योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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टोल फ्री हुई कानपुर-लखनऊ एक्‍सप्रेसवे! NHAI ने सड़क बनाने वाली कंपनी पर लिया ये एक्शन

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क में आई खराबी के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल वसूली बंद कर दी है। ये फैसला एक्सप्रेसवे के करीब 300 मीटर लंबे हिस्से पर सड़क के फिसलन भरे होने की शिकायत सामने आने के बाद लिया गया। सड़क की स्थिति को देखते हुए मरम्मत का काम तेजी से कराया जा रहा है। टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी।

शुरू किए जांच

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कहा है कि जब तक सड़क का खराब हिस्सा पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल नहीं वसूला जाएगा। साथ ही, टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी। NHAI ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर और निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। NHAI ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

NHAI ने कंपनी को जारी किया नोटिस 

प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है और मरम्मत का पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक उठाएगी। वहीं, NHAI ने कंपनी को नोटिस जारी कर उसे ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही कंपनी पर जुर्माना लगाने और परियोजना से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वतंत्र इंजीनियर की टीम के प्रमुख और रेजिडेंट इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया। साथ ही उन्हें अगले दो साल तक सड़क परिवहन मंत्रालय, NHAI और NHIDCL की परियोजनाओं में काम करने से रोक दिया गया है। इसके अलावा, लापरवाही के आरोप में मौजूदा और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ भी चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सड़क बनने के बाद लगेगा टैक्स

NHAI ने बताया कि, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है और उसे भविष्य की परियोजनाओं से बाहर किया जा सकता है। वहीं, सड़क में आई खराबी की वजह पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के. एस. रेड्डी की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। NDTV ने बताया कि इसके अलावा, एक्सप्रेसवे की सड़क की स्थिति की जांच के लिए लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। NHAI ने स्पष्ट किया है कि सड़क के खराब हिस्से की पूरी तरह मरम्मत होने के बाद ही एक्सप्रेसवे पर दोबारा टोल वसूली शुरू की जाएगी।

300 मीटर हिस्सा होगा रिपेयर

NHAI के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के दाहिने कैरिजवे पर किलोमीटर 64 के पास सड़क में फिसलन की समस्या सामने आई। ये मामला 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आया। उन्नाव जिले के कोरारी गांव के पास हुई भारी बारिश के बाद सड़क के इस हिस्से के खराब होने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। शुरुआती रिपोर्ट में 5 से 7 मीटर तक सड़क प्रभावित होने की बात कही गई थी, लेकिन NHAI की जांच में करीब 300 मीटर लंबे हिस्से में फिसलन मिलने की पुष्टि हुई।