
सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों ने सिर्फ शराब माफिया के नेटवर्क को ही नहीं, बल्कि उस पूरे सरकारी तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है, जिसके जिम्मे अवैध शराब पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी थी। जहरीली शराब पीने से इतनी बडी संख्या में मौतों के बाद अब पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए है। सागर शराब कांड को लेकर राज्य सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कांड से संबंधित अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है। सरकार का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन सवाल यह है कि जब लंबे समय से अवैध शराब बिकने की शिकायत मिल रही थी तो प्रभावी कार्रवाई क्यो्ं नहीं हुई। आबकारी विभाग में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर अवैध शराब का नेटवर्क इतना सक्रिय था तो जिम्मेदार निगरानी तंत्र को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी। जिले में इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब बिकती रही लेकिन कलेक्टर और एसपी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं घटना के 48 घंटे के बाद भी अब तक घटना में किसी बड़े अफसर के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही का सवाल- राज्य स्तर पर आबकारी व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी आबकारी मुख्यालय की है। ऐसे में आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आबकारी आय़ुक्त दीपक सक्सेना की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होने कहा कि आबकारी विभाग की मिलीभगत से जहरीली शराब मध्यप्रदेश की डिस्टलरी में ही बन रही थी। इसके साथ जबलपुर के सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे की मिलीभगत का आरोप भी नेता प्रतिपक्ष ने लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे कुछ घंटों में पहले शराब की बिक्री पर बैन लगाया जाता है और कुछ घंटों के बाद उसको निरस्त कर दिया जाता है।
सवाल यह भी है कि अगर यदि स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के कारोबार को लेकर पहले से शिकायतें तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर हुई तो किस स्तर तक हुई। सागर में फील्ड पर तैनात आबकारी विभाग के अधिकारी क्या इतने बैखोफ थे कि उन्होंने कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई। सवाल यह भी है कि क्या फील्ड में तैनात अधिकारियों की रिपोर्टों की नियमित समीक्षा हुई? क्या संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियान चलाए गए? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच में सामने आना जरूरी है। अब तक हुई जांच में घटना से पहले भी जहरीली शराब के खतरे को लेकर चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है।
एसपी अनुराग सुजानिया पर गंभीर सवाल-सागर शराब कांड के बाद सबसे अधिक सवालों में जिले के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अनुराग सुजानिया 2021 के मुरैना जहरीली शराब कांड के समय भी वहां एसपी थे। मुरैना में शराब कांड में 24 की मौत के बाद उनको एसपी पद से हटा दिया गया था। यहीं कारण है कि अब उनको लेकर सबसे अधिक सवाल उठ रहे है। जिले के एसपी के तौर पर अनुराग सुजानिया की जिम्मेदारी थी कि वह थानों में तैनात जमीनी अमले पर अपनी निगरानी रखते और पुलिस के मुखबिर तंत्र को सटीक रखते तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। वहीं अब पुलिस की जिम्मेदारी के लिहाज से यह जांच का विषय जरूर है कि जिले में अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई कितनी प्रभावी थी।
कलेक्टर प्रतिभा पाल की प्रशासनिक निगरानी कितनी प्रभावी?- सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल घटना के बाद मौके पर पहुंचीं और प्रशासनिक स्तर पर राहत, उपचार तथा जांच की कार्रवाई शुरू हुई। लेकिन अब सवाल घटना के बाद की सक्रियता से ज्यादा घटना से पहले की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। सवाल यह भी है कि क्या जिला प्रशासन के पास अवैध शराब की बिक्री अथवा संदिग्ध शराब कारोबार को लेकर कोई पूर्व सूचना थी, यदि थी, तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं हुआ? क्या संवेदनशील गांवों और शराब बिक्री केंद्रों की नियमित समीक्षा की जा रही थी। वहीं अ्ब इस पूरे मामले में सोमवार रात शराब कांड में बंडा एसडीएम को हटा दिया गया लेकिन क्या इस मामले पर जिले के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
असली गुनाहगार सिर्फ शराब बेचने वाला या पूरा सिस्टम?-सागर कांड का सबसे बड़ा सवाल यही है। जहरीली शराब पीकर लोगों की मौत हुई है तो निश्चित तौर पर उस शराब को बनाने, मिलाने, सप्लाई करने और बेचने वाले आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। लेकिन यदि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह सवाल सरकारी तंत्र से भी पूछा जाना चाहिए। मजिस्ट्रियल जांच में शराब कहां बनी, कहां रखी गई, किसने सप्लाई की और किसने वितरित की, इसके साथ-साथ विभागीय लापरवाही की भी जांच की जा रही है।
डिप्टी सीएम ने दिए कार्रवाई के संकेत- सागर की घटना को लेकर उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने 7 सितंबर को मीडिया से कहा कि सागर जिले के जहरीली शराब सेवन मामले में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया है। ऐसे में जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस मामले से संबंधित किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि शराब घटना के पूरे मामले की जांच जारी है।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्तमान में 30 आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 49-ए के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जबकि 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
मौतों के बाद जागा आबकारी विभाग- सागर शराब कांड के बाद आबकारी विभाग अब पूरे प्रदेश में हरकत में आ गया है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री और परिवहन पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी सहायक आबकारी आयुक्तों और जिला आबकारी अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर लगातार निगरानी, मुखबिर तंत्र सक्रिय करने, अवैध शराब निर्माण स्थलों पर दबिश, संदिग्ध वाहनों की जांच और अवैध परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लाइसेंसी शराब दुकानों और परिसरों में गंभीर अनियमितता मिलने पर भी कार्रवाई होगी।
आयुक्त ने दो टूक कहा है कि अभियान में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों से प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट राज्य स्तरीय उड़नदस्ता को भेजना अनिवार्य किया गया है और विश्वसनीय सूचना पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने या गंभीर मामलों की अनदेखी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी की जाएगी।


