UPI MDR Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट! मोदी सरकार को मिला CM उमर अब्दुल्ला का साथ

UPI MDR Charges Row: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने केंद्र के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। सीएम ने कहा कि UPI सिस्टम को चलाना बहुत महंगा है। उन्होंने कहा कि जो चीजें हमें मुफ्त में मिलती हैं, हम उनकी कद्र नहीं करते।

अब्दुल्ला ने गुरुवार (17 सितंबर) को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है।

‘काफी पैसा खर्च होता है…’

सीएम ने कहा कि इस पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।”

J&K के CM ने कहा, “यह चार्ज आपसे या मुझसे नहीं लिया जाएगा। इसका भुगतान उन व्यवसायों को करना होगा जहां लेनदेन हो रहा है। अभी जो आदेश जारी किया गया है। उसमें साफ कहा गया है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। दूसरी बात, अगर आप और मैं एक-दूसरे को पैसे भेज रहे हैं, तो उस पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से कम के लेनदेन पर कोई मर्चेंट चार्ज नहीं है, क्योंकि ज्यादातर व्यावसायिक लेनदेन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर चार्ज लगता है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय की गई है।”

अब्दुल्ला ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि UPI को चालू रखने में लगभग ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ₹20,000 करोड़ का मतलब है कि यह पैसा आपके और मेरे द्वारा दिए गए टैक्स से आ रहा है। कहीं न कहीं से तो यह पैसा आ ही रहा है। तो, जाने-अनजाने में हम UPI के लिए पहले से ही भुगतान कर रहे हैं। लेकिन आज हम इसके लिए अपने टैक्स के जरिए भुगतान कर रहे हैं। अगर इसके बाद बड़ी कंपनियां और व्यापारी इसके लिए भुगतान करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए।”

‘फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं’

इस बीच, यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हाल में जारी गाइडलाइंस में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि US की इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों को भारत के UPI पेमेंट सिस्टम में RuPay कार्ड जैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिलते हैं।

DFS ने एक बयान में कहा, “15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में RuPay के अलावा दूसरे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके UPI पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं है। यह आरोप कि बाहरी दबाव की वजह से MDR लागू किया जा रहा है, ‘गलत और गुमराह करने वाला’ है।”

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।

NPCI ने क्या कहा?

NPCI ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रोवाइडर के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।

क्या है पूरा मामला?

नए गाइडलाइंस के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा। जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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सिर्फ कैश में पेमेंट करें… UPI पर चार्ज का बड़ा असर दिल्ली के बाजारों में दिखना शुरू, लोकल ट्रेडर्स अब नकद पर देने लगे जोर

UPI पर 0.4% फीस से बवाल: दिल्ली के दुकानदारों ने कहा- अब कैश लाओ, UPI नहीं चलेगा

New Delhi, Sep 16 (PTI) – केंद्र सरकार के 2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने के फैसले के बाद दिल्ली के बाजारों में कैश की वापसी शुरू हो गई है। ट्रेडर्स एसोसिएशनों ने साफ कह दिया है कि वे अब कैश पेमेंट को पुश करेंगे ताकि डिजिटल पेमेंट की एक्स्ट्रा कॉस्ट से बचा जा सके।

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल मर्चेंट पेमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क लाकर जनवरी 2020 से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था खत्म कर दी है। इस चार्ज को 75,000 रुपये और उससे ऊपर के पेमेंट पर 300 रुपये पर कैप किया गया है।

दिल्ली के बाजारों में क्या हो रहा है?

कमला नगर से ऐलान:

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा, “हमने सरकार के डिजिटल पेमेंट के पुश को सपोर्ट किया था, लेकिन अब अगर हम पर ही चार्ज लगेगा तो हम कैश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देंगे। हम पहले से ही ट्रांजैक्शन चार्ज और 18% GST दे रहे हैं। अब अगर UPI पर भी MDR चार्ज किया तो हम कैश प्रमोट करेंगे। UPI आया था तो हमने सपोर्ट किया था, अब चार्ज लगेगा तो सपोर्ट नहीं करेंगे। हम ट्रांजैक्शन चार्ज क्यों दें?”

