कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे सुरेश कलमाड़ी के इस्तीफे से की जा रही है। यूपीए दो की सरकार में कलमाड़ी सबसे पहले मंत्री थे, जिनको भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देना प़ड़ा था। उनके ऊपर कॉमनवेल्थ खेलों में ग़ड़ब़ड़ी के आरोप लगे थे। उसके बाद तो सिलसिला ही शुरू हो गया था। मंत्रियों के इस्तीफे और सांसदों की गिरफ्तारी का सिलसिला ऐसा चला कि पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया और कांग्रेस 2014 का चुनाव बुरी तरह से हारी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भ्रष्टाचार के आरोपों में नहीं हुआ है। लेकिन उनके ऊपर जिम्मेदारी के निर्वहन में अक्षमता के आरोप लगे। उनके कार्यकाल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक हुआ। इस साल पेपर लीक के बाद 21 छात्रों की जान गई। तब भी छात्रों और युवाओं के भारी दबाव में उनका इस्तीफा हुआ।

बहरहाल, प्रधान के इस्तीफे से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा हुआ था। उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। गौरतलब है कि वे 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से पाला बदल कर भाजपा में गए थे और लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उनको मंत्री बनाया गया था। बाद में राजस्थान से राज्यसभा के उपचुनाव में जीत कर उच्च सदन के सदस्य बने थे। इस बार उनको राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। कहा जा रहा है कि वे पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनसे पहले जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा नहीं दी गई थी और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे केरल के रहने वाले हैं और उनको मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। केरल के चुनाव में भाजपा हार गई। फिर कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा गया।

इनके अलावा दो और मंत्रियों के इस्तीफे का इंतजार हो रहा है। एक व्यक्ति, एक पद के हिसाब से इनका इस्तीफा होगा। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली में संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ये दोनों लोकसभा सांसद हैं और अभी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के साथ ही इनका इस्तीफा होगा। उसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार में फेरबदल होगी। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के बाद किसी भी दिन सरकार में बड़ी फेरबदल होगी। 20 अगस्त की तारीख बताई जा रही है। गौरतलब है कि मोदी की तीसरी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं और अभी तक सरकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कम से कम पांच मंत्री पद खाली हो गए हैं या होने वाले हैं। इनके अलावा भी कई मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की वजह से ही पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम नहीं बन रही है। उनको अध्यक्ष बने छह महीने से ज्यादा हो गए। वे अब भी पुरानी टीम के साथ ही काम कर रहे हैं। उनको भी अगस्त में नई टीम मिलेगी। प्रधानमंत्री की टीम बिल्कुल नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली होगी।

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद हो कि न हो, दो साल पहले इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जैसे 2026 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह कमेटी बनी है वैसे ही 2024 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद वह कमेटी बनी थी। राधाकृष्ण कमेटी ने एक सौ ज्यादा सिफारिशें की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी 27 सिफारिशें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ सिफारिशें आंशिक तौर पर मानी गईं और 57 सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? दो साल के बाद फिर पेपर लीक हो गया!

राधाकृष्ण कमेटी ने सिफारिश की थी नीट यूजी सहित करीब 20 प्रतियोगिता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में विषय के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भी पेपर लीक होना जारी है और दूसरी गड़बड़ियां भी हो ही रही हैं तो इसका अर्थ है कि एकमात्र समस्या यह नहीं है कि एनटीए में विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं। समस्या संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। अगर नंदन नीलेकणी संरचनात्मक समस्याओं को समझ कर उसे ठीक करने का सुझाव देते हैं तब तो ठीक है अन्यथा इसका भी कोई मतलब नहीं होगा।

उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा के सिद्धांत को खत्म करने की सिफारिश करेंगे? क्या वे कहेंगे कि एक बार में 24 लाख छात्रों वाली नीट यूजी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए? क्या वे यह सिफारिश कर सकते हैं कि मेडिकल में दाखिले की पुरानी व्यवस्था बहाल हो और नीट यूजी की बजाय राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार पहले जैसा दिया जाए? यानी शिक्षा और परीक्षा के मामले में राज्यों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। अगर नंदन नीलेकणी की कमेटी नीट समाप्त करने और मेडिकल में दाखिले की परीक्षा का विकेंद्रीकरण करने की सिफारिश नहीं करती है तो उनकी सिफारिशों का स्कोप बहुत सीमित हो जाएगा और तब किसी बड़े सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

अब सवाल है कि अगर नीट समाप्त करने या नीट जैसी दूसरी अखिल भारतीय परीक्षाएं खत्म करने की सिफारिश नीलेकणी कमेटी नहीं करती है तो उसके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा तो यही होगा कि नीट को समाप्त किया जाए। लेकिन अगर सरकार की ओर से कमेटी की सिफारिशों का जो स्कोप तय किया जाएगा यानी जो फ्रेमवर्क दिया जाएगा उसमें पहले ही यह स्पष्ट कर दिया जाए कि नीट की परीक्षा जारी रहेगी तो फिर नीलेकणी कमेटी को नीट को इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा जेईई की तरह दो चरणों में कराने की सिफारिश करनी चाहिए। ध्यान रहे अगले साल नीट की परीक्षा जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित होगी और कई पालियों में होगी। हालांकि उसमें प्रश्नपत्रों की कठिनता के आधार पर अंकों के सामान्यीकरण की अलग समस्या आती है। फिर भी कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पेपर लीक की संभावना को कम करती है। इसके साथ साथ अगर नीट की परीक्षा भी जेईई के तरह दो चरण में हो तो पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है। दो चरण का अर्थ है कि पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा हो और दूसरे चरण में एडवांस परीक्षा हो। पहले चरण में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न हों और दूसरे चरण में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएं।

इसके अलावा नीलेकणी कमेटी को मेडिकल की पढ़ाई की फीस को नियमित करने के बारे में भी सुझाव देने चाहिए। अभी मेडिकल की परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न पत्र इसलिए लीक होते हैं कि एक बार में परीक्षा होती है और 720 अंकों की परीक्षा में अगर अच्छे अंक आ गए तो देश के प्रीमियम संस्थान में बहुत कम फीस में पढ़ने का मौका मिलता है। अन्यथा निजी कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा है कि लोग स्वाभाविक रूप से पेपर लीक पर पैसा खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैं। खुद सरकार इसी वजह से इसे हाई स्टेक यानी बड़े दांव वाली परीक्षा मानती है। नीट के बचाव में तर्क दिया जाता है कि इसमें क्वालिफाई करके गरीब बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं। यह गलत है। निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक है। ऐसे में कौन गरीब अपने बच्चों को वहां पढ़ा पाएगा! अगर डोनेशन नहीं देना पड़े तब भी निजी कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।

बहरहाल, नीलेकणी कमेटी को सिर्फ नीट पर विचार नहीं करना है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के सुझाव देने हैं। इसकी शुरुआत एनटीए से हो सकती है। भारत सरकार ने एक देश, एक परीक्षा की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एनटीए का गठन किया। इसके बाद एक एक करके परीक्षाओं को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाने लगा। मेडिकल की परीक्षा के साथ साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भी सीयूईटी की परीक्षा ली जाने लगी। इसमें अलग समस्याएं हैं। वास्तविकता यह है कि एनटीए देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में शून्य योगदान दे रहा है। सो, नीलेकणी कमेटी एनटीए को खत्म करने और पुरानी विकेंद्रित परीक्षा व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश करे। सवाल है कि अगर एनटीए को समाप्त करना उसके स्कोप ऑफ वर्क से बाहर हो तो क्या करना चाहिए? तब उसे एनटीए में सुधार की सिफारिश करनी चाहिए।

