Tata Trusts says re-appointment of Chandrasekaran as Chairman is illegal

Tata Trusts says re-appointment of Chandrasekaran as Chairman is illegal
Tata Sons Chairman

Tata Trusts, which own about 66 percent of Tata Sons, have said the Tata Sons board resolution reappointing N Chandrasekaran as executive chairman for another five years is illegal. They maintain that his August decision not to seek another term is final.

In a statement issued after the board meeting on September 17, 2026, the Trusts said four directors voted for the resolution. Noel Tata, chairman of Tata Trusts and one of the Trusts’ nominee directors on the Tata Sons board, voted against it. The Trusts described the resolution as a “legal nullity” under Tata Sons’ Articles of Association. Because a Trusts nominee had voted against it, the Trusts said the resolution was “legally void and without any basis”.

The Trusts set out their reading of the Articles in three parts:

  • The process for appointing a chairman requires a majority of the Trusts’ nominee directors to vote in favour.
  • That requirement applies equally to a first appointment and to the reappointment of a sitting chairman.
  • The board therefore cannot lawfully hold a meeting on, or pass, such a resolution unless both nominee directors of Tata Trusts are present and both vote for it.

Noel Tata placed before the board a legal opinion from former chief justice of India DY Chandrachud supporting this position. The Trusts said the board did not take note of the opinion.

The Trusts’ case turns on Chandrasekaran’s communication to the board on August 12, 2026. In it, he said he would not offer himself for reappointment when his tenure ends on February 20, 2027. The Trusts described that decision as “freely taken” and “clearly expressed”, and said it was not the outcome of any review. They added that it was made public without prior intimation to, or deliberation with, shareholders. Once announced, the Trusts argued, the decision had consequences that “cannot be afterwards undone”, because employees, lenders, counterparties, the market and the majority shareholder had all acted on it.

The Trusts said they formally accepted the decision the next day and advised Tata Sons to set up a Selection Committee under the Articles to appoint a successor. The Trusts said they remain committed to an orderly and timely succession and want the Selection Committee to proceed in line with the Articles.

Tata Sons has given a different sequence of events. It said the board’s Nomination and Remuneration Committee unanimously asked him on September 3 to reconsider his decision, and that he agreed to do so at the September 17 meeting, after which the board approved his reappointment by majority.

N Chandrasekaran reappointed as Tata Sons Executive Chairman

N Chandrasekaran reappointed as Tata Sons Executive Chairman
Tata Executive Chairman N Chandrasekaran

In a resolution approved by a majority of the board, Tata Sons has reappointed N Chandrasekaran as the company’s Executive Chairman on a new five-year term, a Reuters report said. The decision follows Chandrasekaran’s announcement in August 2026 where he stated that he wouldn’t seek another term at the company once his current tenure ends on February 20, 2027.

N Chandrasekaran to continue heading Tata Sons

The resolution was passed by a majority at a Tata Sons board meeting held in Mumbai on September 17, 2026, the Reuters report mentioned. The reasons behind this reversal are yet to be disclosed to the public, with Tata Sons yet to issue an official comment on the matter. A fresh term means that Chandrasekaran would continue heading the company until February 2032. Chandrasekaran has chaired Tata Sons since February 2017 and is currently serving his second five-year term, which will end on February 20, 2027.

टाटा संस की 17 सितंबर को बड़ी बैठक, एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे और नए बॉस पर आएगा बड़ा अपडेट!

Tata Sons Board Meeting: टाटा ग्रुप के मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस की बोर्ड मीटिंग 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भले ही चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से पीछे हटने का मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन इस बैठक में इस पर गर्मा-गर्मी से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने तीसरा कार्यकाल न लेने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही टाटा ग्रुप के पावर कॉरिडोर में हलचल तेज है। आइए समझते हैं कि 17 सितंबर की इस बैठक में क्या-क्या खास हो सकता है और बोर्ड के भीतर समीकरण कैसे बने हुए हैं।

17 सितंबर की बैठक में क्या होगा खास?

