RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

RBI loan recovery rules: अगर आपने पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की EMI नहीं चुकाई है, तो भी बैंक आपका मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट लॉक नहीं कर सकेंगे। RBI ने साफ कर दिया है कि ऐसा सिर्फ उसी स्थिति में हो सकता है, जब उसी डिवाइस को खरीदने के लिए बैंक ने लोन दिया हो। इसमें भी कुछ शर्तें रहेंगी।

बैंकों और रिकवरी एजेंटों की सख्त वसूली, उत्पीड़न और ग्राहकों के डेटा के गलत इस्तेमाल की शिकायतों के बाद RBI ने यह फैसला लिया है। RBI ने 6 अगस्त 2026 को नए नियम जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

कब लॉक हो सकता है डिवाइस?

अगर बैंक ने उसी मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की खरीद के लिए लोन दिया है, तभी उस पर पाबंदी लगाई जा सकती है। लेकिन यह भी तुरंत नहीं होगा।

RBI के मुताबिक, पहले बैंक को नोटिस देना होगा। अगर नोटिस के बाद भी 30 दिन तक किस्त नहीं चुकाई जाती, तभी सीमित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। पूरी तरह लॉक करने की कार्रवाई 60 दिन बाद ही हो सकेगी और वह भी तभी, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में हो।

जरूरी सुविधाएं बंद नहीं होंगी

बैंक किसी भी हाल में इनकमिंग कॉल, SMS और इमरजेंसी SOS जैसी जरूरी सुविधाएं बंद नहीं कर सकेंगे। यानी जरूरत पड़ने पर आप इनका इस्तेमाल करते रहेंगे।

रिकवरी एजेंट नहीं कर सकेंगे परेशान

RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। वे गाली-गलौज नहीं कर सकते। धमकी नहीं दे सकते। सोशल मीडिया पर बदनाम नहीं कर सकते। रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों पर दबाव डालने के लिए संपर्क भी नहीं कर सकते।

निजी डेटा भी रहेगा सुरक्षित

बैंक या उनकी थर्ड पार्टी एजेंसियां आपके फोन का निजी डेटा नहीं देख सकेंगी। कॉन्टैक्ट्स, SMS, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी हालत में लोन वसूली के लिए नहीं किया जा सकेगा।

इसका मतलब क्या है?

इन नियमों का मतलब यह नहीं है कि लोन माफ हो गया। EMI नहीं चुकाने पर ब्याज लगेगा, क्रेडिट स्कोर खराब होगा और बैंक कानूनी तरीके से वसूली कर सकेंगे। लेकिन अब वे ग्राहकों को डराने या उनकी निजी डिवाइस और डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

क्या लोन डिफॉल्ट होने पर बैंक आपका मोबाइल या लैपटॉप बंद कर सकेंगे? RBI के बड़े फैसले की हर डिटेल

आरबीआई ने लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर एक अहम फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि अगर ग्राहक होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के रीपेमेंट पर डिफॉल्ट करता है तो बैंक लोन की रिकवरी के लिए ग्राहक के मोबाइल फोन और लैपटॉप को बंद नहीं कर सकेंगे। बैंक लैपटॉप और मोबाइल फोन को तभी बंद कर सकते हैं, जब इन्हें (लैपटॉप-मोबाइल) खरीदने के लिए उन्होंने ग्राहक को लोन दिया हो।

आरबीआई ने नए सर्कुलर में क्या कहा है

RBI ने कहा है कि बैंकों को खास मामलों में जिनमें उन्हें लोन रिकवरी के लिए डिवाइसेज को बंद करने की इजाजत है, शुरू में ही ऐसा करने के बजाय धीरे-धीरे इस तरफ बढ़ना चाहिए। दरअसल, कई ग्राहकों ने बकाए लोन की रिकवरी में उनके साथ होने वाले व्यवहार और रिकवरी एजेंसियों के खिलाफ कई शिकायतें की थीं। इनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल और उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल शामिल है।

रिकवरी से जुड़े नए नियम 1 जनवरी से लागू होंगे

केंद्रीय बैंक के सर्कुलर के मुताबिक, ये नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे। इस सर्कुलर में कहा गया है, “कोई बैंक रिकवरी टूल के रूप में ऐसे टेक्नोलॉजी-बेस्ड मैकेनिज्म का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जिससे बॉरोअर के मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे डिवाइसेज काम करना बंद कर दें। वह सिर्फ ऐसे मामले में लोन की रिकवरी के लिए ऐसा कर सकता है, जब डिवाइस बैंक के लोन के पैसे से खरीदा गया हो। “

शुरुआत में ही बैंक लैपटॉप-मोबाइल फोन बंद नहीं कर सकते

आरबीआई ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में जिनमें ग्राहक ने बैंक से लोन लेकर ऐसे डिवाइसेज (लैपटॉप, मोबाइल फोन या टैबलेट) खरीदा है, उनमें बैंक शुरू में ही डिवाइस को बंद करने की जगह धीरे-धीरे ऐसा करने की तरफ बढ़ सकता है। इसके अलावा बैंक ऐसे फंक्सनलिटीज को बंद (restrict/disable) नहीं कर सकते, जिन्हें इनकॉमिंग कॉल, एसएमएस और इमर्जेंसी एसओएस फीचर्स के लिए जरूरी माना जाता है।

आरबीआई ने लोन रिकवरी ड्राफ्ट पर कई फीडबैक स्वीकार किए हैं

इस साल मई की शुरुआत में आरबीआई ने लोन की रिकवरी और रिकवरी एजेंट्स के इस्तेमाल में रेगुलेटेडेट एंटिटीज के व्यवहार से जुड़े नियमों का एक ड्राफ्ट पेश किया था। इस ड्राफ्ट पर आरबीआई को काफी फीडबैक मिले थे। केंद्रीय बैंक ने कई फीडबैक को स्वीकार करने के बाद कहा है कि टेक्नोलॉजी-बेस्ड रिकवरी मैकेनिज्म का इस्तेमाल करने वाले आरई (रेगुलेटेड एंटिटीज) और थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर को डिवाइस बनाने वाली कंपनी या ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म से सर्टिफिकेशन हासिल करना होगा।