तेज विकास के बावजूद रुपये की कमजोरी दे रही दर्द, 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य छिटका दूर

IMF के आंकड़ों के मुताबिक तेज विकास दर के बावजूद रुपये की कमजोरी के कारण भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य 2029 तक टल सकता है। इसके पहले अनुमान थी कि 2027 में भारत जापान और UK को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। लेकिन IMF के पूर्वानुमानों के ‘मनीकंट्रोल’ द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये की गिरावट ने 5 लाख करोड़ डॉलर के टारगेट को एक साल और आगे के लिए टाल दिया है।

भारत 2027 में जापान और यूके को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का देश का यह लक्ष्य एक साल के लिए पिछड़ सकता है। इस टारगेट को रुपये की गिरती कीमत की वजह से झटका लग सकता है। जानकारों का कहना है कि रुपए के वैल्यू में कमी आने से डॉलर के हिसाब से देश के आर्थिक उत्पादन की वैल्यू में कमी आ रही है।

मनीकंट्रोल द्वारा इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के नवीनतम ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (WEO) डेटाबेस के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था के 2029 में 5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार करने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में इसके 2028 तक इस स्तर को पार करने का अनुमान लगाया गया था।

IMF ने रुपये के संदर्भ में भारत के आर्थिक आउटपुट के अनुमान को तो बढ़ाया है, लेकिन 2028 के लिए भारत की नॉमिनल GDP के अपने अनुमान को 5.1 लाख करोड़ डॉलर से घटाकर 4.996 लाख करोड़ डॉलर कर दिया है।

5 लाख करोड़ डॉलर का टारगेट खिसका दूर

यह अंतर भारत की डॉलर-मूल्य वाली जीडीपी पर मुद्रा के अवमूल्यन (मूल्य में गिरावट) के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है, जो ग्लोबल इकोनॉमिक रैंकिंग में देश की स्थिति तय करता है।

आईएमएफ (IMF) के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 4.06 लाख करोड़ डॉलर की होगी, जो 2027 में बढ़कर 4.52 लाख करोड़ डॉलर और 2029 में 5.54 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी।

रुपये की गिरावट ने मजबूत घरेलू विकास के असर को किया बेअसर

ताजा अनुमान बताते हैं कि 5 लाख डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने में हो रही देरी की मुख्य वजह भारत की नॉमिनल आर्थिक ग्रोथ में आई गिरावट नहीं, बल्कि विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) से जुड़े अनुमान में हुआ बदलाव है।

IMF का अब अनुमान है कि 2028 में रुपया प्रति डॉलर औसतन 95.5 के स्तर पर रहेगा, जबकि अप्रैल के अनुमानों में यह आंकड़ा 93.3 था। 2027 के लिए, एक्सचेंज रेट का अनुमान 93 से बदलकर 95 हो गया है।

साल की शुरुआत से अब तक भारतीय रुपया 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो चुका है। शुक्रवार को रुपया 96.73 के स्तर पर बंद हुआ, जिसके बाद RBI ने इसमें और गिरावट को रोकने के लिए कदम उठाए।

इस बीच, घरेलू मुद्रा में भारत की नॉमिनल GDP के 2028 में 477.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था, यानी इस अनुमान में 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन, जब इसे डॉलर में बदला जाता है तो आर्थिक आउटपुट का यह अनुमान लगभग 63 अरब डॉलर कम हो जाता है।

मनीकंट्रोल की गणना से पता चलता है कि अप्रैल के 93.3 रुपए प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट अनुमान के आधार पर, 2028 के लिए भारत की रुपये में मापी गई GDP का IMF का ताजा अनुमान लगभग 5.11 लाख करोड़ डॉलर बैठता है, जो 5 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े से काफी ऊपर है। हालांकि, एक्सचेंज रेट के संशोधित अनुमान के आधार पर यह आंकड़ा घटकर लगभग 4.996 लाख करोड़ डॉलर रह जाता है।

इससे पता चलता है कि रुपये की कमजोरी, घरेलू नॉमिनल आउटपुट में हुई बढ़ोतरी के असर को पूरी तरह खत्म कर देती है। इससे यह भी साफ होता है कि भारत कब इस डॉलर-बेस्ड अहम इकोनॉमिक माइल स्टोन को हासिल करेगा, यह तय करने में विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में होने वाले बदलाव कितने अहम होते हैं।

2027 में भारत, जापान और UK को छोड़ सकता है पीछे

इस देरी के बावजूद, 2027 में भारत के ग्लोबल आर्थिक रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचने का अनुमान है। इस सूची में भारत अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद आएगा।

IMF के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2027 में भारत की GDP 4.52 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह यूनाइटेड किंगडम की 4.49 लाख करोड़ डॉलर और जापान की अनुमानित 4.47 लाख करोड़ डॉलर की GDP से थोड़ी अधिक होगी। हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच का अंतर काफी कम है, जिसका मतलब है कि विनिमय दरों (exchange rates) में उतार-चढ़ाव अंतिम नतीजों को बदल सकते हैं।

IMF के ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के और विस्तार करने की उम्मीद है। 2030 में यह 6.13 लाख करोड़ डॉलर और 2031 में 6.74 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इस स्तर पर भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

 

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SUV के दौर में Maruti की इस सेडान का जलवा! 5 महीने में बिकी 1.08 लाख यूनिट, बनी नंबर-1 कार

भारत में SUV का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। FY27 के अप्रैल से अगस्त के बीच देश में बिकी करीब हर 5 पैसेंजर गाड़ियों में से 3 SUV थीं। वहीं, सेडान कारों की बिक्री 12 गाड़ियों में से एक से भी कम रही। इसके बावजूद, इस दौरान भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार का खिताब Maruti Suzuki Dzire ने अपने नाम किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 के शुरुआती पांच महीनों में Dzire की 1.08 लाख यूनिट बिकीं। यह Tata Punch, Tata Nexon, Maruti Suzuki Fronx, Mahindra Scorpio और Hyundai Creta जैसी लोकप्रिय SUV से आगे रही। Punch 1.03 लाख यूनिट के साथ इसके सबसे करीब थी, लेकिन फिर भी Dzire से लगभग 5,000 यूनिट पीछे रही।

पूरे कार बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो Dzire की बिक्री और भी खास नजर आती है। अप्रैल से अगस्त के बीच भारत में कुल 22.05 लाख पैसेंजर गाड़ियां बिकीं। इनमें से 12.63 लाख यूनिट SUV थीं, यानी कुल बिक्री में SUV की हिस्सेदारी 57.28 प्रतिशत रही।

वहीं, इस दौरान देश में सिर्फ 1.74 लाख सेडान कारें बिकीं। यानी कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट में सेडान की हिस्सेदारी सिर्फ 7.89 प्रतिशत रही।

हालांकि, यह बढ़त कुछ समय के लिए ही नहीं थी। Dzire ने FY26 में 2.29 लाख यूनिट की बिक्री के साथ भारत की मॉडल रैंकिंग में भी टॉप किया था।

सेडान मार्केट में एक ही मॉडल का दबदबा

इंडस्ट्री के डेटा के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त के दौरान हुई कुल सेडान बिक्री में Dzire की हिस्सेदारी 62.2% थी। बाकी सभी सेडान की कुल बिक्री 65,716 यूनिट रही। अकेले Dzire की बिक्री बाकी सभी सेडान की कुल बिक्री से 42,568 यूनिट ज्यादा रही।

यही ट्रेंड FY26 में भी देखने को मिला था। सेडान की बिक्री लगभग 59,000 यूनिट बढ़कर 3.99 लाख हो गई, जो 17.35% की ग्रोथ है। हालांकि, अकेले Dzire की बिक्री में 64,109 यूनिट का उछाल आया है। Dzire को छोड़कर, बाकी सेडान की कुल बिक्री में साल-दर-साल लगभग 5,100 यूनिट की गिरावट आई।

वित्त वर्ष 2026 में भी कुछ ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला था। उस साल भारत में सेडान की बिक्री करीब 59,000 यूनिट बढ़कर 3.99 लाख हो गई थी। यानी सेडान बाजार में 17.35 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। लेकिन इस बढ़ोतरी में Dzire की भूमिका सबसे बड़ी रही। अकेली Dzire की बिक्री में 64,109 यूनिट का इजाफा हुआ।

अगर Dzire को सेडान बाजार से अलग कर दें, तो बाकी सेडान की कुल बिक्री में साल-दर-साल लगभग 5,100 यूनिट की गिरावट आई है।