सबसे पहला सुधार तो यह जरूरी है कि एनटीए को कम से कम वैधानिक दर्जा दिया जाए। अगर सरकार चाहती है कि यूपीएससी की तरह इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बनें तो इसे संवैधानिक नहीं तो वैधानिक दर्जा दिया जाए। इसका अपना कैडर बने ताकि तदर्थ ढंग से काम नहीं हो। अभी इधर उधर से ले आकर अधिकारियों को रखा जाता है और गड़बड़ी होने पर बाद में उनको वापस अपने कैडर में भेज दिया जाता है। इससे जवाबदेही नहीं बनती है। इसके बाद ठेके पर नियुक्ति रोकने की सिफारिश की जाए और परीक्षा से जुड़े काम आउटसोर्स करने पर रोक लगे। यूपीएससी की तरह एनटीए का अपना बुनियादी ढांचा बने। विशेषज्ञों की नियुक्ति हो और पूरे साल इसका काम चले। जैसे यूपीएससी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के ढेर सारे सेट बनते हैं और किसी को पता नहीं होता है कि परीक्षा में कौन से सेट का इस्तेमाल होगा वैसी व्यवस्था एनटीए द्वारा आय़ोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए भी की जाए। एनटीए जिन परीक्षाओं का आयोजन करता है उसके अलावा भी कई एजेंसियां हैं, जो दाखिला और भर्ती परीक्षा आयोजित करती हैं। उनमें भी एनटीए की तर्ज पर ही सुधार की सिफारिश होनी चाहिए। हालांकि सिर्फ कमेटी की सिफारिशों से कुछ खास नहीं होगा। सरकार की मंशा और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए तभी जरूरी सुधार होंगे।

‘₹79 कब कट गए, पता भी नहीं चलता’; UPI AutoPay का चौंकाने वाला खेल जानते हैं?

डिजिटल भुगतान की दुनिया में फ्री ट्रायल और ऑटोपे मैंडेट का एक चौंकाने वाला खेल सामने आया है। मुंबई के एक शख्स ने जब अपनी मां को यूपीआई इस्तेमाल करना सिखाया तो उन्हें पता चला कि बिना उनकी जानकारी के कई ऑटोपे मैंडेट एक्टिव हो चुके थे, और इसके एवज में पैसे लिए जा रहे थे।

योगी सरकार ने स्मार्ट मीटर पर फैला भ्रम किया दूर, यूपीपीसीएल ने दी पूरी जानकारी

  • स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा नया आर्थिक बोझ
  • सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक खबरों का यूपीपीसीएल ने किया खंडन
  • प्रीपेड से पोस्टपेड व्यवस्था में लौटने के बाद नियमानुसार जमा हो रही सिक्योरिटी राशि
  • यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, एसएमएस एवं व्हाट्सएप पर मिल रही बिजली बिल की सुविधा

 

लखनऊ, 28 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी बीच स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद पहले समायोजित या वापस की गई सिक्योरिटी राशि ही नियमानुसार दोबारा जमा कराई जा रही है। इसे नया शुल्क या स्मार्ट मीटर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताना पूरी तरह भ्रामक है।

 

यूपीपीसीएल की ओर से बताया गया कि हाल के दिनों में कुछ समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नया आर्थिक बोझ डालने और उसने पुनः सिक्योरिटी धनराशि वसूलने संबंधी खबरें प्रसारित की जा रही है, जो कि तथ्यों के अनुरूप नहीं है और अधूरी जानकारी के आधार पर प्रस्तुत की गई है। 

 

यूपीपीसीएल के अनुसार, प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व में प्रीपेड प्रणाली पर संचालित किया गया था। उस समय उपभोक्ताओं द्वारा पूर्व में जमा की गई सिक्योरिटी धनराशि को नियमानुसार उनके बकाया विद्युत देयकों के विरुद्ध समायोजित कर दिया गया था तथा जिन उपभोक्ताओं पर कोई बकाया नहीं था, उनकी जमा सिक्योरिटी राशि उनके प्रीपेड खाते में रिचार्ज के रूप में क्रेडिट कर दी गई थी। तत्पश्चात उपभोक्ताओं की सुविधा एवं जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पुनः पोस्टपेड प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में सभी उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह पूर्व की भांति नियमित मासिक विद्युत बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस संबंध में आवश्यक आदेश पूर्व में ही निर्गत किए जा चुके हैं।

 

यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के फलस्वरूप अब वही सिक्योरिटी धनराशि, जो पूर्व में उपभोक्ताओं को समायोजित अथवा वापस कर दी गई थी, नियमानुसार पुनः जमा कराई जा रही है। इसे किसी प्रकार का नया शुल्क अथवा स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण उपभोक्ताओं पर डाला गया अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया जाना पूर्णतः भ्रामक एवं तथ्यों से परे है। उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का एकमुश्त वित्तीय भार न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए इस धनराशि को चार समान मासिक किस्तों में वसूल किए जाने का निर्णय लिया गया है। 

 

प्रथम किस्त जून-2026 की ऊर्जा खपत के बिल, जो जुलाई-2026 में जारी हुआ था, उसमें शामिल थी। बाकि तीन किस्तें आगामी तीन मासिक बिलों में स्वतः सम्मिलित होकर आएंगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिलिंग प्रणाली द्वारा स्वतः संपादित की जाएगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की अतिरिक्त औपचारिकता पूर्ण करने की आवश्यकता नहीं होगी।

 

यूपीपीसीएल ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को नियमित पोस्टपेड मासिक बिल जारी किए जा रहे हैं। भविष्य में दिए जाने वाले नए विद्युत संयोजन भी पूर्व की भांति पोस्टपेड स्वरूप में ही प्रदान किए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर, प्रीपेड व्यवस्था तथा सिक्योरिटी धनराशि को परस्पर जोड़कर प्रस्तुत किए जा रहे समाचार तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इनसे केवल उपभोक्ताओं में अनावश्यक भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

 

सभी उपभोक्ताओं को उनका मासिक विद्युत बिल यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले एसएमएस एवं व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अभी तक पंजीकृत नहीं है अथवा किसी कारणवश गलत दर्ज है, वे संबंधित वितरण निगम के अधिकृत व्हाट्सएप Chatbot, निकटतम विद्युत कार्यालय अथवा 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से अपना बिल प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार विद्युत बिल का भुगतान भी यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, विभागीय काउंटर, जन सुविधा केंद्र (सीएससी), विद्युत सखी तथा अन्य अधिकृत डिजिटल एवं फिनटेक के माध्यमों से अत्यंत सरलता से किया जा सकता है।

 

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक समाचारों पर विश्वास न करें। केवल यूपीपीसीएल एवं संबंधित वितरण निगमों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें। सभी उपभोक्ताओं से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे प्रत्येक माह अपना विद्युत बिल समय से डाउनलोड कर निर्धारित तिथि तक उसका भुगतान करें, जिससे किसी प्रकार की असुविधा अथवा विलंब अधिभार से बचा जा सके।

UPSSSC ASO Answer Key 2026: एएसओ/एआरओ मुख्य परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की जारी, 02 अगस्त तक आपत्ति जताने का दिया मौका

UPSSSC ASO Answer Key 2026: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (ASO)/असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर (ARO) मुख्य परीक्षा 2026 देने वाले उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट है। एएसओ और एआरओ मुख्य परीक्षा का आयोजन 26 जुलाई 2026 को किया गया था। आयोग ने इस परीक्षा शामिल उम्मीदवारों के लिए अस्थायी आंसर की जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब फाइनल रिजल्ट घोषित होने से पहले अपने स्कोर का अंदाजा लगाने के लिए आंसर की देख सकते हैं।

जिन परीक्षार्थियों ने 26 जुलाई, 2026 को एग्जाम दिया था, वे ऑफिशियल वेबसाइट https://upsssc.gov.in/default.aspx से आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं। अगर उन्हें जवाब में कोई गलती मिलती है, तो वे 2 अगस्त, 2026 तक ऑब्जेक्शन उठा सकते हैं। यह भर्ती उत्तर प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों में असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर और असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर के पदों के लिए 1,565 खाली जगहों को भरने के लिए हो रही है।

