Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

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Top News 23 September : बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। उत्तर भारत में मानसून की विदाई शुरू। ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि समझौता करो या नर्क में जाओ। मध्य प्रदेश में आज नो यूपीआई डे। 23 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन

बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। ओडिशा में भारी बारिश के चलते ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। 

 

उत्तर भारत से मानसून की विदाई

उत्तर भारत से मानसून की विदाई शुरू हुई। बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट। 

 

मध्य प्रदेश में आज नो यूपीआई डे

यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में आज मध्य प्रदेश में व्यापारी संगठन ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे। इस दौरान व्यापारी कुछ समय के लिए यूपीआई भुगतान स्कैनर को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक विरोध जताएंगे। व्यापारियों का कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रदेशभर के व्यापारियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

 

ट्रंप की ईरान को धमकी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा- मैंने रुकवाए 8 युद्ध। उन्होंने ईरान को खुली धमकी देते हुए कहा कि समझौता करो या नर्क में जाओ। उन्होंने कहा कि हमने ईरान को समझौते का मौका दिया था। हमने ये युद्ध लगभग खत्म कर दिया है। ईरान को बचने का मौका नहीं मिलेगा। ALSO READ: UNGA में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, यूक्रेन युद्ध पर जल्द कुछ करूंगा, ईरान पर कड़ा रुख

 

घटे क्रूड के दाम

अमेरिका हार्मुज स्ट्रेट से यदि दबाव घटाता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है तो ईरान सात दिन में होर्मुज खोल सकता है। ऐसी रिपोर्ट सामने आते ही तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। हालांकि, ईरानी अधिकारी ने ऐसे दावे को गलत बताया है। ब्रेंट क्रूड घटकर 98.98 डॉलर प्रति बैरल हुआ। WTI क्रूड गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट पर क्रूड के दाम 117.4 डॉलर प्रति बैरल।

जीएसटी की तरह यूसीसी

जिस तरह जीएसटी के बावजूद अनेक किस्म के कर लोगों को चुकाने होते हैं क्या वैसे ही यूसीसी के बावजूद कई तरह के निजी कानून चलते रहेंगे? एसटी के अलावा दूसरी जातियों को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी को ‘एक देश, एक कर’ के रूप में प्रचारित किया और इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा क्षण बनाने के लिए आधी रात को संसद का सत्र बुला कर सेंट्रल हॉल में साझा सत्र में इसे कानून बनाया। लेकिन क्या यह सचमुच ‘एक देश, एक कर’ का प्रतीक है? यह सवाल इसलिए है क्योंकि अब भी आयकर और जीएसटी के अलावा दस तरह के कर लोगों को देने पड़ रहे हैं। हाल ही में सरकार ने यूपीआई पर भी एक कर लगाया है। टोल टैक्स अलग है और पेट्रोल व शराब पर लगने वाला कर अलग है। सीमा शुल्क भी लगता ही है। करों और शुल्कों के अलावा कई उपकर और दूसरी चीजें भी हैं। खुद जीएसटी के इतने स्लैब हैं कि लोग उसी में कंफ्यूज हुए रहते हैं। इसी तरह से ‘एक देश, एक कानून’ के तौर पर यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि ऐस लग रहा है कि इसका भी हस्र जीएसटी वाला ही होगा।