यह बैठक टाटा संस की नियमित तिमाही बोर्ड बैठक है, लेकिन 18 अगस्त को कोरम की कमी के चलते टली टाटा संस की AGM की नई तारीख पर भी इसमें चर्चा होगी।अभी यह साफ नहीं है कि कोई डायरेक्टर औपचारिक रूप से चंद्रशेखरन से अपना फैसला बदलने का अनुरोध करेगा या नहीं। अगर चंद्रशेखरन के फैसले पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव आता है, तो यह बोर्ड के प्रमुख हितधारकों के प्रभाव की असली परीक्षा होगी।

टाटा बोर्ड में दो फाड़: नोएल टाटा बनाम वेणु श्रीनिवासन

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा संस के बोर्ड में दो बड़े दिग्गजों के रुख बिल्कुल अलग रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने ग्रुप की कुछ कंपनियों में नुकसान और कैपिटल एलोकेशन को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने चंद्रशेखरन से टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) को लेकर भी स्थिति साफ करने को कहा था।

दूसरी तरफ, टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन, चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने के पक्ष में रहे हैं।

टाटा संस के नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति या री-अपॉइंटमेंट के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा मनोनीत कुल डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन होना अनिवार्य है।

बोर्ड के बाकी डायरेक्टर्स का क्या है रुख?

टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के अलावा तीन और सदस्य हैं सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनिता जॉर्ज।

सौरभ अग्रवाल: एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और चंद्रशेखरन की कोर टीम का अहम हिस्सा माने जाते हैं।

हरीश मनवानी व अनिता जॉर्ज: ये दोनों इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स हैं। मनवानी टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) के चेयरमैन भी हैं।

उत्तराधिकारी की तलाश और ट्रस्ट्स का कानूनी पेच

चंद्रशेखरन के बाद नया चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। 13 अगस्त को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने नया चेयरमैन चुनने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की बैठकों पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की कार्यवाही के कारण फिलहाल रोक लगी हुई है। चूंकि दोनों मुख्य ट्रस्ट्स को मिलकर कमेटी के सदस्य तय करने होते हैं, इसलिए इस कानूनी पेंच के कारण एजीएम और उत्तराधिकार की प्रक्रिया में मुश्किलें आ रही हैं।

17 सितंबर की बोर्ड बैठक टाटा ग्रुप के आने वाले भविष्य के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। अगर बोर्ड के सदस्य चंद्रशेखरन को अपना फैसला बदलने के लिए मना लेते हैं तो कहानी बदल सकती है, वरना नए चेयरमैन की तलाश वाली सिलेक्शन कमेटी की राह और तेज हो जाएगी।

Gujarat Cotex: खाने के तेल और रियल एस्टेट में एंट्री की तैयारी, बोर्ड के सामने रखे जाएंगे दो नए बिजनेस प्रस्ताव

Gujarat Cotex: मल्टी-बिजनेस कंपनी गुजरात कॉटेक्स लिमिटेड खाने के तेल, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एंट्री की तैयारी कर रही है। कंपनी ने दो नए बिजनेस वर्टिकल ‘प्रभात ऑयल्स’ और ‘प्रभात इंफ्राटेक’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इन दोनों प्रस्तावों पर कंपनी के बोर्ड की अगली बैठक में फैसला होगा। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

‘प्रभात ऑयल्स’ से खाने के तेल कारोबार पर फोकस

Gujarat Cotex खाने वाले और रिफाइंड तेल के कारोबार में नए मौके तलाशना चाहती है। इसके लिए ‘प्रभात ऑयल्स’ नाम से अलग बिजनेस डिवीजन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

यह डिवीजन ट्रेडिंग, प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, जॉब वर्क और इससे जुड़े दूसरे काम कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस कारोबार में ‘प्रभात’ ब्रांड की पहचान और प्रमोटर ग्रुप के अनुभव का फायदा मिलेगा। इसका मकसद खाने के तेल के बाजार में मजबूत मौजूदगी बनाना और लंबे समय की ग्रोथ का आधार तैयार करना है।

‘प्रभात इंफ्राटेक’ से रियल एस्टेट में कदम

Gujarat Cotex रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी नए अवसर तलाशना चाहती है। इसके लिए ‘प्रभात इंफ्राटेक’ नाम से नया वर्टिकल शुरू करने का प्रस्ताव है।

