सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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यूपीआई पेमेंट के लिए अब मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं

यूपीआई के माध्यम से भुगतान के लिए आने वाले समय में जेब से मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं रह जाएगी, मोबाइल जेब में ही रहेगा और जियो एआई ग्लास से क्यूआर कोड स्कैन भुगतान हो जाएगा।

जियो ने यहां यशोभूमि में चल रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में ऐसा ही एक भविष्योन्मुखी उत्पाद दिखाया। कंपनी ने अपनी पर्सनल एआई वियरेबल रेंज में कैमरा ग्लास, ऑडियो ग्लास और ईयरफोन दिखाए हैं। इनमें स्कैन एंड पे, एआई वॉयस असिस्टेंट, लाइव ट्रांसलेशन, एआई नोट टेकिंग और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स हैं। ये एक से अधिक भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।

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स्कैन एंड पे की मदद से कैमरा ग्लास यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन करेगा, यूजर वॉयस कमांड देगा और पुष्टि के बाद भुगतान हो जाएगा। यूपीआई सर्किल के जरिये एक बार में पांच हजार रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। इसकी मासिक सीमा 15 हजार रुपये है।

कंपनी की कोशिश एआई को मोबाइल स्क्रीन और की-बोर्ड से निकालकर आवाज और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ने की है।

जियो एआई ग्लास का दूसरा बड़ा इस्तेमाल लाइव ट्रांसलेशन है। अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले दो लोग वियरेबल डिवाइस की मदद से एक-दूसरे की बात समझ सकेंगे। आप अपनी भाषा में बोलिए, सामने वाला अपनी भाषा में, दुभाषिए का काम एआई कर लेगा।

बैठकों में कोई जरूरी बात छूट न जाए, इसके लिए एआई नोट भी ले सकेगा। इस पर लाइव क्रिकेट कमेंट्री भी मिलेगी।

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यश दयाल की यूपी रणजी टीम में वापसी, आर्यन जुयाल संभालेंगे कप्तानी

बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ यश दयाल की उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम में वापसी हो गई है। आईपीएल 2025 के बाद से ही मैदान से दूर चल रहे दयाल को रणजी ट्रॉफ़ी 2026-27 के लिए यूपी की टीम में जगह मिली है। युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ आर्यन जुयाल को टीम की कप्तानी सौंपी गई है। पिछले रणजी सीज़न के अंत में भी जुयाल ने कुछ मैचों के लिए टीम की कमान संभाली थी। इसके अलावा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (आरसीबी ) में दयाल के साथी खिलाड़ी रहे दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ अभिनंदन सिंह को भी पहली बार यूपी की टीम में शामिल किया गया है।

घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम तक आ चुके दयाल ने उच्च स्तर पर अपना आख़िरी प्रतिस्पर्धी मैच पिछले साल जून में खेला था, जो कि आईपीएल 2025 का फ़ाइनल था। आरसीबी ने उन्हें नीलामी से पहले रिटेन किया था, लेकिन आईपीएल 2026 की टीम में उन्हें जगह नहीं मिली थी। मो बोबाट की अगुवाई वाले कोचिंग स्टाफ़ ने कहा था, “व्यक्तिगत कारणों के चलते दयाल और आरसीबी दोनों के लिए उन्हें चुनना हितकारी नहीं था।”

दयाल ने इस साल जून में यूपी के ग़ाज़ियाबाद में हुए ग़ाज़ियाबाद प्रीमियर लीग में हिस्सा लेकर यूपी क्रिकेट में वापसी की कोशिश की थी। अगस्त में खेली गई यूपीटी20 लीग के लिए गौर गोरखपुर लायंस टीम ने अपने रिटेन खिलाड़ियों की सूची में उन्हें शामिल भी किया था। लेकिन नीलामी के बाद जब टीम ने अपने सभी 18 खिलाड़ियों की सूची जारी की, तो दल में दयाल का नाम ग़ायब था। दयाल ने यूपीटी20 शुरू होने से पहले ही उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा था। वह छत्तीसगढ़ से खेलना चाहते थे और उन्हें एनओसी मिल भी गई थी।

वह छत्तीसगढ़ के प्री सीज़न कैंप का हिस्सा भी बने थे, लेकिन यूपीटी20 समाप्त होने के बाद वह वापस लौट आए और उन्होंने यूपीसीए से एनओसी वापस लेने की गुजारिश की। इसके बाद कानपुर में वह यूपी की टीम के प्री सीज़न कैंप का हिस्सा बने। अब वह सीज़न के लिए टीम में चुन लिए गए हैं। पिछले सीज़न खेलने वाले आक़िब ख़ान और कुनाल त्यागी जैसे युवा तेज़ गेंदबाज़ों को इस बार जगह नहीं मिली है। आक़िब ने यूपीटी20 में भी हिस्सा नहीं लिया था।

