पंजाब के कपूरथला से पाकिस्तान गई सरबजीत कौर के मुस्लिम पति नासिर हुसैन को लाहौर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस नासिर की पहली पत्नी सायमा हुसैन की याचिका पर जारी हुआ है। कोर्ट ने नासिर को 16 सितंबर को पेश होने के लिए कहा है। सायमा हुसैन ने वकील अली चंगेजी संधू के जरिए याचिका दायर की है। इसमें नासिर पर पहली पत्नी की अनुमति के बिना दूसरी शादी करने का आरोप लगाया गया है। जिसमें सायमा हुसैन और उसके भाई मुहम्मद नदीम ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए हैं। सायमा ने आरोप लगाया कि सरबजीत ने नासिर के साथ मिलकर उसके घर पर कब्जा कर लिया और उन्हें चार बच्चों के साथ घर से बाहर कर दिया। सायमा ने बच्चों के गुजारा भत्ते और रहने की व्यवस्था की मांग की है। वकील अली चंगेजी संधू सायमा हुसैन के अलावा सरबजीत कौर के भारतीय पति करनैल सिंह और पाकिस्तान के पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री महेंद्र पाल सिंह की ओर से भी पैरवी कर रहे हैं। सरबजीत कौर को पाकिस्तान से निर्वासित किए जाने से जुड़ी याचिका भी लाहौर हाईकोर्ट में लंबित है। याचिका में सायमा ने ये बातें कही…4 पॉइंट दूसरी शादी के लिए पहली पत्नी की अनुमति जरूरी वकील अली चंगेजी संधू के मुताबिक, पाकिस्तान के मुस्लिम फैमिली लॉज ऑर्डिनेंस 1961 की धारा 6 के तहत दूसरी शादी के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। इसके लिए आर्बिट्रेशन काउंसिल से अनुमति लेने के साथ पहली पत्नी की अनुमति भी जरूरी है। बिना जरूरी अनुमति दूसरी शादी करने पर एक साल तक की सजा और 5 लाख पाकिस्तानी रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। ********** सरबजीत कौर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… पाक गई पंजाबी महिला बोली- ब्लैकमेल कर निकाह किया:वकील से रोते हुए कहा- नासिर पर कार्रवाई कराना चाहती हूं, मुझे भारत भिजवा दो PAK गई पंजाबी महिला बोली- असीं लाहौरिए हां:इंडिया में हमारी 20 किले जमीन, पाकिस्तान में नंबरदार रहे; मुस्लिम से निकाह कर चुकी PAK गई पंजाबी महिला बोली- मेरा 8 साल पुराना प्यार:मुंह में दांत न रहते तो भी जरूर पाकिस्तान आती; मुस्लिम से निकाह रचाकर खुश हूं पाकिस्तान में निकाह करने वाली सरबजीत कौर की बढ़ी मुश्किलें:लाहौर हाईकोर्ट में याचिका- इसे गिरफ्तार करो, भारत वापस भेजो; सुरक्षा के लिए खतरा पाकिस्तान गई पंजाबी महिला का निकला क्रिमिनल रिकॉर्ड:वेश्यावृत्ति की भी FIR; हिसार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का इंटरव्यू करने वाले ने वेलकम किया

Building collapse deaths in India: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को हुई दर्दनाक दुर्घटना में पांच मंज़िला इमारत ढहने से सोमवार सुबह तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जाती है।
सत्य निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान इसलिए खींचती हैं क्योंकि ये छात्रों और युवाओं के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़ी होती हैं। लेकिन इसके इतर दर्जनों ऐसी छिटपुट घटनाएं हैं जो मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दर्जनों और देश भर में सैकड़ों बेकसूरों की जान ले लेती हैं और सुर्खियों से गायब रह जाती हैं।

