यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली, ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स यूपी में है। इन्हें प्लेटफॉर्म उलब्ध कराना सरकार का काम है। राजदूत, उच्चायुक्त समेत विदेशी प्रतिनिधिमंडल मुझसे पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ से अधिक है, इसलिए आपके सामने बड़ी चुनौती है। मैं उनसे कहता हूं कि जितनी बड़ी चुनौती, उतनी ही बड़ी संभावना है। यूपी की जिस आबादी को लोग चुनौती कहते हैं, हम उसे डेमोग्रॉफिक डेविडेंड मानते हैं। इनके स्केल को स्किलिंग से जोड़कर इसका उपयोग डेमोग्रॉफिक डेविडेंड के रूप में कर पाते हैं।

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपए से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण करने के उपरांत युवा उद्यमियों व उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 पुस्तिका का विमोचन तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया। इस दौरान लघु फिल्म के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम से अवगत कराया गया।

2014 से पहले देश में 500 स्टार्टअप्स, अब ढाई लाख से अधिक 

सीएम योगी ने 2014 से पहले और इसके बाद भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत में व्यापक बदलाव दिख रहा है। 2014 के पहले देश में मात्र 500 स्टार्टअप्स थे, अब इनकी संख्या ढाई लाख से ऊपर है। स्टार्टअप इकोसिस्टम अब भारत के युवाओं के सपनों की उड़ान को गति दे रहा है। 2017 से पहले यही स्थिति उत्तर प्रदेश की भी थी। उस समय यहां कुल 120 स्टार्टअप थे, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन व सकारात्मक वातावरण के कारण आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई। इसमें 8 यूनिकॉर्न हैं। यूपी की स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत आज 107 स्टार्टअप व 9 इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है। यूपी स्टार्टअप नीति के तहत 12 नए इन्क्यूबेटर्स को भी मान्यता प्रदान कर रहे हैं।

2017 से रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा एक सपना 

सीएम ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ के कई स्टार्टअप्स का मैंने दौरा किया था। अपने कार्यों की बदौलत उन्होंने यूपी की पहचान और धारणा को बदलने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। सीएम ने 2017 से पहले यूपी के प्रति नकारात्मक धारणा का जिक्र करते हुए यहां की अव्यवस्था को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर जाने पर सांसद के रूप में मैंने भी महसूस किया कि लोग शक की निगाहों से देखते थे। धारणा यह थी कि जहां सड़कों में गड्ढे और बिजली के अभाव में अंधेरा दिखने लगे, समझो यूपी आ गया। उत्सव से पहले उपद्रव होता था। स्कूल-कॉलेज, बाजार महीनों बंद रहते थे। आमजन कर्फ्यू के साये में जीने को विवश था। उस समय 5 वर्ष में 700 से अधिक दंगे हुए। उन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के अंदर रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा करना एक सपना ही था। 

सरकार की उदासीनता से प्रदेश हो गया था ‘बीमारू’

सीएम ने कहा शिक्षा, रोजगार, स्टैंडअप, स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर्स आदि के बारे में इकोसिस्टम तब तैयार होता है, जब धारणा के साथ ही आमजन की मानसिकता भी उसके अनुरूप दिखाई दे। हम अनुकूल वातावरण बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। सरकार सकारात्मक मानसिकता की हो और उसका आमजन से जुड़ाव हो, लेकिन 2017 के पहले न पॉलिसी थी और न ही सरकार की इच्छाशक्ति। लोग अजीब वातावरण में जीने को मजबूर थे, इसका परिणाम था कि अनंत संभावनाओं वाला उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ हो गया। 

आधे स्टार्टअप का संचालन कर रही ‘आधी आबादी’ 

सीएम ने कहा कि आधे स्टार्टअप का संचालन ‘आधी आबादी’ कर रही है। सरकार ने आईआईटी कानपुर, बीएचयू, ट्रिपल आईटी, एकेटीयू, आईआईएम से आए हर प्रस्ताव को प्रोत्साहित करने के लिए फंड व सहयोग उपलब्ध कराया। स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए 2019 में सरकार ने सिडबी के साथ फंड ऑफ फंड्स की व्यवस्था की थी। हालांकि बीच में कुछ गतिरोध आया था, लेकिन बाद में परिवर्तन कर इसे तेजी से बढ़ाया भी गया। 

