दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को मिलेंगे 1300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो! जानिए इसकी एलिजिबिलिटी और सारे नियम

दिल्ली सरकार ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए DURGA ई-ऑटो स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो दिए जाएंगे, ताकि लोगों को कमाई का एक साधन मिल सके। इसके साथ ही दिल्ली में साफ-सुथरे व सुरक्षित यातायात को भी बढ़ावा मिले। इस योजना के लिए उम्र, आय और दस्तावेजों से जुड़ी कुछ जरूरी शर्तें भी तय की गई हैं।

इस योजना में 1,170 ई-ऑटो महिलाओं और 130 ई-ऑटो ट्रांसजेंडर लोगों के लिए रखे गए हैं। योजना के तहत मिलने वाले ई-ऑटो पर तीन साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा। जिसमें लाभार्थी वाहन को बेच या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। इन ऑटो पर खास DURGA ब्रांडिंग और पहचान के निशान भी होंगे, जिससे यात्री इन्हें आसानी से पहचान सकेंगे।

आवेदन के लिए जरूरी शर्तें क्या हैं?

1. उम्र और निवासः आवेदक की उम्र 20 से 40 साल के बीच होनी चाहिए और वो दिल्ली का वोटर होना चाहिए।

2. लाइसेंस: वैध LMV ड्राइविंग लाइसेंस और PSV (Public Service Vehicle) बैज होना जरूरी है।

3. आय सीमाः महिला आवेदक के परिवार की सालाना आय 5 लाख रुपये (FY 2025-26) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

4. ये लोग नहीं कर सकते अप्लाईः अगर आपके या आपके परिवार के नाम पर पहले से कोई थ्री-व्हीलर या कमर्शियल ट्रांसपोर्ट वाहन है, तो आप पात्र नहीं हैं। 3 से ज्यादा बच्चों वाली महिलाएं भी इस स्कीम में अप्लाई नहीं कर सकतीं।

5. कौन ले सकता है योजना का लाभ: इस योजना का लाभ पात्र महिलाएं और ट्रांसजेंडर लोग ले सकते हैं।

6. ट्रांसजेंडर के लिए: ऊपर की सभी शर्तों के साथ DM ऑफिस से जारी ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा।

आवेदन की प्रक्रिया क्या है और कैसे मिलेगा फायदा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस स्कीम से सिर्फ ऑटो चलाने में ही नहीं, बल्कि बैटरी स्वैपिंग, सर्विसिंग और चार्जिंग स्टेशन पर भी रोजगार के हजारों मौके बन सकते हैं। ई-ऑटो से पैसेंजर को मेट्रो स्टेशन और दूसरे स्थानों से उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलने के साथ दिल्ली में ई-व्हीकल के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है। एलिजिबल लोग सरकार की ओर से पोर्टल शुरू होने के बाद ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

कर्तव्य पथ पर जलेंगे सवा लाख दीये

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दिल्ली सरकार के ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के तहत कर्तव्य पथ पर सवा लाख दीये जलाए जाएंगे। इसके साथ रक्तदान शिविर, 108 कुंडीय यज्ञ और श्रमिक सेवा केंद्र की शुरुआत सहित कई कार्यक्रम होंगे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के प्रत्येक परिवार से गुरुवार शाम छह से सात बजे के बीच एक दीया जलाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और ‘मां भारती की सेवा में निरंतर शक्ति’ के लिए प्रार्थना करने को कहा है।

सीएमओ के मुताबिक ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के तहत कर्तव्य पथ पर सरकारी योजनाओं के लाभार्थी सवा लाख दीये जलाएंगे।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में होने वाले कार्यक्रम को प्रधानमंत्री के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा गया है। सरकार ने इसे सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को समर्पित आयोजन बताया है।

दिल्ली सरकार कर्तव्य पथ पर दीप प्रज्वलन के अलावा त्यागराज स्टेडियम में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित करेगी। खाटू श्याम दिल्ली धाम में 108 कुंडीय यज्ञ होगा और श्रमिकों के लिए ‘नमो श्रमिक सेवा केंद्र’ की शुरुआत की जाएगी। भाजपा और दिल्ली सरकार 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

सीएमओ के मुताबिक त्यागराज स्टेडियम में सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक मेगा रक्तदान शिविर होगा। इसमें 2,500 यूनिट रक्त संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्तदान शिविर में दिल्ली सरकार के 11 अस्पतालों के ब्लड बैंक के अलावा सेना अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग अस्पताल और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की भागीदारी होगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से इन कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की है।

