पशुओं की जान बचाने के लिए Scooty को बना दिया Ambulance | The Better India Hindi

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पशुओं की सेवा करना अच्छी बात है, लेकिन क्या इसकी कोई सीमा होती है?

24 साल के देवेंद्र ने जानवरों के लिए अपनी जॉब, घर और परिवार तक को छोड़ दिया।

एक-एक पैसा जोड़कर एक सेकंड-हैंड स्कूटी खरीदी है जिससे वो आगरा शहर के कोने-कोने में ज़रूरतमंद जानवरों को रेसक्यू करने पहुँचते हैं, वो भी बिना चप्पल या जूते के।

जी हाँ, देव ने अपनी चप्पलें भी त्याग दी हैं। क्यों? क्योंकि वह सड़क पर रहने वाले बेज़ुबानों के दर्द का अनुभव करना चाहते हैं। वह तब तक चप्पल नहीं पहनेंगे जब तक जानवरों के बेहतर इलाज के लिए अपने शेल्टर होम में एक ऑपरेशन थिएटर न बना लें।

देखिए उनकी पूरी कहानी और जल्द से जल्द OT बनाने में उनका साथ दीजिए। 100 हो या १०००, आपका एक छोटा सा योगदान भी बहुत बड़ी मदद बन सकता है

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Tiger Attack Video: टाइगर के बाड़े में घुसा व्यक्ति, फिर बाघ ने किया हमला… वीडियो से सामने आया खौफनाक मामला

इंग्लैंड के यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क में एक खौफनाक हादसा सामने आया है, जहां बाघ के बाड़े में घुसे एक शख्स की हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पार्क में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को खाली करा लिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद व्यक्ति की जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और उसके परिवार को सूचना दे दी गई है।

वहीं, घटना के बाद बाघ की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जानवर सुरक्षित है और अपने बाड़े के अंदर ही मौजूद है। फिलहाल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। इस घटना के बाद वाइल्डलाइफ पार्क को रविवार तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।

दोपहर में मिली हमले की सूचना, मौके पर पहुंची पुलिस

साउथ यॉर्कशायर पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 1:35 बजे उन्हें सूचना मिली कि डोनकास्टर के पास स्थित वाइल्डलाइफ पार्क में एक व्यक्ति बाघ के बाड़े के अंदर चला गया है। वहां बाघ ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।

सूचना मिलने के बाद आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर पहुंचीं। मेडिकल टीम ने व्यक्ति को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी और मौके पर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल मृतक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि उसके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और विशेषज्ञ अधिकारी इस मुश्किल समय में परिवार की मदद कर रहे हैं।

बाघ सुरक्षित, लोगों को खतरे की आशंका नहीं

घटना के बाद सोशल मीडिया पर बाघ की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं होने लगीं। इस पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि हमले में बाघ को कोई चोट नहीं आई है। घटना के बाद भी वह अपने बाड़े के अंदर ही रहा।

पुलिस के अनुसार, आम लोगों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। हालांकि, व्यक्ति बाघ के बाड़े में किन परिस्थितियों में पहुंचा और उसके बाद वास्तव में क्या हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

Wildlife Park खाली कराया गया, जांच जारी

घटना के बाद यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क को खाली करा लिया गया। पार्क प्रबंधन ने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई थी और संबंधित एजेंसियों को मौके पर बुलाया गया था। अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर यह घटना कैसे हुई।

पार्क प्रबंधन ने कहा कि वहां आने वाले लोगों, कर्मचारियों और जानवरों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। घटना के बाद पार्क को रविवार तक बंद रखने की घोषणा की गई।

फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। व्यक्ति बाड़े में कैसे पहुंचा और घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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2000+ जानवरों की जान बचाने वाले One-Man Army | Uttarakhand | The Better India Hindi

2000+ जानवरों की जान बचाने वाले One-Man Army | Uttarakhand | The Better India Hindi

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नाले में फंसा कोई कुत्ता या सड़क किनारे ज़िंदगी से लड़ रही कोई गाय… इनकी मदद के लिए कितने लोग आगे आते हैं? अगर बात उत्तराखंड, नैनीताल के हल्द्वानी शहर की हो तो ऐसी किसी भी परिस्थिति में बंटी ज़रूर आते हैं, चाहे दिन हो या आधी रात!

