UPI Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार

UPI Merchant Transaction Charges: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार के फैसले पर कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। वैसे शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और इस फैसले के कानूनी आधार व तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर यह सुनवाई की।

कोर्ट रूम दिखा जबरदस्त ड्रामा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यूपीआई लेनदेन पर लगाए जा रहे इस शुल्क के कानूनी स्वरूप और अधिकार क्षेत्र पर कई अहम सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि, ‘यह फीस या टैक्स नहीं तो आखिर क्या है?’ न्यायमूर्ती जॉयमाल्य बागची ने सरकार की मंशा और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर यह कोई फीस नहीं है, तो फिर इस शुल्क का वास्तविक चरित्र क्या है? 140 करोड़ भारतीयों के लेनदेन पर इस तरह का चार्ज वसूलने का एग्जीक्यूटिव स्कोप क्या है?”

‘सरकार की जेब में एक रुपया भी नहीं जाएगा’- ASG वेंकटरमण

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमण ने अदालत में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यह सरकारी टैक्स नहीं है। ASG ने कहा कि यह सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कोई टैक्स या वैधानिक कलेक्शन नहीं है। सरकार इसमें से एक भी रुपया अपने पास नहीं रख रही है’।

जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड स्वाइप करने पर बैंकों और गेटवे का इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आता है, वैसे ही यूपीआई में भी दो प्रमुख ऑपरेटर (बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर) शामिल हैं। यह उनके बीच का एक ‘इंटरबैंक सेटलमेंट फीस’ है, जिसे NPCI मैनेज करता है।

‘हमें ये सारे तथ्य हलफनामे पर चाहिए’- CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने मामले के तकनीकी स्वरूप को देखते हुए कहा कि अदालत को इन सभी दावों और आंकड़ों की लिखित पुष्टि चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर इस नीतिगत फैसले का आधार समझाना होगा।

क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर?

इस सुनवाई के दौरान आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों से जुड़े 3 सबसे बड़े आंकड़े सामने आए:

क्या 96% यूजर इससे बाहर हैं?- ASG के अनुसार, गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96% सामान्य ग्राहक और छोटे लेनदेन इससे पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

क्या दुकानों पर सामान महंगा होगा?- यह नियम केवल 2,000 रुपये से अधिक के बड़े कमर्शियल लेनदेन (P2M) पर लागू है। आम लोगों के बीच ट्रांसफर (P2P – पर्सन टू पर्सन) पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अत्यावश्यक सेवाओं पर कितना चार्ज?- जरूरी सेवाओं के लिए इस चार्ज की एक ऊपरी सीमा तय की गई है, जो अधिकतम ₹5 ही हो सकती है।

कब से प्रभावी होगा यह नया नियम?

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सूचित किया कि इस पूरी व्यवस्था का असर 15 अक्टूबर से धरातल पर दिखना शुरू होगा, जो इसका पहला माइलस्टोन है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा दाखिल होने के बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।

(रिपोर्ट: शंकर आनंद)

यूपीआई के मामले पर आज सुनवाई

नई दिल्ली। डिजिटल लेन देने के लिए सरकार के बनाए इकोसिस्टम यूपीआई के जरिए भुगतान पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले दिनों ऐलान किया कि दो हजार रुपए से ऊपर के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगेगा। यह शुल्क 15 अक्टूबर से लगना चालू होगा। पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है।

ध्यान रहे यूपीआई आने के बाद पिछले छह साल से इसके जरिए होने वाले लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता था। अब केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से यूपीआई के जरिए दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू किया है, जिसे 75 हजार रुपए या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम तीन सौ रुपए तक सीमित किया गया है। हालांकि, आम नागरिकों के बीच होने वाले पर्सन टू पर्सन लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रखे गए हैं।

केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई करेगी। यह जनहित याचिका अधिवक्ता रंजन दत्ता ने  दायर की है, जिसमें 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 अक्टूबर से शुल्क लागू होने को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शुल्क बिना किसी पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के जल्दबाजी में लागू किया गया है। याचिका में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

UPI के चार्जेज पर NSE के सीईओ का बड़ा बयान, ब्रोकर और उनके क्लाइंट्स के बीच का मामला

NSE on UPI Charges: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि यूपीआई पेमेंट्स पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। उनका कहना है कि यह मामला ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है और इस बात की संभावना है कि वे इसका हल निकाल लेंगे। उन्होंने ये बातें एनएसई की बीएसई पर लिस्टिंग के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। एनएसई के ₹1785 के शेयर ₹22,562 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे।

UPI MDR पर क्या कहा NSE के सीईओ ने?

