Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

Defense export : रक्षा मंत्रालय का एक्सपोर्ट के नियमों को आसान करने का फैसला लिया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए SOP ( स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) आसान किया गया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस नियम भी आसान किए गए हैं। अब तीन अलग-अलग ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की जगह एक OGEL होगा। ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की गई है। OGEL का दायरा 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है।

इससे बार-बार एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन की जरूरत घटेगी। इंटरनेशनल टेंडर में एक्सपोर्ट प्रक्रिया आसान होगी। लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनियों को राहत मिलेगी। बता दें किडिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर है। डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड पर है। रक्षा मंत्रालय को भरोसा है कि इस कदम से डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ेंगे।

सरकार ने भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए अपने उत्पाद विदेशों में बेचना आसान बनाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। इसके तहत निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और’ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस'(OGEL) फ्रेमवर्क का दायरा बढ़ाया गया है।

संशोधित डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत,ज्यादातर मामलों में गैर-घातक डिफेंस प्रोडक्ट के निर्यात के लिए अब संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने की जरूरत नहीं होगी,जबकि संवेदनशील देशों के लिए सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। इंटरनेशनल टेंडर और एग्ज़िबिशन के लिए सभी तरह के सामान के एक्सपोर्ट पर कंसल्टेशन की जरूरत भी खत्म कर दी गई है। उम्मीद है कि इस कदम से भारतीय कंपनियों को विदेशों में मिलने वाले मौकों पर तेजी से काम करने और बिना किसी अतिरिक्त कानूनी बाधा के अपने प्रोडक्ट को प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी।

OGEL फ्रेमवर्क में और भी बड़े बदलाव किए गए हैं। OGEL एक स्थायी,एक बार मिलने वाला एक्सपोर्ट ऑथराइज़ेशन होगा। यह एक्सपोर्टर्स को हर शिपमेंट के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय,खास डिफेंस आइटम के कई कंसाइनमेंट के लिए खुद मंजूरी जेनरेट करने की सुविधा देगा। सरकार ने बड़े प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट,पार्ट्स और कंपोनेंट्स और कंपनी के अंदर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन मौजूदा OGEL SOPs को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया है।

खास बात यह है कि OGELकी वैलिडिटी दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। इससे रिन्यूअल और उससे जुड़े कंप्लायंस की बार-बार जरूरत कम हो गई है। इसके दायरे को भी 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है। इसमें सिर्फ वे देश शामिल नहीं है जो नेगेटिव या सेंसिटिव लिस्ट में हैं और जिन पर UN सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रतिबंध या हथियारों की रोक लगा रखी है।

 

Trading Plan : बाजार में आज बेहद छोटी सी रेंज में कारोबार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

Gold Price : शुक्रवार,28 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक US फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल में होने वाले भाषण से पहले मुनाफावसूली कर रहे है। फिलहाल 12 बजे के आसपास MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 716 रुपए यानी 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ 158,282 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी का सितंबर फ्यूचर्स 101 रुपए यानी 0.04 फीसदी गिरकर 240,550 रुपए प्रति किलोग्राम पर दिख रहा था।

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक वॉर्श के भाषण पर नजरें बनाए हुए है। US गोल्ड फ्यूचर्स के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40% गिरकर 4,627.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए हैं।

गोल्ड पर जेफरीज की राय

इस बीच गोल्ड पर जारी अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज में कहा है कि भारत में आज भी सबसे बड़ा भरोसा सोने पर ही है। भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी है। उसके मुताबिक देश में करीब 4 लाख करोड़ डॉलर का सोना है,जो आगे चलकर इकोनॉमी और मार्केट दोनों को चमका सकता है। गोल्ड ही भारत का सुपर पावर है। भारत के गोल्ड की वैल्यू 4 लाख करोड़ डॉलर है जो कुल इक्विटी निवेश का 4 गुना है। देश में गोल्ड का भाव 10 फीसदी बढ़ने पर जीडीपी में 0.80 फीसदी का उछाल देखने को मिलता है।

जेफरीज का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से इकोनॉमी और मार्केट दोनों को फायदा होता है। देश में सोना बढ़ेगा तो खर्च बढ़ेगा। गोल्ड लोन के बढ़ते क्रेज से भी फायदा होगा। लोग घर में सोना रखने के बजाय गोल्ड लोन लेकर पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। गोल्ड लोन के पैसे से इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।

