EPFO VISHWAS Scheme for Dispute Resolution: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एक नई स्कीम ला रहा है जिससे आपको बड़ी राहत मिलने वाली है। कंपनियों और नियोक्ताओं के सालों से लटके पीएफ विवादों और मुकदमों को खत्म करने के लिए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 17 जुलाई 2026 को ‘विश्वास 2026’ की शुरुआत की है।
यह एक वन-टाइम डिस्प्यूट रेजोल्यूशन स्कीम है। इसके तहत पीएफ नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर लगने वाले जुर्माने और पेनाल्टी से जुड़े विवादों का निपटारा किया जाएगा। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है, किन कंपनियों को इसका फायदा मिलेगा और कर्मचारियों के लिए इसके क्या मायने हैं।
क्या है ‘विश्वास 2026’ योजना और इसका उद्देश्य?
मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस योजना का मुख्य उद्देश्य कंपनियों के बीच ‘स्वैच्छिक अनुपालन’ को बढ़ावा देना, अदालती मुकदमों को कम करना और लंबे समय से लंबित विवादों का तेजी से निपटारा करना है।
पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया: एंप्लॉयर्स को अपने मामलों को सुलझाने के लिए एक पारदर्शी, पूरी तरह से डिजिटल और समयबद्ध मंच मिलेगा।
कब से कब तक खुली है योजना: यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और नोटिफिकेशन की तारीख से अगले 6 महीनों तक खुली रहेगी।
ये 4 तरह के मामले होंगे इस स्कीम के दायरे में
‘विश्वास 2026’ योजना के तहत मुख्यतः चार अलग-अलग श्रेणियों के विवादों को शामिल किया गया है:
अदालत में लंबित मामले: ऐसे मामले जहां पेनाल्टी या डैमेज के आदेशों को पहले से ही किसी न्यायिक मंच या कोर्ट में चुनौती दी गई है।
पेंडिंग रिकवरी: पेनाल्टी या डैमेज के ऐसे अंतिम आदेश जिनकी वसूली अभी पूरी तरह से नहीं हुई है या आंशिक रूप से पेंडिंग है। इसमें रिकवरी सर्टिफिकेट यानी RRC वाले मामले भी शामिल हैं।
पेंडिंग ऑर्डर्स: ऐसे मामले जहां कंपनियों को कारण बताओ नोटिस तो जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जुर्माने का अंतिम आदेश आना अभी बाकी है।
भावी नोटिस: ऐसे मामले जहां कंपनियों पर पेनाल्टी या डैमेजेस के नोटिस अभी जारी होने बाकी हैं।
कौन से मामले इस योजना से बाहर हैं?
ईपीएफओ ने साफ किया है कि कुछ गंभीर और पहले से सुलझ चुके मामलों को इस माफी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। जहां कंपनियों से पेनाल्टी या जुर्माने की पूरी रकम पहले ही वसूली जा चुकी है। धोखाधड़ी, फंड की हेराफेरी या रिकॉर्ड में जानबूझकर की गई हेरफेर से जुड़े मामले। ऐसे मामले जहां कानूनन लगने वाला अनिवार्य ब्याज अभी तक पूरी तरह जमा नहीं किया गया है।
कंपनियां कैसे कर सकती हैं आवेदन?
योग्य नियोक्ता इस योजना का लाभ उठाने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:
- पोर्टल पर जाएं: कंपनियों को ईपीएफओ के आधिकारिक ‘Employer Portal’ पर जाकर लॉगिन करना होगा।
- डिजिटल वेरिफिकेशन: आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों को Digital Signature Certificate (DSC) या e-Sign का उपयोग करना होगा।
- शर्ते: आवेदन करते समय कंपनियों को एक शपथ-पत्र देना होगा कि इस योजना के तहत मामला सुलझने के बाद वे इस विवाद को लेकर आगे किसी भी अदालत या फोरम में कोई अपील दायर नहीं करेंगी।
कर्मचारियों और ईपीएफओ की तैयारी
मंत्रालय के मुताबिक, इस योजना को लाते समय कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। विवाद सुलझने से रुका हुआ पीएफ फंड तेजी से क्लियर होगा। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए ईपीएफओ ने अपने सभी जोनल, रीजनल और डिस्ट्रिक्ट ऑफिसों के लिए ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इसके साथ ही, आवेदनों की त्वरित समीक्षा और समय पर निपटारे के लिए विशेष ‘VISHWAS Cells’ का गठन भी किया जा रहा है।