एनएसई के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि यूपीआई से जुड़े एमडीआर पर सरकार के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि यह NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का फैसला है और अब हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह ब्रोकर और क्लाइंट के बीच का मामला लगता है और जो भी दिक्कत होगी, वे उसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे।

बता दें कि एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए एक नया एमडीआर फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत कैपिटल-मार्केट ट्रांजैक्शन यानी कि स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड से जुड़े पेमेंट पर 0.02% का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है। नए चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे।

ब्रोडर लेवल पर बात करें तो यूपीआई फ्रेमवर्क में ₹2000 से अधिक के खास P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर का प्रावधान है, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि लगभग 96% P2M ट्राजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों से एमडीआर हीं लिया जाएगा।

NSE IPO Listing: कैसा था स्टॉक मार्केट में शेयरों का पहला दिन

एनएसई की लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार हो रहा था और अब जाकर यह 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। इसका इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था और 5 गुना से अधिक भरने के बाद शेयरों ने आईपीओ निवेशकों को 1% से कम लिस्टिंग गेन दिया। हालांकि फिर इसने उड़ना भरने की कोशिश की। इसका ₹1785 का शेयर बीएसई पर ₹1800 के भाव पर लिस्ट होने के बाद ₹1878 की ऊंचाई तक पहुंचे थे यानी कि आईपीओ निवेशक 5% से अधिक मुनाफे तक पहुंचे थे।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

शेयर बाजारों पर दबाव घटने का नाम नहीं ले रहा है। क्रूड की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी में बॉन्ड यील्ड में उछाल और आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार के सेंटिमेंट को खराब किया है। इनवेस्टर्स बाजार से दूरी बना रहे हैं। उन्हें बाजार में हालात बदलते नहीं दिख रहे। सवाल है कि आगे बाजार की चाल कैसी रहने वाली है। इस सवाल का जवाब बंधन एएमसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक कुमार ने दिया। उन्होंने शेयर बाजार को लेकर कई अहम बातें बताईं।

बाजार एक साल तक सीमित दायरे में रह सकते हैं

कुमार ने कहा कि शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एक साल तक सीमित दायरे में बने रह सकते हैं। हालांकि, शेयरों की वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है, जिससे उन इनवेस्टर्स के लिए खरीदारी का अच्छा मौका बना है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। कई क्वालिटी स्टॉक्स की कीमत पीक से काफी नीचे आ चुकी है।

यह शेयर बाजार में एंट्री के लिए शानदार मौका 

उन्होंने कहा कि अगर कोई मार्केट में एंट्री करना चाहता है तो यह उसके लिए खराब समय नहीं है। बाजार पर दबाव बढ़ाने में तीन चीजों का हाथ है। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती शामिल हैं। पिछले कुछ हफ्तों में क्रूड ने मार्केट पर काफी दबाव बनाया है। यह काफी समय से 100 डॉलर के पार टिका हुआ है।

इंश्योरेंस कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं 

उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी ने लार्जकैप और मिडकैप बैंकों में निवेश बढ़ाया है। हालांकि, हमने इंश्योरेंस कंपनियों से दूरी बनाई है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में कुछ समय तक इस सेक्टर से दूर रहना ठीक रहेगा। कैपिटल मार्केट्स की थीम अट्रैक्टिव लगती है। मार्केट में लोगों का पार्टिसिपेशन बढ़ने से इस सेक्टर को फायदा होगा।

आईपीओ में बोली लगाने में सावधानी बरतने की सलाह

कुमार ने आईपीओ मार्केट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी आईपीओ में बोली लगाने में काफी सावधानी बरतती है। फंड हाउस का अपना एनालिसिस सिस्टम है। हर आईपीओ के एनालिसिस के बाद ही एएमसी बोली लगाने का फैसला लेती है।

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यूपीआई एमडीआर चार्ज का असर कंपनियों पर दिखेगा

उन्होंने कहा कि बंधन बैंक का निवेश कुछ ऐसी कंपनियों में है, जो यूपीआई से जुड़ी हैं। सरकार ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई के पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला किया है। यह देखना होगा कि इन कंपनियों पर इसका असर किस तरह से पड़ता है।

