नेपाल अगस्त में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ जैसी तबाही रोकने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए चार ग्लेशियरों से बनने वाली झीलों का जलस्तर घटाया जाएगा। इससे नेपाल के साथ भारत में भी बाढ़ का खतरा कम होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट पर 474 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसे 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन झीलों से बिहार में बाढ़ का खतरा बना रहता है नेपाल सरकार ने इस काम के लिए मनांग जिले की थुलागी, संखुवासभा की लोअर वरुण और होंगु-2 के साथ सोलुखुम्बु की लुम्दिंग झील को चुना है। ये झीलें समुद्र तल से 4050 से 5483 मीटर की ऊंचाई पर हैं। योजना के तहत होंगु-2 झील का जलस्तर एक मीटर घटाया जाएगा। वहीं, थुलागी, लोअर वरुण और लुम्दिंग झीलों का जलस्तर तीन-तीन मीटर कम किया जाएगा। इनमें से तीन झीलों का पानी कोशी नदी और गंडकी नदी में पहुंचता है। ये दोनों नदियां बिहार से होकर गुजरती हैं। इसलिए इस योजना से बिहार की बस्तियों, खेती और सड़कों समेत जरूरी सुविधाओं को भी बाढ़ से बचाने में मदद मिल सकती है। झीलों का जलस्तर कैसे कम किया जाएगा? डॉ. भट्टराई के मुताबिक, लगातार काम करने का मौका मिले तो तीन साल में झीलों का जलस्तर घटाया जा सकता है। लेकिन ये झीलें ऊंचाई वाले इलाकों में हैं, जहां खराब मौसम के कारण साल में केवल 5 से 6 महीने ही काम हो सकता है। इसी वजह से प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2033 तक का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। हालांकि, इन चार झीलों के फटने पर सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी गई है। भारत, नेपाल और चीन की 47 झीलों से खतरा अगस्त में नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर से बनी झीलों से होने वाले खतरे को फिर सामने ला दिया था। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत, नेपाल और चीन की 47 हिमनद झीलों को ज्यादा खतरे वाला बताया गया था। इनमें नेपाल की 21, चीन की 25 और भारत की एक झील शामिल है। इनमें से 42 झीलों का पानी कोशी नदी में पहुंचता है। इनमें 24 झीलें चीन और 18 नेपाल में हैं। कोशी नदी नेपाल से भारत के बिहार में आती है, इसलिए इन झीलों के फटने से दोनों देशों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए ग्रीन क्लाइमेट फंड ₹343 करोड़ देगा चारों झीलों का जलस्तर घटाने की परियोजना पर कुल 474 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें सबसे ज्यादा 343 करोड़ रुपए ग्रीन क्लाइमेट फंड देगा। यह संयुक्त राष्ट्र के जलवायु समझौते के तहत बना अंतरराष्ट्रीय कोष है। नेपाल सरकार 107 करोड़ और UNDP 20 करोड़ रुपए देगा। इसके अलावा निजी क्षेत्र से भी 3 करोड़ रुपए मिलेंगे। इस प्रोजेक्ट से नेपाल में 38 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिलने का अनुमान है। इससे बाढ़ के कारण होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान में भी 212 करोड़ रुपए तक की कमी आ सकती है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़: कई पुल-घर बहे, 10 लापता; लैंडस्लाइड से स्यारी नदी का रास्ता बंद, बिहार में भी खतरा नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में करीब 35 घर और 6 पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…
बिहार में बाढ़ की स्थिति ने कई इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों और आसपास के इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों को रोज की जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे समय में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इसी बीच शिक्षक और यूट्यूबर खान सर भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच दिखाई दे रहे है।
खान सर बिहार के जाने-माने शिक्षक और यूट्यूबर हैं, जो आसान और बोलचाल की भाषा में पढ़ाने के अपने तरीके के लिए काफी पॉपुलर हैं। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। पटना में उनका कोचिंग संस्थान भी है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं।
नाव से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे खान सर
खान सर बाढ़ प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए नाव से सफर कर रहे है। बताया जा रहा है कि राहत से जुड़े कामों के दौरान टीम के साथ कांटेक्ट बनाए रखने के लिए वॉकी-टॉकी का भी इस्तेमाल किया गया। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की गई। बाढ़ की वजह से कई जगह रास्ते बंद हैं, इसलिए लोगों तक पहुंचने के लिए नाव की मदद ली जा रही है।
खान सर के काम से प्रभावित हुई जनता
खान सर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो देखकर कुछ यूजर्स ने कहा कि मुश्किल समय में लोगों के बीच पहुंचकर मदद करना अच्छी बात है। वहीं कुछ लोगों ने राहत के कामों को सोशल मीडिया पर दिखाने को लेकर सवाल भी उठाए। कुछ यूजर्स का कहना था कि ऐसे समय में पूरा ध्यान जरूरतमंद लोगों की मदद पर होना चाहिए।
मदद के प्रयास की कई लोगों ने की तारीफ
कई लोगों ने खान सर के इस प्रयास की तारीफ भी की। कुछ यूजर्स ने कहा कि वह सिर्फ एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों की मदद करने की कोशिश भी कर रहे हैं। कमेंट्स में उनके शिक्षा से जुड़े काम और जरूरतमंद बच्चों की मदद का भी जिक्र किया गया। लोगों का कहना था कि कोई अपने लेवल पर दूसरों की मदद कर रहा है, तो उसकी इस कोशिश को भी सराहना चाहिए।
बिहार में बाढ़ से कई इलाकों के लोग परेशान हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक करीब 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया समेत कई जिले प्रभावित हैं। इन इलाकों में लोगों तक खाना, पानी और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के साथ उन्हें सुरक्षित जगहों पर ले जाने का काम किया जा रहा है।
