एमडीआर पर जीएसटी भी लगेगा

एक तो वित्तीय मामलों की शब्दावली इतनी जटिल होती है कि कई बार जो होता है उसका उलटा कहा जाता है। जैसे यूपीआई के जरिए लेनदेन पर शुल्क लगाने वाले फैसले में यूपीआई की तरह ही बार बार एमडीआर शब्द का इस्तेमाल हो रहा है। इसका अर्थ है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। सोचें, इसमें डिस्काउंट यानी छूट शब्द है लेकिन असल में इसी छूट पर शुल्क लगाने का फैसला हुआ है। अब खबर है कि सरकार एमडीआर के ऊपर जीएसटी भी लगाएगी। सोचें, इसी को हिंदी मुहावरे में कोढ़ में खुजली कहा गया है। पहले सरकार लेनेदेन पर शुल्क लगाएगी और उस शुल्क के ऊपर जीएसटी वसूलेगी।

वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यूपीआई एक पेमेंट सेटलमेंट सर्विस है इसलिए इस पर लगने वाला शुल्क जीएसटी के दायरे में आएगा। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि शुल्क की तरह जीएसटी भी ग्राहकों को नहीं देना है, बल्कि दुकानदार देगा। हालांकि सबको पता है कि दुकानदार न तो शुल्क अपनी जेब से देगा और न जीएसटी। बहरहाल, कहा जा रहा है कि जीएसटी रजिस्टर्ड दुकानदार जो शुल्क वसूलेगा उस पर जीएसटी चुकाएगा और बाद में वह रिफंड ले सकता है। उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में रिफंड मिल जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि दुकानदार इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं। उनको पता है कि आज वे जीएसटी भरेंगे तो कितने दिन के बाद रिफंड मिलेगा। उनकी पूंजी फंस रही है, जीएसटी में।

Viral Video: ट्रेन से बेडशीट चुराते पकड़े गया ये कपल, TTE के टोकने पर महिला देने लगी अजीब दलील

Viral Video: भारतीय रेलवे की AC ट्रेनों में यात्रियों को दिए जाने वाले बेडरोल, चादर और तौलिये के गायब होने का मुद्दा सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक कपल रेलवे की चादरें अपने सामान में ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस दौरान पकड़े जाने पर महिला ने सफाई देते हुए दावा किया कि उन्होंने चादरें इसलिए रख ली थीं क्योंकि TTE ने उनसे अधिक पैसे लिए थे। बता दें कि ऐसी चारी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं।

AC कोच से बेडशीट और तौलिए जैसे सामान का गायब होना लंबे समय से भारतीय रेलवे के लिए चिंता का विषय रहा है। इस समस्या से न केवल रेलवे को नुकसान हुआ है। बल्कि यह सवाल भी उठा है कि जब इन्वेंट्री से ये चीजें गायब हो जाती हैं तो इनकी कीमत कौन चुकाता है।

सूटकेस खुलवाया तो अंदर मिलीं रेलवे की चादरें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @arunruby08 नाम के यूजर की तरफ से शेयर किए गए वीडियो में एक व्यक्ति प्लेटफॉर्म पर खड़ा दिखाई देता है। वीडियो बना रहा शख्स उससे सूटकेस खोलने के लिए कहता है। यात्री के बैग खोलने पर उसमें रेलवे की ओर से उपलब्ध कराई गई चादरों का एक पैकेट दिखाई देता है, जिसे वह बाहर निकालकर वापस कर देता है। इस दौरान महिला वीडियो बनाए जाने पर आपत्ति जताती है। वह इसे ‘फालतू का ड्रामा’ बताती है।