सबसे पहले उत्तराखंड में यह कानून बना और लागू हुआ। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कानून बना। अब उत्तराखंड का कानून पूरे देश में टेम्पलेट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तराखंड में कानून बना तो अनुसूचित जनजाति यानी एसटी को इससे बाहर रखा गया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि कहीं भी अनुसूचित जनजाति को इस कानून के दायरे में नहीं लाया जाएगा। यानी देश के नागरिकों के एक बड़े समूह पर यूसीसी लागू होगा, जबकि करीब आठ फीसदी आबादी वाले एसटी समुदाय पर अलग कानून लागू होगा। अभी तक यूसीसी में एसटी को छूट दिया गया था लेकिन अब छूट देने का दायरा बढ़ रहा है। दूसरी जातियों को भी कानून के दायरे से बाहर रखने की घोषणाएं हो रही हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनके राज्य में एसटी समुदाय के अलावा कुड़मी जाति को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से में और खास कर झारखंड से सटे पुरुलिया आदि के इलाके में बड़ी कुड़मी आबादी है, जो अपने को एसटी समुदाय में शामिल करने की मांग करती रहती है। कोई भी सरकार कुड़मी या कुर्मी को एसटी में शामिल करने की हिम्मत नहीं कर पा रही है। लेकिन शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने कुड़मी को एसटी की ही तरह यूसीसी से बाहर रखने का ऐलान कर दिया है। यह उनको एसटी का दर्जा देने की दिशा में उठा पहला कदम है। उसका अपना अलग असर होगा। लेकिन एक बार कुड़मी को यूसीसी से बाहर रखने का नियम बना तो फिर हर राज्य में इस तरह से किसी न किसी जाति को अलग करने की मांग उठेगी। झारखंड में भी कुड़मी बरसों से एसटी का दर्जा मांग रहे हैं। अगर कभी झारखंड में भाजपा की सरकार बनी तो वहां भी कुड़मी को अलग रखना होगा। पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले से पंडोरा बॉक्स खुल जाएगा। कई राज्यों में कई अति पिछड़ी जातियां एससी या एसटी में शामिल होने की नांग कर रही हैं। वे भी इस तरह की छूट मांगेंगी। अगर हर राज्य में 10 फीसदी या उससे ज्यादा आबादी यूसीसी से बाहर हो गई तो फिर ‘एक देश, एक कानून’ के सिद्धांत का क्या मतलब रह जाएगा?

सरकार कैसे एमडीआर शुल्क को मॉनिटर करेगी?

यह लाख टके का सवाल है कि केंद्र सरकार किस तरह से यह निगरानी करेगी कि दुकानदार यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन में एमडीआर शुल्क यानी केंद्र सरकार ने दो हजार से ऊपर के लेनदेन पर जो 0.40 फीसदी शुल्क लगाया है वह खुद दे रहा है या ग्राहक से ले रहा है? सरकार की ओर से ऐसी बात कही गई है। यह शुल्क लगाने के बाद जब विवाद बढ़ा तो सरकार की ओर से कहा गया कि ग्राहकों को शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि सब जानते हैं कि दुकानदार इस तरह का कोई भी शुल्क अपनी जेब से नहीं चुकाता है। वह अपने मुनाफे में से सरकार को शुल्क नहीं देगा। किसी न किसी रूप में वह ग्राहक से ही पैसा वसूलेगा।

जब इस बात का मुद्दा बना तब सरकार ने कहा कि वह एमडीआर शुल्क की निगरानी करेगी। लेकिन इसका कोई मॉडल नहीं है। यह सिर्फ आंख में धूल झोंकने वाली बात है। पिछले साल भारत में 24 हजार करोड़ ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिसमें 413 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है। इसका अर्थ है कि हर महीने औसतन दो हजार करोड़ ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। करोड़ों छोटी छोटी दुकानों या रेहड़ी, पटरी पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। क्या सरकार के पास इतने लोग हैं या ऐसी तकनीकी सलाहियात है कि वह सबको मॉनिटर करे? सरकार जब सामानों में मिलावट और उनकी तौल में होने वाली गड़ब़ड़ियों को नहीं पकड़ पा रही है तो हर ट्रांजेक्शन को कैसे मॉनिटर करेगी। फिर भी लोगों को बरगलाने के लिए एक बयान दे दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखेगा गोरखपुर के टेराकोटा का जलवा, ODOP से बदली शिल्पियों की किस्मत

अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखेगा गोरखपुर के टेराकोटा का जलवा, ODOP से बदली शिल्पियों की किस्मत

Gorakhpur Terracotta Craft: गोरखपुर की तमाम विशिष्टताओं में से एक माटी का हस्तशिल्प ‘टेराकोटा’ वैश्विक पटल पर एक बार फिर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने जा रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इस अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से स्थानीय टेराकोटा शिल्पियों और कारोबारियों को सीधे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निर्यातकों और बड़े व्यापारिक घरानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होने के बाद से इस पारंपारिक शिल्प को नया जीवन मिला है, जिससे शिल्पियों और कारोबारियों के जीवन में आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सम्मान का नया दौर शुरू हुआ है।

गोरखपुर के टेराकोटा के चार स्टॉल 

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार गोरखपुर के टेराकोटा के चार स्टॉल आकर्षण का प्रमुख केंद्र होंगे। ट्रेड शो में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के सामने इन उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग से निर्यात की संभावनाओं के नए द्वार खुलने की भी पूरी उम्मीद है। उद्योग विभाग ने जिन शिल्पियों और कारोबारियों को यूपीआईटीएस में स्टाल लगाने के लिए चयनित किया है, उनमें मेसर्स अतरंगी कलाकारी के बैनर तले टेराकोटा ज्वेलरी व होम डेकोरेशन प्रोडक्ट बनाने वाली दीपिका सिंह, रीतिका कृतिका क्रिएशन से सुनीता मौर्या, गिफ्ट सिटी से कमलेश तिवारी और मेसर्स रोशनी एक उम्मीद ट्रस्ट की कोमल मद्देशिया शामिल हैं।

 

उद्योग उपायुक्त उज्ज्वल सिंह का कहना है कि इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगने वाले टेराकोटा के स्टाल न केवल गोरखपुर के शिल्पियों की मेहनत और हुनर का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि यह साबित करेंगे कि यदि पारंपरिक हुनर को सही नीति, तकनीक और बाजार का सहारा मिले तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है। यूपीआईटीएस में मिलने वाला अवसर गोरखपुर के टेराकोटा के निर्यात की दिशा में भी काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।

योगी सरकार ने की ब्रांडिंग तो खूब बढ़ा कारोबार

भटहट ब्लॉक के औरंगाबाद गांव को टेराकोटा शिल्प का मूल गांव माना जाता है। औरंगाबाद और इसके आसपास के गांवों में पीढ़ियों से टेराकोटा का काम किया जाता रहा है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना शुरू की और टेराकोटा को गोरखपुर का ओडीओपी उत्पाद घोषित किया गया। इसके तहत शिल्पकारों को विद्युत चालित चाक, पगमिल, अनुदान पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी तो दूसरी तरफ योगी सरकार ने बड़े-बड़े मंचों से टेराकोटा की ब्रांडिंग की। परिणामस्वरूप इसकी मांग में लगातार वृद्धि होती गई।

कारोबार में वृद्धि होने से टेराकोटा शिल्पकारों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है। कच्ची झोपड़ियों में काम करने वाले कई शिल्पियों ने पक्के वर्कशॉप और पक्के मकान बना लिए हैं। नई पीढ़ी, जो कभी मिट्टी के इस काम से दूरी बना रही थी, अब आधुनिक डिजाइनिंग सीखकर अपने पुश्तैनी कारोबार में सक्रिय रूप से हाथ बंटा रही है।

Indian Oil ने किया खारिज, 23 सितंबर को नहीं है कोई No-UPI Day, ये है पूरा मामला

Indian Oil on No-UPI Day: तेल बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल इंडियन ऑयल ‘नो-यूपीआई डे’ को लेकर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में 23 सितंबर को बिना यूपीआई के तेल बेचने वाली बात पूरी तरह आधारहीन है और पेट्रोल पंप मालिकों ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। इंडियन ऑयल ने यह बात शनिवार 19 सितंबर को X (पूर्व नाम Twitter) पर कही। बता दें कि 15 अक्टूबर से कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाला है। नए नियमों के तहत ग्राहक बिना कोई फीस दिए यूपीआई से पेमेंट कर सकेंगे तो ₹2,000 से अधिक के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा।

