Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

SIP Daily vs Monthly Comparison: क्या आपको भी ऐसा लगता है कि महीने में एक बार निवेश करने के बजाय हर दिन SIP करने से ज्यादा मुनाफा मिलता है? अगर आपका जवाब हां है, तो आप ऐसा सोचने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। बहुत से निवेशकों का मानना है कि रोजाना निवेश करने से बाजार की गिरावट का फायदा बेहतर तरीके से मिलता है और औसत लागत सुधरती है।

लेकिन व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक हालिया और चौंकाने वाली स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। आइए जानते हैं कि लंबी अवधि में कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी वास्तव में सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएशन करती है।

30 साल का डेटा एनालिसिस, क्या कहते हैं आंकड़े?

व्हाइटओक कैपिटल ने अगस्त 1996 से जून 2026 के बीच BSE सेंसेक्स टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) का विश्लेषण किया। इस स्टडी में यह सुनिश्चित किया गया कि तीनों ही विकल्पों (डेली, वीकली और मंथली) में निवेश की कुल राशि बिल्कुल समान रखी जाए।

डेली और वीकली SIP रिटर्न: स्टडी के मुताबिक, डेली और वीकली SIP के जरिए कुल कॉर्पस बढ़कर ₹12.33 करोड़ तक पहुंचा।

मंथली SIP रिटर्न: वहीं, मंथली SIP के जरिए कुल फंड बढ़कर ₹12.45 करोड़ हो गया।

XIRR रिटर्न: हैरान करने वाली बात यह है कि तीनों ही तरीकों से लॉन्ग-टर्म एनुअलाइज्ड रिटर्न (XIRR) 13.47% ही रहा।

Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

इसका साफ मतलब है कि हर दिन पैसे लगाने से आपको कोई जादुई या बहुत बड़ा एक्स्ट्रा फायदा लॉन्ग-टर्म में नहीं मिलता।

डेली SIP मंथली से ज्यादा बेहतर क्यों नहीं साबित होती?

पहली बार में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, क्योंकि डेली SIP महीने के अलग-अलग दिनों और अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदती है।मंथली SIP महीने की किसी एक तारीख पर पूरा पैसा एक साथ लगाती है।

शॉर्ट टर्म में तो डेली इन्वेस्टिंग से थोड़ा फर्क पड़ सकता है, लेकिन दशकों के लंबे समय में बाजार समय के साथ ऊपर ही जाता है। ऐसे में महीने के किस दिन पैसा निवेश हुआ, इसका असर लंबे समय के चक्र में नगण्य हो जाता है। सबसे बड़ा असर इस बात का पड़ता है कि आपने बाजार में कुल कितने साल बिताए।

आपके लिए कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी सबसे सही है?

डेटा साफ है कि कैलेंडर को ऑप्टिमाइज करने या बार-बार तारीख बदलने से रिटर्न पर कोई खास असर नहीं पड़ता। इसलिए आपको अपनी सुविधा के हिसाब से चुनाव करना चाहिए:

सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए: मंथली SIP सबसे बेहतरीन है, जिसे आप अपनी सैलरी आने के अगले दिन सेट कर सकते हैं। इससे ऑटोमैटिक सेविंग की आदत बनती है।

फ्रीलांसर या बिजनेस ओनर्स के लिए: जिनकी इनकम फिक्स नहीं होती, वे अपनी सहूलियत के हिसाब से वीकली या डेली SIP का विकल्प चुन सकते हैं, ताकि वे रेगुलर निवेश कर सकें।

वेल्थ क्रिएशन के असली मंत्र: इन 4 बातों पर दें ध्यान

दैनिक या मासिक बहस में अपना समय बर्बाद करने के बजाय, आपको उन फैक्टर्स पर फोकस करना चाहिए जो सचमुच आपका बड़ा फंड तैयार करते हैं:

  1. जल्द से जल्द शुरुआत करें: जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग का उतना ही बड़ा फायदा मिलेगा।
  2. बाजार के उतार-चढ़ाव में टिके रहें: मार्केट करेक्शन या गिरावट के दौरान अपनी SIP बंद करने की गलती बिल्कुल न करें।
  3. टॉप-अप का नियम अपनाएं: जैसे-जैसे आपकी सैलरी या इनकम बढ़े, अपनी SIP की राशि में भी सालाना इजाफा करें।
  4. धैर्य रखें: शेयर बाजार में पैसा रातों-रात नहीं, बल्कि अनुशासन और लंबे समय के धैर्य से बनता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty के लिए 23650-23600 का जोन अहम, यहीं से तय होगी शॉर्ट-टर्म दिशा; नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई

जब तक निफ्टी 50 में बिकवाली का दबाव और नहीं बढ़ता, तब तक 23,600 के नीचे बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। जब तक 23,600 का सपोर्ट बना हुआ है, निफ्टी 50 के 23,950–24,000 के जोन की ओर वापस जाने की संभावना बनी हुई है। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में निफ्टी और बैंक निफ्टी को लेकर क्या उम्मीद जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको लगता है कि निफ्टी 50 अगले हफ्ते 23,600 के सपोर्ट लेवल को साफ तौर पर तोड़कर 23,000 के लेवल की ओर बढ़ेगा?

लंबे समय से चल रही कंसोलिडेशन रेंज के नीचे हालिया ब्रेकडाउन ने निफ्टी के शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर को कमजोर कर दिया है। इंडेक्स अपने शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेज के नीचे आ गया है। मोमेंटम इंडिकेटर लगातार मंदी का संकेत दे रहे हैं। इस कमजोरी के बावजूद, शुक्रवार को 23,650–23,600 के आस-पास 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट जोन से हुई रिकवरी यह बताती है कि खरीदार अभी भी इस अहम सपोर्ट एरिया को बचाए हुए हैं।

हालांकि ब्रॉडर ट्रेंड अभी भी बेयर्स के पक्ष में है, लेकिन जब तक बिकवाली का दबाव और नहीं बढ़ता, तब तक हमें 23,600 के नीचे साफ ब्रेकडाउन की उम्मीद नहीं है। हालांकि अगर 23,600 के नीचे लगातार गिरावट बनी रहती है, तो यह नई कमजोरी की पुष्टि करेगा और इससे 23,450 और उसके बाद 23,300 की ओर तेज गिरावट (करेक्शन) आ सकती है। इसलिए, 23,650–23,600 का जोन बाजार की शॉर्ट-टर्म दिशा तय करने के लिए लड़ाई का मुख्य मैदान बना रहेगा।

क्या आपको लगता है कि अगले हफ्ते बैंक निफ्टी के लिए 56,000-55,500 का जोन एक मजबूत सपोर्ट एरिया का काम करेगा?

बैंक निफ्टी का 56,000-55,800 का जोन निकट भविष्य में एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। इंडेक्स ने हाल ही में 56,000 के स्तर के आसपास खरीदारी का रुझान दिखाया। 200-दिन के EMA से कुछ समय के लिए यह नीचे गया लेकिन फिर उसे सफलतापूर्वक फिर से हासिल कर लिया। इससे पता चलता है कि यह ​एरिया एक मजबूत डिमांड जोन के तौर पर काम कर रहा है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह सपोर्ट पिछले अपमूव (तेजी) के 50 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के साथ भी मेल खाता है। इससे यह मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए नजर रखने लायक एक जरूरी लेवल बन जाता है।

अगर बैंक निफ्टी 55,800 के नीचे निर्णायक रूप से टूटता है, तो इससे मंदी का माहौल मजबूत हो सकता है और नई बिकवाली का दबाव बन सकता है। इससे इंडेक्स शॉर्ट टर्म में 55,000 और फिर 54,400 की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ, 57,300–57,400 का जोन एक अहम तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है। इस बाधा के ऊपर लगातार ब्रेकआउट होना, निकट-अवधि के टेक्निकल आउटलुक को बेहतर बनाने और बुलिश मोमेंटम को फिर से शुरू करने के लिए जरूरी होगा।

मौजूदा मार्केट करेक्शन में आप किन दो टेक्निकली मजबूत शेयरों को खरीदने की सलाह देंगे?