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लेग स्पिनर ज़ीशान अंसारी की लगभग छह साल बाद यूपी की लाल गेंद वाली टीम में वापसी हुई है। हाल ही में उनका चयन दलीप ट्रॉफ़ी के लिए भी हुआ था। 2017 में ही प्रथम श्रेणी डेब्यू करने के बावजूद वह अब तक इस प्रारूप में केवल छह ही मैच खेल पाए हैं। पिछले सीज़न के दूसरे चरण में रणजी मैच खेलने वाले कार्तिक त्यागी इस बार सीज़न की शुरुआत से ही टीम का हिस्सा होंगे। उन्होंने आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए 14 मैचों में 18 विकेट लिए थे और अपने पुराने अंदाज़ में नज़र आए थे। यूपीटी20 लीग में भी उन्होंने 11 मैच खेलते हुए 10 विकेट हासिल किए।

युवा हाथों में सौंपी गई कमान

2024-25 सीज़न में 22 साल के जुयाल को यूपी का रणजी कप्तान बनाया गया था, लेकिन अगले सीज़न कमान करन शर्मा के हाथों में सौंप दी गई थी। पिछले सीज़न भी करन ही टीम के कप्तान थे, लेकिन दूसरे चरण से पहले जुयाल को कप्तानी सौंपी गई। अब एक बार फिर उन्हें बरकरार रखते हुए चयनकर्ताओं ने उनके ऊपर भरोसा दिखाया है। जुयाल का बल्ले से प्रदर्शन तो जोरदार रहा है, लेकिन उन्हें अब टीम के परिणामों में भी बदलाव लाने के लिए मेहनत करनी होगी।

कप्तानी के अपने पहले सीज़न में जुयाल ने बल्ले से धमाल मचाते हुए 10 पारियों में 79.33 की औसत से 714 रन बनाए थे जिसमें एक दोहरा और तीन शतक शामिल रहे थे। वह सीज़न में यूपी के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे थे। हालांकि, टीम के लिए परिणाम बहुत अच्छे नहीं रहे थे और उन्हें सात में से केवल एक ही मैच में जीत मिली थी। एक हार के अलावा टीम ने पांच ड्रॉ खेले थे।

उत्तर प्रदेश रणजी ट्रॉफ़ी टीम: आर्यन जुयाल (कप्तान), रिंकू सिंह, अभिषेक गोस्वामी, आराध्य यादव, करन शर्मा, माधव कौशिक, आदित्य शर्मा, सिद्धार्थ यादव, प्रशांत वीर, कार्तिक यादव, ज़ीशान अंसारी, वंश चौधरी, यश दयाल, प्रियम गर्ग, अभिनंदन सिंह, कार्तिक त्यागी।

कोचिंग स्टाफ़ की नहीं हुई है घोषणा

यूपी को अपना पहला मैच 11 अक्टूबर से बिहार के ख़िलाफ़ खेलना है। यह मैच राजगीर में खेला जाएगा तो यूपी की टीम को यात्रा भी करनी है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक टीम के कोचिंग स्टाफ़ की घोषणा नहीं हुई है। पिछले सीज़न अरविंद कपूर टीम के मुख्य कोच की भूमिका में थे। यूपीसीए की टैलेंट सर्च कमेटी के ऑब्जर्वर रिज़वान शमशाद के अंडर टीम फिलहाल कानपुर में कैंप कर रही है।

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देश भर के व्यापारी परेशान हैं

देश के कई हिस्सों में दो अक्टूबर को एक अलग किस्म का प्रदर्शन हुआ। एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पार्टियों का प्रदर्शन चल रहा था तो दूसरी ओर देश के व्यापारियों ने अलग प्रदर्शन किया। उन्होंने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। दुकान पर लगे स्कैनर को काले कपड़े से ढक दिया और सिर्फ नकद में कारोबार किया। व्यापारी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने का विरोध कर रहे थे। हालांकि कुछ व्यापारी संगठनों ने अपने को इससे अलग कर लिया फिर भी यह व्यापक विरोध था। अब व्यापारियों को अलग किस्म की चिंता परेशान कर रही है। उनको लग रहा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई बढ़ सकती है।

व्यापारी इस बात से परेशान हैं कि त्योहारों के सीजन में खरीद बढ़ेगी तो बड़ी संख्या में लोग नकदी खरीद करेंगे। इसका कारण यह है दो हजार रुपए से ज्यादा की खरीद पर शुल्क लगना है। शुल्क ग्राहक से नहीं लेना है। सो, व्यापारियों को समस्या है कि अगर यूपीआई से खरीद हुई तो पैसे देने होंगे और अगर नकद व्यापार हुआ तो फिर से वैट के जमाने की तरह छापे और जांच की प्रक्रिया बढ़ जाएगी। दोनों स्थितियों में व्यापारियों को नुकसान होना है। हालांकि इस बीच जीएसटी कौंसिल में एक बड़ा फैसला होने की संभावना है। सात अक्टूबर को जीएसटी कौंसिल की बैठक है, जिसमें जीएसटी कानून से गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाया जा सकता है। ऐसा होता है तो इससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Bank Holiday: आज शुक्रवार को बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday 2 October: आज शुक्रवार, 2 अक्टूबर को देशभर के सभी सरकारी, प्राइवेट, क्षेत्रीय और ग्रामीण बैंक बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छुट्टियों की आधिकारिक सूची के अनुसार, 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण पूरे भारत में बैंकों में कामकाज नहीं होगा। अगर आपको आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है।

क्यों बंद रहेंगे बैंक?

2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। यह देश के तीन प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है। इस अवसर पर आरबीआई के नियमों के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक पूरी तरह से बंद रहते हैं।

अक्टूबर में छुट्टियों की भरमार

अक्टूबर का महीना त्योहारों से भरा हुआ है। दुर्गा पूजा, दशहरा और महालया जैसे बड़े त्योहारों के चलते अक्टूबर में अलग-अलग राज्यों में बैंकों की कई दिनों की छुट्टियां रहेंगी। आरबीआई द्वारा जारी अक्टूबर 2026 की छुट्टियों की लिस्ट:

  • 2 अक्टूबर (शुक्रवार): गांधी जयंती (पूरे भारत में बंद)
  • 10 अक्टूबर (शनिवार): महालया अमावस्या / दूसरा शनिवार (बेंगलुरु, कोलकाता और देशभर में)
  • 11 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 17 अक्टूबर (शनिवार): महा सप्तमी (अगरतला)
  • 18 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 19 अक्टूबर (सोमवार): महाष्टमी / महानवमी / दुर्गा पूजा (कोलकाता, पटना, गुवाहाटी, रांची आदि)
  • 20 अक्टूबर (मंगलवार): दशहरा – विजयादशमी (अधिकांश राज्यों में बंद)
  • 21-23 अक्टूबर (बुधवार से शुक्रवार): दुर्गा पूजा – दशैं / विजया दशमी (गंगटोक, कोलकाता, अगरतला आदि)
  • 24 अक्टूबर (शनिवार): चौथा शनिवार (पूरे भारत में बंद)
  • 25 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 26 अक्टूबर (सोमवार): लक्ष्मी पूजा / महर्षि वाल्मीकि जयंती (शिमला, जम्मू, श्रीनगर, अगरतला)
  • 29 अक्टूबर (गुरुवार): करवा चौथ (शिमला)
  • 31 अक्टूबर (शनिवार): सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती (अहमदाबाद)

(नोट: राज्यों के स्थानीय त्योहारों के आधार पर बैंक छुट्टियों में अंतर हो सकता है।)

ऑनलाइन और डिजिटल सेवाएं रहेंगी चालू

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन में कोई परेशानी नहीं होगी। डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं 24/7 चालू रहेंगी। फंड ट्रांसफर (NEFT, RTGS, IMPS) की सुविधा सुचारू रूप से चलती रहेगी। Google Pay, PhonePe, Paytm जैसी यूपीआई सेवाओं के जरिए डिजिटल भुगतान सामान्य रूप से होगा। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम मशीनें चालू रहेंगी।

अगर आपको चेक क्लियरिंग या शाखा में जाकर कोई कैश डिपॉजिट/विड्रॉल जैसी सेवाएं लेनी हैं, तो इसके लिए अब आपको शनिवार, 3 अक्टूबर को बैंक खुलने का इंतजार करना होगा।

यूपीएससी के सवाल क्या एआई बना रहा है?

यह बहुत परेशान करने वाला सवाल है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी एकमात्र ऐसी संस्था है, जिस पर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आज भी आंख मूंद कर भरोसा करते हैं। इसका भरोसा इतना गहरा है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो बार अपनी सुनवाई में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए और भारत सरकार से कहा कि वह यूपीएससी की तरह का सिस्टम बनाए। लेकिन अब यूपीएससी पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सवाल पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है। लेकिन प्रश्न पत्र तैयार करने में होने वाली गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं और यह सवाल उठ रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सवाल तैयार कराए जा रहे हैं?

एआई से सवाल तैयार कराने का आरोप इसलिए लगा है क्योंकि इस साल प्रीलिम्स में पूछे गए कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें एक से ज्यादा विकल्प सही हो सकते थे। सवाल उलझा हुआ था और जवाब में जो विकल्प दिए गए थे वो भी उलझे हुए थे। कम से कम 27 सवालों के बारे में ऐसी शिकायत मिली है। इनके बारे में छात्रों ने कहा कि या तो सवाल गलत थे या विकल्पों में कोई सही जवाब नहीं था या विकल्पों में एक से ज्यादा सही जवाब थे। चार छात्रों ने इस साल की परीक्षा के आठ सवालों को चुनौती दी है, जबकि 63 छात्रों ने 27 सवालों को चुनौती दी है। उनके 27 सवालों में चार छात्रों वाले आठ सवाल भी शामिल है। कैट में इस मामले की सुनवाई हो रही है।

साहब अच्छे एक्टर नहीं!