वह बार-बार वीडियो रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए कहती है। जब उनसे पूछा जाता है कि अतिरिक्त पैसे किसने लिए थे, तो महिला जवाब देती है- TC ने…।” इसके बाद वीडियो बना रहा व्यक्ति उन्हें याद दिलाता है कि बेडशीट रेलवे की संपत्ति है, TTE की नहीं, जिसे अतिरिक्त पैसे लिए जाने के कारण अपने साथ ले जाया जा सकता है। महिला फिर कहती है कि उन्होंने अतिरिक्त पैसे लिए जाने की वजह से चादरें रख ली थीं और अब उन्हें वापस कर रहे हैं।

‘चोरी और सीनाजोरी…’

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने कपल की सफाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रेन में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और कंबल यात्रा के बाद वापस किए जाने होते हैं। एक यूजर ने लिखा, “इसे लगा कि टिकट के साथ फ्री है, कुर्ता-पायजामा बनाने के लिए।” वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा, “इसी को कहते हैं चोरी और सीनाजोरी…।”

एक अन्य शख्स ने लिखा, “एक तो चोरी, ऊपर से तेवर तो देखो।” एक और यूजर ने कहा, “क्या टाइम आ गया है… खुद गलत भी करो और झगड़ा, गुस्सा भी दिखाओ।” कुछ यूजर्स ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग भी की। एक कमेंट में रेलवे से PNR के जरिए यात्रियों की जानकारी निकालकर कानूनी नोटिस और जुर्माना भेजने की मांग की गई है। इसी टिप्पणी में दावा किया गया कि 2022 के बाद चार वर्षों में 1.27 करोड़ चादरें, तौलिये, कंबल और तकिए चोरी हुए हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

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रेलवे के सामने पुरानी चुनौती है चोरी कांड

ट्रेनों से लिनेन गायब होने की समस्या रेलवे के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही है। चादर, कंबल और तौलिये जैसी वस्तुओं के गायब होने से रेलवे के इन्वेंट्री पर असर पड़ता है। उनकी दोबारा खरीद पर अतिरिक्त खर्च होता है। हालांकि, वायरल वीडियो में महिला द्वारा TTE पर एक्स्ट्रा पैसे लिए जाने का आरोप लगाया गया है। इस आरोप की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, इस बारे में भारतीय रेलवे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

वायुसेना को मिलेगा तेजस ट्विन सीटर और HTT-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में HAL करने जा रही बड़ा धमाका

Aatmanirbhar Bharat: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कल यानी 18 सितंबर 2026 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना (IAF) को LCA तेजस FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा। इसके अलावा ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को सौंपे जाएंगे। यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में होगा।

HAL के अनुसार, यह हैंडओवर भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में HAL और उसके उद्योग साझेदारों की भूमिका को दिखाया किया जाएगा। इन्होंने देश में सैन्य और नागरिक, दोनों क्षेत्रों के लिए उन्नत एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और निर्माण की क्षमता को मजबूत किया है।

वायुसेना और पवन हंस के लिए अहम सौंपे जाएंगे प्लेटफॉर्म

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को LCA तेजस के FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे। वहीं, ध्रुव NG हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी पवन हंस लिमिटेड को की जाएगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, HAL के CMD रवि के. सहित रक्षा और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों, वायुसेना, पवन हंस, नियामक एजेंसियों तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर सरकार का जोर

सरकार ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता दी है। इन प्लेटफॉर्म्स को शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

‘भारत के विजन की आधारशिला है रक्षा क्षेत्र’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त तकनीकी नेतृत्व से तय होगी। उन्होंने कहा कि आज हम जो कल्पना करते हैं। वही कल की सैन्य क्षमता बनेगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का विजन सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने के बारे में नहीं है। बल्कि ऐसा भारत बनाने के बारे में है जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो।

सिंह ने रक्षा क्षेत्र को इस विज़न की नींव बताया। उन्होंने कहा, “2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल काफी बढ़ाना होगा। रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ाना होगा और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।” रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि सहयोग के बिना इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच मजबूत साझेदारी होनी चाहिए।

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सिंह ने कहा कि DRDO और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन तक फैलाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन, भविष्य की लड़ाई में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी इनोवेशन करने का आग्रह किया।