Manappuram Finance: यह स्टॉक लगातार मजबूती दिखा रहा है और डेली टाइमफ्रेम पर ‘हायर हाई, हायर लो’ पैटर्न में आगे बढ़ रहा है। 20-दिन का EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) लगातार डायनैमिक सपोर्ट का काम कर रहा है, और पिछले एक महीने में कई बार इस लेवल के आस-पास शेयर में खरीदारी देखी गई है। डेली चार्ट पर बढ़ता ADX तेजी (बुलिश ट्रेंड) की मजबूती का संकेत देता है। वीकली टाइमफ्रेम पर RSI (रिलेटिव ​स्ट्रेंथ इंडेक्स) ऊपर जाने से पहले 60 के निशान के पास मजबूती से बना हुआ है, जो बढ़ते बुलिश मोमेंटम को दर्शाता है।

इसके अलावा MACD में बढ़ते हरे हिस्टोग्राम बार दिख रहे हैं और MACD लाइन, सिग्नल लाइन के ऊपर है, जो बुलिश ट्रेंड को और मजबूत करता है। साथ ही आगे भी बढ़त की संभावना की ओर इशारा करता है। इसलिए, 340 रुपये के स्टॉप-लॉस के साथ 350-355 रुपये के जोन में शेयर जमा करने (एक्युमुलेशन) की सलाह दी जाती है। ऊपर की ओर, इसके शॉर्ट टर्म में 380 रुपये के लेवल तक पहुंचने की संभावना है।

Titan Company: टाइटन कंपनी ने 21 जुलाई को डेली टाइमफ्रेम पर ₹4,680-4,505 की रेंज से एक मजबूत ब्रेकआउट दिया और उसके बाद अच्छी बढ़त दिखाई। कमजोर मार्केट सेंटीमेंट के बीच 24 जुलाई को गैप-डाउन के साथ खुलने के बावजूद, स्टॉक में तेजी से खरीदारी हुई और यह ऊपर चढ़ गया। इससे एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी। अब यह शॉर्ट और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेजेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो ट्रेंड की मजबूती को दिखाता है।

डेली चार्ट पर ADX तेजी से बढ़ा है, जो मजबूत बुलिश मोमेंटम का संकेत है। वीकली टाइमफ्रेम पर MACD क्रॉसओवर सकारात्मक गति की पुष्टि करता है। पिछले स्विंग हाई ₹4,605 ​​से ऊपर लगातार वीकली क्लोजिंग के साथ, टाइटन का टेक्निकल स्ट्रक्चर आगे भी बढ़त की संभावना दिखाता है। इसलिए, ₹4,525 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹4,670-4,715 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह दी जाती है। ऊपर की ओर, यह शॉर्ट टर्म में ₹5,040 के लेवल तक पहुंच सकता है।

टॉप 10 कंपनियों में से 9 का M-Cap ₹2.74 लाख करोड़ घटा, HDFC Bank को सबसे ज्यादा नुकसान

क्या आपको लगता है कि पिछले दो हफ्तों में जबरदस्त तेजी के बाद Astral में और बढ़त होगी?

29 जून को गैप-डाउन के बाद स्टॉक 21 जुलाई तक ₹1,311–1,423 की रेंज में कंसोलिडेट होता रहा। इसने 22 जुलाई को ब्रेकआउट दिया और अपने अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेजेज को फिर से हासिल कर लिया। RSI ऊपर की ओर बढ़ रहा है, जो बुलिश मोमेंटम के मजबूत होने का संकेत है, जबकि बढ़ते हरे MACD हिस्टोग्राम बार सकारात्मक रुख को और मजबूत करते हैं। उम्मीद है कि ₹1,400-1,410 का 20-दिन का EMA जोन मौजूदा पुलबैक के लिए मजबूत सपोर्ट देगा।

क्या आपको लगता है कि Laurus Labs अपना बुलिश मोमेंटम बनाए रखेगा, क्योंकि यह मार्च 2026 से ‘हायर हाई-हायर लो’ पैटर्न बना रहा है?

लॉरस लैब्स मजबूत ‘हायर हाई-हायर लो’ स्ट्रक्चर बनाए हुए है, जिसमें 20-दिन का EMA एक भरोसेमंद डायनैमिक सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा है। RSI ने दो बार 60 के लेवल के पास सपोर्ट लिया है, जो लगातार बुलिश मोमेंटम को दिखाता है। इसके अलावा, ADX इंडिकेटर पर DI+ मजबूती से DI- के ऊपर बना हुआ है, जो मजबूत खरीदारी की दिलचस्पी को दर्शाता है। ₹1,525–1,530 का जोन एक अहम सपोर्ट है और जब तक स्टॉक इस लेवल से ऊपर है, तब तक इसमें तेजी जारी रह सकती है।

क्या FII की पोजीशनिंग बाजार पर लगातार दबाव का संकेत देती है, या आने वाले दिनों में शॉर्ट-कवरिंग रैली की संभावना है?

FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशक) 24 जुलाई को नेट सेलर बने रहे। उन्होंने 3,893 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इससे बीते सप्ताह की कुल बिकवाली का आंकड़ा 7,182 करोड़ रुपये हो गया। उनका इंडेक्स फ्यूचर्स लॉन्ग-शॉर्ट रेश्यो 17 जुलाई को 11.01 प्रतिशत से गिरकर 8.63 प्रतिशत हो गया, जो शॉर्ट पोजीशंस के आक्रामक रूप से बढ़ने को दर्शाता है।

हालांकि ऐतिहासिक रूप से ऐसी लो रीडिंग्स के बाद तेज शॉर्ट-कवरिंग रैली देखी गई है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के निकट होना, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी व जापानी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से मैक्रो स्थितियों में सुधार होने तक बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रामदेव अग्रवाल ने कहा-बाजार के लिए ऑयल और रुपया बड़े रिस्क, यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का सही समय

शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। आज यानी 24 जुलाई को लगातार पांचवें दिन शेयर बाजारों में गिरावट दिख रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अभी बाजार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन बाजार की सबसे बड़ी चिंता

अग्रवाल ने कहा कि बाजार के लिए अब सबसे बड़ी चिंता वैल्यूएशन नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल स्थितियां हैं। मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ रही हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। रुपये में कमजोरी जब तक जारी रहेगी तब तक विदेशी निवेशकों के भारत लौटने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी स्थिति अनिश्चित दिख रही है, जिससे विदेशी निवेशक खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

मार्केट करेक्शन का असर लंबी अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा

बाजार में हालिया गिरावट के बारे में उन्होंने कहा कि इसका असर लंबी अवधि के निवेशकों की खरीदारी पर नहीं पड़ेगा। दरअसल, यह अच्छी क्वालिटी के शेयरों को खरीदने या उनमें निवेश बढ़ाने का मौका है। इसकी वजह यह है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। अब भी भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया के कई बड़े देशों की ग्रोथ से ज्यादा है।

क्रूड 100 के पार जाने पर बाजार पर दबाव बढ़ेगा

उन्होंने कहा, “बाजार एक दिशा में नहीं चलता है। शेयरों पर अच्छे और बुरे दोनों वजहों का असर पड़ता है। सही तरीका यह है कि करेक्शंस के बाद शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव होने पर लंबी अवधि में अच्छे प्रदर्शन की संभावना वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश बढ़ाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर को पार कर जाती है तो बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा।

देश के एक्सटर्नल अकाउंट पर भी दबाव बढ़ रहा

अग्रवाल ने कहा कि महंगे क्रूड से करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने और विदशी निवेश कमजोर रहने से भारत के एक्सटर्नल अकाउंट पर दबाव बढ़ सकता है। पहले से ही करेंट अकाउंट का बड़ा घाटा दिख रहा है। अब तो कैपिटल अकाउंट में भी घाटा दिखने लगा है। इसका खराब असर मार्केट के मनोविज्ञान पर पड़ेगा। उनका मानना है कि बाजार में कई आईपीओ आने वाले हैं, इससे भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली दिख सकती है।

बड़े आईपीओ में निवेश के लिए शेयर बेच सकते हैं FIIs

उन्होंने कहा, “Zepto, jio और NSE जैसे आईपीओ आने वाले हैं। इनमें विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दिख सकती है। ऐसे में उन्हें इसके लिए अपने पोर्टफोलियो में जगह बनानी होगी। इसका मतलब है कि वे अपने पोर्टफोलियो के कुछ शेयर बेच सकते हैं।” उन्होंने कहा कि इससे बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा। पहले से ही क्रूड में उछाल से बाजार पर दबाव दिख रहा है।

भारत के लिए बेहतर हो रही हैं स्थितियां 

अग्रवाल ने कहा कि भारतीय बाजार के लिए स्थितियां बेहतर होती दिख रही हैं। उन्होने कहा, “मानसून में इम्प्रूवमेंट है। अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी दिख रही है। रुपये में स्थिरता है। हालांकि, हमें रुपये पर नजर बनाए रखनी होगी। उधर, दुनियाभर में AI स्टोरी कमजोर होती दिख रही है।” उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमी अच्छी है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता पर इसका असर कम पड़ेगा। अगर जियोपॉटिलिक्स को छोड़ दिया जाए तो भारत असल में अच्छी स्थिति में है।

Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

Investment Mantra: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों के बीच लड़ाई जैसे ही बढ़ती है सोने की कीमतों में तेज गिरावट आती है। ऐसे में सोना रिकॉर्ड हाई से करीब 25% टूट चुका है। ऐसे में इतनी भारी गिरावट के बाद क्या सोने में निवेश का सही समय आ गया है? क्या आगे गोल्ड में फिर चमक लौटेगी? सिर्फ इतना ही नहीं पोर्टफोलियो की चमक बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग एक बड़ी थीम बनकर उभरी है। 2 साल की लगातार रैली के बाद क्या अब भी एक आम निवेशक ग्लोबल इन्वेस्टिंग की तरफ फोकस कर सकता है? इस सब सवालों के जबाव देनें के लिए हमारे साथ हैं ट्रुवांटा वेल्थ (Truvanta Wealth) के फाउंडर और CEO कीर्तन शाह

सोने में गिरावट के कारण

मार्च में कई सेंट्रल बैंकों ने करीब $30 bn का सोना बेचा है। तुर्की और रूस ने आगे बढ़कर सोना बेचा है। तुर्की ने अपनी गिरती करेंसी लीरा को संभालने के लिए सोना बेचा है। रूस ने यूक्रेन युद्ध खर्चों को पूरा करने के लिए सोना बेचा है। मार्च में कच्चा तेल महंगा होने से बॉन्ड यील्ड बढ़ीं हैं। यील्ड बढ़ने से फिक्स्ड इनकम निवेश की तरफ रुझान बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने भी दबाव बनाया है। सोने की कीमत डॉलर में तय होती है,मजबूत डॉलर से इसकी मांग घटती है।

अब सोने पर नजरिया?

कीर्तन शाह ने कहा कि अब धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने का समय है। ग्लोबल स्तर पर युद्धों में कमी आई है। करेंसी मैनेजमेंट और फंडिंग की जरूरतें घटेंगी। सेंट्रल बैंक फिर से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान देंगे। डी-डॉलराइजेशन का ट्रेंड भी सोने के पक्ष में है। सेंट्रल बैंकों की बैलेंस शीट में सोने की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 27% हो गई है। डॉलर रिजर्व की हिस्सेदारी 25% से घटकर 23% हो गई है। अप्रैल से सेंट्रल बैंकों ने फिर से सोने की खरीद शुरू की है। चीन ने पिछले महीने 19 महीनों में सबसे ज्यादा सोना खरीदा है। वह लगातार 19 महीनों से सोने की खरीद कर रहा है। US में दरें उतनी नहीं बढ़ेंगी,जितनी बाजार को आशंका थी। जिन कारणों से सोना गिरा था वही अब आगे सोने की कीमतों को सहारा देंगे।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी है, क्या पोर्टफोलियो में हिस्सा होना चाहिए?

इस पर बात करते हुए कीर्तन शाह ने कहा कि पिछले दो सालों ने साफ किया है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग बहुत जरूरी है। कई ऐसे निवेश थीम और अवसर हैं जो भारत में मौजूद नहीं हैं। इसलिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी हो जाती है। रुपये की सालाना लगभग 4% गिरावट भी इसका एक बड़ा कारण है।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी, क्या इस समय करें निवेश?

कीर्तन शाह ने कहा कि फिलहाल अभी हम ऐसा नहीं करेंगे। ग्लोबल बाजारों में पहले ही अच्छी तेजी आ चुकी है,सब भाव में है। ग्लोबल स्तर पर AI थीम की तेजी अब चुनिंदा शेयरों में ही है। अगर LLMs ( Large Language Models) शेयर देखें तो उनके सामने अब प्राइसिंग का दबाव है। टोकन प्राइस इंडेक्स 2.5 डॉलर प्रति मिलियम टोकन से घटकर 1.8 डॉलर पर आ गया है। चीन के ओपन-सोर्स मॉडल US कंपनियों पर भी दबाव बना रहे हैं।

तो अभी कहां करें निवेश?

कीर्तन शाह की राय है कि AI थीम में करेक्शन आया तो निवेशकों का रुख फिर से भारत की ओर होगा। भारतीय बाजारों में 2 साल से टाइम और वैल्यूएशन करेक्शन देखने को मिल रहा है। कई सेक्टर अब आकर्षक वैल्यूएशन पर दिखाई दे रहे हैं।

 

 

Trading Plan : बने रहें और गिरावट में खरीदारी के सौदे बढ़ाएं, दिन के हाई पर हो सकती है आज की क्लोजिंग

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।