NEET-PG cut-off case: डीजीएचएस की अध्यक्षता वाली समिति करेगी नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया का ऑडिट, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

NEET-PG cut-off case: नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा के लिए 12 सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान करेगी। इसे ठीक करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को सलाह देगी और आंतरिक ऑडिट के लिए एक व्यवस्था बनाएगी। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है। शीर्ष अदालत में नीट पीजी 2025-26 प्रवेश के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में कमी को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि समिति का गठन 23 जुलाई के नोटिफिकेशन के जरिए कोर्ट के पहले के निर्देशों के मुताबिक किया गया था। कमेटी को डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डी लवनीश जी कृष्णा हेड कर रहे हैं, जबकि असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल (मेडिकल एजुकेशन) डॉ प्रवीण कुमार दास मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर काम करेंगे।

इसमें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) और हेल्थ मिनिस्ट्री के दूसरे अधिकारियों के रिप्रेजेंटेटिव भी शामिल हैं। भाटी ने कहा कि कमेटी का काम मौजूदा पीजी प्रवेश प्रक्रिया के विस्तृत आंतरिक ऑडिट के लिए एक तंत्र बनाना और सुधार लागू करने लायक सुझाव देना है। उन्होंने बेंच को बताया कि इस काम में आठ हफ्ते लगेंगे। केंद्र का जवाब दर्ज करने के बाद बेंच ने कमेटी को आठ हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा, “रिपोर्ट आने के बाद हम इस मुद्दे पर सक्रिय तौर से चर्चा करेंगे।” पीठ ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कमेटी नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) और नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) से मेंबर्स को को-ऑप्ट कर सकती है।

पिटीशनर हरिशरण देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने एक एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का सुझाव दिया। भाटी ने जवाब दिया कि सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह को इस मामले में पहले ही एमिकस अपॉइंट किया जा चुका है।

नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया पर याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन और डॉक्टर सौरव कुमार, लक्ष्य मित्तल और आकाश सोनी की तरफ से फाइल की गई है। इसमें नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के 13 जनवरी के नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें नीट पीजी 2025-26 काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम कर दिया गया था।

संशोधित योग्यता मापदंड के तहत, सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50 से घटकर सातवें पर्सेंटाइल पर आ गया। SC, ST और OBC कैंडिडेट्स के लिए, कट-ऑफ स्कोर 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया। पिटीशनर्स का कहना है कि यह फैसला मनमाना, गैर-संवैधानिक है और संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन करता है।

Delhi Free JEE-NEET Coaching: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए दिल्ली सरकार ने शुरू की खास सुविधा, प्रवेश परीक्षा से चुने जाएंगे छात्र

Delhi Free JEE-NEET Coaching: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए दिल्ली सरकार ने शुरू की खास सुविधा, प्रवेश परीक्षा से चुने जाएंगे छात्र

Delhi Free JEE-NEET Coaching: दिल्ली सरकर ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए खास पहल की है। देश के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों को दिल्ली सरकार की ओर से मुफ्त कोचिंग कराई जाएगी। दिल्ली सरकार की इस विशेष पहल के तहत एक साल का मुफ्त आवासीय कोचिंग प्रोग्राम घोषित किया गया है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने एक सर्कुलर जारी कर इस पहल की जानकारी दी है। फ्री कोचिंग प्रोग्राम पुणे की गैर लाभकारी संस्था दक्षिणा फाउंडेशन की स्पॉन्सर्ड स्कॉलरशिप के तहत दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने सरकारी और सरकारी मदद वाले स्कूलों में कक्षा 12 में पढ़ने वाले जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) और नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के छात्रों के लिए एक साल का फ्री रेजिडेंशियल कोचिंग प्रोग्राम अनाउंस किया है। दिल्ली सरकार और सरकारी मदद वाले स्कूलों में मौजूद शैक्षिक सत्र के दौरान कक्षा 12 (साइंस) में एनरोल छात्र इस पहल का लाभ ले सकते हैं। डीओई ने सभी सरकारी और सरकारी मदद वाले स्कूलों को इस पहल के बारे में सूचित किया है।

निदेशालय की ओर से योग्य छात्रों से चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने को कहा गया है। छात्रों का चयन जॉइंट दक्षिणा सिलेक्शन टेस्ट (JSDT) 2027 के जरिए होगा, जो दिसंबर 2026 में होगी। प्रवेश परीक्षा में सफल छात्रों को महाराष्ट्र के पुणे जिले के कडूस गांव में मौजूद फाउंडेशन के कैंपस दक्षिणा वैली में एक साल के लिए फ्री रेजिडेंशियल कोचिंग दी जाएगी।

डीओई ने कहा कि स्कॉलरशिप की राशि से कार्यक्रम का पूरा खर्च मैनेज हो जाएगा। स्कॉलरशिप में जेईई और नीट के लिए फ्री कोचिंग, एक साल के कोर्स के पूरे समय के लिए हॉस्टल में रहने की जगह और खाना शामिल है। दिल्ली सरकार और दक्षिणा फाउंडेशन की ये पहल खासतौर से ईडब्लूएस वर्ग के उन छात्रों के लिए लाभकारी साबित होगी, जो इंजीनियरिंग और मेडिसिन में करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन महंगे कोचिंग इंस्टिट्यूट नहीं अफोर्ड कर सकते हैं।

इस प्रोग्राम का मकसद देश भर के बड़े इंजीनियरिंग और मेडिकल इंस्टिट्यूट में सरकारी स्कूल के छात्रों की उपस्थिति को बेहतर बनाना है। दिल्ली सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे योग्य छात्रों के बीच स्कॉलरशिप के बारे में जागरूकता फैलाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इस मौके का फायदा उठा सकें। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब सरकारें टारगेटेड स्कॉलरशिप प्रोग्राम और शैक्षिक संस्थानों के साथ पार्टनरशिप के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक पहुंच को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही हैं।

Direct Admission to DU Without CUET: डीयू के दो कॉलेज छात्रों को 12वीं के नंबरों के आधार पर दे रहे प्रवेश, सीयूईटी का स्कोर जरूरी नहीं

Delhi Lakshmi Yojana: हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500! 2 मिनट में समझें अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस

Delhi Laxmi Yojna Registration Process: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। योजना के तहत परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को ₹2,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी योजना का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जिस पर आवेदन मिलने भी शुरू हो चुके हैं। योजना शुरू होने के महज दो दिनों के भीतर ही 1.47 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। सरकार ने इसके लिए ₹5,100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आइए आपको बताते हैं इस योजना का लाभ उठाने के लिए कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है।

एक साथ खाते में नहीं आएंगे ₹2,500

दिल्ली लक्ष्मी योजना एक अनोखी हाइब्रिड कैश-ट्रांसफर और सेविंग्स स्कीम है, जिसमें महिलाओं के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:

विकल्प 1 (कैश + एफडी): ₹1,000 की राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जबकि शेष ₹1,500 की राशि को सरकार द्वारा ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) में निवेश किया जाएगा।

विकल्प 2 (पूरी एफडी): लाभार्थी चाहें तो पूरे ₹2,500 को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने का विकल्प चुन सकती हैं।

इस FD पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा, जिस पर राज्य सरकार सॉवरेन गारंटी प्रदान करेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदकों को ये शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • परिवार की प्रमुख: आवेदक महिला परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • पारिवारिक आय: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • दिल्ली का निवासी होना: आवेदक, उसका पति या उसके माता-पिता कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली के निवासी हों।
  • वोटर आईडी: आवेदक दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए।
  • बिजली खपत: पिछले 1 वर्ष के दौरान परिवार की वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

किन्हें नहीं मिलेगा लाभ?

  1. जो परिवार इनकम टैक्स पेयर हैं या जीएसटी (GST) फाइल करते हैं।
  2. परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या लोकल बॉडी में स्थायी/संविदा कर्मचारी है।
  3. जिनके पास चार पहिया वाहन है।
  4. आवेदक महिला के 3 से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
  5. आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

पहचान व पते का प्रमाण: वोटर आईडी कार्ड (दिल्ली) और आधार कार्ड।

पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर: आवेदक की स्पष्ट फोटो और सिग्नेचर।

सांसद या विधायक का सिफारिश पत्र: क्षेत्र के सांसद (MP) या विधायक (MLA) का हस्ताक्षरित सिफारिश/समर्थन पत्र।

पते/बिजली खपत का प्रमाण: बिजली का बिल या गैस कनेक्शन का बिल।

उम्र का प्रमाण (कोई भी एक): जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, वोटर आईडी या आधार कार्ड।

बैंक खाता विवरण: डीबीटी के माध्यम से राशि प्राप्त करने के लिए बैंक पासबुक की कॉपी।

ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

पात्र महिलाएं घर बैठे नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके रजिस्ट्रेशन कर सकती हैं:

स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट https://dly.delhi.gov.in पर जाएं और ‘Apply for Scheme’ के बाद ‘Register Now’ पर क्लिक करें।

स्टेप 2: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और बेसिक विवरण दर्ज करें।

स्टेप 3: परिवार के सभी सदस्यों का ब्योरा सही-सही भरें।

स्टेप 4: पैसे ट्रांसफर के लिए अपना चालू बैंक खाता दर्ज करें।

स्टेप 5: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।

स्टेप 6: फॉर्म का प्रीव्यू ध्यान से जांचें और फाइनल सबमिट करें।

स्टेप 7: क्षेत्रीय MP या MLA द्वारा हस्ताक्षरित अनुशंसा की प्रति अपलोड करें।

स्टेप 8: आवेदन पूरा होने के बाद पावती रसीद डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

दिल्ली लक्ष्मी योजना में ₹2500 पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, इसके लिए 6 जरूरी डॉक्युमेंट्स की पूरी लिस्ट

Delhi Lakshmi Yojana: दिल्ली की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार 1 अगस्त को ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ का ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2500 दिए जाएंगे। पोर्टल की शुरुआत के साथ ही इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली लक्ष्मी योजना दिल्ली की बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करने वाली योजना है।

सरकार ने इसके लिए ₹5100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आज से पोर्टल और रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। लगभग 500 बहनों ने अपने फॉर्म सफलतापूर्वक भर दिए हैं। दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को इस योजना को मंजूरी दी थी, जो पिछले वर्ष आयोजित विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों में से एक थी।

ऑनलाइन आवेदन के लिए 6 अनिवार्य दस्तावेज

योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करते समय महिलाओं को निम्नलिखित 6 महत्वपूर्ण दस्तावेज अपलोड करने होंगे:-

स्थानीय विधायक (MLA) या सांसद (MP) का एंडोर्समेंट/अनुशंसा पत्र

आधार कार्ड

पैन कार्ड

आय प्रमाण पत्र

आधार से लिंक सिंगल-होल्डर बैंक अकाउंट डिटेल्स

दिल्ली वोटर पहचान पत्र / कम से कम 10 साल से दिल्ली में निवास का प्रमाण

कौन होगा पात्र? (Eligibility Criteria)

कैबिनेट द्वारा मंजूर दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। इसके मुताबिक परिवार की सबसे बड़ी महिला इस योजना की पात्र होंगी। महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक के परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक दिल्ली का पंजीकृत वोटर होना चाहिए और कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।

किन्हें नहीं मिलेगा योजना का लाभ?

योजना के नियमों के तहत कई कैटेगिरी को इससे बाहर रखा गया है। जो महिलाएं पहले से किसी अन्य वित्तीय सहायता योजना या पेंशन का लाभ ले रही हैं वो इसका फायदा नहीं उठा पाएंगी। टैक्सपेयर्स और सरकारी कर्मचारी को भी इसका फायदा नहीं मिलेगा। 3 से अधिक जीवित बच्चों वाली महिलाओं को इस स्कीम में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक है वो इस स्कीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। जिन परिवारों के किसी सदस्य के पास सरकारी नौकरी है, कोई आपराधिक मामला दर्ज है या जिनके पास चार पहिया वाहन मौजूद है वो भी इस स्कीम के पात्र नहीं हैं।

2500 रुपये भुगतान के 2 विकल्प

योजना के तहत मिलने वाली ₹2500 की राशि के भुगतान के लिए लाभार्थियों को दो विकल्प दिए जाएंगे। ₹1000 प्रति माह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट में दैनिक खर्चों के लिए और बाकी 1500 रुपये RD/FD खाते में रखे जाएंगे (जिसमें तीन साल की लॉक-इन अवधि होगी)। महिलाएं चाहें तो दीर्घकालिक बचत के लिए पूरी राशि (₹2500) को सीधे RD या FD खाते में जमा कराया जा सकता है।