जेफरीज का गोल्डन पोर्टफोलियो

जेफरीज के गोल्ड थीम में मणप्पुरम और सिल्वर थीम में हिंदुस्तान जिंक शामिल है। इसके अलावा उसके मॉडल पोर्टफोलियो में कंजम्पशन थीम से मीशो और केमिकल थीम से नवीन फ्लोरीन शामिल है। वहीं, इसने अपने मॉडल पोर्टफोलियो से जिंदल स्टेनलेस और अंबुजा सीमेंट को बाहर कर दिया है। जेफरीज की राय है कि सोना चढ़ा तो टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स, MCX, IIFL फाइनेंस और मुथूट फाइनेंस की बल्ले-बल्ले होगी।

 

IT Stocks : Nvidia में आई रैली ने IT शेयरों में भरा जोश, निफ्टी के टॉप गेनरों में आईटी शेयरों का दबदबा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजारों के लिए आज नरम संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की नरमी है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली है। FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में एक ही दिन में 10000 से ज्यादा नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट जोड़े हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

27 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा शेयरों में खरीदारी के बावजूद मीडिया, मेटल,ऑयल एंड गैस और PSU बैंकों के शेयरों में बिकवाली हावी रही। बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख सका और पूरे सेशन के दौरान ज्यादातर समय गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। कारोबार के अंत में निफ्टी 116.90 अंक या 0.48% गिरकर 24,090.85 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 539.35 अंक या 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 पर आ गया।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

27 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹298 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए ₹4,977 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। अच्छी बात यह रही कि दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.249% की बढ़त हुई है, जबकि ताइवान डॉलर में 0.19% और मलेशियन रिंगित में 0.124% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर और चीनी रेनमिनबी में 0.055% और 0.036% की मामूली बढ़त हुई है। जबकि जापानी येन में 0.019% की बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है।

उधर फिलीपीन पेसो में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यह 0.507% गिरा है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया 0.107% और थाई बाहत 0.03% नीचे आया है।

अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी, एशिया में मिला-जुला कारोबार

अच्छे नतीजों के बाद Nvidia में 9% के उछाल ने अमेरिकी बाजारों का सेंटिमेंट सुधारा है। कल नैस्डैक करीब 1.5 फीसदी दौड़ा, S&P में भी रौनक रही। बाजार की अब आज शाम को आने वाले जैक्सन होल में फेड चेयरमैन के बयानों पर नजर रखेगा। वहीं एशियाई बाजार मिलेजुले हैं। जापान के निक्केई में 0.50 फीसदी की बढ़त है। लेकिन कॉस्पी करीब एक फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।

SEBI चेयरमैन का CAS पर बयान, CAS में कोई बदलाव नहीं

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने साफ कर दिया है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेसन यानी CAS में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इस मुद्दे पर कहा कि इमें अभी कोई बदलाव नहीं होगा। सिस्टम वैसे ही चल रहा है। पार्टिसिपेशन बढ़ेगा और ब्रोकर्स इसे अपने ऐप्स में इनेबल करेंगे और लोग सीखेंगे और इस मार्केट में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि NSE IPO DRHP मंजूरी के बहुत करीब है।

Market view : इंट्राडे मार्केट का मिजाज कमजोर, चार्ट पर शानदार दिख रहे इन शेयरों पर रहे नजर

हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी

हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी है। ईरान हॉर्मुज खोलने के लिए शर्तें तैयार कर रहा है। उधर अमेरिका ने कहा कि ईरान से फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है। पुराने MoU पर लौटने का सवाल नहीं है। इसबीच क्रूड उछलकर 90 डॉलर के पास आ गया है।

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। Alphawave 1.2% हिस्सा बेच सकती है। इस डील की फ्लोर प्राइस 630 रुपए प्रति शेयर तय की गई है।

Stocks to Watch: 28 अगस्त को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शुक्रवार, 28 अगस्त के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं AI से जुड़ा बड़ा अपडेट है। कहीं ब्लॉक डील और ऑर्डर की खबर है। वहीं कुछ कंपनियों में निवेश और मैनेजमेंट से जुड़े अहम अपडेट आए हैं।

