IDBI Bank में स्टेक सेल से विनिवेश के टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 88,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे FY19 के बाद पहली बार यह पैसा बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा होगा। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। इसमें आईडीबीआई के निजीकरण को बड़ा हाथ होगा।

बजट में 80000 करोड़ जुटाने का टारगेट 

सरकार ने बजट में FY27 में विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट तय किया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक स्ट्रक्चरिंग से केंद्र सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की स्ट्रेटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी।

सरकार आईडीबीआई बैंक में बेच रही हिस्सेदारी

सरकार और एलआईसी दोनों आईडीबीआई बैंक में कंबाइंड 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक यह हिस्सेदारी खरीदेगी। इस डील और शेयर पर्चेज एग्रीमेंट के इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24 हिस्सेदारी बेचेगी।

सरकार पहले ही जुटा चुकी है 62,124 करोड़ रुपये

इस डील के बाद भी IDBI Bank में सरकार और LIC की कंबाइंड 34 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी। इस साल 10 सितंबर तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 62,124 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। यह इस वित्त वर्ष के लिए तय बजट टारगेट से सिर्फ 17,876 करोड़ रुपये कम था। आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री से यह टारगेट पूरा हो जाएगा।

FY19 के बाद पहली बार टारगेट से ज्यादा पैसे आएंगे

सरकार वित्त वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा पैसे जुटाएगी। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 45,306 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो 47,000 करोड़ रुपये के तय लक्ष्य का करीब 96 फीसदी था। इसमें से 16,886 करोड़ रुपये विनिवेश से आए थे, जबकि 28,420 करोड़ रुपये एसेट मॉनेटाइजेशन से आए थे।

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जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से बढ़ा विनिवेश पर फोकस

जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने की वजह से विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन पर सरकार का फोकस बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई के बाद की स्थितियों ने सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ाया है। क्रूड की कीमतें इस लड़ाई की वजह से काफी बढ़ी हैं। पिछले कुछ हफ्तों से तो ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है।

RCF Share Price: ₹797 करोड़ में अपग्रेड होगी अमोनिया प्लांट, L&T को मिला जिम्मा

RCF Share Price: सरकारी केमिकल और खाद कंपनी आरसीएफ (राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स) ने अपनी अमोनिया प्लांट को मॉडर्न बनाने का काम लार्सन एंट टुब्रो (L&T) को दिया है। एलएंडटी को यह काम टेंडर प्रोसेस में सबसे कम बोली लगाकर मिला है और इस पर 36 महीने में काम पूरा करना है। कंपनी ने इसकी जानकारी 25 सितंबर को रात में दी थी और अब इसका असर सोमवार 28 सितंबर को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार को बीएसई पर यह 0.23% की बढ़त के साथ ₹108.65 पर बंद हुआ था।

RCF के ऑर्डर में क्या है खास

आरसीएफ ने अपनी अमोनिया प्लांट को अपग्रेड करने के लिए एलएंडटी को ₹797 करोड़ (टैक्स अलग से) का काम दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में अमोनिया प्लांट को अपग्रेड करने के लिए डिटेल्ड इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, कंस्ट्रक्शन, इरेक्शन, कमीशनिंग और गारंटी रन शामिल हैं। इसका उद्देश्य हुआ कि एलएंडटी प्लांट को कैसे अपग्रेड करना है, कौन-सी मशीन कहां लगेगी, पाइपिंग/इलेक्ट्रिकल/कंट्रोल सिस्टम कैसे होंगे; इसकी पूरी टेक्निकल डिजाइन बनाएगी; इसके बाद जरूरत के हिसाब से इक्विपमेंट्स बनाकर उन्हें आरसीएफ के प्लांट्स में इंस्टॉल करके प्लांट को चालू करेगी। गारंटी रन के तहत एक तय समय तक चलाकर एलएंडटी को यह दिखाना होगा कि कॉन्ट्रैक्ट में तय परफॉरमेंस मिल रहा है। इस पूरी पहल का उद्देश्य अमोनिया बनाने में एनर्जी की खपत को कम करना है। इससे प्रोडक्शन की ऑपरेटिंग कॉस्ट कम हो सकती है।

