Minnu PM Joshy UPSC story: 21 में शादी, 23 में बच्चा और 32 में यूपीएससी, आसान नहीं थी पुलिस क्लर्क से आईएएस बनने की कहानी

Minnu PM Joshy UPSC story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की तैयारी करने वाले परीक्षार्थी कई मुश्किलों को पार करते हुए अपनी मंजिल हासिल कर पाते हैं। ये सफर किसी भी प्रतियोगी के लिए आसान बिलकुल नहीं होता है। इसलिए मंजिल पर सिर्फ वही पहुंचते हैं, जो निरंतर प्रयास करते रहते हैं। ऐसा ही एक नाम है मिन्नू पीएम जोशी का।

आईएएस ऑफिसर मिन्नू पीएम जोशी के लिए, इस सफर में परिवार की जिम्मेदारियों, फुल-टाइम सरकारी नौकरी और मां बनने के बीच बैलेंस बनाना शामिल था। 6 असफल कोशिशों के बावजूद वह न रुकीं, न थकीं। अंतत: 32 साल की उम्र में वह यूपीएससी की सीएसई में अपनी सफलता का परचम लहराने सफल रहीं। मिन्नू पीएम जोशी ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 150 हासिल की और अपने स्वर्गीय पिता के साथ शेयर किया हुआ सपना पूरा किया।

केरल के पठानमथिट्टा की रहने वाली मिन्नू की कहानी लगन और पक्के इरादे की एक मिसाल बन गई है। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के बावजूद, वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के अपने लक्ष्य के प्रति डटी रहीं।

पिता के सपने को बनाया अपना लक्ष्य

मिन्नू पीएम जोशी ने अपने पुलिस ऑफिसर पिता को तब खो दिया था जब वह स्कूल में थीं। उनकी मौत का परिवार पर गहरा असर पड़ा। 2012 में, वह डाई-इन-हार्नेस स्कीम के तहत पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क के तौर पर भर्ती हुईं। इस योजना के तहत मृत सरकारी कर्मचारियों के योग्य आश्रितों को नौकरी दी जाती है। अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री पूरी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता को हमेशा उम्मीद थी कि वह एक सिविल सर्वेंट बनेंगी, एक सपना जो बाद में उनका अपना सपना बन गया।

मिन्नू ने 21 साल की उम्र में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के एक अधिकारी जोशी डीजे से शादी की। वह 23 साल की उम्र में मां बन गईं, जिससे एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर उनकी भूमिका में परिवार की जिम्मेदारियां भी जुड़ गईं। इस वजह से उनकी यूपीएससी की तैयारी में देरी हुई, लेकिन उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा।

मिन्नू पीएम जोशी का यूपीएससी सफर

उन्होंने 26 साल की उम्र में सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी, उन्होंने ठान लिया था कि वह सिर्फ अपने गुजरे हुए पिता की जगह सरकारी सेवा में जाने के बजाय अपनी उपलब्धियों के आधार पर एक पहचान बनाएंगी।

उन्होंने एक डिसिप्लिन्ड रूटीन को फॉलो किया। वह सुबह शंकर लाइब्रेरी में अखबार, खासकर द हिंदू, पढ़ती थीं, और बाद में गाइडेंस के लिए शंकर आईएएस एकेडमी में एडमिशन ले लिया। वह दिन में ऑफिस के काम और रात में पढ़ाई के बीच बैलेंस बनाती थीं और साथ ही अपने परिवार का भी ध्यान रखती थीं। छह कोशिशों के बाद, मिन्नू ने 32 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में एआईआर 150 हासिल की।

मिन्नू पीएम जोशी पर एक नजर

होमटाउन : पठानमथिट्टा, केरल

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : बायोकेमिस्ट्री में मास्टर्स, केरल यूनिवर्सिटी

सरकारी नौकरी : केरल पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क (2012)

शादी हुई : 21 साल में

मां बनीं : 23 साल में

यूपीएससी की तैयारी शुरू की : 26 साल

यूपीएससी की कोशिशें : 6

यूपीएससी रैंक : AIR 150

यूपीएससी पास किया : 32 साल में

मिन्नू पीएम जोशी की मौजूदा पोस्टिंग

खबरों के मुताबिक, IAS मिन्नू पीएम जोशी अभी असिस्टेंट कलेक्टर, भटकुली-तिवसा सब-डिवीजन, अमरावती, महाराष्ट्र में काम कर रही हैं। पुलिस डिपार्टमेंट के क्लर्क से आईएएस अधिकारी बनने का उनका सफर सालों की लगातार कोशिशों को दिखाता है, जिसमें उन्होंने प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ फैमिली लाइफ और एकेडमिक तैयारी को बैलेंस किया है।

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650 करोड़ की एलिवेटेड रोड से बदलेगा NCR का सफर! लाल कुआं-दादरी का 1 घंटे का रास्ता सिर्फ 20 मिनट में