Adani Power

पावर कंपनी Adani Power ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Chandenvalle Infra Park में पूरी हिस्सेदारी बेचने का समझौता किया है। यह हिस्सेदारी AdaniConneX Private Limited को बेची जाएगी। डील की वैल्यू करीब ₹535.69 करोड़ है। अंतिम रकम क्लोजिंग डेट के बदलावों पर निर्भर करेगी।

New India Assurance Company

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी New India Assurance Company को ₹781.39 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला है। इसमें ₹59.63 करोड़ का ब्याज भी शामिल है। यह रिफंड असेसमेंट ईयर 2022-23 से जुड़ा है। इनकम टैक्स विभाग ने शिकायत के समाधान के बाद यह रकम जारी की है।

Lenskart

आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक Alphawave करीब 1.2% हिस्सेदारी बेच सकता है। डील का आकार करीब ₹1,313 करोड़ है। फ्लोर प्राइस ₹630 प्रति शेयर रखा गया है, जो मौजूदा भाव से करीब 1.7% कम है।

NBCC (India)

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC को पांच नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल वैल्यू ₹134.27 करोड़ है। इसमें स्कूल कैंपस, एजुकेशन सेंटर और Canara Bank की बिल्डिंग से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। ऑर्डर में तीन केंद्रीय विद्यालयों के प्रोजेक्ट भी हैं।

Wipro

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने Google Cloud के साथ अपनी पार्टनरशिप बढ़ाई है। इसका मकसद Gemini Enterprise और AI को बड़े स्तर पर अपनाना है। Wipro अपने कारोबार में भी Gemini Enterprise का इस्तेमाल करेगी। साथ ही 10,000 से ज्यादा AI सर्टिफाइड विशेषज्ञों को इस टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जाएगा।

Life Insurance Corporation of India

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी LIC ने Bajaj Finance के NCD में ₹5,000 करोड़ का निवेश किया है। LIC ने ₹1 लाख फेस वैल्यू वाले 5 लाख NCD खरीदे हैं। यह निवेश कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया है। NCD यानी नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट है।

RPP Infra Projects

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RPP Infra Projects को बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई में प्रस्तावित Global Sports City प्रोजेक्ट को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया है। इसके चलते कंपनी का ₹205.89 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया है।

Bharat Petroleum Corporation

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी Bharat Petroleum Corporation (BPCL) के चेयरमैन और MD संजय खन्ना ने कहा कि एनर्जी सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को E10 पेट्रोल का विकल्प दिया जा सकता है। लेकिन, E20 को बंद नहीं किया जाएगा।

Zee Entertainment Enterprises

मीडिया कंपनी Zee Entertainment Enterprises से जुड़ा अहम अपडेट आया है। NCLT ने सुभाष चंद्रा की पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में प्रस्तावित रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। HDFC Bank इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL ने राकेश भल्ला को दोबारा Additional Director नियुक्त किया है। उन्हें इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी दोबारा नियुक्ति 25 अगस्त 2026 से प्रभावी है। इससे पहले उन्हें 13 अगस्त को इस पद पर नियुक्त किया गया था।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GACM Technologies ने ₹25 करोड़ के AI प्रोजेक्ट के लिए MoU साइन किया, इंश्योरेंस के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाने का प्लान

टेक्नोलॉजी कंपनी GACM Technologies ने AI प्रोजेक्ट के लिए Winfluential Private Limited के साथ मेमोरेंडरम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है। MoU किसी काम को लेकर दो पक्षों के बीच बनी सहमति होती है। हालांकि, यह आमतौर पर अंतिम और बाध्यकारी कॉन्ट्रैक्ट नहीं होता। इसके तहत GACM एक AI-पावर्ड इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी सुपर प्लेटफॉर्म तैयार करेगी। प्रोजेक्ट की अनुमानित वैल्यू करीब ₹25 करोड़ है।

GACM Technologies को इस प्रोजेक्ट के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पार्टनर बनाया गया है। कंपनी प्लेटफॉर्म का डिजाइन और डेवलपमेंट करेगी। टेस्टिंग, इंप्लीमेंटेशन और डिप्लॉयमेंट की जिम्मेदारी भी GACM की होगी। प्रोजेक्ट को पूरा करने में करीब 18 से 24 महीने लग सकते हैं।