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

विदेशी नेताओं के साथ साहब के बेतकल्लुफ, याराना, गले-लिपट जैसे व्यवहार का इधर सोशल मीडिया में मजाक बना। इंदौर में एक कलाकार ने उसी अंदाज में राहुल गाँधी के गले से लिपट कर, नाटकीय हँस कर, राहुल की पीठ खूब थपथपाकर, आदि से उस का प्रदर्शन किया। साथ ही, उस ने ऑडियेंस में मानो किसी को देख ‘माँ को बिठाओ’ कहने का भी प्रहसन किया। आम सभाओं में साहब अक्सर किसी बच्चे, बूढ़े या बूढ़ी को नोटिस कर मानो ध्यान दिलाते हैं कि उन के लिए बच्चे-बुजुर्ग भी प्रेम दिखाने आते रहते हैं!

मंच पर उन दोनों भंगिमाओं से तमाम उपस्थित लोग बिना बताए समझ गये कि किस की नकल हो रही है। वह इतना चर्चित हुआ कि अनेक केंद्रीय भाजपा नेताओं ने उस की निन्दा की। जबकि कलाकार ने साहब का नाम भी नहीं लिया था! सो ‘वह बात जिस का सारे फसाने में कहीं जिक्र न था’, वह भाजपा नेताओं को नागवार गुजरी। उन की नाराजगी से प्रहसन और चर्चित हुआ।

किन्तु प्रहसन सटीक था। यह दोनों स्थितियाँ — आए दिन विदेशी नेताओं के गले लटकना, और अपने को सबका चहेता बताना — इतनी बार देखी जा चुकी है कि लोग बोर हो गये हैं। एक तरह से यह लोगों की समझ का अपमान है कि वे इस का बनावटीपन नहीं समझे हैं।

फिर विदेशियों के साथ वह जबरन यारी दिखाना देश की छवि गिराता है। आखिर यूरोपीय, अमेरिकी नेता स्वयं गले नहीं चिपटते। वे प्रायः हाथ मिलाते और संयत रहते हैं। पर अपने साहब विदेशियों से बेतकल्लुफ दिखने को उतावले नजर आते हैं।

यह इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि यह उन का स्वभाव नहीं है। देसी बंधुओं के साथ साहब सीधे मुँह बात भी नहीं करते। किसी से मैत्री तो क्या, समान सहजता भी मुश्किल से बरतते हैं। दलीय सहयोगियों के प्रति उन का रूखा, मालिकाना सा व्यवहार दिखता है। मानो वे सब उनके हरकारे जैसे हों। अपनी भंगिमा ही नहीं, कई बार किसी को फटकारने, डपटने जैसे बयान देकर भी साहब ने दिखाया है कि वे किस को क्या समझते हैं!

यह दो विपरीत अदाएं बार-बार दिखना अच्छी एक्टिंग नहीं! साहब देसी-विदेशी, दोनों दर्शकों की संवेदना से अनजान लगते हैं। उन्हें आभास नहीं कि एक जगह असरानी दूसरी जगह गब्बर, बार-बार देखकर विदेशी और देसी दर्शक क्या सोचेंगे? यही कि एक्टर आत्ममुग्ध, अपने पर फिदा है! माने बैठा है कि एक ही एक्टिंग पर लोग सदैव ताली बजाएंगे।

इसी दुर्बलता पर इंदौर वाले प्रहसन ने ऊँगली रखी। लोग तुरत पहचान गये कि साहब की नकल हो रही है। क्योंकि उन्होंने वह मूल एक्टर द्वारा अभिनीत कई बार देखा हुआ है।

सो, बार-बार देश और विदेश में दो अंदाज दिखाने वाला एक्टर दुर्बल है।‌ निरंतर ऐसा विपरीत व्यवहार दिखाना आत्महीनता भी लग सकती है। विदेशियों के सामने अपने को हीन बनाना कि उन से अपनी निकटता दिखाने के लिए वह मरा जा रहा है। उसी हीनता का दूसरा पहलू देशी लोगों के सामने ऐंठना है। मानो, उसे अपनी महत्ता का भरोसा नहीं! ऊँचे पद पर आकर भी उसे भीतर शंका है कि दूसरे उसे छोटा तो नहीं समझ रहे? इसलिए वह अतिगंभीर मुद्रा बनाकर अपनी महत्ता जताता है।

आखिर, दोनों अवसर औपचारिक, सार्वजनिक व्यवहार के हैं।‌ देसी या विदेशी नेताओं के साथ, दोनों औपचारिक, आधिकारिक कार्यक्रम हैं। किसी को निजी कह कर सफाई देना कठिन है। अतः विदेशियों के साथ विगलित और देसियों के साथ रूखे, यह दोहरापन खटकता है। ऐसा व्यवहार सहज नहीं है।

क्या साहब को अपने पद, व्यक्तित्व, और काम — किसी पर स्वयं विश्वास नहीं है? विदेशियों के सामने गदगद होने, ओर देसियों के सामने ऐंठने में बनावट झलकती है। फिर, साहब की भाषा — अक्सर इतनी खोखली कि हैरत होती है! आखिर ‘भारत की ए.आई. में भारतीयता होनी चाहिए’ कहने का क्या अर्थ हुआ?

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

कैमरे के सामने भी वे प्रायः उचित व्यवहार दिखाने में विफल रहते हैं। वह कैसा एक्टर होगा, जिसे यह भी नहीं मालूम कि किन के सामने कैसी मुख-मुद्रा रखनी उचित है? अपने से आयु में बड़े, और उस पर उपकार करने वाले वरिष्ठ नेता, जो उसे सार्वजनिक मंच पर हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे हों, उन्हें अनदेखा कर बढ़ जाने का क्या मतलब है? उस से किसे क्या संदेश मिला? यह तो नौसिखिया एक्टिंग लगती है।

यह तब साफ झलकता है जब वही एक्टर विदेशियों के साथ लंगोटिया सा दिखना चाहे। वह भी जिद करके। कभी उसे झूला झुलाकर, कभी उसे जबरन सीढ़ी पर साथ बैठा कर, कभी उस के साथ ताली बजाते हुए चक्कर काटकर, तो कभी उस की बाँह खींचकर, कभी उसे ‘तू’ कहकर, आदि। सब कुछ कैमरे के सामने। यह नाटक एकतरफा है, क्योंकि दूसरा पक्ष सपाट रहता है। शिष्टाचारवश लाचार-सा, कि चलो करने दो जो कर रहा है। कुछ देर की बात है।

ऐसे दृश्य बार-बार देख कर संवेदनशील भारतीय लज्जा महसूस करते हैं कि उन का नेता विदेशियों के सामने छोटा बन रहा है! पर एक्टर की बेपरवाही दिखाती है कि वह इस के परिणामों से अनजान है! यह इस से स्पष्ट है कि अनेकानेक वर्षों में भारत को विदेशी शक्तियों से कोई लाभ के बदले हानि उठाने के उदाहरण अधिक दिखते हैं। यूपीआई पर टैक्स उसी की नवीनतम कड़ी लगती है।

देश के अंदर भी हेकड़ी, परनिंदा, और आडंबर की बुरी परंपरा फैली है। विशेषकर शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र में। हर संस्था, संगठन प्रमुख अपने को खामखा विशिष्ट, ऊँचा दिखने और उपलब्धि दिखाने के लिए उसी तरह नाटकीय, कृत्रिम उपाय करता नजर आता है। जो अनुपयुक्त लगता है। पर प्रमुख मानो ‘साधारण’ दिखने की आशंका से ग्रस्त है! सो, अपने उत्तरदायित्व और उचित काम के बदले नाटकीयता और बनावट पर निर्भर है। मुख्यतः अपनी कुर्सी की आयु बढ़ाने की फिराक में है।

यह प्रवृत्ति साहब की देखा-देखी भी है, जो सब के ‘मॉडल’ बताए जाते रहे हैं। आखिर जब वह सब कुछ अगला चुनाव जीतने की दृष्टि से तय करते हैं, तो वही प्रवृत्ति नीचे बढ़ना स्वाभाविक है। प्रायः सब का चयन भी उसी भावना में होता है कि ‘अपने’ आदमी हैं। काम की योग्यता, गुणवत्ता नहीं — बल्कि ‘अपने’ प्रति वफादारी!

इस से शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र की हुई और हो रही हानि अपरिमेय है। शैक्षिक संस्थानों में जातिवादी जहर फैलाना और फैलने देना उसी भावना में है। लाभ उठाने वाले भी बखूबी जानते हैं कि यह किसी समूह की हित-चिंता नहीं, बल्कि केवल ताउम्र कुर्सीनशीनी का मंसूबा है।

सो, यह सब हर हाल में निराशाजनक है। किसी सुविचारित नीति के बदले ओछी मानसिकता दिखाता है। विदेशियों के सामने झुकना, और देसियों के सामने ऐंठना एक ही दुर्बलता के दो रूप हैं। साहब के सहयोगियों ने कथित चिंतन-बैठक में इस पर विचार किया या नहीं, किन्तु किसी को उन्हें बताने की जरूरत है कि उन की एक्टिंग प्रभावहीन हो चुकी है।

समय रहते बदलें, वरना फिल्म के पूरे कास्ट, ताम-झाम को हानि उठानी पड़ सकती है। पिछली फिल्में जिस चेहरे के बल पर चली थी, उस में अब चमक नहीं है। इस भ्रम में रहना बेकार है कि विकल्प क्या है? लोग जब चिढ़ जाते हैं तब सिर्फ यह देखते हैं कि चिढ़ाने वाले को कौन हरा सकता है।

वैसे भी, अगर इतनी लंबी अवधि तक साहब-राज के बावजूद प्रजा इस हाल है कि उसे अपने ही देश का कोई अन्य नेता हानि पहुँचा सके — तो यह साहब की नाकारा उपलब्धि का बयान है। वह कैसा जनहितैषी शासक होगा जो प्रजा का हित अपनी अमरता से जोड़ दे?

रवैया जब टच एंड गो का है तब साथ आ कर भी विपक्ष कैसे आंदोलन ख़ड़ा करेगा?

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में हो रही है। मई में भी विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की एक बैठक दिल्ली में हुई थी। तब जिन पार्टियों ने उससे दूरी बनाई थी वे भी इस बार की बैठक में शामिल हो रही हैं। इससे पार्टियों की गंभीरता का अहसास हो रहा है। लेकिन क्या सिर्फ एक साथ आकर बैठक कर लेना पर्याप्त होगा? देश के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहें हैं उससे निपटने के लिए पार्टियों की साझा बैठक या नेताओं के बेहद आक्रामक बयान या सोशल मीडिया का अभियान पर्याप्त नहीं है।

पार्टियों को संकट की व्यापकता को समझना होगा और मुकाबले के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। सबसे पहले तो ‘इंडिया’ ब्लॉक को ही औपचारिक रूप देना होगा। 2023 में शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद से ही इसका इंतजार हो रहा है कि इसका एक संयोजक होगा और एक सचिवालय बनेगा। लेकिन अभी तक ये दोनों काम नहीं हुए। जून 2024 में चुनाव हारने के बाद तो दो साल तक इसकी बैठक भी नहीं हुई।

ऐसा नहीं है कि विपक्षी पार्टियों को कोई चैरिटी का काम करना है। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के अभियान ने ही 2024 के चुनाव में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को राजनीतिक सफलता दिलाई थी। इसलिए अगर पार्टियां गंभीरता से एसआईआर की गड़बड़ियों को पकड़ती हैं, उन्हें जनता के बीच ले जाती हैं, चुनाव आय़ोग और सरकार को कठघरे में खड़ा करती हैं तो उनको इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। एक समय था जब विपक्ष मुद्दों की तलाश करता था और उन पर आंदोलन करके सरकार को जवाबदेह बनाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

यह बहुत दिलचस्प है कि इन दिनों आम लोग सरकार की कमियां खोज रहे हैं। नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा छात्रों ने किया। उन्होंने न सिर्फ पेपर लीक का पता लगाया, बल्कि परीक्षा कराने का ठेका ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिए जाने का खुलासा भी छात्रों ने किया। पहली बार अगर नरेंद्र मोदी सरकार के किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ तो वह छात्रों के आंदोलन और उनके दबाव में हुआ। नीट पेपर लीक का खुलासा करने से लेकर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का ठेका देने के लिए बार बार टेंडर बदलने का खुलासा सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी जैसे युवा छात्रों ने किया।

इसी तरह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने का मुद्दा कुछ यूट्यूबर्स और इन्फ्लूएंसर्स ने उठाया। मनीष कश्यप ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। आम लोगों से जुड़े इस मुद्दे पर भी सरकार बैकफुट पर आई। इसी तरह यूपीआई पर शुल्क लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ व्यापारी लड़ रहे हैं और आम लोग सोशल मीडिया में माहौल बना रहे हैं। ऐसे ही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का खुलासा मंदिर के ही एक कर्मचारी ने किया। इन सारे मुद्दों पर गहराई से काम करने की जरुरत थी। लेकिन विपक्ष ने सिर्फ संसद सत्र में इन मुद्दों को उठाया।

असल में विपक्ष का रवैया टच एंड गो का है। वह हर मुद्दे को छूकर आगे बढ़ जा रहा है। जबकि इतिहास गवाह है कि किसी भी मुद्दे पर सरकार को जिम्मेदार ठहराने और सत्ता विरोधी माहौल बनाने के लिए सतत चलने वाले प्रयास की जरुरत होती है। उस पर गंभीरता से शोध करना होता है, उसके हर आयाम को समझना और जनता को समझाना होता है। बोफोर्स का मामला निरंतर दो साल से ज्यादा चला था तब जाकर राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ माहौल बना। भ्रष्टाचार का आंदोलन लगातार तीन साल चला तब लोगों की दिलदिमाग में मनमोहन सिंह की सरकार को पलट देने और कांग्रेस को सजा देने की भावना बनी। यहां कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां समझ रही हैं कि वे संसद में मुद्दा उठा देंगी, संसद परिसर में हंगामा कर देंगी या एक साझा बैठक कर लेंगी या कोई प्रेजेंटेशन हो जाएगा तो उससे सरकार के खिलाफ माहौल बन जाएगा तो ऐसा नहीं होने वाला है। यह सरकार पहले की सरकारों की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने वाली नहीं है। वह लगातार आरोपों को काउंटर करती है और नए नैरेटिव पैदा करती है।

