Nominee Naming Common Mistakes: अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए हम बैंक में FD कराते हैं, म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू करते हैं और इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके न रहने पर यह पैसा आपके परिवार को बिना किसी कानूनी अड़चन के आसानी से मिल पाएगा या नहीं?
ज्यादातर लोग खाता खोलते समय किसी का भी नाम नॉमिनी में डाल देते हैं और फिर सालों-साल उसे पलटकर भी नहीं देखते। नॉमिनी चुनने में की गई एक छोटी सी गलती आपके जाने के बाद परिवार के लिए बड़ी कानूनी परेशानी खड़ी कर सकती है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नॉमिनेशन से जुड़ी कौन-कौन सी आम गलतियां हैं, जिन्हें आपको तुरंत सुधार लेना चाहिए।
1. नॉमिनी बना दिया और भूल गए
लोग अक्सर जवानी या शादी से पहले बैंक अकाउंट या जॉब शुरू करते वक्त किसी को भी (जैसे- माता-पिता) नॉमिनी बना देते हैं और सालों तक उसमें कोई बदलाव नहीं करते।
क्या होती है दिक्कत? शादी होना, बच्चे का जन्म, तलाक या परिवार में किसी की मृत्यु होने जैसे बड़े जीवन चक्र के बाद पुराने नॉमिनेशन बेमतलब या गलत साबित हो सकते हैं।
समाधान: अपने सभी बैंक अकाउंट्स, एफडी, म्यूचुअल फंड्स, डीमैट होल्डिंग्स, इंश्योरेंस पॉलिसी और ईपीएफ (EPF) अकाउंट की एक लिस्ट बनाएं और चेक करें कि हर जगह नॉमिनी का नाम, रिश्ता और जन्मतिथि आज के रिकॉर्ड के हिसाब से सही है या नहीं।
2. एक जगह नॉमिनी बनाया तो समझ लिया सब जगह हो गया
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर बैंक अकाउंट में वाइफ या हसबैंड को नॉमिनी बना दिया है, तो म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या पीएफ का पैसा भी उन्हें खुद ही मिल जाएगा। यह पूरी तरह गलत धारणा है।
अलग नियम: हर वित्तीय संस्थान और प्रोडक्ट की अपनी अलग नॉमिनेशन प्रक्रिया होती है।
म्यूचुअल फंड और डीमैट का नियम: सेबी के नियमों के अनुसार, डीमैट और म्यूचुअल फंड फोलियो में आप अधिकतम 3 नॉमिनी चुन सकते हैं और किस नॉमिनी को कितने प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, यह भी तय कर सकते हैं।
3. सबसे बड़ी गलतफहमी: ‘नॉमिनी ही पैसे का असली मालिक होता है’
यह वित्तीय दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम है। कानूनन नॉमिनी पैसे का मालिक नहीं, बल्कि सिर्फ एक ट्रस्टी (Trustee/देखभाल करने वाला) होता है।
आरबीआई (RBI) का नियम: बैंक नॉमिनी को पैसा सौंपकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। लेकिन नॉमिनी को वह पैसा मृतक के असली कानूनी वारिस को सौंपना होता है।
सलाह: किसी भी विवाद से बचने के लिए नॉमिनेशन के साथ-साथ एक स्पष्ट ‘वसीयत’ (Will) जरूर तैयार रखें।
4. नाबालिग को नॉमिनी बनाते वक्त गार्जियन न चुनना
माता-पिता अक्सर अपने छोटे बच्चे (18 साल से कम उम्र) को नॉमिनी तो बना देते हैं, लेकिन यह तय करना भूल जाते हैं कि बच्चे के बालिग होने तक उस पैसे की देखभाल कौन करेगा।
गार्जियन जरूरी: इंश्योरेंस एक्ट और वित्तीय नियमों के मुताबिक, अगर नॉमिनी नाबालिग है, तो आपको किसी भरोसेमंद वयस्क (गार्जियन) का नाम भी देना अनिवार्य है, जो बच्चे के 18 साल का होने तक उसके बिहाफ पर पैसे की देखरेख कर सके।
5. परिवार को खातों की जानकारी न देना
आपने हर जगह नॉमिनी अपडेट कर दिया, लेकिन अगर आपके परिवार को यह पता ही नहीं है कि आपके किस-किस बैंक में खाते हैं या कहां-कहां पॉलिसी चल रही है, तो उस नॉमिनेशन का कोई फायदा नहीं रह जाता।
डायरी या रिकॉर्ड बनाएं: एक सुरक्षित डायरी या डिजिटल फाइल में अपने सभी बैंकों, इन्वेस्टमेंट, इंश्योरेंस पॉलिसी, ईपीएफ और जरूरी कागजात की लिस्ट बनाकर रखें।
पासवर्ड न शेयर करें: इस लिस्ट में पासवर्ड लिखने की जरूरत नहीं है, बस लाइफ पार्टनर या भरोसेमंद सदस्य को यह पता होना चाहिए कि ये दस्तावेज कहां रखे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या एक से ज्यादा नॉमिनी बनाए जा सकते हैं?
उत्तर: हां, यह प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। सेबी के नियमों के मुताबिक डीमैट खाते और म्यूचुअल फंड में आप 3 तक नॉमिनी जोड़ सकते हैं और उनका प्रतिशत भी तय कर सकते हैं।
Q2: क्या पति-पत्नी को एक-दूसरे को नॉमिनी बनाना चाहिए?
उत्तर: बना सकते हैं, लेकिन यह फैसला परिवार के कानूनी वारिसों, बच्चों के भविष्य और आपकी वसीयत के प्लान को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
Q3: नॉमिनेशन की जांच कितनी बार करनी चाहिए?
उत्तर: साल में कम से कम एक बार या फिर जीवन में कोई बड़ा बदलाव (जैसे शादी, बच्चे का जन्म या किसी की मृत्यु) होने पर तुरंत जांच और अपडेट करना चाहिए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Nominee Common Mistakes
नॉमिनी चुनने में न करें ये 5 गलतियां! जानें बैंक, SIP और इंश्योरेंस के जरूरी नियम
फाइनेंशियल अकाउंट्स में सही नॉमिनी चुनना आपके जाने के बाद परिवार की वित्तीय सुरक्षा तय करता है। अक्सर लोग शादी या बच्चों के जन्म के बाद नॉमिनी की डिटेल अपडेट करना भूल जाते हैं, जिससे बाद में कानूनी अड़चनें खड़ी हो जाती हैं। जानिए बैंक, डीमैट और ईपीएफ में नॉमिनी चुनते वक्त किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए

