अडानी डिफेंस को मिला एसआईडीएम चैंपियन अवार्ड

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के आठवें सालाना सत्र में रक्षा एवं विमानन निर्यात में अच्छे प्रदर्शन के लिए एसआईडीएम चैंपियन अवार्ड 2026 से नवाजा गया है।

अडानी डिफेंस को यहां यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में 09 अक्टूबर को एसआईडीएम के सत्र में यह पुरस्कार दिया गया। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में रक्षा तथा कानून प्रवर्तन क्षेत्र के ग्राहकों के लिए छोटे कैलिबर का गोला-बारूद बनाती है। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कंपनी के संयंत्र में सालाना 30 करोड़ राउंड नाटो मानक के गोला-बारूद का उत्पादन किया जाता है।

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अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष राजवंशी ने कहा, “हमें गर्व है कि देश की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को बनाने में हमारी कोशिशों का सम्मान किया गया है। हमारा फोकस देश में उच्च गुणवत्ता के उत्पाद बनाने और उन्हें वैश्विक बाजारों में ग्राहकों तक पहुंचाने पर है। हम रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और देश में विनिर्माण में निवेश करना जारी रखेंगे।

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यूपीआई पेमेंट के लिए अब मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं

यूपीआई के माध्यम से भुगतान के लिए आने वाले समय में जेब से मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं रह जाएगी, मोबाइल जेब में ही रहेगा और जियो एआई ग्लास से क्यूआर कोड स्कैन भुगतान हो जाएगा।

जियो ने यहां यशोभूमि में चल रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में ऐसा ही एक भविष्योन्मुखी उत्पाद दिखाया। कंपनी ने अपनी पर्सनल एआई वियरेबल रेंज में कैमरा ग्लास, ऑडियो ग्लास और ईयरफोन दिखाए हैं। इनमें स्कैन एंड पे, एआई वॉयस असिस्टेंट, लाइव ट्रांसलेशन, एआई नोट टेकिंग और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स हैं। ये एक से अधिक भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।

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स्कैन एंड पे की मदद से कैमरा ग्लास यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन करेगा, यूजर वॉयस कमांड देगा और पुष्टि के बाद भुगतान हो जाएगा। यूपीआई सर्किल के जरिये एक बार में पांच हजार रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। इसकी मासिक सीमा 15 हजार रुपये है।

कंपनी की कोशिश एआई को मोबाइल स्क्रीन और की-बोर्ड से निकालकर आवाज और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ने की है।

जियो एआई ग्लास का दूसरा बड़ा इस्तेमाल लाइव ट्रांसलेशन है। अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले दो लोग वियरेबल डिवाइस की मदद से एक-दूसरे की बात समझ सकेंगे। आप अपनी भाषा में बोलिए, सामने वाला अपनी भाषा में, दुभाषिए का काम एआई कर लेगा।

बैठकों में कोई जरूरी बात छूट न जाए, इसके लिए एआई नोट भी ले सकेगा। इस पर लाइव क्रिकेट कमेंट्री भी मिलेगी।

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Digital India: 35,000 गांवों में हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान! खर्च होंगे ₹15,000 करोड़

Govt To Spend ₹15000 Crore Telecom Connectivity: दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026’ में घोषणा की कि सरकार देश के लगभग 35,000 गांवों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच खर्च कर रही है।

संचार मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदे का सौदा नहीं है, वहां सरकार को खुद आगे आकर निवेश करना पड़ रहा है ताकि कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से अछूता न रहे।

जहां फायदा नहीं, वहां सरकार खुद करेगी निवेश

मंत्री सिंधिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और इंटर-ऑपरेबिलिटी पर जोर देते हुए कहा, ‘हर क्षेत्र रिटर्न या मुनाफा देने वाला नहीं हो सकता। कई दूरदराज के इलाकों में पहुंच एक बड़ी चुनौती है, जहां निजी कंपनियां मुनाफा न होने के कारण नेटवर्क नहीं लगा पातीं। ऐसे क्षेत्रों में सरकार का आगे आना अनिवार्य है और हमने यही काम किया है।’

ग्राहकों को ध्यान में रखकर स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग

संचार मंत्री ने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम के बेहतर और सही इस्तेमाल के लिए ‘स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग’ पर काम कर रही है। इससे मौजूदा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

हाईवे की तरह बनेगा टेलीकॉम नेटवर्क

नेविगेशन और नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ‘मिडिल माइल’ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया गया। सिंधिया ने सरकार की भूमिका की तुलना हाईवे निर्माण से करते हुए कहा, ‘जैसे सरकार का काम हाईवे बनाना है, वैसे ही टेलीकॉम में हमारा काम ‘मिडिल माइल’ तैयार करना है। इसके बाद हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि लोग इस नेटवर्क हाईवे का सही और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।’

भारतनेट और 4G सैचुरेशन स्कीम का विस्तार

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने ₹1.40 लाख करोड़ का बजट तय किया है। इसका मकसद केवल ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि सीधे गांवों और घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है।

इससे पहले सरकार ने ‘4G सैचुरेशन स्कीम’ के तहत करीब 30,000 गांवों की पहचान की थी, जहां 21,000 टेलीकॉम टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 17,000 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुरक्षा के नियम

इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और AI के प्रभाव पर बात करते हुए सिंधिया ने 2000 के दशक से पहले के आईटी दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अपने आप में एक जरिया है, लेकिन आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, उसी से आपकी उत्पादकता तय होती है।

सिंधिया ने सचेत करते हुए कहा कि AI के विस्तार से कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इसके लिए एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की जरूरत है ताकि लोगों को टेक्नोलॉजी के गलत प्रभावों से बचाया और सुरक्षित रखा जा सके।

देश में 4G और 5G की मौजूदा स्थिति

IMC 2026 में डेटा साझा करते हुए सिंधिया ने बताया, भारत के 99% से अधिक गांवों में अब 4G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। वहीं देश के 99.9% जिलों को 5G नेटवर्क से कवर कर लिया गया है। अब भारत का मुख्य फोकस केवल बुनियादी नेटवर्क देने तक सीमित नहीं है, बल्कि 5G, 6G और AI-सक्षम सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।