कल का मौसम: 18 सितंबर को बिहार, राजस्थान से तमिलनाडु तक भारी बारिश, 50 kmph तक तेज हवाओं की चेतावनी, इन राज्यों में अलर्ट जारी

IMD Mausam Bulletin: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 सितंबर के लिए देश भर का मौसम पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, उत्तर भारत के राजस्थान से लेकर पूर्व में बिहार, ओडिशा और दक्षिण भारत के तमिलनाडु व केरल तक कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

बिहार, राजस्थान, ओडिशा और तमिलनाडु समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के 18 सितंबर के बुलेटिन के मुताबिक देश के 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग अलग जगहों स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। उत्तर और पूर्व भारत की बात करें तो बिहार, पूर्वी राजस्थान, ओडिशा तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत और द्वीप समूह में तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल, केरल व माहे, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग जगहों पर भारी पानी बरसने के आसार हैं।

अंडमान और तमिलनाडु में 40 से 50 kmph की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

दक्षिण भारत और द्वीपीय इलाकों में आंधी-तूफान के साथ तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में थंडरस्टॉर्म के साथ आकाशीय बिजली कड़कने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

बिहार, राजस्थान, गुजरात और बंगाल में 30 से 40 kmph की गति से चलेंगी हवाएं

देश के उत्तर-पश्चिमी, पूर्वी, मध्य और पश्चिमी राज्यों में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश व यनम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, कोंकण व गोवा, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और पश्चिम मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर थंडरस्टॉर्म, बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने का अनुमान है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में अलग जगहों पर धरातल पर तेज सतही हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तराखंड, असम और केरल में बिजली कड़कने की आशंका, यहां गर्म व नम रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ दक्षिणी क्षेत्रों में बिजली चमकने की हिदायत दी है। अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने की आशंका जताई गई है। केरल और माहे के अलग-अलग इलाकों में 18 सितंबर को मौसम गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

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समुद्री क्षेत्रों में तूफानी हलचल: मछुआरों के लिए अलर्ट

तटीय और समुद्री इलाकों में तेज हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। उत्तरी सोमालिया तट के साथ और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम-मध्य अरब सागर के हिस्सों में 45 से 55 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलेंगी। इनकी स्पीड 65 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है।

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दक्षिण-पूर्व व दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, दक्षिणी श्रीलंका तट से लगे क्षेत्रों और दक्षिणी अंडमान सागर के इलाकों में 45 से 55 किमी/घंटे (झोंके 65 किमी/घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम बना रहेगा। इसके अलावा अंडमान सागर और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी व दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में 40 से 50 किमी/घंटे की गति से हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 60 किमी/घंटे तक जा सकते हैं।

UPI MDR Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट! मोदी सरकार को मिला CM उमर अब्दुल्ला का साथ

UPI MDR Charges Row: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। सीएम ने कहा कि UPI सिस्टम को चलाना बहुत महंगा है। उन्होंने कहा कि जो चीजें हमें मुफ्त में मिलती हैं, हम उनकी कद्र नहीं करते।

अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है।

‘काफी पैसा खर्च होता है…’

सीएम ने कहा कि इस पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।”

J&K के CM ने कहा, “यह चार्ज आपसे या मुझसे नहीं लिया जाएगा। इसका भुगतान उन व्यवसायों को करना होगा जहां लेनदेन हो रहा है। अभी जो आदेश जारी किया गया है। उसमें साफ कहा गया है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। दूसरी बात, अगर आप और मैं एक-दूसरे को पैसे भेज रहे हैं, तो उस पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से कम के लेनदेन पर कोई मर्चेंट चार्ज नहीं है, क्योंकि ज्यादातर व्यावसायिक लेनदेन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर चार्ज लगता है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय की गई है।”

अब्दुल्ला ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि UPI को चालू रखने में लगभग ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ₹20,000 करोड़ का मतलब है कि यह पैसा आपके और मेरे द्वारा दिए गए टैक्स से आ रहा है। कहीं न कहीं से तो यह पैसा आ ही रहा है। तो, जाने-अनजाने में हम UPI के लिए पहले से ही भुगतान कर रहे हैं। लेकिन आज हम इसके लिए अपने टैक्स के जरिए भुगतान कर रहे हैं। अगर इसके बाद बड़ी कंपनियां और व्यापारी इसके लिए भुगतान करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए।”

‘फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं’

इस बीच, यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हाल में जारी गाइडलाइंस में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि US की इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को भारत के UPI पेमेंट सिस्टम में RuPay कार्ड जैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिलते हैं।

DFS ने एक बयान में कहा, “15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में RuPay के अलावा दूसरे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं है। यह आरोप कि बाहरी दबाव की वजह से MDR लागू किया जा रहा है, ‘गलत और गुमराह करने वाला’ है।”

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।

NPCI ने क्या कहा?

NPCI ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

नए गाइडलाइंस के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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UP Home Guard vacancies: यूपी में होने वाली है नौकरियों की बारिश, योगी सरकार अगले 6 महीने में बांटेगी एक लाख नौकरियां

UP Home Guard vacancies: उत्तर प्रदेश निवासियों के लिए यह खबर खुश करने वाली है। राज्य में अगले 6 महीनों में न सिर्फ सरकारी नौकरी की बारिश होने वाली है, बल्कि सरकार राज्य में पेंशन के तहत दी जाने वाली धनराशि और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। राज्य की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है।

इतना ही नहीं सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए आर्थिक सहूलियत बढ़ाने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है।

सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है।

बीमारू राज्य से देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना यूपी

मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। उत्तर प्रदेश अब देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। आज यहां आने को हर कोई लालायित है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है।

समाज की एकजुटता का परिणाम है विकास

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है।

गोरखपुर में बदलाव ने ले ली मच्छर और माफिया की जगह

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया से निजता मिली है। इंफ्रास्ट्रक्चर ने गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी।

सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का भी जिक्र किया।

अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले 6 माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। अब गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली।

7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अक्टूबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ शिविर लगने जा रहा है। यह एक सप्ताह का विशेष शिविर होगा। इसमें सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित नागरिकों को उनमें शामिल करने की पहल चलाई जाएगी।

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यूपीआई पर शुल्क जनविरोधी

नई दिल्ली। 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का मुद्दा बुधवार को संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की बैठक में भी उठा। विपक्षी सदस्यों ने नई व्यवस्था पर चिंता जताते हुए इसे ‘जनविरोधी’ बताया। बैठक में जीडीपी वृद्धि दर की गणना की पद्धति पर भी सवाल उठाए गए।

नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर व्यापारी से 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लिया जाएगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा। व्यवस्था 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होनी है।

समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद कहा कि यूपीआई का मुद्दा बुधवार की बैठक की निर्धारित कार्यवाही का हिस्सा नहीं था, लेकिन सदस्यों ने इस संबंध में अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में नई समिति के अस्तित्व में आने के बाद इस विषय पर विचार किया जा सकता है।

समिति के सदस्य और आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले का व्यापक असर होगा। उन्होंने इसे ‘पूरी तरह जनविरोधी फैसला’ बताया।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि संसदीय समितियों की कार्यवाही विशेषाधिकार प्राप्त होती है और उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की आशंका को लेकर देशभर में चिंता और नाराजगी है और जनता को प्रभावित करने वाले ऐसे मुद्दों का प्रतिबिंब संसदीय कार्यवाही में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है।

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए नई व्यवस्था जारी की थी। इसके साथ जनवरी 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था में बदलाव हो जाएगा। शून्य-एमडीआर नीति डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई थी। हालांकि बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी यानी फिनटेक कंपनियां लंबे समय से यूपीआई व्यवस्था चलाने की लागत और उसके वित्तपोषण का मुद्दा उठाती रही हैं।

नई व्यवस्था में शुल्क व्यापारी पर होगा, ग्राहक पर नहीं। 2,000 रुपये तक के यूपीआई व्यापारिक भुगतान शुल्क-मुक्त रहेंगे।  बैठक में जीडीपी की गणना का मुद्दा भी उठा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार को जीडीपी की गणना की पद्धति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि आधार वर्ष में बदलाव किया गया है।

सरकार सीधे टैक्स मंत्रालय ही बना ले!

अब समय आ गया है कि वित्त, वाणिज्य, उद्योग आदि से अलग सरकार एक टैक्स का मंत्रालय बनाए। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की सरकार की घोषणा के बाद यह आवश्यकता ज्यादा अनिवार्य रूप से प्रकट हुई है। सरकार इसे शुल्क कह रही है लेकिन असल में यह टैक्स ही है, जिसका भुगतान किसी न किसी रूप में आम नागरिक को करना है। सोचें, कितना दूरदर्शी था वह व्यक्ति, जिसने कहा था कि दुनिया में दो ही चीजें सत्य हैः एक मृत्यु और दूसरा टैक्स। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस वाक्य को अमर कर दिया है। टैक्स ही अंतिम सत्य है। अब कोई चीज ऐसी नहीं बची है, जिस पर टैक्स नहीं है।

सरकार कहती है कि उसने एक देश, एक टैक्स का नियम यानी जीएसटी लागू कर दिया है लेकिन वास्तविकता यह है कि देश के हर नागरिक को अब भी दर्जनों टैक्स देने होते हैं। चाहे वह आयकर के रूप में हो, जीएसटी के रूप में हो, वैट के रूप में, सेस या सरचार्ज के रूप में हो या टोल के रूप में हो या किसी सेवा शुल्क के रूप में हो।

सोचें, सरकार ने यूपीआई को एक तकनीकी मार्बल के रूप में कितना प्रचारित किया था! इसे भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया गया और इसे शुल्क मुक्त रखने का ऐलान भी किया गया। लेकिन सरकार ने अब इस पर भी शुल्क लगा दिया है। इसके लिए आंकड़ों को जिस तरह से तोड़ा मरोड़ा गया है वह अभूतपूर्व है। कहा गया कि यूपीआई से होने वाला 96 फीसदी लेनदेन दो हजार रुपए से कम का होता है, जिस पर सरकार कोई शुल्क नहीं लगा रही है। सिर्फ चार फीसदी लेनदेन पर शुल्क लगेगा, वह भी सिर्फ 0.40 फीसदी होगा और उसकी भी अथिकतम सीमा तीन सौ रुपए होगी।

हालांकि वास्तविकता यह है कि चार फीसदी लेनदेन का मूल्य 66 फीसदी है। जो 96 फीसदी लेनदेन होता है उसका मूल्य केवल 34 फीसदी है। कुल 314 लाख करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन में 207 लाख करोड़ का लेनदेन चार फीसदी ट्रांजेक्शन से हुआ है। इस रकम के ऊपर शुल्क या टैक्स लगाया जाएगा।

सवाल है कि चार फीसदी ट्रांजेक्शन पर 0.40 फीसदी की दर से और तीन सौ रुपए की अधिकतम सीमा लगा कर भी शुल्क क्यों लगाना है? इसकी जरुरत बताते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि कोई भी सेवा कितने समय तक मुफ्त में दी जा सकती है? कहा जा रहा है कि इसके रखरखाव पर और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने पर खर्च होता है। इसलिए ज्यादा समय तक मुफ्त में सेवा नहीं दी जा सकती है। सवाल है कि क्या यूपीआई की सेवा मुफ्त है? ऐसा नहीं है। यूपीआई का संचालन करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यीनी एनपीसीआई मुनाफा कमाने वाली संस्था है।

