Gold Silver Prices Today: तीन दिन की गिरावट के बाद सोना ₹600 चढ़ा, चांदी भी ₹1200 महंगी

Gold Silver Price: लगातार तीन दिन गिरने के बाद गुरुवार को सोने की कीमत में फिर तेजी आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना ₹600 बढ़कर ₹1,58,600 प्रति 10 ग्राम हो गया। रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की नई खरीदारी से सोने को सहारा मिला।

चांदी में भी तेजी जारी रही। इसकी कीमत लगातार तीसरे दिन बढ़ी। गुरुवार को चांदी ₹1,200 चढ़कर ₹2,44,600 प्रति किलोग्राम हो गई। बुधवार को इसका भाव ₹2,43,400 था।

महंगाई के आंकड़ों पर नजर

Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त दिख रही है। अब बाजार की नजर अमेरिका के CPI यानी महंगाई के आंकड़ों पर है। ये आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के फैसले को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशक सतर्क दिखे। स्पॉट गोल्ड 1.4% गिरकर 4,340.71 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी करीब 6% गिरकर 64.54 डॉलर प्रति औंस रह गई।

फेड के फैसले का इंतजार

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, गुरुवार को सोना 4,400 डॉलर और चांदी 66 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई।

महंगाई के आंकड़ों से पहले निवेशक थोड़ा संभलकर चल रहे हैं। यही आंकड़े अमेरिकी फेड के 15-16 सितंबर के फैसले के लिए अहम होंगे।

कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी जारी रही। Brent क्रूड करीब 102.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। WTI क्रूड भी करीब 96.5 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

कायनात चेनवाला के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव में अभी कोई खास नरमी नहीं दिख रही है। इससे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इसका असर सोने और चांदी जैसी बुलियन कीमतों पर भी पड़ रहा है।

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी धड़ाम, इन तीन फैक्टर का दिखा असर

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी धड़ाम, इन तीन फैक्टर का दिखा असर

Gold Silver Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने बुलियन पर दबाव बनाया। वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त पॉलिसी की उम्मीद भी बढ़ी है।

कॉमेक्स गोल्ड गुरुवार शाम कारोबार में 1.68% गिरकर 4,386 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया। वहीं, चांदी 5.37% गिरकर 65 डॉलर प्रति औंस से नीचे रही।

घरेलू बाजार में भी दबाव दिखा। अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड फ्यूचर्स शाम के कारोबार में करीब 1% गिरकर ₹1,52,249 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी 3.63% गिरकर ₹2,35,347 प्रति किलोग्राम पर रही।

सोने पर क्यों बढ़ा दबाव?

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सोने में कारोबार कमजोर और उतार-चढ़ाव वाला रहा। ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी रही।

गुरुवार को डॉलर रुपया के मुकाबले 38 पैसे मजबूत होकर 95.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर के स्तर से ऊपर चली गई।

त्रिवेदी के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई की चिंता बनी हुई है। इससे फेड की सख्त पॉलिसी की उम्मीद बढ़ रही है। इसका दबाव सोने पर पड़ रहा है।

उनका कहना है कि मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बीच ऊंचे स्तरों पर सोने पर दबाव बना रह सकता है। घरेलू बाजार में सोने की रेंज ₹1,51,500 से ₹1,55,000 के बीच रह सकती है।

गोल्ड प्राइस का आउटलुक कैसा है

अब बाजार की नजर फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर है। इस हफ्ते आने वाले PCE Price Index के आंकड़े महंगाई की स्थिति का संकेत देंगे। इससे अगले हफ्ते होने वाली फेड बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें तय हो सकती हैं।

Anand Rathi Share and Stock Brokers की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में रिकवरी सोने पर फिर दबाव बना रही है। फिलहाल बाजार में तेजी को लेकर ज्यादा भरोसा नहीं है। निवेशक फेड के अगले कदम को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।

गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश

दूसरी तरफ, गोल्ड ETF में निवेश का रुझान मजबूत बना हुआ है। अगस्त 2026 में गोल्ड ETF में 18 अरब डॉलर का निवेश आया। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो है।

इससे ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग बढ़कर 4,189 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह फरवरी 2026 के 4,176 टन के पिछले रिकॉर्ड से भी ज्यादा है।

नार्वेकर के मुताबिक, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगे कच्चे तेल का दबाव सोने पर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बावजूद सोने की सेफ हेवन डिमांड को कुछ सपोर्ट मिल रहा है।

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