क्या है No-UPI Day से जुड़ा पूरा मामला

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में पेट्रोल पंप मालिकों ने 23 सितंबर को ‘नो-UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। अब इंडियन ऑयल ने इसे फर्जी बताया है। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि पेट्रोल पंप वाले मर्चेंट फीस के विरोध में ₹2 हजार से अधिक के यूपीआई पेमेंट नहीं ले रहे और 23 सितंबर को ‘नो-यूपीआई डे’ मनाएंगे। इंडियन ऑयल का कहना है कि यह वायरल मैसेज फर्जी और गुमराह करने वाला है और मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप मालिकों ने ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर ऐसी कोई पाबंदी लगाने का ऐलान नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन लगातार मिनिस्ट्री के अधिकारियों के संपर्क में हैं और ‘नो-यूपीआई डे’ जैसा कुछ ऐलान नहीं हुआ है बल्कि पेट्रोल पंप डीलर्स तो डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहे हैं।

कैसी है इंडियन ऑयल के शेयरों की हालत

इंडियन ऑयल के शेयर शुक्रवार 18 सितंबर को बीएसई पर 2.01% की बढ़त के साथ ₹136.80 के भाव पर बंद हुए थे। इस साल इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 27 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹188.90 पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 31.02% टूटकर 2 अप्रैल 2026 को ₹130.30 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Bank Alert: 28 से 30 सितंबर तक लगातार 3 दिन बंद रहेंगे बैंक! SBI ने जारी की ये एडवाइजरी

SBI Bank Strike Advisory: अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम अटका हुआ है, तो उसे 26 सितंबर से पहले हर हाल में पूरा कर लें। बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी मांगों को लेकर 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान किया है।

हड़ताल को देखते हुए देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए अलर्ट और एडवाइजरी जारी की है। बैंक ने ग्राहकों से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए अपने ब्रांच से जुड़े काम समय रहते निपटा लें।

लगातार 5 दिन प्रभावित रह सकती हैं बैंक शाखाएं

हड़ताल का समय ऐसा पड़ा है कि बैंक शाखाएं लगातार 5 दिनों के लिए सामान्य कामकाज से दूर रह सकती हैं:

26 सितंबर (शनिवार): चौथा शनिवार (नियमित बैंक अवकाश)।

27 सितंबर (रविवार): साप्ताहिक छुट्टी।

28 से 30 सितंबर (सोमवार से बुधवार): UFBU की प्रस्तावित 3-दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल।

यानी शनिवार से बुधवार तक लगातार 5 दिनों तक ग्राहकों को सामान्य दिनों की तरह बैंक शाखाओं में कर्मचारी नहीं मिलेंगे।

SBI की एडवाइजरी: शाखा के कामकाज पहले निपटाएं

एसबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह हड़ताल के दौरान अपनी शाखाओं में आवश्यक सेवाएं चालू रखने की पूरी कोशिश करेगा, लेकिन अगर बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो शाखा स्तर पर परिचालन प्रभावित हो सकता है।

चेक क्लीयरेंस, फिजिकल डॉक्यूमेंट जमा करना, लोन डिस्बर्समेंट और अन्य ऐसे काम जिनके लिए ब्रांच जाना या बैंक स्टाफ की मदद अनिवार्य होती है ये काम अटक सकते हैं। बैंक ने सलाह दी है कि, जिन ग्राहकों के ब्रांच से जुड़े काम पेंडिंग हैं, वे 26 सितंबर से पहले ही शाखा जाकर उन्हें पूरा करा लें।

नकदी और रूटीन ट्रांजैक्शन के लिए इन सेवाओं का करें इस्तेमाल

एसबीआई ने बताया कि हड़ताल के बावजूद बैंक के डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स सामान्य रूप से काम करेंगे:

कैश निकालने/जमा करने के लिए: ग्राहक निकटतम ATM और ADWMs मशीन का उपयोग कर सकते हैं।

गांवों और कस्बों में सेवाएं: बैंकिंग सेवाओं के लिए कस्टमर सर्विस पॉइंट्स (CSPs) की मदद ली जा सकती है।

डिजिटल बैंकिग चालू रहेगी: YONO ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI के जरिए पैसे का ट्रांसफर और ऑनलाइन भुगतान बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।

UFBU ने दी आगे भी हड़ताल की चेतावनी

बैंक कर्मचारी यूनियन यूएफबीयू ने 11 सितंबर को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी। 28-30 सितंबर की तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो यूनियन ने 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी प्रस्ताव दिया है।

अगर आपको इस महीने के अंत में किसी बड़े भुगतान, ड्राफ्ट बनवाने या चेक लगाने की जरूरत है, तो इसे 26 सितंबर से पहले ही पूरा कर लें। छोटे-मोटे वित्तीय लेनदेन के लिए ऑनलाइन यूपीआई या योनो (YONO) ऐप का सहारा लें, ताकि हड़ताल के दौरान आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

एनटीए का ऑफिस देखेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज

नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट यूजी और नीट पीजी सहित दो दर्जन से ज्यादा अखिल भारतीय परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में सुधार का सुप्रीम कोर्ट ने मिशन बनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है एनटीए में सुधार के लिए क्या क्या किया जा रहा है इसका पूरा ब्योरा वेबसाइट पर डालना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज एनटीए के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने शुक्रवार को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें एनटीए को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है। इसी मामले की सुनवाई में 19 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नीट परीक्षा सिस्टम फूलप्रूफ है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। हालांकि पिछले तीन साल में दो बार पेपर लीक हुए हैं और परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। 2024 में कई सेंटर्स पर दोबारा परीक्षा हुई और 2026 पूरी परीक्षा ही रद्द हुई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को अपने सुधारों और अब तक हुई प्रगति का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है। इससे परीक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों की जानकारी सार्वजनिक होगी। सुनवाई के दौरान एनटीए के लिए पर्याप्त स्थायी कर्मचारी और विशेषज्ञ स्टाफ रखने की जरूरत पर चर्चा हुई। कोर्ट ने बेहतर मैनपावर, प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।

एनटीए को मजबूत कानूनी आधार देने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया। कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव अचानक नहीं किया जा सकता। इसे धीरे धीरे लागू करना होगा, ताकि नई व्यवस्था में परेशानी न हो। सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकारी प्राप्त पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि नीट परीक्षा के लिए एनटीए को यूपीएससी जैसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे।

इस बार मौका नहीं गवांएगी कांग्रेस!

पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में तो कांग्रेस पार्टी ने मौका गंवा दिया। तभी कॉकरोच जनता पार्टी को इस पर राजनीति करने का मौका मिला और आज शिक्षा के मामले में ऐसा लगता जैसे सीजेपी ने पट्टा लिखा लिया है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मामले में भी कांग्रेस ने मौका गंवाया। उसका इस्तेमाल आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने किया। उन्होंने दिल्ली में टाउन हॉल कार्यक्रम किया और सरकार के ऊपर नीतिगत परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। शिक्षा और ई 20 दोनों के मामले में सरकार झुकी है। राज्यों में शिक्षा को लेकर बड़े फैसले हो रहे हैं और सरकार ने पेट्रोल में 10 फीसदी इथेऩॉल मिश्रण की नीति पर विचार शुरू कर दिया है। पहले सरकार इसके लिए मना कर रही थी लेकिन अब खबर है कि सरकार ई 20 के साथ साथ ई 10 का विकल्प भी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराएगी। इन दोनों मामलों में कांग्रेस ने राजनीति की लेकिन पीछे रही, सीजेपी और आप आगे रहे।

