मालदा में गंगा का रौद्र रूप, 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव पानी में डूबे

मालदा में गंगा का रौद्र रूप, 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव पानी में डूबे

shiv mandir malda

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तट कटाव ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। रविवार को रतुआ इलाके में गंगा किनारे स्थित करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया। लगातार हो रहे कटाव के कारण मंदिर पर पहले से ही खतरा मंडरा रहा था, लेकिन इस बार नदी का बहाव इतना तेज रहा कि पूरा मंदिर ढह गया। बाढ़ की वजह से 62 गांव पानी में डूब गए। ALSO READ: बिहार में बाढ़ का भयंकर रूप: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

 

विशेषज्ञों के मुताबिक, बिहार की ओर से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण गंगा का जलस्तर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। अनुमान है कि 9 सितंबर तक जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। इससे मालदा के नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा और बढ़ गया है।

पिछले साल से ही खतरे में था मंदिर

रतुआ के मुनिरामटोला में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर पिछले साल से ही गंगा के कटाव की जद में था। स्थानीय स्तर पर किए गए अस्थायी बचाव कार्यों के कारण मंदिर अब तक टिका हुआ था। हालांकि, नदी का लगातार बदलता रुख और बढ़ता जलस्तर आखिरकार मंदिर पर भारी पड़ गया।

 

स्थानीय शिक्षक आलोक मंडल के मुताबिक, उनके बचपन में गंगा मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर बहती थी। मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के बीच भी काफी लोकप्रिय था। यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार में हजारों लोग पहुंचते थे और बिहार से भी लोग आते थे। शनिवार को नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा कटकर बह गया। इसके बाद रविवार शाम तेज कटाव के चलते गंगा ने पूरे मंदिर को अपने आगोश में ले लिया। ALSO READ: बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

भुटनी द्वीप में हालात बिगड़े

मानिकचक ब्लॉक का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भुटनी द्वीप भीषण बाढ़ की चपेट में है। यहां का एकमात्र स्थानीय अस्पताल पानी भरने के कारण बंद करना पड़ा है। फिलहाल प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था पंचायत कार्यालय से संचालित की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मानिकचक की दो स्कूल इमारतों में स्थानांतरित किया गया है।

 

मानिकचक और रतुआ के अलावा इंग्लिश बाजार क्षेत्र में भी बाढ़ और कटाव का असर दिखाई दे रहा है। खसकोल में नदी के कटाव से जमीन के बड़े हिस्से के साथ आम के कई बागान भी नष्ट हो गए हैं।

 

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार के मंत्री भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीन पंचायतों के कम से कम 62 गांव और एक स्थानीय पुलिस स्टेशन पानी में डूबे हुए हैं।

 

तटबंध टूटने के बाद बढ़ी मुश्किल

भुटनी द्वीप में 2 सितंबर की रात तटबंध टूटने के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। पानी भरने के कारण पूरा द्वीप प्रभावित हो गया और बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2025 में बनाए गए इस तटबंध के टूटने पर स्थानीय विधायक गौर मंडल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने तटबंध के निर्माण की गुणवत्ता पर आरोप लगाते हुए इसकी विफलता के लिए पिछली टीएमसी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

 

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों से पानी निकालने, लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और नदी के बढ़ते कटाव को रोकने की है। आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।