AI पर रहेगा बड़ा फोकस

कंपनी जो प्लेटफॉर्म बनाएगी, उसमें कई AI फीचर्स होंगे। इसमें AI लीड स्कोरिंग और AI सेल्स असिस्टेंट शामिल हैं। इसके अलावा AI रिकमेंडेशन इंजन, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और कन्वर्सेशनल AI भी दिया जाएगा।

GACM Technologies के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म सिर्फ AI तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें एजेंट CRM, KYC और डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं होंगी। पॉलिसी मैनेजमेंट, कमीशन, रिन्यूअल और क्लेम सपोर्ट भी प्लेटफॉर्म का हिस्सा होंगे।

मोबाइल ऐप और साइबर सिक्योरिटी भी

कंपनी प्लेटफॉर्म के लिए मोबाइल एप्लीकेशन भी तैयार करेगी। इसमें इंश्योरेंस कंपनियों और थर्ड-पार्टी सर्विसेज के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा होगी। प्लेटफॉर्म में एंटरप्राइज-लेवल साइबर सिक्योरिटी पर भी फोकस रहेगा।

प्रोजेक्ट का भुगतान आठ माइलस्टोन के आधार पर मिलने की बात कही गई है। ये चरण प्लेटफॉर्म के आर्किटेक्चर से शुरू होंगे। इसके बाद CRM, पॉलिसी सिस्टम, AI, मोबाइल ऐप, टेस्टिंग और सिक्योरिटी जैसे काम पूरे होंगे। आखिर में गो-लाइव, हैंडओवर और डॉक्यूमेंटेशन का चरण आएगा।

आगे भी कमाई का मौका

GACM Technologies को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी कमाई का मौका मिल सकता है। गो-लाइव के बाद 12 महीने की वारंटी का प्रावधान है। इसके बाद सालाना मेंटेनेंस और सपोर्ट एग्रीमेंट किया जा सकता है। इससे कंपनी को आगे भी रेवेन्यू मिलने की संभावना बनती है।

Skipper Share Price: T&D प्रोजेक्ट्स के लिए मिला ₹1,305 करोड़ का ऑर्डर, शेयर 3% चढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर क्या आप भी कनफ्यूज्ड हैं? यहां आसान शब्दों में समझें इसका पूरा मतलब

किसी कंपनी का शेयर बाज़ार बंद होने के समय किस भाव पर था, इससे आमतौर पर लोगों का ज़्यादा सरोकार नहीं होता। आम लोग तो अपने शेयर को खरीदने और बेचने के भाव पर ध्यान देते हैं। मगर बाज़ार बंद होने के समय का भाव (क्लोज़िंग प्राइस) कुछ तबकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जैसे म्यूचुअल फ़ंड, बड़े संस्थागत निवेशक और वायदा एवं विकल्प बाज़ार के प्रतिभागी।

कैस से पहले कैसे निर्धारित होती थी क्लोज़िंग प्राइस?

3 अगस्त 2026 से पहले क्लोज़िंग प्राइस एक फ़ॉर्मूले के तहत निर्धारित होती थी। इस फ़ॉर्मूले का सिद्धांत यह है कि अगर 10 लोगों ने किसी कंपनी का एक शेयर 100 रुपये में खरीदा और 1,000 लोगों ने उसी कंपनी का एक शेयर 110 रुपये में खरीदा, तो साधारण औसत भाव 105 रुपये होगा। मगर 105 रुपये का साधारण औसत बाज़ार का सही चित्रण नहीं करता, क्योंकि अधिकांश लोगों ने 110 रुपये का भाव चुकाया।

इस फ़ॉर्मूले, जिसका नाम है वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (जिसे लोग बोलचाल में विवैप कहते हैं), के तहत साधारण औसत निकालने के बजाय, बाज़ार बंद होने से पहले के अंतिम 30 मिनट में किसी कंपनी के कितने शेयर किस भाव पर बिके, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक भारित औसत निकाला जाता है। उपरोक्त उदाहरण में विवैप लगभग 110 रुपये होगा।

विवैप का उद्देश्य अधिक यथार्थवादी क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करना है, फिर भी ज़ाहिर है, यदि इन 30 मिनटों के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में प्रचलित बाज़ार भाव से अलग भाव पर शेयर ख़रीदे और बेचे जाएँ, तो क्लोज़िंग प्राइस प्रभावित हो सकती है। सेबी ने हाल ही में एक विदेशी ट्रेडिग समूह पर जो आरोप लगाए थे, उनमें क्लोज़िंग प्राइस को प्रभावित करने से जुड़े आरोप भी थे। हालाँकि, संबंधित समूह सेबी के आरोपों और चित्रण से सहमत नहीं है और इस मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

कैस से क्या बदला है?