इनोवेशन व रिसर्च के लिए सभी विश्वविद्यालयों को दिया फंड

सीएम ने नए स्टार्टअप के लिए नया प्रोत्साहन देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नई पॉलिसी के तहत हमने हाल में इसे अच्छे ढंग से बढ़ाया है। सीएम ने उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान किया कि केवल परंपरागत पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालयों-इंस्टीट्यूट में इनोवेशन को आरएंडडी के लिए बेहतरीन माहौल दें। सरकार ने इनोवेशन व रिसर्च की एक्टिविटी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को अलग से फंड दिया है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की छवि को और बेहतर करना है।

‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं

सीएम ने कहा कि हम लोगों ने 2017 व 2018-19 में जो प्रयास किए, उसके सकारात्मक परिणाम अब दिख रहे हैं। 2017 के पहले का ‘बीमारू यूपी’ बॉटम-3 से देश की टॉप-3 इकॉनमी में शामिल हुआ है। 9 वर्ष में उप्र की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी व बड़े उद्योगों की संख्या तीन गुनी हुई। ‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं, बल्कि सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को साबित कर रहा है। 

सरकार हर कदम पर रहेगी साथ 

सीएम ने कहा कि आईआईटी कानपुर मेडटेक व ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना चाहती थी, आईआईटी बीएचयू यूपीएग्रीज के साथ काम करना और एसजीपीआईजी भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करना चाहता था। सरकार ने इन सभी से कहा कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन आदि क्षेत्रों में जहां भी आवश्यकता पड़ेगी, सरकार हर सहयोग के लिए खड़ी है। हम एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का संचालन/निर्माण कर रहे हैं। 

स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार दर्ज हो यूपी की उपस्थिति 

सीएम ने उम्मीद जताई कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार यूपी की उपस्थिति दर्ज होती दिखाई दे। भारत में आबादी के अनुरूप यूपी का हिस्सा 1/6 है, जबकि स्टार्टअप की तुलना में यह हिस्सा 1/10 है, यानी भारत के कुल स्टार्टअप का 20 प्रतिशत हिस्सा यूपी में होना चाहिए। इसके लिए तैयारी करनी होगी। डीपटेक के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने वालों समेत सभी स्टार्टअप्स का सीएम ने आह्वान किया कि वे इकोसिस्टम को गति प्रदान करने और युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए आगे आएं। 

यूपी जितनी संभावनाएं देश व दुनिया में कहीं नहीं 

सीएम ने कहा कि यूपी में लैंड, सुरक्षा की दिक्कत नहीं है। पॉलिसी पैरालिसिस से उबर चुके हैं। यूपी में समर्पित पॉलिसी है। हर क्षेत्र में यहां जितनी संभावनाएं हैं, उतनी देश व दुनिया में कहीं नहीं प्राप्त होंगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिडबी के साथ किए गए फंड ऑफ फंड्स की राशि बढ़ाई जाएगी। लीज पर लैंड, प्लग एंड प्ले मॉडल पर स्पेस उपलब्ध कराने में सरकार मदद करेगी, लेकिन आपको स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए गति देनी होगी।

हर कदम को प्रोत्साहित करेगी यूपी सरकार

सीएम ने आशा जताई कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर आप सभी यूपी को बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिलाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि युवाओं के हित में यूपी सरकार आपके हर कदम को प्रोत्साहित करेगी और यूपी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने में हरसंभव मदद करेगी। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, अवस्थापना व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव आलोक कुमार, एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय आदि मौजूद रहे।

UPSC CAPF AC result 2026: सफल उम्मीदवार पीएसटी और पीईटी के लिए करेंगे तैयारी, 15 दिनों में यूपीएससी पोर्टल पर दर्ज करें अपनी डीटेल

UPSC CAPF AC result 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (असिस्टेंट कमांडेंट्स) परीक्षा, 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 19 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी पीडीएफ फाइल में अपना रोल नंबर चेक कर सकते हें। जो कैंडिडेट्स लिखित परीक्षा में सफल हुए हैं, उन्हें अब फिजिकल स्टैंडर्ड्स टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) देना होगा। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के रोल नंबर यूपीएससी द्वारा जारी ऑफिशियल रिजल्ट डॉक्यूमेंट में दिए गए हैं।

शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को क्या करना होगा

शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट्स की उम्मीदवार अस्थायी है। आगे के चरणों के लिए विचार किए जाने से पहले उन्हें सभी पात्रता जरूरतें पूरी करनी होंगी। जो उम्मीदवार पीएसटी या पीईटी के लिए चयनित हुए हैं, उन्हें लिखित परीक्षा के 15 दिनों के अंदर आयोग के पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। उन्हें अपनी डीटेल्स और शैक्षिक योग्यता स्टेटस अपडेट करना होगा और प्रमाण के तौर पर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। जो उम्मीदवार यह प्रक्रिया पूरा नहीं करेंगे, उन्हें परीक्षा के आगे के चरण में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

कैंडिडेट्स को अपना पता, उच्च शिक्षा प्रमाण, एम्प्लॉयमेंट या सर्विस एक्सपीरियंस, फोर्स की प्रेफरेंस, मैरिटल स्टेटस, पेरेंटल डिटेल्स और दूसरी जानकारी, जहां भी लागू हो, अपडेट करनी पड़ सकती है। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना होगा। पहले ही सभी जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर चुके उम्मीदवारों को भी लॉग इन करना होगा, अपनी डिटेल्स चेक करनी होंगी और आखिर में ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा करना होगा। उन्हें जमा किए गए फॉर्म का प्रिंटआउट भी ले लेना चाहिए, क्योंकि PST/PET स्टेज पर और पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू के लिए ई-समन लेटर या ई-एडमिट कार्ड बनाने के लिए इसकी जरूरत होगी।

पीएसटी और पीईटी कार्यक्रम

गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र सीमा बल (SSB) को नोडल अथॉरिटी के तौर पर नामित किया गया है, शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को PST/PET की तारीख, समय और जगह के बारे में बताएगा।

जरूरी जानकारी एसएसबी भर्ती वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी। ई-एडमिट कार्ड भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे, जबकि कैंडिडेट्स को उनकी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी के जरिए जानकारी मिलेगी। कैंडिडेट्स को सलाह दी गई है कि वे नियमित एसएसबी वेबसाइट और अपने ईमेल के स्पैम फोल्डर के साथ इनबॉक्स को चेक करते रहें।

पीएसटी के लिए आने वाले उम्मीदवारों को अपना ई-एडमिट कार्ड, आखिर में जमा किए गए डीएएफ की हार्ड कॉपी और एक वैलिड फोटो आइडेंटिटी प्रूफ जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या वोटर आइडेंटिटी कार्ड साथ लाना होगा।

अपनी छापेमारी से देशभर में फेमस हो गए FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे कितना पढ़े-लिखे हैं? जानिए इनके IAS बनने की पूरी कहानी

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के एक अधिकारी हैं, जिनका नाम आजकल पूरे देश की मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। ये महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे हैं। खबरों में इन्हें ‘आईएएस सिंघम’ और ‘एफडीए का टीएन शेषन’ आदि नामों से संबोधित किया जा रहा है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर के तौर पर कार्यरत हैं। राज्य में फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर इनकी कड़ी कार्रवाई ने हर अमले के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। मुंढे ने तय नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी प्रतिष्ठानों के खिलाफ इंस्पेक्शन और कार्रवाई का आदेश दिया है।

मुंढे के पद से ज्यादा उनके तौर तरीके लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निडर और बेबाक अधिकारी अगर अपनी पहुंच और अधिकारों का इस्तेमाल सही तरीके से करने लगता है, तो वह बड़ी से बड़ी तस्वीर को भी आसानी से बदल सकता है। मुंढे ने सिविल सर्विस में दो दशक से ज्यादा समय बिताया है, इस दौरान उन्होंने कड़े प्रशासनिक फैसले लिए और कहा जाता है कि 20 साल की सेवा में उनका लगभग 25 बार ट्रांसफर हुआ है।

कौन हैं आईएएस ऑफिसर तुकाराम मुंढे?

3 जून, 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में जन्मे तुकाराम मुंढे ने अपनी पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से शुरू की। एक गांव के स्कूल से भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर रैंक तक के उनके सफर ने उनके करियर को खास बना दिया है। बीड में अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद, मुंढे उच्च शिक्षा के लिए औरंगाबाद चले गए। उन्होंने हिस्ट्री में बैचलर डिग्री पूरी की और बाद में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का सफर आखिरकार उन्हें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक ले गया, जिसे उन्होंने 2004 में 20 की शानदार ऑल इंडिया रैंक के साथ पास किया।

2005 बैच के आईएएस अधिकारी मुंढे

मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के ऑफिसर के तौर पर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हुए। 2011 में, मुंढे ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से क्राइसिस, इमरजेंसी और डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में कई मुश्किल प्रशासनिक काम संभाले हैं, जिससे उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी है जो लंबी सोच-विचार के बजाय एक्शन लेना पसंद करते हैं।

तुकाराम मुंढे अब खबरों में क्यों हैं?

