
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अब ये जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा, ट्रक कहा जाएंगे, उनका क्या होगा? उन्होंने कहा कि झूठ की गूंज से भरमाने वाले हर चौराहे पर मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत का युवा सच की हुंकार के लिए चलता है। ALSO READ: दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या पर सियासी बवाल, राहुल से कोनराड संगमा तक दिग्गजों ने पूछा सवाल
पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इस विकास पर्व में आप सभी ने जिस सेवाभाव से पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वडोदरा के हर एक नागरिक को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उनकी सराहना करता हूं।
250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान वडोदरा आया
पीएम मोदी ने कहा कि ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT पोर्ट मुंबई से वडोदरा तक डबल स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का संचालन किया गया है। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वडोदरा चला आया। अब ये जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा, ट्रक कहा जाएंगे, उनका क्या होगा? ALSO READ: बिहार में बाढ़ का भयंकर रूप: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
वडोदरा गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर
उन्होंने कहा कि इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्त धारा का आह्वान किया है। इस सप्त धारा में एक धारा गति शक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वडोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2,800 किमी से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।
देश में काम करने की संस्कृति बदली
ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। 2006 में इस काम को करने के लिए एक विशेष कंपनी बनाई गई और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रही। दुर्भाग्य देखिए कि इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ। फाइलें अटकती थी, लटकती थी, भटकती थी।
2014 के बाद जब आपके आशीर्वाद से मैं दिल्ली पहुंचा और वहां पहुंचते ही हमने इसको गति देने का प्रारंभ कर दिया। 2,800 किमी के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया है। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है। यह कॉरिडोर तेजी से विकास कर रहे देश की लाइफलाइन है।


