हरियाणा सरकार ने ‘नमो सिटी’ को विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यह एक ‘ग्रीनफील्ड’ शहर होगा, जिसे कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और जल्द बनने वाले दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के आस-पास बसाने की योजना है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने लगभग 9000 एकड़ की इस परियोजना के लिए झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों के गांवों की पहचान की है। प्राधिकरण ने वहां के किसानों से कहा है कि वे 31 अक्टूबर तक ‘ई-भूमि’ पोर्टल पर अपनी सहमति दें।
नमो सिटी क्या है?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले इस साल जून के आखिर में नमो सिटी का विचार पेश किया था। तब वे दिल्ली के व्यापार प्रतिनिधियों से मिले थे और राजधानी के भीड़-भाड़ वाले बाजारों से थोक व्यापारियों को बाहर लाने के लिए 5,000 एकड़ की कमर्शियल टाउनशिप का प्रस्ताव रखा था।
सैनी का था ये प्रस्ताव
प्रस्ताव में एक ऐसा शहर जिसमें चौड़ी सड़कें, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल-विंडो और समय-सीमा के भीतर मंजूरी की व्यवस्था हो। निवेश व रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन भी मिलें। हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी के मुताबिक नमो सिटी का कॉन्सेप्ट KMP बेल्ट के लिए पहले से मौजूद बड़े विचार का ही एक हिस्सा है।
साल 2018 में हरियाणा कैबिनेट ने ‘पंचग्राम विकास विधेयक’ को मंजूरी दी थी। इसमें 50,000 हेक्टेयर में पांच नए शहर बसाने की योजना थी, जो आठ जिलों – सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रेवाड़ी, मेवात (नूंह), फरीदाबाद और पलवल – में एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित होंगे।
इसके अलावा नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने 16 जून को ‘नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’ (RRTS) कॉरिडोर के किनारे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल शहरी केंद्र के तौर पर ‘नमो सिटी’ बसाने पर चर्चा की थी। यह उसी ब्रांडिंग से जुड़ा, लेकिन एक अलग हिस्सा है।
असल में नमो सिटी ब्रांडिंग का विचार भी उसी बैठक के एक फैसले से आया है। उस बैठक में बोर्ड ने नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के मौजूदा और आने वाले चुनिंदा स्टेशनों पर चार ‘सेमी-ग्रीनफील्ड’ शहरों को ‘मिक्स्ड-यूज’ और ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (यातायात-केंद्रित विकास) के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। इनका नाम ‘नमो सिटी’ रखा जाएगा और इन्हें नेशनल कैपिटल रीजन में शामिल राज्यों के बीच एक कॉम्पिटिटिव प्रोसेस के जरिए चुना जाएगा।
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बोर्ड ने ₹5,000 करोड़ के परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव को मंज़ूरी दी। इसमें ग्रांट, लोन और गारंटी सपोर्ट का मिला-जुला रूप शामिल है, जिसमें ₹1,000 करोड़ की ग्रांट भी है। NCRPB की फंडिंग का मकसद इन नोड्स पर विकास को तेजी देना है।
अधिकारी ने बताया कि हरियाणा का KMP-लिंक्ड नमो सिटी दो चीजों से प्रेरित है
जून में व्यापारियों को दूसरी जगह बसाने की घोषणा और एक्सप्रेसवे के किनारे सुनियोजित सैटेलाइट शहर बनाने का पुराना सपना। HSVP के जमीन अधिग्रहण के विज्ञापन (जो 1 सितंबर को छपा था) में नमो सिटी को 64,000 एकड़ के बड़े प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर 9,000 एकड़ में बनाने की बात कही गई थी। इस बड़े प्रोजेक्ट में सोनीपत, रोहतक और झज्जर जैसे कई कस्बों में आम रिहायशी-कमर्शियल-संस्थागत विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर योजनाएं भी शामिल हैं। ये वही तीन जिले हैं, जिन्हें नमो सिटी के लिए चुना गया है।
HSVP ने नमो सिटी के लिए खास तौर पर 10 रेवेन्यू गांवों की पहचान की है
रोहतक में हसनगढ़ (1,320 एकड़), झज्जर में निलोठी, खेड़ी जसौर, जसौर खेड़ी और लोहारहेड़ी ( 1,731, 2,269, 1,315 और 1,117 एकड़) और सोनीपत में पाई, बरौना, खुरमापुर, रोहना और किढोली ( 1,040, 174, 440, 516 और 30 एकड़)। इन सबको मिलाकर कुल जमीन लगभग 10,000 एकड़ होती है।
इन गांवों के किसानों से कहा गया है कि वे 31 अक्टूबर तक e-Bhoomi पोर्टल पर अपनी सहमति दर्ज करें। इसके बाद HSVP का कहना है कि वह पॉलिसी के मुताबिक जमीन खरीदने और विकास का काम शुरू करेगा।