फंड के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध

योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि के उपयोग को लेकर सरकार ने कड़े नियम तय किए हैं। इस राशि का उपयोग शराब, तंबाकू, लॉटरी, सट्टेबाजी या किसी भी अन्य प्रतिबंधित सामान व सेवाओं की खरीदारी पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर कोई आवेदक गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वितरित की गई राशि की वसूली की जाएगी।

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दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल: दिल्ली में बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड! जानिए क्या है ये और कैसे करेगा काम

Delhi Land Record Bill 2026: दिल्ली में प्रॉपर्टी और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के तहत दिल्ली की हर संपत्ति को एक खास डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे प्रॉपर्टी आधार कार्ड कहा जा रहा है। इस नए कानून को पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसके बाद पूरी दिल्ली में वैज्ञानिक सर्वे शुरू होगा। इसके माध्यम से हर गांव के घर, जमीन के टुकड़े से लेकर शहरों के फ्लैट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

क्या है नया बिल और कैसे होगा सर्वे?

इस कानून के तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य किया जाएगा। जमीन और प्रॉपर्टी की सीमाओं मैपिंग ड्रोन से सर्वे करके की जाएगी। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ली जाएगी। अभी अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के पास जो रिकॉर्ड्स हैं उन्हें एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म पर लेकर आया जाएगा।

बहुमंजिला इमारतों में हर फ्लोर के लिए एक अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि इसमें इंडिविजुअल यूनिट्स भी शामिल की जा सकें। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में कमी आएगी और अदालतों व राजस्व अधिकारियों का बोझ घटेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तुलना लोगों के आधार कार्ड से करते हुए कहा कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के माध्यम से दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रामाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में सफल क्रियान्वयन के अनुभवों के आधार पर इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। फिलहाल यह विधेयक मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है और सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।

लाल डोरा क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

लाल डोरा क्षेत्र वे ग्रामीण आवासीय क्षेत्र हैं जिन्हें राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से मार्क किया जाता है। इनका इस्तेमाल खेती और गैर खेती दोनों ही उद्देश्यों के लिए होता है और यहां कंस्ट्रक्शन पर कुछ पाबंदियां होती हैं। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक लाल डोरा क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित और प्रामाणिक संपत्ति रिकॉर्ड का अभाव रहा है। स्वामित्त्व पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों के निवासियों को पहली बार औपचारिक और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रदान करके दशकों पुराने इस अंतर को दूर करना है।

कैसे काम करेगा स्मार्ट प्रॉपर्टी आधार कार्ड?

स्वामित्व योजना के तहत जारी होने वाला यह कार्ड PVC फॉर्मेट में होगा। इसे UIDAI मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। कार्ड पर एक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (PID), जारी करने की तारीख, गांव व जिले का विवरण, कब्जाधारक व परिवार की जानकारी, जमीन का क्षेत्रफल और एक ‘भू-आधार नंबर’ मौजूद होगा। कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का पूरा डिजिटल स्केच, सीमाओं का विवरण, आसपास की संपत्तियों के PID, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी लिंक रहेगा।

वैसे सरकार ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि ये प्रॉपर्टी कार्ड स्वयं मालिकाना हक के प्रमाण के रूप में काम करेगा या मौजूदा दस्तावेजों से जुड़े एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन रिकॉर्ड के रूप में। स्वामित्व सत्यापन, त्रुटियों के सुधार और विवादित प्रविष्टियों से संबंधित नियम विधानसभा में बिल पास होने के बाद तय किए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट: अब तक कितना हुआ काम?

दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों को इस प्रोजेक्ट के पायलट फेज में शामिल किया गया है। इन गांवों में सर्वे और पहचान का काम पूरा हो चुका है।संबंधित दस्तावेजों को संकलित करते हुए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 12232 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8423 (लगभग 69 प्रतिशत) संपत्तियां पूरी तरह विवाद-मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियों के मामलों का शत-प्रतिशत समाधान हो चुका है। इन रिकॉर्ड्स को अंततः दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ रियल-टाइम में इंटिग्रेट किया जाएगा। इन 30 गांवों के अनुभवों के आधार पर पायलट फेज पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट का विस्तार पूरी दिल्ली की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों पर किया जाएगा।

दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?

