Asian Games में नीरज की जगह यह भाला फेंक खिलाड़ी करेगा एथलेटिक्स दल की अगुवाई

javelin throw

राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले भाला फेंक के एथलीट यशवीर सिंह को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह गुरुवार को 77 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स टीम में शामिल किया गया जबकि लंबी दूरी के धावक अभिषेक पाल को कथित डोपिंग उल्लघंन के लिए नाडा (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) से नोटिस जारी किए जाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय ट्रैक एवं फील्ड टीम की घोषणा की। लुधियाना अभी राष्ट्रीय युवा चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ के धावक तेजस शिरसे को भी टीम से बाहर कर दिया गया है क्योंकि वह हाल ही में ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान चोटिल हो गए थे।अभिषेक को पिछले महीने नाडा ने नोटिस भेजा था क्योंकि उनके डोपिंग नमूने में महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा पाई गई थी।

खेल मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में 73 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की घोषणा की थी जिसमें शिरसे और अभिषेक भी शामिल थे। मंत्रालय ने बुधवार को छह नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया।

इन खिलाड़ियों में 200 मीटर की धाविका हरिता भद्रा, 400 मीटर दौड़ में भाग लेने वाली किरण पहल, पोल वॉल्टर सिंधुश्री जी, त्रिकूद की एथलीट आशा इलंगो, चक्का फेंक की खिलाड़ी सान्या यादव और हैमर थ्रोअर प्रवीण कुमार शामिल हैं।

इस तरह से पहले घोषित किए गए 73 खिलाड़ियों में से दो खिलाड़ियों अभिषेक और शिरसे के बाहर होने और बुधवार को छह खिलाड़ियों के जुड़ने से अंतिम संख्या 77 हो गई है।AFI ने आयोजकों से यह भी अनुरोध किया है कि पिछले एशियाई खेलों के दोहरे पदक विजेता अविनाश साबले को 5000 मीटर दौड़ में भाग लेने की अनुमति दी जाए। साबले की पसंदीदा 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित है।

पिछले साल एसीएल सर्जरी कराने के बाद साबले ने इस सत्र में केवल एक ही दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होंने 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था।

दस सितंबर को होने वाली प्रतियोगिता में एशियाई खेलों के लिए चुने गए अधिकतर एथलीट भाग लेंगे।गुलवीर सिंह और पारुल चौधरी एशियाई खेलों में तीन-तीन स्पर्धाओं में भाग लेंगे। गुलवीर 10,000 मीटर, 5000 मीटर और 1500 मीटर में जबकि पारुल 3000 मीटर स्टीपलचेज, 5000 मीटर और 1500 मीटर में हिस्सा लेंगी।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में तबाही के बीच बचावकर्मियों ने बचाई मासूम की जान, डेढ़ महीने के बच्चे का रेस्क्यू, वीडियो वायरल

VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।

बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।

यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके से डेढ़ महीने के बच्चे को बचाकर रसुवा धांगे कैंप लाया गया

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।

सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

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VIDEO: नंगे पांव दौड़ी 47 साल की मां, बेटियों की पढ़ाई के लिए जीती मैराथन रेस; ₹3000 की इनामी राशि बनी उम्मीद की किरण

Maharashtra News: कहते हैं कि मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। महाराष्ट्र के बीड़ जिले की 47 वर्षीय रामाबाई रणवीर ने इस बात को सिर्फ साबित ही नहीं किया। बल्कि अपनी मेहनत और हौसले से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे देखकर हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है। महिला ने नंगे पैर महाराष्ट्र के मैराथन रेस में हिस्सा लिया और पहला स्थान हासिल किया। इस जीत से मिली 3000 रुपये की इनामी रकम उनकी बेटियों की पढ़ाई में मदद करेगी।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक अंबाजोगाई की रहने वाली रामाबाई एक अकादमी में रसोइया के तौर पर काम करती हैं। पति की मुंबई में एक हादसे में मौत के बाद उनके सामने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। दो बेटियों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी रामाबाई के कंधों पर आ गई। आर्थिक मुश्किलें थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया।