यूपीएसएसएससी एएसओ/एआरओ मुख्य परीक्षा 26 जुलाई 2026 को एक ही शिफ्ट में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक ऑफलाइन मोड में आयोजित किया गया था। पेपर में स्टैटिस्टिक्स, कंप्यूटर और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, और उत्तर प्रदेश से जुड़े जनरल नॉलेज के 100 मल्टीपल-चॉइस सवाल पूछे गए थे। अस्थायी आंसर की जारी होने के बाद, परीक्षा रिजल्ट घोषित होने से पहले अपने संभावित अंकों की गिनती करने के लिए ऑफिशियल की से अपने जवाबों का मिलान कर सकते हैं।

आपत्ति दर्ज करने की सुविधा

यूपीएसएसएससी ने उन उम्मीदवारों के लिए आपत्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी है जिन्हें लगता है कि प्रोविजनल की में कोई जवाब गलत है। इसके लिए आयोग ने ऑब्जेक्शन विंडो 27 जुलाई से 2 अगस्त, 2026 तक खोलने का फैसला किया है। कैंडिडेट को दिए गए समय के अंदर ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन अपनी आपत्तियां जमा करनी होंगी। आखिरी तारीख के बाद भेजे गए ऑब्जेक्शन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

यूपीएसएसएससी एएसओ/एआरओ आंसर की 2026 कैसे डाउनलोड करें

  • ऑफिशियल UPSSSC वेबसाइट पर जाएं।
  • होमपेज पर लेटेस्ट न्यूज़ सेक्शन में जाएं।
  • यूपी असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर/असिस्टेंट रिसर्च ऑफिसर आंसर की 2026 लिंक पर क्लिक करें।
  • आंसर की की पीडीएफ खोलें।
  • इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए सेव कर लें।

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे भर्ती प्रक्रिया और आगे की घोषणाओं के बारे में लेटेस्ट अपडेट के लिए यूपीएसएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।

UPSC Vacancy 2026: दिल्ली के शिक्षा विभाग में 800 से ज्यादा पदों पर प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल की होगी भर्ती, जानें आवेदन कैसे करें और क्या है लास्ट डेट

पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं! जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कितना सख्‍त है नया कानून

jitendra singh on paper leak in parliament

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। ALSO READ: “छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

उन्होंने कहा कि धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सजा की यही अवधि कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपए तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सजा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है… अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

 

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने उसमें भी समय सीमा तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी हो या विशेष कार्य बल। ALSO READ: कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

 

यूपीए राज में भी लीक होते थे पेपर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले भी पेपर लिक होते थे। 2009, 2011, 2012 और 2013 में पेपर लीक हुए। यह सिर्फ एक राज्य तक सिमित नहीं। पीएम ने जल्द न्याय का फैसला किया है। नए बिल में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है।  

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

Plastic Currency: ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों को केंद्र सरकार से मिली मंजूरी, जल्द मार्केट में होगी एंट्री

₹10 and ₹20 Polymer Banknotes Trial: केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को संसद में जानकारी दी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वित्त मंत्रालय ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि आरबीआई का उद्देश्य कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ पॉलीमर नोटों की उपयोगिता और जीवनकाल को परखना है।

100-100 करोड़ पीस पॉलीमर नोटों का होगा परीक्षण

वित्त मंत्रालय के अनुसार, आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के बाद ₹10 और ₹20 के 1-1 अरब पीस पॉलीमर नोट जारी कर ट्रायल करने का प्रस्ताव रखा था।अगर यह फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो इसके बाद इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलीमर बैंक नोटों का नियमित रूप से जारी किया जाना शुरू कर दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोटों की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है।

क्यों पड़े पॉलीमर नोटों की जरूरत?