इन्हीं चिंताओं के बीच सेबी ने क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने के लिए एक नया तरीका लागू किया है, जिसका नाम है कैस, यानी क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन। कैस एक नया विचार नहीं है और सेबी 2024 से कैस के बारे में विचार कर रहा था। कैस के अंतर्गत आने वाले शेयरों में नियमित ट्रेडिंग अब 3:15 बजे बंद हो जाती है। पहले इन शेयरों में नियमित ट्रेडिंग 3:30 बजे तक होती थी। जो शेयर फिलहाल कैस के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनकी ट्रेडिंग अभी भी 3:30 बजे तक चलती है और उनकी क्लोज़िंग प्राइस का निर्धारण विवैप के द्वारा होता है।

कैस के तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद के 20 मिनट में चार चरणों में प्रक्रिया चलती है। इन चार चरणों को समझने का आसान तरीका यह है कि भाव निकालने के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत है। एक शुरुआती भाव और दूसरा यह कि इस शुरुआती भाव से लोग कितने ऊपर या नीचे बोली लगाएंगे।

• शुरुआती भाव, जिसे रेफ़रेंस प्राइस कहते हैं, 3:00 और 3:15 बजे के बीच के विवैप से निर्धारित होता है। अगर इस दौरान कोई शेयर नहीं बिका, तो पूरे दिन में जो भी उस शेयर की अंतिम खरीद का भाव होगा, उसी को शुरुआती भाव मान लिया जाता है। अगर पूरे दिन कोई शेयर नहीं बिका, तो यह पिछले दिन का क्लोज़िंग प्राइस होता है।

• एक बार रेफ़रेंस प्राइस तय हो जाने के बाद, लोग खरीदने और बेचने के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं। कैस में रेफ़रेंस प्राइस के 3 प्रतिशत ऊपर-नीचे का दायरा लागू होता है।

• चरणबद्ध तरीके से स्टॉक एक्सचेंज खरीदने और बेचने के ऑर्डर एकत्रित करता है। इसके बाद इन ऑर्डरों का विश्लेषण करके यह निर्धारित किया जाता है कि किस भाव पर सबसे अधिक शेयरों का लेन-देन संभव है। अंतिम चरण में ऑर्डरों का मिलान किया जाता है। यही भाव क्लोज़िंग प्राइस कहलाता है।

• उदाहरणतः अगर किसी शेयर के लिए लोगों ने निम्नलिखित ऑर्डर डाले हैं: (1) ख़रीदने के ऑर्डर: 103 रुपये के 15 शेयर; 102 रुपये के 25 शेयर; 100 रुपये के 40 शेयर और 98 रुपये के 30 शेयर; और (2) बेचने के ऑर्डर: 97 रुपये के 10 शेयर; 100 रुपये के 50 शेयर; 101 रुपये के 30 शेयर और 104 रुपये के 20 शेयर, तो आमतौर पर कैस के अनुसार 100 रुपये के भाव पर सबसे ज़्यादा शेयरों का लेन-देन संभव है। 100 रुपये क्लोज़िंग प्राइस होगा।

सेबी का विचार ऐसा प्रतीत होता है कि विवैप के विपरीत, कैस में क्लोज़िंग प्राइस से छेड़छाड़ करने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कैस के पहले भी वीवैप से क्लोज़िंग प्राइस तो निकलता था, लेकिन वीवैप एक औसत भाव होने की वजह से साधारणतः उस भाव पर कोई सौदा नहीं होता था। मतलब, क्लोज़िंग प्राइस एक कागज़ी संख्या थी। कैस में जो भाव निकलता है, सौदा उसी भाव पर होता है। इसलिए कैस का भाव कागज़ी भाव नहीं है, बल्कि सही मायने में उस समय का क्लोज़िंग प्राइस है। इसके काफ़ी फायदे हैं, जैसे कि, अमुमन एक पैसिव इंडेक्स फण्ड के लिए वीवैप वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग से कैस वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग ज़्यादा सटीक होगी।

नया नहीं है कैस

कैस जैसी व्यवस्था विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में काफ़ी प्रचलित है। इसके लागू होने पर कुछ लोगों ने कहा कि भारत भी अब विदेशी एक्सचेंजों की प्रणाली अपना रहा है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। भारत वर्षों से कैस जैसी प्रणाली का उपयोग बाज़ार खुलने के समय का भाव (ओपनिंग प्राइस) निर्धारित करने के लिए करता आया है। वैसे भी भारतीय बाज़ार नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है।

सेबी ने फिलहाल कैस को उन शेयरों पर लागू किया है, जिन पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। आगे चलकर इसे अन्य शेयरों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

कैसा रहा कैस का क्रियान्वयन?

