संसद में राम मंदिर दान चोरी वाले ‘प्रदर्शन’ पर घिरे राहुल गांधी और पप्पू यादव, वाराणसी में FIR

वाराणसी में संत समाज की शिकायत पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला संसद के बाहर राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़ी टिप्पणियों के संबंध में दर्ज किया गया है। संत समाज का आरोप है कि संसद में इस मुद्दे को जिस तरह उठाया गया, उससे सनातन धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि धर्म का अपमान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राम मंदिर दान चोरी वाले ‘प्रदर्शन’ पर घिरे 

काशी जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसवाल ने बताया कि कोतवाली थाने में इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि इन वीडियो में पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आ रहे हैं और ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता सनातन धर्म का अपमान बता रहे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वाराणसी में FIR

काशी जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसवाल ने बताया कि मिली शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया जा रहा है और जांच के बाद आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस समय इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया था।

विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। साथ ही उन्होंने हाल ही में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चंदा चोर, गद्दी छोड़”, “जवाब देना होगा” और “अमित शाह, सदन में आओ” जैसे नारे लगाए। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भगवा कपड़े पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके हाथ में भगवान राम की तस्वीर थी और उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से मंदिर के पुजारी का रूप धारण कर चढ़ावा इकट्ठा करने का प्रदर्शन किया।

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भगवा पहन ‘चोरी’ का ड्रामा पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश पर बनारस में FIR दर्ज

Congress Ayodhya Drama

FIR against Rahul and Pappu Yadav: संसद परिसर में किया गया एक 'प्रतीकात्मक ड्रामा' अब सियासी और कानूनी गले की फांस बनता नजर आ रहा है। अयोध्या राम मंदिर के 'चढ़ावा चोरी' के विरोध में भगवा वस्त्र पहनकर दानपात्र के साथ प्रदर्शन करना निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भारी पड़ गया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में धर्मनगरी वाराणसी के कोतवाली थाने में संतों की शिकायत पर इन तीनों दिग्गज नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पूरा विवाद संसद भवन परिसर में हुए एक अनोखे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि सांसद पप्पू यादव भगवा वेश धारण कर हाथ में एक सांकेतिक 'दानपात्र' लेकर बैठे थे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उस दानपात्र में कुछ पैसे डाले, जिसके तुरंत बाद पप्पू यादव दानपात्र लेकर भागते हुए दिखाई दिए। इस पूरे ड्रामे के जरिए विपक्षी नेताओं का मकसद अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाना था, लेकिन विरोध जताने का यह अंदाज अब एक नए विवाद की वजह बन गया है।  ALSO READ: अयोध्या की आड़ में देश की अस्मिता और आस्था पर हो रहा प्रहार : योगी आदित्यनाथ

संतों का गुस्सा और दर्ज हुई FIR

भगवा कपड़ों में 'चोरी' का सीन फिल्माने पर हिंदू संगठनों और साधु-संतों का गुस्सा भड़क उठा है। बनारस के संतों का कहना है कि पवित्र भगवा वस्त्रों को चोरी जैसे कृत्य से जोड़कर पूरे हिंदू समाज और सनातन धर्म का अपमान किया गया है। संतों की इसी नाराजगी के बाद वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी और VHP आक्रामक

इस घटना के बाद से भाजपा (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हमला बोलते हुए पूछा कि क्या विपक्षी नेता किसी अन्य धर्म के प्रतीकात्मक कपड़ों में चोरी का ऐसा कोई नाटक करने की हिम्मत कर सकते थे? वीएचपी नेता आलोक कुमार ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। दूसरी ओर, लखनऊ में विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पुतले भी फूंके। ALSO READ: अयोध्या में आस्था बरकरार, रामलला दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

इस ड्रामे के सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में किया गया यह विरोध प्रदर्शन 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर ही भारी पड़ सकता है। इसे भाजपा और हिंदू संगठन 'हिंदुत्व और सनातन के अपमान' के तौर पर भुनाने में जुट गए हैं। ऐसे में रक्षात्मक मुद्रा में आई कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए इस विवाद से पार पाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

‘प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद’, जयराम रमेश का मोदी पर हमला, बोले- देश से माफी मांगें

jairam ramesh attacks pm modi over students forgiveness statement

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्रों को माफ करने वाले बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को युवाओं, पेपर लीक, नोटबंदी और अन्य मुद्दों पर देश से माफी मांगनी चाहिए। ALSO READ: PM मोदी ने गाली देने वाले छात्रों को किया माफ, बोले- ये भटके हुए बच्चे हैं, सजा नहीं सही राह दिखाने की जरूरत

 

वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, कांग्रेस खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बताने वाले प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है। वह अपने पूर्ववर्तियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और कटु भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें बदनाम करने के लिए वे न केवल अपनी सार्वजनिक सभाओं में, बल्कि संसद के भीतर भी बार-बार झूठ फैलाते हैं। संसद के भीतर और बाहर गाली-गलौज करने वालों की पूरी फौज को खुली छूट देते हैं और उन्हें पूरा संरक्षण भी प्रदान करते हैं।

 

कब माफी मांगेंगे पीएम मोदी?

उन्होंने कहा कि आज पूरा देश इस बात का इंतजार कर रहा है कि प्रधानमंत्री NTA की पेपर लीक से ग्रस्त व्यवस्था के कारण लाखों युवाओं को हुई पीड़ा और छात्र आंदोलनों पर गृह मंत्रालय के संरक्षण में हुई बर्बर कार्रवाई के लिए माफी मांगें। पूरा देश राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए चंदा चोरी, आस्था धोखा प्रकरण पर भी प्रधानमंत्री से माफी की अपेक्षा कर रहा है, जिसकी स्थापना की घोषणा उन्होंने स्वयं 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में बड़े जोर-शोर से की थी।

जयराम रमेश ने कहा कि पूरा देश आज भी 8 नवंबर 2016 को लिए गए उनके तुगलकी फैसले के लिए उनकी माफी का इंतजार कर रहा है, जिसने करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छीन ली और लाखों MSME बंद होने की कगार पर पहुंच गए। ऐसे मामलों की सूची बहुत लंबी है। ALSO READ: PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा

जयराम रमेश ने कहा कि लेकिन बीती रात प्रधानमंत्री ने आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा दिखाते हुए कहा कि उन्होंने हमारे युवाओं को माफ कर दिया है। यह देश और उन युवाओं का अपमान है, जिन्होंने उनकी सरकार के दौरान पीड़ा झेली है और जो पूरी तरह न्यायोचित रूप से उनसे माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इंस्टाग्राम सभाएं अब किसी को बेवकूफ नहीं बना सकतीं।

 

क्या है मामला?

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें और उनकी दिवंगत मां को कथित तौर पर गाली देने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ शरारती बच्चों ने बहुत गंदी गालियां दीं… गालियां मुझे दी गईं और मेरी दिवंगत मां को भी दी गईं। इस तरह की भाषा को लेकर समाज का गुस्सा स्वाभाविक है, खासकर जब कथित तौर पर कुछ युवा महिलाओं द्वारा भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि इन युवाओं को सही दिशा दिखाई जाए, न कि उन्हें कानूनी लड़ाई में उलझाया जाए।

 

उन्होंने कहा कि ये भटके हुए बच्चे हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाना समाज का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सजा देकर, अदालतों के चक्कर लगवाकर या समाज में परेशान करके परिस्थितियों को नहीं बदला जा सकता।

‘वर्दी खून से लथपथ थी’—जंतर-मंतर हिंसा पर घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का बड़ा दावा

delhi jantar mantar

जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि प्रदर्शन में हिंसक और असामाजिक तत्व शामिल थे। परिजनों ने पुलिस पर हुए हमले की आपबीती साझा की, जबकि भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी घटना पर सवाल उठाए। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

 

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजनों ने कहा कि 20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का सच कुछ और ही है। हमला पुलिसवालों पर भी हुआ है।

 

खून से लथपथ थी वर्दी 

घायल पुलिसकर्मी की बेटी गुंजन ने दावा किया कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व भी थे। उनके पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेड के पास तैनात थे। वे अक्सर कहते थे कि यह अब सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा, इसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं। 20 जुलाई को रात 10 बजे मेरे पिताजी को उनके साथी घर लेकर आए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी। हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास पीट-पीटकर मारने की कोशिश की थी। वे करीब चार घंटे तक RML अस्पताल में बेहोश रहे, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया। ALSO READ: PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

 

हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था

घायल ASI की पत्नी सीमा ने कहा कि शरारती तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया। 20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल किया, तो वो हॉस्पिटल में इलाज करा रहे थे। भीड़ में मौजूद शरारती तत्वों ने पत्थर और हथियारों से पुलिस जवानों को घायल कर दिया था। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। रात 11 बजे जब पति घर आए, तो उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़ा गया और पुलिस फोर्स पर हमला किया गया। ड्यूटी के दौरान उन्हें मिला हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था।

 

सिर में लगे 4 टांके

लक्ष्य सिंह बिष्ट ने कहा कि मेरे पिता ASI हैं। उन्हें बहादुरी के लिए 4 सम्मान मिल चुके हैं। मेरे दादाजी भी BSF में थे। 1971 की जंग लड़ चुके हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। उनके साथी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है। जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं डर गया था। पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं थे, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे। ALSO READ: CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

 

भाजपा सांसद ने पूछा सवाल

भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर जो हमला हुआ है, जिनको चोट लगी है, हमें संवेदनशील होना चाहिए, उनके भी परिवार हैं, उनके भी मानवाधिकार हैं, इस बात को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम नौजवानों का सम्मान करते हैं लेकिन अगर उनके आंदोलन के पीछे अपराधी खड़े होते हैं…तो यह गंभीर सवाल है।

 

क्या है सीजेपी का दावा

CJP ने आरोप लगाया था कि 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च में और उसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट्स गन का इस्तेमाल किया। पार्टी ने कई छात्रों के घायल होने का दावा करते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 9 लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार रात चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और आशंका है कि मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल, अभी बचाव कार्य जारी है और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद हैं।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत का बड़ा हिस्सा उस समय गिरा जब वहां काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कमजोर और खराब हालत के कारण इमारत को पहले ही खाली करा लिया गया था, लेकिन आशंका है कि कुछ मजदूर हादसे के समय अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए।

NDRF की टीम ने शुरुआत में मलबे से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने का काम लगातार जारी है।

अधिकारी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हो सकते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, यह संख्या 9 तक पहुंच गई।

देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया

अब इस घटना पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तुरंत FIR दर्ज करने और सक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने ‘X’ पर एक ट्वीट में कहा, “भिवंडी में इमारत गिरने से हुई लोगों की मौत की घटना बेहद दुखद है। मैं उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। हम इन परिवारों के दुख में शामिल हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। मैं ईश्वर से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

पीएम मोदी ने मुआवजे का किया ऐलान

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल्डिंग की पहचान कोहिनूर अपार्टमेंट के तौर पर हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के नगर निगम ने इसे पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया था।

शहर के मेयर नारायण चौधरी ने कहा, “भिवंडी में ऐसी कई इमारतें हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया गया है। हम फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं ऐसी इमारतों में रहने वाले लोगों को सलाह दूंगा कि वे तुरंत इन्हें खाली कर दें।”

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PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) कंटेंट और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में Meta India के प्रमुख, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ALSO READ: पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; 'चढ़ावा चोरी' पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। पीएम मोदी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान वीडियो शेयर किया था, जिसको बाद में कुछ लोगों ने AI की मदद से एडिट किया है और गलत जानकारी सर्कुलेट की।

 

पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित मॉर्फ्ड सामग्री किसने तैयार की, किसने उसे प्रसारित किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रसार को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तेजी से वायरल हुई थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि विवादित कंटेंट के प्रसार में किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका रही और क्या किसी प्लेटफॉर्म ने कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।

 

किन पहलुओं की होगी जांच?