गाजियाबाद के लाल कुआं और दादरी के बीच जीटी रोड पर रोजाना सफर करने वालों को लंबे समय से भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है, खासकर हफ्ते के दिनों में पीक आवर्स के दौरान। ऐसे में चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग वाले हिस्से पर अक्सर जाम लगने की वजह से यात्रियों, कमर्शियल गाड़ियों और स्थानीय निवासियों को लंबे समय तक फंसे रहना पड़ता है।

News18 के अनुसार, अब लाल कुआं और दादरी के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने का लंबे समय से लंबित प्रस्ताव एक कदम और आगे बढ़ गया है; अधिकारियों ने इस रूट पर 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है, जिससे जाम कम होने और यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड GT रोड के उस बड़े रीडेवलपमेंट प्लान का हिस्सा है जिसका मकसद गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। सेतु निगम ने इस कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और सर्वे का काम पूरा कर लिया है।

करोड़ों की नई परियोजनाओं को मिलेगी मंजूरी

लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्ताव को गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने आगे बढ़ाया था और अब इसे मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद, यह एलिवेटेड कॉरिडोर दादरी की ओर जाने वाले वाहनों को कई व्यस्त चौराहों और लोकल ट्रैफिक पॉइंट्स से बचाकर निकलने में मदद करेगा, जिसकी वजह से जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

फिलहाल अभी, GT रोड पर भारी ट्रैफिक के कारण लाल कुआं और दादरी के बीच सफर में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग सकता है। जबकि चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग के पास जाम की वजह से लोगों को लंबे समय तक रुकना पड़ता है।

ट्रैफिक होगा कम

अधिकारियों का मानना ​​है कि एलिवेटेड रोड से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए एक अलग रास्ता मिलने से सफर का समय घटकर लगभग 15 से 20 मिनट हो सकता है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना सफर करने वालों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दोनों तरफ सफर का समय कम करके उनके रोजाना लगभग एक घंटे बचा सकता है।

प्रस्तावित कॉरिडोर सीधे लाल कुआं से दादरी तक जाएगा और रास्ते में पड़ने वाले बड़े चौराहों से होकर नहीं गुजरेगा। दूर जाने वाला ट्रैफिक एलिवेटेड हिस्से से गुजरेगा, जबकि लोकल गाड़ियां नीचे वाली सड़क का इस्तेमाल करती रहेंगी।

अधिकारियों को उम्मीद है कि लोकल और लंबी दूरी के ट्रैफिक के अलग-अलग होने से आवागमन बेहतर होगा, चार प्रमुख सिग्नलों पर लगने वाला जाम कम होगा और इस रास्ते की सबसे बड़ी समस्या भी दूर होगी। दरअसल, अभी एक ही सड़क पर भारी कमर्शियल वाहन, औद्योगिक क्षेत्र का ट्रैफिक और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

बता दें कि GT रोड उन सबसे व्यस्त सड़क कॉरिडोर में से एक है जो दिल्ली को गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों से जोड़ता है। दिल्ली, सीलमपुर, साहिबाबाद, मोहन नगर और घंटा घर से आने वाला ट्रैफिक लाल कुआं की तरफ आता है, जिससे मौजूदा सड़क नेटवर्क पर काफी दबाव पड़ता है।

गौरतलब है कि लाल कुआं पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से आने वाली गाड़ियां, अलीगढ़ की ओर जाने वाली गाड़ियां और दादरी व सूरजपुर की ओर जाने वाले भारी इंडस्ट्रियल ट्रैफिक की वजह से जाम की समस्या बढ़ जाती है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पहले से मौजूद फ्लाईओवर ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है, लेकिन नीचे वाली सड़क पर अभी भी भारी ट्रैफिक रहता है, खासकर दादरी NTPC, कोट और आस-पास के इंडस्ट्रियल इलाकों में जाने वाले ट्रकों की वजह से।

उम्मीद है कि एलिवेटेड रोड से गाजियाबाद, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी रोड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही, इससे सूरजपुर, कोट और दादरी के इंडस्ट्रियल हब को भी फायदा होगा, क्योंकि माल की ढुलाई आसान हो जाएगी।

अधिकारियों को यह भी उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराएगा, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर ट्रैफिक का दबाव होगा।

इस प्रोजेक्ट का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ने की उम्मीद है। NCR में पहले भी देखा गया है कि जब किसी इलाके में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होता है, तो वहां घरों की मांग बढ़ने लगती है। माना जा रहा है कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का भी ऐसा ही असर देखने को मिल सकता है।

लाल कुआं, जिसे पहले मुख्य रूप से एक ट्रांजिट पॉइंट माना जाता था, धीरे-धीरे एक रिहायशी इलाके के तौर पर उभरा है क्योंकि यह वेव सिटी, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और राज नगर एक्सटेंशन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

वहीं, नोएडा में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण, कई घर खरीदार गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों में तुलनात्मक रूप से सस्ते घरों के विकल्प तलाशने लगे हैं।

एलिवेटेड रोड बनने के बाद दादरी, कोट गांव और रोजा-याकूबपुर क्षेत्र जैसे इलाकों की लोकप्रियता बढ़ सकती है, क्योंकि यहां से गाजियाबाद पहुंचना आसान हो जाएगा।

रिपोर्टों से पता चलता है कि इस इलाके में अभी दादरी की तरफ 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK घरों की मांग है, जबकि लाल कुआं और क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में खरीदार 65 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK और 3BHK अपार्टमेंट देख रहे हैं।

फिलहाल यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जैसे ही इसे हरी झंडी मिलेगी, अधिकारी जमीन से जुड़े काम, अतिक्रमण हटाने और बिजली-पानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं (यूटिलिटी) को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आमतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में यही चरण सबसे ज्यादा समय लेते हैं।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल कुआं से न्यू बस स्टैंड तक के एलिवेटेड सेक्शन की लागत लगभग 650 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि दादरी की ओर जाने वाले पूरे 12 किलोमीटर के कॉरिडोर को चरणों में विकसित किए जाने की उम्मीद है। अगर मंजूरी और शुरुआती काम योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो अगले साल तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है, जिससे NCR के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर यात्रा करने वाले लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

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यूपी में 238 नए पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन और 714 चार्जर लगाने के प्रयास तेज

EV Charging Stations in UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और हरित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम और उत्तर प्रदेश की ईवी मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी पॉलिसी-2022 के तहत प्रदेश में 238 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम तेज किया जा रहा है। यह पहल राज्य में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। 

 

10 साल का मॉडल, 714 चार्जर होंगे स्थापित

प्रस्ताव के अनुसार, पहले चरण में 238 पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिन पर 714 चार्जर लगाए जाएंगे। इन स्टेशनों के संचालन के लिए 10 वर्ष का अनुबंध प्रस्तावित है। सरकारी भूमि पर स्थापित होने वाले इन चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग केवल ईवी चार्जिंग गतिविधियों के लिए होगा तथा संबंधित विभागों से ₹1 प्रति किलोवाट की दर से भूमि उपयोग शुल्क लिया जाएगा।

 

पीएम ई-ड्राइव के तहत मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

प्रस्ताव के अनुसार चार्जिंग स्टेशनों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। सरकारी कार्यालयों में स्थापित होने वाले स्टेशनों को अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवीएसई (चार्जिंग उपकरण) पर 100 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है, जबकि रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी अलग-अलग स्तर पर सब्सिडी का प्रस्ताव है। योजना का उद्देश्य शहरों के साथ-साथ प्रमुख हाईवे पर भी चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है। 

 

योगी सरकार की ईवी नीति को मिलेगा नया बल

प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश ईवी मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी पॉलिसी-2022 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और विकास का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके साथ ही व्यापक चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क विकसित करना, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना तथा ईवी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना भी प्रमुख उद्देश्य हैं। राज्य सरकार की नीति में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए पूंजीगत प्रोत्साहन और सरकारी भूमि उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान पहले से मौजूद हैं।

 

इन शहरों में सबसे अधिक चार्जिंग स्टेशन 

प्रस्ताव के अनुसार सबसे अधिक चार्जिंग स्टेशन निम्न शहरों में प्रस्तावित हैं। गौतमबुद्ध नगर में 39, लखनऊ में 36, मेरठ में 35, गोरखपुर में 32, वाराणसी में 28, आगरा में 21, मथुरा में 14, प्रयागराज में 13, कानपुर नगर में 12, गाजियाबाद में 6, कानपुर देहात में 2 समेत कुल मिलाकर 238 स्थानों की पहचान की गई है। कई विभागों की जमीन होगी उपयोग में प्रस्ताव के अनुसार चार्जिंग स्टेशन नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, विद्युत वितरण कंपनियों, यूपीएसआरटीसी, जिला प्रशासन तथा अन्य सरकारी विभागों की उपलब्ध भूमि पर स्थापित किए जाएंगे। इसमें नोएडा, लखनऊ नगर निगम, वाराणसी नगर निगम, मेरठ नगर निगम, गोरखपुर नगर निगम सहित अनेक सरकारी संस्थाओं की भूमि शामिल है।

 

शहर के अंदर और हाईवे पर योगी सरकार का बराबर फोकस

प्रस्ताव में शहर के अंदर और हाईवे पर चार्जिंग स्टेशनों के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। शहरों में लगभग 40–60 वर्गमीटर और हाईवे पर बड़े चार्जिंग हब के लिए 250–300 वर्गमीटर तक भूमि की आवश्यकता बताई गई है। हाईवे स्टेशनों पर बसों और ट्रकों के लिए उच्च क्षमता वाले डीसी फास्ट चार्जर लगाने का प्रस्ताव है।

 

मुख्य सचिव स्तर पर मॉनिटरिंग

हाल के दिनों में मुख्य सचिव स्तर पर विभिन्न विभागों से उपलब्ध सरकारी भूमि का ब्योरा मांगा गया है ताकि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। इसका उद्देश्य राज्य में ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।