इन्हें One-man Army कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि पशुओं को बचाने के लिए ये अकेले ही काम करते हैं। एक बाइक, एक फर्स्ट-ऐड बैग और एक रस्सी के दम पर करीब 2000 जानवरों की जान बचा चुके हैं।

इस काम की सीख उन्हें अपनी नानी से मिली थी, आज नानी दुनिया में नहीं, लेकिन बंटी ने इस काम को पूरी ज़िंदगी सौंप दी है।

अगर आप भी एक पशु-प्रेमी हैं, तो इनसे ज़रूर जुड़ें

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4 KM तक बहता रहा 4 दिन का नन्हा हाथी, मछुआरों ने जान जोखिम में डालकर मां से मिलाया; दिल छू लेगा ये VIDEO, देखें

4 KM तक बहता रहा 4 दिन का नन्हा हाथी, मछुआरों ने जान जोखिम में डालकर मां से मिलाया; दिल छू लेगा ये VIDEO, देखें

Wholesome Elephant Rescue : पश्चिम बंगाल की तीस्ता नदी में बह रहे हाथी के महज चार दिन के बच्चे को स्थानीय मछुआरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना बचा लिया। तेज बहाव के बीच करीब चार किलोमीटर तक बह चुके इस नन्हे हाथी को मछुआरों ने नाव से पीछा कर सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वन विभाग की मदद से उसे उसकी मां से मिलाया गया। मां ने बच्चे को अपनाया और उसे दूध पिलाया तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला बन गया।

 

तेज बहाव में बह गया था हाथी का बच्चा

 

जानकारी के मुताबिक, हाथियों का एक झुंड शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे गजोल्डोबा बैराज के पास तीस्ता नदी पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान तेज बहाव में हाथी का बच्चा अपनी मां से अलग हो गया और पानी के साथ करीब चार किलोमीटर दूर बह गया।

 

बच्चे को तीस्ता नदी के 12वें स्पर के पास संघर्ष करते देख स्थानीय मछुआरों ने तुरंत अपनी नाव उसकी ओर मोड़ दी। नॉर्थ बंगाल फिशरमेन फोरम से जुड़े पांच मछुआरे—मिठू दास, विश्वनाथ दास, राजेश दास, गोपाल दास और बबलू दास बच्चे के पीछे करीब चार किलोमीटर तक गए।

 

बच्चा लगातार तेज लहरों में बह रहा था और सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहा था। उसकी छोटी-सी सूंड पानी के ऊपर दिखाई दे रही थी। हालात बेहद मुश्किल थे, लेकिन मछुआरों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। तीन मछुआरे पानी में उतर गए और किसी तरह बच्चे को खींचकर नाव तक लाने में कामयाब रहे।

 

 मां से मिलते ही बदल गया पूरा मंजर

 

बचाए जाने के बाद हाथी के बच्चे को वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया गया। उसे काठांबारी रेंज कार्यालय ले जाकर पशु चिकित्सकों ने उसकी जांच की। राहत की बात रही कि बच्चे को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी।

 

इसके बाद बैकुंठपुर वन प्रभाग की टीम ने उसकी मां को तलाशने का अभियान शुरू किया। वनकर्मियों, स्थानीय लोगों और मछुआरों के करीब दो घंटे के संयुक्त प्रयास के बाद आखिरकार बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाया गया।

 

मां हाथी अपने बच्चे के पास आई और उसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसे बच्चे को दूध पिलाते हुए भी देखा गया। यह पल पूरे बचाव अभियान का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहा। 

 

बैकुंठपुर के DFO मुदित कुमार ने मछुआरों की समय पर की गई कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने बताया कि बच्चे को जल्द से जल्द मां से मिलाना बेहद जरूरी था, क्योंकि लंबे समय तक इंसानों के संपर्क में रहने पर कई बार हाथियों का झुंड बच्चों को दोबारा स्वीकार नहीं करता।

 

इस पूरे रेस्क्यू ने एक बार फिर दिखाया कि मुश्किल वक्त में इंसान और वन्यजीवों के बीच की संवेदनशीलता कितनी खूबसूरत हो सकती है। नन्हे हाथी की जिंदगी बचाने से लेकर उसे उसकी मां की गोद तक पहुंचाने तक, मछुआरों और वन विभाग की यह कोशिश दिल जीत लेने वाली है।

क्या आप जानते हैं? ये जानवर खड़े होकर भी ले सकते हैं गहरी नींद, तरीका कर देगा हैरान

