंक: फंड जुटाने की तैयारी

DCB बैंक के बोर्ड ने 2,000 करोड़ रुपए तक फंड जुटाने को मंजूरी दे दी है। इसमें 1,500 करोड़ तक इक्विटी इश्यू के जरिए जुटाए जाएंगे। इसके लिए ChrysCapital समेत PE निवेशकों से बातचीत की रिपोर्ट आई है।

IIFL फाइनेंस पर ब्लैकस्टोन की नजर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकब्लैकस्टोन, IIFL फाइनेंस में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहा है। Fairfax के पास पहले 13.69% हिस्सेदारी थी। जुलाई में Fairfax ने 1.49% हिस्सेदारी बेची थी।

बैंकिंग-फाइनेंशियल: 1 साल में हुईं कई बड़ी डील्स

बैंकिंग-फाइनेंशियल में 1 साल में हुईं कई बड़ी डील्स पर नजर डालें तो RBL बैंक में एमिरेट्स NBD ने 3 अरब डॉलर के निवेश से 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं, श्रीराम फाइनेंस में MUFG ने 4.4 अरब डॉलर के निवेश से 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। वहीं, YES बैंक में SMBC 1.6 अरब डॉलर के निवेश से 20 फीसदी और फेडरल बैंक में ब्लैकस्टोन ने 6,197 करोड़ रुपए के निवेश से 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

 

 

 

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Nifty Target: ’12 महीने में 26500 तक पहुंच सकता है निफ्टी’, गोल्डमैन सैक्स को फाइनेंशियल, होटल और डिफेंस में दिख रहे मौके

Nifty Target: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs का मानना है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी 26,500 तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तर से इसमें करीब 12% की तेजी की गुंजाइश है। बेहतर इकोनॉमिक ग्रोथ और कंपनियों की कमाई में सुधार से बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।

इकोनॉमी में रिकवरी का असर

Goldman Sachs के ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट सुनील कौल ने कहा कि भारत ने हाल में दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद 26,500 का टारगेट बरकरार है।

कौल का कहना है कि अगले 12 महीनों में बाजार फिर अपने पुराने हाई के करीब जा सकता है। Goldman Sachs को भारतीय कंपनियों की कमाई में 12-13% ग्रोथ की उम्मीद है। कौल के मुताबिक इकोनॉमी में रिकवरी अब धीरे-धीरे ज्यादा क्षेत्रों में दिख रही है।

विदेशी निवेशकों का रुख बदला

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का मूड भी सुधरा है। जुलाई और अगस्त में भारत में करीब 2-3 अरब डॉलर का नेट इक्विटी इनफ्लो आया।

इससे पहले विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर AI की तेजी वाले दूसरे एशियाई और इमर्जिंग मार्केट्स में लगा रहे थे। हालांकि, अभी भी विदेशी निवेशक भारत में अंडरवेट हैं। ऐसे में सेंटीमेंट सुधरने पर भारत में और पैसा आ सकता है।

फाइनेंशियल पर सबसे ज्यादा भरोसा

सुनील कौल को सबसे ज्यादा भरोसा फाइनेंशियल सेक्टर पर है। बैंकों में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत है। नॉमिनल ग्रोथ में भी सुधार हो रहा है।

FCNR इनफ्लो के बाद बैंकों के लिए फंडिंग की स्थिति भी बेहतर हुई है। Goldman Sachs को अगले 3-5 साल में करीब 14% लोन ग्रोथ की उम्मीद है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में करीब 17% ग्रोथ का अनुमान है।

रिफाइनर्स और होटल्स भी पसंद

फाइनेंशियल के बाद कौल को रिफाइनर्स पसंद हैं। प्रोडक्ट मार्केट में सप्लाई कम रहने से इनकी कमाई को फायदा मिल सकता है।

होटल और टूरिज्म सेक्टर पर भी उनका भरोसा है। डिफेंस और यूटिलिटी कंपनियों में भी उन्हें मीडियम टर्म में अच्छे मौके दिख रहे हैं।

IT शेयरों पर सावधानी

IT सर्विसेज पर Goldman Sachs अभी अंडरवेट है। हाल में IT शेयरों में रिकवरी जरूर आई है। लेकिन कौल के मुताबिक कंपनियों की कमाई पर अभी दबाव है।

वैल्यूएशन भी ज्यादा हैं। उनका मानना है कि हाल की तेजी में शॉर्ट-कवरिंग की बड़ी भूमिका रही है। इसलिए इसे फंडामेंटल में बड़े सुधार का संकेत नहीं माना जा सकता।

Auto और Consumption पर क्या राय?