तभी अब कांग्रेस पार्टी यूपीआई पर शुल्क लगाने के सरकार के फैसले पर राजनीति में पिछड़ना नहीं चाहती है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने पहले दिन से इस मुद्दे को पकड़ा है और जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस पर निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि राहुल गांधी इस लड़ाई का नेतृत्व करेंगे और कांग्रेस इसके रोलबैक तक आंदोलन करेगी। यानी सरकार के ऊपर दबाव बनाया जाएगा कि वह यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला वापस ले। हालांकि सरकार इस मूड में नहीं दिख रही है क्योंकि इसके कई और पहलू है। लेकिन कांग्रेस इसके लिए दिल्ली को केंद्र बना कर पूरे देश में आंदोलन करेगी। कहा जा रहा है कि आंदोलन और प्रदर्शन के जितने भी तरीके होते हैं, सबका इस्तेमाल किया जाएगा। यानी जरुरत पड़ी तो कांग्रेस के नेता भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे। हालांकि यह पता नहीं है कि राहुल गांधी भूख हड़ताल करेंगे या कोई दूसरा नेता करेगा।

बहरहाल, कांग्रेस को फीडबैक है कि शहरों से ज्यादा गांवों में इस फैसले का विरोध हो रहा है। कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि भाजपा और केंद्र सरकार इस मामले में लोगों को समझा नहीं पा रहे हैं। रिजर्व बैंक से लेकर नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एपीसीआई की ओर से जो सफाई जारी की गई है उसे लोग समझ नहीं रहे हैं। सरकार की ओर से 42 प्वाइंट का एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है वह अंग्रेजी में है और बहुत तकनीकी शब्दावली में है। दूसरी ओर कांग्रेस के साथ साथ कुछ स्वतंत्र जानकार इसके बारे में लोगों को समझा रहे हैं कि अभी सिर्फ दो हजार से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क लग रहा है, लेकिन जल्दी ही इससे कम पर भी शुल्क लगने लगेगा। भारत पे नाम से डिजिटल लेनदेन का एप बनाने वाले अशनीर ग्रोवर ने मीडिया और सोशल मीडिया में मोर्चा संभाला है। वे लोगों को इसके हर पहलू के बारे में समझा रहे हैं और बता रहे हैं कि सरकार पहले से इस सेवा से मुनाफा कमा रही है। फिर भी उसने ज्यादा कमाई के लिए टैक्स लगाया है। सरकार के पास ऐसा कोई स्वतंत्र जानकार नहीं है, जो इसके फायदे समझाए। शुल्क लगाने की शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी, उस समय नवरात्रि चल रही होगी। नवरात्रि का पांचवां दिन होगा और उसी दिन से लोग खरीदारी शुरू करते हैं। पता नहीं सरकार में किसी ने इस पर विचार किया या नहीं। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार बैकफुट पर है और कांग्रेस को उसे घेरने का मौका मिल गया है।

भाजपा के पास जवाब नहीं है

केंद्र सरकार ने यूपीआई के लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला किया तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा के अंदर भी लोगों को जानकारी नहीं थी। भाजपा के लोग भी समझ रहे थे या मान रहे थे कि जब सरकार कह रही है कि यह मुफ्त रहेगा तो मुफ्त ही रहेगा। तभी अचानक घोषणा से सब चौंके। यह भी इस सरकार की एक खासियत है कि फैसले से पहले उस पर विचार नहीं होता। फैसले के बाद उस पर सफाई दी जाती है। तभी इस मामले में सरकार घिर गई है। उसके पास जवाब नहीं है। सरकार कितनी भी सफाई दे रही है लेकिन लोग मान रहे हैं कि दो हजार से कम लेनदेन पर भी जल्दी ही शुल्क लगेगा। लोग सरकार की इस बात पर भी यकीन नहीं कर रहे हैं कि कोई व्यापारी या दुकानदार अपनी जेब से शुल्क भरेगा। उनको पता है कि दुकानदार अंततः सामान या सेवा की कीमत में जोड़ कर ग्राहक से ही पैसा लेगा।