जब इंसान थकता है तो सबसे पहले उसे आरामदायक बिस्तर और सुकून भरी नींद की तलाश होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जानवरों की दुनिया में सोने और आराम करने के तरीके काफी अलग होते हैं? कई जानवर ऐसे हैं जो बिना बिस्तर और बिना जमीन पर लेटे भी आराम कर लेते हैं। कोई खड़े-खड़े आंखें बंद कर लेता है, तो कोई पेड़ की डाल पर बैठकर ही नींद पूरी करता है। हाथी, जिराफ, घोड़े, जेब्रा और फ्लेमिंगो जैसे जानवरों की नींद से जुड़े ये तरीके प्रकृति की अनोखी समझ को दिखाते हैं। इनके लिए आराम सिर्फ शरीर को शांत करना नहीं, बल्कि आसपास के खतरे से खुद को सुरक्षित रखना भी होता है।

यही वजह है कि कई जानवरों ने अपने शरीर और व्यवहार में ऐसे खास बदलाव विकसित किए हैं, जो उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में आराम करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं उन जानवरों के बारे में, जो इंसानों से बिल्कुल अलग अंदाज में सोते हैं।

हाथी

अपने विशाल शरीर के बावजूद हाथी कभी-कभी खड़े होकर थोड़ी देर आराम या नींद ले लेते हैं। इससे उन्हें बार-बार जमीन पर लेटने और फिर उठने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, जब उन्हें ज्यादा गहरी नींद या लंबे आराम की जरूरत होती है, तो वे जमीन पर लेटना भी पसंद करते हैं। खड़े होकर आराम करना उन्हें आसपास की स्थिति पर नजर बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

जिराफ

जिराफ बेहद कम समय सोने वाले स्तनधारियों में गिने जाते हैं। वे परिस्थितियों के अनुसार दिन में करीब 30 मिनट से लेकर कुछ घंटों तक आराम कर सकते हैं। उनकी लंबी टांगों और गर्दन के कारण जमीन पर लेटना और फिर उठना आसान नहीं होता। इसलिए वे कई बार खड़े-खड़े ही आराम कर लेते हैं, ताकि खतरा महसूस होने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।

मैना और कबूतर

मैना और कबूतर जैसे पक्षी पेड़ों की डालियों पर बैठकर आराम करते हैं और इसी स्थिति में सो भी सकते हैं। इनके पैरों में ऐसा प्राकृतिक तंत्र होता है, जिससे डाल पर बैठते ही पंजे मजबूती से पकड़ बना लेते हैं। यही वजह है कि नींद के दौरान भी वे आसानी से नीचे नहीं गिरते। ऊंचाई पर आराम करना उन्हें जमीन के कई शिकारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

फ्लेमिंगो

फ्लेमिंगो को एक पैर पर खड़े रहने के लिए जाना जाता है, लेकिन खास बात यह है कि वे इसी मुद्रा में सो भी सकते हैं। एक पैर पर खड़े रहने से पानी में शरीर की गर्मी कम निकलती है। उनके पैरों की बनावट और संतुलन की क्षमता इस अजीब दिखने वाली मुद्रा को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है।

जेब्रा

जंगल और खुले मैदानों में जेब्रा को हमेशा शिकारियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में खड़े होकर आराम करना उनके लिए उपयोगी हो सकता है। इस तरह वे पूरी तरह जमीन पर लेटे बिना थोड़ी देर आराम कर सकते हैं और खतरा नजर आते ही तेजी से भाग सकते हैं। उनके पैरों में मौजूद विशेष संरचना लंबे समय तक खड़े रहने में मदद करती है।

गाय

गाय भी खड़े होकर आराम कर सकती हैं, खासकर तब जब वे अपने आसपास के माहौल पर नजर रखना चाहती हैं। हालांकि, लंबे आराम और बेहतर नींद के लिए वे जमीन पर लेटती हैं। सुरक्षित माहौल मिलने पर गायों को अक्सर समूह में लेटे हुए आराम करते देखा जा सकता है।

घोड़े

घोड़े खड़े होकर सोने की अपनी क्षमता के लिए शायद सबसे ज्यादा मशहूर हैं। इनके पैरों में ‘स्टे अपरेटस’ (Stay Apparatus) नाम की विशेष व्यवस्था होती है, जो पैरों को स्थिर स्थिति में रखने में मदद करती है। इससे घोड़ा बिना लगातार मांसपेशियों पर दबाव डाले खड़ा रहकर आराम कर सकता है। जंगल में रहने वाले घोड़ों के लिए यह क्षमता खास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि खतरा सामने आते ही वे जल्दी से दौड़ सकते हैं।

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