बता दें कि कंपनी अपने मौजूदा फर्टिलाइजर बिजनेस को अपग्रेड करने का काम ऐसे समय में कर रही है, जब बोर्ड से इसे ₹1500 करोड़ तक की नई पूंजी जुटाने और नए सेगमेंट में विस्तार की मंजूरी मिल चुकी है। जुलाई में कंपनी के बोर्ड ने इसे ₹1500 करोड़ का FPO लाने की मंजूरी दी थी, जिस पर शेयरहोल्डर्स, डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स और DIPAM (डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट) की मंजूरी लेनी है। फंड जुटाने की योजना के अलावा बोर्ड ने इसे अपने MoA (मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन) में बदलाव की भी मंजूरी दी ताकि आने वाले समय में यह सीवेज एंड एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स, वाटर प्योरिफिकेशन और रिसाइकलिंग सिस्टम्स, रिन्यूएबल एंड कंवेंशनल पावर जेनेरेशन, इंडस्ट्रियल एक्स्प्लोसिव्स, एग्रोकेमिकल्स और बॉयो-फर्टिलाइजर्स सेगमेंट में एंट्री कर सके।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 18 नवंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹157.40 के भाव पर था, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 4 महीने में यह 32.59% टूटकर 30 मार्च 2026 को एक साल के निचले स्तर ₹106.10 पर आ गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: रिन्यूएबल एनर्जी के लिए दो कंपनियों ने मिलाया हाथ, शेयरों पर दिख सकता है असर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी NLC India Renewables और PTC India ने ग्रीन एनर्जी के कारोबार में साथ काम करने के लिए ज्वाइंट वेंचर बनाया है। दोनों कंपनियां मिलकर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स विकसित करेंगी। इसके अलावा इस सेक्टर में कारोबार के नए मौके भी तलाशे जाएंगे।

16 सितंबर को बनी नई कंपनी

नई कंपनी का नाम NIRL PTC Renewables Ltd है। इसे भारत में 16 सितंबर को शामिल किया गया है। PTC India ने रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है।

इस ज्वाइंट वेंचर में NLC India Renewables की 74% हिस्सेदारी होगी। वहीं, PTC India के पास बाकी 26% हिस्सेदारी रहेगी।

PTC India ने लगाए ₹2.60 लाख

PTC India ने ज्वाइंट वेंचर में ₹10 फेस वैल्यू वाले 26,000 इक्विटी शेयर लिए हैं। इसके लिए कंपनी करीब ₹2.60 लाख का कैश निवेश करेगी।

कंपनी ने बताया कि ज्वाइंट वेंचर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विकास के मौके तलाशेगा। इसके लिए ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट की शर्तें और जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां लागू होंगी।

DIPAM से भी ली मंजूरी

PTC India ने बताया कि ज्वाइंट वेंचर बनाने से पहले DIPAM से मंजूरी ली गई थी। DIPAM वित्त मंत्रालय के तहत आता है। इसके बाद ही नई कंपनी को शामिल किया गया।

दोनों कंपनियों का क्या है कारोबार?

PTC India बिजली की ट्रेडिंग का कारोबार करती है। कंपनी बिजली उत्पादकों और खरीदारों के बीच बिजली की खरीद-बिक्री से जुड़ी है।

वहीं NLC India Renewables सरकारी कंपनी NLC India की सब्सिडियरी है और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। अब दोनों कंपनियां अपने-अपने अनुभव का इस्तेमाल ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए करेंगी।

दोनों शेयरों में तेजी

गुरुवार को PTC India का शेयर NSE पर 4.04% की तेजी के साथ ₹156 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में ये स्टॉक 10.73% टूटा है। इसका मार्केट कैप 4.72 हजार करोड़ रुपये है।

वहीं, NLC India के शेयर में 2.76% की बढ़त दिखी और ये ₹262.40 पर बंद हुआ। ये स्टॉक बीते 1 साल में तकरीबन फ्लैट है। हालांकि, 5 साल में इसने 369.83% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hindustan Copper OFS: सरकार 6% तक हिस्सेदारी बेचेगी, ₹514 का फ्लोर प्राइस तय; 1 साल 140% चढ़ा स्टॉक

Hindustan Copper OFS: सरकारी कंपनी Hindustan Copper में भारत सरकार ऑफर ऑफर सेल (OFS) के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर तय किया गया है।

DIPAM के सचिव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। सरकार पहले कंपनी की 3% हिस्सेदारी बेचेगी। अगर इश्यू को ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलता है, तो अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेची जा सकती है।

सरकार जुटा सकती है ₹3,000 करोड़

अगर ग्रीन-शू ऑप्शन समेत पूरी 6% हिस्सेदारी बिक जाती है, तो ₹514 के फ्लोर प्राइस पर सरकार को करीब ₹3,000 करोड़ मिल सकते हैं। फिलहाल Hindustan Copper में सरकार की हिस्सेदारी करीब 66% है। पूरी 6% हिस्सेदारी बेचने के बाद यह घटकर करीब 60% रह जाएगी।

OFS में 10% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व होगा। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर अलग रखे गए हैं।

मजबूत नतीजों के बाद हिस्सेदारी बिक्री

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जून तिमाही में Hindustan Copper का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹353 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹134 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 81.4% बढ़कर ₹936.5 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹516.4 करोड़ था।

कॉपर की कीमतों में तेजी का फायदा

ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमत पिछले हफ्ते 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के अंत के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था।

कॉपर की कीमतों में लगातार छह हफ्तों तक तेजी रही। सप्लाई की कमी और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की चिंता कम होने से कॉपर को सहारा मिला।

शेयर भाव से कितना नीचे है फ्लोर प्राइस?