मई 2026 में मुंढे को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का कमिश्नर बनाया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोस्टिंग उनके 21 साल से ज्यादा के करियर में उनका 25वां ट्रांसफर था। चार्ज संभालने के बाद से, उन्होंने फूड सेफ्टी नियमों के पालन की जांच के लिए रेस्टोरेंट, फूड आउटलेट, वेयरहाउस और दूसरी जगहों का इंस्पेक्शन बढ़ा दिया है। यह कैंपेन तेजी से बढ़ रहे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले बिजनेस तक भी बढ़ा है। एफडीए की तीखी कार्रवाई की वजह से खाद्य सुरक्षा आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

पानी बचाने से लेकर फूड सेफ्टी तक

मुंढे की सख्त प्रशासक की इमेज उनके मौजूदा एफडीए कार्यकाल से पहले की है। सोलापुर कलेक्टर के तौर पर अपने समय के दौरान, वे पानी बचाने की कोशिशों और गांवों की पानी के टैंकरों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों से जुड़े। काम करने के उनके तौर-तरीकों और समस्या के पूरे समाधान पर फोकस ने उन्हें महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी से बाहर पहचान दिलाई। उनके करियर में उन्हें बार-बार ऐसे पद मिले हैं जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा और विवाद भी। औचक निरीक्षण, एनफोर्समेंट ड्राइव और ग्राउंड पर साफ मौजूदगी ने उनकी इमेज को एक ऐसे ऑफिसर के तौर पर बनाया है जो मुश्किल फैसले लेने से पीछे नहीं हटते।

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मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था संभालने वाली खाकी इन दिनों सवालों के घेरे में है। पहले कटनी में सीएसपी के भष्टाचार के मामले में फंसने के बाद अब इंदौर में रिश्वत के मामले में क्राइम ब्रांच के पूर्व इंस्पेक्टर सहित चार पुलिस कर्मियों पर FIRदर्ज की गई है। दरअसल प्रदेश में  हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कटनी में सीएसपी समेत पुलिसकर्मियों पर रिश्वत और जांच में लापरवाही के आरोप हों या इंदौर या भोपाल में पुलिस विभाग के ही कर्मचारियों का रिश्वत लेते पकड़ा जाना, इन घटनाओं ने खाकी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। 

 

इंदौर में खाकी पर रिश्वतखोरी का आरोप- इंदौर में केस दर्ज न करने के एवज में एक लाख 20 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त ने क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुमित श्रीवास्तव,आरक्षक विकास सेठ समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस कर्मियों पर आरोप है कि शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बदले उससे 1.20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 50,800 रुपए यूपीआई के माध्यम से और बाकी 70 हजार रुपए नकद लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रोकने और मामले में राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। जांच में आरोप सहीं पाए जाने में पर लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया है।

 

कटनी में भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित सीएसपी फरार- कटनी में करोड़ों की जमीनी खरीदे मामले में सीएसपी नेहा पच्चीसिया निलंबन और केस दर्ज होने के बाद से अब तक फरार चल रही है। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीन को दबाव बनाकर करीब 18 लाख रुपये में खरीदने का आरोप है। पूरे मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के दखल के बाद नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निलंबन और FIR दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया फरार  है। 

 

इससे पहले भोपाल में खाकी के भ्रष्टाचार का एक अलग चेहरा सामने आया। पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल और एफआरवी ड्राइवर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। खास बात यह रही कि कार्रवाई करने वाली टीम भी पुलिस विभाग की ही थी। यानी विभाग के भीतर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की तस्वीर दिखाई दी।

 

सवाल सिर्फ रिश्वत का नहीं, सिस्टम पर भरोसे का है- प्रदेश में लगातार पुलिस अधिकारियों औऱ कर्मियों के रिश्वत के मामले में फंसने के बाद सवाल लोगों के खाकी पर भरोसे का  है। लोगों  की रक्षा करने वाली खाकी ही इस तरह दागदार होती गई तो जनता का सिस्टम पर से भरोसा ही उठ जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस के सामने इस चुनौती दोहरी है, एक तरफ अपराधियों पर कार्रवाई और दूसरी तरफ अपने ही तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती। हाल के मामलों ने साफ कर दिया है कि खाकी की साख सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई से नहीं, बल्कि अपने भीतर के दागों पर कार्रवाई से भी तय होगी।

Bank Holiday Today: आज 25 अगस्त को देश के कई राज्यों में बंद है बैंक! जानिए आपके शहर का हाल

Bank Holiday Today 25 August: आज यानी 25 अगस्त, मंगलवार को अगर आपका बैंक शाखा जाकर कोई वित्तीय काम निपटाने का प्लान है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक हॉलीडे लिस्ट के मुताबिक, आज देश के कुछ खास राज्यों और शहरों में मिलाद-ए-शरीफ (मिलाद-उन-नबी) और पहले ओणम के उपलक्ष्य में बैंकों में अवकाश है।

हालांकि, यह छुट्टी पूरे देश में एक साथ लागू नहीं है। आइए जानते हैं कि आज कहां-कहां बैंक बंद हैं और कहां कामकाज सामान्य रूप से चालू है।

आज 25 अगस्त को कहां-कहां बंद रहेंगे बैंक?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कैलेंडर के अनुसार, ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ के तहत आज इन क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे:

केरल (कोच्चि और तिरुवनंतपुरम): फर्स्ट ओणम और मिलाद-ए-शरीफ के कारण।

आंध्र प्रदेश (विजयवाड़ा क्षेत्र): मिलाद-उन-नबी के उपलक्ष्य में।

बाकी राज्यों में क्या है स्थिति?

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत देश के अधिकांश अन्य राज्यों में आज यानी 25 अगस्त को बैंक खुले रहेंगे और सामान्य कामकाज चलेगा।

इन राज्यों में ईद-ए-मिलाद का मुख्य सरकारी अवकाश कल यानी 26 अगस्त (बुधवार) को निर्धारित है, जिसके चलते कल इन क्षेत्रों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

इस हफ्ते आगे भी रहेंगी छुट्टियां

चालू हफ्ते में त्योहारों के कारण कई राज्यों में बैंक शाखाएं प्रभावित रहेंगी:

26 अगस्त (बुधवार): ईद-ए-मिलाद / तिरुओणम (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि में छुट्टी)।

28 अगस्त (शुक्रवार): रक्षाबंधन (गुजरात, राजस्थान, यूपी, एमपी आदि राज्यों में छुट्टी)।

29 अगस्त (शनिवार): महीने का 5वां शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक खुले रहेंगे।

डिजिटल सेवाएं रहेंगी पूरी तरह चालू

जिन क्षेत्रों में आज बैंक शाखाएं बंद हैं, वहां भी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध हैं। आप यूपीआई (UPI), इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप और एटीएम (ATM) का इस्तेमाल बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं।

अगर आप केरल या आंध्र प्रदेश से बाहर किसी राज्य में हैं, तो आज बैंक शाखा जाकर अपना काम आसानी से निपटा सकते हैं। लेकिन अगर आप कल यानी 26 अगस्त को बैंक जाने का मन बना रहे हैं, तो छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक कर लें क्योंकि कल ज्यादातर राज्यों में ईद-ए-मिलाद की छुट्टी रहेगी।

Bank Holiday: कल मंगलवार को मिलाद ए शरीफ पर कहां-कहां बंद हैं बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है 25 अगस्त को छुट्टी

Bank Holiday 25 August: अगर आप कल यानी मंगलवार, 25 अगस्त को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक हॉलीडे लिस्ट के मुताबिक, मिलाद-ए-शरीफ के अवसर पर देश के कई प्रमुख राज्यों और शहरों में बैंकों में अवकाश रहेगा।

बैंक जाने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि आपके शहर या राज्य में कल बैंक खुले हैं या बंद।

RBI ने क्यों दी है 25 अगस्त को छुट्टी?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, 25 अगस्त को मिलाद-ए-शरीफ (Milad-i-Sherif / First Onam) के उपलक्ष्य में ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ के तहत बैंकों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मोत्सव और कई क्षेत्रों में ओणम त्यौहार की शुरुआत के चलते RBI की आधिकारिक सूची में 25 अगस्त को बैंक हॉलीडे के रूप में दर्ज किया गया है।

कल 25 अगस्त को कहां-कहां बंद रहेंगे बैंक?

RBI की हॉलीडे मैट्रिक्स के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों और सर्कल्स में त्योहारों के हिसाब से छुट्टियां तय होती हैं:

किन क्षेत्रों में रहेगी छुट्टी: केरल (कोच्चि, तिरुवनंतपुरम) और मिलाद-ए-शरीफ / फर्स्ट ओणम मनाने वाले संबंधित सर्कल्स में कल सभी सरकारी व प्राइवेट बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

किन राज्यों में खुले रहेंगे बैंक: जिन राज्यों या शहरों में ईद-ए-मिलाद का मुख्य अवकाश अगले दिन यानी 26 अगस्त को है, वहां 25 अगस्त को बैंक सामान्य रूप से कामकाज करेंगे।

डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रहेंगी पूरी तरह चालू

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। डिजिटल बैंकिंग के दौर में आप अपने वित्तीय काम ऑनलाइन निपटा सकते हैं:

ATM सेवाएं: कैश निकालने और जमा करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

Net Banking & Mobile Apps: यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए फंड ट्रांसफर (NEFT/IMPS/RTGS) बिना किसी रुकावट के चालू रहेंगे।

अगर आपका बैंक में कोई चेक डिपॉजिट, ड्राफ्ट बनवाना या काउंटर से जुड़ा काम अटका है, तो अपनी स्थानीय बैंक ब्रांच से स्थिति की पुष्टि कर लें या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें ताकि आपका समय बच सके।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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पूर्वी यूपी की विरासत और झरनों से रूबरू होंगे 80 बाइकर्स, ‘द राइडिंग चैप्टर्स-2’ में दिखेगा उत्तर प्रदेश का नया अंदाज

पूर्वी यूपी की विरासत और झरनों से रूबरू होंगे 80 बाइकर्स, ‘द राइडिंग चैप्टर्स-2’ में दिखेगा उत्तर प्रदेश का नया अंदाज

bike riders

बौद्ध विरासत के केंद्र सारनाथ, ऐतिहासिक चुनारगढ़ और मानसून में अपनी रंगत में नजर आने वाले देवदरी व राजदरी जलप्रपात अब एडवेंचर टूरिज्म के नए आकर्षण के रूप में उभरेंगे। उत्तर प्रदेश पर्यटन ने इन स्थलों को जोड़ते हुए युवाओं और बाइकिंग के शौकीनों के लिए खास वीकेंड यात्रा तैयार की है। शनिवार को 'द राइडिंग चैप्टर्स' के दूसरे संस्करण के तहत 80 बाइक सवार लखनऊ से दो दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान के जरिए पर्यटन विभाग का प्रयास प्रदेश के उन समृद्ध लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित (अल्पज्ञात) स्थलों को नई पहचान दिलाना है, जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन सर्किट का हिस्सा नहीं बन सके हैं।

 

उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने सुबह 8 बजे 1090 चौराहे से दो दिवसीय बाइक यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान लखनऊ के मुख्य विकास अधिकारी प्रफुल्ल कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। बाइकर्स का दल सुल्तानपुर और जौनपुर होते हुए बौद्ध स्थली सारनाथ पहुंचेगा। इसके बाद चुनार की ओर बढ़ेगा। इस तरह यह यात्रा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को करीब से जानने-समझने का अवसर भी देगी।

 

गंगा किनारे इतिहास का प्रहरी चुनारगढ़

गंगा नदी के किनारे बसा ऐतिहासिक चुनारगढ़ इस यात्रा का अहम पड़ाव है। शेरशाह सूरी से लेकर मुगल और ब्रिटिश शासनकाल तक के दौर का साक्षी रहा यह किला  विशाल पत्थर की दीवारों, सामरिक महत्व और गंगा तट पर बसे भव्य स्वरूप के लिए जाना जाता है। स्वयं में इतिहास की कई परतों को समेटे चुनारगढ़ आज भी पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का अहम प्रतीक है, जहां पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

 

'बेहतर कनेक्टिविटी से नए पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान'

यूपीएसटीडीसी के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने कहा कि प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षित यात्रा का माहौल पर्यटन के नए और अल्पज्ञात स्थलों तक पहुंच को आसान बना रहा है। उन्होंने कहा कि 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' के माध्यम से युवाओं को रोमांच और प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए ऐसे पर्यटन स्थलों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो अब तक सामान्य यात्रा कार्यक्रमों से बाहर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से युवाओं को उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से इतर इतिहास, प्रकृति, संस्कृति और रोमांच से जुड़े अनदेखे अनुभवों को जानने और समझने का अवसर मिलेगा।

 

आस्था से एडवेंचर तक

रात्रि विश्राम के बाद रविवार को बाइकर्स काशी आनंदम से अगले पड़ाव के लिए रवाना होंगे। यहां से दल शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगा, जहां दर्शन-गंगा आरती के बाद यात्रा देवदरी और राजदरी वाटरफॉल की ओर बढ़ेगी। घने जंगलों व हरियाली के बीच स्थित देवदरी और राजदरी जलप्रपात मानसून में पूरे उफान पर रहते हैं। ऐसे में यात्रा का दूसरा दिन बाइकिंग के रोमांच के साथ प्रकृति और एडवेंचर टूरिज्म का विशेष अनुभव कराएगा।

 

..ताकि पर्यटन मानचित्र पर दिखें अल्पज्ञात स्थल 

'द राइडिंग चैप्टर्स' का पहला संस्करण इस माह के शुरुआत में लखनऊ से कालिंजर किले तक आयोजित किया गया था। पहली बाइक यात्रा को मिली सफलता के बाद शनिवार को इसके दूसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाई गई। ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत पर्यटन विभाग सुनियोजित सड़क यात्राओं के जरिए प्रदेश की विरासत और अल्पज्ञात पर्यटन स्थलों को पर्यटकों से रूबरू कराते हुए इन्हें प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल कर रहा है।

UPSC CSE Mains 2026: सीएसई उम्मीदवार 31 अगस्त से प्रश्नपत्र को दे सकेंगे चुनौती, 4 सितंबर तक खुला रहेगा क्यूपीआरईपी पोर्टल

UPSC CSE Mains 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2026 का आयोजन कर रहा है। 21 अगस्त से शुरू हुई यह परीक्षा 22 और 23 अगस्त के अलावा 29 और 30 अगस्त को भी होगी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल कैंडिडेट परीक्षा के किसी प्रश्नपत्र या सवाल को चुनौती देना चाहते हैं, तो आयोग ने उसके लिए शेड्यूल निर्धारित कर दिया है।

आयोग ने घोषणा की है कि यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल उम्मीदवार एक खास क्वेश्चन पेपर रिप्रेजेंटेशन पोर्टल (QPReP) के जरिए अपनी शिकायतें दे सकते हैं। यह पोर्टल 31 अगस्त से 4 सितंबर तक पांच दिनों के लिए उपलब्ध रहेगा। इस दौरान, कैंडिडेट्स सिविल सर्विसेज (मेन) एग्जामिनेशन 2026 के सवालों या प्रश्नपत्र से जुड़ी अपनी चिंताएं दे सकते हैं। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 परीक्षा का आयोजन 2 चरणों में किया जाएगा। परीक्षा 21, 22 और 23 अगस्त को होगी, जबकि बाकी पेपर 29 और 30 अगस्त 2026 को आयोजित किए जाएंगे। परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद उम्मीदवार प्रश्नपत्रों की समीक्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को अपनी शिकायतें देने के लिए सिर्फ क्यूपीआरईपी पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। ईमेल, पोस्ट या किसी और तरीके से भेजी गई रिक्वेस्ट, या 4 सितंबर के बाद जमा की गई रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं की जाएंगी। कैंडिडेट्स यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए क्यूपीआरईपी पोर्टल एक्सेस कर सकते हैं। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे पांच दिन का समय ध्यान से नोट कर लें और अगर जरूरी हो तो डेडलाइन से पहले अपना रिप्रेजेंटेशन जमा कर दें।

आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से कहा है कि अगर उन्हें किसी प्रश्न या प्रश्नपत्र को लेकर कोई रिप्रजेंटेशन देना है, तो वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पोर्टल खुलने के बाद तय 5 दिन की अवधि के भीतर ही अपनी आपत्ति दर्ज करें। इससे आयोग समय पर सभी रिप्रजेंटेशन का रिव्यू कर सकेगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।

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