₹3 हजार उनके लिए सिर्फ इनाम नहीं, बेटियों के सपनों की उम्मीद थी

रामाबाई को जब स्थानीय स्तर पर आयोजित ‘अमृत दौड़’ मैराथन के बारे में पता चला तो उन्होंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया। प्रतियोगिता में जीतने वाले को ₹3,000 की पुरस्कार राशि मिलनी थी। किसी के लिए शायद ₹3,000 बहुत बड़ी रकम न हो। लेकिन रामाबाई के लिए यह राशि बेहद मायने रखती थी। उनके लिए यह सिर्फ मैराथन की पुरस्कार राशि नहीं थी। बल्कि बेटियों की फीस, किताबों और पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों में मदद करने वाली रकम थी। इसी उम्मीद को लेकर वह दौड़ में शामिल होने पहुंचीं।

न स्पोर्ट्स शूज, न महंगे कपड़े, साड़ी और चप्पल में पहुंचीं

रामाबाई के पास न कोई प्रोफेशनल रनिंग शूज थे, न स्पोर्ट्स ड्रेस और न ही किसी तरह की विशेष ट्रेनिंग। वह साधारण साड़ी और चप्पल पहनकर दौड़ में पहुंचीं। दौड़ में उनके आसपास कई युवा प्रतिभागी थे। दूसरे धावक स्पोर्ट्स कपड़ों और रनिंग शूज के साथ पूरी तैयारी में नजर आ रहे थे। लेकिन रामाबाई के पास इन सुविधाओं की कमी जरूर थी, हौसले की नहीं। उनके मन में सिर्फ एक बात थी।उन्हें हर हाल में अपनी बेटियों के भविष्य के लिए दौड़ना है और रेस को जीतना है।

चप्पल बनी रुकावट तो उतार दी और नंगे पांव दौड़ पड़ीं

रेस शुरू हुई तो चप्पल के साथ दौड़ना रामाबाई के लिए मुश्किल होने लगा। चप्पल उनकी रफ्तार में बाधा बन रही थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी चप्पल उतारकर हाथ में पकड़ ली और नंगे पांव दौड़ना शुरू कर दिया। 47 साल की एक मां, साधारण साड़ी में, बिना जूतों के सड़क पर दौड़ रही थीं। सामने उनसे कम उम्र के कई धावक थे, जिनके पास बेहतर जूते और तैयारी थी। लेकिन रामाबाई के कदमों को आगे बढ़ाने वाली ताकत किसी ट्रेनिंग सेंटर से नहीं आई थी।

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फिनिश लाइन पर सबसे पहले पहुंचीं रामाबाई

दौड़ के दौरान हर कदम उनके लिए चुनौती रहा होगा। लेकिन उन्होंने अपनी रफ्तार कम नहीं होने दी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और रामाबाई रणवीर ने सबसे पहले फिनिश लाइन पार कर मैराथन जीत ली। उनके हाथ में अब ₹3,000 की पुरस्कार राशि थी।

रकम भले ही छोटी हो, लेकिन उसके पीछे छिपी कहानी बहुत बड़ी है। यह एक ऐसी मां की जीत थी, जिसने पति को खोने के बाद अकेले अपने परिवार को संभाला और बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर संभव कोशिश की।

एक मां की दौड़, जिसने बता दिया कि हौसले के आगे मुश्किलें छोटी हैं

रामाबाई की कहानी सिर्फ एक मैराथन जीतने की कहानी नहीं है। यह उस मां की कहानी है, जिसने आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी बेटियों के सपनों को टूटने नहीं दिया। जहां कुछ लोग सुविधाओं के अभाव को आगे बढ़ने में बाधा मान लेते हैं। वहीं रामाबाई ने चप्पल तक छोड़ दी। लेकिन अपनी मंजिल नहीं छोड़ी।

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उनके लिए यह दौड़ सिर्फ सड़क पर तय किया गया कुछ किलोमीटर का सफर नहीं था। यह अपनी बेटियों के भविष्य के लिए संघर्ष का एक और कदम था। रामाबाई रणवीर की यह जीत उन तमाम मांओं को समर्पित है, जो अपने बच्चों के सपनों के लिए खुद की जरूरतों को पीछे छोड़ देती हैं। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। उसकी बहादुरी के चर्चे हर तरफ छाई हुई हैं।