यह डिवीजन सूरत और आसपास के इलाकों में रिहायशी, कमर्शियल और अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकता है। इसके अलावा धोलेरा स्मार्ट सिटी जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी संभावनाएं तलाशने की योजना है। कंपनी का कहना है कि हर प्रोजेक्ट का आकलन कमर्शियल पहलू, रणनीतिक जरूरत और लंबे समय में वैल्यू बनाने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा।

नए रेवेन्यू स्रोत बनाने की कोशिश

गुजरात कॉटेक्स का मानना है कि इन दोनों वर्टिकल से नए रेवेन्यू के मौके बन सकते हैं। साथ ही ‘प्रभात’ ब्रांड की पहचान और प्रमोटर ग्रुप के तजुर्बे का भी फायदा मिलेगा। कंपनी इन कारोबारों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करेगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

Gujarat Cotex के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेशकुमार जयंतकुमार पारेख ने कहा कि ‘प्रभात ऑयल्स’ और ‘प्रभात इंफ्राटेक’ कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ रणनीति का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, खाने के तेल के कारोबार में ट्रेडिंग से लेकर रिफाइनिंग तक विस्तार की अच्छी संभावना है। वहीं, रियल एस्टेट में कंपनी ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनना चाहती है, जहां लंबे समय तक वैल्यू क्रिएशन की गुंजाइश हो।

कंपनी ने साफ किया है कि दोनों प्रस्ताव बोर्ड की मंजूरी और जरूरी कानूनी व रेगुलेटरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही लागू होंगे। मंजूरी मिलने पर इन बिजनेस वर्टिकल को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Aastha Spintex: 23 जुलाई को बोर्ड मीटिंग होगी, 1:1 बोनस शेयर के साथ डिविडेंड देने के प्रस्ताव पर विचार करेगा बोर्ड

Aastha Spintex: गुजरात की इंटीग्रेटेड कॉटन यार्न निर्माता Aastha Spintex Ltd अपने कारोबार के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। कंपनी का बोर्ड 23 जुलाई 2026 को होने वाली बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर विचार करेगा। इनमें 1:1 बोनस शेयर, 100% तक फाइनल डिविडेंड और वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स में विस्तार शामिल है।

बोनस शेयर और डिविडेंड पर फैसला

Aastha Spintex के बोर्ड के सामने 1:1 बोनस इश्यू का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत हर एक इक्विटी शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर मिलेगा। इसके अलावा, ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹10 तक के फाइनल डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, इन प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी मिलना जरूरी होगा।

टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने की तैयारी

Aastha Spintex के मुताबिक, वह अब सिर्फ कॉटन यार्न तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अपने ब्रांड के तहत ग्रे फैब्रिक और दूसरे वैल्यू-एडेड फैब्रिक प्रोडक्ट्स के कारोबार में उतरने की योजना बना रही है। इस कदम से कंपनी टेक्सटाइल वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है। साथ ही मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।

मैनेजिंग डायरेक्टर क्या बोले?

Aastha Spintex के मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्यांग जसवंत पटेल ने कहा कि कंपनी लंबे समय से एक मजबूत और इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल बिजनेस बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, अब टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का सही समय है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बोनस इश्यू और डिविडेंड शेयरधारकों के साथ कंपनी की बनाई गई वैल्यू साझा करने की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं।

हाल में बढ़ी उत्पादन क्षमता

हाल ही में NSE और BSE के मेन बोर्ड पर लिस्टिंग के बाद कंपनी ने Falcon Yarns Pvt Ltd का अधिग्रहण पूरा किया है। कंपनी का दावा है कि अब उसकी सालाना स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो गई। वहीं, स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 तक पहुंच गई। कंपनी का मानना है कि वैल्यू-एडेड फैब्रिक सेगमेंट में विस्तार इस बढ़ी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेगा।

वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा

पिछले दो वित्त वर्षों में कंपनी की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023 में ₹240 करोड़ रहा रेवेन्यू बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹352 करोड़ हो गया। इस दौरान कंपनी ने 21.2% की CAGR दर्ज की। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 5.87% से बढ़कर 14.16% हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 6.05% से बढ़कर 14.45% पहुंच गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।