बाढ़ जैसे मुश्किल समय में सबसे जरूरी है कि लोगों को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें खाना, पानी व दूसरी जरूरी चीजें मिलती रहें। अगर हर कोई अपनी क्षमता के हिसाब से थोड़ा-सा भी मदद का हाथ बढ़ाए, तो जरूरतमंद लोगों के लिए काफी सहारा बन सकता है। छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तट कटाव ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। रविवार को रतुआ इलाके में गंगा किनारे स्थित करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया। लगातार हो रहे कटाव के कारण मंदिर पर पहले से ही खतरा मंडरा रहा था, लेकिन इस बार नदी का बहाव इतना तेज रहा कि पूरा मंदिर ढह गया। बाढ़ की वजह से 62 गांव पानी में डूब गए। ALSO READ: बिहार में बाढ़ का भयंकर रूप: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
विशेषज्ञों के मुताबिक, बिहार की ओर से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण गंगा का जलस्तर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। अनुमान है कि 9 सितंबर तक जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। इससे मालदा के नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा और बढ़ गया है।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ क्षेत्र में गंगा के भीषण कटाव से 150 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर नदी में समा गया।
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच फरक्का से करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं।#westbengal #shivtemple #ganga pic.twitter.com/ERhwaMWDwA— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) September 8, 2026
पिछले साल से ही खतरे में था मंदिर
रतुआ के मुनिरामटोला में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर पिछले साल से ही गंगा के कटाव की जद में था। स्थानीय स्तर पर किए गए अस्थायी बचाव कार्यों के कारण मंदिर अब तक टिका हुआ था। हालांकि, नदी का लगातार बदलता रुख और बढ़ता जलस्तर आखिरकार मंदिर पर भारी पड़ गया।
स्थानीय शिक्षक आलोक मंडल के मुताबिक, उनके बचपन में गंगा मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर बहती थी। मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के बीच भी काफी लोकप्रिय था। यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार में हजारों लोग पहुंचते थे और बिहार से भी लोग आते थे। शनिवार को नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा कटकर बह गया। इसके बाद रविवार शाम तेज कटाव के चलते गंगा ने पूरे मंदिर को अपने आगोश में ले लिया। ALSO READ: बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे
भुटनी द्वीप में हालात बिगड़े
मानिकचक ब्लॉक का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भुटनी द्वीप भीषण बाढ़ की चपेट में है। यहां का एकमात्र स्थानीय अस्पताल पानी भरने के कारण बंद करना पड़ा है। फिलहाल प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था पंचायत कार्यालय से संचालित की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मानिकचक की दो स्कूल इमारतों में स्थानांतरित किया गया है।
मानिकचक और रतुआ के अलावा इंग्लिश बाजार क्षेत्र में भी बाढ़ और कटाव का असर दिखाई दे रहा है। खसकोल में नदी के कटाव से जमीन के बड़े हिस्से के साथ आम के कई बागान भी नष्ट हो गए हैं।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार के मंत्री भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीन पंचायतों के कम से कम 62 गांव और एक स्थानीय पुलिस स्टेशन पानी में डूबे हुए हैं।
तटबंध टूटने के बाद बढ़ी मुश्किल
भुटनी द्वीप में 2 सितंबर की रात तटबंध टूटने के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। पानी भरने के कारण पूरा द्वीप प्रभावित हो गया और बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2025 में बनाए गए इस तटबंध के टूटने पर स्थानीय विधायक गौर मंडल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने तटबंध के निर्माण की गुणवत्ता पर आरोप लगाते हुए इसकी विफलता के लिए पिछली टीएमसी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों से पानी निकालने, लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और नदी के बढ़ते कटाव को रोकने की है। आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

बिहार में मानसून की सक्रियता और नदियों के उफान ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ से भीषण तबाही मची हुई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, इन जिलों के 70 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 368 ग्राम पंचायतों की करीब 22.42 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है। ALSO READ: बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता मिले, फसल और मकान क्षति का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दें : योगी आदित्यनाथ
खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, राज्य की प्रमुख नदियां—गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा—विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते गांधीघाट, पंडारक, दानापुर और बांका घाट जैसे इलाकों में गंगा उफान पर है।
इन 12 जिलों में सबसे बुरे हालात
बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रमुख 12 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल शामिल हैं। भागलपुर में एनएच-80 पर लगभग 2 फीट पानी बहने के कारण भागलपुर-अकबरनगर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। मुंगेर में महाने नदी के उफान से टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा गांव के पास सड़क का डायवर्जन बह गया है, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया है। ALSO READ: चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक
हादसों में 5 लोगों की मौत