UP Teacher Recruitment 2026: यूपी में सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ, माध्यमिक और प्राइमरी स्कूलों में भरे जाएंगे 23,899 पद

UP Teacher Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में जल्द ही बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। राज्य के शिक्षा सेवा चयन आयोग को सहायता प्राप्त माध्यमिक और प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन भेज दिया गया है। इसके बाद से समझा जा रहा है कि राज्य में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द रफ्तार पकड़ सकती है। उत्तर प्रदेश में 23,899 पदों पर नई दों शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। इसके तहत टीजीटी के 17740, पीजीटी के 2615 और सहायक अध्यापकों के 897 कुल 21252 रिक्त पदों का अधियाचन यूपीईएसएससी को भेज दिया है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सोमवार को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के ई-अधियाचन पोर्टल पर कुल 21252 रिक्त पदों का अधियाचन अपलोड कर दिया। इससे पहले शिक्षा निदेशालय ने एडेड हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के 1172 और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 1475 पदों का अधियाचन चयन आयोग को भेजा था। इस प्रकार कुल 23899 पदों के रिक्त पदों की सूचना चयन आयोग को मिल चुकी है। आयोग पहले रिक्त पदों का परीक्षण करेगा और उसके बाद भर्ती का विज्ञापन जारी होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अधियाचन अपलोड होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है।

जल्द शुरू होगी भर्ती

प्रवक्ता और प्राइमरी अध्यापकों के अधियाचन अपलोड होने से इन पदों पर जल्द भर्ती की उम्मीद जगी है। अब शिक्षा सेवा चयन आयोग भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने में जुट सकता है। सूत्रों के अनुसार, चयन आयोग पहले टीजीटी-पीजीटी और अन्य पदों पर भर्ती शुरू करेगा। परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के खाली पद का कार्यभार संभाल रहे ऐसे सहायक अध्यापक जिन्होंने बकाया वेतन देने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की है उन्हें इसका लाभ दिया जाएगा। याचिका दाखिल करने की तिथि से उन्हें पिछले तीन साल का बकाया वेतन एरियर के रूप में दिया जाएगा। इस संबंध में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी बीएसए को निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा है कि अगर किसी बीएसए द्वारा किसी याचिकार्ता शिक्षक को प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया हो। वहीं उस सहायक अध्यापक की ओर से प्रधानाध्यापक का वेतन प्राप्त करने के लिए बीएसए को प्रार्थना पत्र भी दिया गया हो। ऐसी स्थिति में बीएसए तथ्यात्मक रूप से जांच करेंगे कि क्या सहायक अध्यापक के रूप में शिक्षक ने पांच वर्ष का अनुभव पूरा कर लिया है? क्या वह वास्तव में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो याचिकाकर्ता को प्रधानाध्यापक के पद का बकाया वेतन याचिका करने की तारीख से अधिकतम तीन साल का ही दिया जाएगा। भले ही वह इससे ज्यादा समय से इस पद पर कार्य कर रहे हों।

OPSC recruitment 2026: ओडिशा में 500 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी, 24 जुलाई से शुरू होगा आवेदन

UP Police recruitment 2026: यूपी पुलिस में जल्द शुरू होगी 81,000 पदों पर भर्ती, अलग-अलग चरणों में जारी होगा नोटिफिकेशन

UP Police recruitment 2026: उत्तर प्रदेश के राज्य पुलिस बल का हिस्सा बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए ये अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार ने 2026 के लिए एक बड़ी भर्ती प्रक्रिया की घोषणा की है। इसमें पुलिस विभाग में 81,000 से ज्यादा पद भरे जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड (UPPRPB) द्वारा की जाएगी। यह घोषणा राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के मौके बढ़ाने की चल रही कोशिशों के तहत की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया को समय पर और निष्पक्ष तरीके से पक्का करने का निर्देश दिया है। हाल के नोटिस के अनुसार, यूपी पुलिस के लिए यह भर्ती चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। इसमें अलग-अलग कैटेगरी के पदों के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन आने की उम्मीद है। भर्ती प्रक्रिया में सिविल पुलिस के साथ-साथ तकनीकी और विशेष श्रेणी सहित कई तरह के पद शामिल होंगे। 81,000 से ज्यादा पदों की योजना के साथ, यह भर्ती प्रक्रिया हाल के वर्षों में राज्य द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया में से एक होने का अनुमान है। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे नोटिफिकेशन जारी होने और एप्लीकेशन टाइमलाइन की जानकारी के लिए रेगुलर ऑफिशियल अपडेट चेक करते रहें।

यूपी पुलिस 2026 के लिए कई पदों पर वैकेंसी

अधिकारियों ने बताया है कि पदों की विस्तृत जानकारी अलग-अलग नोटिफिकेशन के जरिए शेयर की जाएगी। कैंडिडेट अपनी योग्यता और पसंद के हिसाब से आवेदन कर सकेंगे।

