Gold Rate: सोने की कीमत फिर टूटी, क्या ये एक लाख रुपये तक गिर जाएगा? एक्सपर्ट्स ने 3 बड़ी बातें बताईं

इस साल सोना खरीदने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कीमत और गिरने का इंतजार करना चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि सोने की कीमत कितनी नीचे जाएगी। इसलिए सिर्फ सस्ता होने की उम्मीद में खरीदारी टालना सही फैसला नहीं हो सकता। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 तक भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत कभी भी 1 लाख रुपये से ऊपर नहीं गई थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने की कीमत 1.43 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार की अपील के बावजूद देश में सोने का कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, कई खरीदार फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत फिर से 1 लाख रुपये के आसपास आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध जैसे वैश्विक हालात के कारण महंगाई बढ़ी है। ऐसे में लोग पेट्रोल और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं, इसलिए सोने की खरीदारी को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।

क्या सोने की कीमत और गिरेगी? 

ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमत आगे और कम होगी या अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए। इस पर बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ऑगमॉन्ट की रिसर्च प्रमुख रेनिशा चैनानी के मुताबिक, ज्यादातर विशेषज्ञों को नहीं लगता कि सोना जल्द ही फिर से 10 ग्राम के लिए 1 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत सहारा मिल रहा है। उनके अनुसार, सोने का 1 लाख रुपये तक गिरना सिर्फ एक बहुत कम संभावना वाली स्थिति है, न कि सामान्य अनुमान।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, जिसका असर सोने पर भी पड़ा। मार्च से ही सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली और 24 जुलाई तक 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.43 लाख रुपये के आसपास रहा। रेनिशा चैनानी का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आना सामान्य बात है। उनका अनुमान है कि 2026 तक सोना 10 ग्राम के लिए 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये के दायरे से ऊपर ही बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि 5 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट बाजार में सामान्य उतार-चढ़ाव है, इसे बड़ी गिरावट या क्रैश नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपना पैसा सिर्फ सोने में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि अलग-अलग निवेश विकल्पों में निवेश करना चाहिए। उनका कहना है कि खबरों या अफवाहों को देखकर जल्दबाजी में सोना खरीदने या बेचने का फैसला नहीं लेना चाहिए। सबसे कम कीमत का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

कब आ सकती है सोने में बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट तभी आ सकती है जब कोई बड़ा आर्थिक बदलाव हो। जैसे अमेरिकी डॉलर बहुत मजबूत हो जाए, ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी हो या फिर सोने की मांग में भारी कमी आ जाए। फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिख रहे हैं।

क्या सोना फिर 1 लाख रुपये तक आ सकता है?

बोनांजा के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि 10 ग्राम सोने की कीमत का फिर से 1 लाख रुपये तक पहुंचना पूरी तरह असंभव नहीं है। हालांकि, मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए ऐसा जल्द होने की संभावना नहीं है। अगर ऐसा होता भी है, तो यह आने वाले मध्यम या लंबे समय में ही संभव हो सकता है।

किन वजहों से सस्ता हो सकता है सोना?

वरिष्ठ शोध विश्लेषक निरपेंद्र यादव का कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह दुनिया की आर्थिक स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगा।

उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों में सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है:

  • अगर दुनिया में युद्ध या दूसरे अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हो जाते हैं, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है।
  • अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं या अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने में देरी करता है, तो सोने में निवेश कम आकर्षक हो सकता है।
  • अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो इसका असर सोने जैसी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • अगर दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक सोना खरीदना कम कर देते हैं, तो कीमतों में कमजोरी आ सकती है।
  • अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर जा सकते हैं।

निरपेंद्र यादव ने कहा कि इतिहास बताता है कि अपने सबसे ऊंचे स्तर से 10 से 20 फीसदी तक गिरना सोने के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। हालांकि, लंबे समय में इसकी दिशा दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने सलाह दी कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अगर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आती है, तो इसे धीरे-धीरे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा सकता है। वहीं, कम समय के लिए निवेश करने वालों को कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और उसी के अनुसार अपनी निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

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Silver Rates Today: एक जुलाई को चांदी की नई कीमतें जारी! जानिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में क्या है रिटेल रेट

Silver Rates Today: जुलाई के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव दबाव में रहे, जिससे खरीदारों को राहत मिली। बुधवार, 1 जुलाई को भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत में भी गिरावट आई। प्रमुख शहरों में 24-कैरेट और 22-कैरेट सोने के रेट में थोड़ी कमी देखी गई। वहीं, घरेलू बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

1 जुलाई को अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड रेट 0.94% गिरकर ₹141,600 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, MCX सिल्वर फ्यूचर्स सुबह करीब 9:13 बजे 1.86% गिरकर ₹224,520 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ महीने का समापन हुआ। एनर्जी मार्केट के ट्रेडर्स कतर में अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (जो इंटरनेशनल बेंचमार्क है) गिरकर $72.92 प्रति बैरल पर आ गया। जून में इस कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 21% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। सुबह के कारोबार में Comex पर इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस हो गया। जबकि चांदी 2.93% गिरकर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू बाजार में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.84% ​​गिरकर ₹1,41,337 प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 1.8% गिरकर ₹2,24,268 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। बाजार की नजर US ADP एम्प्लॉयमेंट चेंज, नॉन-फार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इनसे बुलियन की कीमतों में अगली बड़ी हलचल आने की उम्मीद है।

LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “फेड की सख्त पॉलिसी के बाद, Comex गोल्ड में जून में पहले ही लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है। यह $4,500 से गिरकर $3,950 पर आ गया है, जिससे बाजार ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। $4,000 के स्तर के आसपास सोने में खरीदारी की अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। इस स्तर से नीचे जाने पर नई मांग आ रही है।”

एमसीएक्स पर चांदी का भाव

MCX पर चांदी के जुलाई/सितंबर वायदा में सुबह कारोबार के दौरान करीब 1.86% की गिरावट देखी गई। चांदी का वायदा भाव लगभग ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

गिरावट की वजह क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों पर कई कारणों का असर पड़ा है:-

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
  • वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?

चांदी के दाम में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आज के प्रमुख रेट (999 सिल्वर)

दिल्ली: लगभग ₹2,22,400 से ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम तक रेट है।

मुंबई: लगभग ₹2,23,800 प्रति किलोग्राम।

कोलकाता: लगभग ₹2,24,000 प्रति किलोग्राम।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 1.86% टूटकर ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और निवेशकों की सतर्कता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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