बाढ़ के पानी के बीच हुए हादसों और डूबने से जनहानि की भी खबर है। सारण जिले में एक महिला समेत दो लोगों की, वैशाली जिले में दो लोगों की और खगड़िया सदर प्रखंड के रहीमपुर में एक बच्चे की बाढ़ के पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई है।
राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी
स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए कुल 1,429 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, राहत शिविरों और 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से लगभग 2.5 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी
आपदा की इस मार के बीच बिहार मौसम सेवा केंद्र ने चिंता और बढ़ा दी है। केंद्र के मुताबिक, अगले दो दिनों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ खास इलाकों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में और अधिक वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।
Flood News: बिहार में शुक्रवार को भी हाई अलर्ट जारी रहा क्योंकि नेपाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई भारी बारिश के बाद गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और बचाव, राहत और तटबंधों की सुरक्षा के इंतजामों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं, पटना में दीघा घाट, गांधी घाट, हथिदह और मनेर के अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।
खतरे के निशान पर गंगा नदी
गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 1 सितंबर की सुबह 49.40 मीटर था, जो 2 सितंबर की शाम बढ़कर 49.98 मीटर और 3 सितंबर की सुबह 50.18 मीटर हो गया। गुरुवार दोपहर तक जलस्तर 50.25 मीटर पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से करीब 1.65 मीटर ऊपर है। विभाग ने अनुमान जताया था कि गुरुवार रात गांधी घाट पर गंगा का पानी सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर सकता है। वहीं, मोकामा के हथिदह में शुक्रवार दोपहर तक यह स्तर पार होने की आशंका जताई गई थी।
News 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ जैसे हालात ने पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, भोजपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के निचले इलाकों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, आठ जिलों – भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद – को हाई अलर्ट पर रखा गया है और अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को चेतावनी देने का निर्देश दिया गया है।
मुंगेर में, गंगा का जलस्तर 39.33 मीटर के चेतावनी स्तर को पार करते हुए 39.36 मीटर (खतरे का निशान) तक पहुंच गया, जिससे सात पंचायतें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुस गया। News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.95 मीटर ऊपर पहुंचने के बाद 15 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया।
अरवल में पुनपुन नदी के बढ़ने से 30 गांव डूबे
अरवल में भी हालात गंभीर बताए गए, जहां पुनपुन नदी के पानी से कुर्था और बंसी ब्लॉक के लगभग 30 गांव डूब गए, जिससे सड़क संपर्क टूट गया और बंसी पुलिस स्टेशन में भी पानी भर गया। सारण में सोनपुर, छपरा सदर, दिघा और रेवेलगंज को संवेदनशील इलाकों के तौर पर चिह्नित किया गया।
अमर उजाला के अनुसार, बेगूसराय के मटिहानी ब्लॉक में बाढ़ का पानी 17 सरकारी स्कूलों तक पहुंच गया, जबकि गया के मानपुर ब्लॉक में पेमार नदी के पानी ने अमरी और बरसाना गांवों तक जाने वाली सड़क को डुबो दिया।
प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और मेडिकल की सुविधाएं की गई
वहीं, अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं, पीने का पानी, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था की है। बचाव कार्य के लिए SDRF और NDRF की टीमें, गोताखोर और नावें तैनात की गई हैं। विस्थापित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई भी शुरू की जा रही हैं।
सोनपुर में 25 नावें चल रही हैं। इसके अलावा वहां 1,000 पॉलीथिन शीट भेजी गई हैं, जबकि 500 पॉलीथिन शीट दीघा भेजी गई हैं।
पटना में 108 जगहों को सील किया गया
पटना में, शहर की सुरक्षा दीवार के पास 108 जगहों को सील किया गया, 13 स्लुइस-गेट के लीकेज को ठीक किया गया और पंपिंग स्टेशनों को तैयार रखा गया। पुनपुन नदी पर बना एक रिंग तटबंध भी टूट गया, जिससे मुख्य बांध को खतरा पैदा हो गया।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सलाह दी कि वे नदियों, घाटों, तटबंधों और पानी से भरे इलाकों में बेवजह न जाएं। साथ ही, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को ऐसी जगहों से दूर रखने की अपील की। विभाग ने नदियों के पास तैरने, बेवजह नाव की सवारी करने और सेल्फी लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी।
तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर साधा निशाना
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर बाढ़ से निपटने की अपर्याप्त तैयारी और राहत कार्यों में कमी का आरोप लगाया और कहा कि 15 से ज्यादा जिले प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कटाव और बाढ़ से मक्का और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं, जबकि बिजली कटौती, पीने के पानी की कमी और कनेक्टिविटी बाधित होने से ग्रामीणों को जरूरी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने दियारा इलाकों को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की भी मांग की।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा से लौटने के बाद चौधरी के साथ हालात का जायजा लिया और केंद्र व बिहार सरकार “युद्ध स्तर पर” काम कर रही हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में और बारिश व गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन इलाकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं, गुरुवार को देश के करीब 20 राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर चेतावनी जारी की गई थी।
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