हरिद्वार कांवड़ मेले में भिखारी बनकर बैठा यूट्यूबर, 8 घंटे में कमाए 4,000 रुपये

हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूब सोशल एक्सपेरिमेंट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने यह जानने की कोशिश की कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक मेले में भिखारी बनकर पैसे मांगे, तो एक दिन में कितनी रकम जुटा सकता है। सचिन करीब 8 घंटे तक भिखारी का हुलिया बनाकर लोगों के बीच घूमे और दोनों के मुताबिक इस दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए।

फटे कपड़े, हाथ में कटोरा और गले में QR कोड

एक्सपेरिमेंट के लिए सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में छोटा सा कटोरा लेकर श्रद्धालुओं के बीच पैसे मांगने लगे। इस प्रयोग को थोड़ा अलग बनाने के लिए उन्होंने गले में UPI QR कोड भी लटका रखा था, ताकि लोग चाहें तो डिजिटल पेमेंट से भी मदद कर सकें। शुरुआत में दोनों को लगा था कि पूरे दिन में शायद ₹1,000 से ₹2,000 तक ही मिल पाएंगे।

शुरुआत में मिले सिर्फ ₹130

मेले में पैसे मांगने के शुरुआती घंटों में सचिन को ज्यादा सफलता नहीं मिली। काफी कोशिश के बाद उनके पास करीब ₹130 ही जमा हुए। कुछ लोगों ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उनकी मदद की। कई लोगों ने पैसे न होने की बात कहकर आगे बढ़ना बेहतर समझा, तो कुछ ने सचिन के साथ अच्छा व्यवहार किया।

दुकानदार ने दे दी चश्मे की जोड़ी

मेले में घूमते हुए सचिन कई दुकानदारों से भी बातचीत करने लगे। इसी दौरान एक सनग्लास विक्रेता ने उन्हें चश्मे की एक जोड़ी दे दी। इस घटना के बाद सचिन ने मजाकिया अंदाज में खुद को ‘प्रोफेशनल भिखारी’ तक कह दिया। वहीं, गले में लगे UPI QR कोड से भी करीब ₹40 का डिजिटल भुगतान मिला।

असली भिखारी से हुई दिलचस्प बातचीत

एक वक्त सचिन एक असली भिखारी के पास जाकर बैठ गए। दोनों के बीच बातचीत हुई। बताया गया कि उस व्यक्ति को अपना नाम और वह पहले कहां रहता था, इसकी जानकारी तक याद नहीं थी। यह मुलाकात एक्सपेरिमेंट के दौरान सामने आई उन स्थितियों में से एक थी, जिसने भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी व्यक्तिगत परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा।

चार घंटे में ₹800, आठ घंटे में ₹4 हजार

करीब चार घंटे बाद सचिन ने अपनी जमा रकम गिनी तो उनके पास लगभग ₹800 थे। इसके बाद उन्होंने कई घंटे और मेले में बिताए। कभी लोगों ने पैसे दिए तो कभी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटने के लिए भी कहा। बारिश और लगातार पैदल चलने की वजह से एक्सपेरिमेंट उनके लिए शारीरिक रूप से भी काफी थकाऊ बन गया। करीब 8 घंटे बाद दोनों ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 जमा हुए। यानी इस प्रयोग में औसतन करीब ₹500 प्रति घंटे की रकम जुटी।

₹4 हजार से लाखों की कमाई का हिसाब

इसके बाद दोनों ने इसी आंकड़े के आधार पर अनुमान लगाना शुरू किया। उनका कहना था कि अगर रोजाना इतनी ही रकम मिलती रहे तो महीने में करीब ₹1.2 लाख तक जुटाए जा सकते हैं। वायरल पोस्ट में इससे भी ज्यादा कमाई का एक अनुमान सामने आया, जिसमें 12-13 घंटे रोजाना काम करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिदिन तक की संभावित कमाई की बात कही गई। हालांकि, ये सिर्फ इस एक्सपेरिमेंट पर आधारित अनुमान हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि वास्तविक जिंदगी में भीख मांगने वाले लोग नियमित रूप से इतनी रकम कमाते हैं।

‘भीख मांगना बिल्कुल आसान नहीं’

एक्सपेरिमेंट के अंत में दोनों ने माना कि बाहर से आसान दिखने वाला यह काम असल में बेहद थका देने वाला है। घंटों तक अजनबियों के पास जाकर मदद मांगना मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मुश्किल लगा। सचिन को जहां कुछ लोगों ने पैसे देकर मदद की, वहीं कुछ लोगों के खराब व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। दोनों ने लोगों को सलाह दी कि भीख मांगने को कमाई का जरिया बनाने के बजाय मेहनत और ईमानदारी से कमाने की कोशिश करनी चाहिए।

₹4 हजार की कमाई ने छेड़ दी बड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने 8 घंटे में ₹4,000 जमा होने पर हैरानी जताई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगना कुछ लोगों के लिए कमाई का स्थायी जरिया बन गया है।

वहीं, कई यूजर्स ने इस एक्सपेरिमेंट से बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि सिर्फ 8 घंटे का प्रयोग उन लोगों की असली जिंदगी को नहीं दर्शा सकता, जो गरीबी, बेघरपन, बीमारी, दिव्यांगता, शोषण या लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियों के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं।

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जेब में ₹0 कैश, फिर भी घूमेंगे विदेश! देखें कहां काम करेगा भारतीय UPI

कभी भी अब्रॉड ट्रैवल में सबसे बड़ी परेशानी होती है पेमेंट करना। पहले लोगों को कैश बदलवाना पड़ता था या इंटरनेशनल कार्ड साथ रखना पड़ता था। लेकिन अब भारत के लोगों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। कई देशों में UPI से सीधे मोबाइल के जरिए पेमेंट की सुविधा मिलने लगी है, जिससे शॉपिंग करना, होटल का बिल पेमेंट या रेस्टोरेंट में पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

स्पेन की तैयारी 

जल्दी ही स्पेन भी अब वह देश होगा, जहां जाकर भारत के लोग UPI से आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दुकानों पर सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैवल पहले से ज्यादा आसान होगा।

नेपाल और भूटान 

नेपाल और भूटान घूमने जाने वाले भारतीयों के लिए UPI काफी काम की फैसिलिटी है। यहां कई दुकानों, होटलों और आउटलेट पर UPI से पेमेंट किया जा सकता है। इससे करेंसी चेंज करने की परेशानी कम हो जाती है और मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

ग्रीस 

ग्रीस भी कुछ समय पहले UPI फैसिलिटी अपनाने वाले देशों में जुड़ चूका है। अगर आप एथेंस की हिस्टोरिक साइट देखने जाएं या सेंटोरिनी और माइकोनोस आइलैंड की सैर करें, तो कई जगहों पर डिजिटल पेमेंट करने की फैसिलिटी मिल सकती है। इससे शॉपिंग करना और घूमना दोनों आसान हो जाते हैं।

सिंगापुर

सिंगापुर उन देशों में है, जहां भारतीय UPI को अपनाया गया। यहां टूरिस्ट शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और कई जगहों पर आसानी से मोबाइल से पेमेंट कर सकते हैं। इससे बार-बार कैश निकालने या पैसे बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कतर और यूएई

कतर, दुबई और अबू धाबी वाले पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी UPI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर QR कोड स्कैन करके आसानी से पेमेंट किया जा सकता है। इससे ट्रैवल में पेमेंट करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका

फ्रांस यूरोप का पहला देश था, जिसने UPI पेमेंट की शुरुआत की। इसके बाद मॉरिशस और श्रीलंका ने भी यह फैसिलिटी शुरू कर दी थी। अब इन देशों में कई होटल, लोकल मार्केट, बीच, रेस्टोरेंट पर टूरिस्ट आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं। इससे घूमने-फिरने का एक्सपीरियंस आसान बन जाता है।

टूरिस्ट बेनिफिट 

दुनिया के कई देशों में UPI की सुविधा मिलने से भारत के लोग का काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब हर बार फॉरेन करेंसी साथ रखने या इंटरनेशनल कार्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां UPI अवेलेबल है, वहां मोबाइल से QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है। जो भी देश इस फैसिलिटी को अपना रहे हैं, वहां ट्रैवल करना अब आसान और सेफ होता जा रहा है।

UPI : क्या यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा? जानें अपने हर सवाल का जवाब

यूपीआई पेमेंट से जुड़ी कई खबरें आपने देखी होगी। इसकी वजह इससे जुड़े नियमों में कुछ बदलाव है। इन खबरों को देख पेमेंट के लिए रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि यूपीआई से पेमेंट करना अब महंगा हो जाएगा। क्या सच में ऐसा होने जा रहा है? आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेमेंट की सुविधा पूरी तरह से फ्री रहेगी। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त को यह साफ कर दिया था। उसने कहा था कि यूपीआई कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना बना रहेगा। साथ ही छोटे दुकानदारों को भी यूपीआई से से पेमेंट लेने पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी।

अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe के सीईओ समीर निगम ने भी यह बात साफ कर दी है। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया ऐप X पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि यूपीआई पेमेंट्स कंज्यूमर्स के लिए फ्री बना रहेगा। दरअसल, लोकसभा में नया टैक्स अमेंडमेंट बिल पारित होने के बाद इस बारे में कनफ्यूजन बढ़ा है।