इसलिए विपक्ष अगर चाहता है कि एसआईआर की गड़बड़ियों या चुनाव आयोग की मनमानियों पर देश में एक राजनीतिक माहौल बने तो उसके प्रयासों में निरंतरता दिखनी चाहिए। बारीकी से इस पर काम करके लोगों के सामने एक एक तथ्य रखना चाहिए। सिर्फ मोटामोटी यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि ज्ञानेश कुमार ने मनमानी की, 13 करोड़ लोगों के नाम काट दिए या जिला व प्रदेश के चुनाव अधिकारियों को सेंट्रल डेटाबेस का एक्सेस नहीं दिया। विपक्ष को इसकी तह में जाना होगा।

अभी ऐसा लग रहा है कि पार्टियां ऊपर ऊपर मामले को देख रही हैं। उनके प्रयास में निरंतरता भी नहीं है। राहुल गांधी ने पिछले साल सितंबर में कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट को लेकर खुलासा किया था। उन्होंने 6,018 वोट काटे जाने का दावा किया था और कहा था कि कर्नाटक के बाहर से मोबाइल नंबर से नाम कटवाने के आवेदन भेजे गए और नाम कटे। उन्होंने सूर्यकांत नाम के एक व्यक्ति को मंच पर पेश किया। सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने किसी का नाम काटने का आवेदन नहीं दिया लेकिन उनके नाम से आवेदन करके 14 मिनट में 12 नाम कटवाए गए। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र को लेकर भी इस तरह के दावे किए। लेकिन उसके बाद सन्नाटा हो गया।

यह बहुत बड़ी बात है कि किसी भी व्यक्ति के नाम या फोन नंबर का इस्तेमाल करके दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम काटे जा रहे हैं या काटे जा सकते हैं। अभी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों के सामने 38 लाख आवेदन लंबित हैं, जिनमें से 22 लाख आवेदन नाम जोड़ने के हैं और 16 लाख आवेदन नाम काटने के हैं। क्या यह विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है कि वह पता लगाए कि ये 16 लाख लोग कौन हैं, जो अपना नाम कटवाना चाहते हैं? पिछले दिनों बंगाल के माल्दा और मुर्शिदाबाद दोनों जगह से खबर आई थी कि थोक में फॉर्म सात भर कर लोगों के नाम कटवाने की कोशिश की गई।

कई जगह जागरूक बीएलओ ने इसे रोका भी। दिल्ली में 47 लाख यानी एक तिहाई मतदाताओं के नाम कट गए। इनमें 43 लाख लोगों के नाम इस आधार पर कटे हैं कि वे स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए हैं। सोचें, इतनी बड़ी संख्या में दिल्ली से शिफ्ट होकर लोग कहां जा रहे हैं? अब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि धीरे धीरे सेंट्रल डेटाबेस के एक्सेस को सेंट्रलाइज किया जा रहा है और ईआरओ, डीईओ और सीईओ को संपूर्ण व बिना शर्त एक्सेस नहीं मिल रही है। अगर इस खुलासे को कर्नाटक, बंगाल या दिल्ली की खबरों से मिला कर देखें तो यह संभव है कि योजनाबद्ध तरीके से मतदाताओं की प्रोफाइलिंग करके उनके नाम काटे जाने का बड़ा खुलासा हो।

साझा बैठक करने या आंदोलन करके ऑप्टिक्स बनाने से पहले कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को बारीकी से तमाम गड़बड़ियों पर काम करने की जरुरत है। यह समय लेने और थका देने वाला काम है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के पास संसाधन की कमी नहीं है। अगर उनको लग रहा है कि एसआईआर के जरिए बहुत बड़ी कोई गड़बड़ी हो रही है तो उन्हें इसका खुलासा करने के लिए बड़े पैमाने पर ही काम करना होगा। अमेरिका के वाटरगेट स्कैंडल से लेकर भारत के बोफोर्स घोटाले तक जितने बड़े मामले खुले हैं उनमें लोगों को खपना पड़ा है। ऊपर ऊपर मुद्दे को छू देने और उस पर बयान देने से सरकार न तो जवाबदेह बनेगी और न आम जनता इसे गंभीरता से लेगी। जनता को यह दिखाना होगा कि विपक्ष या योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे सिविल सोसायटी के लोग क्या लेकर सरकार से लड़ रहे हैं। इस पर कल विचार करेंग। (जारी)