कंजम्पशन सेक्टर में कौल को चुनिंदा स्टेपल कंपनियां पसंद हैं। टूरिज्म भी उनकी पसंद में है। उनका झुकाव शहरी मांग से जुड़े कारोबार की तरफ है।

दूसरी ओर, ऑटो सेक्टर को लेकर वह सतर्क हैं। इसकी वजह बड़ा GST बेस ओवरहैंग है।

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FIIs की बिकवाली से इन शेयरों में बड़ा मौका! Nippon MF के शैलेश राज भान ने बताया किन सेक्टर्स में आएगी बंपर तेजी

Nippon India Mutual Fund: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज म्यूचुअल फंड हाउस निप्पॉन इंडिया ने भारतीय बाजारों को लेकर एक बेहद पॉजिटिव रिपोर्ट दी है। निप्पॉन इंडिया MF के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेश राज भान का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में बेहतर कॉरपोरेट अर्निंग्स और वाजिब वैल्यूएशन बाजार की चाल को रफ्तार देंगे।

शैलेश राज भान के मुताबिक, अगर कोई बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता है, तो अगले 3 सालों में भारतीय कंपनियों की कमाई सालाना 12 से 15 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। आइए जानते हैं उन्होंने किन सेक्टर्स पर दांव लगाने की सलाह दी है और कहां कमाई का मौका दिख रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बड़े शेयरों में बना मौका

शैलेश राज भान ने बताया कि पिछले कुछ समय में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स(FIIs) की ओर से हुई भारी बिकवाली ने लार्जकैप शेयरों के वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया है। FIIs की बिकवाली मुख्य रूप से लार्जकैप और फाइनेंशियल स्टॉक्स में केंद्रित थी। इसके चलते कई मजबूत और क्वालिटी कंपनियों के शेयर अब वाजिब और सही दामों पर उपलब्ध हैं।

जब वैल्यूएशन आपके पक्ष में हो और कंपनियों की कमाई बढ़ रही हो, तो अगले 3 से 4 सालों में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

प्राइवेट बैंक बने हुए है सबसे पसंदीदा सेक्टर

शैलेश राज भान ने दिग्गज निजी क्षेत्र के बैंकों को निवेश के लिए सबसे आकर्षक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि कई क्वालिटी प्राइवेट बैंक इस समय ऐसे वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहे हैं, जो बीते कुछ सालों में दुर्लभ ही देखने को मिला है। कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन तो अब पीएसयू बैंकों के आसपास आ पहुंचे हैं, जिससे इनमें री-रेटिंग की बड़ी गुंजाइश है।

कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में वापसी के संकेत

लंबे समय तक सुस्ती झेलने के बाद अब कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में भी वैल्यूएशन के लिहाज से खरीदारी के मौके दिख रहे हैं। ग्रामीण मांग में सुधार, टैक्स में राहत और कंपनियों की पहलों के चलते कंज्यूमबल्स, ड्यूरेबल्स, होटल्स और सर्विस सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ लौट रही है।

बाजार आईटी सेक्टर के ग्रोथ आउटलुक को लेकर जरूरत से ज्यादा निगेटिव हो गया है। जो आईटी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाकर नए बिजनेस मॉडल में ढलेंगी, उन्हें आने वाले समय में बड़ा फायदा होगा।

कैपिटल गुड्स पर सतर्क रहें, पावर यूटिलिटीज पसंद

औद्योगिक और पावर सेक्टर पर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक रहने के बावजूद, फंड मैनेजर ने कैपिटल गुड्स और ट्रांसमिशन कंपनियों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें पहले ही बहुत बढ़ चुकी हैं। इसके बजाय, बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उन्होंने वाजिब वैल्यूएशन वाली पावर यूटिलिटी कंपनियों पर दांव लगाने की सलाह दी है।

पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर का रोल अहम

सोना और चांदी कीमती धातुओं पर बात करते हुए शैलेश राज भान ने कहा कि भले ही हाल के दिनों में इनकी तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी हो, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता और बाजार की उठापटक से बचने के लिए पोर्टफोलियो में सोना और चांदी होना बेहद जरूरी है।

अगर आप अगले 3 से 5 साल के नजरिए से भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो केवल तेजी में भागने के बजाय उन सेक्टर्स पर ध्यान दें जहां वैल्यूएशन वाजिब हैं और कंपनियों की कमाई में टिकाऊ सुधार दिख रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में किया खूब निवेश, जानिए कहां से हुई इनकी निकासी

जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने कुछ खास सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। इस दौरान कंज्यूमर सर्विस,हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ सबसे ज्यादा नेट इक्विटी निवेश किया गया है। वहीं,कैपिटल गुड्स और टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इनकी सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली है।

 FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव

जुलाई में FPI की पोजीशनिंग में भी बदलाव आया है। महीने के दूसरे आधे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इनकी तरफ से जबरदस्त खरीदारी हुई है। वहीं, मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में हुई खरीदारी के विपरीत दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली है।

कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में हुआ सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश 

जुलाई में कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा नेट FPI निवेश रहा है। इस सेक्टर में इस दौरान 10,201 रुपए करोड़ की खरीदारी हुई है। इस सेक्टर में 1 से 15 जुलाई के बीच 7,361 करोड़ रुपए और महीने के दूसरे हिस्से में 2,840 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया है।

हेल्थकेयर सेक्टर  पर भी आया FPI का दिल

हेल्थकेयर सेक्टर इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। इसमें FPIs का नेट निवेश 7,731 करोड़ रुपए रहा। इस सेक्टर में FPIs ने पहले हिस्से में 4,101 करोड़ रुपए और दूसरे हिस्से में 3,630 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स  भी आया पसंद

महीने के आगे बढ़ने के साथ ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीदारी में तेजी आई। FPIs ने 1-15 जुलाई के दौरान इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये और महीने के दूसरे हिस्से में 4,958 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे इसमें महीने का कुल नेट निवेश 7,342 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में भी हुई खरीदारी

मेटल्स और माइनिंग में सेक्टर में महीने के पहले हिस्से में 5,993 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। जिसके बाद FPIs ने महीने के दूसरे आधे हिस्से में 1,056 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली की,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में 4,937 करोड़ रुपए का नेट निवेश देखने को मिला।

महीने के दूसरे पखवाड़े में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बढ़ी खरीदारी 

महीने के दूसरे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी खरीदारी में तेजी देखने को मिली। जुलाई के पहले पखवाड़े में सिर्फ 60 करोड़ रुपये के नेट इन्वेस्टमेंट के बाद, FPIs ने दूसरे हिस्से में 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया,जिससे जुलाई में इस सेक्टर में होने वाला कुल निवेश 3,358 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने कंस्ट्रक्शन मटीरियल में 2,445 करोड़ रुपए का FPI निवेश आया,जिसमें से 1,574 करोड़ रुपए पहले पखवाड़े में और 871 करोड़ रुपए दूसरे पखवाड़े में आए।

जुलाई में सर्विस सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपए की नेट खरीदारी देखने को मिली। FPIs ने पहले पखवाड़े में इस सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपए का निवेश किया,जबकि दूसरे पखवाड़े में 30 करोड़ रुपए की मामूली बिकवाली की।

फाइनेंशियल सर्विसेज में हुई बिकवाली

असेट अंडर कस्टडी (AUC) के आधार पर FPI पोर्टफोलियो के सबसे बड़े सेक्टर,फाइनेंशियल सर्विसेज़ में जुलाई में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। FPIs ने महीने के पहले हिस्से में 1,975 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल सर्विसेज़ स्टॉक्स खरीदे,लेकिन दूसरे हिस्से में 2,669 करोड़ रुपये के स्टॉक्स बेचे।

जुलाई के आखिर में इस सेक्टर का AUC 21.13 लाख करोड़ रुपए था। जबकि 15 जुलाई को यह 21.39 लाख करोड़ रुपए पर था। फिर भी FPI पोर्टफोलियो में यह सेक्टर सबसे बड़ा निवेश वाला सेक्टर बना रहा।

कई दूसरे सेक्टर में भी भारी बिकवाली हुई। जुलाई में कैपिटल गुड्स सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपए की नेट FPI निकासी हुई,जबकि टेलीकॉम सेक्टर में 5,725 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई। पावर सेक्टर में 2,863 करोड़ रुपए की नेट बिकवाली हुई।

FPI AUC में फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा

फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा,ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स का FPI AUC में 5.40 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा रहा। इसके बाद हेल्थकेयर का नंबर आता है, जिसका हिस्सा 5.33 लाख करोड़ रुपये रहा। फिर कैपिटल गुड्स का हिस्सा 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा।

जुलाई के आखिर में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इक्विटी AUC 3.93 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का AUC 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा। रियल्टी सेक्टर का हिस्सा भी काफी बड़ा रहा,जो 1.54 लाख करोड़ रुपये पर रहा।

 

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