भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द लगेगी मुहर? मार्को रुबियो ने दिए बड़े संकेत

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। इस दौरे के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सहयोग और आगे की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी। उनके इस दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखी।

उन्होंने यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के हथियार नियंत्रण से जुड़े मामलों और रूस से तेल खरीदने को लेकर जारी चर्चाओं जैसे विषयों पर चर्चा की। इन मुद्दों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेगा

लंबे समय से चर्चा में चल रहे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते की स्थिति पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिकी विदेश विभाग सीधे तौर पर व्यापार समझौते पर बातचीत नहीं करता है। उन्होंने कहा, “​​ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत की जिम्मेदारी विदेश विभाग की नहीं है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में हमारी अहम भूमिका है। मैं और मेरे काउंटरपार्ट, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर इस समझौते को लेकर काफी गंभीर हैं। हम इसे पूरा करने के बेहद करीब हैं। मेरा मानना है कि समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अब केवल कुछ मुद्दों पर काम करना बाकी है, इसलिए इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “हम चाहते हैं कि जल्द ही इस बारे में अच्छी खबर सामने आए और इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में इस दिशा में पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेंगे।”

रिलायंस के साथ होगी बैठक

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि अमेरिकी डेलीगेशन वेनेजुएला में तेल उत्पादन को लेकर रिलायंस के साथ बैठक करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी पेट्रोलियम खरीद के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काफी प्रगति की है, जिसे उन्होंने एक समझदारी भरा कदम बताया।

ग्लोबल एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में भारत की भूमिका पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि, “भारत तेल रिफाइनिंग के मामले में काफी मजबूत है। उन्होंने बताया कि भारत के पास भारी कच्चे तेल को साफ करने और उससे उपयोगी ईंधन बनाने की क्षमता है और वह पहले भी ऐसा कर चुका है।” रुबियो के मुताबिक, “वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बढ़ने पर भारत इसका इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि भारत के पास वेनेजुएला में पहले से ही तेल उत्पादन से जुड़े अधिकार हैं, जिनकी मदद से वह वहां अपना तेल उत्पादन बढ़ा सकता है।”

मार्को रुबियो ने तेल को लेकर क्या कहा

उन्होंने आगे कहा, “ये सभी सकारात्मक बातें हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि दुनिया भर में चल रही घटनाओं के कारण तेल की आपूर्ति में जो कमी आ सकती है, उसे केवल वेनेजुएला ही पूरा कर सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि लंबे समय में वेनेजुएला इसमें अहम योगदान दे सकता है और कम समय में भी कुछ राहत पहुंचा सकता है। यह उन मुद्दों में से एक है, जिन पर हम चर्चा करेंगे। भारत के साथ इस विषय पर पहले भी बातचीत हो चुकी है और वह इसके लिए तैयार नजर आ रहा है। भारत इस दिशा में आगे बढ़ने को इच्छुक है, हालांकि पाबंदियों से जुड़ी कुछ बाधाएं सामने आ सकती हैं, जिनका हमें समाधान निकालना होगा।”

दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाना

अपने भारत दौरे के महत्व पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि, “भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस साल चार बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं।” उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा कि, अमेरिका के लिए भारत एक अहम व्यापारिक और कारोबारी साझेदार है। रुबियो ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग और क्वाड में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत को अमेरिका का मजबूत रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों को भारत के अधिक दौरे करने चाहिए।

यूक्रेन को लेकर क्या कहा

इसके अलावा, मार्को रुबियो ने यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के हथियार नियंत्रण से जुड़े अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिनमें कहा गया था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी रक्षा प्रणाली इस्तेमाल करने वाले सहयोगी देशों को यूक्रेन के लिए पैट्रियट मिसाइलें भेजने की मंजूरी रोक दी थी, रुबियो ने कहा कि यूक्रेन को जानबूझकर किसी भी तरह की मदद से वंचित नहीं किया जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप उन आरोपों से नाराज थे, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके फैसलों से यूक्रेन की स्थिति कमजोर हो रही है।

इसके अलावा, मार्को रुबियो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर चीन, रूस और अमेरिका के बीच हथियारों पर नियंत्रण को लेकर सहमति बनती है, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक कदम होगा। उन्होंने संकेत दिया कि इन तीनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ने से वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

भारत-अमेरिका डील से बढ़ सकती है देश की इकोनॉमी की ग्रोथ: सुरजीत भल्ला

दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारत ने पश्चिम एशिया संकट का सामना किया है। अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ की रफ्तार बढ़ा सकता है। मशहूर अर्थशास्त्री और आईएमएफ के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुरजीत भल्ला ने यह अनुमान जताया है। मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका से ट्रेड डील के फायदों के साथ ही इंडियन इकोनॉमी के बारे में कई अहम बातें बताईं।

पश्चिम एशिया क्राइसिस का भारत की ग्रोथ पर ज्यादा असर नहीं

पश्चिम एशिया में जारी टेंशन के बारे में उन्होंने कहा कि मैंने कई बार कहा है कि दुनिया बदल चुकी है। अमेरिका की ग्रोथ बहुत अच्छी है। उसने सबको हैरान किया है। फिर लड़ाई शुरू हो गई। यहां तक कि यूरोप की भी ग्रोथ अपनी रफ्तार से चल रही है। अब सवाल है कि दुनिया में किस देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है? हमें इस बारे में सोचना होगा। अगर उन्हें (अमेरिका-यूरोप) नुकसान उठाना पड़ा है और हमें नुकसान नहीं हुआ है तो इसका मतलब यह है कि इस लड़ाई का हमारे ग्रोथ रेट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

भारत में इकोनॉमी की ग्रोथ में घरेलू कंजम्प्शन की बड़ी हिस्सेदारी

भल्ला ने कहा कि इसकी वजह यह है कि हमारी ग्रोथ में ज्यादा योगदान घरेलू कंजम्प्शन का है, जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। विकासशील देशों में निवेश ज्यादा देखने को मिलता है। लेकिन, मेरा मानना है कि हर व्यक्ति इस बात से हैरान है कि पश्चमि एशिया संकट का ग्रोथ और इनफ्लेशन पर असल में असर नहीं पड़ा है। पहले ऑयल की कीमतों में उछाल का इनफ्लेशन पर ज्यादा असर पड़ा था। यही बात ग्रोथ के मामले में भी लागू होती है। सरकारें ऑयल की सप्लाई का रास्ता निकाल रही हैं।

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अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से बढ़ेगी ग्रोथ 

अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम से ट्रेड डील के बारे में उन्होंने कहा अमेरिका से व्यापार समझौते के कई फायदे हैं। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है। यह व्यापार और निवेश का समझौता है। हालांकि, हमने ईयू और यूके के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनमें निवेश का कोई प्रावधान नहीं है। ईयू दुनिया के सबसे ज्यादा रेगुलेटेड इकोनॉमीज में से एक है। यूके छोटा है। उसके बाद हमने न्यूजीलैंड से डील की। लेकिन, मेरा मानना है कि अमेरिका के साथ हमारा व्यापार और निवेश का समझौता सबसे अहम है। यह इंडियन इकोनॉमी की की कई समस्याएं दूर करेगा।