उन्होंने दुकानदारों से कैश पेमेंट को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि अगर अभी ये चार्ज मान लिया तो भविष्य में रेट और बढ़ सकता है। उन्होंने ये भी माना कि “हम डिजिटल पेमेंट के आदी हो चुके हैं। बाजार जाते वक्त कभी-कभी कैश भी नहीं रखते। अब वापस कैश पर जाना मुश्किल होगा।”

खान मार्केट और नई दिल्ली ट्रेडर्स का विरोध:

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने PTI से कहा, “UPI को ट्रेडर्स और ग्राहकों के लिए पेमेंट आसान बनाने के लिए लाया गया था। अगर अब 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त चार्ज व्यापारियों को देना पड़ा तो कई लोग कैश को प्राथमिकता देंगे। हमें डिजिटल पेमेंट से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं थोपनी चाहिए।”

खान मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा, “हम पहले से ही क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR का विरोध कर रहे थे और अब UPI पर भी चार्ज देना होगा। अगर हमसे UPI पर चार्ज लिया गया तो हम कैश पेमेंट को बढ़ावा देंगे।” उन्होंने कहा कि व्यापारी अब बड़े पेमेंट के लिए चेक और दूसरे बैंकिंग चैनल पर भी विचार करेंगे।

छोटे दुकानदारों का दर्द:

कमला नगर के रिटेल दुकानदार रजत जैन ने कहा कि ये चार्ज रिटेलर्स के लिए मुश्किल होगा, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास जहां स्टूडेंट्स 10-20 रुपये की भी खरीदारी करते हैं। “हम उनसे एक पैसा भी एक्स्ट्रा नहीं मांग सकते, लेकिन हम GST और अब UPI का चार्ज भी दें। कस्टमर से कैश मांगो तो वो कहता है UPI से करूंगा। सारा बोझ हम पर है।”

सदर बाजार बड़ी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि ये कदम 2000 रुपये से ऊपर बड़ी संख्या में UPI ट्रांजैक्शन करने वाले छोटे, मध्यम और थोक व्यापारियों की लागत बढ़ा देगा। एक ट्रांजैक्शन पर छोटा चार्ज भी महीने-दर-महीने बड़ा खर्च बन जाएगा।

ग्राहक कपिल अरोड़ा ने कहा, “अगर व्यापारियों को ज्यादा चार्ज देना पड़ा तो वो हमसे ही वसूलेंगे। इस तरह न सिर्फ व्यापारी बल्कि ग्राहक भी परेशान होंगे।”

नए नियम में क्या है राहत?

सरकार ने कहा है कि UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट्स को छूट रहेगी। सरकार के मुताबिक इससे 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन कवर हो जाएंगे।

नया MDR ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकता

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर, जो UPI वॉल्यूम का 37% और वैल्यू का 70% है, चार्ज से बाहर रहेगा
  • रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल जैसे एसेंशियल सेक्टर्स पर फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन फीस
  • कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02% रेट

 

YES Bank Share Price : सिटी की बुलिश रिपोर्ट ने भरा जोश, 5% भागा शेयर, जानिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

YES Bank Share Price :बुधवार, 16 सितंबर को YES बैंक के शेयरों में लगभग 5% की तेजी आई। स्टॉक में यह तेजी कुछ खास यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)लागू होने के बाद देखने को मिला। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है नए MDR फ्रेमवर्क से बैंकों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल दूसरी कंपनियों को कमाई का एक नया ज़रिया मिलेगा। फिलहाल 1.40 बजे के आसपास यह शेयर 0.27 रुपए यानी 1.17% की बढ़त के साथ 23.36 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 24.10 रुपए और दिन का लो 23.29 रुपए है।

15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% तक MDR लगेगा,जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। यह चार्ज मर्चेंट को देना होगा, जबकि ग्राहक बिना किसी ट्रांज़ैक्शन फ़ीस के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।

YES बैंक के नोट में दिए गए अनुमानों के मुताबिक नया फ़्रेमवर्क मर्चेंट पेमेंट के लिए UPI के पहले वाले ज़ीरो-MDR मॉडल से अलग है और इससे सालाना लगभग ₹16,000-17,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल बनने की उम्मीद है।