किन पदों पर होंगी नियुक्तियां

यूपी पुलिस के कई विभागों में- कॉन्स्टेबल, सब-इंस्पेक्टर (SI), जेल वार्डर, रेडियो कैडर, कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क और अन्य तकनीकी व मिनिस्ट्रियल सहित अन्य पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

इन भर्तियों के लिए क्या होगी योग्यता

यूपी पुलिस विभाग में पद के अनुसार अलग-अलग योग्यता निर्धारित है। कॉन्स्टेबल पद के लिए अभ्यर्थी का केवल 12वीं उत्तीर्ण, वहीं सब-इंस्पेक्टर पदों पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी का स्नातक उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। कई पदों पर आवेदन के लिए 12वीं पास के साथ कंप्यूटर सर्टिफिकेट भी अनिवार्य है। पद के अनुसार विस्तृत शैक्षिक योग्यता नोटिफिकेशन आने के बाद चेक कर सकेंगे।

यूपी पुलिस के लिए भर्ती प्रक्रिया और अगले चरण

उम्मीद है कि यूपीपीआरपीबी अलग-अलग स्टेज में नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसमें हर पद के लिए योग्यता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें बताई जाएंगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित नोटिफिकेशन में दिए गए निर्देशों का पालन करें और आवेदन शुरू होने पर उसी के अनुसार आवेदन करें।

OPSC recruitment 2026: ओडिशा में 500 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी, 24 जुलाई से शुरू होगा आवेदन

Bank Holiday Tomorrow: कल 22 जुलाई को इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक! चेक करें अपने शहर का स्टेटस

Bank Holiday List 22 July 2026: अगर आप बुधवार यानी 22 जुलाई को अपने किसी जरूरी वित्तीय काम के लिए बैंक शाखा जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। घर से निकलने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई बैंक छुट्टियों की सूची जरूर चेक कर लें, ताकि आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

आरबीआई की आधिकारिक हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, 22 जुलाई को देश के एक खास शहर में बैंकों का अवकाश रहेगा। आइए जानते हैं कि कल कहां-कहां बैंक बंद रहेंगे और किन सेवाओं का आप बिना रुकावट लाभ उठा सकेंगे।

 22 जुलाई को कहां बंद रहेंगे बैंक?

कल यानी 22 जुलाई को अगरतला (त्रिपुरा) में सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहेंगे।

छुट्टी का कारण: अगरतला में यह अवकाश प्रसिद्ध ‘खर्ची पूजा’ (Kharchi Puja) के अवसर पर दिया गया है।

बाकी देश का हाल: अगरतला को छोड़कर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और लखनऊ समेत देश के अन्य सभी राज्यों और शहरों में बैंक शाखाएं सामान्य दिनों की तरह खुली रहेंगी।

क्या है खर्ची पूजा?

‘खर्ची पूजा’ त्रिपुरा का एक ऐतिहासिक और बेहद पवित्र हिंदू त्योहार है। यह वार्षिक उत्सव पुराने अगरतला स्थित ‘चतुर्दशा देवता मंदिर’ में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, जो लगातार सात दिनों तक चलता है।

22 जुलाई के बाद अगली बैंक छुट्टी कब है?

22 जुलाई के बाद इस हफ्ते देश भर में 25 जुलाई (शनिवार) को बैंक बंद रहेंगे। 25 जुलाई को महीने का चौथा शनिवार है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को पूरे देश में बैंक बंद रहते हैं।

बैंक बंद रहने पर चालू रहेंगी ये सेवाएं

बैंक शाखाओं के बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। डिजिटल युग में आप घर बैठे अपने वित्तीय काम निपटा सकते हैं। यूपीआई सेवाएं, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग चालू रहेंगी। एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनें कैश निकालने या जमा करने के लिए चालू रहेगी।

योगी सरकार में बिना भेदभाव सभी जिलों में निर्धारित शेड्यूल से अधिक की जा रही विद्युत आपूर्ति

2017 से पहले चंद जिलों तक सीमित थी बिजली की तय आपूर्ति, योगी सरकार ने आते ही समाप्त किया वीआईपी कल्चर

 

निर्बाध बिजली के लिए अब गर्मी, बारिश और तेज हवाओं के बीच भी फील्ड में डटे रहते बिजलीकर्मी

 

बरसात के मौसम को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश जारी

 

लखनऊ 20 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। साल 2017 से पहले प्रदेश में घंटों बिजली कटौती आम बात थी, जबकि आज सभी 75 जिलों में शहरों से लेकर गांवों तक निर्धारित शेड्यूल से अधिक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। भीषण गर्मी, उमस, तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद प्रदेशवासियों को लगातार बिजली मिल रही है, जिससे आम जनजीवन, कृषि, व्यापार और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है।

 

योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों स्तरों पर व्यापक सुधार किए गए हैं। परिणामस्वरूप प्रदेश में बिजली आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनी है। सरकार का लक्ष्य केवल बिजली उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना भी है।