उसे यूपीआई के संचालन में घाटा नहीं होता है। उसे कई तरह की डिजिटल भुगतान सेवाओं के लिए बैंकों, एप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से पैसा मिलता है। लेकिन चूंकि एनपीसीआई एक गैर लाभकारी संस्था यानी नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के तौर पर बनी है इसलिए उसकी कमाई को मुनाफा नहीं, बल्कि सरप्लस कहा जाता है। सिर्फ यूपीआई को लें तो एनपीसीआई का खर्च तीन हजार करोड़ रुपए से कुछ कम है और उसकी कमाई इससे ज्यादा है। पिछले साल तो उसने अपनी कमाई पर केंद्र सरकार को एक हजार करोड़ रुपए का टैक्स दिया है। अगर पूरी डिजिटल बैंकिंग को शामिल करें तो खर्च 20 हजार करोड़ रुपए के करीब होता है। लेकिन बैंकों को होने वाली कमाई के मुकाबले यह रकम कुछ भी नहीं है।

देश के सभी बैंकों की एक वित्तीय वर्ष की साझा कमाई लगभग 4.11 लाख करोड़ रुपए है। रिजर्व बैंक की कमाई का आंकड़ा कितना बड़ा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिजर्व बैंक ने इस साल अपनी कमाई से केंद्र सरकार को जो लाभांश दिया है वह 2.87 लाख करोड़ रुपए का है। इस प्रत्यक्ष कमाई के अलावा इकोनॉमी के ऑर्गेनाइज्ड होने से ज्यादा लेनदेन आधिकारिक रूप से हो रहा है, जिस पर सरकार को टैक्स मिल रहा है। नकद लेनदेन में बहुत पैसा काले धन की अर्थव्यवस्था में चला जाता था। तभी सवाल है कि जब लाखों करोड़ रुपए की कमाई बैंकों को है और टैक्स की कमाई सरकार को है तो फिर डिजिटल बैंकिंग पर होने वाले खर्च के लिए अलग से नागरिकों से पैसा वसूलने की क्या तुक है?

सरकार कह रही है कि चार फीसदी ट्रांजेक्शन पर जो 0.40 फीसदी शुल्क है वह भी जनता को नहीं देना है, बल्कि व्यापारी देगा। सोचें, कभी ऐसा हुआ है कि सरकार किसी उत्पाद या सेवा पर शुल्क लगाए तो उसका भुगतान व्यापारी करे? व्यापारी हर शुल्क ग्राहक से ही वसूलता है। चाहे वह सरचार्ज लगा कर वसूले या वस्तु व सेवा की कीमत बढ़ा कर वसूले। अंततः भुगतान जनता को ही करना होता है। सो, यह जनता के ऊपर एक नया टैक्स है। असल में सरकार को हर उत्पाद और हर सेवा पर टैक्स वसूलना है। उसे लग रहा है कि हर देश में औसतन 24 हजार करोड़ ट्रांजेक्शन हो रहे हैं और भारत की पूरी जीडीपी से थोड़ा ही कम ट्रांजेक्शन यूपीआई के जरिए हो रहा है तो इसका मतलब है कि लोगों के पास पैसे हैं इसलिए लोगों से टैक्स वसूला जाए। ध्यान रहे भारत की जीडीपी 360 लाख करोड़ रुपए के करीब है और यूपीआई का सालाना ट्रांजेक्शन 314 लाख करोड़ है।

यूपीआई के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाना व्यापक रूप से भारत सरकार के जन विरोधी रुख को दिखाता है और साथ ही यह भी दिखाता है कि उसके पास राजस्व बढ़ाने का टैक्स लगाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं है। सरकार कोई और उपाय नहीं कर पा रही है। बाहर से निवेश नहीं आ रहा है। सारे प्रयास के बावजूद विनिर्माण सेक्टर मजबूत नहीं हो रहा है। निर्यात का इकोसिस्टम बहुत कमजोर है और दुनिया के ज्यादातर देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा है। अकेले चीन और रूस को मिला कर करीब 15 लाख करोड़ रुपए का व्यापार घाटा है। तभी घूम फिर कर सरकार टैक्स लगा देती है। एक व्यक्ति को कई कई बार टैक्स देना पड़ता है। आय़कर चुकाने के बाद की आमदनी से कुछ भी खरीदने पर कई तरह के टैक्स देने होते हैं। किसी भी उत्पाद या सेवा को लें तो दिखाई देगा कि एक सेवा या एक उत्पाद पर कितने टैक्स देने होते हैं।

