त्योहार-शादी के सीजन में देश में हो सकती है चांदी की कमी, भाव 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है

अगर इंपोर्ट पर पाबंदी जारी रहती है तो देश में त्योहारों और शादी के सीजन में चांदी की कमी हो सकती है। आगे चांदी की डिमांड बढ़ने की संभावना है। मेटल्स फोकस में सीनियर कंसल्टेंट (साऊथ एशिया एंड मिडिल ईस्ट) हर्षल बरोट ने यह अनुमान जताया।

ज्यादातर तरह के सिल्वर के लिए लाइसेंस जरूरी

ज्यादातर एचएस कोड्स के तहत अभी सिल्वर के इंपोर्ट के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से लाइसेंस जरूरी है। इसके चलते सिल्वर की नई सप्लाई हासिल करना मुश्किल हो गया है। इस वजह घरेलू बाजार की निर्भरता मौजूदा इनवेंट्रीज पर रिसाइक्ल्ड सिल्वर पर बढ़ गई है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी बिकवाली बढ़ी है। इससे प्रीमियम करीब 10 फीसदी रह गया है।

चांदी के पुराने स्टॉक से फिलहाल चल रहा काम

बारोट ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा, “मार्केट में सप्लाई कम है। नया मेटल उपलब्ध नहीं है। इसलिए मार्केट पहले से मौजूद स्टॉक से काम चला रहा है। कुछ रिसाइकल्ड सिल्वर बाजार में आ रहा है। लेकिन, नया इंपोर्ट अभी बहुत कम हो रहा है।” फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा, क्योंकि यह कमजोर डिमांड वाला सीजन है। लेकिन, अगस्त से हालात बदल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारी शुरू हो जाती है।

अगस्त-सितंबर के बाद बढ़ने लगेगी चांदी की डिमांड

उन्होंने कहा, “हमें अगस्त-सितंबर के बाद डिमांड शुरू हो जाने की उम्मीद है। आम तौर पर तब भारत में त्योहारों और शादी का सीजन शुरू हो जाता है।” उन्होंने कहा कि अगर तब तक इंपोर्ट शुरू नहीं होता है तो मार्केट में असाधारण स्थिति बन सकती है। तब डिमांड ज्यादा होगी, लेकिन सप्लाई कम होगी। उन्होंने बताया कि ट्रेडर्स इंपोर्ट के वैकल्पिक रास्तों के बारे में सोच रहे हैं। इनमें सिल्वर डोर की सोर्सिंग शामिल है। अगर इंपोर्ट शुरू हो जाता है तो घरेलू प्रीमियम घट सकता है।

अगले साल 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सिल्वर

अभी चांदी की घरेलू मांग कम है, लेकिन कीमतों में तेजी के बावजूद इंडस्ट्रियल मांग स्ट्रॉन्ग है। बारोट ने कहा कि इनवेस्टर्स सिल्वर को लेकर बुलिश हैं। ईटीएफ में कुछ बिकवाली के बावजूद चांदी में बड़ी बिकवाली देखने को नहीं मिली है। मेटल फोकस का मानना है कि अगले साल सिल्वर की कीमतों में तेजी दिखेगी। अगले 12 महीनों में सिल्वर की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल की तरह डिमांड मजबूत रहती है तो चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

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Silver Demand: सोना महंगा होने से चांदी खरीद रहे ग्राहक? इंडस्ट्री बोली- त्योहार और शादी सीजन में बढ़ सकती है डिमांड

Silver Demand: चांदी की मांग में आने वाले महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Silver Emporium के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मेहता का कहना है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच आने वाला त्योहार और शादी का सीजन देश की सालाना चांदी खरीद का करीब आधा हिस्सा तय करता है।

उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय की कमजोरी के बाद मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि यह रिकवरी कितनी मजबूत होगी, यह काफी हद तक चांदी की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, जिसकी वजह से कई ग्राहक नई खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

बढ़ी है रिटेल मांग

हाल के हफ्तों में चांदी के डिनर सेट, गिफ्टिंग आइटम और शादी-ब्याह से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हालांकि इस खरीदारी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नई मांग नहीं है। कई ग्राहक अपनी पुरानी चांदी देकर नए सामान खरीद रहे हैं।

मेहता के मुताबिक, पिछले दो महीनों की तुलना में बिक्री की मात्रा करीब 30% बढ़ी है। इसके बावजूद कुल कारोबार अभी भी पिछले साल के मुकाबले 25-30% कम बना हुआ है।

महंगे सोने से चांदी को फायदा

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का फायदा अब चांदी को मिलता दिख रहा है। कई ग्राहक सोने की बजाय चांदी के गहनों की तरफ रुख कर रहे हैं क्योंकि यह सस्ता विकल्प है। यही वजह है कि कई गोल्ड ज्वेलर्स भी अब चांदी के कारोबार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राहुल मेहता के मुताबिक, पिछले छह महीनों में नए सिल्वर स्टोर खोलने की दिलचस्पी 300% से 400% तक बढ़ी है। इनमें से कई नए स्टोर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोले जा रहे हैं, जो महंगे सोने की वजह से चांदी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सप्लाई को लेकर चिंता नहीं

चांदी की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। राहुल मेहता का कहना है कि आयात पर कुछ प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा रिसाइक्लिंग भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी चांदी एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में चांदी की कोई कमी नहीं है और जरूरत हिसाब से कच्चा माल मौजूद है।

निवेशकों का रुख अभी भी कमजोर

हालांकि निवेशकों की तरफ से मांग अभी कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में प्रीमियम में कोई बड़ी तेजी नहीं दिख रही है।

कई निवेशक अभी भी चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर असमंजस में हैं। वे कीमतों में ज्यादा स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही निवेश मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

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Gold Silver Rates Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी भी 4000 रुपये लुढ़की

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी में 24 जून को गिरावट आई। सोना 1,200 रुपये गिरकर 1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 4000 रुपये फिसली। सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बेहतर हो रहा सेंटिमेंट है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सिल्वर में लगातार दूसरे दिन कमजोरी दिखी। यह 4000 रुपये गिरकर 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी का भाव अप्रैल के शुरुआती लेवल पर पहुंचा

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस गिरावट से चांदी की कीमतें अप्रैल की शुरुआत के अपने लेवल के करीब पहुंच गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने में कमजोरी बुधवार को भी जारी रही। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर में मजबूती है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी देखने को मिली। यह 1.3 फीसदी यानी 52 डॉलर गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में डॉलर इंडेक्स 101 लेवल के पार पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती आने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है।

सोने पर शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रह सकता है

कमोडिटी के जानकारों का मानना है कि सोने पर अभी दबाव दिख सकता है। अगर बीच में कीमतों में तेजी आती है तो मुनाफावसूली की वजह से वह जारी नहीं रह पाएगी। हालांकि, अमेरिका-ईरान में डील की खबर से बुलियन में रिकवरी दिख सकती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था।

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फाइनेंशियल मार्केट्स में दिख रहा एडजस्टमेंट

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी आधारित एडजस्टमेंट दिख रहा है। ग्लोबल एआई और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। उधर, फेडरल रिजर्व का रुख भी बदला दिख रहा है।