दिल्ली में बनेगी तीसरी रिंग रोड! नॉर्थ से साउथ तक का सफर 30 मिनट में होगा पूरा, जानिए ₹7000 करोड़ का पूरा मास्टर प्लान

Delhi Parallel Ring Road: दिल्ली में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए सरकार ने पैरलल रिंग रोड का मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके लिए 2026-27 के बजट में व्यवहार्यता अध्ययन यानी फिजिबिलिटी स्टडी के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रस्तावित तीसरी रिंग रोड मौजूदा इनर और आउटर रिंग रोड के समानांतर विकसित की जाएगी, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव कम करने और कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिल सकेगी।

बता दें कि दिल्ली सरकार का फोकस राजधानी में ऐसी सड़कों का नेटवर्क तैयार करने पर है, जहां लोगों को बिना रूकावट के साथ बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा मिले। इसके तहत जलवायु के अनुकूल और आधुनिक तकनीक से लैस सड़कों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस प्रोजेक्ट पर काम भी तेज कर दिया है।

6 फेज में होगा 55 किमी एलिवेटेड रिंग रोड का निर्माण

प्रस्तावित 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर की डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। इस पूरे कॉरिडोर को 6 फेज में विकसित करने की योजना है। इसका पहला चरण मुकरबा चौक से आश्रम तक बनाया जाएगा।

इसके बाद प्रोजेक्ट के दूसरे हिस्सों पर भी काम शुरू किया जाएगा। इनमें आजादपुर फ्लाईओवर से आईएसबीटी हनुमान मंदिर तक करीब 9.5 किलोमीटर का खंड, चांदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर और आईएसबीटी से डीएनडी फ्लाईओवर तक 11.5 किलोमीटर का कॉरिडोर शामिल है। इन सभी हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की योजना है, ताकि दिल्ली के प्रमुख ट्रैफिक रूट पर दबाव कम किया जा सके।

वहीं, पीडब्ल्यूडी ने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर 10 बड़े चोक पॉइंट्स की पहचान की थी। इसमें रिंग रोड, मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, महरौली-महिपालपुर रोड और रानी झांसी रोड शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग का मानना है कि सिर्फ फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा। शहर में पीक आवर में 2.5 लाख से ज्यादा गाड़ियां रिंग रोड पर होती हैं। इसलिए एक पूरी नई समानांतर रिंग रोड की जरूरत है।

दिल्ली सरकार ने PWD के बजट में किया था 54% का इजाफा

जानकारी के लिए बता दें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 24 मार्च 2026 को पेश किए गए दिल्ली बजट में लोक निर्माण विभाग (PWD) के लिए 5,921 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। यह रकम पिछले साल के 3,843 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 54 फीसदी ज्यादा है।

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स्वराज्य प्राप्ति में गणपति उत्सव का योगदान

युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

श्रीगणेश चतुर्थी पर विशेष

श्रीगणेश जी सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत, पूर्वी और पश्चिमी भारत में गणेश उत्सब की अलग अलग परंपराएं हैं। मगर सभी परंपराओं में श्रीगणेश जी का स्थान सबसे महत्वपूर्ण पूज्य और आदरणीय है। इन्हीं परंपराओं में महाराष्ट्र के पुणे में शुरू हुई दस दिवसीय उत्सव परंपरा आज पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में बड़ी ही उमंग और उल्लास से मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी? कैसे मनाई जाएगी? कैसे पूजा होगा इस बारे में हम सभी जानते हैं। मगर आपको शायद पता नहीं होगा कि कानून की धारा 144 से भी श्री गणेश जी का संबंध रहा है, कैसे संबंध है,क्या संबंध है? आईए आपको बताते हैं।

सन् 1857 की क्रांति के बाद घबरा कर अंग्रेजों ने 1894 में एक बडा कानून लागू किया, जिसे धारा 144 कहते थे, जो अब समाप्त हो चुकी है। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा इस कठोर कानून की धारा लागू किए जाने के बाद से किसी भी स्थान पर पांच से अधिक लोग इकठ्ठा नहीं हो सकते थे। सरल शब्दों में कहें तो सार्वजनिक आयोजनों की मनाही थी। यदि कोई ब्रिटिश अधिकारी उनको इकठ्ठा देख लेता तो इतनी कड़ी सजा दी जाती थी कि जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते है। उनको कोड़े से मारा जाता था और उनके हाथों से नाखूनों को नोंच लिया जाता था।

ब्रिटिश हुकूमत के इस कड़े कानून के कारण गुलाम भारतीयों में भय व्याप्त हो गया था। लोगों में अंगेजो के प्रति व्याप्त भय को ख़त्म करने तथा इस कानून का विरोध करने के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत की। शुरुआत पुणे के शनिवारबाडा में गणेश उत्सव के आयोजन को वृह्द स्तर पर मनाकर हुई। सन् 1894 के पूर्व तक गणेश उत्सव को लोग घरों में ही मनाया करते थे। पुणे के शनिवारबाडा में वर्तमान समय में भी हजारों लोगो की भीड़ उमड़ती है। तिलक जी ने अंग्रेजों को चेतावनी दी थी कि अंग्रेज पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। असल में कानून के हिसाब से अंग्रेज पुलिस सिर्फ राजनीतिक समारोह में उमड़ी भीड़ को ही जेल में डाल सकती थी, धार्मिक समारोह में उमड़ी भीड़ को नही।

तिलक जी द्वारा शुरू की गई पहल के बाद पूरे 10 दिन 20 से 30 अक्टूबर 1894 के बीच पुणे के शनिवारबाड़ा में गणपति उत्सव मनाया गया। प्रतिदिन लोकमान्य तिलक भारतीयों को उद्बोधन देने के लिए किसी बड़े क्रांतिकारी को आमंत्रित करते थे। 20 तारीख को बंगाल के सबसे बड़े नेता बिपिन चन्द्र पाल तथा 21 तारीख को उत्तर भारत के लाला लाजपत राय वहां पहुंचे। इसी प्रकार चापेकर बंधू भी वहा पहुंचे। वहां 10 दिनों तक इन महान नेताओं के उद्बोधन होते रहे। सभी भाषणों का मुख्य आधार यही होता था कि हम भारत को अंग्रेजो से आजाद कराएं। गणपति जी हमें इतनी शक्ति दें की हम स्वराज्य लाएं।

दूसरे वर्ष यानी वर्ष 1895 में पुणे में 11 गणपति स्थापित किए गए। इसी प्रकार संख्या को बढ़ाते हुए अगले साल 31 और अगले साल यह संख्या एक सौ पार कर गई, जिसके बाद से गणेश उत्सव के कार्यक्रम ने मंच और पंडालों का रुप ले लिया। धीरे-धीरे पुणे के नजदीकी बड़े शहरो जैसे अहमदनगर, मुंबई, नागपुर आदि तक गणपति उत्सव फैलता गया। हर गणपति उत्सव पर लाखों लोगों की भीड़ जमा होती थी। उत्सव में आमंत्रित नेता उनमें देश प्रेम के भाव जाग्रत करने का कार्य करते थे। इस प्रकार का प्रयास सफल हुआ और लोगों के मन में देशभक्ति के प्रति भावना बढने लगी.स्वतंत्रता आन्दोलन में लोगों को एकजुट करने में इस प्रयास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1904 में लोकमान्य तिलक ने अपने भाषणों में लोगों से कहा था कि गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य आजादी हासिल करना है, स्वराज्य हासिल करना है, देश से अंग्रेजों को भगाना है। बिना स्वराज्य के गणपति उत्सव का कोई औचित्य नही है।

अगर इसके धार्मिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संदर्भ की बात करें तो भारत में गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाता है। यह दस दिनों तक चलने वाला हिंदू धर्म का पौराणिक पर्व है। युगों युगों से गणेश उत्सव का आयोजन होता आ रहा है। उत्सव के प्रमाण हमें सातवाहन, राष्ट्रकूट तथा चालुक्य वंश के काल से मिलते है। गणेश उत्सव को मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म और संस्कृति से जोड़कर एक नई शुरुआत की थी। मराठा शासकों के दौर से उत्सव के इस क्रम को जारी रखा गया है, जिसके बाद पेशवा राजवंशों ने गणेश उत्सव को व्यापक स्तर पर मनाए जाने का क्रम शुरू किया।

चूंकि गणेशजी पेशवाओं के कुलदेवता थे इसी कारण उनके शासन में गणेशजी को राष्ट्रदेव के रूप में दर्जा प्राप्त हो गया था। पेशवा वंशजों के बाद ब्रिटिश हुकूमत के दौर में सन् 1892 तक गणेश उत्सव केवल हिन्दू घरों तक ही सीमित था। संविधान के अनुसार भारत एक गण राज्य है और जो देवता गण यानी जनता जनार्दन का प्रतीक बनकर पूजे जाएं ऐसे ही देवता का नाम गणपति है, गणेश है। इस तरह कहा जा सकता है भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक जीवन में गणपति का जितना महत्व है उतना ही अंग्रेजों को भगाने और भारत के स्वराज की प्राप्ति के अभियान में भी उनका महत्व है। (लेखक भोजपुरी समाज (दिल्ली) के अध्यक्ष एवं मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार के पूर्व उपाध्यक्ष हैं।)

 

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 11-13 सितंबर के दौरान क्या खुला रहेगा और क्या बंद? जानिए Metro, स्कूल, बैंक और ट्रैफिक का पूरा अपडेट

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS Leaders’ Summit होने जा रहा है। भारत मंडपम में होने वाले इस बड़े सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई इलाकों में ट्रैफिक पर पाबंदियां रहेंगी। सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और दूसरे बड़े मेहमान शामिल होंगे। उनकी आवाजाही को देखते हुए 11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।

यहां बताया गया है कि 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली में क्या खुला रहेगा और क्या बंद रहेगा।

क्या-क्या बंद रहेगा?

स्कूल

BRICS समिट के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक इंतजामों के कारण, दिल्ली शिक्षा निदेशालय के तहत आने वाले सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त बिना सहायता वाले प्राइवेट स्कूल शुक्रवार, 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

सरकारी दफ्तर

NCT दिल्ली के तहत आने वाले दिल्ली सरकार के सभी दफ्तर, स्वायत्त निकाय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 11 सितंबर को बंद रहेंगे।

बता दें कि उपराज्यपाल ने BRICS समिट को देखते हुए दिल्ली में 11 सितंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

क्या-क्या खुला रहेगा?

बैंक

दिल्ली में 11 सितंबर को बैंक खुले रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के छुट्टियों के कैलेंडर में इस तारीख को बैंक की छुट्टी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।

प्राइवेट ऑफिस

प्राइवेट ऑफिस हमेशा की तरह काम करते रहेंगे। हालांकि, जो कर्मचारी सेंट्रल दिल्ली और VVIP मूवमेंट से प्रभावित अन्य इलाकों से गुजरेंगे, उन्हें ट्रैफिक पाबंदियों, डायवर्जन और देरी का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली मेट्रो

समिट के दौरान पूरे नेटवर्क पर दिल्ली मेट्रो की सेवाएं चालू रहेंगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर स्थित दिल्ली मेट्रो म्यूजियम 11 से 13 सितंबर तक बंद रहेगा।

बस, कैब और सड़कों का क्या होगा?

बस के रूट में बदलाव

विदेशी मेहमानों और VVIP के काफिले के आने-जाने के दौरान दिल्ली की बसों के रूट बदले जा सकते हैं या उन्हें कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। यात्रियों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी देख लेनी चाहिए।

कैब सेवाएं

कैब सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन ड्राइवरों को सलाह दी गई है कि वे VVIP के आने-जाने के दौरान प्रतिबंधित या नियंत्रित इलाकों में पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट न रखें।

ट्रैफिक से जुड़ी पाबंदियां

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राष्ट्राध्यक्षों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के लिए एक विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। समिट की व्यवस्थाओं के लिए लगभग 4,800 ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती की गई है।

मोटरकेड रिहर्सल और VVIP की आवाजाही के दौरान 22 चिन्हित डाइवर्जन पॉइंट्स पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा।

इसके अलावा, अलग-अलग समय पर 35 से ज्यादा सड़कों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जिनमें मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग और एपीजे अब्दुल कलाम रोड शामिल हैं।

ये पाबंदियां 10 सितंबर से शुरू होकर लगभग 14 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें VVIP की आवाजाही के आधार पर ट्रैफिक को डाइवर्ट किया जाएगा या कुछ समय के लिए रोका जाएगा।

सबसे ज्यादा परेशानी किसे हो सकती है?

नोएडा और पूर्वी दिल्ली से आने-जाने वाले लोग

नोएडा और पूर्वी दिल्ली से प्रगति मैदान, सेंट्रल दिल्ली और शहर के दूसरे हिस्सों की ओर जाने वाले लोगों को मुख्य कनेक्टिंग सड़कों पर लगी पाबंदियों के कारण देरी का सामना करना पड़ सकता है।

द्वारका और पश्चिमी दिल्ली

द्वारका और पश्चिमी दिल्ली से धौला कुआं, एयरपोर्ट और सेंट्रल दिल्ली की ओर जाने वाले लोगों को भी VVIP मूवमेंट के दौरान डायवर्जन और जाम का सामना करना पड़ सकता है।

दक्षिणी दिल्ली

साकेत में अपने होटल और सेंट्रल दिल्ली के बीच मिस्र के प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही से दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, खासकर पीक आवर्स के दौरान।

एयरपोर्ट और रेलवे यात्री

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल जाने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे जल्दी निकलें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलें। जहां भी संभव हो, दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

क्या पार्किंग की अनुमति होगी?

जिन सड़कों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हैं, वहां 200 मीटर के दायरे में सड़क के किनारे पार्किंग की अनुमति नहीं होगी।

वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे तय पार्किंग सुविधाओं का इस्तेमाल करें और प्रतिबंधित इलाकों में या उनके आस-पास पार्किंग करने से बचें।

क्या गूगल मैप्स और अन्य नेविगेशन ऐप्स प्रतिबंधों को दिखाएंगे?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने समिट से पहले ऑनलाइन मैप सर्विस देने वाली कंपनियों के साथ बैठकें की हैं।

ये प्लेटफॉर्म ट्रैफिक अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाएंगे और प्रतिबंधों, डायवर्जन और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी रियल-टाइम में अपडेट करेंगे ताकि यात्रियों को प्रभावित इलाकों से निकलने में मदद मिल सके।

दिल्ली में आने-जाने वालों को क्या करना चाहिए?

ट्रैफिक पर लगी पाबंदियां पूरे दिन लागू नहीं रहेंगी। अधिकारियों ने कहा कि VVIP के काफिले की आवाजाही के आधार पर इन्हें लागू किया जाएगा या इनमें ढील दी जाएगी।

आने-जाने वालों को सलाह दी जाती है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी देख लें, जहां तक ​​हो सके पाबंदी वाले रास्तों से बचें और शहर के प्रभावित इलाकों से गुजरने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करें।

11 सितंबर को स्कूल और दिल्ली सरकार के ऑफिस बंद रहेंगे, जबकि बैंक, प्राइवेट ऑफिस और मेट्रो सेवाएं चालू रहेंगी। ऐसे में BRICS समिट का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग राजधानी में कहां और कैसे सफर करते हैं।

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दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

Delhi building collapse case

दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले अदालत ने आरोपी हरिराम बंसल के बेटे को पुलिस कस्टडी में भेजा। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

 

सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोग मारे गए जबकि 12 लोगों का रेसक्यू किया गया था। हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में हरिराम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिल्डिंग उर्मिला की थी, उसका बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था और उसका मैनेजमेंट बेटा संभालता था।

 

दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामल में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। ALSO READ: Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

 

क्या है CJP की मांग?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

कुत्ता टहलाने पर भेज दिए गए थे लद्दाख, फिर कर ली दिल्ली वापसी; अब सत्य निकेतन हादसे में घिरे! जानिए कौन हैं IAS संजीव खिरवार

Who is IAS Sanjeev Khirwar: दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में अपना कुत्ता टहलाने के चक्कर में विवादों में आए और दिल्ली से सीधे लद्दाख ट्रांसफर कर दिए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

जनवरी 2026 में एमसीडी (MCD) कमिश्नर के रूप में दिल्ली वापसी करने वाले संजीव खिरवार अब दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे के बाद चौतरफा घिर गए हैं। इस हादसे के बाद कई छात्र संगठनों ने नगर निगम की लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

आइए आपको बताते हैं कि आखिर कौन हैं आईएएस संजीव खिरवार, क्या था उनका पुराना कुत्ता टहलाने वाला विवाद और अब वे नए विवाद में क्यों फंसे हैं।

कौन हैं संजीव खिरवार?

संजीव खिरवार 1994 बैच के AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। उनके पास कंप्यूटर इंजीनियरिंग में B.Tech और इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री है। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत चंडीगढ़ में SDM के रूप में की थी। इसके बाद वे दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे।

साल 2022 का ‘डॉग-वॉकिंग’ विवाद, जिससे हुआ था लद्दाख ट्रांसफर

साल 2022 में संजीव खिरवार तब पूरे देश में चर्चा में आए थे, जब दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम से एक तस्वीर वायरल हुई थी। स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले एथलीटों और कोचों ने आरोप लगाया था कि उन्हें शाम 7 बजे तक ट्रेनिंग खत्म कर स्टेडियम खाली करने को कहा जाता था, ताकि आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार वहां अपने पालतू कुत्ते को टहला सकें।

वैसे स्टेडियम प्रशासक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि 7 बजे का समय ट्रेनिंग खत्म होने का आधिकारिक शेड्यूल था। लेकिन विवाद इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए खिरवार का ट्रांसफर दिल्ली से सुदूर लद्दाख कर दिया था।

जनवरी 2026 में की दिल्ली वापसी और MCD चीफ का संभाला मोर्चा

लद्दाख में अपनी सेवाएं देने के बाद गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में संजीव खिरवार को वापस दिल्ली बुला लिया। उन्हें अश्वनी कुमार की जगह MCD कमिश्नर की कमान सौंपी गई। दिल्ली वापसी के बाद माना जा रहा था कि उनके करियर का नया अध्याय शुरू होगा, लेकिन कुछ ही महीनों में वे एक बड़े नागरिक हादसे के केंद्र में आ गए।

सत्य निकेतन इमारत हादसे में क्यों मांगे जा रहे हैं इस्तीफे?

छात्रों के हॉस्टल और पीजी के लिए मशहूर सत्य निकेतन इलाके में एक 5 मंजिला इमारत ढह गई, जिसके बाद एमसीडी की बिल्डिंग सेफ्टी और अनधिकृत निर्माण पर सवाल खड़े हो गए हैं।

छात्र संगठनों ने एमसीडी मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि इलाके में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों पर एमसीडी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह हादसा हुआ। छात्र संगठन अब संजीव खिरवार के इस्तीफे पर अड़े हैं।

विवाद बढ़ता देख एमसीडी कमिश्नर ने नगर निगम के पक्ष का बचाव करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में एमसीडी ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया है, जिसके तहत सैकड़ों अवैध इमारतों को सील और ध्वस्त किया गया है।

कौन है हरिराम बंसल जिसे दिल्ली बिल्डिंग हादसे में पुलिस ने किया गिरफ्तार?

कौन है हरिराम बंसल जिसे दिल्ली बिल्डिंग हादसे में पुलिस ने किया गिरफ्तार?

Delhi building collapse : hariram bansal arrested

दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में 7 लोगों की मौत के मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए हरिराम बंसल को गिरफ्तार किया है। दिल्ली सरकार ने भी इस मामले में सख्‍त कार्रवाई करते हुए एमसीडी के 5 अधिकारियों को सस्पैंड किया है। ALSO READ: LIVE: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 7 की मौत, बिल्डिंग मालिक पर FIR

 

'हॉस्टल डेज' नाम की यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी के तौर पर चल रही थी। और घटना के समय वहां कई छात्र रह रहे थे। बिल्डिंग के गिरने से आसपास की कई इमारतें भी कमजोर हो गई है। 

 

बिल्डिंग का मालिक था हरिराम

हरिराम बंसल सत्य निकेतन की 30 साल पुरानी उस बिल्डिंग का मालिक है, जो रविवार को गिर गई थी। हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने हरिराम बंसल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 290 (इमारतों को गिराने, मरम्मत करने या बनाने में लापरवाही) और 125-A (दूसरों की जान या निजी सुरक्षा को खतरे में डालने वाले काम) के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR के बाद उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। ALSO READ: गृहमंत्री शाह ने ली दिल्‍ली इमारत हादसे की जानकारी, 5 लोगों की हुई मौत, अब तक 11 का हुआ रेस्‍क्‍यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

 

कैसे हुई हरिराम की गिरफ्‍तारी?

हरिराम को पकड़ने के लिए 10 टीमें तीन राज्यों में छापेमारी कर रही थी। इन टीमों में लोकल डिस्ट्रिक्ट पुलिस, स्पेशल स्टाफ और दूसरी ऑपरेशनल यूनिट्स के जवान शामिल थे। हर टीम की अगुवाई एडिशनल DCP रैंक के एक अफसर कर रहे थे। इस टीमों ने हरिराम की तलाश में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी छापेमारी की। बंसल का गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित मकान पर ताला लगा था तो उसकी हार्डवेयर की दुकान भी बंद थी। 

 

गृहमंत्री शाह ने ली दिल्‍ली इमारत हादसे की जानकारी, 2 लोगों की हुई मौत, अब तक 8 का हुआ रेस्‍क्‍यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

गृहमंत्री शाह ने ली दिल्‍ली इमारत हादसे की जानकारी, 2 लोगों की हुई मौत, अब तक 8 का हुआ रेस्‍क्‍यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

Home Minister Amit Shah took stock of Delhi building collapse incident

Delhi building collapse case : दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।

 

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है।

राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में एक व्‍यक्ति की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।

 

गृहमंत्री अमित शाह ने ली हादसे की जानकारी

हादसे की जानकारी मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गोवा का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। गृहमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के ढहने से बहुत दुख हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और NDRF के डायरेक्टर जनरल से बात की और जमीनी हालात का जायजा लिया। स्थानीय प्रशासन और NDRF मिलकर तेजी से बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को हर जरूरी मेडिकल मदद दी जा रही है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।

 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे समन्वय बनाए रखें और बचाव कार्य को तेज करें। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। राहत-बचाव अभियान चल रहा है और टीमें जमीन पर आवश्यक सहायता मुहैया करा रही हैं।

दिल्ली फायर सर्विसेज को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, जिसके बाद तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घटना के संबंध में करीब 1:34 बजे साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को PCR कॉल भी मिली। कॉल में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत के गिरने की जानकारी दी गई थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

मौके पर आठ फायर टेंडर तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: दिल्ली के 2.30 लाख परिवारों को तोहफा! घर की छत पर मुफ्त लगेगा 3 KW का सोलर पैनल, सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: देश की राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 2.30 लाख घरों की छतों पर तीन किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि पात्र परिवारों को इसके लिए अपनी जेब से शुरुआती रकम खर्च नहीं करनी होगी। योजना के तहत केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर सिस्टम लगाने का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा।

‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का है। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

400 यूनिट तक बिजली खपत वाले घरों को मिलेगा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है। तीन किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम घरेलू जरूरतों के एक बड़े हिस्से की बिजली पैदा करने में मदद करेगा। इससे ऐसे परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की संभावना है। सरकार का मकसद केवल बिजली का बिल कम करना नहीं है। बल्कि दिल्ली के घरों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना भी है। यानी जिस घर की छत पर सोलर पैनल लगेगा, वह खुद बिजली पैदा कर सकेगा। इससे अपनी जरूरत के मुताबिक उसका इस्तेमाल कर सकेगा।

78 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार भी 78 हजार रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी देने की व्यवस्था करेगी। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बड़ी रकम का बोझ उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘पीएम सूर्य घर’ योजना के मुताबिक, इंस्टॉलेशन का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है। इसके तहत मार्च 2027 तक सभी पात्र 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभ लेने के लिए पहले पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं

इस योजना की एक अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए कोई एडवांस राशि नहीं देनी होगी। सरकार की ओर से प्रक्रिया पूरी कराकर पात्र घरों पर सिस्टम लगाया जाएगा। हालांकि, यदि सोलर सिस्टम की कुल लागत और उपलब्ध सब्सिडी के बीच अंतर रहता है, तो राज्य सरकार द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इससे आम परिवारों के लिए योजना का लाभ लेना आसान होगा।

घरों को बिजली उत्पादक बनाना लक्ष्य

दिल्ली सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल बिजली के बिल में कमी लाना नहीं है। इसके जरिए घरों को क्लीन एनर्जी का उत्पादक बनाना भी लक्ष्य है। रूफटॉप सोलर से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे लंबे समय में बिजली की मांग और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही दिल्ली में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्च 2027 तक पूरा करने की तैयारी

सरकार ने PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को तेजी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2027 तक 2.30 लाख पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे दिल्ली के बड़ी संख्या में परिवारों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर मध्यम और कम बिजली खपत वाले परिवारों के लिए यह योजना घरेलू बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

दिल्ली में बढ़ेगा रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घरों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करना सरकार की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि 2.30 लाख घरों पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, तो इससे राजधानी में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

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सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत देने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले महीनों में पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने और सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगवाने के लिए किसी भी तरह का एडवांस भुगतान नहीं करना होगा।