बिचौलियों का खेल खत्म! आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए योगी सरकार का नया प्लान, जानिए कैसे 20 लाख लोगों की बदलेगी जिंदगी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बहुत जल्द बिचौलियों का खेल खत्म करने की तैयारी की रही है। राज्य सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर तेजी से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश कॉरपोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज (UPCOS) के लॉन्च से करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारी और उनके परिवार एक नए कल्याणकारी ढांचे के केंद्र में आ गए हैं। सरकार का कहना है कि परिवार के सदस्यों को शामिल करने पर इस पहल से 17 से 20 लाख लोग लाभांवित हो सकते हैं।

सरकार की व्यवस्था से दूर होंगी आउटसोस वर्करों की चिंताएं

बीजेपी के लिए यह प्रशासनिक सुधार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी विभागों, हॉस्पिटल, लोकल बॉडी और दूसरे सार्वजनिक संस्थानों में काम करते हैं। इससे वे एक बड़ा कार्यबल बन जाते हैं जिनका सीधा लिंक सरकारी मशीनरी से होता है। नए सिस्टम का मकसद उनकी कुछ पुरानी चिंताओं को दूर करना है, जिसमें वेतन में देरी, एजेंसियों द्वारा कटौती, सामाजिक सुरक्षा की कमी और नौकरी को लेकर अनिश्चितता शामिल है।

आउटसोर्स कर्मियों के बैंक खाते में जाएगी सैलरी

यूपीसीओएस के तहत, सैलरी सीधे वर्कर के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी, जबकि ईपीएफ और ईएसआई योगदान नियमित जमा किए जाएंगे। सरकार ने कहा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों को वर्कर की सैलरी से सर्विस चार्ज काटने की इजाजत नहीं होगी। कैटेगरी के आधार पर 20 लाख रुपये से 40 लाख रुपये के एक्सीडेंट इंश्योरेंस की भी घोषणा की गई है।

बड़े वेलफेयर मॉडल पर काम कर रही सरकार

प्रदेश सरकार के हाल के फैसले बताते हैं कि वह एक बड़े वेलफेयर मॉडल पर आगे बढ़ रही है। इसके तहत नकद लाभ को एक बड़े वेलफेयर मॉडल का केंद्र बिंदु माना जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य, बीमा और रोजगार सुरक्षा भी शामिल है। हाल ही में पंचायत असिस्टेंट का मानदेय बढ़ाने पर सहमती के साथ ही सरकार ने रोजगार और सामाजिक आर्थिक सुरक्षा से जुड़े कई सहूलियतें प्रदान करने की घोषणा की। इसी तरह अगस्त में 3.5 लाख से अधिक मिड-डे मील कुक का मानदेय बढ़ाने का फैसला किया था। सरकार ने उन्हें कैशलेस हेल्थ कवर सहित कई अन्य सुविधाओं की घोषणा की थी। आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी बढ़ते वेलफेयर नेट में लाया गया है। 8 सितंबर को, योगी ने हेल्पर्स और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए उनके महीने के मानदेय को 8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने की घोषणा की। बड़ी वेलफेयर स्कीमों की तुलना में अलग-अलग रकम कम लग सकती है, लेकिन राजनीतिक महत्व कवर किए जा रहे ग्रुप्स की संख्या और नेचर में है।

कल्याणकारी योजनाओं की सोच में बदलाव

लखनऊ में गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर नोमिता पी कुमार ने कहा कि इन उपायों से सरकार की कल्याकारी योजनाओं की सोच में बदलाव का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा, “पंचायत असिस्टेंट के मानदेय में 50% की बढ़ोतरी से लेकर आंगनवाड़ी वर्कर, मिड-डे मील कुक और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बढ़ी हुई आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा तक, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वेलफेयर पॉलिटिक्स का एक नया पैटर्न उभर रहा है।”

दो अक्टूबर को देश भर में ‘नो यूपीआई डे’

नई दिल्ली। महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर को देश भर के व्यापारी सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन करेंगे। व्यापारियों ने तय किया है कि वे दो अक्टूबर को यूपीआई से कोई पेमेंट नहीं लेंगे। व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का फैसला किया है। इसमें देश भर के तमाम बड़े व्यापारी संगठन शामिल होंगे इसलिए इसका असर व्यापक होगा। व्यापारियों ने दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4 फीसदी चार्ज के विरोध में यह फैसला किया है।

बताया गया है कि दो अक्टूबर को व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइसेस को काले कपड़े से ढक कर विरोध जताएंगे। व्यापारियों ने सरकार से 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे चार्ज को हटाने की मांग है। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने बताया कि यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश भर के पांच सौ से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें हिस्सा लेंगे।

बाद में खबर आई कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन, फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने इस अभियान में शामिल होने का ऐलान किया है।

व्यापारियों का कहना है कि खुदरा व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त चार्ज लगाने से लागत बढ़ेगी। उनका कहा है कि डिजिटल लेनदेन का मकसद भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए होना चाहिए, व्यापारियों पर बोझ डालना के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा है कि यूपीआई से कैश का चलन घटा है। व्यापारी सिस्टम को पारदर्शी बनाने में सहयोग कर रहे, तो उन पर शुल्क लगाना सही नहीं। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के बजाय व्यापारियों पर चार्ज लगाना सजा देने जैसा है। उन्होंने चार्ज वापस नहीं लेने पर आंदोलन तेज करना का ऐलान भी किया है।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

UPI MDR Charges: सरकार UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की 15 अक्टूबर की तारीख को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तय तारीख से ही नया सिस्टम लागू होगा। हालांकि, MDR पर लगने वाले 18% GST को लेकर GST काउंसिल समीक्षा कर सकती है।

7 अक्टूबर की बैठक में क्या होगा?

MDR पर GST का मुद्दा फिलहाल 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान काउंसिल इस मुद्दे को उठा सकती है। यानी अभी यह तय नहीं है कि GST पर कोई फैसला होगा या नहीं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि इससे मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है। साथ ही, पूरे UPI ट्रांजैक्शन सिस्टम की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार क्यों ला रही है MDR?

सरकार ने MDR लागू करने का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को चलाने में काफी खर्च होता है। मौजूदा MDR उस पूरी लागत की भरपाई नहीं करता।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि UPI पर MDR से इकोसिस्टम को बनाए रखने की लागत की 100% भरपाई नहीं होती। सरकार के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत भी बढ़ रही है।

₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR

नए सिस्टम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

MDR की दरें Indian Banks’ Association (IBA) ने संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की हैं। यानी इस दर को तय करने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सलाह ली गई है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी आम ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।

वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी फ्री रहेंगे। नया MDR चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

सरकार पेट्रोल पंप पर यूपीआई पेमेंट को एमडीआर से छूट देने पर कर सकती है विचार

PhonePe Rural India Plan: फोनपे में निकलेंगी 20000 नौकरियां! भारत के गांव-देहात में विस्तार के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

PhonePe Rural India Plan: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे ने गुरुवार को अगले साल भारत के छोटे शहरों और गांवों में अपने बुनियादी ढांचे को और गहराई तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल पेमेंट कंपनी अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 20,000 ऑन-रोल सेल्स कर्मचारियों की भर्ती करेगी। कंपनी अगले 12 महीनों में 50 लाख से अधिक पेमेंट डिवाइस भी लगाएगी। इनमें स्मार्टस्पीकर और पीओएस डिवाइस शामिल होंगे। इनमें से करीब 50% डिवाइस ग्रामीण भारत में लगाए जाएंगे। इससे टियर-6 कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और गहराई तक पहुंचेगी।

वॉलमार्ट के समर्थन वाली कंपनी फोनपे का यह कदम भारत के एनपीसीआई के उस फैसले के बाद आया है जिसमें चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। इसका एक हिस्सा कम सेवा वाले इलाकों में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रखा जाएगा। फोनपे ने कहा, “हाल ही में घोषित एमडीआर ढांचा कंपनी को लंबे समय का नजरिया रखने और मर्चेंट बढ़ाने में निवेचश करने की इजाजत देता है।” अगस्त तक, फोनपे के भुगतान नेटवर्क में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर और 5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट शामिल थे।

पिछले साल लागू किए गए नए श्रम संहिताएं भी कंपनी को प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तेजी से भर्ती करने में सक्षम बना रही हैं। इससे बड़ी संख्या में ऑन-रोल कर्मचारियों को आसानी से कंपनी में शामिल करने में मदद मिल रही है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। इस यात्रा के अगले चरण में देश के हर हिस्से के छोटे कारोबारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाने वाले मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत होगी।

