ममता को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी की पार्टी टूट गई है और टूटे हुए गुट की याचिका पर ममता बनर्जी की पार्टी के बैंक खातों पर रोक लग गई है। इस मामले में ममता सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं लेकिन वहां से उनको कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को उन चार बैंक खातों को संचालित करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम की शिकायत के सिलसिले में फ्रीज कर दिया था।

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने टीएमसी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है। खातों में मौजूद फंड का असली हकदार कौन है, इस मामले पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए हम इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे’। गौरतलब है कि चार मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे, जिसमें टीएमसी 15 साल बाद राज्य की सत्ता से बाहर हो गई थी।

इसके बाद पार्टी के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया था। यह गुट असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा करता है। बहरहाल, ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से पेश हुए सीनियर एडव्होकेट अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बैंक खातों को फ्रीज करना पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कोशिश है। इससे पार्टी की गतिविधियां ठप्प हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उपचुनावों आदि को देखते हुए पार्टी के खर्चों के लिए हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। टीएमसी जैसी बड़ी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों के लिए यह न्यूनतम राशि है। इसलिए इन खातों को चलाने की मंजूरी दी जाए।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दो गुट खुद को असली तृणमूल बता रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह तय करने को कहा है कि असली पार्टी कौन सी है। उन्होंने कहा, ‘दूसरा गुट भी कह रहा है कि हमें खाता चलाने की अनुमति दी जाए। इसलिए उन्हें असली तृणमूल पर फैसले का इंतजार करना चाहिए’।

कहीं आपके नाम से तो नहीं चल रही फर्जी SIM तो सावधान, DoT की चेतावनी, 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

कहीं आपके नाम से तो नहीं चल रही फर्जी SIM तो सावधान, DoT की चेतावनी, 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने फर्जी तरीके से SIM कार्ड जारी करने और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर नागरिकों को सतर्क किया है। विभाग के मुताबिक, किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उसके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके मोबाइल कनेक्शन जारी करना, SIM का गलत इस्तेमाल करना या IMEI नंबर से छेड़छाड़ करना कानूनी अपराध हो सकता है।  

DoT के मुताबिक फर्जी तरीके से SIM जारी करना, टेलीकॉम पहचानकर्ताओं का गलत इस्तेमाल करना और IMEI नंबर में छेड़छाड़ करना Telecommunications Act, 2023 के तहत दंडनीय अपराध हैं। दूरसंचार कानून के तहत ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं और कोई नंबर आपकी जानकारी के बिना तो जारी नहीं हुआ है। DoT की यह एडवाइजरी मध्यप्रदेश लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (MP LSA) की हालिया साइबर क्राइम जांच के बाद जारी की गई है। जांच में फर्जी तरीके से SIM कार्ड जारी किए जाने के मामले सामने आए हैं।

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 बिना जानकारी के जारी किए गए SIM का मामला सामने आया

DoT के अनुसार, साइबर जांच के दौरान छत्तीसगढ़ में ऐसे मामले सामने आए, जहां पॉइंट ऑफ सेल (POS) के जरिए नागरिकों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट किए गए।

आरोप है कि एजेंट ने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना 25 मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट कर दिए। जांच के बाद DoT और संबंधित टेलीकॉम कंपनियों ने इस PoS एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। अब वह भविष्य में नए मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेगा।

 

मामले सामने आने के बाद दूरसंचार विभाग और संबंधित टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर ने संबंधित POS को ब्लैकलिस्ट किया। इसके अलावा कई मोबाइल कनेक्शनों की जांच इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर की गई और संदिग्ध पाए गए नंबरों का दोबारा सत्यापन किया गया। जांच के बाद कई नंबरों को ब्लॉक भी किया गया।

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अपने नाम का SIM किसी दूसरे को न दें

DoT ने नागरिकों को सलाह दी है कि अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को न दें और न ही उसे ट्रांसफर या बेचें। अगर उस नंबर का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो वास्तविक सब्सक्राइबर के लिए कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है। इसलिए अपना SIM किसी को उधार देने, किराए  पर देने या किसी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल करने के लिए देने से बचें।

 

IMEI से छेड़छाड़ वाले फोन से रहें दूर

 