जब सरकार और भाजपा को कोई जवाब नहीं सूझा तो यह कहा गया है कि वित्त मामलों की जिस समिति ने इसकी सिफारिश की उसमें कांग्रेस के भी सदस्य थे। सोचें, यह कितनी लचर दलील है। जिन संसदीय समितियों के अध्यक्ष कांग्रेस के नेता हैं उनमें तो भाजपा उनकी बात चलने ही नहीं देती है और जिस कमेटी में पांच लोग कांग्रेस हैं उसमें यह बताने की कोशिश कर रही है कि इसमें कांग्रेस की भी भागीदारी थी। असल में वित्त संबंधी मामलों की समिति में कांग्रेस के पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ शामिल हैं। लेकिन फैसले में उनका कोई हाथ नहीं है क्योंकि हर कमेटी में बहुमत भाजपा और एनडीए का है।

इसी तरह भाजपा की ओर से लोगों को समझाने के लिए जो प्रयास हो रहा है वह मजाक बन जा रहा है। जब इस मसले पर विवाद बढ़ा तो भाजपा के एक प्रवक्ता ने एक ड्रामा किया यह दिखाने के लिए यूपीआई पर चार्ज नहीं लगता है। तो उसका भी मजाक ही बना। क्योंकि प्रवक्ता महोदय एक आइसक्रीम वाले के पास पहुंच कर 50 रुपए से कम ही आइसक्रीम खरीद रहे थे। सोचें, खुद सरकार कह रही है कि दो हजार से कम पर शुल्क नहीं लगेगा तो 50 रुपए की खरीदारी दिखाने का क्या अर्थ है? लोग मान रहे हैं कि अभी दो हजार से कम पर शुल्क नहीं लगेगा लेकिन यह भी मान रहे हैं कि यह स्थायी नहीं है।

अब डिजिटल पेमेंट के खिलाफ अभियान

भारत में सब कुछ अतिवादी अंदाज में होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 में नोटबंदी की और पांच सौ व एक हजार रुपए को नोट चलन से बाहर किए तब भाजपा और सरकार की ओर से संस्थागत रूप से नकदी को बुरा बताने का अभियान चला था। यह प्रचार होता था कि नकद लेनदेन करना बहुत बुरी बात है और देशभक्त लोगों को डिजिटल लेनदेन करना चाहिए। हालांकि उस समय तक डिजिटल लेनदेन का इकोसिस्टम बहुत मजबूत नहीं था। लोगों को बड़ी परेशानी थी। फिर लोगों ने शुरू किया। लंबे समय तक कैश को डेमोनाइज करने यानी बुरा बताने का व्यवस्थित अभियान चला।

अब जब केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला किया है तो इसी तरह का एक दूसरा अभियान शुरू हो गया। अब डिजिटल लेनदेन को बुरा या नुकसान वाला बताने का अभियान शुरू हुआ है। अब डिजिटल लेनदेन को डेमोनाइज किया जा रहा है। सोशल मीडिया में मीम्स बन रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि गोलगप्पे वाला नकद खरीदने पर 20 के पांच देगा और यूपीआई से खरीदने पर 20 से चार देगा। एक मीम बना कि ढाई हजार की खरीद पर दुकानदार ग्राहक को समझा रहा है कि 19 सौ यूपीआई से कर दीजिए और छह सौ नकद दे दीजिए। ऐसे ही व्यापारियों के एक बड़े समूह ने सरकार से अपील की है कि वह इस शुल्क को समाप्त करे नहीं तो वे डिजिटल लेनदेन का बहिष्कार करके सारे कामकाज नकदी में करने लगेंगे। तभी सरकार विपक्ष से ज्यादा सोशल मीडिया और आम व्यापारियों के विरोध के कारण परेशान हो गई है।