 

*2017 से पहले चंद जिले थे वीआईपी, अन्य जिलों में तरसती रहती थी जनता*

 

2017 से पहले प्रदेश में जनपद मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान था। हालांकि तय किए गए समय में भी लंबी कटौती होती रहती थी। इतना ही नहीं, पिछली सरकारों के दौरान कुछ चुनिंदा वीआईपी जिलों में ही निर्बाध बिजली आपूर्ति होती थी, जबकि अधिकांश जिलों के लोग लंबे समय तक बिजली कटौती से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए पूरे प्रदेश में समान और बेहतर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लागू की। वर्तमान में जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21.30 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल निर्धारित है। विशेष बात यह है कि गांव से लेकर महानगर तक में निर्धारित शेड्यूल से भी अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

 

*भीषण गर्मी के बीच योगी सरकार में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति*

 

प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में भी योगी सरकार ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वर्ष 2014 में जहां प्रदेश की अधिकतम पीक डिमांड 12,327 मेगावाट थी और वर्ष 2017 में यह 16,110 मेगावाट तक पहुंची थी, वहीं अब उत्तर प्रदेश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 24 जून 2026 को प्रदेश में रिकॉर्ड 32,673 मेगावाट की पीक डिमांड की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई है। वहीं लगातार और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड की टीमें प्रदेशभर में नियमित अनुरक्षण और निरीक्षण कार्य कर रहीं हैं। 

 

बिजली कर्मी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ फील्ड में डटे

 

बारिश, तेज हवाओं और खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी बिजलीकर्मी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ फील्ड में डटे हैं। उनका उद्देश्य किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली पहुंचाना है।

प्रदेशभर में वरिष्ठ अधिकारी लगातार उपकेंद्रों का निरीक्षण कर बिजली व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर परिस्थिति में गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ट्रिपिंग और फॉल्ट की घटनाओं को कम करने के लिए बिजली लाइनों के संपर्क में आने वाली पेड़ों की शाखाओं की नियमित कटाई-छंटाई कराई जा रही है, जिससे बरसात के मौसम में भी आपूर्ति बाधित न हो।

 

रात्रिकालीन मेंटेनेंस पर भी दिया जा रहा विशेष जोर

 

विभागीय बिजलीकर्मी रात के समय आवश्यक अनुरक्षण कार्य कर दिन के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को कम से कम असुविधा होती है और बिजली व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी रहती है। बरसात के मौसम को देखते हुए बिजली विभाग ने सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश भी जारी किए हैं। सभी फील्ड कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण पहनकर ही अनुरक्षण कार्य करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की विद्युत दुर्घटना से बचा जा सके। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर आवश्यक मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य समय पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि वितरण क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए पूरी टीम बारिश, गर्मी में निरन्तर कार्य कर रही है। शत- प्रतिशत व्यक्तिगत समस्याओं तथा लाइन व फीडर की समस्याओं का निराकरण कराया जा रहा है।

UP Board: 10वीं-12वीं कंपार्टमेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, डाउनलोड करके प्रिंसिपल बांटेंगे हॉल टिकट

UP Board: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की कंपार्टमेंट परीक्षा 28 जुलाई को आयोजित की जानी है। इस परीक्षा के लिए पंजीकृत छात्र अपने एडमिट कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। बोर्ड ने 28 जुलाई को होने वाली परीक्षा से पहले आखिरी स्टेप का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों को राहत देते हुए इनके एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश बोर्ड ने स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपलों को आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in से हॉल टिकट डाउनलोड करने की सलाह दी है। इसके बाद छात्र अपने-अपने स्कूलों से अपना यूपी बोर्ड एडमिट कार्ड ले सकते हैं।

बोर्ड के नोटिस के मुताबिक, स्कूल प्रिंसिपल्स को आधिकारिक वेबसाइट से हॉल टिकट डाउनलोड करने होंगे और उन पर दस्तखत करने के बाद उन्हें संबंधित कैंडिडेट्स को बांटना होगा। हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए कम्पार्टमेंट परीक्षा हॉल टिकट एक्सेस करने के लिए स्कूल अधिकारियों को यूजर आईडी और पासवर्ड डालना होगा। कम्पार्टमेंट परीक्षा उन छात्रों के लिए दूसरा मौका है जो मुख्य बोर्ड परीक्षा में एक या ज्यादा विषय क्लियर नहीं कर पाए थे, जिससे वे बिना एक साल गंवाए अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

बोर्ड पहले ही घोषणा कर चुका है कि कक्षा 10 हाई स्कूल इम्प्रूवमेंट या कंपार्टमेंट परीक्षा और कक्षा 12 इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा 28 जुलाई, 2026 को होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कक्षा 10 का पेपर सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक होगा, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक तय है। यूपीएमएसपी ने कहा है कि परीक्षाएं जिला मुख्यालय पर डिस्ट्रिक्ट स्कूल इंस्पेक्टर द्वारा दिए गए केंद्रों पर होंगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द अपने स्कूलों से अपने एडमिट कार्ड ले लें और परीक्षा के दिन से पहले सभी डिटेल्स ध्यान से चेक कर लें।

यूपी बोर्ड की कंपार्टमेंट परीक्षा नकल विहीन कराने के लिए प्रत्येक केंद्र पर सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा औचक निरीक्षण के लिए फ्लाइंग स्क्वाड, सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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महंगे पेट्रोल-डीजल से मिलेगी राहत! हर महीने ₹1000 की सीधी बचत, जानें RBL, HDFC और Axis के फ्यूल कार्ड्स में कौन है सबसे बेस्ट?

IndianOil Co-branded Credit Cards Comparison: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच हर कोई अपने फ्यूल खर्च पर कुछ न कुछ बचत करना चाहता है। ऐसे में बैंकों द्वारा जारी ‘फ्यूल को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स’ काफी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया और विज्ञापनों में दावा किया जा रहा है कि ‘इंडियन ऑयल के फ्यूल स्टेशनों पर ईंधन भराने पर 8.5% तक की एक्स्ट्रा बचत’ मिल सकती है।

क्या यह दावा वाकई सच है? इसका जवाब है- हां, यह पूरी तरह सच है, लेकिन यह लाभ केवल एक खास क्रेडिट कार्ड पर ही उपलब्ध है। मार्केट में इंडियन ऑयल के साथ तीन बड़े बैंकों HDFC Bank, Axis Bank और RBL Bank के क्रेडिट कार्ड उपलब्ध हैं।

8.5% बचत का पूरा गणित: RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card

फ्यूल पर 8.5% की सबसे ज्यादा बचत आपको RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card पर मिलती है। यह पूरे देश में किसी भी फ्यूल क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाली सबसे ऊंची सेविंग्स दरों में से एक है। बैंक के नियमों के अनुसार यह बचत दो हिस्सों में बंटी होती है:

7.5% फ्यूल वैल्यू-बैक: इस कार्ड से इंडियन ऑयल के आउटलेट्स पर प्रति ₹100 खर्च करने पर 15 फ्यूल पॉइंट्स मिलते हैं। चूंकि 1 फ्यूल पॉइंट की वैल्यू ₹0.50 (50 पैसे) होती है, इसलिए यह सीधे तौर पर 7.5% का वैल्यू-बैक बन जाता है।

1% फ्यूल सरचार्ज वेवर: ईंधन भराने पर लगने वाले 1% के सरचार्ज पर पूरी छूट मिलती है। जिससे कुल बचत: 7.5%+1%=8.5% हो जाती है।

कैपिंग और लिमिट: इस कार्ड में हर महीने अधिकतम 2,000 फ्यूल पॉइंट्स (यानी ₹1,000 मूल्य का ईंधन) ही कमाए जा सकते हैं। इस बचत का पूरा फायदा उठाने के लिए हर महीने अधिकतम ₹13,400 तक का फ्यूल इस कार्ड से भराना सबसे बेस्ट रहता है।

HDFC, Axis और RBL के इंडियन ऑयल कार्ड्स में अंतर

क्रेडिट कार्ड डेटा के आधार पर तीनों प्रमुख बैंकों के इंडियन ऑयल को-ब्रांडेड कार्ड्स की तुलना नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझी जा सकती है:

HDFC, Axis और RBL के इंडियन ऑयल कार्ड्स में अंतर

तीनों कार्ड्स की खास बातें और लिमिट

1. HDFC Bank IndianOil Credit Card

यह कार्ड उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनका मासिक फ्यूल खर्च ₹3,000 के आसपास रहता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह RuPay नेटवर्क पर उपलब्ध है, जिससे आप इसे अपने Google Pay, PhonePe या Paytm से लिंक करके किसी भी मर्चेंट को सीधे UPI पेमेंट कर सकते हैं। साथ ही ग्रोसरी और यूटिलिटी बिलों पर मिलने वाला 5% का लाभ इसे एक अच्छा ऑल-राउंडर बजट कार्ड बनाता है।

2. Axis Bank IndianOil Credit Card

इसमें आपको कुल 5% की बचत होती है और महीने में अधिकतम ₹200 तक का फ्यूल रिवॉर्ड मिल सकता है। यह कार्ड भी RuPay नेटवर्क पर आता है, जिससे यूपीआई ट्रांजैक्शन आसान हो जाते हैं। इसके अलावा अगर आप बाहर खाना खाने या मूवी टिकट (BookMyShow) बुक करने के शौकीन हैं, तो वहां मिलने वाला 15% का डिस्काउंट इसकी वैल्यू को काफी बढ़ा देता है।

3. RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card

सबसे बड़ी खूबी है 8.5% की रिकॉर्डतोड़ बचत जो भारी फ्यूल खर्च करने वालों के लिए वरदान है। इसकी सालाना फीस ₹1,500 (प्लस जीएसटी) है, जो बाकी दोनों कार्ड्स से ज्यादा है। हालांकि, अगर आप सालभर में ₹2.75 लाख रुपये इस कार्ड से खर्च कर देते हैं, तो यह फीस पूरी तरह माफ हो जाती है।

आपके लिए कौन सा कार्ड रहेगा सबसे बेस्ट?

अगर आपका फ्यूल खर्च बहुत ज्यादा है (महीने का ₹8,000 से ₹13,000) तो बिना सोचे समझे RBL Bank IndianOil XTRA कार्ड चुनें, क्योंकि इसकी 8.5% की बचत आपकी सालाना फीस से कहीं ज्यादा पैसा आपको वापस दिला देगी।

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अगर आपका बजट कम है और UPI पेमेंट की सुविधा चाहिए तो HDFC या Axis के इंडियन ऑयल कार्ड्स आपके लिए ज्यादा मुफीद रहेंगे, क्योंकि इनमें सालाना फीस कम है और यूपीआई पेमेंट का एक्स्ट्रा सपोर्ट मिलता है।

विश्व युवा कौशल दिवस पर योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, 75 जिलों के 10283 युवाओं को मिला रोजगार

Yogi government's major achievement on World Youth Skills Day

– कौशल विकास मिशन की ओर से प्रदेशभर में 13 से 15 जुलाई तक आयोजित हुआ 3 दिवसीय रोजगार मेला, 830 कंपनियों ने की शिरकत

– दूसरे दिन 14 जुलाई को रिकॉर्ड 8,912 युवाओं को मिला रोजगार, प्रयागराज में सबसे ज्यादा 728 चयन

– योगी सरकार में बदली युवाओं की तस्वीर, हुनर से मिल रहा रोजगार और सम्मान

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में विश्व युवा कौशल दिवस (15 जुलाई) के अवसर पर उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम), डीडीयू जीकेवाई और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के संयुक्त तत्वावधान में 13 से 15 जुलाई तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी रोजगार मेले का सफल आयोजन किया गया।

 

इस महाअभियान में प्रदेश के सभी 75 जिलों के युवाओं को शामिल किया गया। देश-विदेश की कुल 830 प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सेदारी की, जिसके माध्यम से कुल 10,283 योग्य अभ्यर्थियों का विभिन्न पदों के लिए अंतिम चयन किया गया।

 

इस उपलब्धि पर व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। आज प्रदेश का युवा हुनर से रोजगार और स्वरोजगार पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन के तहत ‘सबको हुनर, सबको काम’ के संकल्प को नई गति दी गई है।

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मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर 12.50 लाख को रोजगार दिलाया गया है। टाटा समूह के साथ 7000 करोड़ का सीएसआर एमओयू, 225 आईटीआई का अपग्रेडेशन, एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे फ्यूचरिस्टिक कोर्स और ब्लू डॉट सॉफ्टवेयर जैसी पहल से युवाओं को सीधे कंपनियों से जोड़ा जा रहा है।

 

तीन चरणों में चला रोजगार का महाअभियान

पहला चरण (13 जुलाई) : अभियान के पहले दिन प्रदेश के 9 जिलों – सम्भल, गोंडा, सुल्तानपुर, मऊ, फर्रुखाबाद, औरैया, उन्नाव, चंदौली और देवरिया में रोजगार मेले आयोजित हुए। इसमें 107 प्रमुख कंपनियों ने हिस्सा लिया और कुल 1,071 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। पहले दिन देवरिया में जबरदस्त उत्साह देखा गया, जहाँ रिकॉर्ड 303 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।

 

दूसरा चरण (14 जुलाई) : 14 जुलाई को व्यापक स्तर पर अभियान चला। प्रदेश के 63 जिलों में एक साथ मेले आयोजित हुए। इस एक दिन में 689 बड़ी कंपनियों ने शिरकत की और रिकॉर्ड 8,912 अभ्यर्थियों को नौकरी मिली। इस चरण में प्रयागराज पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहा, जहाँ अकेले 22 कंपनियों ने 1,185 युवाओं का चयन किया। इसके साथ ही वाराणसी में 674 और गोरखपुर में 317 युवाओं को रोजगार मिला।

 

तीसरा चरण (15 जुलाई) : विश्व युवा कौशल दिवस पर 15 जुलाई को अमेठी, पीलीभीत और इटावा समेत 3 जिलों में रोजगार मेला आयोजित हुआ। अंतिम दिन 34 कंपनियों की भागीदारी से कुल 300 युवाओं का चयन हुआ, जिसमें पीलीभीत के 138 युवा शामिल रहे।

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मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन पुलकित खरे ने कहा कि ‘सबको हुनर, सबको काम’ के संकल्प के तहत 3 दिवसीय मेले में 10,283 युवाओं का चयन बड़ी उपलब्धि है। यूपी का युवा आज तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर है। हमारा लक्ष्य हर कुशल हाथ को सही मंच और सीधा रोजगार देना है।