कमरे की खुशबू के पीछे होता है केमिकल खेल! जानिए कैसे बनता है रूम फ्रेशनर

रूम फ्रेशनर आजकल लगभग हर घर में इस्तेमाल होने लगा हैं। कमरे में अच्छी खुशबू लाने और बदबू दूर करने के लिए लोग कई तरह के रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करते हैं। इनकी खुशबू से कमरा फ्रेश और अच्छा महसूस होता है, लेकिन इन्हें रोज और लंबे समय तक इस्तेमाल करना हार्मफुल हो सकता है। रूम फ्रेशनर की सेफ्टी उसमें इस्तेमाल किए गए केमिकल और उसकी मात्रा पर डिपेंड करती हैं। रूम फ्रेशनर कम मात्रा सांस के जरिए अंदर लेने से नुकसान कम होता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा या लगातार इस्तेमाल करना सेफ नहीं होता है। कुछ लोगों को तेज खुशबू या उसमें मौजूद कुछ केमिकल से सिरदर्द, एलर्जी, स्किन में जलन या सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

रूम फ्रेशनर अलग-अलग खुशबू में आते हैं, इनमें फ्रेगरेंस केमिकल और एसेंशियल ऑयल शामिल होते हैं। कई लिक्विड फ्रेशनर में खुशबू वाले तेल को आइसोप्रोपाइल अल्कोहल जैसे सॉल्वेंट के साथ मिलाया जाता है, ताकि खुशबू आसानी से हवा में फैल सके। कुछ प्लग-इन फ्रेशनर गर्म होकर खुशबू फैलाते हैं। कुछ प्रोडक्ट्स में केमिकल भी हो सकते हैं। इसलिए कमरे को खुशबूदार बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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1. ब्रीथिंग का ध्यान

रूम फ्रेशनर से खुशबू के साथ कुछ VOCs यानी वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स भी हवा में फैल सकते हैं। थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल करने से नुकसान नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इनके कॉन्टैक्ट में रहने से परेशानी हो सकती है। फ्रेशनर स्प्रे करने के बाद खांसी, गले में जलन, सांस लेने में दिक्कत या घुटन महसूस हो, तो तुरंत ताजी हवा वाली जगह पर जाएं। छोटे और बंद कमरे में बहुत ज्यादा स्प्रे करने से बचना बेहतर है।

2. बच्चों से दूर रखें

रूम फ्रेशनर जैसे लिक्विड रिफिल, रीड डिफ्यूजर, जेल और फ्रेगरेंस बीड्स बच्चों की पहुंच में नहीं होने चाहिए। कुछ बीड्स देखने में अट्रैक्टिव लग सकते हैं, जिससे बच्चा उन्हें गलती से मुंह में डाल सकता है। रूम फ्रेशनर का लिक्विड निगलने पर मुंह और पेट में जलन, मतली या उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है। बच्चा गलती से इसे निगल ले, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

3. प्लग-इन और ऑटोमैटिक स्प्रे में सावधानी

प्लग-इन फ्रेशनर को ऐसी जगह लगाएं जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से उसे छू न सकें। इस्तेमाल से पहले पैकेज पर दिए इंस्ट्रक्शन जरूर पढ़ें। वहीं, कुछ ऑटोमैटिक स्प्रे और एयरोसोल फ्रेशनर में जलने वाले तत्व हो सकते हैं। इसलिए इन्हें माचिस, मोमबत्ती, गैस या सिगरेट जैसी खुली आग से दूर रखें।

4. स्किन या आंख के लिए सावधानी

यदि रूम फ्रेशनर स्किन पर गिर जाए, तो अफेक्टेड एरिया को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इससे जलन, लालिमा या एलर्जी जैसी परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है। फ्रेशनर आंख में चला जाए, तो आंख को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। धोने के बाद भी जलन बनी रहे, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।

5. रूम वेंटिलेशन का इस्तेमाल

रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से और कम मात्रा में करना बेहतर है। कमरे को बंद करके लगातार फ्रेशनर चलाने के बजाय खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन बनाए रखें। बदबू को सिर्फ फ्रेशनर से छिपाने के बजाय उसका असली कारण जानें। फिर भी यदि परेशानी बनी रहे तो इसका इस्तेमाल करना बंद कर दें।

Viral Video: कानपुर में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड चॉकलेट्स के लिए मची भयंकर लूट, क्या इसे बच्चों को खिलाएंगे?

Kanpur expired chocolate dump: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के कानपुर का एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कानपुर के पनकी में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड टॉफियों और चॉकलेट्स को उठाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है। एक फैक्ट्री द्वारा कचरे में फेंकी गई इन मिठाइयों और चॉकलेट्स को इकट्ठा करने के लिए पुरुषों और महिलाएं टूट पड़े हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही फूड सेफ्टी, वेस्ट मैनेजमेंट और गरीबी को लेकर बहस छिड़ गई है कि कोई एक्सपायर्ड चॉकलेट के लिए कैसे क्रेजी हो सकता है और क्या लोग इसे घर ले जाकर अपने बच्चों को खिलाएंगे?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Delhiite नाम के यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे अजीब होड़ बताया है। यूजर का कहना है कि एक्सपायर्ड चॉकलेट लूटने के लिए टूट पड़े लोगों में बुनियादी कॉमन सेंस पूरी तरह से गायब नजर आया।

वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट पर लोगों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने जहां एक्सपायर्ड चीजों को उठाने वालों की आलोचना की और इसके हेल्थ पर पड़ने वाले खराब असर की बात कही, तो दूसरे कुछ लोगों का मानना था कि इस घटना को गरीबी और महंगाई के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।

महंगाई और गरीबी पर छिड़ी तीखी बहस

कचरे के ढेर पर मची इस लूट को लेकर कई यूजर्स ने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी पर चिंता जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए तंज कसा कि भाई महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब कचरा भी बजट शॉपिंग डेस्टिनेशन बन गया है। वहीं दूसरे यूजर ने सहानुभूति जताते हुए लिखा कि यह सामान्य समझ की कमी से ज्यादा गरीबी और असमर्थता को दर्शाता है। इसी गरीबी ने लोगों को कचरे से खाना उठाने पर मजबूर किया होगा। एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि सोचिए उस स्तर तक पहुंचने के लिए कितनी तंगी रही होगी कि लोग इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार हो गए।

कुछ यूजर्स ने लोगों के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि जिस तरह से लोगों ने कपड़े पहने हैं, उससे लगता है कि वे सभी स्कूल और कॉलेज गए होंगे। समझ नहीं आता कि उन्हें क्या सिखाया गया है कि वे एक्सपायर्ड सामान उठा रहे हैं। दूसरे यूजर ने लिखा कि लोग फ्री की टॉफियों के लिए इंफेक्शन का खतरा मोल ले रहे हैं, ऐसा लगता है जैसे कॉमन सेंस गायब हो चुका है।

कंपनी और FSSAI पर उठे सवाल, नियमों के उल्लंघन का आरोप

इस पूरी घटना के बाद कंपनियों द्वारा खराब और एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। सोशल मीडिया पर एफएसएसएआई और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए एक यूजर ने लिखा कि उस फैक्ट्री मालिक को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए क्योंकि एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने की एक तय प्रक्रिया होती है। एक दूसरे यूजर ने कहा कि एक्सपायर्ड आइटम को निपटाने का यह मानक तरीका नहीं है और इसके लिए दोषी ब्रांड के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यह लेख यूजर-जनरेटेड कंटेंट और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। ओरिजिनल पोस्ट में किए गए दावों की मनीकंट्रोल द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।)

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