यूपीआई शुल्क पर रोक से इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और यह पूछा है कि शुल्क लगाने के नए नियम को लागू करने का क्या आधार है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले दो हजार रुपए से ऊपर के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगा दिया है। यह 15 अक्टूबर से लागू होगा।

इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। वकील अंजन दत्ता ने यह जनहित याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया और सरकार को नोटिस जारी किया।

याचिका में सवाल उठाया गया है कि दो हजार रुपए की सीमा किस आधार पर तय की गई है? इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि यूपीआई और रूपे कार्ड के लिए नियम अलग क्यों हैं? याचिका में इसे रद्द करने की मांग की गई है। एडवोकेट अंजन दत्ता की याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी। इसके अलावा, ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ के एक नियम को भी अदालत में चुनौती दी गई। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा।

बहरहाल, सोमवार की सुनवाई में सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि आम लोगों के आपस में पैसे भेजने पर चार्ज नहीं लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के करीब 96 फीसदी छोटे भुगतानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि 0.40 फीसदी का शुल्क भी ग्राहकों को नहीं देना होगा, बल्कि दुकानदार को देना होगा।

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में उत्तर प्रदेश की ताकत दिखाई दे रही है। यहां उत्तर प्रदेश में निर्मित तमाम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें गोरखपुर के टेराकोट उत्पाद भी शामिल हैं। रविवार को वहां 1.5 लाख से अधिक लोग आए, सोमवार को भी भारी भीड़ उमड़ी है। इस ट्रेड शो में 90 देशों के खरीदार पहुंचे हैं, जो यूपी की सामर्थ्य दिखाता है। शो में शिल्पकारों के उत्पादों की बिक्री और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भी उत्तर प्रदेश के पास सामर्थ्य था, लेकिन नेतृत्व के पास इच्छाशक्ति नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप यूपी बीमारू और बदनाम प्रदेश बनकर रह गया था। इसे देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। किंतु, बीते साढ़े नौ सालों में सम-विषम परिस्थितियों में नेतृत्व के जूझने और अनथक प्रयास का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू की छवि से उबरकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

चुनौतियों से जूझकर किए हर क्षेत्र में रिफॉर्म

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कई चुनैतियां थीं। बाहर के लोग यूपी का नाम सुनकर चौंकते थे। पहचान का संकट ऐसा था कि युवाओं के लिए राज्य, देश या विदेश में नौकरी नहीं थी। कर्फ्यू-दंगे प्रदेश की नियति बन गए थे। पुलिस में दो लाख पद खाली थे तो कानून व्यवस्था कैसे ठीक रहती। सरकार में आने के बाद हमने हर क्षेत्र में रिफॉर्म किए। युवाओं के हित में सरकार ने न केवल भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, बल्कि प्रशिक्षण और इससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी आगे बढ़ाया। साढ़े नौ सालों में प्रदेश सरकार ने शुचिता व पारदर्शिता के साथ 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। इसमें अकेले यूपी पुलिस में 2 लाख 30 हजार नौकरियां दी गईं। 

कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होकर तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। कभी बीमारू के तमगे वाला प्रदेश अब देश की टॉप-थ्री इकॉनमी में है। कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होने के बाद यूपी तेज प्रगति की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति का ग्रोथ इंजन कहला रहा है। यूपी वही है, लेकिन प्रयास से परिणाम की यात्रा में बदलाव हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा। 2017  से पहले राज्य में सिर्फ 130 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। 

कविता सुनाकर बोले सीएम- प्रयास से ही मिलेगी मंजिल

समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षक व अभिभावक की तरह समझाते हुए सीएम योगी ने कहा कि किसी प्रतियोगिता में पदक जीतने से पहले सबसे महत्वपूर्ण प्रतिभाग करना है। उन्होंने महान कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता, ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ सुनाते हुए कहा कि सबसे जरूरी है प्रयास करना, क्योंकि प्रयास ही मंजिल तक पहुंचाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भी उदाहरण दिया। कहा कि डॉ. कलाम फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन फेल होने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार में कम साधन होने के बावजूद वह भारत के मिसाइल मैन बने। राष्ट्रपति बनने के पहले उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला। सीएम ने विद्यार्थियों को सीख दी कि वे अपने हौसलों को कभी कमजोर न होने दें। जो ठान लेता है, वही करके भी दिखाता है। इसलिए जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारना है। 

500 खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती अगले सप्ताह से

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में भी बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप के साथ ही खेलों को भी बढ़ावा दे रही है। ओलंपिक, एशियाड, कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता को खूब नकद पुरस्कार देने साथ ही उन्हें सीधे सरकारी नौकरी दी जा रही है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले सप्ताह 500 और खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती शुरू होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थितजन को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, यातायात नियमों के पालन और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओपी सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।