मिसाल के तौर पर कोई व्यक्ति गाड़ी खरीदता है तो उसे जीएसटी, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन शुल्क, पेट्रोल या डीजल का शुल्क, रोड इंफ्रास्ट्रक्टर सेस और फिर टोल टैक्स देना होगा। ऐसे ही किसी व्यक्ति के बिजली का बिल देखें तो पता चलेगा कि जितना एनर्जी चार्ज है लगभग उतना ही टैक्स है। वह टैक्स कई तरह का होगा। एनर्जी चार्ज पर तो जीएसटी देना ही है उसके अलावा मीटर का फिक्स्ड चार्ज और पावर परचेज एग्रीमेंट का चार्ज और इन दोनों पर जीएसटी अलग है। किसी भी उत्पाद या सेवा के बिल में इस तरह टैक्स की मौजूदगी को देखा जा सकता है। तभी सरकार को गंभीरता से इस पर विचार करना चाहिए कि जब सब कुछ टैक्स ही है तो एक टैक्स मंत्रालय बना दिया जाए और वहां ऐसा मंत्री नियुक्त किया जाए, जो खुर्दबीन लेकर यह खोजे कि कहां कहां अभी तक टैक्स नहीं लगा है और वहां टैक्स लगाए।

UPI पर 0.4% एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा, सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा

यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा। सरकार के सूत्रों ने 16 सितंबर को यह बताया। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को 2000 रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का ऐलान किया।

एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं लेगी सरकार

सरकार क्या 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगाने का फैसला वापस लेगी? इस सवाल के जवाब में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बारे में फैसला लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई सिस्टम को फायदा

सूत्रों ने बताया कि एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला यूपीआई ईकोसिस्टम के हित में लिया गया है। इसका मकसद यूपीआई की सेफ्टी और सिक्योरिटी को मजबूत बनाना है। सूत्रों ने यह भी कहा कि 2020 में यूपीआई शुरू होने पर दूसरे देशों की तरह लेवी लगाने का फैसला लिया गया था। नए एमडीआर फ्रेमवर्क से यूपीआई को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कई पक्षों ने एमडीआर चार्ज का किया विरोध

यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का कई पक्षों ने विरोध किया है। इनमें ट्रेडर्स, दुकानदार और राजनीतिक दल शामिल हैं। राजनीतिक दलों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी

सरकार ने एमडीआर चार्ज लगाने के फैसले का बचाव करते हुए 15 सितंबर को कहा कि इससे रूरल और सेमी अर्बन एरिया में यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि यूपीआई से होने वाले ज्यादातर पेमेंट्स को फ्री बनाए रखा गया है।

संसद की समिति ने यूपीआई को फ्री रखने का समर्थन नहीं किया था 

फाइनेंस पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि ‘जीरो यूपीआई रीजीम’ से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ता है। इससे लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की यूपीआई ईकोसिस्टम की क्षमता भी सीमित बनी रहती है। उसने यूपीआई को वित्तीय रूप से सस्टेनेबल बनाए रखने के लिए व्यावहारिक रेवेन्यू की व्यवस्था शुरू करने की सलाह दी थी।

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यूपीआई सिस्टम पर सरकार को सालाना 2000 करोड़ खर्च करना पड़ता है