विभाग ने नागरिकों को ऐसे मोबाइल डिवाइस खरीदने या इस्तेमाल करने से भी बचने की सलाह दी है, जिनके IMEI नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई हो। मोबाइल खरीदते समय डिवाइस की वैधता और उसकी पहचान की जानकारी जांचना जरूरी है। IMEI मोबाइल डिवाइस की विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी बदलने वाले ऐप से बचें

 

DoT ने नागरिकों को मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए Calling Line Identity (CLI) में बदलाव करने वाली सेवाओं का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर SIM लेकर उसका इस्तेमाल करना या अपने नाम पर जारी SIM को किसी अन्य व्यक्ति को देकर उससे साइबर अपराध करवाना गंभीर कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।

 

संचार साथी से ऐसे जांचें अपने नाम के SIM

अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं, इसकी नियमित जांच करना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए सरकार के संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको अपने नाम पर ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे आपने जारी नहीं कराया है या जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं, तो उपलब्ध सुविधा के जरिए उसके खिलाफ कार्रवाई या उसे ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

 

मोबाइल फोन असली है या नहीं, ऐसे करें चेक

संचार साथी प्लेटफॉर्म पर ‘Genuineness of Your Mobile Handset’ सुविधा भी उपलब्ध है। इसके जरिए मोबाइल हैंडसेट से जुड़ी जानकारी की जांच की जा सकती है। इस सुविधा में मोबाइल ब्रांड, मॉडल और निर्माता से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है। नया या इस्तेमाल किया हुआ मोबाइल खरीदते समय यह जांच उपयोगी हो सकती है। DoT ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन और इस्तेमाल किए जा रहे हैंडसेट की समय-समय पर जांच करते रहें। Sanchar Saathi की सेवाएं पोर्टल के साथ-साथ Android और iOS के लिए उपलब्ध मोबाइल ऐप के जरिए भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।

 

नागरिकों के लिए DoT की जरूरी सलाह

  • अपने नाम पर जारी SIM किसी दूसरे व्यक्ति को न दें।
  • SIM को बेचने या अनधिकृत रूप से ट्रांसफर करने से बचें।
  • अपने नाम पर सक्रिय मोबाइल कनेक्शन की नियमित जांच करें।
  • अनजान या संदिग्ध मोबाइल नंबर की जानकारी मिलने पर उसकी शिकायत करें।
  • IMEI से छेड़छाड़ किए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें।
  • संदिग्ध मोबाइल डिवाइस खरीदने से पहले उसकी जानकारी जांचें।
  • CLI बदलने वाली संदिग्ध वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल न करें।
  •  संचार साथी के जरिए अपने मोबाइल कनेक्शन और हैंडसेट की जांच करें।
  • ऐसे मॉडेम, मॉड्यूल, SIM Box या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करना जिनमें IMEI नंबर बदला या छेड़छाड़ किया गया हो।
  • मोबाइल ऐप, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम से Calling Line Identity (CLI) या अन्य टेलीकॉम पहचानकर्ताओं में बदलाव करना।

सोमनाथ मंदिर, खानपुर कमलम और CM को उड़ाने की धमकी, गुजरात में हड़कंप

सोमनाथ मंदिर, खानपुर कमलम और CM को उड़ाने की धमकी, गुजरात में हड़कंप

somnath threat

गुजरात में एक बार फिर बम विस्फोट की धमकी भरा ईमेल मिलते ही राज्य का सुरक्षा तंत्र सतर्क हो गया है। एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए ईमेल में सोमनाथ मंदिर, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, भाजपा के केंद्रीय कार्यालय, पुलिसकर्मियों और रॉ (RAW) को निशाना बनाने की धमकी दिए जाने का दावा किया गया है। यह ईमेल मिलने के बाद अहमदाबाद सहित राज्य की संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया है।

 

खानपुर भाजपा कार्यालय में सुरक्षा टीम द्वारा जांच

धमकी भरे ईमेल की जानकारी मिलते ही अहमदाबाद शहर पुलिस की टीम तुरंत खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय पहुंच गई। सावधानी के तौर पर पूरे कार्यालय परिसर को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। परिसर में आवाजाही पर नजर रखी जा रही है और आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

 

बम और डॉग स्क्वॉड द्वारा मौके पर चेकिंग

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों के साथ बम निरोधक दस्ते (बम स्क्वॉड) तथा डॉग स्क्वॉड को भी तुरंत मौके पर भेजा गया। विशेषज्ञ टीमों द्वारा कार्यालय के कोने-कोने की जांच की गई ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। इसके अलावा मंदिर और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

 

ईमेल के स्रोत की पुलिस द्वारा गहन जांच

फिलहाल पुलिस और साइबर क्राइम टीम द्वारा इस धमकी भरे ईमेल की गहनता से जांच की जा रही है। ईमेल कहां से और किस आईपी एड्रेस (IP Address) से भेजा गया है, भेजने वाला व्यक्ति कौन है और इसमें किए गए दावों के पीछे कोई वास्तविक आधार है या नहीं, इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है।

फ्रांस में स्मार्ट चश्मे से महिलाओं की रिकॉर्डिंग पर जांच:बिना इजाजत वीडियो सोशल मीडिया पर डाले; पिछले साल मेटा के 70 लाख चश्मे बिके

फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो। दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। अमेजन डिलीवरी में भी इस्तेमाल कर रही स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो बनाने के लिए नहीं हो रहा है। अमेजन डिलीवरी के काम में भी ऐसे चश्मों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे चश्मे बना रही है, जिनसे डिलीवरी कर्मचारी बिना मोबाइल निकाले पैकेज स्कैन कर सकेंगे, रास्ता देख सकेंगे और सामान पहुंचाने के बाद उसकी तस्वीर ले सकेंगे। रास्ते में कुत्ता या कोई दूसरी रुकावट होने पर चश्मा अलर्ट भी दे सकता है। अमेजन ने इन चश्मों को डिलीवरी कर्मचारियों के साथ टेस्ट किया है। मेटा बिना कैमरे वाला स्मार्ट चश्मा ला सकता है स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

मुश्किल में मोहम्मद रिजवान, सट्टे और फिक्सिंग के लगे संगीन आरोप

 

पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर क्राइम एजेंसी के ख़िलाफ़ मोहम्मद रिज़वान की याचिका को लाहौर हाई कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए उन्हें साइबर क्राइम एजेंसी के सवालों का जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

रिज़वान ने बुधवार को एक याचिका दायर की थी जिसमें उनके वकीलों ने कहा था कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर क्राइम एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह उनसे क्यों पूछताछ कर रही है, और यह भी दलील दी कि इस मामले की जांच करना एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। याचिका के अनुसार यह मामला पाकिस्तान क्रिकेट में कथित ऑनलाइन बेटिंग/सट्टेबाज़ी से जुड़ा था।

हालांकि गुरुवार को काफ़ी छोटी सुनवाई में इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया। अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि रिज़वान इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे या अदालत के निर्देशानुसार एजेंसी के सवालों का जवाब देंगे।

रिज़वान ने पिछले सप्ताह एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद यह याचिका दायर की थी। उसी दिन इमाम-उल-हक़ भी एजेंसी के समक्ष के पेश हुए थे लेकिन उन्होंने सवालों की सूची को भरते हुए इस सप्ताह की शुरुआत में एजेंसी को वापस भेज दिया था। जबकि रिज़वान ने अदालत का रुख़ करने का फ़ैसला किया।

रिज़वान की याचिका में कहा गया था कि आरोप पूरी तरह से ग़लतफ़हमी पर आधारित हैं और मनगढंत और असपष्ट हैं। आरोपों को लेकर याचिका में यह भी कहा गया था कि यह याचिकाकर्ता के हितों और प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचाने के लिए किए जाने वाले प्रयास से अधिक नहीं है।याचिका में एजेंसी के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए यह भी कहा गया था कि आईसीसी की एंटी-करप्शन यूनिट ही इन आरोपों की जांच करती है।

याचिका में यह दावा किया गया था कि रिज़वान को रात के एक बजे होटल की लॉबी में बुलाया गया था जहां टीम रह रही थी। वहां पर सरकारी एजेंसी का एक अधिकारी मौजूद था। इस मामले में पहले कोई नोटिस न मिलने के बावजूद अधिकारी ने रिज़वान से पूछताछ की और उन्हें बिना कोई कारण बताए उनसे फ़ोन ले लिया गया। याचिका के अनुसार उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस आदेश के तहत उनका फ़ोन ज़ब्त किया गया।