कुछ खास यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का प्रस्ताव है। इससे कंज्यूमर्स के बीच कनफ्यूजन बढ़ा है। कई कंज्यूमर्स को लगता है कि उब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। हालांकि, पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है। उसने कहा है कि अगर कहीं मर्चेंट सर्विस चार्ज लगता है तो यह मर्चेंट्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच का अरेंजमेंट है। इसका मतलब यह नहीं है कि कंज्यूमर्स को डिजिटल पेमेंट के लिए कोई चार्ज देना होगा।

PCI ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई चार्ज लगने वाला होगा तो उसका पेमेंट कमर्शियल अरेंजमेंट के तहत मर्चेंट को करना होगा। यह चार्ज कंज्यूमर्स यानी यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले आम आदमी से नहीं लिया जाएगा। दरअसल, टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के कुछ खास तरीकों पर एमडीआर लगाने का अधिकार सरकार को मिल गया है।

इस बिल के तहत 2,000 रुपये के कुछ खास बिजनेस-डायरेक्टेड यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.25 से 0.4 फीसदी चार्ज लगाने का प्रस्ताव है। लेकिन, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाला पेमेंट इस लेवी के दायरे में नहीं आएगा। इसका मतलब है कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क कुछ ट्रांजेक्शंस के लिए मर्चेंट या बिजनेसेज के लिए है।

मर्चें डिस्काउंट रेट (MDR) एक तरह की फीस है, जो डिजिटल पेमेंट से जुड़ी है। आम तौर पर यह फीस मर्चेंट उन कंपनियों को चुकाता है जो ट्रांजेक्शन की प्रोसेसिंग में शामिल होती हैं। जहां तक यूपीआई की बात है तो अभी तक ज्यादातर ट्रांजेक्शंस बगैर एमडीआर के होते रहे हैं। इसका मतलब है कि इनमें मर्चेंट्स को कोई फीस नहीं चुकानी पड़ी है। इस ईकोसिस्टम पर आने वाले खर्च का बोझ बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे पार्टिसिपेंट्स उठाते आ रहे हैं।

क्या UPI पेमेंट पर आपको देना होगा चार्ज और कटेगा आपका पैसा? करोड़ों यूजर्स के लिए Payments Council of India ने दिया बड़ा अपडेट

UPI Payment Update: देश में डिजिटल पेमेंट का आधार बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा? इस पूरे विवाद और चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डिटेल्ड Q&A शेयर कर कई जरूरी चीजों पर स्थिति साफ की है। हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक PCI और केंद्र सरकार दोनों ने साफ कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त है और रहेगा। इस पूरी बहस का मुख्य केंद्र उपभोक्ता नहीं बल्कि भारत के इस विशाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने पर आने वाली लागत है।

आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI रहेगा बिल्कुल फ्री

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के मुताबिक UPI के इस्तेमाल और UPI पेमेंट्स स्वीकार करने के बीच के फर्क को समझना जरूरी है। 2016 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक आम यूजर्स के लिए UPI पूरी तरह से फ्री रहा है। कस्टमर बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। किराना दुकानों सहित देश के छोटे व्यापारियों के लिए भी UPI पेमेंट स्वीकार करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगता है। भारत के सबसे छोटे व्यवसायों तक डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाए रखना इस प्लेटफॉर्म के विस्तार का मुख्य आधार रहा है।

फ्री होने के बावजूद क्यों उठ रहे हैं फंडिंग और लागत से जुड़े सवाल?

अगर ग्राहकों और छोटे व्यापारियों से कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है, तो फिर UPI पर खर्च कौन उठा रहा है? PCI ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह सेवा यूजर्स के लिए मुफ्त है लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर मुफ्त में काम नहीं करता। UPI इकोसिस्टम को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, कंप्लायंस, कस्टमर सपोर्ट और इनोवेशन में लगातार इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, पेमेंट कंपनियों, फिनटेक फर्मों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिलकर इस नेटवर्क को बनाने और इसे बनाए रखने में भारी निवेश किया है। PCI के मुताबिक यह बहस किसी यूजर के रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के बारे में नहीं है बल्कि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ने के साथ पेमेंट सिस्टम के सस्टेनेबल फंडिंग को लेकर है।

मर्चेंट सर्विस चार्ज को लेकर क्या है स्थिति?

सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मर्चेंट सर्विस चार्ज (जहां लागू हो) व्यापारियों और उनके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच की वाणिज्यिक व्यवस्था होती है। ऐसे किसी भी शुल्क का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम ग्राहकों को UPI का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे। UPI अब सिर्फ एक पेमेंट ऑप्शन नहीं रह गया है बल्कि यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसका इस्तेमाल करोड़ों आम लोग और बिजनेस कर रहे हैं। 24×7 सुरक्षित, मजबूत और बिना किसी बाधा के सर्विस देने के लिए साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर लगातार फंडिंग की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण और संसद का नया विधेयक

UPI पर MDR और चार्जेस को लेकर हाल ही में उठी आशंकाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर कभी MDR पेश किया भी जाता है तो वह मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। यह स्पष्टीकरण टैक्सेशन और दूसरे कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद पैदा हुई चिंताओं के जवाब में आया है। हालांकि इस विधेयक के तहत UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR या नई फीस लागू नहीं की गई है। यह बिल सिर्फ एक कानूनी ढांचा तैयार करता है, जो सरकार को भविष्य की अधिसूचनाओं के माध्यम से मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था में संशोधन करने का अधिकार देता है।

MDR क्या होता है और आगे क्या होगा?

MDR वह शुल्क होता है जो पेमेंट लेने वाला व्यापारी देता है, न कि पेमेंट करने वाला ग्राहक। आमतौर पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाले अधिग्रहणकर्ता बैंक, जारीकर्ता बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाता है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम अपग्रेडेशन के बढ़ते खर्चों पर चिंता जताई है। वित्त मंत्री ने जानकारी दी है कि संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद ही NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस मुद्दे की समीक्षा करेगी। फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है और जीरो-कॉस्ट पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

‘UPI पेमेंट के लिए ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को स्पष्ट किया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापारियों (Merchants) पर होगा। आम UPI यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका फायदा आखिरकार सभी UPI यूजर्स को मिलेगा।

अभी MDR पर अंतिम फैसला नहीं

निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर MDR लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला UPI और NPCI की सर्विसेज स्टीरिंग कमेटी करेगी।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब संसद टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित करेगी। इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

कांग्रेस ने क्या कहा था?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि नया विधेयक UPI ट्रांजैक्शन को फीस-मुक्त रखने वाली कानूनी गारंटी को खत्म कर देगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में सभी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि आम लोगों को भविष्य में UPI इस्तेमाल करने के लिए भी शुल्क देना पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने दावे को बताया गलत

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के दावों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर संसद के भीतर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि गलतफहमियां फैलानी चाहिए। उनके मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है जिससे UPI यूजर्स पर कोई शुल्क लगाया जाए।

RBI गवर्नर ने क्या कहा था

UPI पर MDR को लेकर बहस RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान के बाद तेज हुई। इसमें  उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की एक लागत होती है और किसी न किसी को इसका बोझ उठाना होगा। हालांकि, उन्होंने साफ संकेत नहीं दिया था कि इसका बोझ कौन उठाएगा।

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क्या UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा? आखिर पेमेंट सिस्टम का बोझ कौन उठाएगा, RBI गवर्नर ने समझाया

UPI Payment Charge: क्या आने वाले समय में ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज लग सकता है? इस सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने साफ किया कि पेमेंट सिस्टम चलाने की लागत किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है। अब यह सरकार उठाएगी, कारोबारी या किसी और पर इसका बोझ आएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

क्या अभी UPI पर कोई चार्ज लगेगा?

अभी नहीं। सरकार ने ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है। टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में भी UPI पर MDR लगाने या ₹2,000 की सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार कारोबारियों को किए जाने वाले ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.5% से कम MDR की अनुमति दे सकती है। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले कारोबारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता।

बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

अभी कानून के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे कुछ डिजिटल पेमेंट मोड पर MDR नहीं लगाया जा सकता। नए बिल में सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह तय करे किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर जीरो-MDR जारी रहेगा और किन पर नहीं।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो सरकार बाद में अलग से नियम बनाकर कुछ कैटेगरी के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू कर सकती है।

₹2,000 की सीमा क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का सिर्फ करीब 5% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू लगभग 65% है। इसलिए सरकार इस कैटेगरी पर MDR लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इस सीमा या दर को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सरकार ने पहले MDR क्यों हटाया था?

सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को जीरो कर दिया था। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था। बाद में बैंकों और पेमेंट कंपनियों को कुछ ट्रांजैक्शन पर प्रोत्साहन राशि भी दी गई।

हाल के महीनों में संसदीय समिति, बैंक और पेमेंट कंपनियां यह मांग कर रही हैं कि UPI नेटवर्क चलाने की लागत के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल बनाया जाए। फिलहाल अंतिम फैसला सरकार को ही करना है।

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