PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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USA Independence Day: गर्मियों के कहर में झुलसा 4 जुलाई का जश्न, फीकी पड़ी आजादी की 250वीं वर्षगांठ

USA Independance Day: भीषण गर्मी में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ झुलस गई। अमेरिका के मध्य और पूर्वी हिस्सों में शुक्रवार को भीषण गर्मी की लहर ने 4 जुलाई यानी स्वतंत्रता दिवस को होने वाले जश्न बुरी तरह प्रभावित किया। राजधानी वॉशिंगटन समेत कई जगहों पर अधिकारियों को दर्जनों परेड, संगीत कार्यक्रम और आतिशबाजी के शो रद्द करने पड़े या टालने पड़े। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गर्मी की इस लहर में वॉशिंगटन के नेशनल मॉल में आयोजित ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर भी झुलस गया जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के 250वीं वर्षगांठ के समारोहों का प्रमुख हिस्सा था।

46 डिग्री गर्मी ने किया जश्न फीका

शुक्रवार की देर रात नेशनल पार्क सर्विस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वॉशिंगटन की इंडिपेंडेंस डे परेड रद्द करने का ऐलान किया था। यह परेड शनिवार अमेरिकी समयानुसार सुबह 10:30 बजे शुरू होनी थी। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि हीट इंडेक्स 115 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 46 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। अमेरिका में गर्मियों का कहर हीटडोम के चलते है, जो एक हाई-प्रेशर सिस्टम है। इसमें गर्म हवा एक क्षेत्र में फंस जाती है और ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है।

अमेरिका 4 जुलाई को ब्रिटेन से 1776 में आजादी के ऐलान पर हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इस दिन अमेरिकी बापबेक्यू, परेड और आतिशबाजी जैसे कार्यक्रमों के लिए इकट्ठा होते हैं। हालांकि इस बार गर्मियों ने इसका जश्न फीका कर दिया और धड़ाधड़ प्रोग्राम कैंसल हो रहे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलाडेल्फिया में अधिकारियों ने भीषण गर्मी के चलते शहर के जश्न के मुख्य कार्यक्रम ‘सैल्यूट टू इंडिपेंडेंस परेड’ को रद्द कर दिया। यह फैसला गुरुवार को तापमान के 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने के बाद लिया गया। इससे पहले इतना तापमान साल 1901 में था।

गर्मी के चलते अमेरिका में दूसरी जगहों पर भी कार्यक्रम रद्द हुए या टल गए। न्यू जर्सी के हैडन टाउनशिप ने भी अपनी सालाना 4 जुलाई की परेड रद्द कर दी तो अपस्टेट न्यूयॉर्क के वॉटरटाउन ने अपना इंडिपेंडेंस डे कॉन्सर्ट और आतिशबाजी का कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके अलावा बोस्टन में अधिकारियों ने नदी के किनारे होने वाले सालाना आतिशबाजी के जश्न में एंट्री का समय चार घंटे आगे बढ़ाकर दोपहर के बजाय शाम 4 बजे कर दिया।

अमेरिका में कैसी है हालत?

भीषण गर्मी के चलते अमेरिका में पावरग्रिड पर दबाव बढ़ा। अमेरिका के सबसे बड़े पावर ग्रिड ऑपरेटर पीजेएम ने इमरजेंसी कंवर्जेशन प्रोग्राम के ग्राहकों को बिजली बिजली की खपत कम करने को कहा है। पीजेएम मिड-अटलांटिक, दक्षिण और वाशिंगटन डीसी में 6.7 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करती है। पीजेएम ने अब लोगों से बिजली कम खर्च करने का आग्रह किया है। न्यूयॉर्क में शुक्रवार देर दोपहर तक 17 हजार लोग बिना बिजली के थे। मांग बढ़ने पर कंपनी ने न्यूयॉर्क शहर और वेस्टचेस्टर काउंटी के ग्राहकों से बिजली बचाने की अपील की। न्यूयॉर्क शहर में गर्मी से गोंद पिघलने के कारण जूते मैनहट्टन की सड़कों पर चिपक रहे थे।

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IMD Alert: प्रचंड गर्मी के मौसम में इस साल AC की मांग क्यों ठंडी पड़ी? हीटवेव से बचने के लिए लोग कर रहे हैं ये काम