फोनपे का प्रस्तावित विस्तार इसी अवसर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। काफी बड़े फ्रंटलाइन ऑन-रोल कार्यबल की मदद से फोनपे छोटे कस्बों और गांवों में कारोबारियों तक पहुंच सकेगा, उन्हें डिजिटल भुगतान से जोड़ सकेगा, केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा, पेमेंट डिवाइस लगा सकेगा और कारोबारियों को लगातार सहायता प्रदान कर सकेगा।

इस विस्तार से लाखों छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और अधिक जोड़ने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल रूप से सक्रिय और केवाईसी-अनुपालन वाला मर्चेंट नेटवर्क कारोबारी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है और पात्र कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं की व्यापक रेंज तक पहुंच उपलब्ध करा सकता है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले कर्ज भी शामिल हैं।

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No UPI Day: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, स्कैनरों पर डाले काले कपड़े

No UPI Day: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, स्कैनरों पर डाले काले कपड़े

No UPI Day

No UPI Day : डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर लगने वाले संभावित शुल्कों को लेकर व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। मध्य प्रदेश में आज (बुधवार) व्यापारी संगठन ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं। यह विरोध मुख्य रूप से 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्कों को थोपे जाने के खिलाफ किया जा रहा है। ALSO READ: UPI चार्ज के विरोध में व्यापारी इंदौर में शुरू करेंगे डिजिटल अभियान, 125 संगठन हुए एकजुट, 10 लाख लोगों तक पहुंचने का टारगेट

 

राज्यभर के बाजारों में व्यापारी अपने यूपीआई पेमेंट स्कैनर को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध जता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि थोक किराना और अन्य बाजारों में 90 फीसदी से ज्यादा ट्रांजैक्शन 2,000 रुपए से ऊपर के होते हैं। सरकार और बैंकिंग प्रणाली ने पहले ग्राहकों और व्यापारियों को कैशलेस बिजनेस की आदत डाली और अब इस तरह के शुल्क वसूले जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।

 

अनुमान के मुताबिक, सिर्फ MDR शुल्क के रूप में भोपाल के कारोबारियों पर 663.152 करोड़ रुपये और इंदौर के कारोबारियों पर करीब 2,265 करोड़ रुपये के भुगतान पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे व्यापारी काफी आक्रोशित हैं। ALSO READ: MP के पेट्रोल पंपों पर 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट UPI से नहीं, नए नियमों के बाद पंप डीलर्स का फैसला

 

इन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर

व्यापारी संगठनों का मानना है कि इस नए शुल्क का सबसे भारी नुकसान उन व्यवसायों को उठाना पड़ेगा जिनमें मुनाफा या मार्जिन पहले से ही बहुत कम होता है। इनमें मुख्य रूप से किराना, पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और मोबाइल व्यापार शामिल हैं। कारोबारियों के मुताबिक, यदि ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत तक का शुल्क कटता है, तो उनका सारा मुनाफा इसी में खत्म हो जाएगा। ALSO READ: इतने विरोध के बाद भी सरकार UPI Charge पर क्यों अड़ी है? समझिए 2000 से ऊपर MDR फीस का गणित

 

पेट्रोल पंपों पर भी गूंजेगा विरोध

इस विरोध प्रदर्शन की आंच आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आगामी 16 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के सभी 4,700 पेट्रोल पंपों पर भी 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान का कड़ा विरोध किया जाएगा। इस आर्थिक बोझ को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

deep depression in bay of bengal

बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। इसके चक्रवाती तूफान अर्नब में बदलने और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

 

ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश

ओडिशा के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते ओडिशा में ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य के 7 जिलों में 24 सितंबर तक शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया गया है, जबकि सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें ड्यूटी पर लौटने को कहा गया है। 

 

आईएमडी ने 23 और 24 सितंबर को कोरापुट, गजपति और गंजाम में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। 24 और 25 सितंबर के लिए कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण ओडिशा में 23 और 24 सितंबर को बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। 25 और 26 सितंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

राजस्थान से मानसून की विदाई

उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौटने लगा है और अगले 3-4 दिनों में राज्य के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 23 से 25 सितंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। ALSO READ: अभी खत्म नहीं हुआ मानसून! लौट आया बारिश का दौर, 24 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए फिलहाल कोई अलर्ट नहीं जारी किया है। यहां बुधवार को मौसम सामान्य तौर पर सूखा रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में ज्यादा राहत नहीं मिलेगी और अधिकतम तापमान करीब 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।