याचिका में कहा गया है कि तीन घंटे में फ़ोन की पूरी जांच करने के बाद फ़ोन वापस लौटाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन इस आश्वासन के बाद भी अभी तक रिज़वान को उनका फ़ोन नहीं लौटाया गया है।

पिछले सप्ताह पीसीबी ने अपने स्तर पर एक जांच करने की घोषणा की थी लेकिन तब यह नहीं बताया गया था कि यह जांच किस संबंध में होगी। बोर्ड ने उस समय खिलाड़ियों का नाम भी नहीं लिया था लेकिन यह कहा था कि बोर्ड ने अनुशासन और व्यवहार संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर आंतरिक अनुशासन जांच शुरू की है जिसकी अभी समीक्षा की जा रही है। बोर्ड ने इस प्रक्रिया के बारे में कहा था कि यह पीसीबी के नियमों के अंतर्गत की जा रही है।

वेस्टइंडीज़ और इंग्लैंड के दौरों के लिए रिज़वान और इमाम के चयन के संबंध में पीसीबी ने लॉर्ड्स टेस्ट के बाद चयनकर्ताओं को नोटिस भी भेजा था। इस नोटिस में 24 घंटे के भीतर लिखित में यह जवाब मांगा गया था कि उनका चयन किन कारणों से किया गया और किस प्रक्रिया के तहत उनके चयन के नतीजे तक पहुंचा गया। पाकिस्तान के टेस्ट दल में बदलाव के बाद चयनकर्ता मिस्बाह-उल-हक़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

एनसीपीसीआर के सामने मेटा इंडिया प्रमुख पेश

नई दिल्ली। सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री यानी सीएसईएएम वाले कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारी बुधवार को एक सप्ताह में दूसरी बार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सामने पेश हुए। इनमें मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास भी शामिल थे।   आयोग से बाहर निकलने के बाद श्रीनिवास ने बैठक के बारे में मीडिया के बार-बार पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

सूत्रों के अनुसार श्रीनिवास और उनकी टीम ने आयोग के सामने इस मामले में वही रुख दोहराया, जो कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सामने रखा था। एनसीपीसीआर ने नौ सितंबर को मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को सोशल मीडिया मंच पर सीएसईएएम से जुड़े कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में तलब किया था। आयोग ने ‘बीबीसी आई’ की एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेकर मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था। आयोग ने जुलाई में कंपनी को पहला नोटिस भेजा था और बाद में मामले की औपचारिक जांच शुरू की।

एनसीपीसीआर ने एक अलग मामले में बेंगलुरु में कंपनी द्वारा संचालित एक पालना-घर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी कैपजेमिनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी तलब किया।

इस बीच फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करने के लिए सहमत हुई है।  सरकार ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और अन्य हानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया मंचों से अधिक सुरक्षा उपाय और जवाबदेही की मांग कर रही है।

मेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी के लिए उसके मंचों पर बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ऐसे अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।कंपनी के अनुसार बच्चों को होने वाले नुकसान से निपटने के प्रयास मजबूत करने के लिए मेटा अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगा।

अमेरिका में मुख्यालय वाली मेटा ऐसी व्यवस्था बनाने का वादा करने वाली पहली बड़ी प्रौद्योगिकी मध्यस्थ कंपनी है, जिसके तहत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन व्यवस्था को दी जाएगी। अब तक मेटा ऐसे मामलों की रिपोर्ट अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन’ यानी एनसीएमईसी को करती रही है। नई व्यवस्था के बाद भारतीय एजेंसियों तक ऐसी सूचनाएं सीधे पहुंचाने का रास्ता बनेगा।

अयोध्या पुलिस का राजस्थान में बड़ा कांड! ₹2.80 लाख की रिश्वत लेते SI समेत 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार, SSP ने किया सस्पेंड

अयोध्या पुलिस का राजस्थान में बड़ा कांड! ₹2.80 लाख की रिश्वत लेते SI समेत 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार, SSP ने किया सस्पेंड

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​राजस्थान के एक पीड़ित को साइबर फ्रॉड केस में जेल भेजने की धमकी देकर रिश्वत मांगने वाले अयोध्या पुलिस के 4 जवानों पर गाज गिरी है। सीकर पहुँची राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने 2.80 लाख रुपये घूस लेते हुए सब-इंस्पेक्टर समेत चारों पुलिसकर्मियों को रंगे हाथों दबोच लिया। मामले की जानकारी मिलते ही अयोध्या के एसएसपी (SSP) गौरव ग्रोवर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

 

​क्या है पूरा मामला?

 

​जेल भेजने की धमकी और घूस की मांग: अयोध्या के साइबर क्राइम थाने में तैनात पुलिस टीम ने राजस्थान के सीकर निवासी एक व्यक्ति को नोटिस देकर पूछताछ के लिए अयोध्या बुलाया था। आरोप है कि पीड़ित का नाम साइबर फ्रॉड केस से हटाने और उसे जेल न भेजने के बदले पुलिसकर्मियों ने 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। बाद में सौदा 2.80 लाख रुपये में तय हुआ।

 

​सीकर ACB में शिकायत और सत्यापन: पीड़ित ने इस जबरन वसूली की शिकायत राजस्थान ACB की सीकर यूनिट से की। ACB ने 17 अगस्त को शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हो गई।

 

​रंगे हाथों गिरफ्तारी और भागने की कोशिश नाकाम

18 अगस्त को ACB ने ट्रैप बिछाया। अयोध्या साइबर पुलिस की टीम रिश्वत की रकम लेने खुद सीकर पहुँची। जैसे ही कांस्टेबल सोहनलाल ने परिवादी से पैसों से भरा बैग लिया, ACB की टीम ने उन्हें घेर लिया। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने अपनी कार से ACB की गाड़ी को टक्कर मारकर भागने का प्रयास भी किया, लेकिन सतर्क अधिकारियों ने घेराबंदी कर चारों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली गई है। 

 

​निलंबित किए गए आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम

  • ​यशवंत सिंह (उप-निरीक्षक / SI)
  • ​पवन कुमार त्रिपाठी (कांस्टेबल)
  • ​सोहन लाल (कांस्टेबल)
  • ​गौरव चारग / चिराग (कांस्टेबल)
  • ​अयोध्या SSP का बड़ा एक्शन

 

​राजस्थान में हुई इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अयोध्या SSP गौरव ग्रोवर ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए चारों आरोपी पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) कंटेंट और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में Meta India के प्रमुख, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ALSO READ: पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; 'चढ़ावा चोरी' पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। पीएम मोदी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान वीडियो शेयर किया था, जिसको बाद में कुछ लोगों ने AI की मदद से एडिट किया है और गलत जानकारी सर्कुलेट की।

 

पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित मॉर्फ्ड सामग्री किसने तैयार की, किसने उसे प्रसारित किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रसार को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तेजी से वायरल हुई थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि विवादित कंटेंट के प्रसार में किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका रही और क्या किसी प्लेटफॉर्म ने कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।

 

किन पहलुओं की होगी जांच?

 

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

  • कथित मॉर्फ्ड कंटेंट का मूल स्रोत कौन था।
  • कंटेंट किस नेटवर्क के माध्यम से वायरल हुआ।
  • संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका क्या रही।
  • लागू कानूनों और आईटी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

 

पुलिस का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक या मॉर्फ्ड सामग्री का प्रसार कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

 

मॉर्फ्ड वीडियो क्या होते हैं? 

मॉर्फ्ड वीडियो, असल में ऐसे वीडियो होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव डिजिटल तकनीक, AI या वीडियो या एडिटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बदले जाते हैं। इन वीडियो का मकसद होता है कि लोगों को ऐसा लगे कि वह व्यक्ति कुछ ऐसा कह या कर रहा है, जो असल में उसने कहा ही नहीं था।

Meta इंडिया हेड के खिलाफ केस दर्ज, PM मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने से जुड़ा है मामला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाले कथित मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक वीडियो को लेकर हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये वीडियो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।

पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

मेटा इंडिया के प्रमुख भी आरोपी, पुलिस ने भेजा नोटिस

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मामलों में मेटा इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी बनाया गया है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के एक जांच अधिकारी ने बताया कि दर्ज मामलों और शिकायतकर्ताओं द्वारा साझा किए गए कथित आपत्तिजनक लिंक के संबंध में मेटा को नोटिस भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए सोशल मीडिया खातों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि आरोपियों का पता लगाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान किया गया था आपत्तिजनक कमेंट

एक अन्य मामले में, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में नोएडा में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई। शिकायत में नोएडा के सेक्टर-168 की रहने वाली रुचिका सिंह पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जीरो एफआईआर होने के कारण अब इस मामले को संबंधित पुलिस थाने को भेजकर आगे की जांच की जाएगी।

बीएनएस की कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला

एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता का आरोप है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आरोपी महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में कहा गया है कि इससे प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति भंग होने तथा लोगों के बीच तनाव फैलने की आशंका पैदा हुई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, धारा 353(1) और धारा 356(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में जानबूझकर अपमान करना, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान देना और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।

Kirti Kulhari: साइबर ठगी का शिकार हुईं कीर्ति कुल्हारी, अनऑथराइज्ड कार्ड ट्रांजैक्शन के जरिए 2.44 लाख का लगा चूना

Kirti Kulhari: देश में साइबर स्कैम का शिकार आम लोगों के साथ-साथ सेलिब्रिटी भी हो रहे हैं। हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस कीर्ति कुल्हारी कथित तौर पर क्रेडिट कार्ड स्कैम का शिकार हुईं। साइबर अपराधियों ने उनके क्रेडिट कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल करके विदेश में ₹2.44 लाख के अनऑथराइज़्ड ट्रांजैक्शन किए। शिकायत मिलने पर मुंबई की अंबोली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कीर्ति कुल्हारी के क्रेडिट कार्ड का विदेशी ट्रांजैक्शन के लिए गलत इस्तेमाल होने का आरोप है। ABP न्यूज के अनुसार, पुलिस ने बताया कि यह घटना 24 जुलाई की रात को हुई, जब यारी रोड, वर्सोवा में रहने वाली 43 वर्षीय एक्ट्रेस अंधेरी वेस्ट के एक मल्टीप्लेक्स में फ़िल्म देखने गई थीं। सिनेमाघर जाते समय, उन्हें अपने बैंक से एक अलर्ट मिला कि उनके अकाउंट से विदेशी मुद्रा में ट्रांज़ैक्शन हुआ है।

अलर्ट में बताया गया था कि उनके क्रेडिट कार्ड से एयरोमेक्सिको एयरलाइंस को US$2,525 का ट्रांसफ़र किया गया है। कीर्ति हैरान रह गईं और तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर को इस बारे में जानकारी दी। बैंक के साथ अपना अकाउंट और डिटेल्स चेक करने पर पता चला कि उनके क्रेडिट कार्ड से चार अलग-अलग ट्रांज़ैक्शन किए गए थे। इन अनऑथराइज़्ड पेमेंट की कुल रकम ₹2.43 लाख से ज़्यादा थी। बैंक ने आगे किसी भी गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए तुरंत उनका क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कर दिया।

पुलिस को शक है कि कार्ड की जानकारी डिजिटल तरीके से हासिल की गई थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि कीर्ति ने अपना कार्ड पिन या बैंकिंग से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी को नहीं दी थी। इससे जांच करने वालों को शक है कि कार्ड की जानकारी सीधे एक्सेस करने के बजाय किसी तकनीकी तरीके से चुराई गई होगी।

वे अभी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या जानकारी मोबाइल फोन, ऑनलाइन अकाउंट या किसी दूसरे डिजिटल नेटवर्क के ज़रिए लीक हुई है। इसके पीछे कौन है, यह पता लगाने के लिए बैंकिंग हिस्ट्री, ट्रांज़ैक्शन और डिजिटल ट्रेल्स की जांच की जा रही है। अंबोली पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स अभी भी जांच कर रहे हैं।

प्रोफेशनल तौर पर बात करें तो, कीर्ति कुल्हारी ने हाल ही में कहा है कि उन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर अपनी पहली फ़ीचर फ़िल्म की शूटिंग पूरी कर ली है, जो निश्चित रूप से उनके करियर का एक अहम पड़ाव होगी। इस एक्ट्रेस की कुछ मशहूर फ़िल्में और टेलीविज़न शो हैं- उरी द सर्जिकल स्ट्राइक, मिशन मंगल (2019), फोर मोर शॉट्स प्लीज़!, क्रिमिनल जस्टिस और ह्यूमन। कीर्ति कुल्हारी की पर्सनल लाइफ़ की बात करें तो, वह राजीव सिद्धार्थ को डेट कर रही हैं, जिन्होंने ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज!’ में भी काम किया था। इस कपल ने इस साल की शुरुआत में इंस्टाग्राम पर अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया था।