कागज के नोटों की तुलना में पॉलीमर नोटों के कई फायदे होते हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने नोट कागज वाले नोटों की तुलना में काफी लंबे समय तक चलते हैं। ये नोट पानी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और पसीने या गंदगी से जल्दी मैले नहीं होते। ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोटों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है, इसलिए कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।

क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज वाले नोट?

सरकार ने इस बात पर पूरी स्थिति साफ कर दी है। आरबीआई इन नए पॉलीमर नोटों को मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में लाएगा। कागज की करेंसी को पूरी तरह बंद करने या उसे पॉलीमर नोटों से बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

डिजिटल पेमेंट पर क्या पड़ेगा असर?

यह पूछे जाने पर कि क्या प्लास्टिक नोट आने से यूपीआई और डिजिटल भुगतानों पर असर पड़ेगा, वित्त मंत्रालय ने कहा, इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं, इसका सही आकलन पॉलीमर नोटों के नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि कागजी/पॉलीमर बैंक नोट और डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं और जनता की सुविधा के लिए दोनों विकल्प मौजूद रहेंगे।

NTA Young Professional Vacancy 2026: एनटीए ने 16 युवा पेशेवरों के पदों पर शुरू की भर्ती, यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए करें आवेदन

NTA Young Professional Vacancy 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने युवा पेशवरों (यंग प्रोफेशनल YP) की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। एजेंसी ने आधिकारिक वेबसाइट पर इस भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल (YP) के पद भरे जाएंगे। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एजेंसी के अपनी परीक्षा और शोध गतिविधियों में विस्तार के बीच इस भर्ती का मकसद शैक्षिक, कानूनी और वित्तीय मामलों में एजेंसी की स्थिति मजबूत करना है। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये पद तीन स्ट्रीम में उपलब्ध हैं। एकेडमिक रिसर्च में 12 पद, लीगल रिसर्च में 2 पद, और फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च में 2 पद हैं। चयनित उम्मीदवार दिल्ली में एनटीए मुख्यालय में काम करेंगे। आधिकारिक काम के आधार पर कभी-कभी भारत के अंदर ट्रैवल भी करना पड़ सकता है। एजेंसी के साथ युवा पेशेवरों का जुड़ाव शुरू में 24 महीने के लिए होगा और प्रदर्शन और ऑर्गेनाइजेशनल जरूरतों के आधार पर इसे 12 महीने और बढ़ाया जा सकता है।

वैकेंसी डिटेल्स

स्ट्रीम पोस्ट की संख्या

एकेडमिक रिसर्च 12

लीगल रिसर्च 2

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च 2

कुल 16

आवेदन के लिए जरूरी योग्यता

सिर्फ यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल पर पंजीकृत उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

एकेडमिक रिसर्च

  • कैंडिडेट्स को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहिए और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर लिस्टेड होना चाहिए।
  • बेहतर होगा कि उनके पास संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो।
  • जिन कैंडिडेट्स के पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) डिग्री या रिसर्च और टीचिंग का अनुभव है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

लीगल रिसर्च

  • कैंडिडेट्स के पास सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषया के तौर पर लॉ होना चाहिए।
  • किसी मान्यता प्रापत विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ लॉज (LLM) डिग्री होनी चाहिए।
  • लीगल रिसर्च या लिटिगेशन में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च

  • भर्ती प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों को सीएसई में शामिल होना और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर होना जरूरी है।
  • कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, फाइनेंस या इससे जुड़े सब्जेक्ट में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) या कंपनी सेक्रेटरी (CS) जैसी प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन हो।
  • फाइनेंस, बजटिंग या ऑडिटिंग में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कैंडिडेट्स की उम्र भी यूपीएससी प्रतिभा सेतु स्कीम के तहत तय उम्र सीमा के अंदर होनी चाहिए।