शुरुआती दिनों में कैस का क्रियान्वयन पूरी तरह निर्बाध नहीं रहा। उदाहरणतः, निफ़्टी इंडेक्स के साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट साधारणतः मंगलवार को एक्सपायर होते हैं। अगर मंगलवार को निफ़्टी में शामिल शेयरों में 3:15 तक के बाज़ार भाव और कैस के दौरान बनने वाले क्लोज़िंग प्राइस में महत्वपूर्ण अंतर हो, तो निफ़्टी के क्लोज़िंग स्तर में तेज़ बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स के भावों में अस्थायी असंगति पैदा होने पर आर्बिट्रेज की गुंजाइश भी बन सकती है।

सेबी बाज़ार पर कड़ी नज़र रखती है और सेबी ने 19 अगस्त को एक ऑर्डर निकाला है, जिसमें दो संस्थाओं के ऊपर सेबी ने यह आरोप लगाया है कि उन्होंने कैस के भाव को प्रभावित किया है। यह एक अंतरिम आदेश है, जो इन संस्थाओं का पक्ष सुने बिना जारी किया गया है; इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। लेकिन इससे दो निष्कर्ष निकलते हैं: एक, कि कैस में लिक्विडिटी बहुत महत्वपूर्ण है; और दूसरा, कि कैस पर सेबी की पैनी नज़र है।

इन ऑर्डरों में आरोप यह है कि कैस में बड़े खरीद और बिक्री के ऑर्डर ऑर्डर रेफ़रेंस प्राइस से लगभग 3% ऊपर और नीचे डाले गए, जो कि बाज़ार के रुख़ के विपरीत था, और बाद में ये ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। सेबी का आरोप है कि इससे इंडेक्स प्रभावित हुआ और संबंधित संस्थाओं को वायदा एवं विकल्प बाज़ार में फायदा हुआ।

किसी भी नई व्यवस्था से परिचित होने और उसमें पारंगत होने में समय लगता है। आशा है कि आने वाले दिनों में कैस में अधिक से अधिक ऑर्डर्स डाले जाएँगे और खरीदने-बेचने वालों की संख्या बढ़ेगी, जिससे खरीदने और बेचने के लिए पर्याप्त ऑर्डर उपलब्ध होंगे और क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने की प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से चल सकेगी। क्या इससे क्लोज़िंग प्राइस वास्तव में अधिक यथार्थवादी होगी और उसे प्रभावित करने की संभावना कम होगी, यह तो समय ही बताएगा।

(यह लेख अम्बरीष ने लिखा है, जो शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में पार्टनर हैं)

डिसक्लेमर-यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं। इसे इस पब्लिकेशन का विचार नहीं माना जाना चाहिए।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर खुल सकते है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: भारतीय बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे है। BSE के मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन गिफ्ट निफ्टी में करीब 100 प्वाइंट की गिरावट आई। FIIs की करीब 2300 करोड़ की नेट बिकवाली आई। FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी बढ़े। इधर jackson hole symposium से पहले अमेरिकी बाजार में भी  दबाव दिखा। डाओ जोंस की तीन दिन की तेजी पर  ब्रेक लगा।  डाओ 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे है। वहीं S&P और नैस्डैक में हल्की नरमी आई।  वहीं एशिया मे मिला-जुला कारोबार हो रहा। निक्केई में हल्की गिरावट, लेकिन कॉस्पी एक परसेंट से ज्यादा ऊपर है।

Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा

Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।

सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।

टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।

फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।

प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।

कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन’ (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।

इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।

बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।

सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला

25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।

यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।

Advait Energy Share Price: मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी से मिला ऑर्डर, शेयर को लगे पंख, 8% उछला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।