YES बैंक को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद

एक्पर्ट्स का कहना है कि MDR के नए नियमों से बैंकिंग सिस्टम को फायदा मिलेगा। इस बारे में सिटी ने एक रिपोर्ट निकाली है। सिटी के मुताबिक MDR चार्जेज का सबसे बड़ा बेनिफिशियरी यस बैंक हो सकता है। सिटी के मुताबिक इन नए नियमें से यस बैंक कर पूर्व मुनाफे में 6-12% का उछाल संभव है। वहीं, PPOP में 5–10% की बढ़त का अनुमान है। सिटी का कहना है कि यह चार्ज नेटवर्क विस्तार के लिए लिया जा रहा है। MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। इससे UPI इकोसिस्टम में 16000–17,000 करोड़ रेवेन्यू जुड़ने का अनुमान है। यह UPI नेटवर्क पर काम करने वाले बैंकों और पेमेंट ऐप्स के लिए बड़ा स्ट्रक्चरल बूस्ट होगा। इसका 60% हिस्सा बैंकिंग सिस्टम की जेब में जाएगा। 25% हिस्सा UPI ऐप प्रोवाइडेर्स को मिलेगा। वहीं, 15% हिस्सा नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर को मिलेगा।

स्टॉक पर टेक्निकल एक्सपर्ट की राय

एक्सिस सिक्योरिटीज में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (हेड ऑफ़ रिसर्च) राजेश पलविया ने कहा कि शुक्रवार को हुई जबरदस्त खरीदारी और भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण, यस बैंक ने ₹23 के अपने छह हफ्ते के सप्लाई बैरियर को मज़बूती से पार किया और ₹24 के आसपास बंद हुआ,जो बाज़ार में मज़बूत भागीदारी का संकेत है। ₹21.85 के अहम 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) सपोर्ट लेवल से मज़बूत उछाल के बाद इस तेज़ी को और गति मिली, जिससे स्टॉक अपने 20, 50 और 100 डे SMA के स्तरों को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा।

डेली,वीकली और मंथली RSI रीडिंग का बुलिश ज़ोन में मज़बूती से बने रहना स्टॉक में व्यापक तेज़ी को और पुख्ता करता है,जो सभी अहम टाइमफ्रेम में लगातार तेज़ी बने का संकेत है। इस स्टॉक में 23 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 27-30 रुपए के शॉर्ट टर्म टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Stock Market : रेंज में अटका बाजार, कोटक सिक्योरिटीज के सहज अग्रवाल से जाने अब कैसे बन सकता है पैसा

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch : 16 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, फिनटेक स्टॉक्स पर भी खास नजर

Stocks to Watch: बुधवार, 16 सितंबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। Bharat Forge से लेकर BHEL और Sonata Software तक कई कंपनियों ने अहम कारोबारी अपडेट दिए हैं। वहीं, UPI पर MDR लागू होने के बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स भी नजर में रहेंगे। आइए जानते हैं 16 सितंबर को किन 13 शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी।

Bharat Forge

डिफेंस और ऑटो सेक्टर की कंपनी Bharat Forge ने RTX की Pratt & Whitney Canada के साथ हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियां DRDO के HALE UAV प्रोग्राम में एडवांस्ड टर्बोप्रॉप इंजन के इस्तेमाल की संभावना तलाशेंगी।

Sonata Software

आईटी सेक्टर की कंपनी Sonata Software ने Amazon Web Services (AWS) के साथ पांच साल का Strategic Collaboration Agreement किया है। कंपनी की घरेलू इकाई Sonata Information Technology Limited इस समझौते पर काम करेगी।

BHEL

सरकारी पावर और इंजीनियरिंग कंपनी BHEL ने Titagarh Rail Systems के साथ ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है। यह JV Vande Bharat Sleeper Trainsets की व्यापक मेंटेनेंस का काम करेगा। दोनों कंपनियां इन ट्रेनों की 35 साल तक देखरेख करेंगी।

Groww

फिनटेक कंपनी Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में ब्लॉक डील की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक Peak XV Partners Investments VI-1 और Sequoia Capital Global Growth Fund III – U.S./India Annex Fund अपने शेयर बेच सकते हैं। इस डील के लिए ₹191.45 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस बताया गया है।

Vedanta

माइनिंग सेक्टर की कंपनी Vedanta 18 सितंबर को कमेटी ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक करेगी। इसमें Non-Convertible Debentures यानी NCDs जारी करने के प्रस्ताव पर विचार होगा। कंपनी इन NCDs को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी करने की तैयारी कर रही है।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) को करीब ₹144.98 करोड़ के नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर की वैल्यू में GST शामिल नहीं है। कंपनी को NEEPCO, SAIL, ED और Damodar Valley Corporation से ये काम मिले हैं।

Blue Star

होम अप्लायंस सेक्टर की कंपनी Blue Star ने बताया कि Oman की W.J. Towell & Co LLC ने Dubai Court of Appeal का रुख किया है। कंपनी ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द करने की मांग की है। इस अवॉर्ड में Blue Star के खिलाफ किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया गया था।

Tata Communications

टेलीकॉम सेक्टर की कंपनी Tata Communications की कनाडा स्थित सब्सिडियरी TC Canada और Canada Revenue Agency के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है। यह समझौता टैक्स दावों से जुड़ा है। ये दावे TC Canada की इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज से हुई आय से संबंधित हैं।

GMR Airports

एयरपोर्ट सेक्टर की कंपनी GMR Airports ने अगस्त में अपने एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में 94 लाख पैसेंजर मूवमेंट दर्ज किए। वित्त वर्ष 2027 में अब तक पैसेंजर ट्रैफिक 4.897 करोड़ हो गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.4% ज्यादा है।

Aurobindo Pharma

फार्मा सेक्टर की कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि US FDA ने उसकी API मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह यूनिट उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Apitoria Pharma की है। यूनिट-II तेलंगाना में स्थित है।

VIP Industries

लगेज सेक्टर की कंपनी VIP Industries 18 सितंबर को बोर्ड बैठक करेगी। इसमें फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। कंपनी इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, ADRs, GDRs, FCCBs, वारंट और अन्य सिक्योरिटीज जारी करने पर विचार कर सकती है।

Purple Style Labs

फैशन और ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनी Purple Style Labs ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी PSL Retail में ₹420 करोड़ निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया जाएगा। Purple Style Labs, Pernia’s Pop-Up Shop की पैरेंट कंपनी है।

India Pesticides

एग्रोकेमिकल सेक्टर की कंपनी India Pesticides को इंटरनेशनल मार्केट में अपने दो पेस्टिसाइड प्रोडक्ट्स के लिए रेगुलेटरी मंजूरी मिली है। कंपनी को ब्रिटेन में एक कीटनाशक के लिए Technical Equivalence अप्रूवल मिला है। वहीं अर्जेंटीना में एक हर्बीसाइड के लिए रजिस्ट्रेशन मिला है।

Fintech Stocks

सरकार की ओर से UPI पर 0.40% MDR तय किया है। इसके बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। नए MDR स्ट्रक्चर का डिजिटल पेमेंट कंपनियों और उनके रेवेन्यू मॉडल पर असर दिख सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

यूपीआई से पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। आगे यूपीआई से पेमेंट फ्री नहीं रहेगा। हालांकि, 2000 रुपये तक के पेमेंट को फीस से राहत दी गई है। इससे ज्यादा अमाउंट के पेमेंट पर एमडीआर लागू होगा। हालांकि, यह 15 अक्तूबर से लागू होगा। सवाल है कि 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर एमडीआर कितना होगा?

सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या है। MDR वह कमीशन है, जिसका पेमेंट मर्चेंट बैंक को करते हैं। यह पेमेंट बैंक को डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के एवज में किया जाता है। काफी समय से यूपीआई पर फीस लगाने की चर्चा चल रही थी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले कहा था कि यूपीआई हमेशा के लिए फ्री नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा था कि इस पर कॉस्ट आती है और किसी न किसी को यह कॉस्ट उठाना पड़ता है।

यूपीआई पर एमडीआर चार्ज को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल चल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि आज हर आदमी 1 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक के पेमेंट के लिए रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करता है। आम लोग सब्जी, फल, ग्रॉसरी जैसी रोजमर्रा की चीजों का पेमेंट भी यूपीआई से करते हैं। आइए कुछ जरूरी सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

क्या आम आदमी को UPI से पेमेंट के लिए कोई चार्ज देना होगा?

इस सवाल का जवाब है ना। यूपीआई की सर्विस कंज्यूमर्स के लिए फ्री बनी रहेगी। कंज्यूमर्स पहले की तरह से बगैर किसी चार्ज यूपीआआई के जरिए पेमेंट करते रहेंगे। आम आदमी को यूपीआई से पेमेंट के लिए फीस की चिंता करने की जरूरत नहीं है। एमडीआर पॉलिसी में यह कहा गया है कि यूपीआई सभी लोगों के लिए फ्री बना रहेगा।

क्या एक व्यक्ति अगर किसी दोस्त या रिश्तेदार को यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करना चाहता है तो उसे चार्ज देना होगा?

इस सवाल का जवाब भी ना है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाले ट्रांजेक्शन को P2P कहते हैं। पी2पी ट्रांजेक्शन आगे भी पूरी तरह से फ्री बना रहेगा। आपको परिवार के किसी सदस्य, रिश्तेदार या दोस्त को यूपीआई के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए किसी तरह की फीस नहीं चुकानी होगी। आप किसी भी अमाउंट को बैगर किसी फीस दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर सकेंगे।

क्या UPI ऐप अपने प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले पेमेंट के लिए फीस लेंगे?

इस सवाल का जवाब भी नहीं है। यूपीआई ऐप यूपीआई के जरिए होने वाले पेमेंट के लिए प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल सहित किसी तरह की फीस कंज्यूमर्स से नहीं वसूलेंगे। यूपीआई ऐप को यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी तरह की फीस वसूलने की इजाजत नहीं दी गई है।

चूंकि मर्चेंट्स को 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज चुकाना होगा तो वे क्या वे चीजों के ज्यादा दाम वसूलेंगे?

इसका जवाब भी नहीं है। दरअसल, बाजार के समीकरण और अब तक का ट्रेंड यह बताता है कि मर्चेंट्स अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए नॉमिनल डिजिटल प्रोसेसिंग कॉस्ट का बोझ खुद उठाते हैं। चूंकि, यूपीआई पर लगने वाला एमडीआर चार्ज क्रेडिट कार्ड फीस से काफी कम है, जिससे मर्चेंट्स के इस चार्ज को ग्राहकों से वसूलने की उम्मीद नहीं है। ऐसा करने पर उनकी सेल्स पर असर पड़ेगा। इसका मतलब है कि आम लोगों को पहले की तरह यूपीआई से सिर्फ उतना है पैसा चुकाना होगा, जितनी उस चीज की कीमत होगी।

मर्चेंट को कितना एमडीआर चुकाना होगा?

NPCI यानी नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन के मुताबिक, 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट्स को 0.4 फीसदी एमडीआर चुकाना होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या इससे ज्यादा के पेमेंट पर फीस यानी एमडीआर की 300 रुपये की सीमा लागू होगी।

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उदाहरण से ऐसे समझें कितना होगा एमडीआर

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा। अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट को MDR ₹200 चुकाना होगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी

UPI MDR Fees: 15 सितंबर को UPI Steering Committee की बैठक हुई। इसमें ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 40 बेसिस पॉइंट (bps) MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 होगी। यह ₹75000 से ऊपर के हर पेमेंट पर लागू होगी। मतलब कि ₹75000 से अधिक के हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 का MDR फिक्स रहेगा।

ये MDR चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो कमीशन है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट बैंक को देता है।

40 bps MDR का मतलब क्या है?

एक बेसिस पॉइंट यानी 1 प्रतिशत का सौवां हिस्सा। इसलिए 40 bps का मतलब 0.40% है। इसे सीधे उदाहरण से समझिए। ₹100 के पेमेंट पर MDR 40 पैसे होगा। वहीं ₹10,000 के UPI पेमेंट पर यह रकम ₹40 होगी।

हालांकि, यह चार्ज ग्राहक को नहीं देना होगा। MDR का भुगतान मर्चेंट की तरफ से किया जाता है।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं

सरकार की अधिसूचना में साफ किया गया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक कोई चार्ज नहीं लगा सकते।

RuPay से डेबिट कार्ड पेमेंट पर भी कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता। NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया UPI के साथ-साथ घरेलू कार्ड नेटवर्क RuPay को भी चलाता है।

UPI से सालाना ₹16,000 करोड़ तक रेवेन्यू

करीब 40 bps MDR लागू होने पर UPI इकोसिस्टम में सालाना ₹16,000 करोड़ तक का रेवेन्यू पैदा होने का अनुमान है।

UPI पेमेंट में कई पार्टनर शामिल होते हैं। इसलिए MDR से मिलने वाली रकम भी अलग-अलग हिस्सेदारों में बांटी जाएगी। इसमें ग्राहक का बैंक, पैसा पाने वाला बैंक, PSP बैंक और मर्चेंट का पेमेंट एग्रीगेटर शामिल हैं। NPCI को भी हर ट्रांजैक्शन पर स्विचिंग फीस मिलती है।

PhonePe और Google Pay को कैसे फायदा होगा?

PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे UPI ऐप सीधे UPI नेटवर्क से अकेले नहीं जुड़ते। ये बैंकों के साथ पार्टनरशिप करते हैं।

इन पार्टनर बैंकों को PSP बैंक कहा जाता है। UPI नेटवर्क को चलाने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए कार्ड पेमेंट इकोसिस्टम के मुकाबले PSP बैंकों को MDR में ज्यादा हिस्सा मिलने की संभावना है।

कौन से बैंक बड़े PSP हैं?

UPI इकोसिस्टम में कई बैंक PSP के तौर पर काम करते हैं। इनमें Yes Bank, Axis Bank, ICICI Bank, HDFC Bank और SBI बड़े PSP बैंकों में शामिल हैं।

नए MDR सिस्टम से UPI से जुड़े बैंकों और दूसरे इकोसिस्टम पार्टनर्स के लिए कमाई का एक नया जरिया बनेगा। वहीं ग्राहकों के लिए ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं होगा।

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‘₹30,500 करोड़ खर्च वाला ये सिस्टम बंद कर दो…’, अश्नीर ग्रोवर ने UPI पर चार्ज लगाने के बीच समझाया ये गणित

Ashneer Grover On UPI MDR Charge: भारतपे के सह-संस्थापक और अपनी किताब ‘दोगलापन’ के लिए मशहूर अश्नीर ग्रोवर ने UPI के नए नियमों पर एक गजब का फार्मूला बताया है। सरकार के ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने की अटकलों के बीच उन्होंने सरकार और बैंकिंग सिस्टम को आड़े हाथों लिया है।

हाल ही में सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर साफ किया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांसजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। हालांकि, इस नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतानों पर चार्ज लगाने या न लगाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इसी को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया (X) पर आंकड़ों के साथ पूरा गणित समझाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

आइए आपको बताते हैं कि अश्नीर ग्रोवर ने क्या गणित बिठाया है और सरकार आखिर UPI पर चार्ज का फ्रेमवर्क क्यों ला रही है।

बंद करो ATM, UPI पर टैक्स की बलि क्यों?

अश्नीर ग्रोवर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना सिर्फ टैक्स वसूली जैसा है। उन्होंने कहा, ‘UPI भारत की एक ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि है जिसे पूरी दुनिया मानती है, पर अब यह टैक्स की बलि चढ़ेगी।’

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, देश में कैश और ATM इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का सालाना खर्च करीब ₹30,500 करोड़ आता है। ग्रोवर की सलाह है कि अगर सरकार को खर्च कम ही करना है, तो एटीएम बंद कर दे और यूपीआई को बढ़ावा दे। ग्रोवर ने याद दिलाया कि RBI ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया है, सभी लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ है और NPCI के पास टैक्स से पहले ₹1,888 करोड़ का सरप्लस है।

‘जब बैंक और आरबीआई इतना भारी मुनाफा कमा रहे हैं, तो फिर यूपीआई की वजह से किसका नुकसान हो रहा है? सरकार ऐसी कौन सी सब्सिडी दे रही है जिससे नुकसान हो रहा है?’

सरकार का नया नियम: ₹2,000 की लिमिट और MDR

14 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI या RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट ऐप कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं वसूल सकते।

संसद के मानसून सत्र (जो 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुआ) में पेमेंट एक्ट की धारा 10A में संशोधन किया गया। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर MDR लगाने का एक रास्ता तैयार हो गया है।

NPCI के नेतृत्व वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ अब यह तय करेगी कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर कितना MDR चार्ज लगाया जाएगा।

सरकार क्यों लाना चाहती है MDR फ्रेमवर्क?

सरकार का तर्क है कि UPI अब काफी बड़ा हो चुका है और इसके सुरक्षित संचालन के लिए पैसों की जरूरत है। लेनदेन की भारी मात्रा को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत है। सरकार का मानना है कि UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना मुमकिन नहीं है।

जब डिजिटल पेमेंट कंपनियों को कमाई (MDR) का जरिया मिलेगा, तो इस सेक्टर में नई कंपनियां आएंगी, जिससे कॉम्पिटिशन और इनोवेशन बढ़ेगा।

कितना बड़ा हो चुका है देश का UPI का नेटवर्क?

NPCI द्वारा संचालित UPI ने पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी है। वित्त वर्ष 2017 में जहां UPI के जरिए ₹0.07 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2026 (FY26) में यह बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया। यानी 10 सालों में 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।

UPI अब भारत के अलावा दुनिया के 11 देशों में इस्तेमाल हो रहा है। उज्बेकिस्तान इस लिस्ट में शामिल होने वाला नया देश बना है। इसके अलावा सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में भी यूपीआई स्वीकार किया जाता है।

₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने बैंकों को दिया निर्देश

Digital payments News: डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि ₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI लेनदेन पर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह रोक सीधे तौर पर ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत लिया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे RuPay डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करने या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कोई शुल्क न वसूलें।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (2007 का 51) की धारा 10A के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड और UPI के जरिए 2,000 रुपये तक के पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी चार्ज लगाने से रोक दिया है।”

UPI ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम

सरकार का यह प्रावधान ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर भी लागू है। यानी इस लिमिट तक UPI के जरिए पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर किसी प्रकार का चार्ज नहीं लगाया जा सकता।

इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना। साथ ही छोटे मूल्य के लेनदेन को लोगों के लिए आसान और कम लागत वाला बनाए रखना है। खास तौर पर दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटी रकम के डिजिटल भुगतान में एक्स्ट्रा चार्ज लगने से लोग कैश का इस्तेमाल करने की ओर वापस जा सकते हैं।

सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज लेने पर भी रोक

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चार्ज पर रोक केवल सीधे तौर पर लगाए जाने वाले शुल्क तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी तरीके से शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि बैंक या संबंधित सिस्टम प्रोवाइडर किसी अन्य चार्ज के नाम पर भी इस तरह के भुगतान की लागत ग्राहक पर डालने की कोशिश नहीं कर सकते।

छोटे डिजिटल पेमेंट को मिलेगा बढ़ावा

भारत में UPI और कार्ड के जरिए डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। खासकर छोटी दुकानों, किराना स्टोर, रेहड़ी-पटरी और रोजमर्रा की खरीदारी में UPI का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है। ऐसे में ₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं होने से डिजिटल लेनदेन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार की यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान को सस्ता, सुविधाजनक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्राहकों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी फायदा हो सकता है और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

भारत में कितना होता डिजीटल ट्रांजेक्शन?

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के जरिए डिजिटल ट्रांजैक्शन हर रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है। NPCI (National Payments Corporation of India) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक भारत में अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। यानी औसतन करीब 79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन रोज हुए। इनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रही। आपको जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल पेमेंट सिर्फ UPI नहीं होदा है। इसमें IMPS, NEFT, RTGS, कार्ड, FASTag आदि भी शामिल होते हैं।

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Zomato के ₹21 वाले ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ पर बवाल! क्या हर पेमेंट पर देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज? यूजर्स के हर सवाल का मिल गया जवाब

Zomato Delivery Fee: ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) पर खाना ऑर्डर करने वाले कुछ ग्राहकों को अब ‘कैश ऑन डिलीवरी (COD)’ का ऑप्शन चुनने पर एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर एक ग्राहक की ओर से शेयर किया गया ऑर्डर बिल X पर वायरल होने के बाद इस कथित नए चार्ज को लेकर बहस छिड़ गई है। ग्राहक ने इसे ग्राहकों से पैसे वसूलने का एक और नया तरीका बताया है।

Zomato पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ के लिए एक्स्ट्रा चार्ज लगाए जाने की रिपोर्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ ग्राहक इसे अनावश्यक चार्ज बता रहे हैं। वहीं, दूसरे इसे कैश हैंडलिंग की लागत और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की रणनीति मान रहे हैं।

वायरल पोस्ट में दिखा ₹21 का अलग चार्ज

विवाद की शुरुआत तब हुई जब X पर @jassneetsingha नाम के यूजर ने अपने Zomato ऑर्डर का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें ‘Pay on Delivery Fee’ नाम से अलग से ₹21 का चार्ज दिखाई दे रहा था। यूजर के मुताबिक, उसने ऑर्डर की रकम डिलीवरी के समय कैश में देने का विकल्प चुना था। इसके लिए उससे 21 रुपये एक्स्ट्रा लिए गए।

पोस्ट में यूजर ने सवाल उठाया कि सिर्फ कैश से पेमेंट करने के लिए ग्राहकों से एक्स्ट्रा पैसा क्यों लिया जा रहा है? हालांकि, सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि इसे Zomato के हर ग्राहक और हर ऑर्डर पर लागू होने वाला एक समान 21 रुपये का चार्ज मानना सही नहीं होगा। रिपोर्टों के अनुसार, चार्ज की राशि अलग-अलग हो सकती है।

₹850 के खाने पर लगा ₹21 का चार्ज

वायरल स्क्रीनशॉट में खाने का आइटम टोटल ₹850 था। इसके अलावा बिल में:-

Pay on Delivery Fee: ₹21

Platform Fee: ₹14

GST: ₹51

जैसे अलग-अलग चार्ज दिखाई दे रहे थे। यानी कैश ऑन डिलीवरी का चार्ज बिल में अलग लाइन आइटम के तौर पर जोड़ा गया।

क्या हर ऑर्डर पर लगेगा देना होगा 21 रुपये?

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक कैश ऑन डिलीवरी के लिए लिया जाने वाला चार्ज हर ऑर्डर में समान नहीं हो सकता। कुछ मामलों में यह करीब ₹7.50 बताया गया है। जबकि कुछ ग्राहकों ने ₹21 तक का चार्ज देखने की बात कही है। कुछ रिपोर्टों में यह चार्ज ऑर्डर वैल्यू के करीब 2 प्रतिशत तक होने और अधिकतम ₹30 तक सीमित रहने का भी दावा किया गया है। हालांकि, चार्ज की वास्तविक राशि ऑर्डर और ग्राहक के हिसाब से अलग हो सकती है।

ऑनलाइन पेमेंट करने पर नहीं लगेगा यह चार्ज

रिपोर्टों के मुताबिक, यह एक्स्ट्रा चार्ज मुख्य रूप से Pay on Delivery यानी डिलीवरी के समय भुगतान करने वाले ऑर्डर पर दिखाई दे रहा है। वहीं, प्रीपेड/ऑनलाइन भुगतान वाले ऑर्डर पर यह चार्ज नहीं लगाया जा रहा है। कुछ ऑर्डर्स में ग्राहकों को ऑनलाइन पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा चार्ज से बचने के लिए प्रोत्साहित करने वाला संदेश भी दिखाई देने की बात सामने आई है।

ग्राहकों में क्यों है नाराजगी?

कैश ऑन डिलीवरी पसंद करने वाले कुछ ग्राहक इस चार्ज से नाराज हैं। खासकर ऐसे ग्राहक जो डिलीवरी से पहले ऑनलाइन पेमेंट करने में सहज महसूस नहीं करते। इसके पीछे गलत या अधूरा ऑर्डर मिलने, डिलीवरी में देरी, रिफंड में परेशानी या कस्टमर सपोर्ट से जुड़ी दिक्कतों जैसी चिंताएं बताई जा रही हैं। वायरल पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने Zomato का बचाव भी किया।

उनका कहना था कि यह कंपनी का बिजनेस मॉडल है। ग्राहक पर ऑर्डर करने की कोई मजबूरी नहीं है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि कैश संभालने, कैश कलेक्शन और उससे जुड़े संभावित नुकसान को कम करने के लिए कंपनी यह चार्ज लगा सकती है। साथ ही, इससे ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चर्चा के दौरान कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने ग्राहकों को Zomato और Swiggy जैसी डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी। उनका सुझाव था कि ग्राहक सीधे रेस्टोरेंट से खाना मंगवाएं या खुद जाकर खाना ले आएं। इससे एक्स्ट्रा प्लेटफॉर्म और डिलीवरी चार्ज से बचा जा सकता है।