Hindustan Copper के शेयर सोमवार को 0.25% की बढ़त के साथ ₹574.15 पर बंद हुए। इस हिसाब से OFS का ₹514 का फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से करीब 10.5% नीचे है।

पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.54% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 140% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सरकारी स्टील कंपनी मार्केट से जुटाएगी बड़ा फंड! FY27 में 5% का FPO लाने की प्लानिंग, सरकार से मांगी मंजूरी

Steel Authority of India FPO: सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) बाजार से फंड जुटाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, महारत्न कंपनी ‘सेल’ ने चालू वित्त वर्ष (FY27) में 5 फीसदी का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) लाने के लिए वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) से संपर्क किया है।

इसके पीछे का उद्देश्य अपनी विस्तार योजनाओं के लिए पैसे जुटाना है। कंपनी की योजना नए शेयर जारी कर मिलने वाले फंड का सीधा इस्तेमाल अपने प्लांटों के आधुनिकीकरण और कैपेक्स जरूरतों को पूरा करने में करने की है।

OFS से अलग कैसे है FPO का रास्ता?

आमतौर पर सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) का रास्ता चुनती है, लेकिन SAIL इस बार FPO के जरिए फंड जुटाना चाहती है। OFS के जरिए जब सरकार शेयर बेचती है, तो उससे मिलने वाला सारा पैसा भारत सरकार के खजाने में जाता है। वहीं FPO के तहत कंपनी नए इक्विटी शेयर जनता के लिए जारी करती है। इससे जुटाई गई राशि सीधे कंपनी के बैलेंस शीट में जाती है, जिसका इस्तेमाल बिजनेस विस्तार में होता है।

वर्तमान में SAIL में भारत सरकार की हिस्सेदारी 65 फीसदी है। फ्रेश इक्विटी जारी होने से सरकार की शेयरहोल्डिंग में थोड़ी गिरावट तो आएगी, लेकिन इससे सरकार को सीधे तौर पर कोई रेवेन्यू नहीं मिलेगा, बल्कि पूरी रकम कंपनी के खाते में जाएगी।

कैपेक्स और क्षमता विस्तार के लिए फंड की जरूरत

इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाली महारत्न कंपनी SAIL हाल के वर्षों में अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है। कंपनी देश भर में भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर और बर्नपुर में 5 इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट और 3 स्पेशल स्टील प्लांट संचालित करती है। फ्रेश शेयर बिक्री से मिलने वाला फंड कंपनी को कर्ज या सिर्फ आंतरिक लाभ पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी जुटाने का एक मजबूत विकल्प प्रदान करेगा।

Q1 में मुनाफा दोगुना से ज्यादा बढ़ा

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब कंपनी के पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे काफी मजबूत रहे हैं। जून तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ दो गुने से अधिक बढ़कर ₹1,644.05 करोड़ रहा, जिसमें खर्चों में आई कमी का बड़ा योगदान रहा। जून तिमाही के दौरान क्रूड स्टील का उत्पादन 4.76 मिलियन टन रहा, जबकि बिक्री 4.16 MT रही।

SAIL के चेयरमैन अशोक कुमार पांडा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू इस्पात खपत में लगातार सुधार देखने को मिला है और भारतीय स्टील उद्योग ने मजबूत जुझारूपन दिखाया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 8 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 15 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: बुधवार, 8 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के दम पर फोकस में रह सकते हैं। इनमें बड़े ऑर्डर, FPO, OFS, निवेश और मैनेजमेंट से जुड़े अहम ऐलान शामिल हैं। अगर आप ट्रेडिंग या निवेश की तैयारी कर रहे हैं, तो इन शेयरों पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है।

Rashtriya Chemicals and Fertilizers

सरकारी उर्वरक कंपनी Rashtriya Chemicals and Fertilizers Ltd के बोर्ड ने 1,500 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए फर्दर पब्लिक ऑफर (FPO) लाने को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसके लिए शेयरधारकों, डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स और DIPAM की मंजूरी अभी बाकी है।

Cochin Shipyard

सरकारी डिफेंस और शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard Ltd के ऑफर फॉर सेल (OFS) को पहले ही दिन निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। यह इश्यू 3.52 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसकी जानकारी DIPAM सचिव ने दी।

Uno Minda

ऑटो कंपोनेंट्स कंपनी Uno Minda Ltd ने पैसेंजर व्हीकल सीटिंग सिस्टम कारोबार में उतरने का ऐलान किया है। कंपनी महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। इस पर करीब 320 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

Poonawalla Fincorp

NBFC कंपनी Poonawalla Fincorp Ltd ने 200 करोड़ रुपये तक के टियर-II नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने को मंजूरी दी है। यह फंड प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जुटाया जाएगा।

Advait Energy Transitions

पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Advait Energy Transitions Ltd को दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (DGVCL) से 51.62 करोड़ रुपये का टर्नकी ऑर्डर मिला है। कंपनी 11KV मीडियम वोल्टेज कवर्ड कंडक्टर (MVCC) की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम करेगी।

EMS

वॉटर और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी EMS Ltd को दिल्ली जल बोर्ड के 158.29 करोड़ रुपये के सीवरेज प्रोजेक्ट में L-1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) घोषित किया गया है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के टिकरी कलां इलाके में सीवर नेटवर्क बिछाने से जुड़ा है।

Silver Touch Technologies

आईटी और डिजिटल सॉल्यूशंस कंपनी Silver Touch Technologies Ltd को RITES Ltd से बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी PARAKH नाम का AI बेस्ड प्लेटफॉर्म तैयार करेगी। यह रेलवे प्रोजेक्ट्स की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) की जांच में मदद करेगा।

Pondy Oxides and Chemicals

मेटल रीसाइक्लिंग कंपनी Pondy Oxides and Chemicals ने शेयर स्प्लिट की रिकॉर्ड डेट 21 जुलाई 2026 तय की है। कंपनी 5 रुपये फेस वैल्यू वाले 2 शेयरों को 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में बांटेगी। इस प्रस्ताव को 2 जुलाई को पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी मिल चुकी है।

Tribhovandas Bhimji Zaveri (TBZ)

ज्वेलरी कंपनी Tribhovandas Bhimji Zaveri (TBZ) के हेड-इन्वेंट्री (गोल्ड) संजय बिलिमोरिया ने इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 8 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने दूसरे करियर अवसरों के लिए यह फैसला लिया है।

PC Jeweller

ज्वेलरी कंपनी PC Jeweller ने कर्जमुक्त बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने बताया कि उसने 14 बैंकों के कंसोर्टियम में शामिल 2 बैंकों का पूरा कर्ज चुका दिया है। यह भुगतान 30 सितंबर 2024 के सेटलमेंट एग्रीमेंट के तहत किया गया है।

Titan

ज्वेलरी और लाइफस्टाइल कंपनी Titan Company की AAA (Stable) लॉन्ग टर्म क्रेडिट रेटिंग ICRA ने बरकरार रखी है। एजेंसी ने कंपनी के 3,000 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट प्रोग्राम, 14,750 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल सुविधाओं और 1,000 करोड़ रुपये के टर्म लोन की रेटिंग भी दोहराई है।

IndiGo

एयरलाइन कंपनी IndiGo के शेयरों पर नजर रहेगी। DGCA के मुताबिक, मई में घरेलू हवाई यात्री ट्रैफिक 9.5% बढ़कर 1.54 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, IndiGo की बाजार हिस्सेदारी 65% से घटकर 64.9% रह गई। इसके बावजूद कंपनी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी हुई है।

J.B. Chemicals & Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी J.B. Chemicals & Pharmaceuticals ने बताया कि NCLT की अहमदाबाद बेंच ने उसके Torrent Pharmaceuticals के साथ प्रस्तावित मर्जर को मंजूरी दे दी है। कंपनी को आदेश की प्रमाणित कॉपी भी मिल गई है। अब आगे की नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।

Sun Pharma

फार्मा कंपनी Sun Pharma ने कहा है कि वह इनोवेटिव और कॉम्प्लेक्स दवाओं पर फोकस बढ़ाएगी। कंपनी R&D, नए प्रोडक्ट, अधिग्रहण और लाइसेंसिंग के जरिए कारोबार का विस्तार करेगी। साथ ही लागत घटाने और प्रमुख बाजारों में मौजूदगी मजबूत करने पर भी काम जारी रहेगा।

Meesho

ई-कॉमर्स कंपनी Meesho की जनरल मैनेजर (बिजनेस) और सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल मेघा अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ा है। 7 जुलाई 2026 से उन्हें आधिकारिक तौर पर कार्यमुक्त कर दिया गया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।