8th Pay Commission के तहत सीनियर कंसल्टेंट से यंग प्रोफेशनल बनने का मौका, 1.8 लाख तक सैलरी! फुल डिटेल जानिए

8th Pay Commission Job and Salary details: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा और उसमें बदलाव की सिफारिशें करने के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ काम करने का एक शानदार मौका है। 8वें वेतन आयोग ने कंसल्टेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। इसकी लास्ट डेट नजदीक आ रही है। आपको बता दें कि इस भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य प्रोफेशनल्स के पास आवेदन करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है।

हमारे सहयोगी ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सबसे पहले 10 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर तीन अलग-अलग कैटेगिरी में कांट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे थे। आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, मुआवजा, लीगल रीसर्च, डेटा विश्लेषण और पॉलिसी से जुड़ी स्टडी जैसे काम के लिए सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स की हायरिंग कर रहा है। आइए इस भर्ती से जुड़ी वैकेंसी, योग्यता, सैलरी और काम के स्वरूप की पूरी डिटेल विस्तार से जानते हैं:-

वैकेंसी की पूरी डिटेल (उम्र सीमा और अनुभव)

रिपोर्ट के मुताबिक इन वैकेंसी के लिए एज और एक्सपीरिंस को कैलकुलेट करने के लिए कट-ऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के लिए अधिकतम 5 पद निकाले गए हैं। इसके लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष और न्यूनतम रेलेवेंट एक्सपीरियंस 10 वर्ष होना चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट पद के लिए भी अधिकतम 5 वैकेंसियां हैं। इसमें आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा 40 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 6 वर्ष निर्धारित किया गया है। यंग प्रोफेशनल के लिए सबसे ज्यादा यानी मैक्सिमम 10 पद हैं। इसके लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा 32 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 4 वर्ष होना जरूरी है।

क्या योग्यता है जरूरी?

आवेदकों के पास नीचे दी गई योग्यताओं में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:-

फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्सेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस या इससे जुड़े विषयों में मास्टर्स डिग्री या MBA, या

LL।B डिग्री के साथ बार काउंसिल/बार एसोसिएशन में क्रेडेंशियल होना चाहिए और ट्रिब्यूनल या अदालतों के समक्ष लीगल रीसर्च या सर्विस मैटर में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।

अनिवार्य योग्यता: सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन टूल्स का ज्ञान होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों के पास वेतन, मुआवजा या स्टैबिलिशमेंट से जुड़े मामलों का अनुभव है उन्हें चयन में वरीयता दी जाएगी।

सैलरी और कार्यकाल

ये नियुक्तियां पूरी तरह से कांट्रैक्ट बेसिस पर होंगी। ये शुरुआत में एक साल या वेतन आयोग के कार्यकाल तक (जो भी पहले हो) के लिए की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

पदों के हिसाब से तय मासिक मानदेय इस प्रकार है:-

सीनियर कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.8 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹90000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000

कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.2 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹60000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹30000

यंग प्रोफेशनल: फुल-टाइम के लिए ₹90000, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹22500

इस सैलरी में से इनकम टैक्स और अन्य लागू कटौतियां (TDS) की जाएंगी।

चयनित कंसल्टेंट्स को क्या काम करना होगा?

ऑफिशियल गाइडलाइंस के मुताबिक चुने गए प्रोफेशनल्स को आयोग के साथ नीचे दिए गए काम करने होंगे:-

मौजूदा वेतन, भत्तों, पेंशन और उपलब्ध परिलब्धियों के ढांचे का विश्लेषण करना।

वेतन और मुआवजे के ट्रेंड्स की पहचान करने के लिए डेटा, रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन करना।

आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर लीगल रीसर्च करना।

डेटा इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय करना।

मानव संसाधन, मुआवजा, ग्रेच्युटी और बोनस तंत्र पर विशेष अध्ययनों में सहायता प्रदान करना।

आयोग को प्राप्त होने वाले ज्ञापनों और प्रतिवेदनों का विश्लेषण करना।

आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले राजकोषीय प्रभाव का अनुमान लगाना।

रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशन और अन्य विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करना।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवारों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना होगा। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार के फिजिकल या हार्ड-कॉपी आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

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