व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने की वजह से दिल्लीवासियों को दशकों से मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति के लेन-देन, विरासत, बैंक लोन प्राप्त करने, नक्शा पास कराने और अदालती विवादों को सुलझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड बनने से सीमा विवाद खत्म होंगे और नागरिकों को संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण लेने, उत्तराधिकार और मकान का नक्शा पास कराने में काफी आसानी, पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।

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दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वापस होंगे केस, इन लोगों पर होगा एक्शन

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह फैसला तब आया है, जब प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच पुलिस अभी भी कर रही है। सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नया कानूनी मामला दर्ज न किया जाए और न ही कोई कार्रवाई की जाए। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।

सरकार ने यह भी कहा कि जिन मामलों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है या हिरासत में लिया गया है, उनकी समीक्षा की जाएगी। जो लोग राहत पाने के पात्र होंगे, उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही 13 एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

पुलिस का दावा- 2,900 लोगों की पहचान हुई

दिल्ली सरकार का यह फैसला बिहार, असम और महाराष्ट्र सरकारों के ऐसे ही फैसलों के बाद आया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), जिसने इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था, ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो वह एक बार फिर जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी। सरकार की घोषणा से कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल करीब 2,900 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस इस मामले की जांच जारी रखे हुए है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर 2,873 ऐसे पुरुष मौजूद थे, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और अन्य आधुनिक तकनीकी उपकरणों की मदद से की। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इनमें से कोई व्यक्ति जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल था या नहीं।

कई लोगों पर दर्ज हैं गंभीर मामले

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों की पहचान की गई है, उनमें से कई के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, यौन उत्पीड़न, लूट, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, हथियार कानून के उल्लंघन और नशीले पदार्थों से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि जिन 2,873 लोगों की पहचान की गई, उनमें से 989 लोगों का गंभीर अपराधों का रिकॉर्ड मिला। इनमें 101 पर हत्या, 62 पर हत्या की कोशिश, 284 पर लूट और डकैती, 61 पर दुष्कर्म, 6 पर पॉक्सो कानून, 25 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध, 229 पर आर्म्स एक्ट, 135 पर झपटमारी, 19 पर अपहरण और 67 पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों के आरोप दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि इनमें से कई लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान एक से अधिक बार जंतर-मंतर पहुंचे थे। फिलहाल पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

1 अगस्त को आ रहा पोर्टल, महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने वाली दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

Lakshmi Yojana scheme: दिल्ली सरकार ने मंगलवार को महिलाओं को वित्तीय सहायता देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दिखाई गई। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार इस योजना का पोर्टल 1 अगस्त को लॉन्च करने जा रही है और रक्षाबंधन तक पहली किस्त जारी करने की तैयारी में है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

28 जुलाई 2026: दिल्ली कैबिनेट और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा योजना को मंजूरी।

1 अगस्त 2026: योजना के लिए समर्पित आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन व सत्यापन: पोर्टल लॉन्च होने के बाद प्राप्त आवेदनों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।

रक्षाबंधन: सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि रक्षाबंधन तक लाभार्थियों के खातों में योजना की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी।

2500 रुपये का गणित: कैसे मिलेंगे पैसे?

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक इस योजना के तहत मिलने वाले 2500 रुपये को दो हिस्सों में बांटा गया है। हर महीने 1000 रुपये महिलाओं को खाते में सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। बाकी बचे 1500 रुपये हर महीने एक रिकरिंग डिपॉजिट (RD) खाते में जमा किए जाएंगे।

3 साल का लॉक-इन पीरियड

आरडी खाते में जमा होने वाले 1500 रुपये 3 सालों के लिए लॉक रहेंगे। 3 साल का समय पूरा होने के बाद, जमा हुआ पूरा पैसा और उस पर मिला ब्याज सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। महिलाओं में बचत को बढ़ावा देने और उनके लिए फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी तैयार करने के उद्देश्य से इस सेविंग्स कंपोनेंट को जोड़ा गया है।

इस योजना के लिए क्या हैं पात्रता के नियम?

योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो यहां नीचे दी गई पात्रताओं को पूरा करती हैं-

  • दिल्ली की 10 साल की निवासी: आवेदक को कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।
  • उम्र सीमा: परिवार की 21 से 60 वर्ष की आयु के बीच की महिलाएं ही पात्र होंगी।
  • परिवार से सिर्फ एक महिला: हर परिवार से सिर्फ एक महिला को लाभ मिलेगा। अगर किसी परिवार में एक से अधिक पात्र महिलाएं हैं, तो परिवार की सबसे बड़ी महिला को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • कोई पेंशन न मिलती हो: आवेदक को पहले से कोई अन्य सरकारी पेंशन न मिल रही हो।
  • कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो: आवेदक का स्वयं का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

कौन-कौन सी महिलाएं होंगी योजना से बाहर?

  1. सरकारी कर्मचारी।
  2. इनकम टैक्स पेयर्स (करदाता)।
  3. पेंशनर्स (पेंशन पाने वाली महिलाएं)।
  4. जिन महिलाओं या उनके परिवार के पास चार पहिया वाहन है।
  5. जिन महिलाओं के परिवार में किसी भी सदस्य का आपराधिक रिकॉर्ड है।

योजना के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स

आवेदकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • परिवार के सदस्यों के दस्तावेज
  • सेल्फ-डिक्लेरेशन (Self-Declaration): इसमें आवेदक को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे कम से कम 10 सालों से दिल्ली में रह रही हैं और उनके या उनके परिवार पर कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।

5110 करोड़ रुपये का बजट आवंटन

दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के सुचारू क्रियान्वयन और संचालन के लिए लगभग 5110 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है।

NEET प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! नाबालिगों की रिहाई का आदेश, छात्रों पर नहीं होगी दंडात्मक कार्रवाई

Supreme Court relief for NEET protesters: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 जुलाई) को उन छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे नीट पेपर लीक को लेकर हाल में देश भर में हुए आंदोलन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत संभालकर रखें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दिल्ली सरकार दर्ज की गई FIR की जांच जारी रख सकती है, लेकिन कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।”

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की पहली नजर में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए।

पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे। पीठ ने उन सभी राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और प्रदर्शन से जुड़े दूसरे डिजिटल सबूत संभालकर रखने का निर्देश दिया जहां प्रदर्शन हुए थे।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से संबंधित इकट्ठा किया गया कोई भी डिजिटल डेटा संभालकर रखा जाए। लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए। पीठ ने अधिकारियों को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया। साथ ही कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को सुरक्षा नहीं मिलेगी।

‘बलपूर्वक कोई कार्रवाई न की जाए’

पीठ ने दिल्ली सरकार को दर्ज FIR के मामले में जांच जारी रखने की इजाजत दी। लेकिन कहा कि कार्रवाई लंबित रहने तक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बलपूर्वक कोई कार्रवाई न की जाए। अदालत ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से भी जवाब मांगा। चीफ जस्टिस ने कहा, “आरोपों की पहली नजर में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर विचार करने की जरूरत है, जिसमें 200 से ज्यादा घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं को भी दूर किया जाना चाहिए।”

पीठ ने कहा कि केंद्र और संबंधित राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति या विशेष जांच दल बनाने पर विचार करने से पहले अपने बयान रिकॉर्ड पर रखें। शुरुआत में, अदालत ने पूछा कि पुलिस की ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा, “जिसने भी ज्यादती की, कानून अपने हाथ में लिया, उसे सजा मिलनी चाहिए।”

‘जांच के लिए SIT गठित की जा सकती है’

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यहा भी कहा कि हालिया छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन होने पर कानून को अपना काम करना चाहिए।

नीट पेपर लीक होने को लेकर देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिंसा की कई घटनाओं का जिक्र किया।

सुनवाई के शुरुआत में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की सदस्यता वाली पीठ ने सवाल किया कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। वकीलों की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि विरोध कर रहे नीट छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

पीठ ने कहा, “अगर तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है, तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।” CJI सूयकांत ने कहा कि पीठ सभी आरोपों की स्वतंत्र, पारदर्शी और गहन जांच कराने पर विचार कर रही है। अदालत ने कहा कि 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि ये हमले छात्रों ने किए थे या कुछ उपद्रवी तत्वों ने।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्र पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ उपद्रवी इन घटनाओं में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस मामलों में वांछित उपद्रवी विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा की।