समिति ने यह भी कहा था कि यूपीआई पेमेंट ईकोसिस्टम की मदद के लिए सरकार सालाना 2000 करोड़ रुपये खर्च करती है। करीब 6 सालों तक पूरी तरह से फ्री रहने के बाद यूपीआई अब चार्जेबल हो जाएगा। एमडीआर चार्ज 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा। हालांकि, चार्ज के दायरे में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन आएंगे। कस्टमर्स को यह चार्ज नहीं चुकाना होगा।

PhonePe मार्च तक पेश कर सकती है आईपीओ, सीईओ समीर निगम ने बताया पूरा प्लान

फोनपे मार्च तक आईपीओ पेश कर सकती है। कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ समीर निगम ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर एमडीआर के ऐलान और बढ़ते रेवेन्यू को देखते हुए फोनपे इस वित्त वर्ष के अंत तक अपना आईपीओ पेश कर सकती है।

आईपीओ के प्लान पर UPI पर एमडीआर का असर

निगम ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने कहा, “इसने (यूपीआई पर एमडीआर) निश्चित रूप से हमें आईपीओ के और करीब ला दिया है। कुछ दूसरे वेरिएबल्स भी हैं। हम इनमें से कुछ पर विचार कर रहे हैं। एमडीआर का मसला सेटल हो जाने पर हम दोबारा विचार (आईपीओ) करना शुरू करेंगे। उम्मीद है कि यह समय जल्द आने वाला है।”

NPCI ने यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर एमडीआर का किया ऐलान

फोनपे के सीईओ का यह बयान यूपीआई पर एमडीआर के ऐलान के एक दिन बाद आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर का ऐलान किया। 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस एमडीआर चार्ज के दायरे में आएंगे। यह 15 अक्तूबर से लागू होगा।

एमडीआर का बोझ यूजर्स पर नहीं पड़ेगा

MDR वह कमीशन है, जिसका पेमेंट डिजिटल ट्रांजेक्शंस को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट्स बैंक को देते हैं। यूपीआई पर एमडीआर लागू होने के बाद अब यह मर्चेंट्स के लिए फ्री नहीं रह जाएगा। हालांकि, यूजर्स के लिए यह पहले की तरह फ्री बना रहेगा। हालांकि, अभी यह बताना मुश्किल है कि मर्चेंट्स पहले की तरह यूपीआई से पेमेंट लेंगे या नहीं।

फोनपे के आईपीओ को सेबी की मिल चुकी है मंजूरी

फोनपे ने इस साल की शुरुआत में आईपीओ का प्लान अनिश्चित समय के लिए टाल दिया था। उसने जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमजोर इनवेस्टर सेंटीमेंट को इसका कारण बताया था। हालांकि, बेंगलुरु की इस फिनटेक फर्म के आईपीओ को सेबी की मंजूरी 20 जनवरी को मिल गई थी। तब मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि फोनपे आईपीओ से करीब 12,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

एमडीआर को पॉजिटिव रिस्पॉन्स का मिलेगा फायदा

निगम ने कहा, “करीब तीन-चार साल से यूपीआई पर एमडीआर की चर्चा चल रही थी। यह एक ऐसा मसला था, जिसके बारे में कई इनवेस्टर्स हमसे पूछते थे। इसका कंज्यूमर साइड और मर्चेंट साइड पर किस तरह का असर पड़ेगा? मेरा मानना है कि इस पर रिस्पॉन्स पॉजिटिव रहने पर हमें मदद मिलेगी।”

यूपीआई ट्रांजेक्शंस में यूपीआई की 45% हिस्सेदारी

एमडीआर चार्ज से आने वाले पैसे का करीब 20 फीसदी यूपीआई ऐप्स के पास जाएगा। यूपीआई ट्रांजेक्शंस में फोनपे का मार्केट शेयर 45 फीसदी से ज्यादा है। इसका मतलब है कि एमडीआर कलेक्शंस का करीब 10 फीसदी फोनपे के पास जा सकता है। पेटीएम ने 2021 के आखिर में खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट कराया था। उसका आईपीओ करीब 18,000 करोड़ रुपये का था।