Heatwave Alert in india: चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में गर्मी से जुड़े उत्पादों की मांग में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। मौसम में आए बदलाव और महंगाई के दबाव के कारण एयर कंडीशनर (AC) की बिक्री अपेक्षा से कमजोर रही है। वहीं, ठंडे ड्रिंक्स, आइसक्रीम, डेयरी उत्पाद और अन्य ताजगी देने वाले उत्पादों की मांग मजबूत बनी रही। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि जून में कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, आंधी और शाम के समय अपेक्षाकृत कम तापमान रहने से AC की जरूरत कम महसूस हुई।

वहीं, बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता महंगे एसी खरीदने के बजाय एयर कूलर और पंखों जैसे अपेक्षाकृत सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। गोदरेज एंटरप्राइजेज समूह के कारोबार प्रमुख और ईवीपी (उपकरण कारोबार) कमल नंदी ने पीटीआई से कहा कि ठंडक प्रदान करने वाले उत्पादों की कैटेगरी में मांग का रुख मिला-जुला रहा। रेफ्रिजरेटर की मांग सामान्य और प्रीमियम दोनों वर्गों में मजबूत बनी हुई है, जबकि मानसून के आगमन के साथ वॉशिंग मशीन की मांग भी बढ़ रही है।

AC की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट

हालांकि, उन्होंने कहा कि जून में पूरे देश खासकर उत्तर भारत में एसी की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उनके अनुसार, उद्योग स्तर पर एसी की बिक्री घटी है। इसकी बड़ी वजह मौसम में बदलाव है। कई क्षेत्रों में आंधी-बारिश और रात के समय तापमान कम रहने से लोगों को एसी की जरूरत पहले जैसी नहीं रही। इसके अलावा महंगाई के चलते उपभोक्ता गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं।

नंदी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की मूल्य वृद्धि के कारण एसी की कीमतें करीब 18 से 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। इसी वजह से कई उपभोक्ता एसी की जगह एयर कूलर और पंखों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

गर्मी का मौसम उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा

एक प्रमुख एसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बार गर्मी का मौसम उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, विशेषकर जून का महीना कमजोर रहा। हालांकि, चालू वर्ष में अब तक उद्योग के कारोबार में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी और ऊंची कीमतें हैं।

इन कंपनियों की हुई बंपर कमाई

इसके उलट पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों ने गर्मियों के दौरान मजबूत मांग दर्ज की। कोका-कोला भारत और दक्षिण-पश्चिम एशिया के उपाध्यक्ष (ग्राहक विकास) अभिषेक गुप्ता ने कहा कि कंपनी को पूरे गर्मी के मौसम में अच्छी मांग मिल रही है। छोटे पैक, क्विक कॉमर्स और चलते-फिरते उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति से बिक्री को मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि कंपनी अपने बॉटलिंग साझेदारों के साथ मिलकर ठंडे पेय की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कूलिंग ढांचे और वितरण नेटवर्क का विस्तार कर रही है। डेयरी क्षेत्र में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने कहा कि जून तिमाही में कंपनी के ताजा डेयरी उत्पादों और आइसक्रीम कारोबार की बिक्री मात्रा में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

डेयरी उत्पादों की मजबूत मांग

उन्होंने बताया कि आइसक्रीम, दही और डेयरी उत्पादों की मजबूत मांग ने इस वृद्धि को गति दी। हैवमोर आइसक्रीम के मैनेजिंग डायरेक्टर देबब्रत मुखर्जी ने कहा कि कोन, स्टिक और सिंगल-सर्व कप जैसे त्वरित उपभोग वाले उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। फटाफट सामान पहुंचाने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और तत्काल उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति से इन उत्पादों की बिक्री को विशेष बल मिला है।

डीएस ग्रुप के कारोबार प्रमुख (मसाला) संदीप घोष ने कहा कि गर्मियों के दौरान रायता मसाला, छाछ मसाला, जलजीरा और काला नमक जैसे पारंपरिक उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह रुझान दर्शाता है कि पारंपरिक भारतीय स्वाद और पेय आज भी ग्रामीण और शहरी, दोनों बाजारों में उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं।

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