 

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

  • कथित मॉर्फ्ड कंटेंट का मूल स्रोत कौन था।
  • कंटेंट किस नेटवर्क के माध्यम से वायरल हुआ।
  • संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका क्या रही।
  • लागू कानूनों और आईटी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

 

पुलिस का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक या मॉर्फ्ड सामग्री का प्रसार कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

 

मॉर्फ्ड वीडियो क्या होते हैं? 

मॉर्फ्ड वीडियो, असल में ऐसे वीडियो होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव डिजिटल तकनीक, AI या वीडियो या एडिटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बदले जाते हैं। इन वीडियो का मकसद होता है कि लोगों को ऐसा लगे कि वह व्यक्ति कुछ ऐसा कह या कर रहा है, जो असल में उसने कहा ही नहीं था।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट, नोएडा की महिला पर दर्ज हुई FIR

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में नोएडा पुलिस ने 25 वर्षीय एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि रुचिका सिंह नाम की महिला ने 23 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले में बुधवार को शिकायत मिलने के बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज की।

महिला के खिलाफ दर्ज हुई FIR

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला की टिप्पणी से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह के बयान से लोगों के बीच तनाव फैल सकता है और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।

पुलिस ने इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की थी। जीरो एफआईआर का मतलब है कि किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना किसी दूसरे इलाके में हुई हो। अब यह मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस को भेज दिया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में शांति भंग करने के लिए उकसाना, ऐसा बयान देना जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती हो और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CJP ने FIR पर उठाए सवाल

एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर महिला ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया भी है, तब भी उसके खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना सही नहीं है। पीटीआई के अनुसार, सौरव दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी मानहानि हुई है, तो वह कानून के तहत सिविल या आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है। लेकिन केवल किसी प्रदर्शनकारी के कथित आपत्तिजनक बयान के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना निंदनीय है और केवल आपत्तिजनक भाषा के कारण किसी व्यक्ति को सजा नहीं दी जानी चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वह आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं करते, लेकिन केवल ऐसे बयान के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी की भाषा गलत हो सकती है या उससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, लेकिन यह किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का पर्याप्त कारण नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, इससे लोगों में डर का माहौल पैदा होता है और खासकर युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है।

सौरव दास ने युवाओं से भी अपील की कि वे प्रदर्शन के दौरान अपने शब्दों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें और किसी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को संयम के साथ काम करना चाहिए और अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल कथित आपत्तिजनक भाषा के आधार पर आपराधिक कार्रवाई करना स्वीकार्य नहीं है।

PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

cjp jantar mantar protest

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह टिप्पणी 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के दौरान की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने के बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है। अब मामले की जांच दिल्ली पुलिस करेगी।

 

शिकायतकर्ता स्मृति सिंह ने पुलिस को बताया कि वह गाजियाबाद के वसुंधरा की रहने वाली हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनके मुताबिक, 23 जुलाई को उनके संज्ञान में आया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक युवती ने देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि युवती की टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और जानबूझकर लोक शांति भंग करने का प्रयास किया गया।

 

नोएडा की सोसाइटी में रहती है युवती

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कथित टिप्पणी करने वाली युवती की पहचान नोएडा के सेक्टर-168 स्थित लोट्स जिंग सोसाइटी निवासी रुचिका सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह मूल रूप से फरीदाबाद के ऊंचागांव की रहने वाली बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, युवती ब्यूटी पार्लर संचालित करती है और इसी साल जनवरी में उसने नोएडा में फ्लैट खरीदा था।

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घटना के बाद से युवती और परिजन घर पर नहीं मिले

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से युवती और उसके परिजन कथित तौर पर अपने आवास पर नहीं मिले हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

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पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत शून्य अपराध संख्या (Zero FIR) दर्ज की गई है। इसके बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है, क्योंकि कथित घटना दिल्ली के जंतर-मंतर से संबंधित है। अब मामले की आगे की विवेचना दिल्ली पुलिस द्वारा की जाएगी। फिलहाल पुलिस युवती की तलाश के साथ-साथ वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।