Maruti Suzuki India के मार्केटिंग और सेल्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी ने मनीकंट्रोल को बताया, “31 लाख से ज्यादा ग्राहकों का भरोसा जीतने वाली Dzire, 2008 में लॉन्च होने के बाद से ही अपने सेगमेंट में सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान रही है। SUV के दबदबे वाले बाजार में भी इसने अपने कॉम्पिटिटर्स को पीछे छोड़ते हुए FY26 और इस साल अगस्त तक भारत की नंबर 1 कार का दर्जा हासिल किया है।”

बनर्जी ने कहा कि अप्रैल-अगस्त के दौरान Dzire की बिक्री में सालाना आधार पर 23% की बढ़ोतरी हुई है और अब इसके कुल ग्राहकों में से 61% ऐसे लोग हैं जो पहली बार कार खरीद रहे हैं।

कीमत, चलाने का खर्च और सेफ्टी

मौजूदा Dzire की कीमत 6.31 लाख रुपये से 9.41 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच है, यानी यह 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कैटेगरी में आती है। इसके 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ मैनुअल और ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन का ऑप्शन मिलता है, जबकि कम खर्च में गाड़ी चलाने के इच्छुक खरीदार CNG वर्जन चुन सकते हैं।

Maruti Suzuki का दावा है कि पेट्रोल मैनुअल का माइलेज 24.79 kmpl, पेट्रोल AMT का 25.71 kmpl और CNG वर्जन का 33.73 km/kg है। Dzire को Global NCAP और Bharat NCAP, दोनों से फाइव-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। सेफ्टी फीचर्स की बात करें, तो छह एयरबैग, इलेक्ट्रिक सनरूफ, 9-इंच टचस्क्रीन, वायरलेस फोन चार्जर और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसी खूबियां इसे प्राइवेट खरीदारों के बीच और भी आकर्षक बनाती हैं।

GlobalData Plc के ऑटोमोटिव – इंडिया के डायरेक्टर विवेक शर्मा ने कहा, “डिजायर एक खास गाड़ी है क्योंकि इसमें किफायती दाम, अच्छा माइलेज, CNG की सुविधा और कम मेंटेनेंस खर्च के साथ-साथ Maruti Suzuki का मजबूत सेल्स और सर्विस नेटवर्क भी मिलता है। इसकी रीसेल वैल्यू और भरोसेमंद होने की खूबी इसे और भी बेहतर बनाती है।”

Dzire को Maruti Suzuki के ‘अरीना’ नेटवर्क के जरिए बेचा जाता है, जिसके तहत लगभग 2,900 शहरों में 3,400 से ज्यादा आउटलेट हैं। कार बनाने वाली इस कंपनी के पूरे भारत में 6,000 से ज्यादा सर्विस सेंटर भी हैं।

Mobility Globalके इंडिया और ASEAN डायरेक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा कि Swift और Baleno जैसी लोकप्रिय हैचबैक कारों के साथ पार्ट्स साझा करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन (इकोनॉमीज ऑफ स्केल) से Maruti Suzuki को Dzire की कीमत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने कार के केबिन और बूट स्पेस, ईंधन के विकल्पों, ग्राहकों के भरोसे और कंपनी के बड़े नेटवर्क का भी जिक्र किया।

गुप्ता ने कहा, “इसी तरह के बड़े पैमाने पर उत्पादन (इकोनॉमीज ऑफ स्केल) वाली कोई सीधी टक्कर न होने की वजह से यह प्रोडक्ट मौजूदा बाजार में एक पसंदीदा विकल्प बना हुआ है।”

सिर्फ टैक्सी और फ्लीट ग्राहकों तक सीमित नहीं Dzire

Dzire की टैक्सी और फ्लीट मार्केट में भी मजबूत पकड़ है, जहां गाड़ी का कम रनिंग कॉस्ट और भरोसेमंद होना काफी मायने रखता है। हालांकि, Dzire को खरीदने वाले ग्राहकों में निजी खरीदारों की संख्या ज्यादा है।

नवंबर 2024 में मौजूदा जेनरेशन की Dzire लॉन्च होने के समय Maruti Suzuki के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मार्केटिंग एंड सेल्स) पार्थो बनर्जी ने बताया था कि कंपनी की कुल Dzire बिक्री में फ्लीट ग्राहकों की हिस्सेदारी करीब 30-35 प्रतिशत थी। वहीं, 65-70 प्रतिशत बिक्री निजी ग्राहकों से आती थी। Maruti Suzuki की हालिया जानकारी के मुताबिक, 61% ग्राहक पहली बार गाड़ी खरीदने वाले हैं, जो यह दिखाता है कि कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों के अलावा भी इसकी कितनी लोकप्रियता है।

शर्मा ने कहा, “खास बात यह है कि इसका फ्लीट और टैक्सी कस्टमर बेस भी मजबूत है, जहां चलने का खर्च, मजबूती और प्रैक्टिकैलिटी बहुत अहम हैं। इसलिए इसकी सफलता सेडान की वापसी के बारे में कम और प्राइवेट और कमर्शियल, दोनों तरह के इस्तेमाल के लिए प्रोडक्ट और मार्केट के बीच बेहतर तालमेल के बारे में ज्यादा है।”

एक अपवाद, न कि सेडान की वापसी

चुनौती तब और मुश्किल हो जाएगी जब कार बनाने वाली कंपनियां Dzire की कीमत वाली रेंज में और SUV लाएंगी। ये मॉडल ऊंची सीटिंग पोजीशन और SUV जैसी स्टाइलिंग देते हैं, जिसे आजकल बहुत से खरीदार पसंद कर रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि किफायती, कुशल और प्रैक्टिकल सेडान की अभी भी अच्छी-खासी मांग है। हालांकि, डिजायर की लीडरशिप बनाए रखना उसकी कीमत, CNG ऑप्शन, फ्यूल एफिशिएंसी और कुल ओनरशिप कॉस्ट पर निर्भर करेगा।

उन्होंने आगे कहा, “संक्षेप में कहें तो, Dzire SUV-प्रधान बाजार में एक मजबूत अपवाद की तरह दिखती है, न कि सेडान की संरचनात्मक वापसी के सबूत के तौर पर।”

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RBI के अनुमान को भी पीछे छोड़ सकती है भारत की GDP ग्रोथ, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिए ये बड़े संकेत

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि मार्च में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की ग्रोथ रेट 7% के करीब रह सकती है,जो सेंट्रल बैंक के 6.7% के अनुमान से बेहतर है। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में आई अखबार के आधार पर ब्लूमबर्ग ने बताया कि चेन्नई में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि उनका यह अनुमान अप्रैल-जून तिमाही के मजबूत रहने की उम्मीदों पर आधारित है। इस अवधि के आधिकारिक आंकड़े इस महीने के आखिर में आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान आम तौर पर 6.9% से 8% के बीच है। इसका मतलब है कि पूरे साल की ग्रोथ रेट काफी ज़्यादा,यानी 7% के करीब रह सकती है।

तमाम चुनौतियों के बावजूद कायम रही रफ्तार

इकोनॉमी की तेज रफ्तार से पता चलता है कि कमजोर मॉनसून और एनर्जी की बढ़ी लागत जैसे झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि गुप्ता का रुख हाल ही में काफी सख्त क्यों हो गया है। इस हफ्ते जारी RBI की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला कि गुप्ता ने इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी।

पूनम गुप्ता ने कहा “इन झटकों के बावजूद,आगे के लिए मैं कहूंगी कि 7.5% ग्रोथ तो तय है और हमें इससे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।”

बाहरी खातों को लेकर भी जताया भरोसा 

पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों (external accounts) को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि आगे स्थिति काफी बेहतर होगी। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि पहले घाटे के अनुमान के बावजूद,इस फाइनेंशियल ईयर में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट पॉजिटिव हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह विदेशी मुद्रा में गिरावट को रोकने के उपायों के बाद 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद है। इन उपायों में विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए खास इंसेंटिव भी शामिल हैं।

भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत 

पूनम गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा उम्मीदें जता रहे हैं,क्योंकि ईरान युद्ध के चलते जितने बुरे हालात का डर था,वे सच साबित नहीं हुए। मजबूत ग्रोथ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें कम से कम दो दशकों तक लगातार 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत हो सकती है।

 

 

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