दिल्ली : आबादी के अनुपात में मौतों की गंभीर स्थिति
2024 में मौतों की कुल संख्या (42) के आधार पर दिल्ली देश में 12वें स्थान पर थी, लेकिन जब इन मौतों का विश्लेषण प्रति दस लाख (Per Million) आबादी के अनुपात में किया जाता है, तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है:
- 2022, 2023 और 2024 तीनों वर्षों में प्रति 10 लाख आबादी पर इमारतें ढहने से हुई मौतों के मामले में दिल्ली देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बनी रही।
- 2025-2026 की स्थिति : यद्यपि 2025 की आधिकारिक ADSI रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के संकलन के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक 20 से अधिक घटनाओं में कम से कम 70 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया : तात्कालिक हड़बड़ी बनाम ढांचागत सुधार
सत्य निकेतन की घटना के बाद हमेशा की तरह जन-आक्रोश भड़कने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि वह 5-मंज़िला या उससे ऊपर की सभी अवैध इमारतों को “तत्काल सील” करेगा।
क्यों विफल होता है सिस्ट्म?
- रिएक्टिव बनाम प्रोएक्टिव : नगर निकाय हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। नियमित ऑडिट और भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी का अभाव रहता है।
- सस्ते आवास की भारी मांग : दिल्ली जैसे बड़े शहरों में छात्रों और प्रवासियों की आमद लगातार बढ़ रही है। सस्ते आवास (Affordable Housing) की मांग के चलते अवैध और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
- सिर्फ सीलिंग समाधान नहीं : अचानक इमारतों को सील करने से किराएदार बेघर हो जाते हैं, लेकिन निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर-प्रशासनिक साठगांठ पर स्थायी लगाम नहीं लग पाती।
- स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और निगरानी का अभाव: स्थानीय जूनियर इंजीनियरों (JE) और पुलिस की मिलीभगत से अवैध निर्माण बिना रुकावट जारी रहता है। हादसे के बाद सीलिंग ड्राइव (Sealing Drive) चलाई जाती है, जो कि केवल एक रिएक्टिव (प्रतिक्रियात्मक) कदम है, प्रोएक्टिव नहीं।
- अपीलीय प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें : निगम द्वारा धारा 343/344 के तहत नोटिस जारी करने के बाद, मामला Appellate Tribunal for MCD (ATMCD) या अदालतों में चला जाता है, जहाँ स्टे (Stay Order) मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही वर्षों तक लटकी रहती है।
ऐसे हादसों को कैसे रोकें : सुधार हेतु आवश्यक कदम (Way Forward)
- स्ट्रक्चरल ऑडिट का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण : 15 वर्ष से पुरानी या 3 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों के लिए हर 5 साल में थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) अनिवार्य किया जाए और उसका डेटा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
- अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability) : यदि किसी इलाके में अवैध निर्माण के दौरान हादसा होता है, तो केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संबंधित नगर निगम इंजीनियर और बीट कांस्टेबल को भी कानूनी रूप से सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
- सस्ते और सुरक्षित छात्र आवास का नियमन : सरकार को निजी PG और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक पारदर्शी और सख्त नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सस्ते आवास उपलब्ध कराए जा सकें।
हाल ही में हुआ सत्य निकेतन हादसा और देश भर में 5 वर्षों में हुई लगभग 8,000 मौतें यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि भारत में शहरी विकास का ढाँचा और भवन सुरक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है।
भारत में शहरी आवास सुरक्षा नियम, दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज (Unified Building Bye-Laws) और अवैध निर्माण पर लागू वैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण:

MCD के मुख्य बिल्डिंग बाय-लॉज और सुरक्षा मानक
MCD के नियमों के अनुसार किसी भी इमारत के निर्माण से लेकर उसके उपयोग तक निम्नलिखित कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है:
(A) फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई की सीमा
- भूखंड (Plot Size) के आकार के आधार पर यह तय होता है कि उस पर कितना निर्माण हो सकता है।
- रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें (जैसे 3 मंजिल के ऊपर 4था या 5वां फ्लोर बनाना) बिना FAR और स्ट्रक्चरल परमिशन के पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं।
(B) स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट (Structural Safety Certificate)
- किसी भी इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Structural Engineer) से यह प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है कि इमारत भूकंप, हवा के दबाव और वजन को सहने में सक्षम है।
- ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) / कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) : निर्माण पूरा होने के बाद MCD इंस्पेक्टर और इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं। इसके बिना इमारत में किसी को रहने या किराए (PG) पर देने की अनुमति नहीं होती।
(C) यूसेज परिवर्तन (Commercial vs Residential)
- आवासीय परिसरों (Residential Plots) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे बिना अनुमति के पेइंग गेस्ट (PG), व्यावसायिक हॉस्टल या कोचिंग सेंटर चलाने के लिए करना बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।

- धारा 343 (DMC Act, 1957) – ध्वस्तीकरण का आदेश (Order of Demolition) : यदि कोई निर्माण बिना पास नक्शे के या पास नक्शे का उल्लंघन करके किया गया है, तो निगम नोटिस जारी कर निर्माण को गिराने (Demolish) का आदेश दे सकता है।
- धारा 344 – काम रोकने और सील करने की शक्ति (Stop Work / Sealing Notice) : निगम अधिकारियों को अधिकार है कि वे निर्माणाधीन अवैध इमारत पर 'स्टॉप वर्क' का नोटिस दें या पुलिस बल की मदद से साइट को तुरंत सील कर दें।
- धारा 348 – खतरनाक इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण (Unsafe Buildings): यदि कोई पुरानी इमारत जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) स्थिति में है और गिरने के कगार पर है, तो निगम मकान मालिक को नोटिस जारी कर उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला : हादसे की स्थिति में मकान मालिक, बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर BNS धारा 106 (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से हुई मौत – पूर्व में IPC धारा 304A) और धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है।

दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में 7 लोगों की मौत के मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए हरिराम बंसल को गिरफ्तार किया है। दिल्ली सरकार ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए एमसीडी के 5 अधिकारियों को सस्पैंड किया है। ALSO READ: LIVE: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 7 की मौत, बिल्डिंग मालिक पर FIR
'हॉस्टल डेज' नाम की यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी के तौर पर चल रही थी। और घटना के समय वहां कई छात्र रह रहे थे। बिल्डिंग के गिरने से आसपास की कई इमारतें भी कमजोर हो गई है।
बिल्डिंग का मालिक था हरिराम
हरिराम बंसल सत्य निकेतन की 30 साल पुरानी उस बिल्डिंग का मालिक है, जो रविवार को गिर गई थी। हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने हरिराम बंसल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 290 (इमारतों को गिराने, मरम्मत करने या बनाने में लापरवाही) और 125-A (दूसरों की जान या निजी सुरक्षा को खतरे में डालने वाले काम) के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR के बाद उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। ALSO READ: गृहमंत्री शाह ने ली दिल्ली इमारत हादसे की जानकारी, 5 लोगों की हुई मौत, अब तक 11 का हुआ रेस्क्यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज
कैसे हुई हरिराम की गिरफ्तारी?
हरिराम को पकड़ने के लिए 10 टीमें तीन राज्यों में छापेमारी कर रही थी। इन टीमों में लोकल डिस्ट्रिक्ट पुलिस, स्पेशल स्टाफ और दूसरी ऑपरेशनल यूनिट्स के जवान शामिल थे। हर टीम की अगुवाई एडिशनल DCP रैंक के एक अफसर कर रहे थे। इस टीमों ने हरिराम की तलाश में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी छापेमारी की। बंसल का गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित मकान पर ताला लगा था तो उसकी हार्डवेयर की दुकान भी बंद थी।

Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही 30 साल पुरानी 5 मंजिला इमारत रविवार को भरभरा कर ढह गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई। पल पल की जानकारी…
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से हड़कंप। मृतक संख्या बढ़कर 6 हुई। राहत और बचाव कार्य जारी। बिल्डिंग मालिक पर FIR दर्ज।दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से घायल हुए 10 लोगों को JPN एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS) लाया गया। इन 10 मरीजों में से 5 को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि गंभीर हालत वाले एक मरीज की बाद में मौत हो गई; तीन मरीजों को भर्ती किया गया है और उनका इलाज चल रहा है। एक मरीज के अंग की सर्जरी की गई। एक मरीज को मामूली चोट आई थी और निगरानी के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया है।
इमारत गिरने की घटना सत्य है और इसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रविवार शाम तक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 5 हो गई। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में जल्द FIR दर्ज की जाएगी।

Delhi building collapse case : दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है।
राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।
गृहमंत्री अमित शाह ने ली हादसे की जानकारी
हादसे की जानकारी मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गोवा का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। गृहमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के ढहने से बहुत दुख हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और NDRF के डायरेक्टर जनरल से बात की और जमीनी हालात का जायजा लिया। स्थानीय प्रशासन और NDRF मिलकर तेजी से बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को हर जरूरी मेडिकल मदद दी जा रही है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे समन्वय बनाए रखें और बचाव कार्य को तेज करें। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। राहत-बचाव अभियान चल रहा है और टीमें जमीन पर आवश्यक सहायता मुहैया करा रही हैं।
दिल्ली फायर सर्विसेज को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, जिसके बाद तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घटना के संबंध में करीब 1:34 बजे साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को PCR कॉल भी मिली। कॉल में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत के गिरने की जानकारी दी गई थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मौके पर आठ फायर टेंडर तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।
इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।
पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”
उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”
इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।
क्या है पूरा मामला?
21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।
हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।
उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”
भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।
भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”
उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”
विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी
उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।
उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”
यह भी पढ़ें: विजयानंद ट्रैवल्स ने वोल्वो को दिया अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर, बेड़े में शामिल होंगी 150 नई बस
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।
इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।
पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”
उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”
इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।
क्या है पूरा मामला?
21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।
हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।
उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”
भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।
भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”
उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”
विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी
उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।
उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”
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Samay Raina: समय रैना ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ के हालिया एपिसोड में वरुण धवन का मजाक उड़ाया और उन पर ‘बॉर्डर 2’ को बर्बाद करने का आरोप लगाया। यह सब तब शुरू हुआ जब एक कंटेस्टेंट ने जजों से 1 से 5 के बीच कोई नंबर चुनने को कहा। वरुण ने 1 चुना और कहा, “मुझे 1 पसंद है।”
समय ने एक्टर की बात बीच में काटी और उन पर तंज कसते हुए कहा, “फिर तुमने ‘बॉर्डर 2’ क्यों खराब की?” वरुण जोर-जोर से हंस पड़े, लेकिन उन्होंने फिल्म का बचाव किया और बताया कि फिल्म ने पैसे कमाए थे। उन्होंने कहा, “यार, वो फिल्म चली थी।” इसके बाद, समय ने वरुण से उनकी पिछली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का नाम बताने को कहा। स्टैंड-अप कॉमेडियन ने फिल्म के नाम को एक मजेदार मोड़ देते हुए कहा, “है पापा डायरेक्टर तो एक्टर तो होना ही है।”
‘बॉर्डर 2’ के बारे में
अनुराग सिंह द्वारा निर्देशित ‘बॉर्डर 2’ 23 जनवरी, 2026 को रिलीज हुई। फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, अहान शेट्टी और दिलजीत दोसांझ हैं और यह 1997 की वॉर क्लासिक फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है। फिल्म को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता ने प्रोड्यूस किया है और इसे गुलशन कुमार और टी-सीरीज ने जेपी फिल्म्स के साथ मिलकर पेश किया है। फिल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले और बॉक्स ऑफिस पर इसने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया। इसका लाइफटाइम कलेक्शन लगभग 465 करोड़ रुपये रहा।
वरुण धवन के IGL में आने पर समय का मजाक
शो के दौरान, समय रैना ने वरुण धवन पर एक और तंज कसा और याद दिलाया कि कैसे पिछले साल के विवाद के बाद आलिया भट्ट भी उनके शो में आई थीं। उन्होंने कहा, “FIR के बाद मुझे इतने बड़े स्टार्स मिले हैं – आलिया भट्ट और अब वरुण धवन, शो का स्तर गिरता जा रहा है।”
शेरोन वर्मा ने भी वरुण के पिछले एक बयान पर मजाक किया। उन्होंने कहा, “मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं वरुण। मेरा पसंदीदा परफॉर्मेंस वो है जब आपने कहा था कि ‘दिलवाले’ फिल्म ‘इंसेप्शन’ जैसी है।” हालांकि, वरुण ने साफ किया कि उन्होंने यह बात मजाक में कही थी। इन सबके बीत बता दें कि राखी सावंत ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ के आने वाले एपिसोड में जजों के पैनल में शामिल होंगी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे।
क्या था पूरा मामला
खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।
“Hum fir lath uthayenge”
He doesn’t regret what he did and proudly owns it as a badge.
If he is not arrested within the given 72-hour deadline, it will raise serious questions about the integrity of the Delhi Police and its commitment to upholding the law. pic.twitter.com/qYJrOSUvTu
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 4, 2026
दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा
विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
CJP’s team is at Parliament Street Police Station.
We will ensure justice prevails. pic.twitter.com/3Kl8ysPcFw
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 4, 2026
कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?
स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।
निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?
निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।
This guy is openly admitting that he attacked people at Jantar Mantar and that BJP leaders provided him immunity from police action afterwards.
How much more openly does someone have to admit it before @DelhiPolice takes action? pic.twitter.com/3nki1h9PaH
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 3, 2026
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं। जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Mr PM @narendramodi, this man is saying he has the गूदा to break open Nishu’s father’s head and admit it on camera.
Will the PM order Delhi Police to arrest this man for the crimes he’s admitting? Or should Indians accept a lawless system?
Cockroaches have the गूदा to ensure… pic.twitter.com/3Ez0PmpFwu
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 4, 2026
मामले को मिला राजनीतिक रंग
निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।






