Bhopal Master Plan: भोपाल में बनेगा 51 KM का ग्रोथ कॉरिडोर और AI सिटी! जानिए मास्टर प्लान 2047 की सबसे बड़ी बातें

Bhopal 2047 master plan: मध्य प्रदेश सरकार ने दो दशक से अधिक समय के बाद अपने नए भोपाल डेवलपमेंट प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत राज्य सरकार बड़े पैमाने पर भोपाल में विस्तार की योजना बना रही है। यह योजना 2047 तक लगभग 45 लाख की आबादी के लिए तैयार की गई है। इसमें नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र, लंबा मेट्रो नेटवर्क, चौड़ी सड़कें, 51 km का ग्रोथ कॉरिडोर और अधिक हरित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है। भोपाल के लिए पिछला मंजूर मास्टर प्लान 1995 में नोटिफाई किया गया था और इसे 2005 तक लागू रहना था।

60% क्षेत्र में शहरी विकास की योजना

भोपाल निवेश क्षेत्र में लगभग 1,01,690 हेक्टेयर जमीन है। लगभग 61,017 हेक्टेयर, या 60%, शहरी विकास के लिए तय किया गया है। इसमें आवासीय क्षेत्र, कमर्शियल एरिया, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। बाकी 40,673 हेक्टेयर में वॉटर बॉडी, खेती की ज़मीन और दूसरे इस्तेमाल शामिल होंगे।

इस योजना में हरित क्षेत्र का हिस्सा भी बढ़ाया गया है। योजना के तहत निर्धारित लगभग 27% हिस्सा ग्रीन और इको-सेंसिटिव जोन के तौर पर निर्धारित किया गया है। लगभग 3,289.94 हेक्टेयर में पार्क, स्पोर्ट्स ग्राउंड, बॉटैनिकल और ज्यूलॉजिकल गार्डन, झील के किनारे अर्बन फॉरेस्ट और पेड़ लगाने की योजना शामिल होंगे। लगभग 10% क्षेत्र को मिश्रित उपयोग के लिए विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

पांच जोन में बांटा गया है आवासीय क्षेत्र

लगभग 26,240 हेक्टेयर, या योजनाबद्ध शहरी क्षेत्र का 43%, आवासीय इस्तेमाल के लिए निर्धारित किया गया है। इसे पांच जोन में बांटा गया है।

RG-1 मौजूदा आवासीय क्षेत्र को कवर करेगा।

RG-2 प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र को कवर करेगा।

RG-3 में लिमिटेड-डेंसिटी डेवलपमेंट होगा। इसमें VIP और एनवायरनमेंट के हिसाब से सेंसिटिव एरिया जैसे अरेरा कॉलोनी, चूनाभट्टी, श्यामला हिल्स, विजय नगर, चार इमली और गांधी नगर शामिल हैं।

RG-4 शहर की आने वाली आबादी के लिए नए आवासीय क्षेत्र को कवर करेगा।

RG-5 में पर्यावरण के लिए बहुत ज्यादा संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।

एक जोन, कई गतिविधि

नई योजना में ‘एक जोन, कई गतिविधि’ व्यवस्था का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था के तहत, एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। यह पुरानी व्यवस्था से अलग है, जहां एरिया को एक मेन यूज़ के हिसाब से बांटा जाता था।

नए कमर्शियल एरिया का प्लान

भोपाल के कमर्शियल एरिया एमपी नगर और न्यू मार्केट जैसी जगहों से भी आगे बढ़ेंगे। योजना में व्यावसायिक मिश्रित उपयोग क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें दुकानें, ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस और हाउसिंग की इजाजत होगी।

51 km का ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव

लगभग 3,000 हेक्टेयर में 51 km का ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव है। यह प्रस्तावित EKAI सिटी, भोपाल एयरपोर्ट, कमर्शियल एरिया, लॉजिस्टिक्स और होलसेल हब और सबअर्बन एरिया को जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में होटल, हॉस्पिटल, IT और AI फैसिलिटी, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, मॉल, कॉर्पोरेट ऑफिस, एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन और हाउसिंग होंगे।

मेट्रो नेटवर्क बढ़ेगा

भोपाल में प्रस्तावित मेट्रो नेटवर्क को मौजूदा 27.8 km से बढ़ाकर 95.82 km किया जाएगा। मेट्रो लाइन के दोनों तरफ 500 मीटर तक एक ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) ज़ोन बनाया जाएगा। यही नियम भविष्य की मेट्रो लाइनों पर भी लागू होंगे।

झीलों, पहाड़ियों और पुराने भोपाल को बचाया जाएगा

नए प्लान में भोपाल की झीलों, पहाड़ियों और पुरानी इमारतों को बचाने के लिए खास नियम हैं। अपर लेक, जिसे भोजताल भी कहा जाता है, के आसपास के इलाके को तीन ज़ोन – BIZ-0, BIZ-1 और BIZ-2 में बांटा गया है। इस प्लान में रातापानी सैंक्चुअरी के आसपास का 1,791.84 हेक्टेयर का इको-सेंसिटिव ज़ोन भी शामिल है। पुराने भोपाल के दीवारों वाले शहर को उसकी पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के लिए हेरिटेज जोन के तौर पर प्रपोज किया गया है।

शिक्षा और AI के लिए EKAI सिटी

भौरी में एजुकेशन हब को एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (EKAI) सिटी के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इस योजना में डेवलपमेंट प्लान को लागू करने की मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल ट्विन सिटी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव है।

फरीदाबाद के पास नया शहर बसाने की तैयारी में HSVP, 10 लाख लोगों के रहने का तैयार हो रहा मास्टर प्लान

हरियाणा सरकार ने ‘नमो सिटी’ को विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यह एक ‘ग्रीनफील्ड’ शहर होगा, जिसे कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और जल्द बनने वाले दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के आस-पास बसाने की योजना है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने लगभग 9000 एकड़ की इस परियोजना के लिए झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों के गांवों की पहचान की है। प्राधिकरण ने वहां के किसानों से कहा है कि वे 31 अक्टूबर तक ‘ई-भूमि’ पोर्टल पर अपनी सहमति दें।

नमो सिटी क्या है?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले इस साल जून के आखिर में नमो सिटी का विचार पेश किया था। तब वे दिल्ली के व्यापार प्रतिनिधियों से मिले थे और राजधानी के भीड़-भाड़ वाले बाजारों से थोक व्यापारियों को बाहर लाने के लिए 5,000 एकड़ की कमर्शियल टाउनशिप का प्रस्ताव रखा था।

सैनी का था ये प्रस्ताव

प्रस्ताव में एक ऐसा शहर जिसमें चौड़ी सड़कें, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल-विंडो और समय-सीमा के भीतर मंजूरी की व्यवस्था हो। निवेश व रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन भी मिलें। हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी के मुताबिक नमो सिटी का कॉन्सेप्ट KMP बेल्ट के लिए पहले से मौजूद बड़े विचार का ही एक हिस्सा है।

साल 2018 में हरियाणा कैबिनेट ने ‘पंचग्राम विकास विधेयक’ को मंजूरी दी थी। इसमें 50,000 हेक्टेयर में पांच नए शहर बसाने की योजना थी, जो आठ जिलों – सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रेवाड़ी, मेवात (नूंह), फरीदाबाद और पलवल – में एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित होंगे।

इसके अलावा नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने 16 जून को ‘नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’ (RRTS) कॉरिडोर के किनारे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल शहरी केंद्र के तौर पर ‘नमो सिटी’ बसाने पर चर्चा की थी। यह उसी ब्रांडिंग से जुड़ा, लेकिन एक अलग हिस्सा है।

असल में नमो सिटी ब्रांडिंग का विचार भी उसी बैठक के एक फैसले से आया है। उस बैठक में बोर्ड ने नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के मौजूदा और आने वाले चुनिंदा स्टेशनों पर चार ‘सेमी-ग्रीनफील्ड’ शहरों को ‘मिक्स्ड-यूज’ और ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (यातायात-केंद्रित विकास) के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। इनका नाम ‘नमो सिटी’ रखा जाएगा और इन्हें नेशनल कैपिटल रीजन में शामिल राज्यों के बीच एक कॉम्पिटिटिव प्रोसेस के जरिए चुना जाएगा।

इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बोर्ड ने ₹5,000 करोड़ के परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव को मंज़ूरी दी। इसमें ग्रांट, लोन और गारंटी सपोर्ट का मिला-जुला रूप शामिल है, जिसमें ₹1,000 करोड़ की ग्रांट भी है। NCRPB की फंडिंग का मकसद इन नोड्स पर विकास को तेजी देना है।

अधिकारी ने बताया कि हरियाणा का KMP-लिंक्ड नमो सिटी दो चीजों से प्रेरित है

जून में व्यापारियों को दूसरी जगह बसाने की घोषणा और एक्सप्रेसवे के किनारे सुनियोजित सैटेलाइट शहर बनाने का पुराना सपना। HSVP के जमीन अधिग्रहण के विज्ञापन (जो 1 सितंबर को छपा था) में नमो सिटी को 64,000 एकड़ के बड़े प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर 9,000 एकड़ में बनाने की बात कही गई थी। इस बड़े प्रोजेक्ट में सोनीपत, रोहतक और झज्जर जैसे कई कस्बों में आम रिहायशी-कमर्शियल-संस्थागत विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर योजनाएं भी शामिल हैं। ये वही तीन जिले हैं, जिन्हें नमो सिटी के लिए चुना गया है।

HSVP ने नमो सिटी के लिए खास तौर पर 10 रेवेन्यू गांवों की पहचान की है

रोहतक में हसनगढ़ (1,320 एकड़), झज्जर में निलोठी, खेड़ी जसौर, जसौर खेड़ी और लोहारहेड़ी ( 1,731, 2,269, 1,315 और 1,117 एकड़) और सोनीपत में पाई, बरौना, खुरमापुर, रोहना और किढोली ( 1,040, 174, 440, 516 और 30 एकड़)। इन सबको मिलाकर कुल जमीन लगभग 10,000 एकड़ होती है।

इन गांवों के किसानों से कहा गया है कि वे 31 अक्टूबर तक e-Bhoomi पोर्टल पर अपनी सहमति दर्ज करें। इसके बाद HSVP का कहना है कि वह पॉलिसी के मुताबिक जमीन खरीदने और विकास का काम शुरू करेगा।

दिल्ली की इन 3 सरकारी कॉलोनियों में टूटेंगे पुराने फ्लैट्स, PWD बनाने जा रहा है चमचमाती बहुमंजिला इमारतें, जानिए पूरा प्लान

Plans to redevelop three colonies in Delhi: दिल्ली सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी कॉलोनियों को फिर से रीडेवलप कर वहां अधिकारियों के लिए शानदार बहुमंजिला इमारतें (हाई-राइज टावर्स) बनाने की बड़ी योजना का ऐलान किया है। यह पुनर्विकास परियोजना गुलाबी बाग, बहापुर और कल्याणवास इलाकों में लागू की जाएगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार इन क्षेत्रों में मौजूद पुराने और जर्जर हो चुके फ्लैटों को ढहाकर उनकी जगह मॉर्डन बहुमंजिला फ्लैट्स बनाने जा रही है।

इसे दिल्ली सरकार की ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत बनाया जाएगा। इस नीति के तहत रेल और मेट्रो लाइनों के आसपास हाई डेंसिटी वाले कॉरिडोर डेवलप किए जाएंगे। इससे आवासीय इलाकों के ठीक पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी हासिल की जा सकेगी।

पुराने और खस्ताहाल फ्लैट्स की जगह बनेंगे हाई-राइज टावर्स

लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को नए और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस घर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में अभी फ्लैट्स की स्थिति बेहद खराब है। योजना के तहत इन सभी जगहों पर सिर्फ हाई-राइज टावर्स ही बनाए जाएंगे। इसके लिए बहुत जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इसे सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। ये केंद्र सरकार की जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) योजना जैसी होगी।

कॉमर्शियल इस्तेमाल से निकलेगा खर्च, नए सचिवालय के लिए भी जुटेगा फंड

सरकार ने इस पुनर्विकास परियोजना का खर्च निकालने के लिए भी एक विशेष रणनीति बनाई है। यहां बनने वाले फ्लैट्स का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा कमर्शियल उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे जो रेवेन्यू मिलेगा उससे न सिर्फ रीडेवलपमेंट का कॉस्ट निकलेगा बल्कि इस कमाई का इस्तेमाल आईटीओ पर बनने वाले दिल्ली सरकार के नए सचिवालय कॉन्प्लेक्स पर भी किया जाएगा।

गुलाबी बाग, कल्याणवास और बहापुर का ऐसा है मास्टर प्लान

सरकार ने इस परियोजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन कर लिया है। कल्याणवास में 32 एकड़ जमीन और गुलाबी बाग में लगभग 70 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। यहां टाइप II, टाइप III और टाइप IV कैटिगरी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

दक्षिण दिल्ली के बहापुर इलाके में सबसे पहले हाई राइज बनेगा। यहां नए आवासों की जरूरत तत्काल है। बहापुर आवासीय परिसर परियोजना पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

PSUs और केंद्र सरकार को भी दिए जा सकेंगे फ्लैट्स

बहापुर परियोजना का डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यहां अधिकारियों के लिए लगभग 160 टाइप V और टाइप VI श्रेणी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे। गुलाबी बाग और कल्याणवास के अन्य दो क्षेत्रों में बनने वाले फ्लैटों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की कंपनियों और केंद्र सरकार को आमंत्रित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर वे अपने कर्मचारियों के लिए इन फ्लैटों को ले सकें।

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