सैलरी और कार्यकाल

चयनित उम्मीदवारों को ₹80,000 का फिक्स्ड मंथली सैलरी। शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट 24 महीने का होगा, जिसे परफॉर्मेंस के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। साल में प्रो-राटा बेसिस पर आठ दिन की छुट्टी। दिल्ली में एनटीए ऑफिस में फुल-टाइम, पांच दिन का वर्क वीक। नोटिफिकेशन में यह साफ किया गया है कि यह एंगेजमेंट पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट पर है और सरकार या एनटीए में स्थायी नियुक्ति की गारंटी नहीं देता है।

चयन प्रक्रिया

एलिजिबल कैंडिडेट्स को उनकी प्रोफाइल और रिलेवेंट स्ट्रीम के आधार पर शॉर्टलिस्ट करना।

एक इंटरव्यू, जो पर्सनली या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो सकता है।

अगर जरूरी हो, तो एनटीए अंतिम चयन से पहले एक लिखित परीक्षा या टास्क-बेस्ड असेसमेंट भी कर सकता है।

एनटीए ने यह भी कहा है कि सिर्फ एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरा करने से शॉर्टलिस्टिंग या चयन की गारंटी नहीं मिलती है। एजेंसी बिना कोई कारण बताए वैकेंसी की संख्या बदलने या किसी भी पोस्ट को न भरने का अधिकार रखती है।

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Pralhad Joshi: शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, धर्मेंद्र प्रधान के बारे में क्या कहा?

Pralhad Joshi: नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार (25 जुलाई) को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं इसे अपनी पूरी क्षमता से निभाऊंगा।

प्रह्लाद जोशी ने पत्रकारों से कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

इससे पहले, देशभर में कॉजपा के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

आंदोलनकारी छात्रों की नए शिक्षा मंत्री से तीन बड़ी मांगें

नीट पेपर लीक को लेकर करीब एक महीने तक जंतर-मंतर पर डटे रहने वाले छात्रों का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनकी एक बड़ी मांग पूरी हुई है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि नए शिक्षा मंत्री व्यवस्था में कुछ ठोस बदलाव करेंगे।

प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी मांग पूरी होने का जश्न मना रहे छात्रों से जब पीटीआई ने सवाल किया कि नए शिक्षा मंत्री से उनकी क्या उम्मीदें है तो अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों की बातों में तीन मांगें बार-बार सामने आईं और वह थीं- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सरकारी स्कूलों एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना।

पिछले करीब एक महीने यानी आंदोलन की शुरुआत से ही धरने में शामिल गाजियाबाद के राज यादव ने कहा कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की अलग-अलग आवाजों में भले ही शब्द अलग थे। लेकिन उनकी अपेक्षाएं लगभग एक जैसी रहीं।

‘शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है’

उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब माना जाएगा, जब शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी होगी। सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा दी जाएगी। योग्य शिक्षक उपलब्ध होंगे और मेहनत करने वाले छात्रों को पेपर लीक तथा महंगी शिक्षा जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर की रहने वाली सृष्टि का कहना है कि महंगी शिक्षा ने पढ़ाई को कई छात्रों के लिए संघर्ष बना दिया है। उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें खुद काम करना पड़ता है और ऐसे में अगर पेपर लीक हो जाए तो केवल परीक्षा ही नहीं। बल्कि मेहनत, समय और पैसे..तीनों पर पानी फिर जाता है।

सृष्टि ने नए शिक्षा मंत्री से मांग की कि सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं। शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जाए और सरकारी स्कूलों में बच्चों के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएं। करीब 15 से 20 दिनों से प्रदर्शन में शामिल राजस्थान के विक्रम चौधरी का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने, शिक्षा का बजट बढ़ाने और यूपीएससी, नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है। नीट की तैयारी कर रहे 11वीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उनकी उम्मीद जगी है।

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प्रदर्शन में 20 जुलाई से शामिल उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों में कौशल विकास को बढ़ावा देने और महंगी शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की। राजस्थान के जैसलमेर निवासी श्रवण कुमार ने कहा कि छात्रों को बार-बार पुनर्परीक्षा की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े। दूर-दराज में परीक्षा केंद्र आवंटित करने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाए।