PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: दिल्ली के 2.30 लाख परिवारों को तोहफा! घर की छत पर मुफ्त लगेगा 3 KW का सोलर पैनल, सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: देश की राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 2.30 लाख घरों की छतों पर तीन किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि पात्र परिवारों को इसके लिए अपनी जेब से शुरुआती रकम खर्च नहीं करनी होगी। योजना के तहत केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर सिस्टम लगाने का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा।

‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का है। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

400 यूनिट तक बिजली खपत वाले घरों को मिलेगा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है। तीन किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम घरेलू जरूरतों के एक बड़े हिस्से की बिजली पैदा करने में मदद करेगा। इससे ऐसे परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की संभावना है। सरकार का मकसद केवल बिजली का बिल कम करना नहीं है। बल्कि दिल्ली के घरों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना भी है। यानी जिस घर की छत पर सोलर पैनल लगेगा, वह खुद बिजली पैदा कर सकेगा। इससे अपनी जरूरत के मुताबिक उसका इस्तेमाल कर सकेगा।

78 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार भी 78 हजार रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी देने की व्यवस्था करेगी। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बड़ी रकम का बोझ उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘पीएम सूर्य घर’ योजना के मुताबिक, इंस्टॉलेशन का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है। इसके तहत मार्च 2027 तक सभी पात्र 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभ लेने के लिए पहले पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं

इस योजना की एक अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए कोई एडवांस राशि नहीं देनी होगी। सरकार की ओर से प्रक्रिया पूरी कराकर पात्र घरों पर सिस्टम लगाया जाएगा। हालांकि, यदि सोलर सिस्टम की कुल लागत और उपलब्ध सब्सिडी के बीच अंतर रहता है, तो राज्य सरकार द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इससे आम परिवारों के लिए योजना का लाभ लेना आसान होगा।

घरों को बिजली उत्पादक बनाना लक्ष्य

दिल्ली सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल बिजली के बिल में कमी लाना नहीं है। इसके जरिए घरों को क्लीन एनर्जी का उत्पादक बनाना भी लक्ष्य है। रूफटॉप सोलर से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे लंबे समय में बिजली की मांग और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही दिल्ली में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्च 2027 तक पूरा करने की तैयारी

सरकार ने PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को तेजी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2027 तक 2.30 लाख पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे दिल्ली के बड़ी संख्या में परिवारों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर मध्यम और कम बिजली खपत वाले परिवारों के लिए यह योजना घरेलू बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

दिल्ली में बढ़ेगा रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घरों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करना सरकार की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि 2.30 लाख घरों पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, तो इससे राजधानी में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

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सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत देने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले महीनों में पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने और सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगवाने के लिए किसी भी तरह का एडवांस भुगतान नहीं करना होगा।

Delhi Lakshmi Yojana First Installment: कंफर्म हो गया, 26 अगस्त को लक्ष्मी योजना की जारी होगी पहली किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटस

Delhi Lakshmi Yojana First Installment: दिल्ली की महिलाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना की पहली किस्त 26 अगस्त को जारी होने जा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बुधवार को एक भव्य कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के खातों में 2500 रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर करेंगी। इस योजना की शुरुआत दिल्ली में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से की गई है।

तालकटोरा स्टेडियम में भव्य कार्यक्रम, 2500 महिलाओं को मिलेगी किस्त

इस योजना की पहली किस्त जारी करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 26 अगस्त की सुबह 11 बजे शुरू होगा। इस विशेष समारोह में लगभग 2500 महिलाओं को सांकेतिक रूप से पहली किस्त दी जाएगी। आपको बता दें कि दिल्ली लक्ष्मी योजना 1 अगस्त से प्रभावी हुई थी और अब तक इस योजना के तहत 6 लाख से अधिक महिलाओं ने अपना पंजीकरण कराया है।

2500 रुपये का पूरा गणित: बैंक खाते और एफडी/आरडी का नियम

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जानी है। ये मदद 1 सितंबर से लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होना शुरू हो जाएगी। हालांकि इस 2500 रुपये की राशि को पूरा का पूरा अकाउंट में नहीं भेजा जाएगा। बाय डिफॉल्ट 2500 रुपये में से 1500 रुपये लाभार्थी महिला के RD या फिक्स्ड डिपॉजिट (खाते में जमा किए जाएंगे। बाकी 1000 रुपये लाभार्थी के उस बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे जो सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट से जुड़ा होगा। आरडी या एफडी में जमा की गई राशि पर 31 जुलाई 2029 तक लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा।

अगर कोई लाभार्थी महिला चाहे तो वह पूरी 2500 रुपये की राशि को भी एफडी या आरडी में जमा करने का विकल्प चुन सकती है, जिस पर भी समान समय तक लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा।

ऐसे चेक करें अपनी एप्लीकेशन का स्टेटस

अगर आपने दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन किया है और अपने आवेदन की स्थिति देखना चाहते हैं, तो इन आसान स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:

  • सबसे पहले दिल्ली लक्ष्मी योजना के आधिकारिक पोर्टल dly.delhi.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर दिखाई दे रहे Track Application विकल्प पर क्लिक करें।
  • इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर, जन्म तिथि और स्क्रीन पर दिखाई दे रहा कैप्चा डालना करना होगा।
  • सभी जानकारी भरने के बाद Sign In बटन पर क्लिक करें। इसके बाद आपके आवेदन का स्टेटस स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा।

क्या अभी भी किया जा सकता है आवेदन?

जो महिलाएं अभी तक इस योजना में आवेदन नहीं कर सकी हैं, वे पोर्टल पर जाकर कभी भी आवेदन कर सकती हैं। दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरे साल खुली रहेगी। इसके लिए महिलाएं dly.delhi.gov.in/Account/Login पर जाकर आवेदन कर सकती हैं। हर महीने की अंतिम तारीख को उस महीने मिलने वाले आवेदनों के लिए कट-ऑफ तारीख माना जाएगा। इसके बाद स्वीकृत होने वाले पात्र आवेदनों को अगले महीने से योजना का लाभ दिया जाएगा।

कौन कर सकता है आवेदन? पात्रता और शर्तें

दिल्ली लक्ष्मी योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता मापदंड तय किए हैं-

  • आवेदन जमा करने की तिथि पर महिला की आयु 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह अपने परिवार की सबसे बड़ी महिला सदस्य होनी चाहिए।
  • परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • महिला दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक, उसके पति या उसके माता-पिता में से कोई भी आवेदन की तिथि पर कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना चाहिए।
  • पिछले 12 महीनों के दौरान परिवार की बिजली की खपत 2400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

कौन नहीं होगा पात्र?

  • सरकारी पेंशन या नियमित वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
  • आयकरदाता, जीएसटी भरने वाले, सरकारी कर्मचारी और जन प्रतिनिधि इस योजना से बाहर रखे गए हैं।
  • अगर आवेदक या उसके परिवार का कोई सदस्य चार पहिया वाहन का मालिक है या सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बोर्ड या स्थानीय निकाय में काम करता है तो लाभ नहीं मिलेगा।
  • जिन आवेदकों के 3 से अधिक बच्चे हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, वे भी इस योजना की शर्तों के तहत अपात्र हैं।

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स्वाइन फ्लू को लेकर ICMR का बड़ा बयान, देश में नहीं मिला कोई नया वेरिएंट, जानिए कहां बढ़ रहे H1N1 के मरीज?

स्वाइन फ्लू को लेकर ICMR का बड़ा बयान, देश में नहीं मिला कोई नया वेरिएंट, जानिए कहां बढ़ रहे H1N1 के मरीज?

ICMR's major statement on swine flu

ICMR's major statement on swine flu : देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है। स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।

 

देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है।

 

स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।

 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान वायरस मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल वायरस से मेल खाता है। लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण बिगड़ने पर थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इन लोगों में बीमारी की वजह से परेशानी थोड़ी बढ़ सकती है। अगर किसी के लक्षण 3-4 दिन में ठीक न हों, या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कत होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। H1N1 के लक्षण आम मौसमी फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं।

 

यहां बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में इन्फ्लूएंजा ए के 2392 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के हैं। मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर, बेड और दवाइयां पर्याप्त हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रख रहा है।

 

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। अब तक 38 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 25 मरीज रायपुर के हैं। रायपुर में मिले मरीजों में आधे से अधिक अभी एक्टिव हैं। इसके अलावा बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, बस्तर, बेमेतरा और रायगढ़ में भी मरीज मिले हैं। इसे लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट है।

 

मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उज्जैन में एच-1एन-1 संक्रमण से ग्रस्त महिला की मौत के बाद अब प्रदेशभर से स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने लगे हैं। बीते 5 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो इंदौर और उज्जैन में स्वाइन फ्लू के 4 मामले सामने आए थे, जबकि सिर्फ शनिवार को ही अलग-अलग शहरों से 3 संकर्मितों की पुष्टि हुई है।

गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो सांस के जरिए, खांसने या छींकने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। सही समय पर आराम, तरल पदार्थों के सेवन और डॉक्टर की सलाह से यह ठीक हो जाता है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 26 अगस्त से बांटे जाएंगे सैंक्शंस लेटर, महिलाओं के खाते में इस दिन से आएंगे ₹2,500!

Delhi Lakshmi Yojana 2026: दिल्ली सरकार की ‘लक्ष्मी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को 26 अगस्त से आर्थिक सहायता के सैंक्शन लेटर मिलना शुरू हो जाएंगे। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (18 अगस्त) को दिल्ली सचिवालय में हुई बैठक के बाद यह अहम जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सैंक्शन लेटर जारी होने के बाद योजना की राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी। सरकार के अनुसार, 1 सितंबर से महिलाओं के खातों में 2,500 रुपये की राशि जमा होना शुरू हो जाएगी।

सरकार ने 1 अगस्त से इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन मिलने के बाद सरकार ने आवेदनकर्ताओं की जांच और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए।

कौन महिलाएं होंगी पात्र?

इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला की उम्र 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए। साथ ही वह दिल्ली की निवासी हो और उसकी पारिवारिक आय निर्धारित सीमा के भीतर हो। आवेदन करने वाली महिला की आयु 18 साल से अधिक होने के साथ-साथ वह दिल्ली में कम से कम 10 वर्षों से रह रही होनी चाहिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला या उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी अथवा पेंशनभोगी होने पर वह योजना के लिए पात्र नहीं होगी। आयकर दाता परिवारों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा, जो महिलाएं पहले से किसी अन्य सरकारी योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं, वे भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगी। सरकारी नियमों के अनुसार, जिन महिलाओं या उनके परिवार के सदस्यों के पास चार पहिया वाहन है, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन को इस नियम से अलग रखा गया है।

बैंक खाते में सीधे पहुंचेगी स्कीम की राशि

सरकार ने योजना में भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी रखने पर जोर दिया है। पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में डायरेक्ट भेजे जाएंगे। इसके लिए लाभार्थी के बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, यदि किसी महिला के परिवार में सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता या निर्धारित सीमा से अधिक आय वाला सदस्य है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगी। वहीं, परिवार के किसी सदस्य के पास चार पहिया वाहन होने की स्थिति में भी आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया पर रखी जा रही नजर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक में योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता न हो और पात्र महिलाओं को समय पर योजना का लाभ मिले। सरकार ने बताया कि आवेदन की जांच पूरी होने के बाद लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए जाएंगे।

26 अगस्त से स्वीकृति पत्र मिलने शुरू होंगे और 1 सितंबर से बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि लक्ष्मी योजना का उद्देश्य दिल्ली की जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। योजना के लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।

पैसा प्राप्त करने का विकल्प

लाभार्थियों को राशि प्राप्त करने के लिए विकल्प दिए गए हैं:-

पहला विकल्प: दैनिक खर्चों के लिए ₹1,000 प्रति माह सेंट्र्ल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट में प्राप्त कर सकते हैं और बाकी ₹1,500 को आवर्ती जमा (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खाते में जमा करा सकते हैं।

दूसरा विकल्प: लंबी अवधि की बचत के लिए पूरी ₹2,500 की राशि को RD या FD में जमा करा सकते हैं।

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दिल्ली में चलेंगी 200 नई इलेक्ट्रिक बसें, इनमें 56 लेडीज स्पेशल! DU के इन कॉलेजों तक मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

Delhi Public Transport: दिल्ली सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर और राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि दिल्ली सरकार जल्द ही 200 नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत करने जा रही है। इनमें से 56 बसें लेडीज स्पेशल होंगी। ये स्पेशल बसें बिजी रूट वाले यूनिर्सिटी इलाकों को ध्यान में रखकर चलाई जाएंगी। बुधवार को होने वाले इस नए लॉन्च के साथ ही दिल्ली में 6800 बसों की फ्लीट हो जाएगी। इसमें 4938 इलेक्ट्रिक बसें और 1750 सीएनजी बसें होंगी।

दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रा को मजबूत करने के साथ पर्यावरण और सस्टेनेबल मोबिलिटी के लक्ष्यों को देखते हुए ये कदम उठाया जा रहा है।

56 लेडीज स्पेशल बसें: कामकाजी महिलाओं और छात्रों के लिए खास सुविधा

परिवहन विभाग की योजना के मुताबिक दिल्ली परिवहन निगम (DTC) अधिक डिमांड वाले 15 रूटों पर 30 लेडीज स्पेशल ट्रिप्स शुरू करेगा। इसके अलावा 13 रूटों पर 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल (U-SPL) ट्रिप्स चलाई जाएंगी। मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि वर्किंग वूमने और छात्राओं की रोजाना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे डिजाइन किया गया है। ये खास बसें पीक आवर्स के दौरान सर्विस देंगी और आवासीय क्षेत्रों को नेहरू प्लेस, एम्स (AIIMS), साउथ एक्सटेंशन, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय, करोल बाग, कश्मीरी गेट और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख रोजगार और सरकारी केंद्रों से जोड़ेंगी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी नई लो-फ्लोर एसी बसें

परिवहन मंत्री के मुताबिक ये सभी बसें लो-फ्लोर और एसी वाली होंगी। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए इनमें आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक्स बटन, रियल-टाइम ट्रैकिंग और दिव्यांग यात्रियों के लिए एक्सेसिबिलिटी से जुड़े फीचर्स शामिल हैं। नए बेड़े के तहत 12-मीटर की 88 इलेक्ट्रिक बसें और DEVI 9-मीटर की 112 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जा रही हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के इन प्रमुख कॉलेजों तक मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

अधिकारियों के मुताबिक यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल सेवाएं छात्राओं के लिए यूनिवर्सिटी आने-जाने की टेंशन को खत्म करेंगी। यह सेवा दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थानों को जोड़ेगी। इनमें हिंदू कॉलेज, रामजस कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज, एलएसआर / लेडी श्री राम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज, एसपीएम कॉलेज और देशबंधु कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं।

दिल्ली-करनाल ऐतिहासिक रूट पर भी दौड़ेंगी 5 ई-बसें

परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने यह भी बताया कि डीटीसी ऐतिहासिक दिल्ली-करनाल रूट पर भी 5 पूरी तरह से इलेक्ट्रिक, वातानुकूलित बसें शुरू करेगा। लगभग 133 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर यह सेवा दोनों ओर रोजाना 10 ट्रिप्स देगी।

दिल्ली की इन 3 सरकारी कॉलोनियों में टूटेंगे पुराने फ्लैट्स, PWD बनाने जा रहा है चमचमाती बहुमंजिला इमारतें, जानिए पूरा प्लान

Plans to redevelop three colonies in Delhi: दिल्ली सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी कॉलोनियों को फिर से रीडेवलप कर वहां अधिकारियों के लिए शानदार बहुमंजिला इमारतें (हाई-राइज टावर्स) बनाने की बड़ी योजना का ऐलान किया है। यह पुनर्विकास परियोजना गुलाबी बाग, बहापुर और कल्याणवास इलाकों में लागू की जाएगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार इन क्षेत्रों में मौजूद पुराने और जर्जर हो चुके फ्लैटों को ढहाकर उनकी जगह मॉर्डन बहुमंजिला फ्लैट्स बनाने जा रही है।

इसे दिल्ली सरकार की ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत बनाया जाएगा। इस नीति के तहत रेल और मेट्रो लाइनों के आसपास हाई डेंसिटी वाले कॉरिडोर डेवलप किए जाएंगे। इससे आवासीय इलाकों के ठीक पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी हासिल की जा सकेगी।

पुराने और खस्ताहाल फ्लैट्स की जगह बनेंगे हाई-राइज टावर्स

लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को नए और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस घर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में अभी फ्लैट्स की स्थिति बेहद खराब है। योजना के तहत इन सभी जगहों पर सिर्फ हाई-राइज टावर्स ही बनाए जाएंगे। इसके लिए बहुत जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इसे सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। ये केंद्र सरकार की जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) योजना जैसी होगी।

कॉमर्शियल इस्तेमाल से निकलेगा खर्च, नए सचिवालय के लिए भी जुटेगा फंड

सरकार ने इस पुनर्विकास परियोजना का खर्च निकालने के लिए भी एक विशेष रणनीति बनाई है। यहां बनने वाले फ्लैट्स का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा कमर्शियल उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे जो रेवेन्यू मिलेगा उससे न सिर्फ रीडेवलपमेंट का कॉस्ट निकलेगा बल्कि इस कमाई का इस्तेमाल आईटीओ पर बनने वाले दिल्ली सरकार के नए सचिवालय कॉन्प्लेक्स पर भी किया जाएगा।

गुलाबी बाग, कल्याणवास और बहापुर का ऐसा है मास्टर प्लान

सरकार ने इस परियोजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन कर लिया है। कल्याणवास में 32 एकड़ जमीन और गुलाबी बाग में लगभग 70 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। यहां टाइप II, टाइप III और टाइप IV कैटिगरी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

दक्षिण दिल्ली के बहापुर इलाके में सबसे पहले हाई राइज बनेगा। यहां नए आवासों की जरूरत तत्काल है। बहापुर आवासीय परिसर परियोजना पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

PSUs और केंद्र सरकार को भी दिए जा सकेंगे फ्लैट्स

बहापुर परियोजना का डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यहां अधिकारियों के लिए लगभग 160 टाइप V और टाइप VI श्रेणी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे। गुलाबी बाग और कल्याणवास के अन्य दो क्षेत्रों में बनने वाले फ्लैटों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की कंपनियों और केंद्र सरकार को आमंत्रित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर वे अपने कर्मचारियों के लिए इन फ्लैटों को ले सकें।

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MBBS Seats: दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी 408 नई मेडिकल सीटें, जानें किस कोर्स में बढ़ने जा रही हैं कितनी सीटें

MBBS Seats: दिल्ली सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत सरकार ने मेडिकल शिक्षा क्षमता विस्तार के लिए रोडमैप तैयार किया है। साथ ही सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, पीजी और डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना है। साथ ही राजधानी की स्वास्थ्य सेवा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत चिकित्सा कार्यबल का निर्माण करना है। दिल्ली सरकार की योजना के तहत, नए और मौजूदा मेडिकल संस्थानों में 300 एमबीबीएस सीटें और 103 पीजी/डीएनबी सीटें जोड़ी जाएंगी। पांच फेलोशिप सीटों का भी प्रस्ताव है, जिससे नई मेडिकल सीटों की कुल संख्या 408 हो जाएगी।

अस्पताल-वार सीट विस्तार का प्रस्ताव

ग्रीनफील्ड मॉडल के तहत, इंदिरा गांधी अस्पताल (IGH) और द्वारका के गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में विकसित किए जा रहे मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 150 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव है मेडिकल कॉलेज में PG सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) में बीडीएस सीटों की संख्या भी 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में पीजी सीटों को 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है, जबकि एमएआईडीएस में पीजी सीटें 22 से बढ़कर 42 हो जाएंगी। बीएसए मेडिकल कॉलेज में भी 24 सीटों के साथ नए पीजी कोर्स शुरू होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सरकार के रोडमैप में अलग-अलग सरकारी मेडिकल संस्थानों में 103 नई पीजी/डीएनबी सीटों का प्रावधान है, जिसमें 67 एमडी/एमएस और 36 डीएनबी सीटें शामिल हैं। इसके अलावा, पांच फेलोशिप सीटों का प्रस्ताव है—तीन जीटीबी हॉस्पिटल में और दो दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में। इससे पीजी, डीएनबी और फेलोशिप लेवल पर नई सीटों की कुल संख्या 108 हो जाएगी।

डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद ज्यादा ट्रेंड डॉक्टर, स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट तैयार करना है जो दिल्ली के लोगों को बेहतर हेल्थकेयर दे सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की लीडरशिप में, सरकार लगातार चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ा रही है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और पेशेंट-केयर सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है।

सरकार डीएम/एमसीएच और स्ट्रक्चर्ड पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप जैसे सुपर-स्पेशियलिटी प्रोग्राम को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। प्रस्तावित रोडमैप को लागू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) समेत सक्षम अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लेने का प्रोसेस अभी चल रहा है।

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Delhi 2047 का मास्टर प्लान पास, DDA के पुराने मकानों को मिलेगी नई जिंदगी! मेट्रो, सड़क सब पर असर

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के विकास को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने कई बड़े फैसले लिए हैं। DDA की बैठक में Master Plan for Delhi-2047 को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल और DDA के चेयरमैन सरदार तरनजीत सिंह संधू ने की। अब इस प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा।

दिल्ली का विकास कैसे होगा?

Master Plan 2047 में दिल्ली के आने वाले वर्षों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें आवास, रोजगार, ट्रांसपोर्ट, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर के विकास को एक साथ कई क्षेत्रों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

इसमें पुराने इलाकों को बेहतर बनाने, ऐतिहासिक जगहों को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी ध्यान दिया गया है। प्लान तैयार करने से पहले दिल्ली सरकार, MCD, NDMC, DJB, DMRC, NCRTC और RWAs समेत कई संस्थाओं से चर्चा की गई थी।

पुराने DDA मकानों का पुनर्निर्माण आसान होगा

DDA ने पुराने दो मंजिला मकानों के पुनर्निर्माण के लिए एक समान नीति को भी मंजूरी दी है। इसका फायदा 50 साल से ज्यादा पुराने उन DDA मकानों को मिलेगा, जो अब जर्जर या कमजोर हो चुके हैं।

पहले ऐसे बने-बनाए मकानों के पुनर्विकास के लिए एक समान नियम नहीं थे। अब इन मकानों को खाली रिहायशी प्लॉट की तरह रीडेवपलमेंट का अधिकार मिलेगा। हालांकि, इसके लिए FAR, ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी जैसे नियमों का पालन करना होगा।

रिठाला-कुंडली मेट्रो को भी बढ़ावा

DDA ने नरेला सब-सिटी में रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलने को मंजूरी दी है। जमीन का इस्तेमाल अब ट्रांसपोर्टेशन के लिए किया जा सकेगा।

रिठाला से कुंडली तक मेट्रो विस्तार से नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, रोहिणी और नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के कुंडली तक पहुंच भी आसान होगी। DDA को उम्मीद है कि इससे नरेला में आवास, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और दूसरे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

बिल्डिंग परमिशन में भी राहत

DDA ने Unified Building Bye-Laws यानी UBBL-2016 में बदलाव को मंजूरी दी है। इसका मकसद बिल्डिंग प्लान की मंजूरी को आसान बनाना है।

अब बिल्डिंग परमिट के लिए DPCC, Chief Inspector of Factories, Delhi Jal Board और Forest Department से पहले NOC लेने की जरूरत को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रोजेक्ट की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सकता है।

कई जमीनों के लैंड यूज में बदलाव

DDA ने रोशनपुरा में 7,978 वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज बदलने को भी मंजूरी दी है। यहां Veterinary Council of India का मुख्यालय बनाया जाना है। सरोजिनी नगर के पास 24,400 वर्ग मीटर जमीन को ट्रांसपोर्टेशन से रेजिडेंशियल में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है।

इसके अलावा Copernicus Lane में तीन प्लॉट का लैंड यूज रेजिडेंशियल से पब्लिक और सेमी-पब्लिक करने की मंजूरी दी गई। यहां भारतीय विद्या भवन अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है।

DDA ने मंगोलपुरी और केशोपुर के कुछ इंडस्ट्रियल एरिया को डी-नोटिफाई करने का फैसला भी लिया। वहीं, Gazipur में Waste-to-Energy प्लांट के लिए जमीन का लैंड यूज कमर्शियल से यूटिलिटी करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ग्रीन एरिया बढ़ाने के लिए भी जमीन के इस्तेमाल में बदलाव किया गया है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में अब सामने आईं ये 5 मांगें, पांच बड़े अपडेट जान लीजिए

8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग ने दिल्ली में 7 अगस्त को केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज यूनियंस, पेंशनर्स और मामले से जुड़े दूसरे पक्षों के साथ चर्चा शुरू कर दी। आयोग दिल्ली में 10 अगस्त तक एंप्लॉयीज के प्रतिनिधिमंडलों से वेतन में संशोधन को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश करेगा। इससे पहले आयोग कोलकाता सहित देश के कई शेयरों में वेतन में संशोधन को लेकर एंप्लॉयीज के प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा कर चुका है।

अगले हफ्तों में इन शहरों में प्रतिनिधिमंडलों की राय जानेगा आयोग

आयोग का कार्यक्रम आने वाले हफ्तों में चेन्नई, पुद्दुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर जाने का है। इन शेयरों में वह केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों के साथ वेतन में संशोधन को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश करेगा। आठवें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था। इसे 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट देनी है। मान जा रहा है कि अगले साल जून तक यह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। सरकार रिपोर्ट पर विचार करने के बाद एंप्लॉयीज के वेतन में संशोधन का फैसला लेगी।

केंद्र सरकार के स्कूलों के शिक्षकों ने आयोग को बताई मांगें

सूत्रों ने बताया कि आयोग को दिल्ली में केंद्र सरकार के स्कूलों के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी मांगों के बारे में बताया है। इनमें कुछ नई मांगें भी शामिल हैं। एक प्रमुख मांग शिक्षकों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की है। उनका कहना है कि इसे बढ़ाकर 65 साल किया जाना चाहिए। अगर सरकार यह मांग मानती है तो इससे केंद्र सरकार के स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती पर असर पड़ सकता है।

शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों की पांच सबसे प्रमुख मांगे

दूसरी मांग टीचर्स के प्रमोशन से जुड़ी है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि स्कूलों में 50 फीसदी डिपार्टमेंट टीचर्स का प्रमोशन प्रिंसिपल के पोस्ट पर होना चाहिए। इसके अलावा हर विषय के प्रमुख के लिए नया प्रमोशनल पोस्ट बनाया जाना चाहिए। इसका ग्रेड पे 5,400 होना चाहिए। वाइस-प्रिंसिपल का ग्रेड पे बढ़ाकर 6,600 रुपये किया जाना चाहिए। इसके अलावा टीचर्स एसोसिएशंस ने लीव की संख्या बढ़ाए जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के शिक्षकों को भी सीजीएचएस मेडिकल सुविधा मिलनी चाहिए।

नए फिटमेंट फैक्टर पर लगी एंप्लॉयीज की नजरें  

इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर सैलरी में 30-34 फीसदी तक इजाफा हो सकता है। नजरें फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हैं। आयोग की तरफ से तय फिटमेंट फैक्टर पर ही सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी निर्भर करेगी।

1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है फिटमेंट फैक्टर

सूत्रों का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को रूप में भी काफी पैसे मिलेंगे। इससे बाजार में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर में मांग बढ़ सकती है।